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जो चैनल पर हाथ मल-मल कर कहते हैं कि मीडिया बिक गई, उन पर तमाचा है ये...
कुलदीप नैयर एक ऐसा नाम जो हमारी सो कॉल्ड थर्ड जनरेशन की पहुंच से दूर,लेकिन...
समाचार4मीडिया ब्यूरो 7 years ago
गौरव अग्रवाल
पंजाब केसरी, आगरा।।
कुलदीप नैयर का चला जाना
कुलदीप नैयर एक ऐसा नाम जो हमारी सो कॉल्ड थर्ड जनरेशन की पहुंच से दूर,लेकिन ज्ञान का विस्तृत भंडार। यदि कुलदीप नैयर के आर्टिकल पढ़ेंगे तो बहुत कुछ सीखने पढ़ने को मिलेगा और यदि लिखने का शौक है, तो लिखने को मिलेगा। अखबारों के आर्टिकल पेज बहुत कम लोग पढ़ते हैं। अमूनन लोग अपने काम की चीज पढ़ते हैं। जैसे राशिफल,खाना बनाने की कला,खेल का पेज या फिर स्थानीय स्तर की वह न्यूज जो खुद से संबंधित हो, या व्यवसाय या फिर किसी नाते रिश्तेदार से संबंधित हो।
आर्टिकल पेज बहुत कम लोग पढ़ते हैं। कुछ को तो यह समझ ही नही आता तो कोई लंबा चौड़ा देख बोर हो जाता है। हकीकत यह है कि आर्टिकल पेज ही सच्चाई उगलते हैं। पंजाब केसरी के अश्वनी कुमार का संपादकीय हो, या राजस्थान पत्रिका के गुलाब कोठारी का, खुलकर सत्ता के खिलाफ कहना आज के दौर में आसान नही है, क्योंकि इतिहास गवाह है सत्ता से टकराना आसान नही है।
राष्ट्रीय सहारा के 'हस्तक्षेप' का भी मुकाबला नही है। हकीकत यह है कि संपादकीय पृष्ठ एक ऐसा पेज है जोकि कम से कम उन लोगों के मुंह पर तो जोरदार तमाचा मारता है जो किसी चैनल पर हाथ मल-मल कर यह कहते हैं कि मीडिया बिक गई। मुझे लगता है कि शायद एक पत्रकार जो साठ के पड़ाव पर है,ताउम्र बिका नहीं, अब बुढ़ापे में बिक कर क्या करेगा। सो आर्टिकल पेज सच्चाई उगलते हैं। भारतीय प्रसाशनिक सेवा की तैयारी करने वाले छात्रों को शिक्षण संस्थानों के द्वारा आर्टिकल पढ़ने के निर्देश दिए जाते हैं क्योंकि इनमें विषय वस्तु का सार छुपा होता है। कुल मिलाकर कुलदीप नैय्यर को मेरा शत शत नमन। पेट में ज्ञान का कोष होने के कारण भरपाई आसान नही है।
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