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14 साल बाद दूरदर्शन के दो रिटायर वरिष्ठ कर्मचारियों को मिली राहत, जानिए पूरा मामला
बेंगलुरु की मजिस्ट्रेट कोर्ट ने 2008 में दर्ज एक आपराधिक मामले में दूरदर्शन के बेंगलुरु केंद्र के दो सेवानिवृत्त वरिष्ठ कर्मचारियों को14 सभी आरोपों से बरी कर दिया
समाचार4मीडिया ब्यूरो 2 years ago
बेंगलुरु की मजिस्ट्रेट कोर्ट ने 2008 में दर्ज एक आपराधिक मामले में दूरदर्शन के बेंगलुरु केंद्र के दो सेवानिवृत्त वरिष्ठ कर्मचारियों को14 सभी आरोपों से बरी कर दिया।
'टाइम्स ऑफ इंडिया' की एक खबर के मुताबिक, दूरदर्शन केंद्र के तत्कालीन सीनियर डायरेक्टर महेश जोशी द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत में प्रोग्राम के तत्कालीन डिप्टी डायरेक्टर एनके मोहन राम, मार्केटिंग डिपार्टमेंट में प्रॉडक्शन असिसटेंट एसबी बजंत्री और एक अन्य अधिकारी एम बालू को आरोपी बनाया था। सुनवाई के दौरान बालू की मौत हो गई।
दरअसल, इन पर आरोप था कि 15 अगस्त 2008 को तीनों आरोपियों ने महेश जोशी को स्वतंत्रता दिवस के मौके पर राष्ट्रीय ध्वज फहराने से रोकने को लेकर गाली दी थी। इन तीनों पर आईपीसी की धारा 186, 504,120बी और राष्ट्रीय ध्वज अपमान निवारण अधिनियम, 1971 की धारा 3 के तहत मामला दर्ज किया गया था। हालांकि, अभियुक्त ने आरोपों से इनकार किया और तर्क दिया कि शिकायत एक व्यक्तिगत प्रतिशोध से दर्ज की गई थी।
बेंगलुरु के 8वें एडिशनल चीफ मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट केएस शिवकुमार ने कहा कि शिकायतकर्ता ने किसी भी कर्मचारी को गवाह के तौर पेश नही किया है पर नहीं किया जो घटना के समय मौजूद थे और इसका कोई वजह भी नहीं बतायी।
कोर्ट ने कहा कि शिकायतकर्ता ने दावा किया था कि उसका भाषण रिकॉर्ड किया गया था और इसका एडिट वर्जन को 15 अगस्त के मौके पर बजाया गया था, फिर भी आरोपी द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली अपमानजनक भाषा की कोई रिकॉर्डिंग प्रस्तुत नहीं की गई।
हालांकि कोर्ट ने कहा कि आईपीसी की धारा 186 के तहत यह साबित करना होगा कि आरोपी ने स्वेच्छा से एक सरकारी कर्मचारी को अपना काम करने से रोका। लेकिन अब शिकायतकर्ता ने झंडा भी फहराया और स्वतंत्रता दिवस का भी संदेश दिया। इसलिए, आरोप साबित नहीं होते हैं। कोर्ट ने यह भी कहा कि शिकायत शिकायतकर्ता और अभियुक्त के बीच पेशेवर ईर्ष्या के अस्तित्व को दर्शाती है और इस संदेह को जन्म देती है कि शिकायत दर्ज करने का यही कारण हो सकता है।
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