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राजीव मित्तल जी ऐसे संपादक थे, जो बेबाक, लोकतांत्रिक और बड़े दिल वाले थे: संजय श्रीवास्तव

राजीव मित्तल जी का जाना उदास करने वाला है। ‘हिंदुस्तान’, मेरठ में पहली बार उनसे मुलाकात हुई। साथ में काम करने का मौका मिला।

समाचार4मीडिया ब्यूरो 4 years ago

राजीव मित्तल जी का जाना उदास करने वाला है। ‘हिंदुस्तान’, मेरठ में पहली बार उनसे मुलाकात हुई। साथ में काम करने का मौका मिला। वह ऐसे संपादक थे, जो बेबाक, लोकतांत्रिक और बड़े दिल वाले थे। असहमतियां भी हुईं, लेकिन क्या मजाल कभी इसे बुरा माना। मैं पहली बार किसी अखबार में न्यूज एडिटर बना था। नवीन जोशी जी ने सितंबर 2008 में मेरठ में ‘हिंदुस्तान’ में जॉइन करने को कहा। परिवार नोएडा में छोड़कर मेरठ गया, हालांकि मेरठ गृहनगर था।

संपादकों के बारे में देखता-सुनता आया था कि वे न्यूज एडिटर्स को आमतौर पर अधिकार देना पसंद नहीं करते। इससे उलट राजीव जी ने बखूबी न्यूज एडिटर को उसके पूरे अधिकार दिए। खुलकर काम का मौका भी। वह अपने आप में अनोखे ही थे। बगैर लागलपेट के बात कहने वाले। टीम के अच्छे साथियों को मौका देने वाले। मैं करीब 09 महीने मेरठ में रहा, फिर ट्रांसफर कराकर दिल्ली आ गया। फिर उनसे ज्यादा संपर्क नहीं रहा। पिछले 12 सालों से 06 अप्रैल पर मैं उनको फेसबुक पर जन्मदिन की बधाई देता था। अगले दिन वह मुझको।

फेसबुक के माध्यम से मैंने उनके पैने लेखन को ज्यादा जाना। वाकई गजब लिखते थे। बेखौफ, बेफिक्र और मस्तमौला। उनका जाना दुखद है। मार्च से लेकर अब तक अपने कई प्रिय और पारिवारिक जनों को खो चुका हूं। उदासी ज्यादा हो गई है।

(वरिष्ठ पत्रकार संजय श्रीवास्तव की फेसबुक वॉल से साभार)


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