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क्या सच में आर्टिफिशियली इंटेलिजेंस हमारी दुनिया बदल रहा है?
नए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस राइटिंग टूल्स (AI writing tools), जिसे लेकर लगता है कि यह अचानक से प्रकट हो गया है। इस टूल्स को लेकर हर तरफ चर्चा है
समाचार4मीडिया ब्यूरो 2 years ago
FIPP के प्रेजिडेंट व सीईओ James Hewes 'चैटजीपीटी' (ChatGPT) का परीक्षण करने के बाद अपने अनुभव को साझा करते हुए कहते हैं कि कुछ हफ्ते पहले मैंने अपने वार्षिक FIPP वर्ल्ड मीडिया कांग्रेस के लिए अपनी स्पीच लिखकर कुछ तैयारी करने की सोची, जो जून में पुर्तगाल में होना है। वैसे तो मैं खड़ा होता और इंडस्ट्री की स्थिति व पिछले एक साल में FIPP की उपलब्धियों के बारे में कुछ शब्द कहता।
नए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस राइटिंग टूल्स (AI writing tools), जिसे लेकर लगता है कि यह अचानक से प्रकट हो गया है। इस टूल्स को लेकर हर तरफ खूब चर्चा है और इसे काफी अंटेशन भी मिल रही है। लिहाजा मैंने सोचा कि मैं चैटजीपीटी (ChatGPT) का परीक्षण करूंगा और इसके जरिए ही अपना भाषण लिखूंगा। हालांकि इसे चुने जाने और कम समय में गहन सोच विचार के बाद इसने अचानक तेजी से टेक्स्ट लिखा, जो लगभग 350 शब्दों की स्पीच थी। पहली नजर में लगा कि यह काफी सही तरीके से लिखा गया था, जिसमें बदलाव की कुछ गुंजाइश दिखी। लेकिन हम प्रकाशन की शक्ति को समझते हैं। पहते तो मैं यह सोचकर बैठ गया कि कार्य पूरा हो गया और मुझे अपने आप पर भी काफी गर्व महसूस हुआ।
लेकिन जो कंप्यूटर ने लिखा था, उसे फिर से मैंने पढ़ना शुरू किया। इसे पढ़ते हुए मेरे मन में संदेह पैदा हुआ कि क्या इसमें बहुत सारे क्लिच हैं? क्या इनमें उपयुक्त शब्दों को वास्तव में एक पब्लिशिंग कॉन्फ्रेंस ही नहीं, बल्कि किसी भी इवेंट पर लागू कर सकते हैं? और, इन सबसे बढ़कर, क्या वास्तव में यह लेख वैसा था, जैसा मैंने सोचा था? सारे सवालों का जवाब था- नहींं। अंत में मैंने यह फैसला लिया कि मैं इसका उपयोग नहीं करूंगा, क्योंकि मुझे लगा कि यह लेख कई जगहों पर कमजोर था। लिहाजा मैंने एक प्लेन पेपर लिया और इसे फिर से लिखा। इस बार यह लेख वैसा ही था, जैसा मैंने सोचा था।
AI-संचालित पत्रकारिता को लेकर यह चर्चाएं तेजी से हो रही हैं कि यह हमारी नौकरियां खा जाएगा। शायद यह वास्तिवकता हो। निस्संदेह AI एक बहुत ही बहुत तेज उपकरण है और कई पदों पर, यहां तक कि नियमित पत्रकारिता के लिए यह शायद एक महत्वपूर्ण समय बचाने वाला साबित होगा। लेकिन हमें कभी भी अपने आप को इस भ्रम में नहीं रखना चाहिए कि यह इंसान है, या फिर यह इंसान की तरह सोचने और उत्पादन करने में सक्षम है।
हमें अपने आउट-स्मार्ट कंप्यूटरों पर नहीं बल्कि अपनी योग्यता पर विश्वास रखना चाहिए और जैसा कि मेरे मामले में हुआ। कागज-कलम को उठाएं और ऐसा मनमोहक कंटेंट तैयार करें, जैसा हम कर सकते हैं। इस तरह से बिजनेस में वापस आ जाएं।
बता दें कि FIPP के प्रेजिडेंट व सीईओ James Hewes इंडियन मैगजीन कांग्रेस में स्पीच देंगे। IMC, एसोसिएशन ऑफ इंडियन मैगजीन के प्रमुख कार्यक्रम के तौर पर वापसी करने के लिए पूरी तरह तैयार है। यह 24 मार्च को नई दिल्ली के ओबेरॉय होटल में आयोजित होगा।
सम्मेलन का एजेंडा इस वेबसाइट https://aim.org.in/imc12/ पर देखा जा सकता है।
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