वे समुद्र की तीन दिनों तक प्रार्थना करते हैं। विनय न मानत जलधि जड़ गए तीन दिन बीति बोले राम सकोप तब भय बिनु होहिं न प्रीति। यह उनके धैर्य का उच्चादर्श है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।