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संकेत उपाध्याय ने बताया, कौन हैं मीडिया में नफरत के 'असली कारोबारी' और कैसे लगेगी लगाम

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस केएम जोसेफ ने कहा कि 'हेट स्पीच पूरी तरह से जहर बोने का काम करती है। इसकी अनुमति नहीं दी जा सकती है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो 3 years ago

सुप्रीम कोर्ट ने मीडिया और टीवी एंकरों को लेकर केंद्र सरकार पर बड़े सवाल खड़े किए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने सीधे शब्दों में इसकी निंदा करते हुए कहा है कि हेट स्पीच यानी कि अभद्र भाषा का जब टीवी डिबेट्स में इस्तेमाल होता है तो सरकार 'मूकदर्शक' क्यों बनी हुई है ?

कोर्ट ने कहा कि टीवी एंकर की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण होती है। जैसे ही कोई गलत या विवादित बयान देता है तो यह काम एंकर का होता है कि उन्हें तुरंत टोका जाए या आगे बोलने से रोका जाए।

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस केएम जोसेफ ने कहा कि 'हेट स्पीच पूरी तरह से जहर बोने का काम करती है। इसकी अनुमति नहीं दी जा सकती है। हमारे पास जब तक एक उचित कानूनी ढांचा नहीं होगा तब तक लोग ऐसा करना जारी रखेंगे। '

इस पूरे वाकये पर एनडीटीवी के वरिष्ठ पत्रकार संकेत उपाध्याय ने सुप्रीम कोर्ट का समर्थन किया है। संकेत उपाध्याय ने ट्वीट करते हुए लिखा, 'सुप्रीम कोर्ट ने नफ़रती TV एंकरों पर अच्छी टिप्पणी की। लेकिन पीछे बैठे आकाओं को भी नहीं बख्शना चाहिए। मीडिया में नफ़रत के असली कारोबारी तो पर्दे के पीछे बैठे लोग हैं। वहाँ से टूँटी बंद होगी तो अपने आप स्क्रीन पर नफ़रत का प्रवाह बंद हो जाएगा।'

 

 

इस मामले को लेकर एंकर संकेत उपाध्याय ने अपने शो में  देश के पहले टीवी न्यूज़ एंकर शम्मी नारंग से भी बात की है। इस मसले पर बोलते हुए शम्मी नारंग ने कहा कि गाज सिर्फ एंकर पर ही क्यों गिरनी चाहिए ? वर्तमान में चैनलों की आपसी होड़ ने भी नफरत को बढ़ावा देने का काम किया है। उन्होंने कहा कि दर्शकों को नकारात्मकता परोसी जा रही है लेकिन ये दौर मंथन का भी है, एक समय ऐसा भी आएगा जब ज़हर और अमृत दोनों अलग अलग हो जाएंगे।


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