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वाकई धाकड़ पत्रकार थे एस.ए अस्थाना

बड़े-बड़े दिग्गजों से जुड़ी ऐसी स्टोरी निकालकर लाते थे कि लोग हैरान रह जाते थे

समाचार4मीडिया ब्यूरो 6 years ago

एसए अस्थाना चले गए। लखनऊ स्थित अपने ही घऱ में अचानक उन्हें ब्रेन हैमरेज हुआ, एक झटके में दुनिया छोड़ दी। हिंदी पत्रकारिता का इतिहास चाहे जितनी बार लिख लिया जाए, लेकिन शायद ही उसमें एसए अस्थाना यानी शिव आसरे अस्थाना का नाम शामिल हो। एसएस अस्थाना कभी मुख्यधारा के पत्रकार नहीं रहे, जिंदगी गुजार दी इस मुगालते में कि असली मुख्यधारा वही है, जहां वो खड़े हैं।

नवंबर 1996 में हमारी पहली मुलाकात हुई थी विचार मीमांसा के दफ्तर में लखनऊ में। तब वो आए थे, मेरे पास एक स्टोरी लेकर। एक चीफ इंजीनियर का पूरा कच्चा चिट्ठा था। सारे सबूत, सारी तस्वीरों के साथ। बातचीत आगे बढ़ी तो उन्होंने बताया कि 'प्रेडीकेट न्यूज' नाम से उनकी पत्रिका छपती थी, जो आर्थिक वजहों से बंद हो गई। वो स्टोरी मैंने एडिट करने और तथ्यों की जांच पड़ताल करने के लिए संजय दीक्षित को दी।

दो महीने बाद विचार मीमांसा बंद हो गई थी, पत्रिका के प्रकाशन पर रोक लगी थी, हम इस आस में थे कि पत्रिका शुरू होगी। इधर अस्थाना ने फिर से अपनी पत्रिका शुरू कर ली थी। पत्रिका क्या थी आग का गोला थी। कई मायने में विचार मीमांसा से चार कदम आगे, लेकिन साज सज्जा, भाषा-शैली में थोड़ी दोयम दर्जे की थी। बहरहाल अस्थाना से बातचीत, मुलाकात होती रही। एक वक्त आया, जब विचार मीमांसा से हम लोग इस्तीफा देकर लखनऊ आ गए। तब अस्थाना मेरे पास आए थे, उन्होंने ऑफर दिया था कि आप मेरी पत्रिका के संपादक बनिए, मैं बस स्पेशल करेस्पांडेंट रहूंगा। आर्थिक तंगी रहने नहीं दूंगा। ऑफर अच्छा, लेकिन कुछ ज्यादा ही खतरनाक था।

रास्ते अलग थे, लेकिन सरोकार बना हुआ था। अस्थाना की पत्रिका मासिक थी, लेकिन कभी महीने में एक छपती थी, तो कभी दो महीने में। सब कुछ अस्थाना, रिपोर्टर, फोटोग्राफर, संपादक, मालिक, प्रकाशक...सब कुछ, वन मैन शो। गजब का हौसला था। बड़े-बड़े दिग्गजों की ऐसी खोजबीन वाली स्टोरी, अंदर की ऐसी-ऐसी बातें, जिसने भी देखा हैरान रह गया। हमारे साथी फोटोग्राफर ज्ञान प्रकाश पहली बार अस्थाना के साथ जुड़े और साफ देखा कि कैसे ये शख्स जान हथेली पर रखकर पत्रकारिता करता है।

मुझे याद है कि अस्थाना ने मायावती पर एक बड़ी स्टोरी छापी थी, जिसमें एक बॉक्स की हेडिंग थी-'मायावती मां ही नहीं नानी भी हैं।' मायावती की जिंदगी के तमाम चौंकाने वाले राज थे उस स्टोरी में। श्रीराम अरुण यूपी के डीजीपी थे, उनके खिलाफ अस्थाना ने पूरी सीरीज छाप दी। श्रीराम अरुण को कुर्सी से हाथ धोना पड़ा। मार्कंडेय चंद यूपी के दबंग मंत्री थे, उनके घर-घाट की रिपोर्ट ले आए, वहां तो बड़ी मुश्किल से अस्थाना और ज्ञान प्रकाश की जान बची। बाद में अस्थाना ने अपनी मैग्जीन का नाम प्रखर विचार कर लिया। नाम नया, लेकिन तेवर वही पुराना।

अस्थाना निहायत ही अक्खड़, गरगराती आवाज में बोलने वाले, निर्भीक, किसी के आगे न झुकने वाले, कभी न दबने वाले पत्रकार थे। अपनी हेकड़ी, दुस्साहस के चलते कई बार उनके दुश्मनों ने उन पर जानलेवा हमला भी किया, कई बार उनकी पिटाई हुई, जेल तक गए। हम लोग समझाते तो कहते-विकास जी, जिंदगी का क्या है, एक दिन तो जानी ही है, फिर क्या मोह। जब तक जिएंगे, शान से जिएंगे, सिर उठाकर जिएंगे। कई बार मुस्कुराकर कहते, ‘विकास जी, आपको मैं गुरु मानता हूं, लेकिन आपने मेरा साथ देने की बजाय बनियों की नौकरी कर ली।‘

पिछले कई महीनों पर फेसबुक पर अक्सर अस्थाना टकरा जाते थे। चैट होती। अभी दो दिन पहले, जब मैंने अपनी भतीजी नीरू के नौकरी जॉइन करने की पोस्ट डाली थी तो उस पर अस्थाना ने कमेंट भी किया था। कल रात उनके साथी विमलेश शुक्ल जी ने अस्थाना के देहांत की सूचना दी। सबसे दुखद तो ये है कि 30 तारीख को अस्थाना की बेटी की शादी थी। दो बेटे भी हैं, परिवार ने वैसे भी अस्थाना जैसा मुखिया पाकर बहुत कुछ झेला था, अब आगे उनका कौन सहारा होगा, भगवान जाने। मुझे नहीं लगता कि अपने पीछे अस्थाना ने कोई दौलत छोड़ी होगी या ऐसा मजबूत दोस्त छोड़ा होगा, जो परिवार को संभाल ले।

50 साल की उम्र तक अस्थाना किसी के आगे झुके नहीं, गिड़गिड़ाए नहीं, दया के पात्र भी नहीं बने, गए भी तो ऐसे कि किसी को पता नहीं चला। कल से ही मन व्यथित है, जाने कब, कैसे किसके लिए ऊपर वाले का कॉल लेटर आ जाए। शिव आसरे अस्थाना को मेरी हार्दिक श्रद्धांजलि, ईश्वर उनकी आत्मा को शांति दे।  उनके घर वालों को ये दुख उठाने की ताकत दे। अस्थाना जी, देर सबेर, मुलाकात तो वहीं होगी, इंतजार कीजिएगा। फेसबुक पर अभी भी एसए अस्थाना की प्रोफाइल है, उनका लिखा पढ़ना हो, उनका तेवर देखना हो तो आप वहां देख सकते हैं, सहमत भले ही न हों, लेकिन दुस्साहस पर हैरान जरूर होंगे।

(वरिष्ठ पत्रकार विकास मिश्र की फेसबुक वॉल से, ये पोस्ट उन्होंने 5 साल पहले लिखी थी, आज उन्होंने उसे दोबारा शेयर किया है। )


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