अपनी भाषा-बोली को दुत्कारने का लाइसेंस किसी के पास नहीं: राजेश बादल

अदालतों की भाषा पर यह पहली टिप्पणी नहीं है। पहले भी न्यायालयीन निर्णयों में इस तरह के भाव झांकते रहे हैं।

Last Modified:
Tuesday, 16 March, 2021
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राजेश बादल, वरिष्ठ पत्रकार ।। विडंबना है। सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों को एक हाई कोर्ट के निर्णय की भाषा समझ में नहीं आई। माननीय न्यायमूर्ति को कहन...
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