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मेनस्ट्रीम मीडिया को लेकर आजकल निगेटिव माहौल बनाने की कोशिश की जा रही है: सुधीर चौधरी

अपने वक्तव्य में ‘आजतक’ (AajTak) के कंसल्टिंग एडिटर सुधीर चौधरी का कहना है कि मेनस्ट्रीम मीडिया को लेकर आजकल बहुत ही निगेटिव माहौल बनाने की कोशिश की जा रही है

समाचार4मीडिया ब्यूरो 2 years ago

e4m NewsNext समिट 2023 में, ‘आजतक’ (AajTak) के कंसल्टिंग एडिटर सुधीर चौधरी ने इस बात पर अपना वक्तव्य दिया कि किस तरह मुख्यधारा की मीडिया अपनी धारणा के कारण पीड़ित हो रही है। इसके बाद उन्होंने मुख्यधारा मीडिया की वास्तविकता, इसकी चुनौतियों, ट्रोल किए जाने और 2012 की गिरफ्तारी के बारे में BW बिजनेसवर्ल्ड और एक्सचेंज4मीडिया समूह के चेयरमैन व एडिटर-इन-चीफ डॉ. अनुराग बत्रा के साथ खुलकर बातचीत की। 

अपने वक्तव्य में ‘आजतक’ (AajTak) के कंसल्टिंग एडिटर सुधीर चौधरी का कहना है कि मेनस्ट्रीम मीडिया को लेकर आजकल बहुत ही निगेटिव माहौल बनाने की कोशिश की जा रही है। आप कोई विचार रखिए, फिर चाहे वह किसी के पक्ष में हो या विपक्ष में, लेकिन एक पूरा का पूरा इकोसिस्टम ये चाहता है कि देश के लोग मेनस्ट्रीम मीडिया के जर्नलिस्ट्स पर विश्वास करना बंद कर दें। मेनस्ट्रीम मीडिया पर एक अविश्वास पैदा हो जाए। आपने देखा होगा कि इसे लेकर पिछले कुछ वर्षों से एक कैंपेन चल रहा है। इसका एक कारण यह भी हो सकता है कि ये जो लोग जो कर रहे हैं, जब तक ये मेनस्ट्रीम मीडिया उनके इशारों पर नाच रहा था, तब तक सब ठीक था। उन्होंने मेनस्ट्रीम मीडिया को खिलाया, पिलाया इतना बड़ा किया और जब मेनस्ट्रीम मीडिया शायद अपने आपसे सोचने लगा, अपना दिमाग लगाने लगा, तो इन्हें बुरा लगने लगा। शायद यह एक कारण हो सकता है।

इस समय इतने सारे युवा हमारे साथ आते हैं, जो पत्रकार बनना चाहते हैं, अखबारों और टीवी में काम करना चाहते हैं, मेनस्ट्रीम मीडिया का हिस्सा बनना चाहते हैं, ऐसे में ये सारे लोग, खासकर जो युवा हैं ये हमारे बारे में क्या सोचता होगा, क्या ये भी हमारे बारे में सोचना बंद कर देगा। इसलिए मुझे लगता है कि हम लोगों इस मामले में कम से कम यूनिटी दिखानी चाहिए। एकता दिखानी चाहिए, जिसके लिए जरूरी है एक मंच, एक ऐसा मंच जहां सब आएं, जितने भी स्टेक होल्डर्स हैं, जितने भी पत्रकारिता के बड़े-बड़े नाम हैं, जितने भी देश में मीडिया हाउसेज हैं, एक मंच तो होना चाहिए, जो उनको एक साथ ला सके। मुझे लगता है 'इनबा' को जो ये मंच है, ये इस काम को बखूबी कर सकता है। मैं इनबा को बटे हुए मीडिया को एक करने के मंच के तौर पर भी देखता हूं। वहीं दूसरी तरफ, अच्छे काम करने वालों को सम्मानित भी जाना चाहिए, उन्हें पुरस्कार भी मिलना चाहिए। ये जो दोनों काम हैं ये हमारे मेनस्ट्रीम मीडिया को प्रोत्साहन देने के लिए बहुत अच्छी हैं और ये मंच इन दोनों काम को बहुत अच्छे से कर रहा है।

उन्होंने कहा कि हर एक को ईर्ष्या और प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ता है। भारत में सिनेमा, क्रिकेट और राजनीति नेटवर्क की सबसे बड़ी बिरादरी में से कुछ हैं और वहां भी कुछ प्रतिस्पर्धा मौजूद हैं, लेकिन आपने कभी किसी क्रिकेटर को साथी क्रिकेटर्स के बारे में बुरा बोलते हुए नहीं देखा होगा, चाहे वह प्रतिद्वंद्वी टीम ही क्यों न हो।

सिनेमा में भी, कोई भी अपने साथियों के बारे में सार्वजनिक राय नहीं देता है, बल्कि, वे कभी-कभी दर्शकों को अपने समकक्ष की फिल्म देखने के लिए प्रोत्साहित करते हैं, केवल इसलिए क्योंकि यह नाटकीय काम के अच्छे मानक को चित्रित करता है और पूरे फिल्म उद्योग के लिए गर्व की भावना पैदा करता है।

  


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