देश में TV रेटिंग सिस्टम को लेकर TRAI ने जारी कीं ये सिफारिशें

‘भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण’ (TRAI) ने देश में टीवी रेटिंग सिस्टम से जुड़े मुद्दे पर अपनी सिफारिशें जारी की हैं।

Last Modified:
Tuesday, 28 April, 2020
TRAI

‘भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण’ (TRAI) ने देश में टीवी रेटिंग सिस्टम से जुड़े मुद्दे पर अपनी सिफारिशें जारी की हैं। ट्राई का कहना है कि कार्यप्रणाली साझा करने में पारदर्शिता की कमी और विभिन्न प्लेटफॉर्म्स के बीच पैनल होम के प्रतिनिधित्व के कारण बार्क (BARC) की रेटिंग सेवा से हितधारक (Stakeholders) संतुष्ट नहीं हैं। अपनी सिफारिशों में ‘ट्राई’ ने यह उल्लेख भी किया है कि बार्क में आईबीएफ का बहुमत होने के साथ ही इसकी निष्पक्षता के साथ समझौता किया जाता है। इसके साथ ही ऑरिजिनल जुटाए गए डाटा में भी पारदर्शिता नहीं है और ऑरिजिनल डाटा व मार्केट में जो डाटा रिलीज किया जाता है, उसमें अंतर होता है। कई मार्केट्स से कम सैंपल लिए जाने से व्युअरशिप को लेकर अनियमितता रबती है और इसका परिणाम गलत व्याख्या के रूप में आता है। यहां तक कि टेक्नोलॉजी पर भारी निवेश किए जाने के बावजूद बार्क डाटा एक हफ्ते की देरी से आते हैं और रोजाना प्रस्तुत नहीं किए जाते हैं। इन सब मुद्दों को देखते हुए ट्राई ने ‘Review of Television Audience Measurement and Rating System in India’ पर अपनी सिफारिशें जारी की हैं।    

ट्राई की ओर से जारी सूचना के अनुसार, ‘देश में टेलिविजन रेटिंग एजेंसियों के लिए सूचना प्रसारण मंत्रालय ने 10 जनवरी 2014 को पॉलिसी गाइडलाइंस को अधिसूचित (notified) किया था। इन गाइडलाइंस के अनुसार एमआईबी द्वारा 28 जुलाई 2015 को बार्क को देश में टेलिविजन रेटिंग मापने की मान्यता दी गई। बार्क ने 2015 में अपना कार्य शुरू किया और तब से यह व्यावसायिक आधार पर टीवी रेटिंग सेवाओं की एकमात्र प्रोवाइडर है।

ट्राई का कहना है कि शेयरधारकों द्वारा मौजूदा रेटिंग प्रणाली की तटस्थता और विश्वसनीयता से संबंधित तमाम चिंताएं जताई गईं, जिस पर देश में वर्तमान टीवी ऑडियंस मीजरमेंट और रेटिंग सिस्टम की समीक्षा किए जाने की जरूरत को महसूस किया गया। ट्राई के अनुसार, मामले में स्वत: संज्ञान लेते हुए ‘ Review of TV audience measurement and ratings in India’ को लेकर तीन दिसंबर 2018 को कंसल्टेशन पेपर जारी किया गया था और वर्तमान रेटिंग सिस्टम से संबंधित मुद्दों पर स्टेकहोल्डर्स के लिखित कमेंट्स मांगे गए थे। कमेंट्स जमा करने की अंतिम तारीख 15 फरवरी 2019 रखी गई थी और इनके जवाबी कमेंट्स के लिए 28 फरवरी 2019 की तारीख तय की गई थी। इस मुद्दे पर ट्राई को 23 कमेंट्स और तीन काउंटर कमेंट्स प्राप्त हुए थे।

कंसल्टेशन प्रक्रिया के दौरान स्टेकहोल्डर्स से मिले सभी कमेंट्स को पढ़ने के बाद और तमाम विश्लेषण के बाद ट्राई ने अपनी सिफारिशों को अंतिम रूप दिया है। ट्राई की ओर से तय की गईं प्रमुख सिफारिशों को आप यहां पढ़ सकते हैं।

  1. Structural reforms are required in the Governance structure of BARC to mitigate the potential risk of conflict of interest, improve credibility and bring transparency and instil confidence of all the stakeholders in the TRP measurement system. 

  2. Composition of the Board of BARC India should be changed as part of the proposed structural reforms. 

  3. The Board should have at least fifty percent independent members, which should include one member as a measurement technology expert, one statistician of national repute from among the top institution(s) of the country and two representatives from the Government/Regulator. 

  4. Restructured Board of BARC India should provide for equal representation of the three constituent Industry Associations, namely; AAAI, ISA and IBF and with equal voting rights irrespective of their proportion of equity holding. 

  5. Tenure of the members of the Board shall be for two years.

  6. Active participation of representatives of the Advertisers and the advertising agency will bring more accuracy, transparency, credibility, and neutrality in the system, due to their inherent need of advertisers to reach viewers accurately

  7. Tenure of the Chairman of the Board should not be more than two years. Chairmanship of the Board shall be rotated among the constituent industry associations in every two years.

  8. BARC should also separate its functions in two units (a) one unit should be responsible for prescribing methodology of ratings/validation of data, publishing the data and audit mechanism and (b) the other unit for processing the data, watermarking or any other such technical work including management of data collection agencies.

  9. Once multiple agencies come forward for rating, BARC should limit its role to publishing the ratings, and framing methodology and audit mechanism for the rating agencies, so that the number of agencies can develop multiple rating system leveraging new technologies

  10. The rating agency should be mandated to increase the sample size from the existing 44,000 to 60,000 by the end of 2020, and 1,00,000 by the end of 2022 using the existing technology

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Network18 से बड़ी खबर, अब यहां भी कटेगी एम्प्लॉयीज की सैलरी!

खबर है कि ‘नेटवर्क18’ के एडिटर-इन-चीफ राहुल जोशी ने इस बारे में अपने एम्प्लॉयीज को एक मेल लिखा है।

Last Modified:
Thursday, 28 May, 2020
Network18

देश के प्रतिष्ठित मीडिया समूह ‘नेटवर्क18’ (Network 18) में एम्प्लॉयीज की सैलरी कटौती की खबर सामने आई है। सूत्रों के हवाले से मिली खबर के मुताबिक ‘नेटवर्क18’ के एडिटर-इन-चीफ राहुल जोशी ने इस बारे में अपने एम्प्लॉयीज को एक मेल लिखा है। इस मेल में कहा गया है कि जिन एम्प्लॉयीज की सालान इनकम 7.5 लाख रुपए से ज्यादा है, उनकी सैलरी में 10 प्रतिशत की कटौती की जाएगी।   

इस मेल में कहा गया है कि यह समय असाधारण है और ऐसे समय में इस तरह के असाधारण उपाय करने पड़ते हैं। मेल के अनुसार, ‘हमारे जिन एम्प्लॉयीज की सालाना इनकम 7.5 लाख रुपए तक है, हम उनकी सैलरी में कोई कटौती नहीं कर रहे हैं। इसमें हमारे न्यूज बिजनेस के करीब 70 प्रतिशत साथी दायरे में हैं। लेकिन जिन एम्प्लॉयीज की सालाना इनकम 7.5 लाख रुपए से अधिक है, उनकी सैलरी में 10 प्रतिशत की कटौती की जाएगी।’   

मेल में बताया गया है कि कंपनी के शीर्ष प्रबंधन ने स्वेच्छा से अपनी सैलरी में काफी कटौती की है। राहुल जोशी की ओर से जारी इस मेल में यह भी कहा गया है, ‘जैसा कि आप सभी लोग जानते हैं कि हमारे बिजनेस में सबसे ज्यादा खर्च मैनपावर यानी एम्प्लॉयीज पर होता है। ऐसे में बिजनेस को सुचारु रूप से चलाने के लिए मैं एक मई से सैलरी में कटौती करने के लिए बाध्य हूं।

मेल में यह भी कहा गया है कि संस्थान में अप्रैजल की प्रक्रिया जारी है और यह लगभग एक या दो हफ्ते में समाप्त हो जाएगी। राहुल जोशी ने एम्प्लॉयीज को आश्वासन दिया कि एक बार परफॉर्मेंस असेसमेंट के बाद वित्तीय वर्ष 2020 के लिए भुगतान कर दिया जाएगा और योजनानुसार पदोन्नति कर दी जाएगी। उन्होंने लिखा है, ‘उम्मीद है कि यह प्रक्रिया जुलाई तक पूरी हो जाएगी।’

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बाबा रामदेव संग मिल कुछ यूं योग का पाठ पढ़ा रहीं India TV की एंकर मीनाक्षी जोशी

रोजाना सुबह आठ बजे और शाम को पांच बजे टेलिकास्ट होता है मीनाक्षी जोशी का योग शो। मीनाक्षी ने तब सुर्खियां बटोरी थीं, जब उन्होंने बहुचर्चित शाहीन बाग धरने की ग्राउंड ज़ीरो से लाइव रिपोर्टिंग की थी।

Last Modified:
Wednesday, 27 May, 2020
Meenakshi Joshi

‘इंडिया टीवी’ की न्यूज एंकर मीनाक्षी जोशी इन दिनों योग गुरु की भूमिका में नजर आ रही हैं। जी हां, वह इन दिनों ‘इंडिया टीवी’ पर रोजाना योग गुरु बाबा रामदेव के साथ लोगों को योगासन सिखाती हुई नजर आती हैं। उनका यह शो रोजाना सुबह आठ बजे और शाम को पांच बजे टेलिकास्ट होता है।

यह भी पढ़ें: ACP बनते ही न्यूज एंकर ने इस तरह चलाया 'कानून का राज', देखें विडियो

बता दें कि मीनाक्षी जोशी को पिछले दिनों उत्तर प्रदेश पुलिस ने एक दिन के लिए नोएडा का ACP भी बनाया था। हाल के दिनों में मीनाक्षी ने तब सुर्खियां बटोरी थीं, जब उन्होंने बहुचर्चित शाहीन बाग धरने की ग्राउंड ज़ीरो से लाइव रिपोर्टिंग की थी। तब उन्होंने खुलासा किया था कि कैसे शाहीन बाग का धरना प्रायोजित था और दम तोड़ने लगा था। हूटर बजाकर आसपड़ोस के लोगों को धरना स्थल पर बुलाने वाला खुलासा जब मीनाक्षी ने किया था तो उन्हें वहां धमकी भी मिली थी। बहुत डराने धमकाने की कोशिश हुई थी, लेकिन वो उन्मादी भीड़ के बीच डटी रहीं। मीनाक्षी की निडर रिपोर्टिंग की देश भर में काफी तारीफ भी हुई थी।

आजकल मीनाक्षी योग गर्ल बनकर कोरोना के संकट काल में दर्शकों को फिटनेस मंत्र दे रही हैं। वैसे तो स्वामी रामदेव के साथ कई शो लोगों ने देखे हैं, लेकिन पहली बार कोई न्यूज एंकर इतने परफेक्शन के साथ उनके साथ स्क्रीन पर यूं योग करता नजर आ रहा है। बाबा रामदेव और सुशांत के साथ मीनाक्षी का ये शो लॉकडाउन के दौरान काफी पसंद किया जा रहा है। बताया जाता है कि मॉर्निंग टाइम बैंड में इस शो की टीआरपी काफी ज्यादा है।

बता दें मीनाक्षी जोशी ट्रेंड क्लासिकल सिंगर और डांसर भी हैं। कई स्टूडेंट्स को वह भरतनाट्यम की ट्रेनिंग भी दे चुकी हैं। यही नहीं, सोशल मीडिया पर वह अपने गानों की वीडियो क्लिप भी शेयर करती रहती हैं। मीनाक्षी जोशी लोगों को किस तरह योग का पाठ पढ़ा रही हैं, वह आप इन वीडियोज में देख सकते हैं।

 

 

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न्यूज चैनल में कोरोना पॉजिटिव की संख्या बढ़ने पर प्रशासन ने उठाया ये कदम

प्रशासन का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग द्वारा फिटनेस सर्टिफिकेट जारी किए जाने के बाद ही बिल्डिंग को दोबारा से खोला जाएगा

Last Modified:
Tuesday, 26 May, 2020
Corona Reporting

कोरोना का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है। उत्तर प्रदेश के नोएडा में सोमवार को कोरोनावायरस (कोविड-19) के जिन 14 मामलों की जानकारी दी गई थी, उनमें नौ फिल्म सिटी स्थित एक न्यूज चैनल के थे। अब तक इस चैनल के 47 लोगों का कोरोना टेस्ट पॉजिटिव आ चुका है, जिनमें से 31 नोएडा से हैं।

‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ की रिपोर्ट्स के अनुसार, चैनल में कोरोना के लगातार बढ़ते मामलों को देखते हुए पूरी बिल्डिंग के पांचों फ्लोर को सील कर दिया गया है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा फिटनेस सर्टिफिकेट जारी किए जाने के बाद ही इसे दोबारा से खोला जाएगा। सभी एंप्लाईज की सघन जांच की गई है।

बताया जाता है कि प्रशासन की ओर पहले सिर्फ चौथे फ्लोर को सील किया गया था, क्योंकि सभी मामले उसी फ्लोर के एंप्लाईज के थे, लेकिन रविवार को अन्य फ्लोर के कुछ कर्मचारियों के भी कोरोना पॉजिटिव मिलने के बाद अब पूरी बिल्डिंग को सील कर दिया गया है।

इस रिपोर्ट के अनुसार, नए मामले मिलने के बाद जिले में 24 कंटेंनमेंट जोन (containment zones) और शामिल किए गए हैं, जिसके बाद इनकी संख्या बढ़कर 87 हो गई है।

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iTV Network में पहुंचा कोरोना, कंपनी ने तुरंत उठाए ये एहतियाती कदम

हाल ही में कुछ मीडिया हाउस ने भी कोरोना पॉजिटिव मामलों की सूचना दी है और अब इस कड़ी में iTV नेटवर्क भी शामिल हो गया है, जहां उसके एक एम्प्लॉयी का कोरोना टेस्ट पॉजिटिव आया है

Last Modified:
Friday, 22 May, 2020
itv-network

देश-दुनिया में कोरोना से संक्रमित मरीजों के मामले बढ़ते ही जा रहे हैं। कोविड-19 के खिलाफ ‘जंग’ में अग्रिम मोर्चे पर तैनात मीडियाकर्मी भी इसकी चपेट में आ चुके हैं। हाल ही में कुछ मीडिया हाउस ने भी कोरोना पॉजिटिव मामलों की सूचना दी है और अब इस कड़ी में iTV नेटवर्क भी शामिल हो गया है, जहां उसके एक एम्प्लॉयी का कोरोना टेस्ट पॉजिटिव आया है।

iTV नेटवर्क के प्रवक्ता ने एक मीडिया बयान में कहा कि हमारे एक मीडियाकर्मी में कोरोना टेस्ट पॉजिटिव मिलने के बाद परिसर को खाली कर दिया गया है और पूरा स्टॉफ दूसरी जगह से काम कर रहा है।

ये रहा पूरा स्टेटमेंट:

इंडिया न्यूज की आउटपुट टीम की एक सहकर्मी का कोरोना टेस्ट कल शाम पॉजिटिव आया। हमने दिल्ली के एक बड़े अस्पताल में उनका दाखिला कराने में मदद की। यही नहीं, चैनल ने अपनी सहकर्मी का दिल्ली के दो बड़े डॉक्टरों से वीडियो कॉफ्रेंसिंग के जरिए एक सेशन भी करवाया। इन डॉक्टर्स में एक आईएमए के पूर्व अध्यक्ष थे। यह बड़ी राहत की बात है कि अस्पताल के डॉक्टर्स ने हमारी सहकर्मी के मामूली लक्षण के आधार पर लिखित रूप में घर पर सेल्फ क्वरंटाइन रहने की सलाह दी है।

हमने तय मानकों का पालन करते हुए फौरन सभी जरूरी कदम उठाने शुरू कर दिए। अपनी सहकर्मी की रिपोर्ट पॉजिटिव आने के दो घंटे के अंदर, 21 मई, शाम 5 बजे तक ओखला स्थित ‘मीडिया हाउस’ परिसर, को खाली कर दिया, ताकि सैनिटाइजेशन का काम शुरू हो सके। हमने अपने उन साथियों की लिस्ट बनानी शुरू कर दी, जो प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से संपर्क में हो सकते हैं। ऐसे कुल 40 लोग हैं और उन सबका कोविड-19 टेस्ट हो रहा है। इन सभी को सेल्फ क्वरंटाइन में जाने को कह दिया गया है। वैसे सहकर्मी, जो घर पर खुद को क्वरंटाइन करना नहीं चाहते, उनके लिए एक फाइव स्टार होटल में 20 कमरों का इंतजाम किया गया है।

रिपोर्ट आने के तुरंत बाद कंपनी की तरफ से डीएम तथा स्थानीय एसएचओ को पूरे मामले की जानकारी दे दी गई। ‘मीडिया हाउस’ दफ्तर को सील किया गया और एमसीडी को सूचित किया गया। निगम ने एक दौर का सैनिटाइजेशन कर दिया है और दूसरे राउंड के लिए एक निजी कंपनी को जिम्मा सौंपा गया है। इस दौरान चैनल रिकॉर्डेड मोड पर रहा और पहले से जो वैकल्पिक इंतजाम किया गया था, उसी के तहत नजदीक की एक बिल्डिंग में एकदम सीमित स्टाफ के साथ ‘इंडिया न्यूज’ और ‘न्यूजX’ का ऑपरेशन शुरू किया गया। दोनों चैनल और नेटवर्क के सभी प्रादेशिक चैनल आज दोपहर 12 बजे से ऑपरेशनल हो गए।

साथ ही स्टेटमेंट में यह भी कहा गया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तरफ से लॉकडाउन की घोषणा के पहले से ही आईटीवी नेटवर्क ने अपने कर्मचारियों के लिए वर्क फ्रॉम होम की व्यवस्था कर दी थी और दफ्तर में कम स्टाफ के साथ काम करना शुरू कर दिया था। जिस इमारत से सभी चैनल चलते हैं, ‘मीडिया हाउस’ वहां सैनिटाइजेश की पुख्ता व्यवस्था की गई, कर्मचारियों के मास्क लगाने, सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करने और टेम्परेचर स्क्रीनिंग को नियमित रुप से अनिवार्य किया गया। इसका वीडियो हर घंटे प्रबंधन को भेजा जाता रहा। कंपनी अपने कर्मचारियों और उनके परिवार के स्वास्थ्य और सुरक्षा को लेकर काफी गंभीर है।

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इस वजह से जाकिर नाईक के टीवी नेटवर्क पर लगा करोड़ों का जुर्माना

इस्लामी धर्म प्रचारक जाकिर नाईक के पीस टीवी नेटवर्क पर 3,00,000 पाउंड (2.77 करोड़ रुपए) का जुर्माना लगाया गया है

Last Modified:
Monday, 18 May, 2020
zakir

इस्लामी धर्म प्रचारक जाकिर नाईक के पीस टीवी नेटवर्क पर 3,00,000 पाउंड (2.77 करोड़ रुपए) का जुर्माना लगाया गया है। उस पर यह जुर्माना अपने टीवी नेटवर्क के जरिए लोगों में नफरत फैलाने और भड़काऊ चीजों का प्रसारण करने के लिए लगाया है।

दरअसल लंदन स्थित सूचना प्रसारण सेवा नियामक ने नियमों को ताक पर रखकर उसका उल्लंघन करने के लिए लाइसेंसधारी ‘पीस टीवी उर्दू’ पर 2,00,000 पाउंड और ‘पीस टीवी’ पर 1,00,000 पाउंड का जुर्माना लगाया है।

नियामक ने कहा है कि उसे जांच में पता चला कि पीस टीवी उर्दू और पीस टीवी पर नफरत फैलाने वाली और आपत्तिजनक सामग्रियों का प्रसारण किया गया। इतना ही नहीं जिस तरह से इस पर प्रसारण किया जा रहा है, उससे कई बार लोगों के हिंसा फैलने का भी माहौल बना रहता है।

बता दें कि पीस टीवी गैरलाभकारी सेटेलाइट टीवी नेटवर्क ‘फ्री टू एयर’ है और इसका प्रसारण दुबई से अंग्रेजी, बांग्ला और उर्दू में किया जाता है। पीस टीवी का स्वामित्व लॉर्ड प्रॉडक्शन के पास है, जबकि क्लब टीवी के पास पीस टीवी उर्दू का लाइसेंस है। इन दोनों चैनलों का ऑनरशिप 54 साल का खुद जाकिर नाईक के पास है।  

गौरतलब है कि जाकिर नईक विवादित धर्म प्रचारक मनी लॉन्ड्रिंग के मसले में भारत का वांछित अपराधी है। अक्सर नाईक के दिए गए भाषण चरमपंथी विचारधाराओं को बढ़ावा देने के लिए होता है। साल 2016 में ही वो भारत छुपकर मलेशिया रहने चला गया था। इसके बाद से वो कभी भारत वापस नहीं आया। मलेशिया में उसने स्थाई नागरिकता ले ली। पिछले हफ्ते ही भारत ने मलेशिया की सरकार से गुहार लगाई थी कि वो जाकिर नाईक को भारत प्रत्यर्पित कर दे। बता दें कि नाईक के ब्रिटेन में प्रवेश पर भी 2010 से रोक लगाई गई है।

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इस वजह से केंद्र सरकार खोलेगी 12 नए चैनल

कोरोना महामारी संकट ने शिक्षा के क्षेत्र को भी प्रभावित किया है। लिहाजा इसे देखते हुए अब सरकार ऑनलाइन शिक्षा में एक बड़ी छलांग लगाने की तैयारी में है।

Last Modified:
Monday, 18 May, 2020
FM568

कोरोना महामारी संकट ने शिक्षा के क्षेत्र को भी प्रभावित किया है। लिहाजा इसे देखते हुए अब सरकार ऑनलाइन शिक्षा में एक बड़ी छलांग लगाने की तैयारी में है। केंद्र सरकार अब ऑनलाइन तथा डिजिटल शिक्षा को बढ़ाने के लिए ‘पीएम ई विद्या’ की योजना बनाई है और इसके लिए देश के सौ विश्वविद्यालययों को शामिल किया है। साथ ही हर क्लास के लिये एक चैनल खोलने का फैसला किया है।  

वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को बच्चों की शिक्षा के लिए ‘वन क्लास वन चैनल’ योजना के तहत 12 नए चैनल शुरू करने का ऐलान किया है। वित्त मंत्री ने कहा कि ‘स्वयंप्रभा’ डीटीएच के माध्यम से बच्चों को पहले से ही शिक्षा दी जा रही है और इसके तहत 12 नए चैनल लाए जाएंगे और पहली कक्षा से लेकर बारहवीं कक्षा के लिए एक-एक चैनल होगा, जिसका फायदा गांवों तक के बच्चे उठा पाएंगे। इनका प्रसारण टाटा स्काई, एयरटेल के जरिए किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि जल्द ही प्रधानमंत्री ई-विद्या कार्यक्रम आरंभ किया जाएगा। शिक्षा के लिए नया मंच दीक्षा का ऐलान करते हुए वित्तमंत्री ने कहा कि स्कूलों और कॉलेजों में ऑनलाइन शिक्षा के प्रचार प्रसार के लिए कई नए कदम उठाए गए हैं, जिनमें डीटीएच चैनलों के अलावा रेडियो, सामुदायिक रेडियो और पॉडकास्ट का इस्तेमाल किया जाएगा। स्वयं प्रभा प्लेटफॉर्म, दीक्षा प्लेटफार्म और ई-पाठशाला का इस्तेमाल कर छात्रों को पढ़ने का काम किया जाएगा। उन्होंने बताया कि इसके अलावा स्काइप के सहारे छात्रो के साथ लाइव संवाद भी होंगे।

साथ ही वित्तमंत्री ने देश के 100 शीर्ष स्तर के विश्वविद्यालयों को ऑनलाइन पाठयक्रम आरंभ करने की मंजूरी देने की भी घोषणा की।

वित्तमंत्री ने रविवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में ‘आत्मनिर्भर भारत अभियान’ की योजना का खुलासा करते हुए यह जानकारी दी। कोरोना महामारी से मिल रही आर्थिक चुनौतियों से निपटने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 20 लाख करोड़ रुपए के राहत पैकेज की घोषणा की थी।

 

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टीवी के फ्री कमर्शियल टाइम में आई गिरावट

कोविड-19 के दौरान टीवी और स्मार्टफोन के इस्तेमाल पर BARC इंडिया और नील्सन की संयुक्त रिपोर्ट के आठवें संस्करण के मुताबिक टीवी पर कुल फ्री कमर्शियल टाइम (FCT) में इस हफ्ते कमी दर्ज की गई है।

Last Modified:
Friday, 15 May, 2020
Channels

कोविड-19 के दौरान टीवी और स्मार्टफोन के इस्तेमाल पर BARC इंडिया और नील्सन की संयुक्त रिपोर्ट के आठवें संस्करण के मुताबिक टीवी पर कुल फ्री कमर्शियल टाइम (FCT) में इस हफ्ते कमी दर्ज की गई है। वहीं स्मार्टफोन का इस्तेमाल 17वें हफ्ते की तुलना में 9% कम हो गया है।

18वें हफ्ते टीवी पर कुल फ्री कमर्शियल टाइम 187 लाख सेकंड था, जबकि 17वें हफ्ते में यह 205 लाख सेकंड था। वहीं, कोविड-19 से पहले दूसरे से चौथे हफ्ते के दौरान एफसीटी 281 लाख सेकेंड्स था। इसलिए टीवी पर कुल एफसीटी 18वें हफ्ते में 33.4% कम हो गया है।

वहीं अलग-अलग जॉनर के आधार पर यदि ऐड वॉल्यूम की बात की जाए तो जनरल एंटरटेनमेंट चैनल इसमें पिछले कुछ हफ्तों से लगातार सबसे आगे बना हुआ है, जबकि 17वें हफ्ते की तुलना में न्यूज और मूवीज के चैनलों पर 7-8%  की गिरावट दर्ज की गई है। हालांकि, भाषाओं के आधार पर ऐड वॉल्यूम देखें तो, हिंदी न्यूज चैनलों पर एफसीटी वॉल्यूम में गिरावट देखी गई है, जबकि अंग्रेजी और क्षेत्रीय भाषाओं के चैनलों पर ये स्थिर बनी हुई है।

रिपोर्ट के अनुसार, रिपोर्ट के अनुसार, प्रमुख 10 एडवर्टाइजर्स का एफसीटी पहले की तरह स्थिर बना हुआ है, जबकि अन्य 40 के वीकली एफसीटी में कमी देखने को मिली है। हिंदुस्तान यूनिलीवर, रेकिट बेंकिज़र और भारत सरकार इस सप्ताह के टॉप-10 ऐडवर्टाइजर्स में शामिल हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, पिछले सप्ताह की तुलना में इस सप्ताह भी ऐडवर्टाइजर्स की संख्या में 7% की कमी देखी गई। 18वें हफ्ते में ऐडवर्टाइजर्स की कुल संख्या 1331 रही थी, जबकि 17वें हफ्ते में 1430 थी।

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फ्रीडिश ने TV ब्रॉडकास्टर्स को दी ‘राहत’, अब उठा ये सवाल

इंडस्ट्री से जुड़े लोगों का कहना है कि फीस के भुगतान में देरी की वजह से उन्हें बैंक व प्रसार भारती दोनों को ब्याज देनी होगी, इससे दोहरी मार पड़ेगी

Last Modified:
Thursday, 14 May, 2020
Television

प्रसार भारती के ‘डायरेक्ट टू होम’ (DTH) प्लेटफॉर्म ‘डीडी फ्रीडिश’ (DD Free Dish) ने ब्रॉडकास्टर्स की एक मांग को मानते हुए उन्हें देरी से कैरिज फीस का भुगतान करने की छूट तो दे दी है, लेकिन इसके साथ ही यह सवाल भी खड़ा हो गया है कि क्या इस कदम से इंडस्ट्री को मदद मिल पाएगी, जो काफी आर्थिक संकट का सामना कर रही है।  

दरअसल, न्यूज ब्रॉडकास्टर्स फेडरेशन (NBF) ने महामारी कोरोना के मद्देनजर आर्थिक संकट का हवाला देते हुए पिछले दिनों केंद्र सरकार से कैरिज फीस में छूट देने की मांग की थी लेकिन सरकार ने इसके बजाय कैरिज फीस जमा करने की डेडलाइन बढ़ा दी है, जिसमें अब अतिरिक्त शुल्क भी शामिल हो गया है।

‘एफटीए’ चैनल्स सरकार से पहली तिमाही की कैरिज फीस को माफ करने और दूसरी तिमाही की कैरिज फीस में 50 प्रतिशत की छूट देने की मांग कर रहे थे। लेकिन यदि नए प्लान को देखें तो वास्तव में उन्हें राहत मिलती दिखाई नहीं दे रही है। मार्च-अप्रैल और मई की कैरिज फीस अब 27 जून 2020 तक जमा की जा सकती है। विलंब शुल्क पर कैरिज फीस का भुगतान करने वाले ब्रॉडकास्टर्स को टैक्स समेत 5.7 प्रतिशत सालाना की दर से एक महीने का ब्याज और ब्याज की राशि पर जीएसटी समेत मासिक किस्त का भुगतान करना होगा। देरी से भुगतान की इस सुविधा का लाभ उठाने के लिए ब्रॉडकास्टर्स को ‘परफॉर्मेंस बैंक गारंटी’ (PBG) के रूप में एक मौद्रिक गारंटी (monetary guarantee) भी देनी होगी।

इस बारे में एक न्यूज ब्रॉडकास्टर का कहना है, ‘अब यदि हम देरी से भुगतान करते हैं तो हमें ब्याज की दोहरी मार झेलनी पड़ेगी। एक तो परफॉर्मेंस बैंक गारंटी के रूप में और दूसरा विलंब शुल्क के रूप में। इस समय हम पहले ही आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं, ऐसे में राहत के नाम पर यह दोहरी मार है।’  

बता दें कि मार्केट की स्थिति इन दिनों अच्छी नहीं है। इसका असर प्रत्येक ब्रॉडकास्टर पर पड़ रहा है, क्योंकि उन्हें मिलने वाले विज्ञापन राजस्व में काफी कमी आई है। डीडी फ्रीडिश पर मौजूद ब्रॉडकास्टर्स का कहना है कि वे प्रसार भारती को कैरिज फीस के रूप में मासिक किस्त का भुगतान करने में सक्षम नहीं हैं। कुछ ब्रॉडकास्टर्स का यह भी मानना है कि प्रसार भारती को इस लोड को आपस में साझा करना चाहिए।

उनके अनुसार, फ्री टू एयर प्लेटफॉर्म पर होने का मतलब ज्यादा से ज्यादा एडवर्टाइजिंग रेवेन्यू हासिल करना है और यदि वह उद्देश्य पूरा नहीं हो रहा है तो फिर स्लॉट के लिए इतना भुगतान क्यों करना चाहिए। एक अन्य ब्रॉडकास्टर का कहना है, ‘हम ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंच बनाने के लिए और उसके अनुसार प्लेटफॉर्म के मुद्रीकरण (monetize) के तहत स्लॉट के लिए करोंड़ों में भुगतान कर रहे हैं, ऐसे में डीडी को इस नुकसान के बोझ को आपस में बांटना चाहिए। यदि विमुद्रीकरण (monetization) नहीं हो रहा है तो दूरदर्शन को इतनी भारी भरकर कैरिज फीस देने का कोई उद्देश्य नहीं है।’

प्रसार भारती द्वारा 44वीं ई-नीलामी में फ्रीडिश पर ‘MPEG-2’ स्लॉट्स आवंटित किए गए थे। इसके तहत चैनल्स द्वारा प्रसार भारती को कैरिज फीस का भुगतान किया जाता है। इस कैरिज फीस को 12 मासिक किस्तों में बांटा गया है। जो ब्रॉडकास्टर्स किस्तों का भुगतान समय से करने अथवा देर से करने की स्थिति में नहीं हैं, उनका कहना है कि इस प्लेटफॉर्म से हटना ही उन्हें एकमात्र विकल्प दिखाई दे रहा है।   

प्रादेशिक भाषा के एक ब्रॉडकास्टर का कहना है, ‘एडवर्टाइजिंग रेवेन्यू घटकर करीब 20 प्रतिशत रह गया है। हमारा बिजनेस इससे काफी बुरी तरह से प्रभावित हुआ है। हम दूरदर्शन को कैरिज फीस का भुगतान करने की स्थिति में नहीं हैं, क्योंकि यह करोड़ों में बैठती है। ऐसे में हमारे जैसे छोटे ब्रॉडकास्टर्स फ्रीडिश प्लेटफॉर्म से अपने कदम पीछे खींचने के लिए मजबूर हैं।’ सूत्रों का कहना है कि आर्थिक संकट को देखते हुए चार-पांच चैनल्स ने इस प्लेटफॉर्म से अपने कदम वापस खींच लिए हैं।

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इस प्लेटफॉर्म से अपने चैनल नहीं हटाएगा B4U नेटवर्क

प्रसार भारती के ‘डायरेक्ट टू होम’ (DTH) प्लेटफॉर्म ‘डीडी फ्रीडिश’ से कुछ नेटवर्क्स ने हटा लिए हैं अपने चैनल

Last Modified:
Thursday, 14 May, 2020
B4U Network

टेलिविजन नेटवर्क ‘बी4यू’ (B4U) ने स्पष्ट किया है कि प्रसार भारती के ‘डायरेक्ट टू होम’ (DTH) प्लेटफॉर्म ‘डीडी फ्रीडिश’ (DD Free Dish) से अपने चैनल हटाने की उसकी कोई योजना नहीं है।

फ्रीडिश पर अब देखने को नहीं मिलेंगे ये लोकप्रिय चैनल

बता दें कि 12 मई को ‘समाचार4मीडिया’ ने एक रिपोर्ट में अनजाने में यह उल्लेख कर दिया था कि यह नेटवर्क भी डीडी फ्रीडिश से अपने चैनल हटा सकता है। इस स्टोरी को अब सही सूचना के साथ अपडेट कर दिया गया है। इस असुविधा के लिए हमें खेद है।   

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इस मामले में वरिष्ठ पत्रकार अरनब गोस्वामी को बॉम्बे हाई कोर्ट से मिली बड़ी राहत

वरिष्ठ पत्रकार और ‘रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क’ के एडिटर-इन-चीफ अरनब गोस्वामी को बॉम्बे हाई कोर्ट ने बड़ी राहत प्रदान की है

Last Modified:
Wednesday, 13 May, 2020
Arnab Goswami

वरिष्ठ पत्रकार और ‘रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क’ (Republic Media Network) के एडिटर-इन-चीफ अरनब गोस्वामी से जुड़े मामले में कांग्रेस को एक और झटका लगा है। दरअसल, बॉम्बे हाई कोर्ट ने अरनब गोस्वामी को बड़ी राहत देते हुए कांग्रेस कार्यकर्ता और विधान परिषद सदस्य भाई जगताप (Bhai Jagtap) और महाराष्ट्र यूथ कांग्रेस के वाइस प्रेजिडेंट सूरज ठाकुर द्वारा ‘रिपब्लिक टीवी’ पर रोक लगाए जाने की मांग को लेकर दायर की गई याचिका खारिज कर दी है। इस मामले में बॉम्बे हाई कोर्ट ने कांग्रेस को कोई भी अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया है।

इन कांग्रेसी नेताओं की ओर से दायर की गई याचिका में अरनब गोस्वामी पर पिछले महीने की पालघर लिंचिंग की घटना पर एक टीवी बहस के दौरान कथित तौर पर सांप्रदायिक सद्भाव को बाधित करने का प्रयास करने और पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी को बदनाम का आरोप लगाया गया था।  

बॉम्बे हाई कोर्ट में कांग्रेस नेताओं की ओर से दायर याचिका में मांग की गई थी अरनब गोस्वामी पर किसी भी टीवी चैनल और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर बोलने पर प्रतिबंध लगा देना चाहिए, साथ ही उनके चैनल ‘रिपब्लिक टीवी’ को किसी भी प्रोग्राम को प्रसारित करने से रोक देना चाहिए अथवा बंद कर देना चाहिए। कांग्रेस नेताओं द्वारा अरनब गोस्वामी और उनके चैनल के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग भी की गई थी। लेकिन न्यायमूर्ति पीसी चव्हाण ने यह कहते हुए कि अरनब गोस्वामी के खिलाफ पहले ही एक एफआइआर दर्ज की जा चुकी है और जांच चल रही है, याचिका खारिज कर दी।

कोर्ट को यह भी बताया गया कि महाराष्ट्र पुलिस ने चैनल प्रबंधन के कुछ बड़े अधिकारियों से पूछताछ की थी। इसके अलावा हाई कोर्ट ने यह भी पाया कि याचिकाकर्ता सूरज ठाकुर सुप्रीम कोर्ट में पहले ही याचिका में पक्षकार हैं, इसलिए हाई कोर्ट ने कहा कि वह इस मांग को वहां रख सकते हैं। हाई कोर्ट का कहना था कि अरनब गोस्वामी ने उनके खिलाफ विभिन्न राज्यों में दर्ज एफआईआर को चुनौती देते हुए याचिका दायर की हुई है। ऐसे में इस स्टेज पर कोई भी आदेश पारित करना सही नहीं होगा।

गौरतलब है कि अरनब गोस्वामी के खिलाफ छत्तीसगढ़, राजस्थान, पंजाब, तेलंगाना, महाराष्ट्र और जम्मू एवं कश्मीर में कई मामले दर्ज कराए गए हैं, जिनके खिलाफ अरनब ने पिछले महीने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। कोर्ट ने अरनब गोस्वामी को अग्रिम जमानत अर्जी दाखिल करने के लिए 3 सप्ताह का समय देते हुए तीन सप्ताह तक उनकी गिरफ्तारी या किसी अन्य तरह की दंडात्मक कार्रवाई पर रोक भी लगा दी थी। इसके अलावा, सुप्रीम कोर्ट ने अरनब गोस्वामी के खिलाफ एक एफआईआर को छोड़कर सभी एफआईआर पर रोक लगा दी थी। यह एक एफआईआर नागपुर में दर्ज की गई थी, जिसे अब मुंबई स्थानांतरित कर दिया गया है।

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