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अग्निवीर का अपमान करने वाले ‘बयानवीर’ कौन?: पशुपति शर्मा

इसमें कोई संदेह नहीं कि देश के लिए दिए जाने वाले सर्वोच्च बलिदान की भरपाई कभी भी किसी आर्थिक पैकेज से नहीं की जा सकती।

समाचार4मीडिया ब्यूरो 2 years ago

पशुपति शर्मा, कार्यकारी संपादक (इंडिया न्यूज)

शहीदों की मजारों पर जुड़ेंगे हर बरस मेले, वतन पर मरनेवालों का यही बाकी निशां होगा। देश के लिए मर-मिटने वाले हर वीर जांबाज के आखिरी सलाम में ये बोल गूंज उठते हैं। महाराष्ट्र के बुलढाणा में जब अग्निवीर गवाते लक्ष्मण का पार्थिव शरीर पहुंचा तो एक बार फिर ये बोल लोगों की जुबां पर आ गए। देश के लिए मरने-मिटने वाले गवाते लक्ष्मण को लोगों ने आखिरी सलाम किया। देश के लिए मर मिटने का जज्बा और जुनून ही है जो याद रह जाता है। ये लाइनें आपको याद हैं लेकिन बहुत कम लोगों को इन पंक्तियों के रचयिता का नाम याद है। इन पंक्तियों के लेखक हैं जगदंबा प्रसाद मिश्र हितैषी, जिन्होंने शहीदों को सलाम करते वक्त उनकी धन-राशि नहीं पूछी, देशभक्ति के भावों का तूफान महसूस किया, जज्बा देखा लेकिन आज सियासत का तकाजा कुछ ऐसा है कि ऐसे भावुक लम्हों में भी नेताओं की ज़ुबान पर विवादों के बोल आ जाते हैं।

अग्निवीर गवाते लक्ष्मण ने सियाचिन में ड्यूटी के दौरान अपनी जान देश के नाम क़ुर्बान कर दी। काराकोरम रेंज में लगभग 20,000 फीट की ऊंचाईयों पर ये देश के पहले अग्निवीर की शहादत है। देश अग्निवीर गवाते लक्ष्मण के इस अमर-बलिदान को नमन कर रहा है लेकिन ऐसे वक्त में सोशल मीडिया पर कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने सवाल उठा दिया। जिस वक्त गवाते लक्ष्मण को सेना के जांबाज साथी सैल्यूट कर रहे थे, उस वक्त राहुल गांधी इस सवाल का जवाब मांग रहे थे कि अग्निवीरों को ग्रेच्युटी क्यों नहीं, सैन्य सुविधाएं क्यों नहीं, शहीद परिवार को पेंशन क्यों नहीं? जिस वक्त बुलढाणा के पिंपलगांव सराय गांव में लोग अपने प्यारे लक्ष्मण को पूरे सम्मान के साथ विदाई दे रहे थे, उस वक्त कांग्रेस नेता अग्निवीर को भारत के वीरों के अपमान की योजना बता रहे थे।

इसमें कोई संदेह नहीं कि देश के लिए दिए जाने वाले सर्वोच्च बलिदान की भरपाई कभी भी किसी आर्थिक पैकेज से नहीं की जा सकती। सेना ने अपने जांबाज को सलाम किया। सोशल मीडिया पर वो रकम भी बार-बार शेयर की गई, जो अग्निवीर गवाते लक्ष्मण के परिवार को मिलेगी। इसमें बीमा की राशि- 48 लाख रूपये,  अनुग्रह राशि- 44 लाख  रुपये, चार साल के कार्यकाल की बाकी बची सैलरी 13 लाख रुपये, आर्म्ड फ़ोर्स केजुअल्टी फंड से 8 लाख रुपये और सेवा निधि में अग्निवीर की जमा राशि के अलावा सरकार की ओर से जमा अंशदान भी परिवार को मिलेगा। लेकिन ये सारा गणित उस परिवार के लिए बेमानी है, जिसने अपने अजीज को खोया है। इस राशि को वक्त के साथ बढ़ाया जाना चाहिए और हो सकता है देर-सवेर सरकार इस बारे में कोई बड़ा फैसला भी ले। लेकिन भारत के आम लोगों के लिए भावनात्मक मौकों पर ये सियासी लड़ाई कहीं ज्यादा दुखदायी साबित होती है।

सवाल कितने भी अहम क्यों न हों, वक्त की नजाकत को समझना उससे कहीं ज्यादा जरूरी है। ऐसा नहीं है कि ये सवाल इससे पहले नहीं उठे। जब अग्निवीर योजना आई तो विपक्ष ने बयानों के तीर चलाए। मामला कोर्ट कचहरी तक पहुंचा। संसद से सड़क तक संग्राम का दौर चला। आखिर में देश की सर्वोच्च अदालत ने भी अग्निवीर योजना पर मुहर लगा दी। सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा कि इस योजना में मनमानी जैसी कोई बात नहीं। सार्वजनिक हित और राष्ट्रहित में लिए गए फैसले पर विवाद कोर्ट की टिप्पणी के साथ ही थम जाना चाहिए था लेकिन अफसोस ऐसा हो नहीं सका। विधानसभा चुनावों के बीच हो सकता है ऐसे बयानों से कुछ सियासी हित सधते हों लेकिन तकाजा तो यही है कि पार्टी हित को देश हित में क़ुर्बान करने का साहस जरूर दिखाना चाहिए।

 (साभार- इंडिया न्यूज दैनिक अखबार)


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