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AI किसकी नौकरी खाएगा: पढ़िए इस सप्ताह का 'हिसाब किताब'

मोटे तौर पर आपका काम रोज एक जैसा है या रेपिटिटिव है, तो यह पैटर्न एआई सीख सकता है। मगर जहां फील्ड का काम है या जो हाथों से ही हो सकता है, वहां एआई को तुरंत करने में दिक्कत होगी।

समाचार4मीडिया ब्यूरो ।। 3 months ago

मिलिंद खांडेकर, वरिष्ठ पत्रकार।

पिछले हफ्ते मैंने पाकिस्तान के अंग्रेजी अखबार 'डॉन' की एक क्लिप शेयर की थी। अखबार में गाड़ियों की बिक्री की खबर छपी थी। आखिर में चैटजीपीटी स्टाइल में यह प्रॉम्प्ट भी छप गया था कि 'यह खबर फ्रंट पेज के लिए बना दूं क्या?' दो संभावनाएं हैं। चैटजीपीटी को प्रेस नोट देकर कॉपी लिखने के लिए कहा गया होगा या फिर किसी रिपोर्टर की कॉपी को डेस्क ने एडिट करने के लिए डाला होगा। अखबार का मजाक उड़ा। हिसाब-किताब में चर्चा हुई नौकरी में एआई के बारे में। हमारा साथी बनेगा या नौकरी खा जाएगा?

ईवाई ने भारत में नौकरियों पर एआई के असर को लेकर एक रिपोर्ट बनाई है। यह रिपोर्ट कहती है कि पांच साल में करीब चार करोड़ (38 मिलियन) नौकरियां बदल जाएंगी, मतलब ये लोग जैसा काम आज कर रहे हैं, वैसा आने वाले समय में नहीं रह जाएगा।

तीन सेक्टरों में सबसे ज्यादा असर होगा। रिटेल, फाइनेंस और आईटी में बदलाव सबसे पहले देखने को मिल सकता है। मैंने चैटजीपीटी से ही पूछा था कि किस तरह की नौकरियां जा सकती हैं और किनकी बच सकती हैं। यह आकलन अलग-अलग रिसर्च रिपोर्टों के आधार पर किया गया है, जैसे नीति आयोग, माइक्रोसॉफ्ट और ईवाई।

किसकी नौकरी खतरे में है?

कस्टमर केयर - कस्टमर के सवालों का जवाब देने वाले कॉल सेंटर की जगह एआई तेजी से ले रहा है। आपका ऑर्डर कहीं लेट हो गया या गलत डिलीवरी हो गई, तो सबसे पहले चैटबॉट ही सवाल-जवाब करता है। जरूरत पड़ने पर ही कोई फोन पर आकर बात करता है। कंपनियों के पास आमतौर पर एक जैसी शिकायतें आती हैं, और उनका निदान भी पता होता है। एआई को ट्रेनिंग देकर यह काम कराया जा रहा है।

डेटा एंट्री ऑपरेटर - डेटा भरने के लिए अब व्यक्तियों की जरूरत नहीं रह गई है। अकाउंटिंग क्लर्क का बेसिक काम एआई कर रहा है। आने वाले समय में यह और बेहतर होता जाएगा। पहले बही-खाते में हिसाब लिखा जाता था। फिर कंप्यूटर में इसकी एंट्री होने लगी। इस काम के लिए लोग रखे गए थे, अब कंप्यूटर यह काम खुद कर सकता है।

लेखन/अनुवाद - लिखने और अनुवाद का काम एआई कर रहा है। पहले अनुवाद करने के लिए एजेंसियां काम करती थीं। वे लोगों को काम देती थीं। मीडिया में भी यह काम होता था। यह काम धीरे-धीरे कम होता चला जाएगा।

किसकी नौकरी बचेगी?

फील्ड टेक्नीशियन - जिस काम के लिए आपको फील्ड में जाना होगा, जैसे एसी मैकेनिक, प्लंबर, इलेक्ट्रीशियन।

नर्सिंग - डॉक्टर के काम में तो एआई दखल देने लगा है, लेकिन देखभाल का काम एआई नहीं कर सकता या ब्लड सैंपल लेने का काम।

रिलेशनशिप मैनेजर - बैंकों में या फाइनेंस कंपनियों में आप सामने बैठकर ग्राहकों की समस्या सुलझाने या सलाह देने का काम बना रहेगा। सेल्स पर्सन जो रिटेल स्टोर में आपकी मदद करते हैं।

मोटे तौर पर आपका काम रोज एक जैसा है या रेपिटिटिव है, तो यह पैटर्न एआई सीख सकता है। मगर जहां फील्ड का काम है या जो हाथों से ही हो सकता है, वहां एआई को तुरंत करने में दिक्कत होगी। नौकरियां जाने के बजाय बदलने की संभावना ज्यादा है, इसलिए एआई सीखते रहिए। एआई के साथ-साथ दिमाग का भी इस्तेमाल कीजिए, वरना 'डॉन' अखबार जैसी गलती हो सकती है।

( यह लेखक के निजी विचार हैं )


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