टीवी पत्रकार अभिषेक उपाध्याय ने नागौर में कूड़े के ढेर पर मिली मासूम बच्ची से जुड़ी घटना का भी किया जिक्र
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समाचार4मीडिया ब्यूरो
‘टीवी 9 भारतवर्ष’ के पूर्व संपादक विनोद कापड़ी के रिपोर्टर के नौकरी छोड़ने के बयान पर पत्रकार अभिषेक उपाध्याय ने करारा जवाब दिया है। अभिषेक उपाध्याय का कहना है- ये विनोद कापड़ी के अर्ध सत्य का जवाब है। उन्होंने Newslaundry के एक कार्यक्रम में दावा किया कि वे मोदी के नॉमिनेशन के दौरान मोदी के खिलाफ सच्ची खबरें करवाने के लिए कह रहे थे, जिसके विरोध में एक रिपोर्टर ने नौकरी छोड़ दी। वे यह साबित करना चाह रहे थे कि वे बतौर सांसद मोदी के बनारस के कामकाज का पर्दाफाश करवाना चाह रहे थे और एक रिपोर्टर ने इसे पीएम के खिलाफ एजेंडा करार देते हुए टीवी 9 भारतवर्ष की नौकरी छोड़ दी।
क्या कहा था विनोद कापड़ी ने ये भी पढ़ें: विनोद कापड़ी ने बताया- हैरानी हुई जब रिपोर्टर ने 'सच्ची कवरेज' पर छोड़ दी नौकरी
अब इस आधे सत्य का बाकी हिस्सा जान लीजिए। विनोद कापड़ी इससे पहले राहुल गांधी और सोनिया गांधी के नॉमिनेशन को पूरे धूम धड़ाके से कवर करवा चुके थे और अपनी मनचाही दो ‘खास’ पार्टियों के खिलाफ तीन स्टोरी रुकवा चुके थे। वे पीएम के बनारस में नॉमिनेशन के दौरान कुछ खास चीजें करवाने पर अड़े थे। इसका एक बेहद हास्यास्पद हिस्सा ये था कि बनारस में अगर किसी की भी एफआईआर न हो रही हो तो उससे कहलाओ कि ये सब मोदी के राज के चलते हो रहा है। गंगा जहां सबसे गंदी हो, उस पानी को बोतल में भरकर लोगों को पिलाओ और पूछो मोदी ने क्या किया? उसी बीच मे अजित अंजुम का भी ‘लिखित’ निर्देश था कि ऐसे 15-20 लोगों की bytes होनी चाहिए, जो ये बोलें कि मोदी के नॉमिनेशन में बाहर से भीड़ आयी थी।
मैंने विनोद कापड़ी से इसी बात का विरोध किया था कि ये टारगेट किलिंग क्यों? अगर यही करना था तो राहुल के नॉमिनेशन में भी अमेठी की टूटी सड़कें दिखा देते। बतौर एडिटर आप ट्विटर की ‘व्यक्तिगत नफरत’ को चैनल पर कैसे उड़ेल सकते हैं? पर वे अड़े रहे और मैंने अगले ही दिन नौकरी छोड़ दी। उन्होंने अब ये क़ुबूल किया है कि मैंने अगले ही दिन नौकरी छोड़ दी थी।
मुझे पीएम या बीजेपी के बारे में कोई खबर करने से क्यों तकलीफ़ होनी थी? कुछ रोज पहले ही मैंने बीजेपी की सबसे बड़ी हिंदुत्व मैस्कॉट साध्वी प्रज्ञा की बाबरी मस्जिद ढहाने वाली वो खबर की थी, जिसके चलते उन पर चुनाव आयोग ने तीन दिन का बैन लगाया था। हां, मुझे सिर्फ और सिर्फ पीएम को टारगेट कर खबर चलाने पर ज़रूर ऐतराज था। हम किसी एजेंडे के लिए यहां नही आए थे!
अब आखिरी बात। यही विनोद कापड़ी, इससे पहले मेरे बारे में ट्वीट कर रहे थे कि मुझे टीवी9 भारतवर्ष से निकाला गया है। ये तब था जब मैंने नागौर में कूड़े के ढेर पर मिली मासूम बच्ची का फिल्म के प्रचार के लिए इस्तेमाल करने के खिलाफ उनका सैद्धांतिक विरोध किया था। ये रहा उनका वो ट्वीट।

अब बता रहे हैं कि मैंने नौकरी छोड़ी थी। इससे सहज अंदाजा लगा सकते हैं कि झूठ कौन बोल रहा था।
विनोद कापड़ी द्वारा दिए गए जिस बयान पर अभिषेक उपाध्याय ने करारा जवाब दिया है, उस स्टोरी को आप यहां क्लिक कर पढ़ सकते हैं।
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भारत की टेलीविजन इंडस्ट्री अब ऐडवर्टाइजिंग के लिहाज से बेहद अहम फेस्टिव सीजन में प्रवेश कर रही है, लेकिन उसकी सबसे बड़ी ऑडियंस करेंसी यानी टीवी रेटिंग्स अभी उपलब्ध नहीं हैं।
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Samachar4media Bureau
इमरान फजल, असिसटेंट एडिटर, एक्सचेंज4मीडिया ।।
भारत की टेलीविजन इंडस्ट्री अब ऐडवर्टाइजिंग के लिहाज से बेहद अहम फेस्टिव सीजन में प्रवेश कर रही है, लेकिन उसकी सबसे बड़ी ऑडियंस करेंसी यानी टीवी रेटिंग्स अभी उपलब्ध नहीं हैं। ऐसे में न्यूज, जनरल एंटरटेनमेंट, फिल्म, स्पोर्ट्स, किड्स और रीजनल टेलीविजन समेत अलग-अलग कैटेगरी की ऐड सेल्स टीम्स के सामने ऐडवर्टाइजर्स को बजट खर्च करने के लिए मनाना मुश्किल होता जा रहा है।
अब यह समस्या सिर्फ न्यूज ब्रॉडकास्टर्स तक सीमित नहीं रह गई है। सूचना और प्रसारण मंत्रालय (MIB) ने 1 जुलाई से टेलीविजन रेटिंग्स के प्रकाशन पर रोक लगा दी है। इसके बाद से पूरा टेलीविजन इकोसिस्टम नए BARC डेटा के बिना काम कर रहा है। यह रोक न्यूज और नॉन-न्यूज दोनों जॉनर पर लागू है और इससे पूरी इंडस्ट्री में मीडिया प्लानिंग और ऐडवर्टाइजिंग डील्स पर असर पड़ा है।
टेलीविजन की ऐड सेल्स टीम्स के सामने फिलहाल सबसे सीधी समस्या यह है कि उनसे ऑडियंस बेचने को कहा जा रहा है, लेकिन उनके पास दिखाने के लिए ऑडियंस के ताजा आंकड़े नहीं हैं।
एक वरिष्ठ टेलीविजन नेटवर्क एग्जीक्यूटिव ने कहा, “हर सेल्स पिच आखिरकार एक ही सवाल पर आकर रुक जाती है, अभी की रीच कितनी है और मौजूदा रेटिंग क्या है? पुराने आंकड़े बातचीत को एक सीमा तक ही आगे ले जा सकते हैं। साप्ताहिक BARC डेटा नहीं होने पर क्लाइंट खासकर अतिरिक्त बजट खर्च करने को लेकर फैसला लेने में हिचकिचा रहा है।”
इसका असर अब ऐडवर्टाइजिंग वॉल्यूम्स में भी दिखाई देने लगा है।
TAM AdEx के आंकड़ों के मुताबिक, न्यूज टीवी पर जुलाई में पिछले चार साल का सबसे कम ऐड वॉल्यूम दर्ज किया गया। अगर जुलाई 2023 को 100 का आधार माना जाए, तो जुलाई 2024 में ऐड वॉल्यूम्स का इंडेक्स घटकर 86 और जुलाई 2025 में 84 रह गया था। जुलाई 2026 में यह और गिरकर 62 पर पहुंच गया। यानी इस अवधि में 38 फीसदी की गिरावट आई है।
मासिक टेलीविजन ऐड वॉल्यूम्स में न्यूज टीवी की हिस्सेदारी भी जनवरी से मई तक इस साल 15 से 17 फीसदी के बीच बनी हुई थी। जून में यह घटकर 13 फीसदी रह गई और जुलाई में और गिरकर सिर्फ 9 फीसदी पर पहुंच गई।
हालांकि ये आंकड़े एक खास जॉनर से जुड़े हैं, लेकिन इंडस्ट्री के अधिकारियों का कहना है कि अब इसके पीछे की समस्या पूरे टेलीविजन सेक्टर में महसूस की जा रही है। GEC, रीजनल एंटरटेनमेंट, मूवी, म्यूजिक और दूसरे जॉनर के ब्रॉडकास्टर्स को भी नए और स्वतंत्र व्यूअरशिप बेंचमार्क के बिना ऐडवर्टाइजिंग डील्स पर बातचीत करनी पड़ रही है।
एक अन्य वरिष्ठ ब्रॉडकास्टर ने कहा, “न्यूज पर इसका असर पहले दिखाई दे रहा है क्योंकि यह ज्यादा बंटा हुआ मार्केट है, लेकिन अब यह सिर्फ न्यूज की समस्या नहीं रह गई है। टेलीविजन की हर सेल्स टीम एक जैसी परेशानी का सामना कर रही है। आप किसी ऐडवर्टाइजर्स को बता सकते हैं कि किसी शो ने पहले एक खास रेटिंग हासिल की थी, लेकिन आप यह साबित नहीं कर सकते कि आज वह शो कितना प्रदर्शन कर रहा है।”
हर सेल्स पिच में गायब है सबसे जरूरी नंबर
BARC की रेटिंग्स पारंपरिक रूप से ब्रॉडकास्टर्स, एजेंसियों और ऐडवर्टाइजर्स के बीच एक कॉमन करेंसी की तरह काम करती हैं। इनकी मदद से मीडिया बायर्स चैनल्स और प्रोग्राम्स की तुलना करते हैं, ऑडियंस डिलीवरी को आंकते हैं और ऐडवर्टाइजिंग इन्वेंट्री की कीमत पर बातचीत करते हैं।
लेकिन अब जब यह करेंसी उपलब्ध नहीं है, तो सेल्स टीम्स अपनी पिच तैयार करने के लिए पुराने BARC प्रदर्शन, चैनल के इंटरनल डेटा, कंज्यूमर रिसर्च, डिजिटल कंजम्पशन के आंकड़ों और दूसरे थर्ड-पार्टी इंडिकेटर्स का इस्तेमाल कर रही हैं।
लेकिन इन सभी आंकड़ों को BARC जैसी अहमियत नहीं मिल रही है।
एक मीडिया एजेंसी के सीनियर एग्जिक्यूटिव ने कहा, “ऐडवर्टाइजर्स यह नहीं कह रहे हैं कि टेलीविजन काम नहीं करता। उनका कहना है कि उनके पास जोखिम की सही कीमत तय करने के लिए पर्याप्त जानकारी नहीं है। अगर मुझे ऐसे माध्यम में पैसा लगाना है, जहां मौजूदा प्रदर्शन का डेटा उपलब्ध है और ऐसे माध्यम में जहां सबसे नए स्वतंत्र आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं, तो फैसला लेना काफी मुश्किल हो जाता है।”
यह स्थिति उन चैनल्स के लिए खास तौर पर मुश्किल है, जिन्होंने हाल में अपनी ऑडियंस बढ़ाई है या नए प्रोग्राम लॉन्च किए हैं। पुराने रेटिंग आंकड़े किसी चैनल की मौजूदा स्थिति को सही तरीके से नहीं दिखा सकते। वहीं नए शो के पास BARC का कोई पुराना रिकॉर्ड ही नहीं है।
इसका फायदा टेलीविजन के पुराने और स्थापित प्रोग्राम्स को भी मिल सकता है। प्रोग्रामिंग से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि ब्लैकआउट के कारण ब्रॉडकास्टर्स कंटेंट से जुड़े फैसले लेते समय पुराने प्रदर्शन और ब्रांड की मजबूती पर ज्यादा भरोसा करने को मजबूर हो रहे हैं। ऐसे में कुछ ज्यादा जोखिम वाले नए शो के लॉन्च को टाला भी जा सकता है।
ऐडवर्टाइजर्स मांग रहे ज्यादा सबूत और ज्यादा डिस्काउंट
रेटिंग्स की गैरमौजूदगी ने ऐडवर्टाइजिंग डील्स की बातचीत का तरीका भी बदल दिया है।
ब्रॉडकास्टर्स को अब ज्यादा ऐडवर्टाइजर्स ऑडियंस डिलीवरी के अतिरिक्त सबूत, कस्टमाइज्ड इंटीग्रेशन और परफॉर्मेंस से जुड़े अरेंजमेंट मांगते नजर आ रहे हैं। यानी सिर्फ स्पॉट इन्वेंट्री खरीदने के बजाय वे ज्यादा वैल्यू चाहते हैं।
एक वरिष्ठ एजेंसी एग्जीक्यूटिव ने कहा, “पहले बातचीत रेटिंग पॉइंट और कॉस्ट प्रति रेटिंग पॉइंट के आसपास होती थी। अब बात इस पर ज्यादा हो रही है कि ब्रॉडकास्टर हमें और क्या दे सकता है, इंटीग्रेशन, स्पॉन्सरशिप, डिजिटल एक्सटेंशन या गारंटी। कॉमन करेंसी नहीं होने से बातचीत ऑडियंस डिलीवरी से हटकर रिस्क मैनेजमेंट की तरफ जा रही है।”
कुछ ब्रॉडकास्टर्स को कीमतों को लेकर भी दबाव का सामना करना पड़ रहा है, क्योंकि ऐडवर्टाइजर्स इस अनिश्चितता के बीच अपने पैसे की ज्यादा वैल्यू चाहते हैं। इंडस्ट्री के अधिकारियों का कहना है कि ऑब्जेक्टिव रेटिंग डेटा की कमी का असर फेस्टिव सीजन के दौरान प्रीमियम टेलीविजन इन्वेंट्री की कीमतों पर होने वाली बातचीत में भी दिख रहा है।
यह दबाव ऐसे समय आया है जब टेलीविजन ऐडवर्टाइजिंग मार्केट पहले से ही कई चुनौतियों का सामना कर रहा है। FMCG कंपनियों के खर्च में नरमी, मैक्रोइकोनॉमिक अनिश्चितता और अतिरिक्त वीडियो बजट का डिजिटल वीडियो व कनेक्टेड टीवी की ओर जाना पहले से ही टीवी पर दबाव बना रहा है। ऐसे में रेटिंग्स का ब्लैकआउट मार्केट में एक और परेशानी जोड़ रहा है।
जुलाई की कमजोरी: ब्लैकआउट का असर या सामान्य सीजनल गिरावट?
इंडस्ट्री में इस बात को लेकर भी अलग-अलग राय है कि जुलाई में ऐड वॉल्यूम में आई गिरावट का कितना हिस्सा सीधे तौर पर रेटिंग्स ब्लैकआउट से जुड़ा है।
मीडिया एजेंसियों का कहना है कि जुलाई आमतौर पर ऐडवर्टाइजिंग के लिहाज से थोड़ा कमजोर महीना होता है। मानसून में देरी का असर FMCG, रिटेल और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स जैसी कैटेगरी पर पड़ सकता है। इसके अलावा ऐडवर्टाइजर्स अब अपने वीडियो बजट को टेलीविजन, YouTube, कनेक्टेड टीवी और OTT प्लेटफॉर्म के बीच तेजी से बांट रहे हैं।
एक वरिष्ठ मीडिया प्लानर ने कहा, “जुलाई में अपनी सीजनलिटी होती है, इसलिए पूरी गिरावट का कारण BARC को बताना सही नहीं होगा। लेकिन ब्लैकआउट ने पहले से कमजोर मार्केट को और मुश्किल बना दिया है। जब बजट पर दबाव होता है, तो ऐडवर्टाइजर्स टेलीविजन पर पैसा लगाने से पहले ज्यादा मजबूत सबूत चाहते हैं।”
हालांकि, ब्रॉडकास्टर्स का कहना है कि जिस समय ऐडवर्टाइजर्स अपने सबसे बड़े कैंपेन की प्लानिंग शुरू कर रहे हैं, उसी समय रेटिंग उपलब्ध नहीं होने से टेलीविजन को एक संरचनात्मक नुकसान हो रहा है।
एक टेलीविजन नेटवर्क के सेल्स हेड ने कहा, “सीजनलिटी कुछ कमजोरी को समझा सकती है। लेकिन यह नहीं समझा सकती कि हर सेल्स बातचीत पहले से ज्यादा लंबी और जटिल क्यों हो गई है। सबसे बड़ी समस्या यह है कि कोई ऐसा कॉमन नंबर नहीं है, जिस पर सभी सहमत हो सकें।”
फेस्टिव सीजन होगा असली टेस्ट
ब्रॉडकास्टर्स की सबसे बड़ी चिंता जुलाई को लेकर नहीं, बल्कि आने वाले महीनों को लेकर है।
अगस्त से दिसंबर तक का समय आमतौर पर टेलीविजन के लिए ऐडवर्टाइजिंग के लिहाज से सबसे महत्वपूर्ण दौर में से एक होता है। इस दौरान फेस्टिव सीजन की खरीदारी, नए प्रोग्राम, बड़े रियलिटी शो और प्रीमियम स्पॉन्सरशिप के मौके ऐडवर्टाइजिंग मार्केट को गति देते हैं।
लेकिन इस साल ब्रॉडकास्टर्स इस महत्वपूर्ण दौर में ऐसे समय प्रवेश कर रहे हैं, जब उनके पास वह साप्ताहिक रेटिंग डेटा नहीं है, जो आमतौर पर कीमत तय करने और प्रोग्रामिंग से जुड़े फैसलों का आधार होता है।
रेटिंग्स का ब्लैकआउट ऐडवर्टाइजर्स को ऐसे प्लेटफॉर्म की ओर देखने के लिए भी प्रेरित कर रहा है, जहां कैंपेन की परफॉर्मेंस को ज्यादा तेजी और बारीकी से मापा जा सकता है। इंडस्ट्री से जुड़े जानकारों ने चेतावनी दी है कि अगर फेस्टिव सीजन की प्लानिंग के दौरान टेलीविजन के पास मान्यता प्राप्त और भरोसेमंद मेजरमेंट करेंसी नहीं रहती है, तो डिजिटल प्लेटफॉर्म को इसका फायदा मिल सकता है।
GEC ब्रॉडकास्टर्स के लिए समस्या खास तौर पर बड़ी है, क्योंकि नए फिक्शन, रियलिटी और नॉन-फिक्शन प्रोग्राम लॉन्च किए जाने की तैयारी चल रही है। स्पोर्ट्स नेटवर्क के सामने चुनौती थोड़ी अलग है। उन्हें ताजा इंडस्ट्री-वाइड व्यूअरशिप बेंचमार्क के बिना महंगे स्पोर्ट्स राइट्स और प्रीमियम इन्वेंट्री की कीमत को सही ठहराना होगा।
रीजनल ब्रॉडकास्टर्स के सामने एक और चुनौती है, क्योंकि पुराने रेटिंग आंकड़े मौजूदा समय में अलग-अलग मार्केटों में ऑडियंस के बदलाव को सही तरीके से नहीं दिखा सकते।
वहीं न्यूज ब्रॉडकास्टर्स के लिए जुलाई के आंकड़े इस बात का शुरुआती संकेत दे रहे हैं कि रेटिंग्स को लेकर बनी अनिश्चितता ऐडवर्टाइजिंग पर कितना असर डाल सकती है।
अब पूरी इंडस्ट्री की नजर अगस्त पर है। अगर फेस्टिव कैंपेन शुरू होने के साथ टेलीविजन के ऐड वॉल्यूम में सुधार आता है, तो ब्रॉडकास्टर्स यह कह सकते हैं कि जुलाई की कमजोरी मुख्य रूप से सीजनल थी।
लेकिन अगर अलग-अलग जॉनर में कमजोरी बनी रहती है, तो रेटिंग्स ब्लैकआउट को सिर्फ मेजरमेंट में आई रुकावट नहीं, बल्कि ऐडवर्टाइजिंग के पैसे को लीनियर टेलीविजन से दूर ले जाने वाले एक कारण के तौर पर भी देखा जा सकता है।
फिलहाल टेलीविजन इंडस्ट्री अपना काम जारी रखे हुए है, लेकिन उसकी सेल्स टीम्स असल में बिना उस स्कोरबोर्ड के एयरटाइम बेच रही हैं, जो लंबे समय से यह तय करता आया है कि उस एयरटाइम की असली कीमत कितनी है।
स्वतंत्रता दिवस समारोह को दिव्यांगजनों के लिए और ज्यादा सुलभ बनाने की दिशा में सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (MIB) ने निजी सैटेलाइट टीवी चैनलों से खास अपील की है।
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Samachar4media Bureau
स्वतंत्रता दिवस समारोह को दिव्यांगजनों के लिए और ज्यादा सुलभ बनाने की दिशा में सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (MIB) ने निजी सैटेलाइट टीवी चैनलों से खास अपील की है। मंत्रालय ने सभी निजी टीवी चैनलों से कहा है कि वे स्वतंत्रता दिवस के प्रमुख कार्यक्रमों का लाइव प्रसारण साइन लैंग्वेज इंटरप्रिटेशन के साथ करें, ताकि सुनने में कठिनाई वाले लोग भी इन राष्ट्रीय कार्यक्रमों से जुड़ सकें।
मंत्रालय ने 13 अगस्त को जारी एक एडवाइजरी में कहा कि पिछले कुछ वर्षों से सिविल सोसायटी के सदस्यों की ओर से लगातार यह मांग की जा रही थी कि स्वतंत्रता दिवस समारोह और उसकी कमेंट्री को साइन लैंग्वेज के जरिए उपलब्ध कराया जाए। इसका मकसद यह है कि सुनने में कठिनाई वाले लोग भी देश के इस महत्वपूर्ण राष्ट्रीय समारोह का हिस्सा बन सकें।
14 अगस्त को राष्ट्रपति का संदेश होगा लाइव
मंत्रालय के मुताबिक, राष्ट्रपति का राष्ट्र के नाम संदेश 14 अगस्त 2026 को शाम 7 बजे प्रसारित किया जाएगा। इसका लाइव प्रसारण पूरे दूरदर्शन नेटवर्क पर होगा।
निजी सैटेलाइट टीवी चैनल दूरदर्शन नेटवर्क की इस फीड को बिना किसी शुल्क के अपने चैनल पर प्रसारित कर सकते हैं।
15 अगस्त को लाल किले से पीएम का संबोधन
स्वतंत्रता दिवस के दिन यानी 15 अगस्त 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लाल किले की प्राचीर से ध्वजारोहण और देश को संबोधित करेंगे। मंत्रालय के मुताबिक, इस कार्यक्रम का लाइव प्रसारण सुबह करीब 6:25 बजे से 9 बजे तक या कार्यक्रम खत्म होने तक किया जाएगा।
इस कार्यक्रम का प्रसारण डीडी भारती पर साइन लैंग्वेज इंटरप्रिटेशन के साथ किया जाएगा। इससे सुनने में कठिनाई वाले लोगों को प्रधानमंत्री के संबोधन और समारोह को समझने में मदद मिलेगी।
निजी चैनलों को फीड मुफ्त में मिलेगी
MIB ने साफ किया है कि दूरदर्शन नेटवर्क की फीड निजी सैटेलाइट टीवी चैनलों के लिए फ्री ऑफ कॉस्ट उपलब्ध कराई जा रही है। मंत्रालय ने चैनलों से आग्रह किया है कि वे राष्ट्रपति के संदेश और स्वतंत्रता दिवस समारोह का लाइव प्रसारण दूरदर्शन की इसी फीड के जरिए करें और साइन लैंग्वेज इंटरप्रिटेशन को भी शामिल करें।
मंत्रालय ने कहा कि ऐसा करने से दिव्यांगजनों के लिए राष्ट्रीय कार्यक्रमों की पहुंच बढ़ेगी और स्वतंत्रता दिवस समारोह को ज्यादा से ज्यादा लोगों के लिए समावेशी बनाया जा सकेगा।
यह एडवाइजरी सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के अंडर सेक्रेटरी नवनीत कुमार की ओर से जारी की गई है। इसकी कॉपी इंडियन ब्रॉडकास्टिंग एंड डिजिटल फाउंडेशन (IBDF), न्यूज ब्रॉडकास्टर्स फेडरेशन (NBF) और अन्य न्यूज ब्रॉडकास्टर एसोसिएशनों को भी भेजी गई है।
इस साल की शुरुआत में OTT मंचों के लिए सुगम्यता संबंधी दिशा-निर्देशों को अंतिम रूप देने के बाद अब सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (MIB) टेलीविजन ब्रॉडकास्टर्स के लिए भी नई व्यवस्था पर विचार कर रहा है।
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इमरान फैजल, असिसटेंट एडिटर, एक्सचेंज4मीडिया ।।
इस साल की शुरुआत में OTT मंचों के लिए सुगम्यता संबंधी दिशा-निर्देशों को अंतिम रूप देने के बाद अब सूचना एवं ब्रॉडकास्ट मंत्रालय (MIB) टेलीविजन ब्रॉडकास्टर्स के लिए भी नई व्यवस्था पर विचार कर रहा है। मामले की जानकारी रखने वाले लोगों के मुताबिक, इसमें नियमों को लागू करने की समयसीमा में बदलाव और कुछ तकनीकी सुगम्यता संबंधी जरूरतों (technical accessibility requirements) को दोबारा तय करने पर विचार किया जा सकता है।
बताया जा रहा है कि प्रस्तावित नई व्यवस्था में टेलीविजन ब्रॉडकास्टर्स और डिस्ट्रीब्यूशन प्लेटफॉर्म ऑपरेटर्स (DPOs) को 2019 में मंत्रालय की ओर से जारी किए गए सुगम्यता मानकों को लागू करने में आई दिक्कतों को ध्यान में रखा जाएगा।
नई व्यवस्था में नियमों का पालन करने के लिए ज्यादा स्पष्ट समयसीमा दी जा सकती है। साथ ही कुछ ऐसी जरूरतों को आसान या तर्कसंगत बनाया जा सकता है, जिससे पूरे टेलीविजन डिस्ट्रीब्यूशन चेन में इन नियमों को व्यावहारिक तरीके से लागू किया जा सके।
यह कदम ऐसे समय में आया है जब सरकार ने फरवरी 2026 में OTT मंचों के लिए सुगम्यता संबंधी दिशा-निर्देश जारी किए थे। इसके लिए 2025 में प्रस्तावित नियमों के साथ विचार-विमर्श की प्रक्रिया शुरू हुई थी। अंतिम OTT व्यवस्था में नए प्रकाशित होने वाले कार्यक्रमों में सुगम्यता सुविधाओं को लागू करने के लिए एक तय समय-सारिणी दी गई है।
मंत्रालय ने पहली बार 11 सितंबर 2019 को दिव्यांग व्यक्तियों के लिए टेलीविजन कार्यक्रमों की सुगम्यता के मानक जारी किए थे। ये मानक दिव्यांग व्यक्तियों के अधिकार अधिनियम, 2016 के तहत तैयार किए गए थे। इनका उद्देश्य सुनने में परेशानी वाले लोगों के लिए टेलीविजन की पहुंच को बेहतर बनाना था।
2019 की व्यवस्था में तुरंत पूरी तरह नियम लागू करने के बजाय चरणबद्ध तरीके से इन्हें लागू करने की योजना बनाई गई थी। इसके तहत निजी गैर-न्यूज ब्रॉडकास्टर्स को शुरुआत में सप्ताह में एक कार्यक्रम कैप्शन यानी लिखित संवाद के साथ प्रसारित करना था। वहीं निजी न्यूज ब्रॉडकास्टर्स को रोजाना सांकेतिक भाषा में न्यूज बुलेटिन शुरू करने थे। इसके बाद आने वाले वर्षों में सुगम सामग्री का अनुपात धीरे-धीरे बढ़ाने की योजना थी।
हालांकि, पूरे टेलीविजन तंत्र में इन नियमों को लागू करना आसान नहीं रहा। इसकी एक बड़ी वजह यह है कि सुगम्यता की जिम्मेदारी सिर्फ ब्रॉडकास्टर्स तक सीमित नहीं है। 2019 के दस्तावेज में सेवा प्रदाताओं की परिभाषा में ब्रॉडकास्टर्स के साथ-साथ केबल और उपग्रह नेटवर्क संचालकों तथा अन्य डिस्ट्रीब्यूशन कंपनियों को भी शामिल किया गया था।
इसमें दृश्य-श्रव्य सामग्री की पूरी सीरीज की जटिलता को भी स्वीकार किया गया था और सामग्री बनाने वालों, ब्रॉडकास्टर्स और डिस्ट्रीब्यूशन कंपनियों के बीच तालमेल की जरूरत बताई गई थी।
पुरानी तकनीक और कई पक्षों के कारण नियम लागू करना मुश्किल
इंडस्ट्री के सामने सबसे बड़ी दिक्कतों में से एक यह रही है कि सुगम्यता से जुड़ी सुविधाओं का सही तरीके से काम करना पूरी डिस्ट्रीब्यूशन सीरीज पर निर्भर करता है। इसमें सामग्री तैयार करने से लेकर उसे प्रसारित करने, डिस्ट्रीब्यूशन करने और आखिर में दर्शक के टेलीविजन या सेट-टॉप बॉक्स तक पहुंचाने की प्रक्रिया शामिल है।
2019 के मानकों में भी तकनीकी दिक्कतों को स्वीकार किया गया था और इन्हें चरणबद्ध तरीके से लागू करने की योजना बनाई गई थी। इसमें टेलीविजन और सेट-टॉप बॉक्स में कैप्शन, उपशीर्षक और सांकेतिक भाषा की सुविधा को आसानी से इस्तेमाल करने की व्यवस्था करने की बात कही गई थी। रिमोट और दूसरे नियंत्रण उपकरणों में भी सुगम्यता सुविधाओं का समर्थन करने की उम्मीद की गई थी।
एक ब्रॉडकास्ट नेटवर्क के वरिष्ठ अधिकारी ने नाम जाहिर नहीं करने की शर्त पर कहा, “सुगम्यता किसी प्रसारक के लिए केवल एक जगह पर नियमों का पालन करने का मामला नहीं है। प्रसारक कैप्शन या सांकेतिक भाषा वाली फीड तैयार कर सकता है, लेकिन यह संकेत डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क से होकर गुजरता है और आखिर में दर्शक के उपकरण में भी इसका समर्थन होना जरूरी है। इस पूरी सीरीज में कहीं भी तालमेल नहीं हुआ तो यह सुविधा प्रभावी नहीं रह जाती।”
इंडस्ट्री से जुड़े अधिकारियों के मुताबिक, डिस्ट्रीब्यूशन प्लेटफॉर्म ऑपरेटर्स को भी पुराने मुख्य डिस्ट्रीब्यूशन केंद्रों और सेट-टॉप बॉक्स के बुनियादी ढांचे को बेहतर करने तथा यह सुनिश्चित करने में दिक्कतों का सामना करना पड़ा है कि सुगम्यता से जुड़े संकेत बिना किसी रुकावट के दर्शकों तक पहुंचें।
एक डिस्ट्रीब्यूशन मंच से जुड़े अधिकारी ने पहचान जाहिर नहीं करने की शर्त पर कहा, “सबसे बड़ी चुनौती अलग-अलग प्रणालियों के बीच तालमेल की रही है। बाजार में सेट-टॉप बॉक्स और डिस्ट्रीब्यूशन प्रणालियों की कई पीढ़ियां मौजूद हैं। सामग्री के स्तर पर जो जरूरत आसान दिखाई देती है, उसे डिस्ट्रीब्यूशन के स्तर पर लागू करने के लिए काफी परीक्षण और तकनीकी बदलाव की जरूरत पड़ सकती है।”
2019 के मानकों में खास तौर पर कहा गया था कि मंत्रालय टेलीविजन सेवाओं और उपकरणों के बीच तालमेल सुनिश्चित करने के लिए दिशा-निर्देश जारी कर सकता है, ताकि दर्शक सुगम्यता से जुड़ी सेवाओं को प्राप्त, समझ और अपनी स्क्रीन पर देख सकें।
मंत्रालय ज्यादा व्यावहारिक समयसीमा पर कर सकता है विचार
प्रस्तावित समीक्षा में ब्रॉडकास्टर्स के लिए नियमों का पालन करने की समय-सारिणी को ज्यादा स्पष्ट और पहले से तय करने पर जोर दिया जा सकता है। खास तौर पर उन मामलों में जहां कार्यक्रम बनाने की प्रक्रिया, ब्रॉडकास्ट व्यवस्था, पुरानी सामग्री के भंडार और डिस्ट्रीब्यूशन ढांचे में बदलाव की जरूरत होती है।
2019 के मानकों में पहले से ही यह माना गया था कि तकनीकी दिक्कतों के कारण चरणबद्ध तरीके से नियम लागू करना जरूरी होगा। इसमें उन चैनल्स को छूट दी गई थी जिनकी 12 महीने की औसत दर्शक हिस्सेदारी 1 प्रतिशत से कम थी। ऐसे चैनल्स को यह सीमा पार करने के बाद मानकों को लागू करने के लिए तीन महीने का समय दिया गया था।
न्यूज चैनल्स को छोड़कर निजी ब्रॉडकास्टर्स के लिए शुरुआत में सप्ताह में एक कार्यक्रम कैप्शन के साथ प्रसारित करने की व्यवस्था थी। वहीं लंबे समय की योजना में कार्यक्रमों के काफी बड़े हिस्से के लिए सुगम्यता सुविधाएं उपलब्ध कराने की बात कही गई थी। विदेशी भाषा के अंग्रेजी चैनल्स के लिए अलग लक्ष्य रखा गया था, जिसमें 80 प्रतिशत तक सामग्री को सुगम बनाने की बात थी।
ब्रॉडकास्ट इंडस्ट्री के एक अन्य वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, “2019 के मानकों की मंशा पर कभी सवाल नहीं था। दिक्कत यह थी कि इंडस्ट्री को ज्यादा स्पष्ट योजना चाहिए थी कि प्रसारक को क्या करना है, डिस्ट्रीब्यूशन मंच संचालक को क्या करना है और टेलीविजन या सेट-टॉप बॉक्स की व्यवस्था पर क्या निर्भर करता है। नई व्यवस्था में जिम्मेदारियां ज्यादा स्पष्ट तरीके से तय की जा सकती हैं।”
सामग्री से जुड़ी जरूरतों को भी आसान बनाया जा सकता है
2019 की व्यवस्था में यह भी माना गया था कि हर तरह के कार्यक्रमों को एक जैसे नियमों के तहत नहीं रखा जा सकता। लाइव और पहले से रिकॉर्ड किए गए खेल कार्यक्रम, लाइव न्यूज, संगीत कार्यक्रम, पुरस्कार समारोह, लाइव रियलिटी कार्यक्रम और कुछ अन्य तरह की सामग्री को उनकी प्रकृति के कारण नियमों से छूट दी गई थी। विज्ञापनों और टेलीशॉपिंग को भी इससे बाहर रखा गया था।
इंडस्ट्री से जुड़े अधिकारियों को उम्मीद है कि नई व्यवस्था में भी सुगम्यता के मूल उद्देश्य को बरकरार रखा जाएगा, लेकिन अलग-अलग कार्यक्रमों और उन्हें तैयार करने की वास्तविक परिस्थितियों को देखते हुए ज्यादा लचीलापन दिया जा सकता है।
एक टेलीविजन प्रसारक के वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, “लाइव सामग्री पहले से रिकॉर्ड किए गए कार्यक्रम से बिल्कुल अलग होती है। रिकॉर्ड किए गए कार्यक्रम के लिए कैप्शन पहले से तैयार किए जा सकते हैं, उनकी गुणवत्ता जांची जा सकती है और उन्हें कार्यक्रम के साथ सही तरीके से मिलाया जा सकता है। लेकिन लाइव कार्यक्रम, खासकर न्यूज और दूसरे आयोजनों में तकनीक, कम समय में तैयारी और सटीकता की जरूरत बिल्कुल अलग होती है।”
2019 के मानकों में उदाहरण के तौर पर पहले से रिकॉर्ड किए गए कार्यक्रमों के कैप्शन की सटीकता जांचने की बात कही गई थी। वहीं लाइव कैप्शन के लिए लिखित सामग्री और विशेष शब्दावली पहले से तैयार करने तथा बोलने और कैप्शन के बीच सही तालमेल रखने की जरूरत बताई गई थी।
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टेलीविजन की नई व्यवस्था में OTT के अनुभव से मिल सकती है मदद
टेलीविजन के नियमों की यह समीक्षा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि सरकार अब OTT मंचों के लिए अलग सुगम्यता व्यवस्था तैयार कर चुकी है। अंतिम OTT दिशा-निर्देश 6 फरवरी 2026 को जारी किए गए थे। इससे पहले अक्टूबर 2025 में प्रस्तावित नियमों को विचार-विमर्श के लिए जारी किया गया था। अंतिम व्यवस्था में नई सामग्री के लिए सुगम्यता सुविधाओं को लागू करने की समय-सारिणी दी गई है।
अंतिम OTT व्यवस्था में प्रस्तावित शुरुआती नियमों की तुलना में कुछ बदलाव भी किए गए। सरकार ने नियम लागू करने के लिए ज्यादा समय दिया और पुरानी सामग्री के संग्रह के मामले में ‘सर्वोत्तम प्रयास’ वाला तरीका अपनाया।
टेलीविजन क्षेत्र के लिए भी यही तरीका एक उदाहरण बन सकता है। इसकी वजह यह है कि भारत में बड़ी संख्या में पुराने टेलीविजन और सेट-टॉप बॉक्स इस्तेमाल हो रहे हैं। ऐसे में सभी उपकरणों में एक साथ तकनीकी बदलाव करना आसान नहीं होगा।
ब्रॉडकास्ट इंडस्ट्री के एक अधिकारी ने कहा, “OTT के मामले में यह सामने आया है कि सुगम्यता से जुड़े नियमों को स्पष्ट चरणों में लागू किया जा सकता है। पूरी व्यवस्था से एक साथ नियमों का पालन करने की उम्मीद नहीं करनी चाहिए। टेलीविजन इससे भी ज्यादा जटिल है क्योंकि इसमें ब्रॉडकास्टर्स, डिस्ट्रीब्यूशन प्लेटफॉर्म ऑपरेटर्स, उपकरण बनाने वाली कंपनियों और दर्शकों, सभी की भूमिका होती है।”
मंत्रालय के 2019 के टेलीविजन मानकों में तय लक्ष्य, निगरानी व्यवस्था और समय-समय पर समीक्षा की भी बात कही गई थी। दस्तावेज में कहा गया था कि तेजी से बदलती तकनीक और बाजार की परिस्थितियों को देखते हुए नीति की हर दो साल में समीक्षा की जानी चाहिए।
ऐसे में प्रस्तावित नई व्यवस्था का उद्देश्य सुगम्यता के मूल लक्ष्य को बनाए रखते हुए भारत के अलग-अलग हिस्सों और कई स्तरों वाले टेलीविजन तंत्र में नियमों के पालन की व्यवस्था को ज्यादा व्यावहारिक बनाना हो सकता है।
ब्रॉडकास्टर्स को उम्मीद है कि संशोधित व्यवस्था में उन्हें नियम लागू करने के लिए पर्याप्त बदलाव का समय मिलेगा। साथ ही ब्रॉडकास्टर्स और डिस्ट्रीब्यूशन प्लेटफॉर्म ऑपरेटर्स के बीच जिम्मेदारियां ज्यादा स्पष्ट होंगी और सुगम्यता के लक्ष्य को पूरा करने के लिए पुराने तकनीकी ढांचे में अचानक बड़े बदलाव करने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
राज टेलीविजन नेटवर्क (Raj Television Network Limited) के बोर्ड ने भारती श्रीधर को कंपनी के बोर्ड में स्वतंत्र निदेशक के तौर पर दोबारा नियुक्त करने की मंजूरी दे दी है।
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Vikas Saxena
राज टेलीविजन नेटवर्क (Raj Television Network Limited) के बोर्ड ने भारती श्रीधर को कंपनी के बोर्ड में स्वतंत्र निदेशक के तौर पर दोबारा नियुक्त करने की मंजूरी दे दी है।
बोर्ड की बैठक में नामांकन और पारिश्रमिक समिति (Nomination and Remuneration Committee) की सिफारिश के आधार पर भारती श्रीधर को दूसरे कार्यकाल के लिए पांच साल तक स्वतंत्र निदेशक बनाए रखने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है। उनकी नई नियुक्ति 1 अप्रैल 2027 से 31 मार्च 2032 तक रहेगी। हालांकि, यह पुनर्नियुक्ति कंपनी के सदस्यों यानी शेयरधारकों की मंजूरी के अधीन है।
भारती श्रीधर का मौजूदा कार्यकाल 31 मार्च 2027 को खत्म हो रहा है। इसके बाद उनका दूसरा पांच साल का कार्यकाल शुरू होगा।
कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया है कि भारती श्रीधर को किसी भी नियामकीय आदेश के तहत डायरेक्टर का पद संभालने से प्रतिबंधित नहीं किया गया है और कंपनी के किसी भी अन्य डायरेक्टर के साथ पारिवारिक या अन्य कोई संबंध नहीं है।
भारती श्रीधर को मीडिया और एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में दो दशक से ज्यादा का अनुभव है। वह अंग्रेजी साहित्य में स्नातक हैं और विभिन्न मीडिया प्लेटफॉर्म्स के साथ लंबे समय तक जुड़ाव के जरिए टेलीविजन और ब्रॉडकास्टिंग सेक्टर का व्यापक अनुभव रखती हैं। इसके अलावा, वह ज्योतिष और न्यूमरोलॉजी की प्रैक्टिशनर और काउंसलर भी हैं। उन्हें Media Communication, Audience Engagement और इंडस्ट्री में बदलते ट्रेंड्स की अच्छी समझ है।
उनका विविध प्रोफेशनल एक्सपीरियंस और मीडिया इंडस्ट्री की जानकारी कंपनी के रणनीतिक फैसलों और कारोबार से जुड़े मामलों में उपयोगी साबित हो सकती है।
Raj Television Network ने कहा है कि भारती श्रीधर की पुनर्नियुक्ति को कंपनी के सदस्यों की मंजूरी मिलना जरूरी है। शेयरधारकों की मंजूरी मिलने के बाद वह 1 अप्रैल 2027 से कंपनी के बोर्ड में स्वतंत्र निदेशक के तौर पर अपना दूसरा पांच साल का कार्यकाल शुरू करेंगी।
वरिष्ठ पत्रकार अदिति नागर (Aditi Nagar) को न्यूज24 (News24) में एग्जिक्यूटिव एडिटर (Executive Editor) नियुक्त किया गया है। वह ‘सबसे बड़ा सवाल’ भी होस्ट करेंगी।
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Samachar4media Bureau
न्यूज24 (News24) ने वरिष्ठ पत्रकार अदिति नागर (Aditi Nagar) को एग्जिक्यूटिव एडिटर–पॉलिटिकल (Executive Editor – Political) नियुक्त किया है। नई जिम्मेदारी के साथ वह चैनल के प्रमुख प्राइम टाइम डिबेट शो ‘सबसे बड़ा सवाल’ (Sabse Bada Sawal) को भी होस्ट करेंगी।
न्यूज24 से जुड़ने से पहले अदिति नागर भारत24 (Bharat24) में पॉलिटिकल एडिटर (Political Editor) और फर्स्ट इंडिया न्यूज (First India News) में एडिटर (Editor) के पद पर काम कर चुकी हैं।
न्यूज24 के मैनेजिंग एडिटर (Managing Editor) मानक गुप्ता (Manak Gupta) ने अदिति नागर की नियुक्ति पर खुशी जताई। उन्होंने कहा कि अदिति के पास राजनीति की गहरी समझ, न्यूजरूम का लंबा अनुभव और मजबूत संपादकीय नजरिया है। उनका अनुभव और स्पष्ट आवाज ‘सबसे बड़ा सवाल’ को एक नई दिशा देने के साथ न्यूज24 के प्राइम टाइम को भी मजबूत करेगी।
अदिति नागर ने कहा कि वह न्यूज24 से जुड़कर ‘सबसे बड़ा सवाल’ की जिम्मेदारी संभालने को लेकर उत्साहित हैं। उन्होंने कहा कि भरोसेमंद पत्रकारिता का काम ऐसे सवाल उठाना है जो जरूरी हों और दर्शकों को स्पष्ट जानकारी, संदर्भ और अलग-अलग नजरिए उपलब्ध कराएं।
उन्होंने आगे कहा कि वह शो की मजबूत पहचान को आगे बढ़ाने और टेलीविजन के साथ-साथ डिजिटल प्लेटफॉर्म पर दर्शकों से जुड़ने की कोशिश करेंगी।
सोनी पिक्चर्स नेटवर्क्स इंडिया को उम्मीद है कि डायरेक्ट-टू-होम (DTH) ऑपरेटर Tata Play के साथ उसके टीवी चैनलों की उपलब्धता को लेकर चल रहा लंबा कानूनी विवाद जारी फेस्टिव सीजन के दौरान सुलझ सकता है।
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Samachar4media Bureau
इमरान फजल, असिसटेंट एडिटर, एक्सचेंज4मीडिया ।।
सोनी पिक्चर्स नेटवर्क्स इंडिया (SPNI) को उम्मीद है कि डायरेक्ट-टू-होम (DTH) ऑपरेटर Tata Play के साथ उसके टीवी चैनलों की उपलब्धता को लेकर चल रहा लंबा कानूनी विवाद जारी फेस्टिव सीजन के दौरान सुलझ सकता है। SPNI के मैनेजिंग डायरेक्टर व चीफ एग्जिक्यूटिव ऑफिसर गौरव बनर्जी ने यह उम्मीद जताई है।
गौरव बनर्जी की यह उम्मीद सोनी पिक्चर्स नेटवर्क्स इंडिया के लिए अहम समय पर आई है। ब्रॉडकास्टर फेस्टिव सीजन में बड़े एंटरटेनमेंट और स्पोर्ट्स प्रोग्रामिंग के साथ उतर रहा है। लेकिन Tata Play के साथ विवाद अभी भी ट्रिब्यूनल में चल रहा है। ऐसे में सवाल ये हैं कि क्या फेस्टिव सीजन की मांग दोनों पक्षों को एक बार फिर साथ आने के लिए पर्याप्त वजह दे सकती है? क्या फेस्टिव सीजन आखिरकार सोनी पिक्चर्स नेटवर्क्स इंडिया और Tata Play के बीच लंबे समय से चल रहे विवाद को खत्म कर देगा?
गौरव बनर्जी को ऐसा लगता है, जब उनसे पूछा गया कि क्या मौजूदा फेस्टिव सीजन Sony के टीवी चैनलों की Tata Play के DTH प्लेटफॉर्म पर उपलब्धता को लेकर चल रही कानूनी लड़ाई को खत्म कर सकता है, तो गौरव बनर्जी ने कहा, “मुझे उम्मीद है।”
जब उनसे पूछा गया कि क्या Sony अपने बड़े प्रोग्रामिंग लाइनअप के साथ टीवी पर वापसी करते हुए Tata Play के बड़े चैनल पैक्स में फिर से शामिल होगा, तो उन्होंने कहा, “मुझे उम्मीद है। वैसे भी, हर कोई चैनल मांग सकता है और उसे पा सकता है।” गौरव बनर्जी ने यहां चैनलों की आ ला कार्टे के आधार पर उपलब्धता की ओर इशारा किया।
गौरव बनर्जी के शब्दों पर गौर करना जरूरी है। उन्होंने किसी समझौते की घोषणा नहीं की, बातचीत की स्थिति के बारे में कोई जानकारी नहीं दी और न ही चैनलों की वापसी के लिए कोई समयसीमा बताई। हालांकि, उनकी उम्मीद ऐसे समय में सामने आई है जब इस विवाद की आर्थिक अहमियत टीवी कैलेंडर के सबसे महत्वपूर्ण दौरों में से एक के साथ जुड़ रही है।
इसलिए सवाल सिर्फ यह नहीं है कि Sony के चैनल Tata Play पर वापस आएंगे या नहीं। सवाल यह है कि क्या फेस्टिव सीजन दोनों पक्षों के लिए इतना व्यावसायिक फायदा पैदा कर सकता है कि वे लंबे समय से चल रही डिस्ट्रीब्यूशन की लड़ाई को पीछे छोड़ने के लिए तैयार हो जाएं?
Tata Play ने इस घटनाक्रम पर चुप्पी साधे रखी। e4m की ओर से भेजे गए सवालों का Tata Play ने जवाब नहीं दिया।
फेस्टिव सीजन क्यों महत्वपूर्ण है?
टीवी ब्रॉडकास्टर्स के लिए फेस्टिव सीजन आम तौर पर दर्शकों की खपत और विज्ञापन के लिहाज से सबसे महत्वपूर्ण दौरों में से एक होता है।
Sony एंटरटेनमेंट और स्पोर्ट्स से जुड़े कंटेंट की बड़ी लाइनअप के साथ इस सीजन में उतर रहा है। इससे उसके पास अपने टीवी चैनलों पर दर्शकों की संख्या बढ़ाने के साथ-साथ टीवी और डिजिटल दोनों प्लेटफॉर्म पर कमाई को मजबूत करने का मौका है।
यही वजह है कि डिस्ट्रीब्यूशन इस समय खास तौर पर महत्वपूर्ण हो जाता है।
किसी प्रीमियम कंटेंट की व्यावसायिक वैल्यू सीमित हो जाती है, अगर किसी प्लेटफॉर्म के सब्सक्राइबर बेस का एक बड़ा हिस्सा उसे अपने नियमित चैनल पैकेज के हिस्से के तौर पर देख ही नहीं सकता।
यहीं Tata Play के साथ Sony का विवाद सामान्य कैरिज विवाद से आगे बढ़ जाता है। Sony के चैनल Tata Play के बेस बुके में अभी भी शामिल नहीं हैं, हालांकि वे a la carte ऑफरिंग और कुछ चुनिंदा प्रीमियम पैक्स के जरिए उपलब्ध हैं।
खास तौर पर Sony Sports Network के चैनल महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि लाइव स्पोर्ट्स लोगों को तय समय पर टीवी देखने के लिए प्रेरित करते हैं और सब्सक्राइबर के चैनल या प्लेटफॉर्म चुनने के फैसले पर भी असर डालते हैं।
क्या यह अब सिर्फ टीवी तक सीमित लड़ाई है?
गौरव बनर्जी की दूसरी टिप्पणियों से संकेत मिलता है कि Sony खुद भी इस बाजार को अब अलग नजरिए से देख रहा है। उन्होंने कहा कि Sony अब टेलीविजन को सिर्फ pay television के तौर पर नहीं देखता।
उन्होंने कहा, “जिस तरह मैं TV को देखता हूं, वह connected TV plus pay TV plus free TV है।” उन्होंने इन तीनों सेगमेंट में हो रही ग्रोथ की ओर इशारा किया। यह कंपनी की रणनीति में एक महत्वपूर्ण बदलाव है।
पारंपरिक टीवी कारोबार के लिए केबल और DTH के जरिए डिस्ट्रीब्यूशन सबसे अहम था। लेकिन आज वही कंटेंट connected TV, streaming platforms और free television services के जरिए भी दर्शकों तक पहुंच सकता है।
तो क्या Sony को अब Tata Play की उतनी जरूरत है, जितनी पहले हुआ करती थी? इसका जवाब इतना आसान नहीं है।
हो सकता है कि दर्शकों तक पहुंचने के लिए Sony को किसी एक डिस्ट्रीब्यूटर की पहले जैसी जरूरत न हो। लेकिन बड़े पैमाने पर पहुंच अब भी महत्वपूर्ण है, खासकर mass entertainment और live sports के लिए, जहां टीवी अभी भी विज्ञापन के लिहाज से एक मजबूत माध्यम है।
इसलिए Tata Play का बड़ा सब्सक्राइबर बेस Sony को उस समय अतिरिक्त पहुंच दे सकता है, जब कंपनी अलग-अलग स्क्रीन पर अपने कंटेंट की वैल्यू को अधिकतम करने की कोशिश कर रही है।
तो क्या फेस्टिव सीजन खत्म कर सकता है यह विवाद?
संभव है, लेकिन इससे भी महत्वपूर्ण सवाल यह है कि क्या फेस्टिव सीजन दोनों पक्षों को समझौता करने की वजह देगा।
Sony के लिए फायदा साफ है। ज्यादा कंटेंट खपत वाले इस दौर में ज्यादा डिस्ट्रीब्यूशन से व्यूअरशिप, विज्ञापन और सब्सक्रिप्शन से जुड़े मौकों को अधिकतम करने में मदद मिल सकती है।
लेकिन Tata Play के लिए गणित अलग है। ऑपरेटर अपने बुके को ज्यादा consumption-led बनाने और ऐसे चैनलों की संख्या कम करने की कोशिश कर रहा है, जिनके लिए सब्सक्राइबर पैसे तो देते हैं लेकिन उन्हें देखते नहीं हैं।
इसलिए किसी समझौते में टीवी कारोबार को लेकर दो अलग-अलग सोच के बीच संतुलन बनाना होगा। Sony चाहता है कि कंटेंट डिस्ट्रीब्यूशन को आगे बढ़ाए। वहीं Tata Play चाहता है कि दर्शकों की खपत यह तय करे कि डिस्ट्रीब्यूशन कैसे हो।
अगर Sony की बड़ी प्रोग्रामिंग से उसके चैनलों के लिए दर्शकों की मांग मजबूत होती है, तो फेस्टिव सीजन कुछ समय के लिए दोनों पक्षों के हितों को करीब ला सकता है।
लेकिन क्या यह मौजूदा कारोबारी और कानूनी मतभेदों को पूरी तरह खत्म करने के लिए पर्याप्त होगा, यह अभी साफ नहीं है। फिलहाल गौरव बनर्जी की टिप्पणियां उम्मीद जरूर जगाती हैं, लेकिन किसी समझौते की पुष्टि नहीं करतीं।
और यही सवाल फेस्टिव टीवी सीजन पर मंडरा रहा है:
क्या Sony के बड़े और लोकप्रिय कंटेंट का आकर्षण इतना मजबूत होगा कि Tata Play और Sony इस विवाद पर अस्थायी विराम लगाने के लिए तैयार हो जाएं, या दर्शकों के टीवी स्क्रीन पर लौटने के साथ-साथ चैनलों की यह लड़ाई भी जारी रहेगी?
कानूनी लड़ाई जारी
यह मामला Telecom Disputes Settlement and Appellate Tribunal (TDSAT) के सामने भी पहुंच चुका है। 7 अगस्त को ट्रिब्यूनल ने मामले की सुनवाई की और अगली सुनवाई के लिए 30 अक्टूबर की तारीख तय की।
इससे पहले एक आदेश में TDSAT ने Tata Play को आंशिक राहत दी थी। ट्रिब्यूनल ने DTH ऑपरेटर को दो हफ्ते के भीतर ₹40 करोड़ जमा करने का निर्देश दिया था। यह निर्देश Culver Max Entertainment की ओर से जारी ₹128.42 करोड़ के डिमांड नोटिस की वसूली पर रोक से जुड़ा था। Culver Max Entertainment, Sony ग्रुप की वह कंपनी है जो संबंधित टेलीविजन ब्रॉडकास्टिंग कारोबार संचालित करती है।
एक अन्य आदेश में ट्रिब्यूनल ने विवादित डिमांड नोटिस की वसूली पर रोक लगा दी थी और ब्रॉडकास्टर को इस विवाद से जुड़े static images या scrolls प्रसारित करने से भी रोक दिया था। इस पहलू से जुड़ा मामला 26 सितंबर, 2025 के लिए सूचीबद्ध किया गया था।
इसके बाद Culver Max ने Tata Play के DTH पैक्स से अपने चैनलों को हटाने के फैसले पर ब्रॉडकास्टर को सार्वजनिक रूप से टिप्पणी करने से रोकने वाले TDSAT के आदेश को Bombay High Court में चुनौती दी।
Bombay High Court ने Culver Max को अंतरिम राहत नहीं दी, लेकिन Sony को सोशल मीडिया पर एक standard message साझा करने की अनुमति दी। इसमें कहा जा सकता था कि विवाद sub judice है और Sony के चैनल Tata Play पर उसकी a la carte service के जरिए उपलब्ध हैं।
इस तरह दोनों पक्षों के बीच कारोबारी विवाद पर अपनी-अपनी स्थिति बरकरार रहने के बावजूद कानूनी कार्यवाही लगातार जारी रही है।
जी मीडिया (Zee Media) ने अपने हिंदी न्यूज ब्रैंड Zee Bharat को नए अंदाज में पेश किया है। कंपनी ने International Youth Day के मौके पर इसका नया अवतार लॉन्च किया है
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Samachar4media Bureau
जी मीडिया (Zee Media) ने अपने हिंदी न्यूज ब्रैंड Zee Bharat को नए अंदाज में पेश किया है। कंपनी ने International Youth Day के मौके पर इसका नया अवतार लॉन्च किया है, जिसका मकसद भारत के युवाओं की सोच, पसंद और लाइफस्टाइल को करीब से समझना और उसी अंदाज में खबरें पेश करना है।
Essel Group के चेयरमैन और पूर्व राज्यसभा सांसद डॉ. सुभाष चंद्रा ने Zee Bharat के इस नए अवतार की तारीफ की है। उन्होंने कहा कि 10 महीने की प्लानिंग के बाद Zee Media ने Gen-Z के लिए Zee Bharat को नए तरीके से पेश किया है। उन्होंने यह भी कहा कि युवा भारत से सीखने के लिए बहुत कुछ है।
डॉ. चंद्रा ने अपने पुराने कार्यक्रम ‘SACH Show’ का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इस शो को करते हुए उन्हें लोगों से काफी ज्ञान और सीख मिली। उन्होंने अपने दर्शकों और युवा भारत के प्रति अपना स्नेह भी जाहिर किया।
उनकी यह टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब मीडिया संस्थान तेजी से युवा दर्शकों की बदलती पसंद और डिजिटल कंटेंट की जरूरतों के मुताबिक अपनी रणनीति में बदलाव कर रहे हैं। Z Bharat को भी इसी दिशा में नए अंदाज और युवा केंद्रित सोच के साथ पेश किया गया है।
वहीं, Zee Media के CEO रक्तिम दास ने X पर इसकी जानकारी देते हुए कहा कि आज इंटरनेशनल यूथ डे के मौके पर Zee Bharat ने एक नए चैप्टर की शुरुआत की है। उन्होंने कहा कि नए अवतार का मकसद ‘The Vibe of Young India’ को पकड़ना है।
नए Zee Bharat को social-first और digital-native न्यूज ब्रैंड के तौर पर तैयार किया गया है। इसमें न्यूज के साथ कल्चर, टेक्नोलॉजी, एंटरटेनमेंट, लाइफस्टाइल और लोगों से जुड़ी वास्तविक बातचीत को जगह दी जाएगी। कंपनी का फोकस कंटेंट को सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म के हिसाब से तैयार करने पर है।
दरअसल, Zee Media पिछले करीब 10 महीनों से इस बदलाव की तैयारी कर रहा था। इससे पहले Zee Bharat को GenZ Bharat के तौर पर री-पोजिशन करने की खबर सामने आई थी। उस समय ब्रैंड के सोशल मीडिया हैंडल्स का नाम बदलकर GenZ Bharat किया गया था और इसे युवाओं के लिए सोशल-फर्स्ट न्यूज प्लेटफॉर्म के रूप में पेश करने की तैयारी थी।
अब कंपनी ने इसे नए रूप में Zee Bharat ब्रैंड के तहत सामने रखा है। ब्रैंड की सोच है कि आज का युवा सिर्फ खबर पढ़ना नहीं चाहता, बल्कि खबरों के पीछे की कहानी, संस्कृति, टेक्नोलॉजी, मनोरंजन और समाज से जुड़े मुद्दों पर बातचीत भी चाहता है।
Zee Bharat का यह बदलाव ऐसे समय में हुआ है, जब न्यूज इंडस्ट्री में युवा दर्शकों तक पहुंचने के लिए डिजिटल, शॉर्ट-फॉर्म और सोशल मीडिया कंटेंट पर तेजी से जोर बढ़ रहा है।
सोनी पिक्चर्स नेटवर्क इंडिया (SPNI) ने फेस्टिव सीजन के लिए अपना बड़ा कंटेंट प्लान जारी कर दिया है।
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Samachar4media Bureau
सोनी पिक्चर्स नेटवर्क इंडिया (SPNI) ने फेस्टिव सीजन के लिए अपना बड़ा कंटेंट प्लान जारी कर दिया है। कंपनी ने फिक्शन, रियलिटी, स्पोर्ट्स, फिल्मों और रीजनल प्रोग्रामिंग समेत अलग-अलग जॉनर और भाषाओं में कई नए और लोकप्रिय कार्यक्रमों का ऐलान किया है।
कंपनी का कहना है कि यह कंटेंट प्लान उसके हाल में बताए गए ‘कंटेंट-फर्स्ट’, ‘प्लेटफॉर्म-एग्नोस्टिक’ और मल्टीलिंगुअल एंटरटेनमेंट बिजनेस की रणनीति को आगे बढ़ाता है। इसमें प्रीमियम इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी (IP), दुनियाभर में सफल रहे फॉर्मेट्स के भारतीय रूप, नए घरेलू कॉन्सेप्ट और ऐसा कंटेंट शामिल है, जिसे टीवी और डिजिटल दोनों प्लेटफॉर्म पर दर्शकों तक पहुंचाया जाएगा।
डिजिटल स्तर पर इस पूरे कंटेंट प्लान को Sony LIV के नए ब्रांड पोजिशनिंग ‘It All LIVs Here’ के साथ जोड़ा गया है। कंपनी के मुताबिक, इसका मकसद Sony LIV को SPNI के मनोरंजन और स्पोर्ट्स कंटेंट के डिजिटल होम के तौर पर स्थापित करना है।
KBC Season 18 से फेस्टिव सीजन की शुरुआत
SPNI के फेस्टिव सीजन के कंटेंट प्लान की सबसे बड़ी पेशकश ‘Kaun Banega Crorepati Season 18’ है। इसका प्रीमियर 10 अगस्त को Sony Entertainment Television और Sony LIV पर हुआ। शो के नए सीजन की कैंपेन लाइन ‘Sochna Padega’ रखी गई है। KBC अपने पुराने फॉर्मेट को जारी रखते हुए ज्ञान, सपनों और जिंदगी बदल देने वाली कहानियों को सामने लाएगा।
रोहित शर्मा का एंटरटेनमेंट डेब्यू
SPNI ने अपने हिंदी एंटरटेनमेंट पोर्टफोलियो को भी विस्तार दिया है। क्रिकेट के दिग्गज खिलाड़ी रोहित शर्मा नेटवर्क पर अपने खुद के शो के साथ एंटरटेनमेंट की दुनिया में डेब्यू करेंगे।
वहीं, अभिनेता अजय देवगन एक नई ट्रू-क्राइम सीरीज ‘Crime Patrol 2026’ को होस्ट करेंगे। इसमें असल जिंदगी के असाधारण अपराधों और मामलों को ‘Crime Patrol’ के खास स्टोरीटेलिंग अंदाज में दर्शकों के सामने रखा जाएगा।
कॉमेडी और तेज-तर्रार मनोरंजन के लिए ‘Indian Game Show’ भी पेश किया जा रहा है। इसे भारती सिंह और हर्ष लिंबाचिया होस्ट करेंगे। शो में सेलिब्रिटीज अलग-अलग मजेदार चुनौतियों में हिस्सा लेते नजर आएंगे।
‘Scam 2010’ भी प्लान का हिस्सा
SPNI के नए कंटेंट में ‘Scam 2010’ भी शामिल है। यह Sony LIV, Birla Studios और Applause Entertainment की सीरीज है, जिसका निर्देशन नेशनल अवॉर्ड विजेता फिल्ममेकर हंसल मेहता ने किया है। यह सीरीज एक बड़े वित्तीय साम्राज्य के उभरने और फिर उसके पतन की कहानी को सामने लाएगी।
मराठी और तमिल कंटेंट पर भी बड़ा फोकस
SPNI ने अपने मल्टीलिंगुअल विस्तार को भी इस कंटेंट प्लान में खास जगह दी है। पद्मश्री से सम्मानित अभिनेत्री माधुरी दीक्षित ‘Kon Honar Crorepati’ को होस्ट करेंगी। यह लोकप्रिय KBC फॉर्मेट का मराठी संस्करण है। कंपनी के मुताबिक, माधुरी दीक्षित की मौजूदगी इस शो को एक नई पहचान और अलग ऊर्जा देगी।
तमिल दर्शकों के लिए Sony LIV पर ‘MasterChef Tamil’ पेश किया जाएगा, जिसमें अभिनेत्री सामंथा रुथ प्रभु नजर आएंगी। इसके अलावा ‘Tamil Idol’ भी लॉन्च किया जाएगा। यह दुनिया भर में लोकप्रिय सिंगिंग कॉम्पिटिशन फॉर्मेट का पहला तमिल रूपांतरण होगा। संगीतकार ए. आर. रहमान तमिलनाडु की अगली बेहतरीन गायन प्रतिभा की तलाश में अहम भूमिका निभाएंगे।
तीन महीने से ज्यादा चलेगा ‘Festival of Sports’
मनोरंजन के साथ SPNI ने स्पोर्ट्स के लिए भी बड़ा कैलेंडर तैयार किया है। सोनी स्पोर्ट्स नेटवर्क का ‘Festival of Sports’ 15 अगस्त से 1 दिसंबर 2026 तक चलेगा। इस दौरान दर्शकों को भारत के श्रीलंका दौरे, महिला T20 एशिया कप, एशियन गेम्स और भारत के न्यूजीलैंड के ऑल-फॉर्मेट दौरे जैसे बड़े खेल आयोजनों का लाइव एक्शन देखने को मिलेगा।
कंपनी के मुताबिक, इस कार्यक्रम के जरिए दर्शकों को तीन महीने से ज्यादा समय तक अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट और मल्टी-स्पोर्ट्स एक्शन देखने को मिलेगा।
‘जहां और जैसे दर्शक देखना चाहें, वहां कंटेंट पहुंचाना लक्ष्य’
SPNI के मैनेजिंग डायरेक्टर और CEO गौरव बनर्जी ने कहा कि भारत का एंटरटेनमेंट बाजार तेजी से बदल रहा है। आज दर्शक भाषाओं, जॉनर और स्क्रीन के बीच आसानी से स्विच कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि कंपनी का फोकस ऐसे मजबूत IP और कहानियां तैयार करने पर है, जो दर्शकों से जुड़ सकें, फिर चाहे वे इन्हें किसी भी भाषा, जॉनर या स्क्रीन पर देखना पसंद करें।
बनर्जी के मुताबिक, कंपनी का नया फेस्टिव सीजन कंटेंट प्लान इसी रणनीति को दिखाता है। इसमें पुराने और मजबूत फ्रेंचाइजी के साथ नए फॉर्मेट, बड़े सितारे, बढ़ता रीजनल कंटेंट और लाइव स्पोर्ट्स का बड़ा कैलेंडर शामिल है।
उन्होंने कहा कि KBC और नए हिंदी एंटरटेनमेंट प्रोग्राम से लेकर मराठी और तमिल कंटेंट तक, SPNI अपने कंटेंट पोर्टफोलियो को ज्यादा व्यापक और विविध बना रहा है। टीवी नेटवर्क और Sony LIV मिलकर इस कंटेंट को देशभर के दर्शकों तक पहुंचाने का काम करेंगे।
टीवी और डिजिटल को साथ लेकर चलने की रणनीति
कंपनी के मुताबिक, पूरा कंटेंट प्लान SPNI की ‘कंटेंट-फर्स्ट’ रणनीति और मल्टीलिंगुअल पोर्टफोलियो के बढ़ते दायरे को दिखाता है।
SPNI का लक्ष्य ऐसे मजबूत IP को अलग-अलग स्क्रीन के दर्शकों तक पहुंचाना है, जो उन्हें लंबे समय तक जोड़े रख सकें। इसके लिए टेलीविजन नेटवर्क और Sony LIV को एक-दूसरे के पूरक प्लेटफॉर्म के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा है।
गौरव बनर्जी ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल इंडिया (BARC India) के चेयरमैन भी हैं। हालांकि, उन्होंने BARC के चेयरमैन के तौर पर रेटिंग्स के ट्रेंड पर कोई भी टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।
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Samachar4media Bureau
इमरान फजल, असिसटेंट एडिटर, एक्सचेंज4मीडिया ।।
टेलीविजन ऐडवर्टाइजिंग मार्केट में इस समय अनिश्चितता का माहौल है। ऐसे में मजबूत और लंबे समय से दर्शकों के बीच पहचान बना चुके कंटेंट शो सोनी पिक्चर्स नेटवर्क इंडिया (SPNI) के लिए बड़ा सहारा बन रहे हैं। ऐडवर्टाइजर भी ऐसे समय में उन कार्यक्रमों पर ज्यादा भरोसा कर रहे हैं, जिनकी ऑडियंस पहले से मजबूत है। इसकी एक बड़ी वजह दर्शकों की खपत और BARC रेटिंग्स को लेकर बनी चिंता भी है।
SPNI के मैनेजिंग डायरेक्टर व सीईओ गौरव बनर्जी ने कहा कि Sony के लिए उसके पुराने और स्थापित कंटेंट ब्रैंड काफी मददगार साबित हो रहे हैं। सोनी पिक्चर्स नेटवर्क इंडिया के पास ऐसे कई लोकप्रिय कार्यक्रम हैं, जिनकी दर्शकों के बीच पहले से मजबूत पहचान है।
गौरव बनर्जी ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल इंडिया (BARC India) के चेयरमैन भी हैं। हालांकि, उन्होंने BARC के चेयरमैन के तौर पर रेटिंग्स के ट्रेंड पर कोई भी टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। उन्होंने इसके बजाय मौजूदा माहौल में ऐडवर्टाइजर्स और ब्रॉडकास्टर्स के रवैये पर बात की।
एक मीडिया बातचीत के दौरान बनर्जी ने कहा कि मार्केट में Sony के लिए उसके जाने-पहचाने कंटेंट IP काफी मदद कर रहे हैं। उनके मुताबिक, दर्शकों और ऐडवर्टाइजर्स के बीच पहले से पहचान रखने वाले कार्यक्रम मौजूदा अनिश्चित माहौल में नेटवर्क को फायदा देते हैं।
रीजनल विस्तार में भी पुराने IP का फायदा
बनर्जी ने यह भी कहा कि स्थापित कंटेंट IP का फायदा सिर्फ हिंदी मार्केट तक सीमित नहीं है। Sony के रीजनल विस्तार में भी इन लोकप्रिय फ्रेंचाइजी की अहम भूमिका हो सकती है।
उनकी यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है, जब टेलीविजन ब्रॉडकास्टर्स फेस्टिव सीजन की तैयारी कर रहे हैं। इस दौरान कंटेंट का कैलेंडर काफी व्यस्त रहता है। वहीं, BARC डेटा के उपलब्ध नहीं होने की अवधि और कुछ पारंपरिक ऐडवर्टाइजिंग कैटेगरी में ऐडवर्टाइजर्स की सावधानी ने ब्रॉडकास्टर्स के सामने चुनौती बढ़ा दी है।
ऐसे माहौल में ब्रॉडकास्टर्स ज्यादा दर्शक जुड़ाव वाले कार्यक्रमों के जरिए अपनी ऑडियंस हिस्सेदारी और कमाई को बनाए रखने की कोशिश कर रहे हैं।
KBC और Crime Patrol पर Sony का भरोसा
Sony की रणनीति में ‘कौन बनेगा करोड़पति’ (KBC) और ‘Crime Patrol’ जैसे पुराने और मजबूत कार्यक्रम अहम भूमिका निभा रहे हैं।
मौजूदा सीजन में KBC को Sony के सबसे बड़े और प्रमुख कार्यक्रम के तौर पर पेश किया जा रहा है। वहीं, ‘Crime Patrol’ भी वापसी कर रहा है। इस बार अभिनेता अजय देवगन इसके ‘Grand Ambassador’ के तौर पर जुड़े हैं।
बनर्जी पहले भी कह चुके हैं कि Sony के लिए दर्शकों का ध्यान यानी ‘Attention’ सबसे महत्वपूर्ण मेट्रिक है। उनका मानना है कि अगर दर्शकों का ध्यान किसी कंटेंट पर बना रहता है, तो इससे टीवी पर एंगेजमेंट के साथ-साथ स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म पर दर्शकों को बनाए रखने में भी मदद मिलती है।
उन्होंने कहा था कि अगर सिर्फ एक मेट्रिक पर ध्यान देना हो, तो Sony ‘Attention’ को ही सबसे ज्यादा महत्व देगा।
सोनी एंटरटेनमेंट टेलीविजन पर फिक्शन को मजबूत करने की तैयारी
स्थापित IP पर जोर देने की रणनीति ऐसे समय में सामने आई है, जब सोनी एंटरटेनमेंट टेलीविजन (SET) अपने फिक्शन कारोबार को फिर से मजबूत करने की कोशिश कर रहा है।
बनर्जी ने माना कि पिछले कुछ वर्षों में SET का फिक्शन कंटेंट उम्मीद के मुताबिक मजबूत प्रदर्शन नहीं कर पाया है। अब कंपनी चैनल के लिए फिक्शन शो की एक नई लाइन-अप तैयार कर रही है। आने वाले करीब छह महीनों में इन नए शो को लॉन्च किए जाने की उम्मीद है।
हालांकि, Sony अपने पुराने मजबूत क्षेत्रों को छोड़ने के मूड में नहीं है। कंपनी नॉन-फिक्शन, रियलिटी और क्राइम प्रोग्रामिंग पर भी अपना फोकस बनाए रखेगी।
बनर्जी के मुताबिक, SET की पहचान बड़े स्टार्स के साथ बनाए गए शानदार नॉन-फिक्शन और रियलिटी शो के अलावा क्राइम फ्रेंचाइजी से भी जुड़ी हुई है। फिक्शन को अब इस रणनीति के एक और महत्वपूर्ण हिस्से के तौर पर मजबूत किया जा रहा है।
फेस्टिव सीजन में कंटेंट की भीड़ के बीच अलग दिखने की चुनौती
ब्रॉडकास्टर्स के लिए फेस्टिव सीजन बेहद महत्वपूर्ण होता है। यह टीवी दर्शकों और ऐडवर्टाइजिंग के लिहाज से साल के सबसे ज्यादा प्रतिस्पर्धी दौर में से एक माना जाता है। इस दौरान कई चैनल नए शो और बड़े कार्यक्रम लेकर आते हैं।
ऐसे में Sony के सामने चुनौती यह है कि वह इस भीड़ में अपने कंटेंट को अलग कैसे दिखाए। बनर्जी के मुताबिक, इसका रास्ता ऐसा कंटेंट पेश करने में है, जो अलग भी हो और दर्शकों के लिए प्रासंगिक भी।
KBC इसका एक उदाहरण है। बनर्जी के मुताबिक, KBC के नए सीजन को इस तरह तैयार किया गया है कि यह लंबे समय से चले आ रहे इस फॉर्मेट को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI के दौर के हिसाब से पेश करे।
इस बार शो में सिर्फ सामान्य ज्ञान के सवालों के जवाब देने के बजाय तर्क और सोचने की क्षमता पर ज्यादा जोर देने की कोशिश की गई है। यानी Sony अपने पुराने और भरोसेमंद IP को बनाए रखते हुए उसे नए दौर और दर्शकों की बदलती जरूरतों के हिसाब से पेश करने की रणनीति पर काम कर रहा है।
जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज (Zee Entertainment Enterprises Limited) ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही के नतीजे जारी कर दिए हैं।
by
Vikas Saxena
जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज (Zee Entertainment Enterprises Limited) ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही के नतीजे जारी कर दिए हैं। कंपनी के कंसोलिडेटेड नतीजों के मुताबिक, 30 जून 2026 को खत्म तिमाही में कंपनी को 743 मिलियन डॉलर नहीं, बल्कि 743 मिलियन रुपये यानी करीब 74.3 करोड़ रुपये का शुद्ध मुनाफा हुआ है। पिछले साल इसी तिमाही में कंपनी का शुद्ध मुनाफा 1,437 मिलियन रुपये यानी करीब 143.7 करोड़ रुपये था।
कंपनी की ओर से 10 अगस्त को शेयर मार्केट को दी गई जानकारी के मुताबिक, बोर्ड बैठक में 30 जून 2026 को खत्म तिमाही के अनऑडिटेड स्टैंडअलोन और कंसोलिडेटेड वित्तीय नतीजों को मंजूरी दी गई। बोर्ड की बैठक 10 अगस्त को हुई थी।
करीब 1,939 करोड़ रुपये रही कुल आय
कंपनी की कंसोलिडेटेड कुल आय पहली तिमाही में 19,385 मिलियन रुपये यानी करीब 1,938.5 करोड़ रुपये रही। पिछले साल की समान तिमाही में यह 18,498 मिलियन रुपये यानी करीब 1,849.8 करोड़ रुपये थी। यानी कुल आय में सालाना आधार पर करीब 4.8 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है।
इस दौरान कंपनी की विज्ञापन से आय 671.4 करोड़ रुपये रही, जबकि सब्सक्रिप्शन से कंपनी को करीब 1,136.9 करोड़ रुपये की आय हुई। अन्य बिक्री और सेवाओं से करीब 99 करोड़ रुपये और अन्य आय से करीब 31.2 करोड़ रुपये मिले।
कंपनी के कुल खर्च की बात करें तो यह पहली तिमाही में करीब 1,864.4 करोड़ रुपये रहा। पिछले साल की समान तिमाही में कुल खर्च करीब 1,652.7 करोड़ रुपये था।
टैक्स के बाद 74.3 करोड़ रुपये का मुनाफा
कंपनी का पहली तिमाही में टैक्स से पहले मुनाफा करीब 74.1 करोड़ रुपये रहा। टैक्स के बाद कंपनी का शुद्ध मुनाफा 74.3 करोड़ रुपये रहा। वहीं पिछले साल की समान तिमाही में शुद्ध मुनाफा करीब 143.7 करोड़ रुपये था।
कंपनी के मुताबिक, तिमाही के दौरान शेयरधारकों के हिस्से में आने वाला मुनाफा करीब 76.3 करोड़ रुपये रहा।
JioStar के साथ विवाद में 1.097 अरब डॉलर का दावा
नतीजों के साथ कंपनी ने JioStar के साथ चल रहे ICC ब्रॉडकास्टिंग राइट्स से जुड़े विवाद की भी जानकारी दी है। कंपनी के मुताबिक, JioStar ने इस मामले में अपने नुकसान के दावे को बढ़ाकर 1.097 अरब अमेरिकी डॉलर कर दिया है। दोनों पक्ष अपनी-अपनी दलीलें और जवाब दाखिल कर चुके हैं और ट्रिब्यूनल के सामने अंतिम साक्ष्य संबंधी सुनवाई (Evidentiary Hearing) भी पूरी हो चुकी है। अब दोनों पक्षों को सुनवाई के बाद की लिखित दलीलें (Post-Hearing Briefs) दाखिल करनी हैं।
कंपनी का कहना है कि उसे कानूनी सलाह और अपने आकलन के आधार पर भरोसा है कि वह Alliance Agreement के तहत डिफॉल्ट में नहीं है और JioStar के दावे उसके मुताबिक कानूनी रूप से टिकाऊ नहीं हैं।
SEBI के आदेश के खिलाफ SAT पहुंची कंपनी
जी एंटरटनमेंट ने यह भी बताया है कि SEBI ने 31 जुलाई 2026 को एक आदेश पारित किया था, जिसमें कंपनी पर 30 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया और उसे दो महीने तक सिक्योरिटीज मार्केट में पहुंच/डीलिंग से रोकने की बात कही गई। कंपनी ने इस आदेश के खिलाफ Securities Appellate Tribunal (SAT) में अपील दाखिल की है और आदेश पर रोक लगाने की मांग भी की है।
कंपनी ने कहा है कि उसे अपने मामले के मेरिट पर मजबूत भरोसा है। साथ ही, प्रबंधन का आकलन है कि इन मामलों का कंपनी या ग्रुप के वित्तीय नतीजों पर कोई बड़ा प्रतिकूल असर पड़ने की उम्मीद नहीं है।
3,143.5 करोड़ रुपये के वारंट को मंजूरी
कंपनी ने इससे पहले 1 जुलाई 2026 को प्रमोटर ग्रुप की एक इकाई को 24.94 करोड़ तक पूरी तरह कन्वर्टिबल वारंट जारी करने को मंजूरी दी थी। इन वारंट की इश्यू प्राइस 126 रुपये प्रति वारंट रखी गई है और इससे कंपनी को कुल करीब 3,143.5 करोड़ रुपये जुटाने की योजना है। शेयरधारकों ने 31 जुलाई 2026 की Extraordinary General Meeting में इस वारंट इश्यू को मंजूरी दे दी थी।
इसके साथ ही कंपनी ने कर्मचारियों के लिए ESOP के तहत करीब 3.74 करोड़ स्टॉक ऑप्शंस देने की योजना को भी मंजूरी दी है।
वार्षिक आम बैठक 17 सितंबर को
बोर्ड ने कंपनी की 44वीं वार्षिक आम बैठक (AGM) 17 सितंबर 2026 को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग या अन्य ऑडियो-विजुअल माध्यम से आयोजित करने को भी मंजूरी दी है।
इसके अलावा बोर्ड ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए कॉस्ट ऑडिटर और इंटरनल ऑडिटर की दोबारा नियुक्ति तथा चार स्वतंत्र निदेशकों के दूसरे कार्यकाल के लिए पुनर्नियुक्ति को भी मंजूरी दी है, जिनमें दीपू बंसल, उत्तम प्रकाश अग्रवाल, डॉ. वेंकटा रमणा मूर्ति पिनिसेट्टी और शिशिर बाबूभाई देसाई शामिल हैं। इन नियुक्तियों के लिए आगामी AGM में शेयरधारकों की मंजूरी जरूरी होगी।
कुल मिलाकर, Zee Entertainment की पहली तिमाही में आय में बढ़ोतरी हुई है, लेकिन पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले मुनाफा कम हुआ है। वहीं कंपनी के सामने JioStar विवाद और SEBI के आदेश जैसी चुनौतियां भी बनी हुई हैं। दूसरी ओर, प्रमोटर ग्रुप को वारंट जारी करने और ESOP के जरिए कंपनी ने फंड जुटाने और कर्मचारियों को प्रोत्साहित करने की दिशा में भी कदम बढ़ाया है।