इस तरह मोदी और पुतिन की ताकतें अलग-अलग हैं, लेकिन लक्ष्य एक हो सकता है- तनाव को कम करना। मोदी के पास व्यापक स्वीकार्यता और भरोसा है, जबकि पुतिन के पास रणनीतिक दबदबा।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।