आजादी के बाद 60-65 साल तक किसी ने नहीं सोचा कि हम अपने देश में हथियार बनाएं। सारा ध्यान करोड़ों रुपये के हथियारों के आयात पर होता था। हर रक्षा सौदे में दलाली खाए जाने की खबरें आती थीं।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।