राज टीवी के शेयर में तेज हलचल पर कंपनी ने कही ये बात

राज टेलीविजन नेटवर्क लिमिटेड ने अपने शेयर की कीमत में हुई तेज हलचल को लेकर बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज को सफाई दी है।

Vikas Saxena by
Published - Wednesday, 30 September, 2026
Last Modified:
Wednesday, 30 September, 2026
RajTV5842


राज टेलीविजन नेटवर्क लिमिटेड ने अपने शेयर की कीमत में हुई तेज हलचल को लेकर बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज को सफाई दी है। कंपनी ने कहा है कि उसके शेयर की कीमत में हुआ बदलाव पूरी तरह बाजार की स्थिति की वजह से है और यह पूरी तरह बाजार से संचालित है।

कंपनी ने 28 सितंबर 2026 को बीएसई और एनएसई से मिले ईमेल का जवाब देते हुए यह जानकारी दी है। इन ईमेल में कंपनी के शेयर की कीमत में हुई महत्वपूर्ण हलचल को लेकर स्पष्टीकरण मांगा गया था।

कंपनी ने कहा कि उसके शेयर की कीमत में हुई इस महत्वपूर्ण हलचल के कारणों पर प्रबंधन का न तो कोई नियंत्रण है और न ही उसे इसकी जानकारी है।

राज टेलीविजन नेटवर्क ने कहा कि वह सेबी के लिस्टिंग ऑब्लिगेशंस एंड डिस्क्लोजर रिक्वायरमेंट्स (LODR) रेगुलेशंस, 2015 के रेगुलेशन 30 के तहत अपनी सभी जरूरी जानकारियां लगातार साझा करता रहा है और आगे भी अपनी जिम्मेदारियों के मुताबिक सभी संबंधित खुलासे करता रहेगा।

कंपनी ने स्टॉक एक्सचेंज के साथ हुए अपने समझौतों के तहत भी जरूरी खुलासे करने की बात कही है। यह जवाब कंपनी की ओर से कंपनी सेक्रेटरी और कंप्लायंस ऑफिसर प्रियंका मुदलियार ने दिया है।   

न्यूजलेटर पाने के लिए यहां सब्सक्राइब कीजिए

सुरभि तिवारी ने 'न्यूज़ इंडिया 24X7' को कहा अलविदा : लिखी भावुक पोस्ट

पत्रकार और एंकर सुरभि तिवारी ने एक्स पोस्ट के जरिए 'न्यूज़ इंडिया 24X7' से ढाई साल बाद विदाई की जानकारी दी और संस्था, टीम तथा वरिष्ठों के प्रति आभार जताया।

Samachar4media Bureau by
Published - Wednesday, 30 September, 2026
Last Modified:
Wednesday, 30 September, 2026
surbhi

पत्रकार और एंकर सुरभि तिवारी (Surbhi Tiwari) ने न्यूज़ इंडिया 24X7 (News India 24X7) से अपने सफर के खत्म होने की जानकारी दी है। उन्होंने एक्स (X) पर एक भावुक पोस्ट शेयर कर ढाई साल के सफर को याद किया और संस्था व टीम के प्रति आभार जताया।

समाचार4मीडिया से बातचीत में सुरभि ने बताया कि न्यूज़ इंडिया उनके लिए घर जैसा हो गया था और यहां से अलग होने का फैसला लेना उनके लिए आसान नहीं था। उन्होंने कहा कि इस दौरान उन्हें सभी का साथ, सहयोग, प्यार, विश्वास और समर्थन मिला, जिसके लिए वह सभी की दिल से आभारी हैं।

उन्होंने संस्था और टीम के साथ काम करने को अपने लिए गर्व की बात बताया। सुरभि ने कहा कि इस दौरान उन्होंने जो कुछ सीखा और अनुभव हासिल किया, वह सभी के सहयोग से संभव हुआ।

उन्होंने यह भी कहा कि अगर इस दौरान उनसे कोई गलती हुई हो या अनजाने में किसी का दिल दुखा हो, तो वह इसके लिए माफी चाहती हैं। उन्होंने न्यूज़ इंडिया 24X7 के उज्ज्वल भविष्य और लगातार आगे बढ़ने की कामना की।

सुरभि ने अपने ढाई साल के सफर में विजेंद्र सर और शैलेंद्र सर का विशेष तौर पर धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि दोनों ने उन्हें जिम्मेदारी दी, उनके काम को सराहा और पूरा सम्मान दिया, जो उनके लिए बेहद मूल्यवान है और जिसके लिए वह हमेशा आभारी रहेंगी।

न्यूजलेटर पाने के लिए यहां सब्सक्राइब कीजिए

पंकज त्रिपाठी के साथ सोनी ने लॉन्च किया ‘इंडिया की सबसे बड़ी पार्टी’ अभियान

सोनी पिक्चर्स नेटवर्क्स इंडिया ने पंकज त्रिपाठी के साथ ‘इंडिया की सबसे बड़ी पार्टी’ अभियान शुरू किया है, जिसमें भारत के पनामा, ब्राजील और उरुग्वे मुकाबलों को शामिल किया गया है।

Samachar4media Bureau by
Published - Wednesday, 30 September, 2026
Last Modified:
Wednesday, 30 September, 2026
sonytv

सोनी पिक्चर्स नेटवर्क्स इंडिया (Sony Pictures Networks India) ने अभिनेता पंकज त्रिपाठी (Pankaj Tripathi) के साथ ‘इंडिया की सबसे बड़ी पार्टी’ (India Ki Sabse Badi Party) अभियान शुरू किया है। इसका मकसद पनामा, ब्राजील और उरुग्वे के खिलाफ भारतीय फुटबॉल टीम के मुकाबलों को लेकर दर्शकों में उत्साह बढ़ाना है।

अभियान की शुरुआत 65 सेकंड की एक फिल्म से हुई है। इसमें पंकज त्रिपाठी लोगों को एक पार्टी में शामिल होने के लिए आमंत्रित करते हैं, लेकिन शुरुआत में पार्टी की वजह नहीं बताते। बाद में पता चलता है कि यह पार्टी भारतीय टीम के पांच बार की विश्व चैंपियन ब्राजील के खिलाफ मुकाबले से जुड़ी है। भारत और ब्राजील के बीच मैच 3 अक्टूबर को कोलकाता में खेला जाएगा। अभियान में 25 सितंबर को पनामा और 6 अक्टूबर को उरुग्वे के खिलाफ होने वाले मुकाबले भी शामिल हैं।

अभियान को ‘इंडिया की सबसे बड़ी पार्टी एक्स फैन एडिशन’ के तौर पर भी आगे बढ़ाया जाएगा। इसमें पंकज त्रिपाठी देशभर के फुटबॉल फैंस (Football Fans) के साथ उनकी स्थानीय भाषाओं में नजर आएंगे। इसके अलावा ‘त्रिपाठी जी की ट्यूशन’ नाम से शॉर्ट-फॉर्म फिल्मों (Short-Form Films) की सीरीज भी पेश की जाएगी, जिसमें अभिनेता फुटबॉल से जुड़े विषयों पर नजर आएंगे।

सोनी पिक्चर्स नेटवर्क्स इंडिया सोशल मीडिया (Social Media) पर आधारित एक अन्य अभियान भी शुरू करेगा। इसमें पंकज त्रिपाठी भारतीय फुटबॉल खिलाड़ियों के साथ बातचीत करते दिखेंगे। इस अभियान में भारतीय टीम के कप्तान गुरप्रीत सिंह संधू (Gurpreet Singh Sandhu) भी शामिल होंगे।

सोनी पिक्चर्स नेटवर्क्स इंडिया के चीफ रेवेन्यू ऑफिसर और स्पोर्ट्स एंड इंटरनेशनल बिजनेस हेड (Chief Revenue Officer and Sports & International Business Head) राजेश कौल (Rajesh Kaul) ने कहा कि भारत का पनामा, ब्राजील और उरुग्वे से मुकाबला भारतीय फुटबॉल के लिए महत्वपूर्ण अवसर है। इसलिए अभियान को इन मैचों के उत्साह और स्तर के अनुरूप तैयार किया गया है।

उन्होंने कहा कि पंकज त्रिपाठी की लोकप्रियता, सहजता और दर्शकों से जुड़ने की क्षमता उन्हें इस जश्न के लिए देश को आमंत्रित करने के लिए उपयुक्त बनाती है। अभियान के जरिए मनोरंजन और खेल को भारतीय अंदाज में जोड़ने की कोशिश की गई है, ताकि मुख्य फुटबॉल दर्शकों से आगे भी उत्साह पैदा हो और इन मुकाबलों को देशभर के लोगों के साझा आयोजन के रूप में देखा जाए।

न्यूजलेटर पाने के लिए यहां सब्सक्राइब कीजिए

डिश टीवी की AGM में सभी प्रस्ताव मंजूर, डायरेक्टर के पद पर मनोज डोभाल की पुनर्नियुक्ति

डिश टीवी इंडिया लिमिटेड की 38वीं सालाना आम बैठक में कंपनी के शेयरधारकों ने एजेंडे में रखे गए सभी तीन प्रस्तावों को जरूरी बहुमत के साथ मंजूरी दे दी।

Vikas Saxena by
Published - Wednesday, 30 September, 2026
Last Modified:
Wednesday, 30 September, 2026
DishTV652

डिश टीवी इंडिया लिमिटेड की 38वीं सालाना आम बैठक (एजीएम) 29 सितंबर 2026 को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए हुई। बैठक में कंपनी के शेयरधारकों ने एजेंडे में रखे गए सभी तीन प्रस्तावों को जरूरी बहुमत के साथ मंजूरी दे दी।

एजीएम की शुरुआत सुबह 11:30 बजे हुई और यह दोपहर 12:27 बजे समाप्त हुई। बैठक में कुल 76 शेयरधारक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए शामिल हुए। इनमें 15 प्रमोटर और प्रमोटर ग्रुप से, जबकि 61 सार्वजनिक शेयरधारक थे।

वित्त वर्ष 2025-26 के वित्तीय नतीजों को मंजूरी

पहले प्रस्ताव के तहत वित्त वर्ष 2025-26 के ऑडिट किए गए स्टैंडअलोन और कंसोलिडेटेड वित्तीय विवरणों के साथ बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स और ऑडिटर्स की रिपोर्ट को मंजूरी दी गई। इस प्रस्ताव के पक्ष में 99.7072% वोट पड़े, जबकि 0.2928% वोट विरोध में रहे।

मनोज डोभाल फिर बने डायरेक्टर

दूसरे प्रस्ताव में मनोज डोभाल को कंपनी के डायरेक्टर के तौर पर फिर नियुक्त करने को मंजूरी दी गई। वह रोटेशन के आधार पर रिटायर होने के बाद दोबारा नियुक्ति के लिए योग्य थे और उन्होंने खुद को पुनर्नियुक्ति के लिए पेश किया था। इस प्रस्ताव को 98.4873% वोट के साथ मंजूरी मिली, जबकि 1.5127% वोट इसके खिलाफ पड़े।

कॉस्ट ऑडिटर्स के पारिश्रमिक को भी मंजूरी

तीसरे प्रस्ताव में वित्त वर्ष 2026-27 के लिए कॉस्ट ऑडिटर्स के पारिश्रमिक को मंजूरी देने का प्रस्ताव था। इसे भी शेयरधारकों ने मंजूर कर दिया। इसके पक्ष में 99.7055% वोट पड़े, जबकि 0.2945% वोट विरोध में रहे।

कंपनी ने बताया कि तीनों प्रस्तावों को रिमोट ई-वोटिंग और एजीएम के दौरान हुई ई-वोटिंग के जरिए जरूरी बहुमत के साथ मंजूरी मिली। 

न्यूजलेटर पाने के लिए यहां सब्सक्राइब कीजिए

लीनियर टेलीविजन का नियामकीय बोझ और लागत कम करना जरूरी : केविन वज

केविन वज ने रैखिक टेलीविजन का नियामकीय बोझ और लागत घटाने के लिए रोडमैप बनाने तथा बार्क ऑडियंस रेटिंग फिर शुरू करने की मांग की है।

Samachar4media Bureau by
Published - Tuesday, 29 September, 2026
Last Modified:
Tuesday, 29 September, 2026
jiohotstar

जियोस्टार (JioStar) के एंटरटेनमेंट बिजनेस के सीईओ (CEO) और फिक्की मीडिया एंड एंटरटेनमेंट कमेटी (FICCI Media and Entertainment Committee) के चेयरमैन केविन वज (Kevin Vaz) ने रैखिक टेलीविजन (Linear Television) के नियामकीय बोझ और लागत को कम करने के लिए ठोस रोडमैप बनाने की मांग की है।

उन्होंने सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय से ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल (Broadcast Audience Research Council) यानी बार्क (BARC) की ऑडियंस रेटिंग (Audience Rating) जारी करने की प्रक्रिया तुरंत बहाल करने का भी आग्रह किया।

फिक्की फ्रेम्स 2026 (FICCI FRAMES 2026) के उद्घाटन सत्र में बोलते हुए केविन वज ने कहा कि ब्रॉडकास्टिंग इंडस्ट्री (Broadcasting Industry) को ज्यादा नियामकीय लचीलापन देने की जरूरत है, ताकि रैखिक टेलीविजन डिजिटल प्लेटफॉर्म (Digital Platform) के साथ आगे बढ़ सके। इससे उपभोक्ताओं को यह तय करने की ज्यादा आजादी मिलेगी कि वे क्या, कहां और किस स्क्रीन पर देखना चाहते हैं।

वज ने 10+2 विज्ञापन सीमा हटाने के मंत्रालय के फैसले का भी स्वागत किया। उन्होंने इसे ऐसे नियामकीय ढांचे की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया, जो रैखिक प्रसारण और व्यापक मीडिया लैंडस्केप (Media Landscape) में हो रहे बदलावों को ध्यान में रखता है।

ऑडियंस मेजरमेंट (Audience Measurement) को लेकर उन्होंने बार्क रेटिंग जारी करने की प्रक्रिया फिर शुरू करने की मांग की। उनका कहना था कि विश्वसनीय और सत्यापन योग्य ऑडियंस डेटा (Audience Data) उपलब्ध नहीं होने से ब्रॉडकास्टर्स, विज्ञापनदाताओं और एजेंसियों के बीच अनिश्चितता पैदा हो रही है, खासकर त्योहारी सीजन के दौरान।

उन्होंने कहा कि विश्वसनीय मापन जरूरी है, ताकि ब्रांड अपने कैंपेन (Campaign) की बेहतर प्लानिंग कर सकें और दर्शकों तक प्रभावी तरीके से पहुंच सकें।

केविन वज ने कहा कि टेलीविजन आज भी भारत में सबसे ज्यादा देखे जाने वाले और किफायती मीडिया प्लेटफॉर्म (Media Platform) में से एक है। उनके मुताबिक, ब्रॉडकास्टिंग और विज्ञापन क्षेत्र व्यापक आर्थिक व्यवस्था में भी योगदान देते हैं। वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता के बीच प्रसारकों और विज्ञापनदाताओं को समर्थन देने के लिए विश्वसनीय ऑडियंस मापन जरूरी है।

उन्होंने यह बातें ऐसे समय कहीं हैं, जब मीडिया और एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री (Media and Entertainment Industry) में कंटेंट कंजम्पशन (Content Consumption) के तरीके तेजी से बदल रहे हैं। रैखिक टेलीविजन, स्ट्रीमिंग, मोबाइल और कनेक्टेड टीवी (Connected TV) अब समानांतर रूप से आगे बढ़ रहे हैं।

फिक्की फ्रेम्स 2026 का आयोजन ‘इंडियाज मीडिया मोमेंट: क्रिएटिंग वैल्यू इन एन एज ऑफ इनफिनिट कंटेंट’ थीम के तहत किया जा रहा है। वज ने डिजिटल मीडिया, कनेक्टेड टीवी, माइक्रो-ड्रामा और कंटेंट कॉमर्स के विस्तार पर भी बात की। उन्होंने ऐसे इंडस्ट्री एनवायरनमेंट (Industry Environment) की जरूरत बताई, जो इनोवेशन और सेल्फ-रेगुलेशन (Self-Regulation) को बढ़ावा दे।

न्यूजलेटर पाने के लिए यहां सब्सक्राइब कीजिए

टीवी रेटिंग्स: अब सवाल अस्तित्व का

BARC के निलंबन से त्योहारों के सीजन में टीवी चैनलों के सामने अनिश्चितता है, लेकिन सभी पक्ष इंडस्ट्री के हित में मिलकर काम करें तो समाधान संभव है।

Samachar4media Bureau by
Published - Monday, 28 September, 2026
Last Modified:
Monday, 28 September, 2026
MarkandAdhikari521

मार्कंड अधिकारी, चेयरमैन व मैनेजिंग डायरेक्टर,

मानसून का मौसम अब खत्म होने की ओर है और बाजार साल के सबसे बड़े त्योहारों के सीजन के लिए तैयार हो रहा है। दिवाली से पहले का समय कंपनियों के लिए विज्ञापन पर खर्च करने और मीडिया के लिए कमाई का अहम दौर माना जाता है। लेकिन इस बार लीनियर टीवी इंडस्ट्री में त्योहारों जैसा उत्साह नहीं दिख रहा है। इसके बजाय इंडस्ट्री में अनिश्चितता का माहौल है।

इसकी बड़ी वजह टेलीविजन ऑडियंस रेटिंग को लेकर साफ तस्वीर नहीं होना है। विज्ञापन एजेंसीज अलग-अलग चैनलों पर विज्ञापनदाताओं का बजट तय करने के लिए उनकी रेटिंग को आधार बनाती हैं। ऐसे में टीवी रेटिंग उपलब्ध नहीं होने पर अलग-अलग चैनलों और कार्यक्रमों पर विज्ञापन खर्च तय करना मुश्किल हो जाता है।

क्यों नहीं मिल रही टीवी रेटिंग?

इसका कारण है ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल (BARC) से जुड़ा मौजूदा मामला। जुलाई 2026 में सूचना और प्रसारण मंत्रालय (MIB) ने BARC को टीवी रेटिंग प्रकाशित करने से रोकने का निर्देश दिया था, जब तक कि उसकी लाइसेंस प्रक्रिया नई टीवी रेटिंग पॉलिसी 2026 के तहत पूरी नहीं हो जाती।

सरकार ने मार्च 2026 में नई टीवी रेटिंग पॉलिसी जारी की थी। इसका मकसद टीवी दर्शक मापन व्यवस्था में पारदर्शिता, जवाबदेही और विश्वसनीयता को मजबूत करना है। नई पॉलिसी में रेटिंग एजेंसीज के लिए पंजीकरण, संचालन, ऑडिट और निगरानी से जुड़े नियम तय किए गए हैं।

नई पॉलिसी में टीवी रेटिंग एजेंसीज के लिए स्वतंत्र निदेशकों, ऑडिट, डेटा सुरक्षा और बड़े सैंपल के जरिए दर्शकों की माप जैसे प्रावधान भी किए गए हैं। सरकार ने रेटिंग एजेंसी बनने के लिए नेटवर्थ की शर्त को 20 करोड़ रुपये से घटाकर 5 करोड़ रुपये किया है, ताकि इस क्षेत्र में और कंपनियों के आने की संभावना बढ़े।

इसके बावजूद अब तक BARC ही टीवी रेटिंग के क्षेत्र में प्रमुख और अकेली रेटिंग एजेंसी बनी हुई है। ऐसे में रेटिंग का रुकना पूरी टीवी इंडस्ट्री के लिए चिंता का विषय बन गया है।

BARC को लेकर पहले भी उठते रहे हैं सवाल

BARC के कामकाज और पारदर्शिता को लेकर इंडस्ट्री के कुछ हिस्सों में पहले भी सवाल उठते रहे हैं। पुराने समय में BARC के कामकाज को लेकर यह शिकायत रही कि वह अपने हितधारकों के सवालों का पर्याप्त जवाब नहीं देती थी और अपनी प्रणाली के बारे में ज्यादा जानकारी साझा नहीं करती थी। इसके बाद एजेंसी की एक अन्य मैनेजमेंट टीम पर रेटिंग में गड़बड़ी, हेरफेर और भ्रष्टाचार जैसे आरोप लगे थे, जिसके बाद सीबीआई जांच भी हुई। इन घटनाओं से इंडस्ट्री के कुछ हितधारकों का भरोसा प्रभावित हुआ।

मौजूदा व्यवस्था में भी हितधारकों के सवालों को लेकर पर्याप्त स्पष्टता नहीं दिखाई गई। BARC का लंबे समय तक अकेली रेटिंग एजेंसी बने रहना और उससे जुड़ी शिकायतें टीवी रेटिंग व्यवस्था में भरोसे को प्रभावित करती रही हैं।इसी तरह की चिंताओं के बीच सरकार ने टीवी रेटिंग के लिए नई पॉलिसी बनाई है। सरकार के मुताबिक, नई पॉलिसी का उद्देश्य देश में टीवी दर्शक मापन व्यवस्था में पारदर्शिता, स्वतंत्रता और जवाबदेही को मजबूत करना है।

त्योहारों के सीजन में बढ़ी चिंता

टीवी रेटिंग को लेकर यह अनिश्चितता ऐसे समय में आई है, जब दिवाली से पहले विज्ञापन बाजार में गतिविधियां बढ़ने की उम्मीद रहती है। लीनियर टीवी चैनल पहले से ही डिजिटल मीडिया और मल्टीमीडिया प्लेटफॉर्म से कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना कर रहे हैं। डिजिटल प्लेटफॉर्म पारंपरिक टीवी के विज्ञापन कारोबार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ा रहे हैं। ऐसे माहौल में टीवी चैनलों के लिए रेटिंग का उपलब्ध नहीं होना एक और बड़ी चुनौती बन गया है।

विज्ञापनदाता और एजेंसीज यह जानना चाहती हैं कि किस चैनल या कार्यक्रम की पहुंच और दर्शक संख्या कितनी है, ताकि उसी आधार पर विज्ञापन का बजट तय किया जा सके। रेटिंग नहीं होने पर यह फैसला लेना मुश्किल हो जाता है।

इंडस्ट्री को जल्द समाधान की जरूरत

मौजूदा स्थिति में पूरी टीवी इंडस्ट्री के हित में जल्द कोई व्यावहारिक समाधान निकालने की जरूरत है। सभी संबंधित पक्षों को मिलकर ऐसा रास्ता निकालना चाहिए, जिससे टीवी रेटिंग व्यवस्था दोबारा सुचारु हो सके और साथ ही नई पॉलिसी के तहत पारदर्शिता और जवाबदेही भी बनी रहे।

साथ ही, BARC जैसी रेटिंग एजेंसी के लिए भी यह जरूरी है कि वह अपनी जिम्मेदारी को गंभीरता से निभाए और अपने कामकाज में ज्यादा पारदर्शिता लाए। नई टीवी रेटिंग पॉलिसी 2026 इसी दिशा में बदलाव का आधार तैयार करती है।

न्यूजलेटर पाने के लिए यहां सब्सक्राइब कीजिए

'डीडी फ्री डिश' पर इन तीन नए चैनलों को मिली जगह

प्रसार भारती की ओर से जारी नतीजों के मुताबिक, इन स्लॉट का आवंटन 1 अक्टूबर 2026 से 31 मार्च 2027 तक छह महीने की अवधि के लिए किया गया है।

Samachar4media Bureau by
Published - Monday, 28 September, 2026
Last Modified:
Monday, 28 September, 2026
DDFreeDish689

प्रसार भारती ने अपने 'डीडी फ्री डिश' प्लेटफॉर्म पर खाली पड़े तीन MPEG-4 स्लॉट की नीलामी पूरी कर ली है। 102वीं मिड-ईयर ई-नीलामी के बाद न्यूज लीडर, TV7 भारत और PTC सिमरन सफल चैनल रहे हैं।

प्रसार भारती की ओर से जारी नतीजों के मुताबिक, इन स्लॉट का आवंटन 1 अक्टूबर 2026 से 31 मार्च 2027 तक छह महीने की अवधि के लिए किया गया है।

यह नीलामी डीडी फ्री डिश की खाली MPEG-4 क्षमता के मिड-ईयर आवंटन का हिस्सा थी। डीडी फ्री डिश भारत का फ्री-टू-एयर डायरेक्ट-टू-होम प्लेटफॉर्म है। प्रसार भारती ने ई-ऑक्शन मेथडोलॉजी 2025 के तहत इस नीलामी के लिए आवेदन आमंत्रित किए थे।

उपलब्ध क्षमता को चैनल की जॉनर और भाषा के आधार पर पांच कैटेगरी में बांटा गया था। इनमें G1 न्यूज और करेंट अफेयर्स चैनलों, जबकि G2 गैर-न्यूज चैनलों के लिए था। R1, R2 और R3 क्षेत्रीय भाषाओं के चैनलों के लिए रखे गए थे।

R1 में तमिल, तेलुगु, कन्नड़ और मलयालम चैनल शामिल थे। R2 में पंजाबी, मराठी, गुजराती, बंगाली और ओड़िया चैनल रखे गए थे। वहीं, संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल अन्य क्षेत्रीय भाषाओं को, हिंदी और उर्दू को छोड़कर, R3 कैटेगरी में रखा गया था।

नीलामी में G1 और G2 कैटेगरी के लिए सबसे ज्यादा रिजर्व प्राइस तय किया गया था। G1 स्लॉट के लिए शुरुआती बोली 39.83 लाख रुपये, जबकि G2 के लिए 36.40 लाख रुपये थी। R2 के लिए शुरुआती कीमत 21.56 लाख रुपये, R3 के लिए 3.31 लाख रुपये और R1 के लिए 3 लाख रुपये रखी गई थी।

मेथडोलॉजी के तहत, कुछ कैटेगरी के बोलीदाताओं को दूसरी कैटेगरी के स्लॉट के लिए भी बोली लगाने की अनुमति थी। G1 के बोलीदाता G1, G2, R2, R1 और R3 में बोली लगा सकते थे। G2 के बोलीदाता G2, R2, R1 और R3 के लिए बोली लगा सकते थे। इसी तरह R2 के बोलीदाता R2, R1 और R3, जबकि R3 के बोलीदाता R3 और R1 के लिए बोली लगा सकते थे। R1 में बोली लगाने की अनुमति सिर्फ R1 के बोलीदाताओं को थी।

भाषा और जॉनर की जांच हुई सख्त

क्षेत्रीय स्लॉट के लिए आवेदन करने वाले ब्रॉडकास्टर्स के लिए प्रसार भारती ने दस्तावेजों से जुड़ी शर्तें भी सख्त की थीं। इसके तहत चैनलों को अपनी घोषित भाषा और जॉनर साबित करने के लिए जरूरी दस्तावेज देने थे।

पहले से चल रहे चैनलों को किसी एमएसओ या डीटीएच प्लेटफॉर्म पर अपनी मौजूदगी का दस्तावेजी सबूत देना था। इसके साथ ही चैनल किस भाषा और जॉनर के तहत चल रहा है, इसकी जानकारी भी देनी थी। आवेदक सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, ट्राई और टीवी रेटिंग एजेंसियों जैसे BARC से मिले दस्तावेज भी जमा कर सकते थे।

नीलामी की शर्तों के मुताबिक, चैनलों को मुख्य रूप से अपनी घोषित जॉनर और भाषा में ही कार्यक्रम प्रसारित करने होंगे। प्रसार भारती ने ‘मुख्य रूप से’ का मतलब 75 फीसदी कंटेंट बताया है। साथ ही, घोषित भाषा और जॉनर का कंटेंट चैनल के कुल मासिक कंटेंट के 60 फीसदी से कम नहीं होना चाहिए।

अगर कोई चैनल अपनी घोषित भाषा या जॉनर की शर्तों का उल्लंघन करता है, तो उसके प्रसारण की रिकॉर्डिंग की समीक्षा की जा सकती है। इसके बाद उसे शो-कॉज नोटिस भी दिया जा सकता है। शर्तों का पालन नहीं करने पर प्रसार भारती डीडी फ्री डिश से चैनल को हटाने का फैसला भी ले सकता है।

डीडी फ्री डिश पर जुड़ेंगे तीन चैनल

न्यूज लीडर, TV7 भारत और PTC सिमरन के जुड़ने के साथ प्रसार भारती डीडी फ्री डिश की खाली क्षमता को समय-समय पर ई-नीलामी के जरिए आवंटित करने की प्रक्रिया जारी रखे हुए है।

सफल बोलीदाताओं को नीलामी नोटिस में तय भुगतान, तकनीकी और कैरिज से जुड़ी सभी शर्तों का पालन करना होगा। इनमें लेटर ऑफ अलॉटमेंट मिलने के 15 दिनों के भीतर तय समझौते पर हस्ताक्षर करना और प्रसार भारती की ओर से तय शेड्यूल के अनुसार भुगतान करना शामिल है।

शर्तों के मुताबिक, बकाया भुगतान पर 14.5 फीसदी सालाना ब्याज देना होगा। लगातार भुगतान में डिफॉल्ट होने पर रकम जब्त करने और चैनल को डीडी फ्री डिश से हटाने का भी प्रावधान है। सफल चैनलों को डीडी फ्री डिश पर जगह मिलने से पहले कैरिज फीस की पहली किस्त का भुगतान करना होगा। इसके अलावा, उन्हें जरूरी तकनीकी उपकरण और सैटेलाइट पैरामीटर दूरदर्शन के तोड़ापुर, नई दिल्ली स्थित डीटीएच स्टेशन को उपलब्ध कराने होंगे। 

न्यूजलेटर पाने के लिए यहां सब्सक्राइब कीजिए

FAST और ALTD सेवाओं के लिए रेगुलेट्री फ्रेमवर्क लाने की सिफारिश कर सकता है TRAI

भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण जल्द ही एप्लिकेशन-बेस्ड लीनियर टेलीविजन डिस्ट्रीब्यूशन और फ्री एड-सपोर्टेड स्ट्रीमिंग टेलीविजन सेवाओं को एक औपचारिक नियामकीय ढांचे के तहत लाने की सिफारिश कर सकता है।

Samachar4media Bureau by
Published - Friday, 25 September, 2026
Last Modified:
Friday, 25 September, 2026
TV58541

इमरान फजल, असिसटेंट एडिटर, एक्सचेंज4मीडिया ।।

भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) जल्द ही एप्लिकेशन-बेस्ड लीनियर टेलीविजन डिस्ट्रीब्यूशन (ALTD) और फ्री एड-सपोर्टेड स्ट्रीमिंग टेलीविजन (FAST) सेवाओं को एक औपचारिक नियामकीय ढांचे (रेगुलेट्री फ्रेमवर्क) के तहत लाने की सिफारिश कर सकता है। मामले से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, TRAI अब भारत में इंटरनेट के जरिए दी जा रही टेलीविजन सेवाओं के नियमन के तरीके में बड़े बदलाव की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है, जब सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (MIB) ने TRAI से यह जांचने को कहा था कि क्या FAST और ALTD सेवाओं को लाइसेंसिंग के दायरे में लाया जाना चाहिए। सूत्रों के मुताबिक, TRAI अपने इस रुख को कायम रख सकता है कि खुले इंटरनेट पर लीनियर और तय शेड्यूल वाले चैनल उपलब्ध कराने वाली टेलीविजन सेवाओं को पूरी तरह किसी औपचारिक नियामकीय ढांचे से बाहर नहीं रखा जाना चाहिए।

यह मुद्दा भारत के तेजी से बदलते टेलीविजन वितरण बाजार में एक अहम बहस बन गया है। पारंपरिक वितरण प्लेटफॉर्म, जिनमें केबल और डीटीएच ऑपरेटर शामिल हैं, का कहना है कि FAST सेवाएं तेजी से टेलीविजन वितरण की तरह काम कर रही हैं, लेकिन उन्हें लाइसेंस प्राप्त डिस्ट्रीब्यूटर्स पर लागू होने वाली कई जिम्मेदारियों का पालन नहीं करना पड़ता।

वहीं, टेक्नोलॉजी कंपनियों, ओटीटी प्लेटफॉर्म, स्मार्ट-टीवी निर्माताओं और FAST ऑपरेटर्स का कहना है कि इंटरनेट आधारित सेवाएं पारंपरिक प्रसारण से मूल रूप से अलग हैं और उन पर पुराने लाइसेंसिंग नियम लागू नहीं किए जाने चाहिए।

इसलिए नियामकीय बहस अब इस सवाल पर केंद्रित हो गई है कि किसी सेवा की प्रकृति उसके कंटेंट पहुंचाने के लिए इस्तेमाल होने वाली तकनीक से तय होनी चाहिए या फिर इस बात से कि वह उपभोक्ताओं को किस तरह का टेलीविजन जैसा अनुभव देती है।

पारंपरिक डिस्ट्रीब्यूशन के बराबर नियमों की मांग

नियमन का समर्थन करने वाले ब्रॉडकास्टर्स ने पारंपरिक टेलीविजन वितरण और इंटरनेट आधारित लीनियर टेलीविजन के बीच बढ़ते नियामकीय अंतर की ओर इशारा किया है।

टाइम्स नेटवर्क ने TRAI को दिए अपने सुझाव में कहा कि FAST सेवाएं पारंपरिक टेलीविजन वितरण की तरह काम कर रही हैं, लेकिन केबल, डीटीएच और आईपीटीवी ऑपरेटरों पर लागू लाइसेंसिंग, टैरिफ, गुणवत्ता और कंटेंट से जुड़े नियम इन पर लागू नहीं होते।

ब्रॉडकास्टर के मुताबिक, मुफ्त इंटरनेट आधारित टेलीविजन चैनलों की तेजी से बढ़ती संख्या से प्रतिस्पर्धा का संतुलन प्रभावित हो रहा है और पे-टीवी कारोबार की अर्थव्यवस्था पर दबाव पड़ रहा है। टाइम्स नेटवर्क ने कहा कि केबल और डीटीएच प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध प्रीमियम चैनल अब FAST सेवाओं के जरिए मुफ्त में भी उपलब्ध हो रहे हैं। इससे दर्शकों के पारंपरिक पेड टीवी से हटने की रफ्तार बढ़ सकती है और सब्सक्रिप्शन से होने वाली कमाई पर दबाव पड़ सकता है।

टाइम्स नेटवर्क ने विज्ञापन से होने वाली कमाई के बंटवारे में पारदर्शिता की कमी, शिकायतों के समाधान के लिए मानकीकृत व्यवस्था नहीं होने और स्मार्ट-टीवी निर्माताओं तथा ऑपरेटिंग सिस्टम कंपनियों के चैनल खोजने और विज्ञापन इन्वेंट्री पर बढ़ते प्रभाव को लेकर भी चिंता जताई।

उसने आशंका जताई कि ये टेक्नोलॉजी कंपनियां भविष्य में कनेक्टेड-टीवी इंटरफेस पर चैनलों को दिखाने और उनकी पहुंच बढ़ाने के लिए शुल्क लेकर पारंपरिक टीवी के कैरिज फीस मॉडल जैसा सिस्टम बना सकती हैं।

एबीपी नेटवर्क ने भी नियमन का समर्थन किया है, लेकिन उसने पुराने टेलीविजन नियमों को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सीधे लागू करने के बजाय “हल्के लेकिन सक्रिय” नियामकीय ढांचे की मांग की है। कंपनी ने एल्गोरिदम के जरिए अपने ही कंटेंट को प्राथमिकता देने, प्रोग्रामेटिक विज्ञापन व्यवस्था में पारदर्शिता की कमी और दर्शकों से जुड़े डेटा तक असमान पहुंच जैसे जोखिमों की ओर इशारा किया।

एबीपी ने “इन्वेंट्री सॉवरेन्टी” के लिए भी सुरक्षा उपाय मांगे हैं। उसका कहना है कि ब्रॉडकास्टर द्वारा बनाए गए कंटेंट से जुड़ी विज्ञापन इन्वेंट्री पर ब्रॉडकास्टर का नियंत्रण बना रहना चाहिए।

Zee ने लाइसेंस और ‘Must Carry’ नियम की मांग की

जी एंटरटेनमेंट ने नियामकीय बराबरी के पक्ष में ज्यादा मजबूत रुख अपनाया है। कंपनी का कहना है कि एप्लिकेशन आधारित लीनियर टेलीविजन प्लेटफॉर्म तेजी से पारंपरिक टेलीविजन वितरण की तरह काम कर रहे हैं, लेकिन मौजूदा कई जिम्मेदारियों से बाहर हैं।

ब्रॉडकास्टर के मुताबिक, पारंपरिक ब्रॉडकास्टर्स और डिस्ट्रीब्यूशन प्लेटफॉर्म ऑपरेटर्स पर प्रोग्राम और विज्ञापन कोड, टैरिफ और इंटरकनेक्शन नियम, उपभोक्ता सुरक्षा से जुड़े नियम और सार्वजनिक सेवा से जुड़ी जिम्मेदारियां लागू हैं। इससे नियमन में असमानता पैदा होती है।

जी ने प्रस्ताव दिया है कि ALTD प्रोवाइडर्स को औपचारिक अनुमति लेनी चाहिए। इसके तहत एप्लिकेशन प्रोवाइडर को मुख्य नियामकीय इकाई माना जाए, क्योंकि वही चैनलों को एक जगह लाता है, इलेक्ट्रॉनिक प्रोग्राम गाइड संभालता है और उपभोक्ताओं की चैनल तक पहुंच नियंत्रित करता है।

कंपनी ने पूरे भारत के लिए 10 साल की अवधि वाली अनुमति का प्रस्ताव दिया है। इसके लिए भारत में व्यावसायिक मौजूदगी रखने वाली भारतीय कंपनियों को पात्र माना जा सकता है और न्यूनतम नेटवर्थ 10 करोड़ रुपये या डीटीएच ऑपरेटरों पर लागू समान सीमा रखने का सुझाव दिया गया है।

जी ने ALTD सेवाओं पर ‘Must Carry’ और ‘Must Provide’ नियम लागू करने की भी मांग की है। कंपनी का कहना है कि इंटरनेट पर बैंडविड्थ की कमी नहीं होने के कारण सभी चैनलों को उपलब्ध कराना तकनीकी रूप से संभव है।

इसके अलावा, उसने प्रसार भारती के साथ अनिवार्य स्पोर्ट्स सिग्नल शेयरिंग के नियमों को भी ALTD प्लेटफॉर्म तक बढ़ाने का प्रस्ताव दिया है।

कई ब्रॉडकास्टर्स ने टेलीकॉम जैसा नियमन लागू करने का किया विरोध 

हालांकि, कई बड़े ब्रॉडकास्टर्स ने FAST और ALTD को टेलीकॉम जैसी अनुमति व्यवस्था के तहत लाने का विरोध किया है। टीवी टुडे नेटवर्क और नेटवर्क18 का कहना है कि FAST और ALTD सेवाएं मूल रूप से इंटरनेट आधारित ओटीटी एप्लिकेशन हैं और इन्हें टेलीकम्युनिकेशंस एक्ट, 2023 या TRAI एक्ट के तहत टेलीकॉम सेवाएं नहीं माना जा सकता।

टीवी टुडे ने कहा कि ये सेवाएं केवल टेलीकॉम कंपनियों और इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर्स के नेटवर्क का इस्तेमाल करती हैं। ये खुद वह ट्रांसमिशन काम नहीं करतीं, जो किसी सेवा को टेलीकॉम सेवा की श्रेणी में लाने के लिए जरूरी है।

कंपनी ने यह भी कहा कि इन सेवाओं पर पहले से ही MIB की अपलिंकिंग और डाउनलिंकिंग गाइडलाइंस, केबल टेलीविजन नेटवर्क्स एक्ट, इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी रूल्स और इंडस्ट्री की सेल्फ-रेगुलेटरी व्यवस्था जैसे नियम लागू हैं।

नेटवर्क18 ने कहा कि ओटीटी सेवाओं को अंतिम टेलीकम्युनिकेशंस एक्ट से जानबूझकर बाहर रखा गया था, जबकि इसके पुराने ड्राफ्ट में इन्हें शामिल करने का प्रस्ताव था। कंपनी के मुताबिक, FAST “एप्लिकेशन लेयर” पर काम करता है, जबकि टेलीकॉम ऑपरेटर “नेटवर्क लेयर” पर काम करते हैं।

कल्वर मैक्स एंटरटेनमेंट और जियोस्टार ने भी इसी तरह के कानूनी और संवैधानिक तर्क दिए हैं। कल्वर मैक्स का कहना है कि FAST सेवाएं टेलीकम्युनिकेशन नेटवर्क की उपयोगकर्ता हैं, न कि टेलीकम्युनिकेशन सेवा देने वाली कंपनियां।

वहीं, जियोस्टार का कहना है कि ओटीटी सेवाएं टेलीकॉम नेटवर्क स्थापित नहीं करतीं, स्पेक्ट्रम का इस्तेमाल नहीं करतीं और एंड-टू-एंड कनेक्टिविटी उपलब्ध नहीं करातीं। दोनों कंपनियों ने यह सवाल भी उठाया है कि स्पेक्ट्रम और बुनियादी ढांचे की कमी पर आधारित टेलीकॉम लाइसेंसिंग के सिद्धांतों को खुले इंटरनेट पर चलने वाले एप्लिकेशन पर कैसे लागू किया जा सकता है।

जियो प्लेटफॉर्म्स ने ब्रॉडकास्टिंग नियमन का विरोध किया

जियो प्लेटफॉर्म्स का कहना है कि सिर्फ इसलिए कि ओटीटी सेवाओं पर तय शेड्यूल के मुताबिक कार्यक्रम और विज्ञापन दिखाए जाते हैं, उन्हें पारंपरिक टेलीविजन चैनल नहीं माना जा सकता। 11 मई को दिए अपने सुझाव में कंपनी ने कहा कि FAST चैनलों समेत ओटीटी के जरिए उपलब्ध कराए जाने वाले कंटेंट को इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी रूल्स के तहत ही नियंत्रित किया जाना चाहिए। इन पर केबल, डीटीएच, एचआईटीएस या आईपीटीवी ऑपरेटरों वाले नियम लागू नहीं होने चाहिए।

जियो का कहना है कि ब्रॉडकास्टिंग और ओटीटी की डिलीवरी तकनीक, नेटवर्क कंट्रोल, सेवा की गुणवत्ता, कंटेंट अधिकार और कारोबारी ढांचे अलग-अलग हैं। कंपनी ने नेट न्यूट्रैलिटी से जुड़े मौजूदा नियमों का भी हवाला दिया और कहा कि अतिरिक्त ‘Must Carry’ या ‘Must Provide’ नियमों की जरूरत नहीं है।

जियो ने यूट्यूब, जियोहॉटस्टार, जियोटीवी, नेटफ्लिक्स, अमेजन प्राइम वीडियो और सोशल मीडिया की लाइव स्ट्रीमिंग सेवाओं का उदाहरण देते हुए कहा कि सिर्फ कंटेंट को चैनल की तरह दिखाने से उसकी नियामकीय श्रेणी तय नहीं होनी चाहिए।

स्मार्ट-टीवी कंपनियों को ब्रॉडकास्टर माने जाने की चिंता

संभावित नए नियामकीय ढांचे को लेकर स्मार्ट-टीवी निर्माताओं और टेक्नोलॉजी कंपनियों ने भी चिंता जताई है। एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स इंडिया ने कहा है कि सिर्फ इसलिए टेलीविजन निर्माताओं को ब्रॉडकास्टर या डिस्ट्रीब्यूशन प्लेटफॉर्म नहीं माना जाना चाहिए क्योंकि उनके स्मार्ट टीवी में FAST एप्लिकेशन पहले से इंस्टॉल हो सकते हैं।

कंपनी का कहना है कि टीवी निर्माता टेक्नोलॉजी उपलब्ध कराने का काम करते हैं और थर्ड-पार्टी एप्लिकेशन के संपादकीय कंटेंट पर उनका नियंत्रण नहीं होता।

मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन फॉर इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (MAIT) ने भी चेतावनी दी है कि ब्रॉडकास्टिंग से जुड़ी अतिरिक्त जिम्मेदारियां उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनियों के लिए अनुपालन का बोझ बढ़ा सकती हैं। इन कंपनियों पर पहले से ही बीआईएस सर्टिफिकेशन, ऊर्जा दक्षता और पर्यावरण से जुड़े नियम लागू हैं।

FAST प्लेटफॉर्म क्लाउडटीवी और रनटीवी ने पूरी लाइसेंसिंग व्यवस्था के बजाय MIB के साथ हल्के, रजिस्ट्रेशन आधारित ढांचे का प्रस्ताव दिया है।

नियामकीय फैसला बदल सकता है कनेक्टेड टीवी का बाजार

कनेक्टेड टीवी का इस्तेमाल बढ़ने के साथ इस पूरे मामले का महत्व भी बढ़ रहा है। स्विफ्ट टीवी के हवाले से दिए गए इंडस्ट्री अनुमानों के मुताबिक, भारत में कनेक्टेड टीवी वाले घरों की संख्या मौजूदा करीब 2 करोड़ से बढ़कर 2028 तक 4 करोड़ से ज्यादा हो सकती है। इसी अवधि में FAST से होने वाली विज्ञापन आय करीब 60 करोड़ डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है।

अलग-अलग पक्षों की ओर से दिए गए सुझाव भारत के टेलीविजन बाजार में हो रहे बड़े बदलाव को दिखाते हैं। ब्रॉडकास्टिंग, ओटीटी और इंटरनेट आधारित डिस्ट्रीब्यूशन के बीच की सीमाएं तेजी से धुंधली हो रही हैं।

पारंपरिक ब्रॉडकास्टर्स और डिस्ट्रीब्यूटर्स के लिए इंटरनेट पर टीवी के बढ़ते इस्तेमाल के बीच नियमन का सवाल बराबर का प्रतिस्पर्धी माहौल बनाने से जुड़ा है। वहीं, टेक्नोलॉजी कंपनियों और FAST ऑपरेटर्स की मुख्य चिंता यह है कि बुनियादी ढांचे पर आधारित पारंपरिक ब्रॉडकास्टिंग के लिए बनाए गए नियम एप्लिकेशन लेयर पर काम करने वाली सेवाओं के लिए जरूरत से ज्यादा अनुपालन बोझ पैदा कर सकते हैं।

अब अंतिम नियामकीय व्यवस्था यह तय करेगी कि भारत का उभरता हुआ इंटरनेट टेलीविजन बाजार किसी नए और अलग नियामकीय ढांचे के तहत विकसित होगा या फिर मुख्य रूप से मौजूदा डिजिटल और कंटेंट नियमों के तहत ही चलता रहेगा। 

न्यूजलेटर पाने के लिए यहां सब्सक्राइब कीजिए

TV Today Network की बोर्ड बैठक 2 नवंबर को, दूसरी तिमाही के नतीजों पर होगा फैसला

टीवी टुडे नेटवर्क लिमिटेड (TV Today Network Limited) ने बताया है कि कंपनी के निदेशक मंडल की बैठक 2 नवंबर 2026 को होगी।

Vikas Saxena by
Published - Thursday, 24 September, 2026
Last Modified:
Thursday, 24 September, 2026
TVToday8541

टीवी टुडे नेटवर्क लिमिटेड (TV Today Network Limited) ने बताया है कि कंपनी के निदेशक मंडल की बैठक 2 नवंबर 2026 को होगी। इस बैठक में वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही और पहली छमाही के अनऑडिटेड स्टैंडअलोन और कंसोलिडेटेड वित्तीय नतीजों पर विचार किया जाएगा और उन्हें मंजूरी दी जाएगी।

कंपनी ने यह जानकारी 23 सितंबर 2026 को बीएसई और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज को दी गई सूचना में साझा की है।

कंपनी ने बताया कि दूसरी तिमाही और छमाही 30 सितंबर 2026 को खत्म हो रही है। इनके वित्तीय नतीजों को 2 नवंबर को होने वाली बोर्ड बैठक में रखा जाएगा।

इसके साथ ही कंपनी ने ट्रेडिंग विंडो बंद करने की भी जानकारी दी है। कंपनी के इनसाइडर ट्रेडिंग से जुड़े नियमों के तहत उसके शेयरों में कारोबार के लिए ट्रेडिंग विंडो 1 अक्टूबर 2026 से 4 नवंबर 2026 तक बंद रहेगी। यह अवधि दोनों तारीखों को शामिल करते हुए है।

यह पाबंदी कंपनी के सभी इनसाइडर्स पर लागू होगी। ट्रेडिंग विंडो 4 नवंबर 2026 को बंद रहेगी।

 

न्यूजलेटर पाने के लिए यहां सब्सक्राइब कीजिए

अनु सिक्का Jio Studios में बनीं एनिमेशन की हेड

मीडिया इंडस्ट्री की अनुभवी एग्जिक्यूटिव अनु सिक्का ने Jio Studios में हेड ऑफ एनिमेशन के तौर पर जॉइन किया है।

Samachar4media Bureau by
Published - Tuesday, 22 September, 2026
Last Modified:
Tuesday, 22 September, 2026
AnnuSikka5211

मीडिया इंडस्ट्री की अनुभवी एग्जिक्यूटिव अनु सिक्का ने Jio Studios में हेड ऑफ एनिमेशन के तौर पर जॉइन किया है। इस घटनाक्रम से जुड़े सूत्रों ने एक्सचेंज4मीडिया से इसकी पुष्टि की है।

यह नियुक्ति अनु सिक्का का अगला प्रोफेशनल कदम है। उन्होंने हाल ही में JioStar में एग्जिक्यूटिव वाइस प्रेसिडेंट और बिजनेस हेड–किड्स एंटरटेनमेंट एंड इंफोटेनमेंट के पद से इस्तीफा दिया था। इसके साथ ही Viacom18 के साथ उनका दो दशक से ज्यादा लंबा जुड़ाव भी खत्म हुआ। रिलायंस इंडस्ट्रीज और द वॉल्ट डिज्नी कंपनी के भारत में मीडिया कारोबार के विलय के बाद Viacom18, JioStar का हिस्सा बन गया था।

Jio Studios में अपनी नई भूमिका में अनु सिक्का एनिमेशन, बच्चों के मनोरंजन, कंटेंट डेवलपमेंट और इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी (IP) तैयार करने का अपना लंबा अनुभव इस्तेमाल करेंगी। हालांकि, उनकी नई भूमिका में जिम्मेदारियों के बारे में अभी आधिकारिक तौर पर ज्यादा जानकारी सामने नहीं आई है।

अनु सिक्का ने 2006 में Viacom18 जॉइन किया था। यहां उन्होंने नेटवर्क के बच्चों के मनोरंजन से जुड़े पोर्टफोलियो को तैयार करने और उसका विस्तार करने में अहम भूमिका निभाई। अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने भारत में देश में तैयार किए गए एनिमेशन और कैरेक्टर आधारित मनोरंजन को मजबूत करने में भी योगदान दिया।

वह Motu Patlu, Shiva, Gattu Battu, Rudra, Keymon Ache और Pakdam Pakdai जैसे कई लोकप्रिय भारतीय एनिमेशन प्रॉपर्टीज के निर्माण और विकास से जुड़ी रही हैं। उनके नेतृत्व में किड्स एंटरटेनमेंट क्लस्टर ने 650 घंटे से ज्यादा स्थानीय स्तर पर तैयार किया गया ओरिजिनल कंटेंट बनाया।

अनु सिक्का ने Ninja Hattori, Oggy and the Cockroaches और Doraemon जैसे बड़े इंटरनेशनल बच्चों के कंटेंट की खरीद और उन्हें भारतीय दर्शकों के हिसाब से तैयार करने का काम भी देखा। वह Nickelodeon’s Kids’ Choice Awards को भारत लाने और इसे नेटवर्क के लिए हर साल होने वाले कार्यक्रम के तौर पर विकसित करने से भी जुड़ी रही हैं।

अपने लंबे कार्यकाल के दौरान उन्होंने कंटेंट स्ट्रैटेजी, प्रोग्रामिंग, शेड्यूलिंग, कमीशनिंग, एक्विजिशन, बजट, मार्केटिंग और कंज्यूमर प्रोडक्ट्स समेत कई तरह की जिम्मेदारियां संभालीं।

Viacom18 से पहले अनु सिक्का ने अपने करियर की शुरुआत Newstrack से करंट अफेयर्स प्रोग्रामिंग में की थी। Newstrack बाद में Aaj Tak का हिस्सा बना। इसके बाद उन्होंने BITV और Tara Punjabi में काम किया। बाद में उन्होंने SAB TV के दिल्ली ब्यूरो का नेतृत्व किया, जहां उन्होंने करंट अफेयर्स प्रोग्रामिंग पर काम किया। Viacom18 में जाने से पहले वह Hungama Kids Channel में क्रिएटिव डायरेक्टर भी रही थीं।

 

न्यूजलेटर पाने के लिए यहां सब्सक्राइब कीजिए

BARC पर अनिश्चितता से M&E इंडस्ट्री पर संकट, ऐड से टीवी रोजगार तक पर असर पड़ने की आशंका

भारत में टीवी रेटिंग्स की लंबे समय से जारी रोक अब सिर्फ इस सवाल तक सीमित नहीं रह गई है कि ऑडियंस मीजरमेंट फिर कब शुरू होगी।

Samachar4media Bureau by
Published - Tuesday, 22 September, 2026
Last Modified:
Tuesday, 22 September, 2026
tv5411

इमरान फजल, असिसटेंट एडिटर, एक्सचेंज4मीडिया ।।

भारत में टीवी रेटिंग्स की लंबे समय से जारी रोक अब सिर्फ इस सवाल तक सीमित नहीं रह गई है कि ऑडियंस मीजरमेंट फिर कब शुरू होगी। ब्रॉडकास्टर्स अब इस बड़े सवाल पर भी विचार कर रहे हैं कि अगर देश की मुख्य टीवी ऑडियंस मापने वाली संस्था BARC India को ही बंद कर दिया जाता है, तो पूरे मीडिया और एंटरटेनमेंट (M&E) इकोसिस्टम पर इसका क्या असर पड़ेगा। यह मुद्दा सोमवार को इंडियन ब्रॉडकास्टिंग एंड डिजिटल फाउंडेशन (IBDF) की बोर्ड स्तर की बैठक में उठा। यह बैठक IBDF की 27वीं वार्षिक आम बैठक (AGM) के साथ हुई।

ब्रॉडकास्टर्स सरकार के सामने इस मामले को औपचारिक तौर पर उठाने पर विचार कर रहे हैं। नवंबर को इस गतिरोध को खत्म करने के लिए अहम समयसीमा के तौर पर देखा जा रहा है। अगर तब तक स्थिति साफ नहीं होती है, तो इंडस्ट्री BARC को बंद करने जैसे ज्यादा कड़े विकल्पों पर विचार कर सकती है। 

हालांकि, ब्रॉडकास्टर्स का कहना है कि BARC को बंद करना आखिरी विकल्प होगा। उनकी तत्काल मांग सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (MIB) से यह स्पष्ट करने की है कि अभी क्या-क्या किया जाना बाकी है और रेटिंग्स दोबारा शुरू करने के लिए आगे का रास्ता क्या होगा। लेकिन इंडस्ट्री की प्रमुख संस्था में मौजूदा ऑडियंस मीजरमेंट व्यवस्था को ही खत्म करने की संभावना पर चर्चा होना बताता है कि लंबे समय से रेटिंग्स बंद रहने के कारण कारोबारी दबाव बढ़ रहा है।

BARC के बंद होने का असर सिर्फ टीवी चैनलों तक सीमित नहीं रहेगा। इसका असर कंटेंट में निवेश, प्रोडक्शन कंपनियों और टीवी से होने वाली कमाई पर निर्भर बड़ी संख्या में काम करने वाले लोगों पर भी पड़ सकता है।

टीवी इंडस्ट्री की ‘कॉमन करेंसी’ खत्म हो जाएगी

टीवी रेटिंग्स इंडस्ट्री के लिए एक तरह की कॉमन करेंसी हैं। ब्रॉडकास्टर्स इनका इस्तेमाल अपने चैनलों की ऑडियंस पहुंच दिखाने के लिए करते हैं। विज्ञापनदाता इन आंकड़ों से अपने कैंपेन का आकलन करते हैं, जबकि मीडिया एजेंसियां इन्हीं आंकड़ों के आधार पर मीडिया निवेश की योजना और कीमत तय करती हैं। BARC के बंद होने से वह संस्था ही खत्म हो जाएगी, जो सभी के लिए एक साझा संदर्भ उपलब्ध कराती है। इससे टीवी ऑडियंस को मीजरमेंटे के लिए इंडस्ट्री के पास कोई स्वीकार्य और स्वतंत्र बेंचमार्क नहीं रह सकता है।

एक बड़े ब्रॉडकास्ट नेटवर्क के वरिष्ठ अधिकारी के हवाले से कहा गया, “लोग इसे ब्रॉडकास्टर्स की समस्या मानते हैं, लेकिन ऐसा नहीं है। टीवी विज्ञापन कंटेंट के लिए पैसा देता है, कंटेंट पूरी इंडस्ट्री को रोजगार देता है और यह सब एक साझा मीजरमेंट व्यवस्था पर टिका है।”

तुरंत होने वाला कारोबारी असर विज्ञापन दरों को लेकर बढ़ती अनिश्चितता के रूप में सामने आ सकता है। ब्रॉडकास्टर्स पुराने रेटिंग आंकड़े, अपना आंतरिक डेटा और दूसरे ऑडियंस संकेतक दे सकते हैं, लेकिन विज्ञापनदाताओं और एजेंसियों के पास चैनलों और कार्यक्रमों की तुलना के लिए मौजूदा इंडस्ट्री-लेवल आंकड़े नहीं होंगे।

छोटे और रीजनल ब्रॉडकास्टर्स के लिए यह समस्या और बड़ी हो सकती है। बड़े नेटवर्क कुछ हद तक अपने ब्रैंड संबंधों और पुराने प्रदर्शन पर निर्भर कर सकते हैं, लेकिन नए और छोटे चैनलों के लिए विज्ञापन बाजार में अपनी वैल्यू साबित करने में स्वतंत्र रूप से मापी गई ऑडियंस ज्यादा महत्वपूर्ण होती है।

विज्ञापन बजट को लेकर बढ़ सकती है परेशानी

मीडिया एजेंसियों के काम पर भी इसका बड़ा असर पड़ सकता है। टीवी प्लानिंग में आमतौर पर ऑडियंस डेटा के आधार पर चैनलों, कार्यक्रमों, बाजारों और अलग-अलग समय स्लॉट की तुलना की जाती है। BARC नहीं होने पर प्लानर्स को दूसरे डेटा स्रोतों और पुराने आंकड़ों पर ज्यादा निर्भर रहना पड़ेगा।

एक वरिष्ठ मीडिया एजेंसी अधिकारी के अनुसार, किसी सिफारिश को सही ठहराने के लिए प्लानर को एक ठोस आंकड़े की जरूरत होती है। अगर टीवी ऐसा आंकड़ा उपलब्ध नहीं करा पाता है, तो विज्ञापन बजट उन प्लेटफॉर्म की ओर जा सकता है जो ऐसा मीजरमेंट उपलब्ध कराते हैं।

इसका यह मतलब जरूरी नहीं है कि विज्ञापनदाता तुरंत अपने टीवी बजट का बड़ा हिस्सा डिजिटल प्लेटफॉर्म पर ले जाएंगे। लेकिन लंबे समय तक रेटिंग्स नहीं होने से टीवी के लिए विज्ञापन हासिल करने का आधार जरूर बदल सकता है।

डिजिटल प्लेटफॉर्म पहले से ही विज्ञापनदाताओं को कैंपेन और ऑडियंस मीजरमेंटे के कई तरीके देते हैं। ऐसे में लंबे समय तक टीवी रेटिंग्स का अभाव टीवी प्लानिंग को ज्यादा मुश्किल बना सकता है और विज्ञापन से मिलने वाले रिटर्न को एक सामान्य और स्वीकार्य माप के जरिए साबित करने की इंडस्ट्री की क्षमता को प्रभावित कर सकता है।

कंटेंट में निवेश पर भी पड़ सकता है असर

इसका असर आगे चलकर विज्ञापन से कंटेंट बिजनेस तक पहुंच सकता है। टीवी चैनल किसी कार्यक्रम को जारी रखने, उसका विस्तार करने या उसे बदलने का फैसला लेते समय ऑडियंस प्रदर्शन के साथ कई दूसरे कारोबारी और संपादकीय पहलुओं को भी देखते हैं। वहीं, प्रोडक्शन कंपनियां ब्रॉडकास्टर्स से मिलने वाले कमीशन और प्रोग्रामिंग बजट पर निर्भर करती हैं।

प्रोडक्शन बिजनेस से जुड़े एक व्यक्ति के मुताबिक, अगर चैनलों को अपनी कमाई को लेकर स्पष्टता कम होगी, तो वे नए कार्यक्रमों को कमीशन करने में ज्यादा सावधानी बरतेंगे और इसका असर सबसे पहले कार्यक्रम बनाने वाले लोगों पर पड़ेगा। लंबे समय तक चलने वाला यह मीजरमेंट संकट प्रोडक्शन हाउस, लेखक, निर्देशक, तकनीशियन, स्टूडियो और टीवी से जुड़े दूसरे प्रोफेशनल्स को भी प्रभावित कर सकता है। 

विज्ञापन से होने वाली कमाई को लेकर कम स्पष्टता के कारण ब्रॉडकास्टर्स प्रोग्रामिंग पर खर्च करने में ज्यादा सतर्क हो सकते हैं। खासकर महंगे फॉर्मेट और नए कार्यक्रमों के मामले में यह चिंता ज्यादा हो सकती है, जहां ऑडियंस की प्रतिक्रिया पहले से पता नहीं होती। इसका असर टीवी को सपोर्ट करने वाले टेक्नोलॉजी और सर्विस इकोसिस्टम पर भी पड़ सकता है, जिसमें प्रोडक्शन, पोस्ट-प्रोडक्शन, डिस्ट्रीब्यूशन और मीजरमेंट से जुड़ी सेवाएं शामिल हैं।

न्यूज ब्रॉडकास्टर्स के सामने अलग चिंता

इसका असर न्यूज ब्रॉडकास्टर्स के लिए खास तौर पर महत्वपूर्ण हो सकता है। न्यूज चैनलों में बड़ी संपादकीय और तकनीकी टीमें काम करती हैं और वे विज्ञापन से होने वाली कमाई पर काफी निर्भर रहते हैं।

एक काम करने वाली मीजरमेंट व्यवस्था न्यूज चैनलों को विज्ञापनदाताओं और मीडिया एजेंसियों के सामने अपनी पहुंच साबित करने में मदद करती है। मौजूदा रेटिंग्स नहीं होने पर ऑडियंस डिलीवरी की कारोबारी वैल्यू साबित करना मुश्किल हो जाता है।

एक वरिष्ठ न्यूज ब्रॉडकास्टिंग अधिकारी के अनुसार, अगर नीति का उद्देश्य जवाबदेह मीडिया को मजबूत करना है, तो उसके आर्थिक आधार की भी सुरक्षा जरूरी है। न्यूज रूम से जवाबदेही की लागत उठाने की उम्मीद करते हुए उसकी पहुंच दिखाने की क्षमता को खत्म नहीं किया जा सकता। यह चिंता ऐसे समय में सामने आई है जब सरकार टेलीविजन रेटिंग्स पॉलिसी 2026 के जरिए टीवी ऑडियंस मीजरमेंट में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने की कोशिश कर रही है।

BARC को बदलना रातोंरात संभव नहीं

अगर BARC बंद होता है तो एक बड़ा सवाल यह भी होगा कि उसके बाद टीवी ऑडियंस को कौन मापेगा? 

टेलीविजन रेटिंग्स पॉलिसी 2026 में रेटिंग एजेंसियों के लिए नया नियामकीय ढांचा बनाया गया है। इसमें 80,000 मीटर वाले घरों का पैनल, स्वतंत्र निदेशक, सालाना ऑडिट, टेक्नोलॉजी-न्यूट्रल मीजरमेंट और अन्य सुरक्षा उपाय शामिल हैं।

इस नीति में रेटिंग एजेंसियों के लिए न्यूनतम नेटवर्थ की जरूरत को 20 करोड़ रुपये से घटाकर 5 करोड़ रुपये किया गया है। वहीं, न्यूनतम पैनल का आकार 50,000 से बढ़ाकर 80,000 घर कर दिया गया है। रेटिंग एजेंसी के बोर्ड में कम से कम 33% स्वतंत्र निदेशक होना जरूरी है।

हालांकि, सिर्फ नियामकीय रजिस्ट्रेशन से नई रेटिंग एजेंसी तैयार नहीं हो जाएगी। नए खिलाड़ी को मीजरमेंट का बुनियादी ढांचा तैयार या हासिल करना होगा, एक प्रतिनिधि पैनल बनाना होगा, मीजरमेंट की कार्यप्रणाली विकसित करनी होगी, ऑडिट कराना होगा और ब्रॉडकास्टर्स, विज्ञापनदाताओं और एजेंसियों के बीच अपनी स्वीकार्यता बनानी होगी। मामले से जुड़े एक व्यक्ति के मुताबिक, भरोसेमंद विकल्प तैयार करना बड़ा काम है। इसमें समय, भरोसा और बाजार के सभी पक्षों का विश्वास जरूरी होगा।

यही वजह है कि BARC को बंद करना मौजूदा सस्पेंशन से काफी अलग स्थिति होगी। सस्पेंशन की स्थिति में मौजूदा संस्था और उसका बुनियादी ढांचा बना रहता है और नियामकीय जरूरतें पूरी होने के बाद मीजरमेंट दोबारा शुरू किया जा सकता है। लेकिन बंद होने की स्थिति में इंडस्ट्री को पूरी ऑडियंस मीजरमेंट व्यवस्था फिर से तैयार करनी पड़ सकती है और एक नई साझा ‘कॉमन करेंसी’ स्थापित करनी होगी।

नवंबर से पहले इंडस्ट्री चाहती है साफ स्थिति 

BARC ने मंत्रालय को बताया है कि उसका पैनल बढ़कर 70,876 घरों तक पहुंच गया है और उसे दिसंबर तक 80,000 घरों की जरूरत पूरी होने की उम्मीद है।

जुलाई में MIB की BP&L विंग ने BARC के लिए अस्थायी रजिस्ट्रेशन की सिफारिश की थी। इससे बाकी जरूरतों को पूरा करते हुए BARC को रेटिंग्स दोबारा शुरू करने की संभावित अनुमति मिल सकती थी। हालांकि, ब्रॉडकास्टर्स का कहना है कि उन्हें अब भी यह स्पष्ट नहीं है कि रेटिंग्स दोबारा शुरू होने में आखिर रुकावट क्या है।

एक वरिष्ठ इंडस्ट्री अधिकारी के मुताबिक, ब्रॉडकास्टर्स को अभी भी स्पष्ट नहीं है कि BARC को रोकने वाली वास्तविक समस्या क्या है। लंबे समय से नियामकीय प्रक्रिया चल रही है, लेकिन इंडस्ट्री को यह जानना जरूरी है कि रेटिंग्स दोबारा शुरू होने से कौन-सा खास मुद्दा रोक रहा है। अगर जरूरतें स्पष्ट हैं तो BARC को बताया जाना चाहिए कि क्या बाकी है या फिर शर्तों के साथ उसे रेटिंग्स दोबारा शुरू करने की अनुमति दी जानी चाहिए।

एक अन्य वरिष्ठ मीडिया अधिकारी ने कहा कि टीवी इंडस्ट्री अनिश्चित समय तक साझा मीजरमेंट व्यवस्था के बिना काम नहीं कर सकती। विज्ञापनदाताओं और ब्रॉडकास्टर्स दोनों को स्पष्टता चाहिए और एजेंसियों को प्लानिंग के लिए भरोसेमंद आधार चाहिए। यह स्थिति जितने लंबे समय तक चलेगी, कारोबारी असर उतना ही बढ़ेगा।

इसलिए ब्रॉडकास्टर्स के लिए नवंबर की समयसीमा सिर्फ रेटिंग्स दोबारा शुरू करने से जुड़ी नहीं है। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना भी है कि अस्थायी मीजरमेंट संकट टीवी इंडस्ट्री और उस पर निर्भर कारोबार के लिए लंबे समय की संरचनात्मक समस्या न बन जाए।

न्यूजलेटर पाने के लिए यहां सब्सक्राइब कीजिए