‘अखबारों के बारे में यह फैसला क्या लोकतंत्र का गला घोंटने का संगठित अपराध नहीं है?’

मुझे याद है जब हम लोग पत्रकारिता की शिक्षा ग्रहण कर रहे थे, तब यह पढ़ाया जाता था कि युद्ध और महामारी के दौर में अखबार सरकार और प्रशासन के बड़े सहारे होते हैं

Last Modified:
Friday, 24 April, 2020
Amitabh Shrivastava


अमिताभ श्रीवास्तव, संपादक, लोकमत समाचार, औरंगाबाद।। मुझे याद है जब हम लोग पत्रकारिता की शिक्षा ग्रहण कर रहे थे, तब यह पढ़ाया जाता था कि युद्ध और महा...
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