'हिंदी के पत्रकारों की दशा दयनीय होती जा रही है, इस पर चिंता की जानी चाहिए'

एक पत्रकार के लिए आत्मसम्मान सबसे बड़ी पूंजी होती है और जब किसी पत्रकार को अपनी यह पूंजी गंवानी पड़े या गिरवी रखनी पड़े तो उसकी मन:स्थिति का अंदाजा लगाना मुश्किल हो जाता है।

Last Modified:
Sunday, 30 May, 2021
HindiJournalismDay9565


मनोज कुमार, वरिष्ठ पत्रकार ।। एक पत्रकार के लिए आत्मसम्मान सबसे बड़ी पूंजी होती है और जब किसी पत्रकार को अपनी यह पूंजी गंवानी पड़े या गिरवी रखनी पड...
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