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पीएम मोदी के पद छोड़ने की बहस पर लगे पूर्ण विराम: समीर चौगांवकर
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के दूसरे सरसंघचालक गुरुजी गोलवलकर 33 वर्ष तक संघ प्रमुख रहे। संघ के तीसरे सरसंघचालक बाला साहेब देवरस 20 वर्ष तक इस पद पर रहे।
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।। 5 months ago
समीर चौगांवकर, वरिष्ठ पत्रकार।
मोहन जी और मोदी जी उम्र के 75 वर्ष पूर्ण करने के बाद भी अपने-अपने पद पर बने रहेंगे। कब तक बने रहेंगे, यह मोहन जी के मामले में संघ और स्वयं मोहन जी को तय करना है, वहीं मोदी जी के मामले में यह निर्णय भाजपा और स्वयं मोदी जी को करना है। ना तो संघ के संविधान में और ना ही भाजपा के संविधान में 75 वर्ष की आयु पूर्ण होने पर पद छोड़ने का कोई उल्लेख है। यह पूरी तरह संस्था के समर्थन, व्यक्तिगत स्वास्थ्य और विवेक पर निर्भर करता है।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के दूसरे सरसंघचालक गुरुजी गोलवलकर 33 वर्ष तक संघ प्रमुख रहे। संघ के तीसरे सरसंघचालक बाला साहेब देवरस 20 वर्ष तक इस पद पर रहे। मोहन भागवत जी को संघ प्रमुख बने अभी मात्र 16 वर्ष हुए हैं और 13 दिन बाद, यानी 11 सितंबर को, वह 75 वर्ष के हो जाएंगे। वह पूर्णतः स्वस्थ हैं और संघ भी उनके साथ खड़ा है।
2009 में संघ प्रमुख बनने के बाद मोहन भागवत को लगा कि दिल्ली भाजपा में एक प्रकार का “सिंडिकेट” सक्रिय है और दिल्ली के दादाओं का दबदबा समाप्त करना आवश्यक है। इसी कारण उन्होंने नागपुर से सीधे नितिन गडकरी को भाजपा का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाकर भेजा।
भाजपा में लालकृष्ण आडवाणी जी 2009 में 82 वर्ष की उम्र में प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार बने थे। उस समय पार्टी और संघ ने उन्हें पूरा समर्थन दिया। आडवाणी जी जब संघ का समर्थन लेने नागपुर गए थे, तब भी संघ प्रमुख मोहन भागवत ही थे और आज भी वही इस पद पर हैं।
2014 में यही मोहन भागवत जी थे, जिन्हें लगा कि अब आडवाणी जी को सक्रिय राजनीति से अलग होना चाहिए और प्रधानमंत्री पद के लिए नए चेहरे को आगे बढ़ाना चाहिए। आडवाणी जी के तमाम विरोध के बावजूद मोहन भागवत ने नरेंद्र मोदी के नाम पर मुहर लगाई।
मोहन भागवत भली-भांति जानते हैं कि भाजपा में कब किस नेता के पर कतरने हैं और कब किसे विश्राम देना है। वर्तमान में मोहन जी और मोदी जी दोनों अपनी-अपनी जिम्मेदारियां बखूबी निभा रहे हैं। एक सामाजिक और सांस्कृतिक संगठन के प्रमुख के रूप में मोहन जी संघ का विस्तार करने और समाज को उससे जोड़ने में लगे हैं। वहीं, प्रधानमंत्री के रूप में नरेंद्र मोदी भारत को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने के लिए दिन-रात प्रयासरत हैं।
विज्ञान भवन में संघ प्रमुख मोहन भागवत के भाषण और सभी प्रश्नों के उत्तर देने के बाद अब उनके 75 वर्ष पूर्ण होने पर पद छोड़ने की चर्चा और बहस पर पूर्णविराम लग जाना चाहिए।
( यह लेखक के निजी विचार हैं )
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