परंपरागत ब्रैंड बनाने का तरीका पूरी तरह उल्टा हो गया है। दशकों तक कंपनियां अपने प्रॉडक्ट्स अलग दिखें, पहचान में आएं, इसके लिए बहुत पैसा और मेहनत करती थीं।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।