सत्ता की तलवार लटकी होने पर भी पत्रकारिता संभव: आलोक मेहता

केंद्र और राज्यों की सरकारें एजेंसी की ख़बरों के टेलीप्रिंटर अपने दफ्तरों में लगाने के लिए हर महीने जो पैसा देती थी, वह आमदनी का प्रमुख स्रोत होता था।

Last Modified:
Monday, 07 July, 2025
alokmehta


आलोक मेहता, पद्मश्री, वरिष्ठ पत्रकार, लेखक। आपात काल ( इमरजेंसी ) में बड़े पैमाने पर राजनीतिक अत्याचार , गिरफ्तारियों , सेंसरशिप की चर्चा 50 वर्षों के...
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