जिस वक्त नेहा को यह खबर दी गई, उस वक्त वह अपना शो खत्म करके अधूरी स्टोरी पूरी करने जा रही थीं
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समाचार4मीडिया ब्यूरो
नौकरी जाने का गम क्या होता है, ये केवल वही बता सकता है, जिसने कभी इस पीड़ा को महसूस किया हो। यह पीड़ा तब और बढ़ जाती है, जब पूरी मेहनत, लगन और ईमानदारी के साथ काम करने के बावजूद एक दिन आपको कभी वापस न आने के लिए कह दिया जाता है। टीवी पत्रकार नेहा आनंद भी इन दिनों इसी पीड़ा से गुजर रही हैं, लेकिन उन्होंने अपनी पीड़ा को अपने अंदर ही समेटने के बजाय उसे पूरी दुनिया तक पहुंचाने का प्रयास किया है।
ऐसा बहुत कम ही देखने को मिलता है, जब कोई नौकरी जाने के गम को सार्वजनिक मंच पर उन लोगों के साथ भी साझा करे, जिनसे उसका कोई वास्ता नहीं। इसके लिए जिस साहस की जरूरत होती है, वो अधिकांश लोग जुटा नहीं पाते, इसलिए उनकी पीड़ा उनके अंदर ही दबकर रह जाती है। सीएनबीसी आवाज में एक लंबी पारी खेलने वालीं नेहा की बिजनेस न्यूज पर अच्छी पकड़ है। वो चैनल में कई लोकप्रिय शो होस्ट करती थीं। 6 सितम्बर को चैनल प्रबंधन ने कॉस्ट कटिंग का हवाला देते हुए उनसे इस्तीफ़ा मांग लिया।
जिस वक्त नेहा को यह खबर दी गई, उस वक्त वह अपना शो खत्म करके अधूरी स्टोरी पूरी करने जा रही थीं। हर आम इंसान की तरह नेहा के लिए भी यह मुश्किल दौर है, लेकिन उन्होंने अपने अनुभव और नई नौकरी की जद्दोजहद को शब्दों के रूप में बयां किया है। नेहा ने बाकायदा एक यूट्यूब चैनल बनाया है जिसका नाम है ‘Resignation Diaries’। ऑफिस में अपनी आखिरी शाम को उन्होंने इस मार्मिक अंदाज में बयां किया है कि सुनने वाला कुछ देर के लिए खुद को नेहा समझकर उनके गम को महसूस करने लगता है।
चैनल पर विडियो के नाम पर बस नेहा की एक फोटो है और बैकग्राउंड में उनकी आवाज सुनाई देती है। नेहा के अनुभव का यह पहला भाग है, दूसरे भाग में नई नौकरी की तलाश में आने वाली परेशानियों को शामिल किया जाएगा। खास बात यह है कि नेहा आनंद ने चंद दिन पहले ही यूट्यूब चैनल बनाया है और उन्हें 30 सब्सक्राइबर भी मिल गए हैं। इसके अलावा, 432 लोगों ने अब तक उनके पहले विडियो को देख लिया है। सोशल मीडिया पर नेहा के इस साहसी कदम की खूब तारीफ हो रही है।
समाचार4मीडिया से बातचीत में नेहा ने बताया कि यूं अचानक नौकरी जाने से वह टूट गई थीं। हालांकि, उनका अपने इस निजी गम और पीड़ा को लोगों से साझा करने का कोई इरादा नहीं था, लेकिन फिर उन्हें लगा कि इस गंभीर विषय पर भी बात होनी जरूरी है। शुरुआत में नेहा को समझ में नहीं आ रहा था कि बात कैसे शुरू करें, लेकिन जब शुरुआत हुई तो अंत कब हो गया पता ही नहीं चला। वो बस आंख बंद करके नौकरी की आखिरी शाम याद करती रहीं और शब्द अपने आप जुबां पर आते चले गए।
बकौल नेहा, ‘नौकरी जाने की बात अक्सर हम अपने अंदर ही दफन कर लेते हैं। फिर जब जीवन में हम कोई बड़ा मुकाम हासिल कर लेते हैं तो उस कड़वे अनुभव को खुशी-खुशी बयां करते हैं, लेकिन मुझे लगता है कि हमें इस विषय पर भी खुलकर बात करनी चाहिए। ये केवल मीडिया ही नहीं, हर सेक्टर में हो रहा है। मेरे जैसे बहुत से लोग इस पीड़ा से गुजर रहे होंगे और फिर जब हमारा कोई दोष ही नहीं है तो हम बेगुनाह होकर भी खुद को सजा क्यों दें’?
क्या ‘Resignation Diaries’ नई नौकरी की तलाश पूरी होने के बाद भी चलता रहेगा? इसके जवाब में नेहा ने कहा, ‘फिलहाल तो ऐसा नहीं सोचा है। ये चैनल नौकरी जाने से उपजी पीड़ा और नए सफर की शुरुआत में आने वालीं मुश्किलों को बयां करने के लिए बनाया गया है। हालांकि, लोगों की प्रतिक्रिया पर भी काफी कुछ निर्भर करेगा। यदि लोगों को मेरी ये पहल पसंद आती है, तो उनकी पसंद के अनुसार इसे आगे बढ़ाया जा सकता है। फिर भी अभी कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी।’
‘Woh Shaam- Part 1 : Resignation Diaries-नौकरी छूट जाने और नया काम खोजने की कहानी’ के डिस्क्रिपशन में नेहा ने लिखा है ‘मेरी जुबानी सुनिए मेरी कहानी। एक ऐसी कहानी जो किसी की भी हो सकती है। अचानक एक दिन नौकरी छूटने से लेकर नया काम तलाशने तक की कहानी। उम्मीद टूटने, फिर से पैरों पर खड़ा होने, लड़ने और हिम्मत न हारने की कहानी।
I recently lost my #job. Believe me, it is a like a bad, bad dream coming to life.Its clearly painful to lose your job, for more reasons than one. Its crushing to be forced out of your #workplace, your #office. This is now my reality. It took me sometime to gather myself and jump into the bandwagon for job search. But, in the process a thought struck hard.
Hey! I said to myself, there is story waiting to be shared with the whole World. So here, I thought of wearing a #storytellers' hat to let you in my journey. I am going to share with you my story, right from the day I was asked to leave the organisation. This story will continue till I find a job for myself.
Resignation Diaries is my quest of finding a job, and the turmoil in between. I will share all the struggles, madness I have endured so far. This is my journey of tears and prayers, of breakdowns and break through, of heartbreaks and hand-holding, of hopes and hassles.
तो पेश है...’
नेहा आनंद का विडियो आप यहां देख सकते हैं-
AIDCF की याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय से मांगा जवाब, 11 जून से न्यूज रेटिंग्स दोबारा शुरू करने की तैयारी में था BARC
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Samachar4media Bureau
टेलीविजन न्यूज रेटिंग्स यानी TRP को लेकर चल रहा विवाद अब और गहरा गया है। केरल हाईकोर्ट ने बिना लैंडिंग पेज डेटा के न्यूज चैनलों की TRP जारी करने पर अंतरिम रोक लगा दी है। यह फैसला ऑल इंडिया डिजिटल केबल फेडरेशन (AIDCF) की याचिका पर आया है।
जानकारी के मुताबिक, AIDCF ने संशोधित ऑडियंस मेजरमेंट फ्रेमवर्क के क्लॉज 5.4.1 को चुनौती देते हुए केरल हाईकोर्ट का रुख किया था। मामले की सुनवाई जस्टिस बेचू कुरियन थॉमस की बेंच में हुई। कोर्ट ने सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (MIB) को इस मामले में जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।
हालांकि, कोर्ट ने केंद्र सरकार की TRP पॉलिसी गाइडलाइंस के अमल पर रोक नहीं लगाई है, लेकिन बिना लैंडिंग पेज डेटा के रेटिंग्स जारी करने पर फिलहाल रोक लगा दी गई है। यह फैसला ऐसे समय आया है, जब ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल (BARC) ने 11 जून से न्यूज चैनलों की साप्ताहिक रेटिंग्स दोबारा जारी करने की घोषणा की थी।
दरअसल, BARC ने कहा था कि शुरुआती चरण में न्यूज रेटिंग्स में लैंडिंग पेज इम्प्रेशंस को शामिल नहीं किया जाएगा। इसी फैसले को लेकर इंडस्ट्री में विवाद बढ़ गया।
न्यूज ब्रॉडकास्टिंग इंडस्ट्री से जुड़े कई विशेषज्ञों का मानना है कि अनिवार्य या प्रोत्साहित किए गए लैंडिंग पेज दर्शकों की वास्तविक पसंद को प्रभावित करते हैं और इससे TRP आंकड़ों में असंतुलन पैदा होता है। वहीं, कई ब्रॉडकास्टर्स का तर्क है कि लैंडिंग पेज चैनलों के प्रमोशन का एक वैध तरीका है और इन्हें पूरी तरह हटाने से प्रतिस्पर्धी बाजार में चैनलों की पहुंच और विजिबिलिटी प्रभावित हो सकती है।
मीडिया इंडस्ट्री के लिए यह मामला बेहद अहम माना जा रहा है, क्योंकि न्यूज TRP दोबारा शुरू होने से विज्ञापन दरों, चैनलों की मार्केट पोजिशनिंग और फेस्टिव सीजन की रणनीतियों पर बड़ा असर पड़ सकता है।
इंडस्ट्री से जुड़े लोगों का कहना है कि केरल हाईकोर्ट में चल रही यह सुनवाई भविष्य में टीवी ऑडियंस मेजरमेंट सिस्टम और ब्रॉडकास्टर्स व डिस्ट्रीब्यूशन प्लेटफॉर्म्स के बीच शक्ति संतुलन को भी प्रभावित कर सकती है। अब इस मामले की अगली सुनवाई केंद्र सरकार के जवाब दाखिल करने के बाद होगी।
देश की बड़ी मीडिया और एंटरटेनमेंट कंपनी Sun TV Network ने वित्त वर्ष 2025-26 के नतीजे जारी कर दिए हैं।
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Samachar4media Bureau
देश की बड़ी मीडिया और एंटरटेनमेंट कंपनी सन टीवी नेटवर्क (Sun TV Network) ने वित्त वर्ष 2025-26 के नतीजे जारी कर दिए हैं। कंपनी की कमाई में बढ़ोतरी हुई है, लेकिन मुनाफा पिछले साल के मुकाबले कम रहा। इसके साथ ही कंपनी ने निवेशकों को बड़ा तोहफा देते हुए पूरे साल में कुल 250% डिविडेंड देने का ऐलान किया है।
कंपनी की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 में Sun TV की स्टैंडअलोन कुल आय बढ़कर 4,637.70 करोड़ रुपये रही, जबकि पिछले साल यह 4,543.96 करोड़ रुपये थी। वहीं कंपनी का रेवेन्यू भी करीब 6% बढ़कर 4,102.13 करोड़ रुपये पहुंच गया।
हालांकि कंपनी के मुनाफे में गिरावट देखने को मिली। पूरे वित्त वर्ष में Sun TV का प्रॉफिट आफ्टर टैक्स 1,393.52 करोड़ रुपये रहा, जो पिछले साल 1,654.46 करोड़ रुपये था।
मार्च 2026 तिमाही की बात करें तो कंपनी की कुल आय 941.67 करोड़ रुपये रही, जबकि पिछले साल इसी तिमाही में यह 1,135.86 करोड़ रुपये थी। वहीं तिमाही मुनाफा घटकर 218.64 करोड़ रुपये रह गया, जो एक साल पहले 362.18 करोड़ रुपये था।
कंपनी ने बताया कि मौजूदा तिमाही में कुछ एकबारगी खर्च और निवेश से जुड़े प्रावधानों का असर मुनाफे पर पड़ा। म्यूचुअल फंड निवेश पर मार्क-टू-मार्केट प्रावधान और रेडियो बिजनेस में निवेश से जुड़ी कमजोरी की वजह से कंपनी की कमाई प्रभावित हुई।
Sun TV का सब्सक्रिप्शन बिजनेस मजबूत बना हुआ है। घरेलू सब्सक्रिप्शन रेवेन्यू सालाना आधार पर करीब 10% बढ़कर 1,891.68 करोड़ रुपये पहुंच गया।
कंपनी का क्रिकेट बिजनेस भी लगातार बढ़ रहा है। Sun TV के पास IPL टीम SunRisers Hyderabad, South Africa T20 League की SunRisers Eastern Cape और UK की The Hundred League टीम SunRisers Leeds Limited है।
वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान कंपनी ने शेयरधारकों को चार अंतरिम डिविडेंड दिए। कुल मिलाकर निवेशकों को 12.50 रुपये प्रति शेयर यानी 250% डिविडेंड मिला।
Sun TV Network दक्षिण भारत की सबसे बड़ी टीवी ब्रॉडकास्टिंग कंपनियों में से एक है। कंपनी तमिल, तेलुगु, कन्नड़ और मलयालम समेत कई भाषाओं में चैनल चलाती है। इसके अलावा कंपनी का OTT प्लेटफॉर्म SunNXT भी तेजी से बढ़ रहा है।
करीब दो महीने की रोक के बाद अब टीवी न्यूज चैनलों की TRP रेटिंग फिर से शुरू होने जा रही है।
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Samachar4media Bureau
करीब दो महीने की रोक के बाद अब टीवी न्यूज चैनलों की TRP रेटिंग फिर से शुरू होने जा रही है। ब्रॉ़कास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल (BARC) 11 जून 2026 से न्यूज चैनलों की रेटिंग दोबारा जारी करेगा। लेकिन इस बार बड़ा बदलाव यह होगा कि “लैंडिंग पेज” की व्युअरशिप को TRP कैलकुलेशन में शामिल नहीं किया जाएगा। माना जा रहा है कि इस फैसले से टीवी न्यूज इंडस्ट्री का पूरा समीकरण बदल सकता है।
दरअसल, “लैंडिंग पेज” उस चैनल को कहा जाता है जो टीवी ऑन करते ही अपने आप स्क्रीन पर खुल जाता है। इससे चैनल को बिना दर्शक की पसंद के भी ज्यादा व्युअरशिप मिल जाती थी। लंबे समय से कई ब्रॉडकास्टर्स और विज्ञापन एजेंसियां इस व्यवस्था पर सवाल उठा रही थीं। उनका कहना था कि इससे असली दर्शकों की पसंद नहीं, बल्कि डिस्ट्रीब्यूशन डील्स के आधार पर TRP बढ़ती है।
सूत्रों के मुताबिक, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (MIB) ने मार्च 2026 में अमेरिका-ईरान संघर्ष की सनसनीखेज कवरेज को लेकर न्यूज चैनलों की साप्ताहिक TRP पर चार हफ्ते की रोक लगाई थी। बाद में इंडस्ट्री में नए रेटिंग सिस्टम पर चर्चा के चलते यह रोक आगे बढ़ा दी गई।
अब BARC, ब्रॉडकास्टर्स और रेगुलेटर्स के बीच कई दौर की बातचीत के बाद नया सिस्टम लागू किया जा रहा है। इंडस्ट्री के जानकारों का मानना है कि इससे उन चैनलों को ज्यादा फायदा मिलेगा जिनकी ऑर्गेनिक ऑडियंस मजबूत है। वहीं, वे चैनल प्रभावित हो सकते हैं जो अब तक लैंडिंग पेज व्यवस्था के जरिए ज्यादा पहुंच हासिल करते रहे हैं।
मीडिया एजेंसियों और विज्ञापनदाताओं ने भी इस कदम का स्वागत किया है। उनका कहना है कि इससे डेटा ज्यादा साफ और भरोसेमंद होगा, जिससे विज्ञापन की प्लानिंग बेहतर तरीके से हो सकेगी। पहले कई बार ऐसा होता था कि मजबूत कंटेंट की बजाय डिस्ट्रीब्यूशन ताकत रखने वाले चैनलों को फायदा मिल जाता था।
गौरतलब है कि “लैंडिंग पेज” विवाद पहली बार 2020 के TRP स्कैम के दौरान बड़े स्तर पर सामने आया था। उस समय कई चैनलों पर आरोप लगे थे कि वे केबल नेटवर्क पर खुद को डिफॉल्ट चैनल बनवाकर व्युअरशिप बढ़ा रहे हैं। इसके बाद से ही न्यूज रेटिंग सिस्टम में सुधार की मांग लगातार उठती रही।
इंडस्ट्री से जुड़े लोगों का कहना है कि हिंदी और क्षेत्रीय न्यूज चैनलों की रैंकिंग में अब बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। क्योंकि इन जॉनर में डिस्ट्रीब्यूशन डील्स का असर काफी ज्यादा माना जाता था।
BARC पिछले कुछ वर्षों से अपने डेटा सिस्टम और पैनल मॉनिटरिंग को मजबूत करने पर काम कर रहा है। संस्था ने रेटिंग सिस्टम की विश्वसनीयता बढ़ाने के लिए कई नए नियम और जांच प्रक्रियाएं भी लागू की हैं।
टीवी न्यूज इंडस्ट्री के लिए यह बदलाव ऐसे समय में आया है जब डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की चुनौती लगातार बढ़ रही है और दर्शकों की देखने की आदतें तेजी से बदल रही हैं। ऐसे में ब्रॉडकास्टर्स को उम्मीद है कि नया और ज्यादा पारदर्शी TRP सिस्टम विज्ञापनदाताओं का भरोसा वापस लाने में मदद करेगा।
प्रसार भारती ने डीडी फ्री डिश प्लेटफॉर्म पर खाली पड़े MPEG-4 स्लॉट्स के लिए मिड-ईयर ई-ऑक्शन का ऐलान किया है।
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Samachar4media Bureau
प्रसार भारती ने डीडी फ्री डिश प्लेटफॉर्म पर खाली पड़े MPEG-4 स्लॉट्स के लिए मिड-ईयर ई-ऑक्शन का ऐलान किया है। यह 99वां ई-ऑक्शन 26 मई 2026 से शुरू होगा। इस ऑक्शन में सफल रहने वाले चैनलों को 5 जून 2026 से लेकर 31 मार्च 2027 तक डीडी फ्री डिश प्लेटफॉर्म पर जगह मिलेगी।
इस ई-ऑक्शन में निजी सैटेलाइट टीवी चैनल और अंतरराष्ट्रीय पब्लिक ब्रॉडकास्टर्स हिस्सा ले सकते हैं। हालांकि, इसके लिए सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (MIB) से वैध लाइसेंस और अनुमति होना जरूरी होगा।
प्रसार भारती ने चैनलों को भाषा और जॉनर के आधार पर अलग-अलग कैटेगरी यानी “बकेट” में बांटा है। न्यूज और करेंट अफेयर्स चैनलों के लिए सबसे ज्यादा रिजर्व प्राइस तय किया गया है, जो 61.65 लाख रुपये है। वहीं, हिंदी और उर्दू को छोड़कर बाकी क्षेत्रीय भाषा चैनलों के लिए शुरुआती रिजर्व प्राइस 4.94 लाख रुपये रखा गया है।
इस बार कंटेंट से जुड़े नियम भी सख्त किए गए हैं। चैनलों को यह सुनिश्चित करना होगा कि उनके हर महीने के कम से कम 75% कंटेंट (विज्ञापन और प्रमोशन छोड़कर) उसी भाषा और जॉनर का हो, जिसके तहत उन्होंने आवेदन किया है। साथ ही, कुल मासिक प्रसारण समय में कम से कम 60% कंटेंट घोषित कैटेगरी का होना जरूरी होगा।
अगर कोई चैनल इन नियमों का उल्लंघन करता है तो उसका मामला एक विशेष समिति के पास जाएगा। शुरुआत में चैनल को अपनी भाषा या जॉनर बदलने के लिए आधिकारिक अनुरोध करने का मौका दिया जाएगा, लेकिन सुधार नहीं होने पर उसे प्लेटफॉर्म से हटाया भी जा सकता है।
ई-ऑक्शन में हिस्सा लेने के इच्छुक ब्रॉडकास्टर्स को 25 मई 2026 दोपहर 3 बजे तक आधिकारिक पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन जमा करना होगा।
टीवी रेटिंग एजेंसी BARC ने सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (MIB) के पास अपने लाइसेंस के रिन्यूअल के लिए औपचारिक आवेदन दे दिया है।
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टीवी रेटिंग एजेंसी BARC ने सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (MIB) के पास अपने लाइसेंस के रिन्यूअल के लिए औपचारिक आवेदन दे दिया है। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है, जब सरकार नई TRP Policy 2026 की समीक्षा कर रही है। इंडस्ट्री सूत्रों के मुताबिक, हाल ही में Indian Broadcasting and Digital Foundation (IBDF) और BARC के वरिष्ठ अधिकारियों ने केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव से मुलाकात कर नई नीति को लागू करने की समयसीमा और उससे जुड़ी चुनौतियों पर चर्चा की थी।
सूत्रों के अनुसार, मंत्रालय ने मौजूदा टीवी ऑडियंस मीजरमेंट एजेंसीज को नई व्यवस्था के तहत दोबारा आवेदन करने के लिए 60 दिन का समय दिया है। इसके बाद ही BARC ने अपना रिन्यूअल आवेदन दाखिल किया।
गौरतलब है कि सरकार ने 27 मार्च 2026 को नई TRP Policy जारी की थी। शुरुआत में इसे 30 दिनों के भीतर लागू करने की बात कही गई थी, लेकिन ब्रॉडकास्टर्स, विज्ञापन कंपनियों और रेटिंग इंडस्ट्री से जुड़े पक्षों ने इसे लेकर कई चिंताएं जताई थीं। उनका कहना था कि इतने कम समय में नई व्यवस्था लागू करना मुश्किल होगा और इससे लागत भी काफी बढ़ सकती है।
इंडस्ट्री की सबसे बड़ी आपत्तियों में people meters की संख्या तेजी से बढ़ाने का लक्ष्य, बोर्ड में स्वतंत्र निदेशकों की अनिवार्यता और लैंडिंग पेज इम्प्रेशंस को रेटिंग गणना से बाहर रखना शामिल था। ब्रॉडकास्टर्स का तर्क था कि इससे ऑपरेशनल खर्च बढ़ जाएगा, जबकि रेटिंग की सटीकता में उतना बड़ा फायदा नहीं मिलेगा।
इन आपत्तियों के बाद मंत्रालय ने कुछ नियमों में राहत दी। अब रेटिंग एजेंसी के बोर्ड में स्वतंत्र निदेशकों की अनिवार्य हिस्सेदारी 50% से घटाकर 33% कर दी गई है। इसके अलावा, 80,000 घरों तक मीटर लगाने की समयसीमा बढ़ा दी गई है और सर्वे अब हर साल की बजाय तीन साल में एक बार होगा।
इंडस्ट्री से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि सरकार का यह बदला हुआ रुख दिखाता है कि वह सुधारों और व्यावहारिक चुनौतियों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रही है। मंत्रालय अभी भी अलग-अलग पक्षों से मिले सुझावों पर विचार कर रहा है, जिसके बाद टीवी ऑडियंस मीजरमेंट सिस्टम का अंतिम ढांचा तय किया जाएगा।
फिलहाल BARC देश की इकलौती टीवी ऑडियंस मीजरमेंट एजेंसी है और टीवी इंडस्ट्री में विज्ञापन दरों से लेकर चैनलों की परफॉर्मेंस तय करने में इसकी अहम भूमिका मानी जाती है।
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (MIB) ने केबल टीवी नेटवर्क से जुड़े ऑपरेटर्स और आवेदकों के लिए एक अहम एडवाइजरी जारी की है।
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Vikas Saxena
जब कोई ऐप बिना केबल कनेक्शन या DTH डिश के आपके स्मार्ट टीवी पर Live TV दिखा रहा है, तो क्या उसे भी वही नियम मानने चाहिए जो केबल या DTH कंपनियों पर लागू हैं?
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Vikas Saxena
देश में टेलीविजन देखने का तरीका बदल रहा है और बदलाव इतनी तेजी से है कि नियामक संस्थाएं भी पीछे छूट रही हैं। एक ओर करोड़ों भारतीय अपने Smart TV पर Samsung TV Plus और LG Channels जैसे ऐप्स से मुफ्त में टीवी चैनल देख रहे हैं, दूसरी ओर केबल ऑपरेटर और DTH कंपनियां चिल्ला रही हैं कि यह "रेगुलेटरी वैक्यूम" में चल रहा बिजनेस है। इसी टकराव के बीच 'टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया' यानी कि ट्राई ने अप्रैल 2026 में एक ऐसा कंसल्टेशन पेपर जारी किया है, जो भारतीय मीडिया इंडस्ट्री की दिशा तय कर सकता है।
सवाल सीधा है, जब कोई ऐप बिना केबल कनेक्शन या DTH डिश के आपके स्मार्ट टीवी पर Live TV दिखा रहा है, तो क्या उसे भी वही नियम मानने चाहिए जो केबल या DTH कंपनियों पर लागू हैं?
FAST क्या है और यह क्यों मायने रखता है?
FAST यानी Free Ad-Supported Streaming Television, यह वह मॉडल है जिसमें दर्शक बिना कोई सब्सक्रिप्शन दिए, सिर्फ इंटरनेट के जरिए, Live या Scheduled टीवी चैनल देख सकते हैं, ठीक वैसे जैसे पहले एंटिना से दूरदर्शन देखते थे, लेकिन अब Smart TV ऐप पर Samsung TV Plus, LG Channels, Amazon Fire TV, JioStar और ZEE5, ये सभी किसी न किसी रूप में FAST सेवाएं दे रहे हैं।
ट्राई ने इस पूरी श्रेणी को एक नया नाम दिया है, Application-based Linear Television Distribution (ALTD)। इसमें वे सभी ऐप्लिकेशन आती हैं जो स्मार्ट टीवी, मोबाइल या वेब ब्राउजर के जरिए Scheduled/Linear TV चैनल दिखाती हैं।
सूचना-प्रसारण मंत्रालय (MIB) ने दिसंबर 2025 में ट्राई को रेफरेंस भेजा कि इन सेवाओं के लिए एक रेगुलेटरी फ्रेमवर्क बनाया जाए। ट्राई ने अप्रैल 2026 में कंसल्टेशन पेपर जारी किया। शुरुआत में 4 मई 2026 तक कमेंट मांगे गए थे, लेकिन इंडस्ट्री की मांग पर ट्राई ने यह डेडलाइन बढ़ाकर 11 मई 2026 कर दी (counter-comments 25 मई तक)।
आंकड़े बताते हैं, बदलाव असली है
इस पूरी बहस को समझने के लिए पहले यह देखना जरूरी है कि जमीन पर क्या हो रहा है।
Connected TV का विस्फोट: ट्राई के अपने कंसल्टेशन पेपर में दर्ज आंकड़ों के अनुसार, भारत में Connected TV (CTV) दर्शकों की संख्या 2024 में 6.97 करोड़ (69.7 मिलियन) थी, जो 2025 में बढ़कर 12.92 करोड़ (129.2 मिलियन) हो गई, यानी एक साल में 85% की बढ़ोतरी। Nielsen की India Internet Report 2025 के अनुसार, साउथ इंडिया में 25% घरों में, वेस्ट इंडिया में 16%, नॉर्थ इंडिया में 10% और ईस्ट इंडिया में 5% घरों में Smart TV आ चुके हैं। 2026 में भारत में Smart TV और OTT मार्केट का आकार $26.39 अरब (करीब ₹2.2 लाख करोड़) पहुंचने का अनुमान है।
FAST का बढ़ता मार्केट: ट्राई के कंसल्टेशन पेपर में Muvi की रिपोर्ट के हवाले से बताया गया है कि भारत में FAST सेवाओं के यूजर्स 2023 में 11.64 करोड़ (116.4 मिलियन) थे, जो 2027 तक 14.86 करोड़ (148.6 मिलियन) होने का अनुमान है। FAST राजस्व 2023 में USD 63.69 मिलियन (करीब ₹530 करोड़) था, जो 2027 तक USD 104 मिलियन से अधिक पहुंच सकता है। बेंगलुरू की Amagi Media Labs, जो FAST चैनल डिलीवरी की रीढ़ है, जनवरी 2026 में BSE/NSE पर लिस्ट हुई, उसका FY2025 राजस्व ₹1,162 करोड़ रहा।
DTH की गिरती दुनिया: दूसरी तरफ, पारंपरिक Pay TV का संसार सिकुड़ता जा रहा है। ट्राई के आंकड़ों के अनुसार, चारों प्रमुख DTH कंपनियों के एक्टिव सब्सक्राइबर्स जून 2024 के 6.217 करोड़ से घटकर दिसंबर 2025 तक 5.099 करोड़ रह गए, 18 महीने में करीब 1.1 करोड़ की गिरावट। EY और AIDCF की रिपोर्ट के अनुसार, Pay TV सब्सक्राइबर्स 2018 के 15.1 करोड़ से घटकर 2024 में 11.1 करोड़ रह गए। इस गिरावट का असर सीधे राजस्व पर भी दिख रहा है, Dish TV की कुल आय Q1 FY26 में 27.7% घटकर ₹329.4 करोड़ रह गई।
विज्ञापन का रुख बदला: WPP की TYNY 2026 रिपोर्ट के मुताबिक, 2025 में भारत में Linear TV का विज्ञापन राजस्व 1.5% घटकर ₹47,740 करोड़ रहा। जबकि उसी साल CTV विज्ञापन खर्च करीब 20% बढ़ा। 2026 में CTV एडवर्टाइजिंग करीब ₹8,000 करोड़ (लगभग $1 अरब) तक पहुंचने का अनुमान है, 2025 के करीब $760 मिलियन से 32% अधिक। भारत का कुल विज्ञापन मार्केट 2026 में ₹2,01,891 करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है और इसमें CTV और Retail Media सबसे तेज बढ़ते सेगमेंट हैं।
केबल और DTH कंपनियों की दलील, 'एक ही काम, दो तराजू'
Dish TV ने ट्राई को सबमिशन में कहा कि FAST और ALTD प्लेटफॉर्म "रेगुलेटरी वैक्यूम" में काम कर रहे हैं। Tata Play ने तर्क दिया कि कंटेंट को या तो सभी टेक्नोलॉजी पर समान रूप से रेगुलेट किया जाए, या सबको डीरेगुलेट किया जाए, "रेगुलेटरी आर्बिट्रेज" बंद होनी चाहिए।
इनकी शिकायत का सार यही है: एक केबल या DTH ऑपरेटर को लाइसेंस लेना होता है, कंटेंट कोड मानने होते हैं, टैरिफ ऑर्डर का पालन करना होता है, Interconnect Regulations का हिसाब देना होता है, लेकिन एक Smart TV ऐप उन्हीं चैनलों को बिना किसी लाइसेंस के मुफ्त में दिखा देती है। Zee Entertainment ने भी कहा कि FAST और Linear TV फंक्शनली एक जैसे हैं, दर्शक दोनों को एक ही तरह देखते हैं, इसलिए एक ही नियम होने चाहिए।
OTT और टेक कंपनियों का पलटवार, 'इनोवेशन मत दबाओ'
JioStar, भारत की सबसे बड़ी टेलीविजन और स्ट्रीमिंग कंपनी, ने ट्राई को बताया कि FAST सेवाएं इंटरनेट के "ऐप्लिकेशन लेयर" पर काम करती हैं और इन्हें टेलीकॉम या ब्रॉडकास्टिंग कैरिज सेवा नहीं माना जाना चाहिए। Sony-owned Culver Max ने कहा कि दुनिया भर में FAST प्लेटफॉर्म को डिजिटल सॉफ्टवेयर सेवाओं की तरह ट्रीट किया जाता है।
Internet and Mobile Association of India (IAMAI) ने तो सीधे कहा कि ट्राई के पास FAST और ALTD को रेगुलेट करने का अधिकार क्षेत्र ही नहीं है, क्योंकि ये ओपन इंटरनेट पर चलती हैं। IAMAI ने चेतावनी दी कि टेलीकॉम-स्टाइल ऑथराइजेशन फ्रेमवर्क से "रेगुलेटरी ओवररीच" होगी और इनोवेशन को नुकसान पहुंचेगा।
Tata Communications ने बीच का रास्ता सुझाया, ALTD को पुरानी केबल TV रेगुलेशन में मत घसीटो, लेकिन Piracy control, कंटेंट accountability, Consumer grievance और Service transparency पर हल्के नियम जरूर बनाओ।
ट्राई का असली सवाल, 'फंक्शन देखो, टेक्नोलॉजी नहीं'
ट्राई का कंसल्टेशन पेपर खुद मानता है कि FAST और ALTD सेवाएं "consumer के नजरिए से पारंपरिक टेलीविजन से अलग नहीं दिखतीं।" रेगुलेटर ने Italy के AGCOM का उदाहरण दिया जहां FAST चैनलों को अब रेगुलेटरी ऑथराइजेशन लेनी पड़ती है।
ट्राई के कंसल्टेशन पेपर में 15 से ज्यादा बड़े सवाल उठाए गए हैं:
होम स्क्रीन की असली जंग, कौन तय करेगा क्या दिखेगा?
इस पूरी बहस की जड़ में एक और बड़ा सवाल है जिसे अभी तक खुलकर नहीं कहा गया: Smart TV की Home Screen का कंट्रोल किसके पास होगा?
जब आप अपना Samsung, LG या Xiaomi Smart TV ऑन करते हैं, तो सबसे पहले जो दिखता है वह उस TV OEM का होम स्क्रीन है। Samsung TV Plus सीधे उस होम स्क्रीन पर पहला बटन है। LG Channels का भी यही हाल है। यानी जो कंपनी TV बनाती है, वही तय करती है कि दर्शक को पहले क्या दिखेगा और इसमें केबल ऑपरेटर या ब्रॉडकास्टर का कोई रोल नहीं।
यही वह "डेटा और एल्गोरिद्म" की जंग है जिसके बारे में इंडस्ट्री के जानकार बात कर रहे हैं। Samsung और LG के पास Automatic कंटेंट Recognition (ACR) तकनीक है जो यह जानती है कि आप कब क्या देख रहे हैं, यह डेटा विज्ञापन टार्गेटिंग के लिए बेहद कीमती है। पारंपरिक केबल या DTH ऑपरेटर के पास ऐसा डेटा नहीं है।
विज्ञापन मार्केट का समीकरण बदला
परंपरागत टीवी विज्ञापन के लिए यह दौर कठिन है। WPP के अनुसार 2025 में Linear TV Ad Revenue ₹47,740 करोड़ रहा, 1.5% की गिरावट के साथ। वहीं, CTV पर विज्ञापन खर्च 2025 में 20% और 2026 में 22% बढ़ने का अनुमान है।
ZEE5 ने August 2025 में LG Channels पर पांच FAST चैनल लॉन्च किए। Samsung TV Plus पर भारत में NDTV, Republic, Zee News, Times Now, ABP News जैसे बड़े नाम पहले से मौजूद हैं। इसका मतलब यह है कि ब्रॉडकास्टर खुद FAST इकोसिस्टम में उतर रहे हैं, भले ही वे ट्राई के सामने ALTD को रेगुलेट करने की मांग कर रहे हों।
यह द्वंद्व भारतीय मीडिया इंडस्ट्री की असली जटिलता है: एक तरफ ब्रॉडकास्टर FAST को Level Playing Field की दृष्टि से रेगुलेट करवाना चाहते हैं, दूसरी तरफ वे खुद FAST प्लेटफॉर्म पर अपने चैनल चला रहे हैं क्योंकि वहां दर्शक हैं।
क्या भारत में अमेरिका जैसा FAST बूम आएगा?
अमेरिका में Tubi, Pluto TV और Roku Channel जैसे FAST प्लेटफॉर्म ने पारंपरिक केबल TV को बड़ी चुनौती दी है। (Peacock का Free FAST टियर 2023 में बंद हो चुका है, वह अब paid subscription सेवा है।) Pluto TV के करीब 8 करोड़ Monthly Active Users हैं। Pew Research (2025) के अनुसार, अमेरिका में अब सिर्फ 36% वयस्क केबल या सैटेलाइट TV के subscriber हैं, जबकि 55% Americans streaming-only हैं।
भारत में FAST का बूम जरूर आएगा, लेकिन कुछ फर्क के साथ। MiQ की Advanced TV Report India के अनुसार, भारत में 93% दर्शक mobile पर और 71% TV स्क्रीन पर वीडियो देखते हैं, यानी यह exclusive नहीं, बल्कि multi-screen मार्केट है। FAST का "lean-back" यानी सोफे पर बैठकर TV देखने का अनुभव Smart TV पर ज्यादा Natural है। जैसे-जैसे Smart TV घरों में पहुंचेगी, FAST का भारतीय मार्केट और बड़ा होगा।
APAC FAST मार्केट 2033 तक $38.77 अरब तक पहुंचने का अनुमान है, जो 15.2-16.5% CAGR पर बढ़ेगा।
उपभोक्ता के लिए क्या मायने रखता है?
अभी उपभोक्ता के नजरिए से FAST सेवाएं फायदेमंद हैं, मुफ्त, बिना सब्सक्रिप्शन, सिर्फ इंटरनेट चाहिए। लेकिन समस्याएं भी हैं:
कंटेंट जवाबदेही का अभाव: यदि किसी FAST ऐप पर गलत या भड़काऊ कंटेंट आता है, तो कोई स्पष्ट Grievance System नहीं है।
Pay Channels का मुफ्त वितरण: कुछ FAST प्लेटफॉर्म वे चैनल मुफ्त दे रहे हैं जिन्हें DTH पर सब्सक्रिप्शन लेकर देखना पड़ता, यह Market Distortion का मामला है।
डेटा की निजता: ACR जैसी तकनीक से OEM आपकी Viewing Habits Track कर रहे हैं और यह डेटा Ad-Targeting में इस्तेमाल हो रहा है।
रेगुलेशन इन्हीं समस्याओं का हल दे सकता है, बशर्ते वह इनोवेशन को दबाने वाला न हो।
रेगुलेशन बनाम इनोवेशन, कहां खींचें लकीर?
ट्राई के सामने सबसे कठिन काम यही है। यदि FAST ऐप्स को DTH जैसे भारी लाइसेंस नियमों में बांधा गया, तो Startup-friendly FAST Ecosystem का विकास रुक जाएगा। अगर बिल्कुल नहीं बांधा, तो पारंपरिक ऑपरेटर नाइंसाफी का शोर मचाते रहेंगे और Consumer Protection के मुद्दे अनसुलझे रहेंगे।
ABC Live के विश्लेषण के अनुसार, भारत को एक अलग ALTD फ्रेमवर्क चाहिए, न DTH का Copy-Paste, न IT Rules 2021 की सीमित छाया। इसमें Local Compliance Presence अनिवार्य हो, Grievance Officer हो, केवल MIB-Approved Channels FAST पर दिखें और Audience Measurement BARC में Integrate हो।
Tata Communications ने जो "Light-Touch, Technology-Neutral" नजरिया सुझाया है, वह सबसे व्यावहारिक लगता है: कंटेंट Accountability, Piracy Control और Consumer Protection पर नियम हों, लेकिन पुराने ढांचे का बोझ न लादा जाए।
टीवी का अगला मॉडल कैसा होगा?
सभी संकेत एक ही दिशा में इशारा कर रहे हैं, Hybrid TV का युग। वह युग जिसमें DTH Set-Top Box और Smart TV App एक ही स्क्रीन पर साथ चलेंगे। Tata Play और Airtel पहले से Hybrid STB ला चुके हैं जो DTH के साथ OTT Apps को Integrate करते हैं। IPTV तेजी से बढ़ रहा है, Airtel के पास दिसंबर 2025 तक 25.4 लाख Active IPTV Subscribers थे।
पारंपरिक केबल और DTH खत्म नहीं होंगे, लेकिन उनकी भूमिका बदलेगी। जहां Broadband कमजोर है, वहां Satellite TV काम आएगा। जहां Smart TV और Fast Internet है, वहां FAST और OTT राज करेंगे।
जो नहीं बदलेगा वह है, कंटेंट की भूख। और उस भूख को कौन किस तरह, किस कीमत पर, किस प्लेटफॉर्म पर पूरा करता है, यही तय करेगा कि अगले 5 साल में भारतीय टेलीविजन का नक्शा कैसा दिखेगा।
ट्राई का FAST/ALTD कंसल्टेशन पेपर सिर्फ एक रेगुलेटरी दस्तावेज नहीं है, यह उस बड़े युद्ध की अगली कड़ी है जिसमें केबल, DTH, OTT, Smart TV OEM और Big Tech कंपनियां भारत के 90 करोड़ TV दर्शकों (23 करोड़ TV households) की स्क्रीन पर कब्जे के लिए लड़ रही हैं। जो आंकड़े सामने हैं वे साफ बोलते हैं, Connected TV का उभार रोकना किसी के बस में नहीं। सवाल सिर्फ यह है कि इस नई दुनिया के नियम कौन और कैसे लिखेगा।
ज़ी मीडिया कॉरपोरेशन लिमिटेड ने कंपनी की स्वतंत्र निदेशक (Independent Director) स्वेता गोपालन को दोबारा नियुक्त करने का फैसला किया है।
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Vikas Saxena
ज़ी मीडिया कॉरपोरेशन लिमिटेड ने कंपनी की स्वतंत्र निदेशक (Independent Director) स्वेता गोपालन को दोबारा नियुक्त करने का फैसला किया है। कंपनी के बोर्ड ने 18 मई 2026 को हुई बैठक में उनकी पुनर्नियुक्ति को मंजूरी दी। अब शेयरधारकों की मंजूरी मिलने के बाद स्वेता गोपालन 1 अगस्त 2026 से 31 जुलाई 2031 तक अगले पांच साल के लिए स्वतंत्र निदेशक के रूप में अपनी जिम्मेदारी निभाएंगी।
कंपनी ने शेयर बाजार को दी जानकारी में बताया कि स्वेता गोपालन का मौजूदा कार्यकाल 31 जुलाई 2026 को समाप्त हो रहा है। इसके बाद उन्हें दूसरे कार्यकाल के लिए फिर से नियुक्त करने का प्रस्ताव रखा गया है। कंपनी के बोर्ड ने यह भी रिकॉर्ड पर लिया कि स्वेता गोपालन पर सेबी या किसी अन्य प्राधिकरण की ओर से निदेशक पद संभालने पर कोई रोक नहीं है।
स्वेता गोपालन की शैक्षणिक पृष्ठभूमि भी काफी मजबूत मानी जाती है। उन्होंने अन्ना यूनिवर्सिटी से इंडस्ट्रियल बायोटेक्नोलॉजी में बीटेक किया है। इसके अलावा उन्होंने अमेरिका के Kellogg School of Management से MBA किया है और Quantitative Finance में भी सर्टिफिकेशन हासिल किया है।
उन्होंने अपने करियर की शुरुआत 2010 में Johns Hopkins Medicine International, USA से की थी। इसके बाद वह Parkway Health Singapore, Noble Group Singapore और Tata Consultancy Services USA जैसी कंपनियों के साथ भी काम कर चुकी हैं। Zee Media ने कहा कि उनके अनुभव का लाभ कंपनी को आगे भी मिलेगा।
रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क (Republic Media Network) की नेशनल हेड और साउथ ब्रांच हेड शताब्दी शर्मा पाठक (Satabdi Sharma Pathak) ने इस्तीफा दे दिया है।
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Samachar4media Bureau
रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क (Republic Media Network) की वरिष्ठ अधिकारी शताब्दी शर्मा पाठक ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। सूत्रों के मुताबिक वह नेटवर्क में नेशनल हेड और साउथ ब्रांच हेड की जिम्मेदारी संभाल रही थीं।
शताब्दी शर्मा पाठक रिपब्लिक टीवी (Republic TV), रिपब्लिक भारत (Republic Bharat), रिपब्लिक कन्नड़ (Republic Kannada) और रिपब्लिक बांग्ला (Republic Bangla) के लिए मोनेटाइजेशन और रणनीतिक साझेदारियों की जिम्मेदारी देख रही थीं। रिपब्लिक कन्नड़ को “Nimma Dhwani” पोजिशनिंग के साथ राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करने में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही।
करीब सात वर्षों के कार्यकाल में उन्होंने विज्ञापन बिक्री, ब्रांडेड कंटेंट, रीजनल मार्केट विस्तार और डिजिटल व कनेक्टेड टीवी प्लेटफॉर्म्स पर रेवेन्यू पार्टनरशिप को मजबूत करने में अहम योगदान दिया। दक्षिण भारत के बाजार में नेटवर्क की रणनीति और विज्ञापनदाताओं के साथ संबंध मजबूत करने में भी वह प्रमुख चेहरों में शामिल थीं।
उनके नेतृत्व में रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क ने कई ब्रांडेड कंटेंट और चुनाव आधारित अभियानों को विस्तार दिया, साथ ही दक्षिण भारतीय बाजारों में विज्ञापनदाताओं का दायरा भी बढ़ाया।
रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क से जुड़ने से पहले शताब्दी शर्मा पाठक 'The Chernin Group, HISTORY TV18, Times Network, TV Today Network और Magna Publishing' जैसी संस्थाओं के साथ काम कर चुकी हैं।
B.A.G. Films and Media Limited को बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज से बड़ी मंजूरी मिल गई है।
by
Vikas Saxena
प्रतिष्ठित न्यूज चैनल 'न्यूज24' के स्वामित्व वाली कंपनी BAG Films and Media Limited को बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज से बड़ी मंजूरी मिल गई है। कंपनी ने जानकारी दी है कि उसे 98 लाख इक्विटी शेयरों की लिस्टिंग और ट्रेडिंग के लिए दोनों स्टॉक एक्सचेंजों से अंतिम मंजूरी मिल गई है।
कंपनी ने शेयर बाजार को दी सूचना में बताया कि ये शेयर प्रमोटर ग्रुप को प्रेफरेंशियल बेसिस पर जारी किए गए थे। यह शेयर पहले जारी किए गए 98 लाख वारंट्स को इक्विटी शेयरों में बदलने के बाद अलॉट किए गए हैं।
कंपनी के मुताबिक, हर शेयर का फेस वैल्यू 2 रुपये है, जबकि इस पर 6.25 रुपये प्रति शेयर का प्रीमियम लगाया गया है। यानी कुल इश्यू प्राइस 8.25 रुपये प्रति शेयर रहा।
नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ने अपने पत्र में कहा है कि ये नए शेयर 19 मई 2026 से एक्सचेंज पर ट्रेडिंग के लिए उपलब्ध होंगे। वहीं BSE Limited ने भी कंपनी को लिस्टिंग और ट्रेडिंग की मंजूरी दे दी है।
कंपनी ने बताया कि इन शेयरों पर 27 नवंबर 2027 तक लॉक-इन रहेगा। यानी इस अवधि तक प्रमोटर ग्रुप इन शेयरों को बेच नहीं सकेगा।