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डोनाल्ड ट्रंप और लोकतंत्र का संकट: समीर चौगांवकर

ट्रम्प को सिर्फ़ डॉलर दिखता है। जेलेंस्की में भी उन्हें परेशान मुल्क का मुखिया नहीं, एक सोने का अंडा देने वाली मुर्गी नजर आ रही है। जेलेंस्की का हलाल होना तय है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो ।। 1 month ago

समीर चौगांवकर, वरिष्ठ पत्रकार, लेखक।

यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की रूस के साथ जारी युद्ध और इस समस्या के समाधान के लिए अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प से फ्लोरिडा में मिले हैं। ट्रम्प किसी समस्या का समाधान नहीं है, बल्कि ख़ुद अमेरिका और दुनिया के लिए भी एक बड़ी समस्या बन गए हैं। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक सनकी शख्स हैं। वह कब क्या करेंगे, वह ख़ुद भी नहीं जानते।

डोनाल्ड ट्रंप को यह बात समझ में नहीं आ रही है कि मनमानी करके और तुगलकी फरमान जारी करके वे अपनी ही नहीं, अमेरिका की भी जगहंसाई करवा रहे हैं। टैरिफ को दुनिया का सबसे खूबसूरत शब्द बताने वाले ट्रंप ने दुनिया को “टैरिफ टेरर” दिया है। ट्रम्प का व्यवहार याद दिला रहा है कि एक आत्ममुग्ध पूंजीवादी जब सर्वोच्च पद पर पहुंच जाता है तो वह किस हद तक तानाशाही भरा सलूक कर सकता है।

‘अमेरिका फर्स्ट’ कहने वाले ट्रंप के रहते-रहते अमेरिका में कई अमेरिका हो गए हैं, जो एक-दूसरे को हैरत से देख रहे हैं और यह सब सिर्फ डोनाल्ड ट्रंप के होने का नतीजा है। प्रश्न यह भी उठता है कि अमेरिकी लोकतंत्र के भीतर किसी सनकी तानाशाह को रोकने के जो तरीक़े थे, वे ट्रंप के मामले में नाकाम क्यों रहे? ट्रंप पहले पूंजीपति नहीं हैं, जिनके भीतर अमेरिका का राष्ट्रपति होने की इच्छा पैदा हुई।

फोर्ड से लेकर कई पैसे वालों ने राष्ट्रपति होने का सपना देखा, लेकिन उनके मामले में लोकतंत्र के चौकीदार कहीं ज़्यादा सतर्क साबित हुए। कई बार अमेरिकी संविधान और चुनाव की प्रक्रिया में संशोधन भी किए गए, मगर इस बार लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं की वह छन्नी ठीक से काम नहीं कर सकी और ट्रंप दूसरी बार सत्ता के शिखर पर पहुंच गए।

डोनाल्ड ट्रंप अब अपने विरोधियों को दुश्मन की तरह देखते हैं, स्वतंत्र प्रेस को डराते हैं और तीसरी बार राष्ट्रपति बनने की अपनी सनक के लिए संविधान संशोधन का रास्ता तलाश कर रहे हैं। ट्रंप लोकतंत्र की उन हर संस्थाओं को कमजोर करने की कोशिश कर रहे हैं, जो क्षरण रोकने के लिए हैं—अदालतों, ख़ुफ़िया एजेंसियों और एथिक्स ऑफिस तक को। लोकतंत्र के लिए जागरूक अमेरिकी जनता ने कैसे इतिहास में दूसरी बार, एक ऐसे आदमी को राष्ट्रपति चुना है, जिसके पास सार्वजनिक सेवा का कोई अनुभव नहीं है, संवैधानिक अधिकारों को लेकर कोई प्रतिबद्धता नहीं दिखती, और जिसमें बहुत साफ़ अधिनायकवादी प्रवृतियां हैं।

ट्रम्प राष्ट्रपति ऑफिस को अपनी निजी जायदाद की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं और इसलिए ट्रम्प को लगता है कि अमेरिका का यह सर्वोच्च पद उनकी जायदाद है। लोकतंत्र के नाम पर ही लोकतंत्र को ख़त्म करने का काम ट्रम्प अमेरिका में कर रहे हैं। दुनिया के छोटे देश जो अमेरिका से सुरक्षा पाते थे आज ट्रंप उन्हें ही निगलने का मंसूबा पाल रहे हैं।

ट्रम्प ने अमेरिका का कितना नुक़सान किया है, यह ट्रम्प के जाने के बाद ही अमेरिका को समझ में आएगा। ट्रम्प को सिर्फ़ डॉलर दिखता है। जेलेंस्की में भी उन्हें परेशान मुल्क का मुखिया नहीं, एक सोने का अंडा देने वाली मुर्गी नजर आ रही है। जेलेंस्की का हलाल होना तय है।

( यह लेखक के निजी विचार हैं )


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