कमलजी ने हिंदी पत्रकारिता में सरोकारों व मूल्यों की आखिरी सांस तक रक्षा की: राजेश बादल

अभी कोई 15 दिन पहले उनसे फोन पर बात हुई। वे माउंट आबू में थे। उनका व्यक्तित्व प्रजा पिता ब्रह्मकुमारी विश्वविद्यालय के संपर्क में विलक्षण और अलौकिक हो गया था।

Last Modified:
Thursday, 11 March, 2021
kamal54545


यकीन नहीं आता, लेकिन सच तो यही है कि कमल दीक्षित जी वहां चले गए, जहां से लौटकर कोई नहीं आता। भारतीय हिंदी पत्रकारिता में सरोकारों और मूल्यों की आखिरी...
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