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अमेरिका के निशाने पर अंबानी क्यों: पढ़िए इस सप्ताह का 'हिसाब किताब'

स्कॉट बेसेंट अमेरिका के ट्रैजरी सेक्रेटरी यानी वित्त मंत्री हैं। जबकि पीटर नवारो राष्ट्रपति ट्रंप के ट्रेड एडवाइज़र, इन दोनों ने नाम लिए बिना मुकेश अंबानी पर निशाना साधा है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो ।। 5 months ago

मिलिंद खांडेकर, वरिष्ठ पत्रकार।

भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील फँसी हुई है। अमेरिका अब तक भारत पर दो तरह से टार्गेट करता रहा है। पहली शिकायत यह है कि भारत ‘टैरिफ़ किंग’ है यानी भारत में अमेरिकी सामान पर बहुत ज़्यादा टैरिफ़ लगाया जाता है, और दूसरी शिकायत यह है कि भारत रूस से तेल ख़रीदकर यूक्रेन युद्ध लड़ने में उसकी मदद कर रहा है। इसी कारण अमेरिका ने भारत पर 25% अतिरिक्त टैरिफ़ लगाया है।

भारत का कहना है कि हम तो अमेरिका के कहने पर ही तेल ख़रीद रहे थे ताकि दुनिया के बाज़ार में दाम न बढ़े। भारत और अमेरिका के ट्रेड वॉर के बीच पिछले हफ़्ते से अमेरिकी अधिकारियों के निशाने पर अप्रत्यक्ष रूप से भारत के सबसे धनी व्यक्ति मुकेश अंबानी हैं। उनका आरोप है कि रूसी तेल से अंबानी की कंपनी रिलायंस को फ़ायदा हुआ है, हालांकि रिलायंस के सूत्र इन आरोपों को ग़लत बताते हैं।

अमेरिका के ट्रैजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट और राष्ट्रपति ट्रंप के ट्रेड एडवाइज़र पीटर नवारो ने नाम लिए बिना अंबानी पर निशाना साधा। बेसेंट ने CNBC को कहा कि भारतीय रिफाइनरी कंपनियाँ रूस से सस्ता तेल ख़रीदकर उसे महंगे दाम पर पेट्रोल-डीज़ल बनाकर बेचती हैं, जिससे उन्हें 16 बिलियन डॉलर (करीब 1.32 लाख करोड़ रुपये) का अतिरिक्त मुनाफ़ा हुआ और इसका लाभ कुछ अमीर परिवारों को हुआ।

नवारो ने फ़ाइनेंशियल टाइम्स में लिखा कि रूस के तेल का मुनाफ़ा भारत के राजनीतिक रूप से जुड़े परिवारों को मिलता है, जो अंततः पुतिन को लड़ाई लड़ने में मदद करते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि रूस के सस्ते तेल से भारतीय जनता की गाड़ियाँ नहीं चल रहीं बल्कि कुछ बड़े लोग ही फ़ायदा उठा रहे हैं। हालाँकि दोनों अधिकारियों ने अंबानी का नाम नहीं लिया, लेकिन Bloomberg ने अपनी रिपोर्ट में इन बयानों को उनसे जोड़ते हुए हेडलाइन दी कि भारत-अमेरिका की लड़ाई में मुकेश अंबानी फँस गए हैं।

पहले से रिपोर्ट्स में लिखा था कि रूस के सस्ते तेल से भारत में जनता से ज़्यादा इंडियन ऑयल और रिलायंस जैसी कंपनियों को लाभ हुआ। 2021 तक भारत रूस से लगभग तेल नहीं ख़रीदता था, लेकिन अब इसका हिस्सा 35–40% तक पहुँच गया है और यह तेल 10–12 डॉलर प्रति बैरल सस्ता पड़ता था। जनता को इसका पूरा फ़ायदा नहीं मिला, क्योंकि सस्ते रूसी तेल के चलते पेट्रोल के दाम दिल्ली में ₹85 प्रति लीटर होने चाहिए थे जबकि अब भी ₹95 प्रति लीटर हैं, जबकि कच्चे तेल के दाम युद्ध की शुरुआत में 112 डॉलर प्रति बैरल से घटकर 71 डॉलर पर आ चुके हैं।

इसका फ़ायदा सरकारी और प्राइवेट तेल कंपनियों को हुआ। फ़ाइनेंशियल टाइम्स के मुताबिक़ 16 बिलियन डॉलर यानी 1.32 लाख करोड़ रुपये का मुनाफ़ा कंपनियों ने कमाया, जिसमें से 50 हज़ार करोड़ रुपये रिलायंस इंडस्ट्रीज़ के हिस्से में आए। रिलायंस का कहना है कि कमोडिटी का कारोबार साइकल में चलता है, कभी मार्जिन बढ़ता है तो कभी घटता है, किसी विशेष घटना से फ़ायदे को जोड़ना सही नहीं है।

मुकेश अंबानी पर अमेरिकी अधिकारियों का इस तरह से निशाना बनाना चौंकाने वाला है क्योंकि अल जज़ीरा की रिपोर्ट के मुताबिक़ रिलायंस ने रूस के तेल से बना 42% पेट्रोल-डीज़ल उन्हीं देशों को बेचा जिन्होंने रूस पर प्रतिबंध लगाए हुए थे। जिसमें अमेरिका भी शामिल है ,और अब वही अमेरिका शोर मचा रहा है।

( यह लेखक के निजी विचार हैं )


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