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हिंडनबर्ग ने दुकान क्यों बंद की? पढ़िए इस सप्ताह का 'हिसाब किताब'
फिर भी सवाल बना हुआ है कि एंडरसन ने अचानक कंपनी क्यों बंद कर दी? उनका बिज़नेस मॉडल था गड़बड़ी की आशंका वाली कंपनियों की रिसर्च करना।
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।। 1 year ago
मिलिंद खांडेकर, वरिष्ठ पत्रकार।
हिंडनबर्ग में दो साल पहले अदाणी ग्रुप को हिला कर रख दिया था। उसकी रिसर्च रिपोर्ट से अदाणी आज भी उबर नहीं पाए हैं। उनके शेयरों की क़ीमत यानी मार्केट कैपिटलाइज़ेशन आज भी दो साल के मुक़ाबले 6 लाख करोड़ रुपये कम है। दो दिन पहले यह ख़बर आयी कि हिंडनबर्ग के संस्थापक नैथन एंडरसन ने कंपनी बंद कर दी है तो अदाणी के शेयरों में तेज़ी आ गई। आज हिसाब किताब में चर्चा करेंगे कि क्या अदाणी की मुश्किलें ख़त्म हो गई है? पहले समझ लेते हैं कि हिंडनबर्ग रिपोर्ट ने अदाणी ग्रुप को कैसे हिला दिया था?
जनवरी 2023 में गौतम अदाणी दुनिया के तीसरे सबसे धनी व्यक्ति थे और हिंडनबर्ग की रिपोर्ट आने के बाद अब उनकी गिनती पहले 15 में भी नहीं होती है। उनकी संपत्ति शेयरों की क़ीमत में बढ़ोतरी के कारण बढ़ी थी। हिंडनबर्ग ने उसे ही पंचर कर दिया था। रिपोर्ट के मुताबिक़ शेयरों की क़ीमत 85% से ज़्यादा है। हेराफेरी से शेयरों के दाम बढ़वाए। 2.20 लाख करोड़ रुपये का भारी क़र्ज़ हैं। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट में केस लगा।
शेयर बाज़ार की देख रेख करने वाले SEBI ने जाँच की, लेकिन उसमें कुछ नहीं निकला। इसके बाद हिंडनबर्ग ने SEBI चीफ़ माधवी पुरी बूच को ही घेर लिया। बूच पर आरोप लगा कि उन्होंने उसी विदेशी फंड में पैसे लगाए थे जिसमें गौतम अदाणी के भाई विनोद के पैसे लगे थे। उनका भी कुछ नहीं बिगड़ा। उनका कार्यकाल इस साल मार्च तक है। अदाणी भारत में कोर्ट कचहरी से बच गए लेकिन अमेरिका में फँस गए। अमेरिका की जाँच एजेंसी FBI और शेयर बाज़ार रेगुलेटर SEC ने उन पर भारत में सरकारी अधिकारियों को बिजली सप्लाई का ठेका उठाने के लिए रिश्वत देने का आरोप लगाया है।
हिंडनबर्ग भले ही बंद हो गया, यह केस अभी चल रहा है। यह केस क्या दिशा लेता है वो देखना होगा। इसमें तीन ऑप्शन है, सजा हो जाएँ, बरी हो जाएँ या फिर जुर्माना देकर समझौता कर लें। फिर भी सवाल बना हुआ है कि एंडरसन ने अचानक कंपनी क्यों बंद कर दी? उनका बिज़नेस मॉडल था गड़बड़ी की आशंका वाली कंपनियों की रिसर्च करना। रिपोर्ट जारी करने से पहले उस कंपनी के शेयरों को शॉर्ट सेलिंग करना। हम समझते आए हैं कि शेयर बाज़ार में पैसे बनाने का एक ही तरीक़ा है कि आपने किसी कंपनी के शेयर मान लीजिए ₹100 में ख़रीदें और दाम ₹150 पर बेच दिए।
आपको ₹50 फ़ायदा हुआ। इसे लॉंग पोजिशन कहते हैं। शॉर्ट पोजिशन में हिंडनबर्ग ने कंपनी A से अदाणी के एक महीने के लिए शेयर उधार लिए है और कंपनी B बेच दिए हैं। मान लीजिए अभी एक शेयर ₹100 का है, इसी भाव में उसने B को बेचे है। हिंडनबर्ग को भरोसा है कि अदाणी के भाव गिरेंगे। मान लीजिए महीने भर में शेयर का भाव ₹80 हो गया तो हिंडनबर्ग उसे बाज़ार से ख़रीदेगा और कंपनी A को लौटा देगा।
उसे हर शेयर पर ₹20 का मुनाफ़ा होगा। हिंडनबर्ग ने अदाणी ग्रुप पर शॉर्ट दांव खेला। कंपनी बंद होने को सोशल मीडिया पर लोग इसे डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति बनने से भी जोड़ कर देख रहे हैं। लेकिन एंडरसन ने दावा किया है कि उन्हें कोई धमकी नहीं मिली है, वो कई बड़ी कंपनियों को हिला चुके हैं। 100 से ज़्यादा लोगों पर उनकी रिपोर्ट के आधार पर मुक़दमे चल रहे हैं। वो जाँच पड़ताल के तरीक़े सबके साथ साझा करेंगे ताकि कंपनियों की पोल खोल का काम सब कर सकें।
अदाणी ग्रुप ने हिंडनबर्ग के बंद होने पर तो कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है लेकिन ग्रुप CFO रॉबी सिंह ने सोशल मीडिया पर पर पोस्ट किया है कितने ग़ाज़ी आएँ, कितने ग़ाज़ी गए। इसका आशय तो यह है कि अदाणी का कोई कुछ बिगाड़ नहीं सकता है।
( यह लेखक के निजी विचार हैं )
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