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भारत के खिलाफ प्रोपेगेंडा चलाने पर चैनल के ऊपर लगा भारी जुर्माना
भारत के खिलाफ प्रोपेगेंडा चलाकर आतंकवाद को बढ़ावा देने के मामले में एक ब्रिटिश टीवी चैनल पर कड़ी कार्रवाई की गई है।
समाचार4मीडिया ब्यूरो 5 years ago
भारत के खिलाफ प्रोपेगेंडा चलाकर आतंकवाद को बढ़ावा देने के मामले में एक ब्रिटिश टीवी चैनल पर कड़ी कार्रवाई की गई है। ब्रिटेन में मीडिया पर नजर रखने वाली संस्था ने खालसा टेलीविजन (KTV) पर कुल 50,000 पाउंड यानी 50 लाख रुपए का जुर्माना लगाया है। इस चैनल पर यह कार्रवाई देश के सिख समुदाय को हिंसा और आतंकवाद के लिए परोक्ष तौर पर उकसाने के मामले में की गई है। इसके अलावा खालसा टीवी (KTV) पर भारत में हिंसक घटनाओं की वकालत करने और पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की तस्वीर दिखाकर लोगों को भड़काने को लेकर भी कार्रवाई की गई है।
ब्रिटिश सरकार द्वारा स्वीकृत मीडिया नियामक प्राधिकरण ‘संचार कार्यालय’ (Ofcom) ने शुक्रवार को इस मामले में एक आदेश जारी किया है। यह आदेश फरवरी और नवंबर 2019 की जांच के परिणाम पर आधारित है।
अपने आदेश में संचार कार्यालय ने कहा कि KTV उसकी जांच को लेकर कार्यालय का बयान प्रसारित करे और इस तरह के संगीत वीडियो या परिचर्चा कार्यक्रम का प्रसारण फिर कभी न करे।
जांच में ये बात सामने आई है कि 2018 में चार, सात और नौ जुलाई को खालसा टीवी ने 'बग्गा एंड शेरा' गाने के लिए एक म्यूजिक वीडियो प्रसारित किया था। इस म्यूजिक वीडियो में देखा और सुना जा सकता है कि ब्रिटेन में रहने वाले सिखों से हत्या समेत हिंसा करने के लिए परोक्ष रूप से आह्वान किया जा रहा है। जांच में ये भी पाया गया कि KTV पर जो कंटेंट दिखाया गया था, उससे दर्शकों को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही थी। ऐसा करना प्रसारण नियमों का उल्लंघन है।
संचार कार्यालय ने आदेश में कहा, खालसा टेलीविजन लिमिटेड हमारे नियमों का पालन करने में विफल रहा है, जिसके चलते चैनल पर 20,000 पाउंड और 30,000 पाउंड का अर्थ दंड लगाया गया है। KTV पर 20,000 पाउंड का जुर्माना संगीत वीडियो से संबंधित है और 30,000 पाउंड का अर्थ दंड परिचर्चा कार्यक्रम को लेकर है।
बता दें कि KTV ब्रिटेन में सिख समुदाय का बड़ा टेलीविजन चैनल है। 30 मार्च 2019 को परिचर्चा कार्यक्रम 'पंथक मसले' का प्रसारण किया गया था। इस कार्यक्रम में कई मेहमानों ने आतंकवाद को बढ़ावा देने और उकसावे वाले विचार रखे। कार्यक्रम में प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन बब्बर खालसा का भी संदर्भ था, जिसके बाद संचार कार्यालय को संगीत वीडियो और परिचर्चा कार्यक्रम को लेकर कई शिकायतें मिली थीं। तमाम शिकायतों के बाद उसने जांच शुरू की थी।
जांच में ये भी बात सामने आई कि इस संगीत वीडियो में भारत की पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की तस्वीर थी। जांच टीम ने इस बात को रेखांकित किया कि वीडियो में भारतीय राज्य के खिलाफ हिंसक कृत्य की वकालत करने पर जोर दिया गया था। परिचर्चा कार्यक्रम पंजाबी में प्रसारित किया गया और संचार कार्यालय को उसका अंग्रेजी में अनुवाद कराना पड़ा।
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