विस्मृति नाम की इस कविता में मैथिलीशरण हिंदुओं से पराधीनता पाश में फंसे होने की बात करते हुए हिंदी समाज को जागृत करने का उपक्रम करते हैं। उनके हताश होने को लेकर प्रश्न खड़े करते हैं।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।