आईबीसी24 न्यूज़रूम में कर्मचारियों ने रामलीला का शानदार मंचन किया। डेस्क टीम के साथियों ने रामायण के पात्र निभाए और तहशीन जैदी ने हनुमान का किरदार निभाकर सर्वधर्म समभाव का संदेश दिया।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
आईबीसी24 न्यूज (IBC24 News) के न्यूज़रूम में कर्मचारियों ने रामलीला का शानदार मंचन किया। आमतौर पर कैमरे के पीछे रहकर न्यूज़ तैयार करने वाले डेस्क के साथियों ने इस बार रामायण के पात्रों को मंच पर जीवंत किया। कम समय की तैयारी के बावजूद कर्मचारियों की प्रस्तुति ने सभी का दिल जीत लिया।
रामलीला का मंचन न्यूज़रूम में ही किया गया। इसमें शामिल अधिकतर कलाकार डेस्क टीम से जुड़े कर्मचारी थे। मंचन के दौरान उनकी संवाद अदायगी और अभिनय की जमकर तारीफ हुई। टेक्निकल टीम ने भी बैकड्रॉप और पूरे मंच को तैयार करने में अहम भूमिका निभाई।
आईबीसी24 में इन-हाउस प्रस्तुति की जमकर तारीफ की गई। एक सोशल मीडिया पोस्ट में कहा गया कि करीब एक हजार किलोमीटर दूर बैठकर भी पूरी रामलीला देखने का अनुभव ऐसा रहा, जैसे सामने बैठकर कार्यक्रम देखा जा रहा हो। मंचन की डायरेक्शन किसने की और संवाद किसने लिखे, इसकी जानकारी नहीं है, लेकिन प्रस्तुति बेहद प्रभावी रही। कम दिनों की तैयारी के बावजूद कलाकारों ने शानदार तरीके से अपने किरदार निभाए।
कार्यक्रम में आईबीसी24 के चेयरमैन भी चीफ गेस्ट के तौर पर मौजूद रहे। वहीं रामलीला का सबसे खास पहलू हनुमान जी के किरदार को लेकर रहा। इस भूमिका को तहशीन जैदी ने निभाया। मुस्लिम समुदाय से आने वाले तहशीन जैदी ने हनुमान जी का किरदार इस तरह निभाया कि दर्शकों ने उनकी खूब तारीफ की।
पोस्ट में इसे सर्वधर्म समभाव की मिसाल बताया गया। साथ ही रामलीला में शामिल सभी कलाकारों और इससे जुड़े लोगों को शानदार इन-हाउस प्रस्तुति के लिए बधाई दी गई।
भारत में कनेक्टेड टीवी और फ्री विज्ञापन आधारित स्ट्रीमिंग टेलीविजन से जुड़ी इंडस्ट्री दर्शकों की संख्या मापने और विज्ञापन में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए एक स्वतंत्र संगठन बनाने की तैयारी कर रही है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
इमरान फजल, असिसटेंट एडिटर, एक्सचेंज4मीडिया ।।
भारत में कनेक्टेड टीवी (CTV) और फ्री विज्ञापन आधारित स्ट्रीमिंग टेलीविजन (FAST) से जुड़ी इंडस्ट्री दर्शकों की संख्या मापने और विज्ञापन में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए एक स्वतंत्र संगठन बनाने की तैयारी कर रही है। इसका मकसद टीवी और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर दर्शकों की संख्या मापने के लिए एक भरोसेमंद व्यवस्था तैयार करना है। ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल (BARC) इंडिया की टेलीविजन रेटिंग लंबे समय से जारी नहीं होने के बीच इस पहल की जरूरत और बढ़ गई है।
इस प्रस्ताव के तहत इंडिया CTV एंड FAST काउंसिल (ICFC) बनाने की बात कही गई है। यह एक गैर-लाभकारी संगठन होगा, जिसमें ब्रॉडकास्टर, स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म, विज्ञापनदाता, विज्ञापन एजेंसियां, विज्ञापन तकनीक से जुड़ी कंपनियां और दर्शकों की संख्या मापने वाली संस्थाएं एक साझा व्यवस्था के तहत काम कर सकेंगी।
इस काउंसिल का मसौदा साझा चार्टर इंडस्ट्री से जुड़े पक्षों के बीच चर्चा, सुझावों और प्राथमिकताओं के आधार पर तैयार किया गया है। इसमें जियोस्टार, जी, शेमारू, मैग्नाइट, द ट्रेड डेस्क, रन टीवी, क्लाउडटीवी और अन्य संगठनों की चर्चाओं और सुझावों को शामिल किया गया है।
यह प्रस्ताव टेलीविजन और विज्ञापन इंडस्ट्री के लिए ऐसे समय आया है, जब BARC की साप्ताहिक टीवी रेटिंग उपलब्ध नहीं हैं। इसके चलते ब्रॉडकास्टर और विज्ञापनदाता दर्शकों के प्रदर्शन को समझने में मुश्किलों का सामना कर रहे हैं। इससे मीडिया प्लानिंग, विज्ञापन सौदों पर बातचीत और विज्ञापन अभियानों के नतीजों का आकलन करना भी कठिन हो गया है।
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की TRP नीति 2026 में भी कनेक्टेड टीवी की माप को रेटिंग एजेंसी की पात्रता के मानदंडों में स्पष्ट रूप से शामिल किया गया है। वहीं, CTV का तेजी से बढ़ता इस्तेमाल टीवी स्क्रीन, स्ट्रीमिंग सेवाओं और डिजिटल विज्ञापन के बीच एक जैसे मापदंड तैयार करने की जरूरत को बढ़ा रहा है।
हालांकि, ICFC का उद्देश्य BARC की जगह लेना या अपना अलग रेटिंग कारोबार शुरू करना नहीं है। प्रस्तावित चार्टर के मुताबिक, यह काउंसिल दर्शकों की संख्या मापने के लिए साझा परिभाषाएं, तकनीकी मानक और स्वतंत्र जांच की व्यवस्था तैयार करेगी। इसके अलावा, यह प्रस्तावित व्यवस्था को लागू करने के लिए किसी मौजूदा मापन या रेटिंग एजेंसी के चयन में भी मदद कर सकती है।
CTV पर दर्शकों की संख्या मापना होगी पहली प्राथमिकता
प्रस्तावित काउंसिल के सामने शुरुआती चुनौती कनेक्टेड टीवी प्लेटफॉर्म पर दर्शकों की संख्या मापने के बिखरे हुए तरीकों को एक समान बनाना होगी।
विशेषज्ञों का कहना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर दर्शकों और विज्ञापनों से जुड़ी गतिविधियों का आंकड़ा सभी व्यूइंग के आधार पर जुटाने की संभावना हो सकती है। इसके उलट, पारंपरिक टेलीविजन की रेटिंग के लिए तय संख्या में चुने गए घरों के नमूने के आधार पर दर्शकों की देखने की आदतों का आकलन किया जाता है।
हालांकि, चार्टर में कहा गया है कि अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर आंकड़ों का अलग-अलग तरीके से उपलब्ध होना, रिपोर्टिंग के तरीकों में अंतर और जांच के लिए साझा मानकों की कमी के कारण सेवाओं के बीच दर्शकों की संख्या की सीधी तुलना करना मुश्किल होता है।
CTV इंडस्ट्री से जुड़े एक पक्ष ने कहा, “विज्ञापनदाताओं के लिए इससे उन अभियानों का आकलन करना मुश्किल हो जाता है, जो पारंपरिक टेलीविजन, स्ट्रीमिंग ऐप और CTV पर चलाए जाते हैं। अलग-अलग प्लेटफॉर्म अपने यहां देखने से जुड़े आंकड़े जुटा सकते हैं, लेकिन उनकी रिपोर्ट जरूरी नहीं कि दर्शकों की संख्या का स्वतंत्र रूप से जांचा गया और पूरी इंडस्ट्री में मान्य आंकड़ा पेश करे।”
BARC की रेटिंग बंद होने से ऐसे मानक बनाने की जरूरत और ज्यादा महसूस की जा रही है। हालांकि, दोनों समस्याएं अलग-अलग हैं। पारंपरिक टीवी की रेटिंग दोबारा शुरू करने के लिए सामान्य टेलीविजन के मापन की व्यवस्था को चालू करना जरूरी है। वहीं, CTV की माप के लिए बंटे हुए डिजिटल वितरण, दर्शकों के हिसाब से अलग-अलग विज्ञापन दिखाने की सुविधा और प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध आंकड़ों को ध्यान में रखना होगा।
ICFC का प्रस्ताव CTV और व्यापक डिजिटल टेलीविजन व्यवस्था में दर्शकों की संख्या मापने और रिपोर्टिंग के लिए एक भरोसेमंद, साझा और स्वतंत्र रूप से संचालित ढांचा तैयार करने का है।
इस ढांचे के तहत दर्शकों, कंटेंट, चैनलों और विज्ञापनों की साझा परिभाषाएं तय की जाएंगी। साथ ही, रिपोर्टिंग के एक समान सिद्धांत और ऐसे मापदंड तैयार किए जाएंगे, जिनकी अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर तुलना की जा सके। इनमें देखने में बिताया गया समय, दर्शकों की संख्या, विज्ञापन दिखाए जाने की संख्या, विज्ञापन देखने की दर, विज्ञापन पर क्लिक करने की दर और बीच में कंटेंट छोड़ने की दर शामिल होंगी।
इस व्यवस्था में निजता की सुरक्षा, स्वतंत्र ऑडिट और आंकड़ों की गुणवत्ता जांचने के मानक भी शामिल होंगे।
पूरी इंडस्ट्री के लिए एक साझा व्यवस्था बनने से विज्ञापनदाताओं की निर्भरता अलग-अलग प्लेटफॉर्म की अपनी रिपोर्टिंग पद्धतियों पर कम हो सकती है। इससे उन्हें डिजिटल टेलीविजन में किए गए निवेश का आकलन करने के लिए एक जैसा आधार मिल सकता है।
हालांकि, इस व्यवस्था की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि बड़े ब्रॉडकास्टर, स्ट्रीमिंग सेवाएं, विज्ञापनदाता और तकनीकी कंपनियां इसमें कितनी भागीदारी करती हैं।
काउंसिल स्वतंत्र एजेंसी से करा सकती है मापन का काम
प्रस्तावित चार्टर की एक प्रमुख विशेषता यह है कि इसमें मापन की व्यवस्था को स्वतंत्र रखने पर जोर दिया गया है।
ICFC अपनी अलग मापन सहायक कंपनी बनाने या खुद व्यावसायिक रेटिंग कारोबार शुरू करने का प्रस्ताव नहीं रखती। इसके बजाय, यह तकनीकी जरूरतें, मापन से जुड़े दिशा-निर्देश और व्यवस्था लागू करने के सिद्धांत तय करेगी। इसके बाद पारदर्शी प्रक्रिया के जरिए किसी मौजूदा स्वतंत्र मापन या रेटिंग एजेंसी के चयन में मदद की जा सकती है।
चार्टर में यह तय नहीं किया गया है कि आंकड़े जुटाने के लिए कौन-सी तकनीक इस्तेमाल होगी। इस पर तकनीकी जांच के बाद फैसला लिया जा सकता है। संभावित विकल्पों में सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट किट (SDK), एप्लिकेशन प्रोग्रामिंग इंटरफेस (API), दोनों का मिला-जुला मॉडल या तकनीकी आकलन में सामने आने वाला कोई अन्य तरीका शामिल है।
SDK आधारित व्यवस्था से इसमें शामिल सेवाओं पर देखने और विज्ञापन से जुड़े जरूरी आंकड़ों को एक समान तरीके से जुटाने में मदद मिल सकती है। हालांकि, इसे लागू करने के लिए आंकड़ों की परिभाषाओं, तकनीकी तालमेल, निजता की सुरक्षा और स्वतंत्र मापन एजेंसी को मिलने वाली जानकारी की सीमा पर सहमति बनानी होगी।
चार्टर के मुताबिक, चुनी गई तकनीकी व्यवस्था पर निगरानी और स्वतंत्र ऑडिट होगा, ताकि बिना अनुमति लोगों की गतिविधियों पर नजर रखने या आंकड़ों का गलत इस्तेमाल करने से बचा जा सके। इसमें डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन रूल्स, 2025 को भी चर्चा और नीतिगत विचार-विमर्श का एक अहम विषय बताया गया है।
प्रस्तावित ऑडियंस मेजरमेंट वर्किंग ग्रुप के तहत एक ऑडियंस मेजरमेंट टेक्निकल कमेटी बनाई जाएगी। यह समिति मापन के तरीकों, आंकड़ों की संरचना, निजता, अलग-अलग प्रणालियों के बीच तालमेल, तकनीकी जांच और ऑडिट पर काम करेगी। साथ ही, यह मापन के लिए उपलब्ध अलग-अलग तकनीकों की व्यावहारिकता का आकलन भी करेगी।
आखिरकार इस सेवा का इस्तेमाल कैसे होगा, इसकी सदस्यता या शुल्क का मॉडल क्या होगा और इससे जुड़े दूसरे व्यावसायिक पहलू कैसे तय किए जाएंगे, इस पर बाद में काउंसिल की संचालन व्यवस्था के तहत फैसला लिया जाएगा।
BARC की रेटिंग बंद होने से साझा मापन व्यवस्था की जरूरत बढ़ी
यह प्रस्ताव भारत में दर्शकों की संख्या मापने की व्यवस्था के भविष्य को लेकर चल रही व्यापक चर्चा के बीच आया है।
BARC की रेटिंग उपलब्ध नहीं होने से वह स्थापित व्यवस्था प्रभावित हुई है, जिसके जरिए ब्रॉडकास्टर, विज्ञापनदाता और मीडिया एजेंसियां टीवी दर्शकों की संख्या का आकलन करते हैं। नियमित रेटिंग उपलब्ध नहीं होने के कारण बाजार से जुड़े पक्षों को चैनलों के प्रदर्शन का आकलन करने, विज्ञापन अभियान की योजना बनाने और विज्ञापन पर हुए खर्च से मिलने वाले नतीजों को समझने में मुश्किल हो रही है।
CTV ने इस चुनौती को और बढ़ा दिया है। अब दर्शक स्मार्ट टीवी के ऑपरेटिंग सिस्टम, स्ट्रीमिंग ऐप, ब्रॉडकास्टर की अपनी डिजिटल सेवाओं और इंटरनेट के जरिए कंटेंट देने वाले दूसरे प्लेटफॉर्म पर बंटे हुए हैं। इन सेवाओं के पास अपने दर्शकों से जुड़ा आंकड़ा हो सकता है, लेकिन मापन और रिपोर्टिंग के तरीकों में अंतर होने के कारण इनकी सीधी तुलना करना आसान नहीं है।
इंडस्ट्री की स्वतंत्र व्यवस्था डिजिटल टेलीविजन के दर्शकों की संख्या मापने के लिए साझा मानक तैयार करने में मदद कर सकती है। हालांकि, इससे अकेले BARC की रेटिंग बहाल करने से जुड़ी नियामकीय, संचालन संबंधी या संस्थागत समस्याओं का समाधान नहीं होगा।
विज्ञापनदाताओं के लिए बड़ा सवाल यह है कि क्या भारत ऐसी व्यवस्था तैयार कर सकता है, जिसमें पारंपरिक टीवी और CTV पर किए गए विज्ञापन निवेश का आकलन एक जैसे और स्वतंत्र रूप से जांचे गए मानकों के आधार पर हो सके।
इसके लिए केवल साझा तकनीकी मानक बनाना काफी नहीं होगा। इंडस्ट्री के बड़े हिस्से की भागीदारी और मापन की व्यवस्था के संचालन पर भरोसा भी जरूरी होगा।
विज्ञापन धोखाधड़ी रोकना और सप्लाई चेन में पारदर्शिता बढ़ाना दूसरा प्रमुख लक्ष्य
दर्शकों की संख्या मापने के साथ-साथ ICFC विज्ञापन धोखाधड़ी रोकने और विज्ञापन की सप्लाई चेन में पारदर्शिता बढ़ाने को भी अपनी प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल करने का प्रस्ताव रखती है।
CTV में बड़े टीवी स्क्रीन पर देखने के अनुभव के साथ डिजिटल विज्ञापन की वे सुविधाएं भी मिलती हैं, जिनके जरिए अलग-अलग दर्शकों को उनकी रुचि के हिसाब से विज्ञापन दिखाए जा सकते हैं और उनके नतीजों को मापा जा सकता है।
लेकिन विज्ञापन से जुड़े संकेतों में अंतर, बिखरी हुई रिपोर्टिंग और विज्ञापन सप्लाई चेन के अलग-अलग हिस्सों की सीमित जानकारी पारदर्शिता को कमजोर कर सकती है। इससे विज्ञापन में धोखाधड़ी या आंकड़ों में गड़बड़ी का पता लगाना भी मुश्किल हो सकता है।
चार्टर में विज्ञापन संकेतों के लिए साझा मानक और उन्हें लागू करने के दिशा-निर्देश तैयार करने का प्रस्ताव है। इसके तहत विज्ञापन अनुरोधों और उनसे जुड़े मेटाडेटा की एक समान परिभाषा तय करने के साथ संकेतों की जांच और धोखाधड़ी का पता लगाने की साझा प्रक्रिया भी बनाई जाएगी।
इसके अलावा, ऐसी पारदर्शी रिपोर्टिंग व्यवस्था तैयार करने की योजना है, जिससे यह पता लगाया जा सके कि विज्ञापन संकेत सप्लाई चेन से गुजरते समय कहां कमी या नुकसान हो रहा है। इस दिशा में अधिकृत विक्रेताओं की एक पंजीकृत सूची बनाने का विकल्प भी विचाराधीन है।
काउंसिल जरूरत के मुताबिक इंटरएक्टिव ऐडवर्टाइजिंग ब्यूरो (IAB) जैसे संगठनों के पहले से मौजूद इंडस्ट्री मानकों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित करेगी, ताकि एक जैसे काम के लिए अलग-अलग ढांचे बनाने से बचा जा सके। यह विज्ञापन के मानक प्रारूपों को भी बढ़ावा देगी, लेकिन नए प्रयोगों की गुंजाइश बनाए रखेगी।
चार्टर के मुताबिक, इन कदमों का मकसद नियमों को एक समान तरीके से लागू करना, विज्ञापन अनुरोधों को ज्यादा स्पष्ट बनाना, रिपोर्टिंग में सुधार करना और आंकड़ों की बेहतर जांच सुनिश्चित करना है। इससे विज्ञापन धोखाधड़ी कम करने और CTV विज्ञापन व्यवस्था पर भरोसा बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
ICFC विज्ञापन की कीमतें तय नहीं करेगी और न ही प्रतिस्पर्धी कंपनियों के बीच व्यावसायिक शर्तों के तालमेल की व्यवस्था करेगी। उसका काम मानक, पारदर्शिता और उन्हें लागू करने के सिद्धांतों तक सीमित रहेगा। सदस्यों के बीच सहयोग के दौरान प्रतिस्पर्धा कानून से जुड़े सुरक्षा उपायों का पालन भी जरूरी होगा।
वितरण व्यवस्था और सरकारी नीतियों पर भी काम करेगी काउंसिल
दर्शकों की संख्या मापने और विज्ञापन के अलावा, प्रस्तावित काउंसिल टीवी वितरण के पुराने और नए तरीकों से जुड़े मुद्दों पर भी काम करेगी।
इसके संभावित कार्यक्षेत्र में सभी को उचित पहुंच देना, भेदभाव से बचना, अलग-अलग प्रणालियों के बीच तालमेल बढ़ाना, मेटाडेटा और सिग्नलिंग के मानक तय करना, नए प्लेटफॉर्म को व्यवस्था से जोड़ने की प्रक्रिया और रिपोर्टिंग के तरीके शामिल हैं। वितरण के क्षेत्र में जरूरत से ज्यादा बाजार शक्ति एक जगह केंद्रित होने से बचाने के उपायों पर भी विचार किया जाएगा।
चार्टर में उचित हिस्सेदारी और मूल्य के बंटवारे से जुड़े सिद्धांतों का भी जिक्र है, जहां ये लागू होते हों। हालांकि, इसमें फिर से स्पष्ट किया गया है कि काउंसिल प्रतिस्पर्धी कंपनियों के बीच ऐसे व्यावसायिक नियम तय नहीं करेगी, जो प्रतिस्पर्धा के लिहाज से संवेदनशील हों।
ICFC सरकार और नियामक संस्थाओं के साथ होने वाली चर्चाओं में इंडस्ट्री का प्रतिनिधित्व करने की कोशिश करेगी। चार्टर में डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन रूल्स, 2025 और डिजिटल कॉम्पिटिशन बिल को उन नीतिगत विषयों में शामिल किया गया है, जिन पर काउंसिल संबंधित पक्षों के साथ विचार-विमर्श करना चाहती है।
इसका घोषित उद्देश्य ऐसी नीतियों की वकालत करना है, जो कारोबार को आगे बढ़ने का अवसर दें और जरूरत के मुताबिक संतुलित नियम लागू करें। इसमें बाजार में मजबूत स्थिति का गलत इस्तेमाल रोकने और भारत के भीतर शिकायत या विवाद के समाधान के प्रभावी रास्ते उपलब्ध कराने जैसे मुद्दे भी शामिल हैं।
काउंसिल अपनी संचालन व्यवस्था के तहत जिन मुद्दों पर सहमति बनाएगी, उन्हीं पर सार्वजनिक रूप से अपनी राय रखेगी। इस तरह नीतिगत मुद्दों पर उसकी वकालत को सदस्यों के बीच होने वाली व्यावसायिक बातचीत से अलग रखा जाएगा।
काउंसिल की विश्वसनीयता तय करेंगे संचालन और फंडिंग के नियम
प्रस्तावित काउंसिल की संरचना पांच प्रमुख समूहों को प्रतिनिधित्व देने के लिए तैयार की गई है। इनमें ब्रॉडकास्टर और कंटेंट के मालिक, CTV-OTT और FAST प्लेटफॉर्म, विज्ञापनदाता और ब्रांड, विज्ञापन एजेंसियां तथा विज्ञापन तकनीक और कमाई से जुड़े प्लेटफॉर्म शामिल हैं।
मापन, विश्लेषण, तकनीक और बुनियादी ढांचे से जुड़ी कंपनियां भी उचित सदस्यता या कार्य समूहों के जरिए इसमें भाग ले सकती हैं। चार्टर के मुताबिक, प्रतिनिधित्व का संतुलन ऐसा होना चाहिए कि किसी एक समूह या व्यावसायिक हित का फैसलों पर जरूरत से ज्यादा प्रभाव न पड़े।
चार्टर को मंजूरी मिलने और संस्थापक सदस्यों के लिए रुचि की अभिव्यक्ति (EOI) की प्रक्रिया पूरी होने के बाद एक अंतरिम संचालन समिति बनाई जाएगी। यह समिति कानूनी इकाई और सचिवालय की स्थापना की देखरेख करेगी, शुरुआती फंडिंग मॉडल तय करेगी और अलग-अलग कार्य समूह बनाएगी।
गैर-लाभकारी संस्थाओं के लिए भारत में इस्तेमाल होने वाली कानूनी संरचना, कंपनी अधिनियम की धारा 8 के तहत कंपनी बनाना भी विचाराधीन विकल्पों में शामिल है। हालांकि, इस पर कानूनी, कर और नियामकीय सलाह के बाद ही फैसला लिया जाएगा।
संस्थापक सदस्यों से उम्मीद की जा रही है कि वे काउंसिल की स्थापना और पहले साल के संचालन का खर्च उठाने के लिए शुरुआत में वित्तीय योगदान देंगे। चार्टर में इस योगदान की कोई निश्चित राशि नहीं बताई गई है। इसकी रकम, ढांचा और भुगतान का समय अंतरिम संचालन समिति तय करेगी।
लंबे समय तक कामकाज जारी रखने के लिए सदस्यता शुल्क और मंजूर किए गए दूसरे वित्तीय स्रोतों का सहारा लिया जा सकता है।
दस्तावेज में इस बात पर जोर दिया गया है कि किसी सदस्य का ज्यादा पैसा देना उसे काउंसिल के फैसलों पर दूसरों से ज्यादा अधिकार नहीं देगा। इसमें पारदर्शी निर्णय प्रक्रिया, हितों के टकराव की जानकारी देने और उसे संभालने के नियमों तथा प्रतिस्पर्धा की दृष्टि से संवेदनशील जानकारी साझा होने से रोकने के उपायों की भी बात कही गई है।
ये प्रावधान इसलिए अहम हैं, क्योंकि प्रस्तावित काउंसिल ऐसे मानक तैयार करना चाहती है, जिन पर दर्शकों और विज्ञापन बजट के लिए एक-दूसरे से प्रतिस्पर्धा करने वाली कंपनियां भी भरोसा कर सकें।
साझा मापन व्यवस्था की सफलता इंडस्ट्री के भरोसे पर निर्भर
BARC की रेटिंग बंद होने से टीवी विज्ञापन के लिए दर्शकों की संख्या मापने की भरोसेमंद व्यवस्था का महत्व सामने आया है। वहीं, CTV और FAST के बढ़ते इस्तेमाल ने पहले से बंटे हुए बाजार को और जटिल बना दिया है।
इंडस्ट्री की अगुवाई में तैयार होने वाला एक स्वतंत्र ढांचा डिजिटल मापन से जुड़ी कमियों को दूर करने में मदद कर सकता है। लेकिन इसकी विश्वसनीयता पारदर्शी संचालन, स्वतंत्र जांच, एक जैसे तकनीकी मानकों और पूरी इंडस्ट्री की स्वीकार्यता पर निर्भर करेगी।
फिलहाल, यह प्रस्ताव भारत के डिजिटल टेलीविजन क्षेत्र को दर्शकों की संख्या मापने और विज्ञापन से जुड़े साझा मानकों के तहत एकजुट करने की कोशिश है। आगे चलकर यह पहल पूरी इंडस्ट्री में स्वीकार की जाने वाली मापन व्यवस्था बन पाती है या नहीं, इसी से तय होगा कि टीवी और स्ट्रीमिंग के लगातार एक-दूसरे के करीब आने के दौर में इसकी कितनी अहमियत होगी।
भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) की रिपोर्ट के मुताबिक, देश में भुगतान वाली डायरेक्ट-टू-होम (DTH) टीवी सेवाओं के ग्राहकों की संख्या एक साल में 75.1 लाख घट गई।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
भारत में पारंपरिक टीवी प्रसारण और रेडियो कारोबार पर दबाव बना हुआ है। भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) की रिपोर्ट के मुताबिक, देश में भुगतान वाली डायरेक्ट-टू-होम (DTH) टीवी सेवाओं के ग्राहकों की संख्या एक साल में 75.1 लाख घट गई। वहीं, निजी एफएम रेडियो कंपनियों की विज्ञापन से होने वाली कमाई में भी गिरावट दर्ज की गई। अप्रैल-जून 2026 की तिमाही में यह कमाई पिछली तिमाही के मुकाबले 9.1% कम रही।
TRAI की तिमाही प्रदर्शन रिपोर्ट के अनुसार, देश के चार भुगतान वाले DTH ऑपरेटरों के सक्रिय ग्राहकों की संख्या 30 जून 2026 तक घटकर 4.856 करोड़ रह गई। एक साल पहले, 30 जून 2025 को यह संख्या 5.607 करोड़ थी। यानी सालाना आधार पर इसमें करीब 13.4% की गिरावट आई।
ग्राहकों की संख्या में गिरावट का सिलसिला हाल की तिमाही में भी जारी रहा। मार्च 2026 में इन ऑपरेटरों के सक्रिय ग्राहकों की संख्या 4.905 करोड़ थी, जो जून में घटकर 4.856 करोड़ रह गई।
Tata Play सबसे आगे, Airtel दूसरे स्थान पर
भुगतान वाली DTH सेवाओं में Tata Play सबसे बड़ी कंपनी बनी हुई है। 30 जून 2026 तक उसके 1.484 करोड़ ग्राहक थे और बाजार में उसकी हिस्सेदारी 30.56% रही।
भारती टेलीमीडिया 1.358 करोड़ ग्राहकों के साथ दूसरे स्थान पर रही। उसकी बाजार हिस्सेदारी 27.97% थी। वहीं, Sun Direct के 1.093 करोड़ और Dish TV India के 92.1 लाख ग्राहक थे।
इन आंकड़ों में प्रसार भारती की मुफ्त DTH सेवा DD Free Dish के ग्राहक शामिल नहीं हैं।
टीवी वितरण के अलग-अलग माध्यमों पर 9.67 करोड़ सक्रिय ग्राहक
TRAI की रिपोर्ट के मुताबिक, टीवी वितरण के चुनिंदा ऑपरेटरों के पास 30 जून 2026 तक कुल 9.673 करोड़ सक्रिय ग्राहक थे। इस आंकड़े में ऐसे ग्राहक भी शामिल हैं, जिनकी सेवा 90 दिनों तक निष्क्रिय रही थी या अस्थायी रूप से निलंबित थी।
इनमें DTH सेवाओं के 4.856 करोड़ ग्राहक थे। इसके बाद केबल टीवी का स्थान रहा, जहां मल्टी-सिस्टम ऑपरेटरों (MSO) के पास 3.724 करोड़ ग्राहक थे।
इंटरनेट प्रोटोकॉल टेलीविजन (IPTV) के ग्राहकों की संख्या 62.1 लाख रही, जबकि हेडएंड-इन-द-स्काई (HITS) सेवाओं के ग्राहकों की संख्या 47.2 लाख दर्ज की गई।
IPTV क्षेत्र में भारती एयरटेल सबसे आगे रही। उसके 40.9 लाख ग्राहक थे, जबकि Hathway Digital के पास 12.8 लाख ग्राहक थे।
वहीं, HITS क्षेत्र में GTPL Hathway के 31 लाख ग्राहक थे। इस मामले में NXTDIGITAL 16.1 लाख ग्राहकों के साथ दूसरे स्थान पर रही।
सभी ऑपरेटरों का पूरा आंकड़ा नहीं
TRAI ने स्पष्ट किया कि ये आंकड़े सभी पंजीकृत ऑपरेटरों के बजाय चुनिंदा कंपनियों की ओर से दी गई जानकारी पर आधारित हैं।
देश में पंजीकृत 736 मल्टी-सिस्टम ऑपरेटरों में से केवल 127 ने TRAI को अपने ग्राहकों की संख्या बताई। वहीं, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के पास स्व-घोषणा जमा करने वाले 76 IPTV ऑपरेटरों में से केवल 12 ने ग्राहकों का आंकड़ा दिया। दोनों HITS ऑपरेटरों ने अपनी जानकारी उपलब्ध कराई।
इसलिए, टीवी वितरण के अलग-अलग माध्यमों के ये आंकड़े संबंधित क्षेत्र के सभी ऑपरेटरों की कुल ग्राहक संख्या को पूरी तरह नहीं दर्शाते।
देश में 915 निजी सैटेलाइट टीवी चैनलों को अनुमति
TRAI की रिपोर्ट के अनुसार, 30 जून 2026 तक भारत में 915 निजी सैटेलाइट टीवी चैनलों को अनुमति मिली हुई थी। इनमें से 906 चैनल देश में डाउनलिंकिंग यानी प्रसारण के लिए उपलब्ध थे।
इन 915 चैनलों में 342 पे चैनल और 564 मुफ्त प्रसारण वाले चैनल थे। मार्च 2026 के मुकाबले पे चैनलों की संख्या में बदलाव नहीं हुआ, लेकिन एक साल पहले दर्ज 333 चैनलों के मुकाबले यह संख्या अधिक थी।
कुल 342 पे चैनलों में 238 स्टैंडर्ड डेफिनिशन (SD) और 104 हाई डेफिनिशन (HD) चैनल शामिल थे।
श्रेणी के हिसाब से देखें तो सामान्य मनोरंजन के सबसे ज्यादा 108 पे चैनल थे। इसके बाद फिल्मों के 63 और समाचार एवं समसामयिक मामलों के 61 चैनल थे। खेल से जुड़े 41 चैनल थे, जबकि बच्चों के कार्यक्रमों के 24 और जानकारी व मनोरंजन से जुड़े 23 चैनल थे।
निजी FM रेडियो की विज्ञापन कमाई 9.1% घटी
टीवी के साथ-साथ निजी एफएम रेडियो कारोबार में भी दबाव देखने को मिला। अप्रैल-जून 2026 की तिमाही में निजी एफएम रेडियो प्रसारकों की विज्ञापन से होने वाली कमाई 376.16 करोड़ रुपये रही। पिछली तिमाही यानी जनवरी-मार्च 2026 में यह 414.03 करोड़ रुपये थी। इस तरह तिमाही आधार पर कमाई में 9.1% की गिरावट आई।
इससे पहले अक्टूबर-दिसंबर 2025 की तिमाही में विज्ञापन से कमाई 419.29 करोड़ रुपये थी। सालाना आधार पर भी कमाई घटी है। अप्रैल-जून 2025 में निजी एफएम रेडियो प्रसारकों ने विज्ञापन से 383.14 करोड़ रुपये कमाए थे, जबकि अप्रैल-जून 2026 में यह घटकर 376.16 करोड़ रुपये रह गई।
निजी FM चैनलों की संख्या भी घटी
जून 2026 में देश में चालू निजी एफएम रेडियो चैनलों की संख्या घटकर 386 रह गई, जबकि मार्च में यह 390 थी। TRAI के मुताबिक, पांच चैनलों की अनुमति वापस किए जाने के कारण चैनलों की संख्या में गिरावट आई।
हालांकि, निजी एफएम रेडियो वाले शहरों की संख्या 120 से बढ़कर 121 हो गई। इस दौरान निजी एफएम रेडियो ऑपरेटरों की संख्या भी 31 से घटकर 30 रह गई।
कम्युनिटी रेडियो स्टेशनों की संख्या बढ़ी
जहां निजी एफएम रेडियो चैनलों की संख्या घटी, वहीं कम्युनिटी रेडियो का विस्तार जारी रहा। जून 2026 तक देश में चालू कम्युनिटी रेडियो स्टेशनों की संख्या बढ़कर 578 हो गई। एक साल पहले जून 2025 में इनकी संख्या 540 थी, जबकि मार्च 2026 में 566 स्टेशन चालू थे।
इस तरह सालाना आधार पर कम्युनिटी रेडियो स्टेशनों की संख्या में 38 की बढ़ोतरी हुई, जो करीब 7% है।
TRAI के ये आंकड़े बताते हैं कि भुगतान वाली DTH सेवाओं के ग्राहक लगातार घट रहे हैं और निजी एफएम रेडियो की विज्ञापन कमाई पर भी दबाव है। दूसरी ओर, कम्युनिटी रेडियो स्टेशनों की संख्या में बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
बीएजी फिल्म्स एंड मीडिया लिमिटेड ने अपनी सहायक कंपनी न्यूज24 ब्रॉडकास्ट इंडिया लिमिटेड (News24 Broadcast India Limited) में आयुष मिश्रा को कंपनी सचिव नियुक्त किया है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
बीएजी फिल्म्स एंड मीडिया लिमिटेड (B.A.G. Films and Media Limited) ने अपनी सहायक कंपनी न्यूज24 ब्रॉडकास्ट इंडिया लिमिटेड (News24 Broadcast India Limited) में आयुष मिश्रा को कंपनी सचिव नियुक्त किया है। यह नियुक्ति 13 अक्टूबर, 2026 से प्रभावी हो गई है।
कंपनी ने 13 अक्टूबर को शेयर बाजारों को दी गई जानकारी में बताया कि आयुष मिश्रा को कंपनी सचिव के पद पर नियुक्त किया गया है। यह नियुक्ति कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 203 और इसके अन्य लागू प्रावधानों के तहत की गई है।
बीएजी फिल्म्स एंड मीडिया ने इस नियुक्ति की जानकारी भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) के लिस्टिंग नियमों के तहत साझा की है। कंपनी ने यह सूचना सेबी के लिस्टिंग दायित्वों और जानकारी देने से जुड़े नियमों, 2015 के नियम 30 के अनुपालन में बीएसई और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) को दी है।
आयुष मिश्रा का आईसीएसआई सदस्यता नंबर ACS 81466 है। कंपनी ने नियुक्ति से जुड़ी जरूरी जानकारी भी नियामकीय नियमों के अनुसार साझा की है।
यह जानकारी बीएजी फिल्म्स एंड मीडिया लिमिटेड के कंपनी सचिव और अनुपालन अधिकारी अजय मिश्रा की ओर से जारी की गई है।
वरिष्ठ पत्रकार रुबिका लियाकत 12 अक्टूबर से न्यूज18 इंडिया के प्राइम टाइम डिबेट शो ‘आर पार’ की मेजबानी करेंगी। कार्यक्रम रोज शाम 6:50 बजे प्रसारित होगा।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
वरिष्ठ ब्रॉडकास्ट पत्रकार और एंकर रुबिका लियाकत (Rubika Liyaquat) 12 अक्टूबर से न्यूज18 इंडिया (News18 India) के चर्चित प्राइम टाइम डिबेट शो ‘आर पार’ की मेजबानी करेंगी। एक घंटे का यह शो रोज शाम 6:50 बजे प्रसारित होगा।
न्यूज18 इंडिया के प्रमुख प्राइम टाइम कार्यक्रमों में शामिल ‘आर पार’ दिन के बड़े राष्ट्रीय मुद्दों पर सीधी और तीखी बहस के लिए जाना जाता है। शो में अलग-अलग विचारों और नजरियों को सामने रखते हुए यह समझने की कोशिश की जाती है कि इन मुद्दों का आम लोगों पर क्या असर पड़ता है।
रुबिका लियाकत के नेतृत्व में शो नए दौर में प्रवेश करेगा, लेकिन इसका मूल एडिटोरियल फॉर्मेट बरकरार रहेगा। कार्यक्रम में मुद्दों पर स्पष्ट रुख के साथ विरोधी विचारों को भी अपनी बात रखने का पूरा अवसर दिया जाएगा। रुबिका अपनी मजबूत स्क्रीन प्रेजेंस, सटीक सवालों और दर्शकों के साथ बेहतर जुड़ाव के साथ शो में बातचीत के साथ निर्णायक अंदाज लेकर आएंगी।
अपने नए शो को लेकर रुबिका लियाकत ने कहा कि ‘आर पार’ न्यूज18 इंडिया के प्रमुख कार्यक्रमों में से एक है और दर्शकों का इससे लंबे समय से जुड़ाव रहा है। उन्होंने कहा कि वह इसकी विरासत को अपने अंदाज में आगे बढ़ाने को लेकर उत्साहित हैं। उनकी प्राथमिकता तीखे सवाल, बेबाक बातचीत और दर्शकों के साथ मजबूत जुड़ाव होगी।
भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) ने डिजिटल राइट्स मैनेजमेंट (DRM) आधारित डिजिटल एड्रेसेबल सिस्टम के ऑडिट के लिए नए मैनुअल का मसौदा जारी किया है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) ने डिजिटल राइट्स मैनेजमेंट (DRM) आधारित डिजिटल एड्रेसेबल सिस्टम के ऑडिट के लिए नए मैनुअल का मसौदा जारी किया है। प्राधिकरण ने इस पर संबंधित पक्षों से सुझाव और टिप्पणियां मांगी हैं। सुझाव देने की अंतिम तारीख 30 अक्टूबर, 2026 तय की गई है।
ट्राई ने यह मसौदा 9 अक्टूबर, 2026 को जारी किया। इसका पूरा नाम ‘टेलीकम्युनिकेशन (ब्रॉडकास्टिंग एंड केबल) सर्विसेज DRM-बेस्ड डिजिटल एड्रेसेबल सिस्टम्स ऑडिट मैनुअल, 2026’ है। इसका मकसद DRM आधारित सिस्टम के नियमों के पालन की जांच के लिए ऑडिट प्रक्रिया को विस्तार से बताना है।
टीवी डिस्ट्रीब्यूशन सेवाओं का सालाना ऑडिट जरूरी
ट्राई के मुताबिक, टेलीकम्युनिकेशन (ब्रॉडकास्टिंग एंड केबल) सर्विसेज इंटरकनेक्शन (एड्रेसेबल सिस्टम्स) रेगुलेशंस, 2017 के तहत टीवी चैनलों के डिस्ट्रीब्यूशंस के डिजिटल एड्रेसेबल सिस्टम (DAS) का सालाना ऑडिट जरूरी है। इसमें नियमों के प्रावधानों के अनुसार कंडीशनल एक्सेस सिस्टम (CAS), सब्सक्राइबर मैनेजमेंट सिस्टम (SMS), DRM और इनसे जुड़े अन्य सिस्टम शामिल हैं।
इन नियमों की अनुसूची-X (Schedule X) में DRM आधारित सिस्टम के लिए आवश्यक प्रावधान दिए गए हैं। ये प्रावधान मुख्य रूप से इंटरनेट प्रोटोकॉल टेलीविजन (IPTV) आधारित डिस्ट्रीब्यूशन सेवाओं से जुड़े हैं।
पहले जारी हो चुका है डिजिटल सिस्टम के ऑडिट का मैनुअल
ट्राई ने 10 मार्च, 2026 को डिजिटल एड्रेसेबल सिस्टम के ऑडिट के लिए एक मैनुअल जारी किया था। इसमें नियमों की अनुसूची-III के तहत आने वाले सिस्टम के लिए अलग-अलग प्रावधानों के अनुसार ऑडिट प्रक्रिया बताई गई थी। इसमें CAS, SMS और सेट-टॉप बॉक्स (STB) आधारित सिस्टम शामिल हैं। हालांकि, DRM आधारित सिस्टम के ऑडिट के लिए भी इसी तरह के विस्तृत मैनुअल की जरूरत महसूस की गई। IPTV ऑपरेटरों, प्रसारकों और ऑडिटरों सहित कई संबंधित पक्षों ने इस जरूरत को उठाया था।
इसी को ध्यान में रखते हुए ट्राई ने अब DRM आधारित सिस्टम के ऑडिट के लिए अलग मैनुअल का मसौदा तैयार किया है। इसका उद्देश्य संबंधित पक्षों को अनुसूची-X के प्रावधानों के पालन की जांच करने की प्रक्रिया समझाने में मदद करना है। इसे ऑडिट के दौरान मार्गदर्शन देने वाले दस्तावेज के रूप में तैयार किया गया है।
मसौदे में ऑडिट से जुड़े कई अहम प्रावधान
DRM ऑडिट मैनुअल के मसौदे में कई महत्वपूर्ण बातें शामिल की गई हैं:
इन प्रावधानों का उद्देश्य DRM आधारित डिजिटल एड्रेसेबल सिस्टम के ऑडिट को व्यवस्थित करना और संबंधित पक्षों को नियमों के पालन की जांच के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश उपलब्ध कराना है।
30 अक्टूबर तक भेज सकते हैं सुझाव
ट्राई ने इस मसौदे पर संबंधित पक्षों से लिखित सुझाव, टिप्पणियां और प्रस्ताव मांगे हैं। सुझावों के साथ उनके पीछे के कारण, औचित्य और संबंधित आंकड़े या सबूत देना भी जरूरी बताया गया है।
हितधारक अपने सुझाव 30 अक्टूबर, 2026 तक ईमेल के जरिए भेज सकते हैं। इसके लिए advbcs2@trai.gov.in और jtadvbcs-3@trai.gov.in ईमेल पते दिए गए हैं। ट्राई ने सुझाव इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से भेजने को प्राथमिकता देने की बात कही है।
सोनी पिक्चर्स नेटवर्क इंडिया (SPNI) ने अपनी 31वीं वर्षगांठ के मौके पर ‘Chapter 31’ की घोषणा की है। कंपनी ने इसे अपने सफर के एक नए अध्याय के तौर पर पेश किया है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
सोनी पिक्चर्स नेटवर्क इंडिया (SPNI) ने अपनी 31वीं वर्षगांठ के मौके पर ‘Chapter 31’ की घोषणा की है। कंपनी ने इसे अपने सफर के एक नए अध्याय के तौर पर पेश किया है। इस नए अध्याय की नींव तीन बातों पर रखी गई है- नया ऑफिस, नया विजन और नए शोज।
कंपनी ने अपनी वर्षगांठ के संदेश में कहा, “एक नया अध्याय शुरू हो रहा है और हम इससे ज्यादा उत्साहित नहीं हो सकते।”
31 साल के सफर की विरासत
SPNI ने कहा कि तीन दशक से ज्यादा समय से वह भारत के मनोरंजन सफर का हिस्सा रहा है। कंपनी के मुताबिक, उसने यादगार कहानियों, लोगों के पसंदीदा शोज और खेलों के यादगार पलों के जरिए लोगों को एक-दूसरे से जोड़ने का काम किया है।
कंपनी की यह बात उसके अब तक के सफर को भी दिखाती है, जिसमें मनोरंजन और खेल, दोनों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
दर्शक जहां गए, कंपनी भी उसी दिशा में
SPNI का नया कदम इस बात को ध्यान में रखते हुए है कि आज दर्शकों के मनोरंजन देखने का तरीका काफी बदल चुका है। दर्शक अब अलग-अलग स्क्रीन, प्लेटफॉर्म और भाषाओं में मनोरंजन कंटेंट देख रहे हैं।
कंपनी ने कहा कि आज जब दर्शक नए स्क्रीन, प्लेटफॉर्म और भाषाओं के जरिए मनोरंजन खोज रहे हैं, तो वह भी उनके साथ खुद को बदल रही है। कंपनी ने आगे कहा, “नए विजन, नई शुरुआत और आगे आने वाले नए अवसरों के साथ हम यह देखने के लिए उत्साहित हैं कि हम मिलकर क्या बना सकते हैं।”
‘Chapter 31’ की तीन बड़ी बातें
SPNI की वर्षगांठ के लिए जारी किए गए क्रिएटिव में Sony Pictures का लोगो और “Happy 31st Anniversary!” लिखा गया है। इसमें ‘Chapter 31’ के तीन मुख्य स्तंभ भी बताए गए हैं।
पहला- नया ऑफिस: इसे “एक नया घर, एक नई शुरुआत” के तौर पर पेश किया गया है।
दूसरा- नया विजन: कंपनी ने अपने नए विजन को “कंटेंट-फर्स्ट, प्लेटफॉर्म एग्नॉस्टिक, मल्टी-लिंगुअल एंटरटेनमेंट” बताया है। यानी कंटेंट सबसे पहले होगा, उसे किसी एक प्लेटफॉर्म तक सीमित नहीं रखा जाएगा और अलग-अलग भाषाओं में दर्शकों तक पहुंचाया जाएगा।
तीसरा- नए शोज: इसके तहत कंपनी ने “नई सोच और यादगार पलों” का वादा किया है।
इस क्रिएटिव के आखिर में उन सभी लोगों का धन्यवाद किया गया है, जिन्होंने SPNI के इस सफर को खास बनाने में योगदान दिया। इसके साथ ही “Here’s to writing the next one together” और “Tell stories beyond the ordinary” जैसे संदेश दिए गए हैं।
एम्प्लॉयीज और दर्शकों को भी धन्यवाद
कंपनी ने अपने लोगों और दर्शकों को भी खास तौर पर धन्यवाद दिया। SPNI ने कहा, “उन सभी लोगों का धन्यवाद, जिन्होंने पिछले 31 वर्षों में SPNI को आकार देने में मदद की और हमारी कहानी का हिस्सा बने।”
कंपनी ने अपने संदेश का अंत “Here’s to Chapter 31 and the many possibilities it holds!” के साथ किया।
क्या है ‘Chapter 31’ के पीछे की सोच?
‘Chapter 31’ में इस्तेमाल किए गए तीन शब्द कंपनी की आगे की रणनीति की दिशा को समझने में मदद करते हैं। ‘Content-first’ का मतलब है कि कहानी और कंटेंट सबसे महत्वपूर्ण होंगे, स्क्रीन या प्लेटफॉर्म बाद में आएगा।
‘Platform agnostic’ का मतलब है कि कहानी को किसी एक प्लेटफॉर्म तक सीमित नहीं रखा जाएगा। दर्शक जिस जगह मौजूद हैं, कंटेंट वहां तक पहुंचने की कोशिश करेगा, चाहे वह टेलीविजन हो या स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म।
वहीं ‘Multi-lingual’ इस बात को दर्शाता है कि भारत के दर्शक एक जैसे नहीं हैं। अलग-अलग हिस्सों में अलग-अलग भाषाओं में मनोरंजन की पसंद है और कंपनी कई भाषाओं में दर्शकों तक पहुंचने की दिशा में आगे बढ़ना चाहती है।
इन तीनों को साथ देखा जाए तो यह संकेत मिलता है कि SPNI खुद को केवल चैनल चलाने वाली कंपनी के तौर पर नहीं, बल्कि एक ऐसे स्टूडियो की तरह आगे बढ़ाना चाहती है, जो अलग-अलग प्लेटफॉर्म और भाषाओं के लिए कंटेंट तैयार करे। मनोरंजन कारोबार भी इसी दिशा में आगे बढ़ रहा है। नया ऑफिस इस बदलाव का एक प्रतीक है, जबकि नए शोज यह साबित करेंगे कि बाजार और दर्शक इस नई दिशा को किस तरह स्वीकार करते हैं।
31 साल का सफर SPNI को एक मजबूत कंटेंट लाइब्रेरी, खेलों से जुड़ा अनुभव और एक स्थापित ब्रैंड देता है। अब ‘Chapter 31’ के जरिए कंपनी की कोशिश यह सुनिश्चित करने की है कि आने वाला दशक भी उसके लिए उतना ही महत्वपूर्ण और मजबूत साबित हो।
भारत में 31 मार्च 2026 तक कुल 919 निजी सैटेलाइट टीवी चैनल थे। यह संख्या 2019-20 में दर्ज 918 चैनलों से सिर्फ एक ज्यादा है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
इमरान फजल, असिटेंट एडिटर, एक्सचेंज4मीडिया ।।
भारत में 31 मार्च 2026 तक कुल 919 निजी सैटेलाइट टीवी चैनल थे। यह संख्या 2019-20 में दर्ज 918 चैनलों से सिर्फ एक ज्यादा है। हालांकि, इस छह साल की अवधि में सरकार ने 170 नए चैनलों को अनुमति दी। यह जानकारी सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की ‘मीडिया एवं मनोरंजन क्षेत्र की सांख्यिकी पुस्तिका 2025-26’ में दी गई है।
पुस्तिका में उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, 919 निजी सैटेलाइट चैनलों की संख्या अब तक की सबसे ज्यादा संख्या है। यह आंकड़ों की श्रृंखला 2004-05 से शुरू होती है। इससे पहले सबसे ज्यादा 918 निजी सैटेलाइट चैनल 2019-20 में दर्ज किए गए थे।
इन आंकड़ों से पता चलता है कि सरकार की ओर से नए चैनलों को लगातार अनुमति दिए जाने के बावजूद कुल चल रहे निजी सैटेलाइट चैनलों की संख्या लगभग एक जैसी बनी हुई है। यानी इस क्षेत्र में लगातार विस्तार के बजाय नए चैनलों के आने और कुछ चैनलों के बाहर होने का सिलसिला ज्यादा दिखाई देता है।
छह साल में चैनलों की संख्या में उतार-चढ़ाव
निजी सैटेलाइट चैनलों की संख्या 2020-21 में घटकर 914 रह गई। इसके बाद 2021-22 में यह और घटकर 898 हो गई। इसके बाद चैनलों की संख्या में धीरे-धीरे सुधार आया। 2022-23 में यह बढ़कर 905, 2023-24 में 912 और फिर 2024-25 में घटकर 908 हो गई। 2025-26 में चैनलों की संख्या में एक बार फिर 11 चैनलों का इजाफा हुआ और यह बढ़कर 919 हो गई।
साल-दर-साल देखें तो 2020-21 में चार चैनल कम हुए, 2021-22 में 16 चैनल घटे। इसके बाद 2022-23 और 2023-24 में सात-सात चैनल बढ़े। 2024-25 में चार चैनल कम हुए और 2025-26 में 11 चैनलों का इजाफा हुआ। इन सभी बदलावों को मिलाकर देखें तो 2019-20 से 2025-26 के बीच निजी सैटेलाइट चैनलों की संख्या में कुल मिलाकर सिर्फ एक चैनल की बढ़ोतरी हुई।
महामारी से पहले भी धीमी हो गई थी रफ्तार
निजी सैटेलाइट चैनलों की संख्या में यह लगभग स्थिर स्थिति सिर्फ कोरोना महामारी के बाद की नहीं है। महामारी से पहले ही चैनलों की संख्या बढ़ने की रफ्तार काफी धीमी हो गई थी।
2004-05 में निजी सैटेलाइट चैनलों की संख्या सिर्फ 130 थी। 2009-10 में यह बढ़कर 505 और 2011-12 में 822 हो गई। इसके बाद बढ़ोतरी की रफ्तार धीमी हो गई। 2012-13 में चैनलों की संख्या 852 और 2013-14 में 859 रही। 2014-15 में यह घटकर 821 हो गई। इसके बाद 2015-16 में बढ़कर 847 और 2016-17 में 899 हो गई।
2016-17 में 899 चैनल होने के बाद अगले नौ साल में इनकी संख्या सिर्फ 20 चैनल, यानी करीब 2.2% बढ़ी है। वहीं, 2011-12 के 822 चैनलों की तुलना में 14 साल में यह बढ़ोतरी 97 चैनलों, यानी करीब 11.8% की रही है।
मीडिया इंडस्ट्री के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि आज के समय में एक लीनियर टीवी चैनल यानी पारंपरिक टीवी चैनल शुरू करना और उसे लगातार चलाते रहना काफी मुश्किल हो गया है। टीवी, डिजिटल और कनेक्टेड टीवी के बीच विज्ञापन से होने वाली कमाई बंट गई है। ऐसे में सवाल सिर्फ लाइसेंस मिलने का नहीं है, बल्कि यह है कि उस चैनल को चलाने के लिए व्यवहारिक कारोबारी मॉडल मौजूद है या नहीं।
2020-21 से छह साल में 170 नए चैनलों को अनुमति
सरकार के सालाना लाइसेंसिंग आंकड़ों से पता चलता है कि नए चैनलों को अनुमति देने का सिलसिला जारी रहा, लेकिन चल रहे चैनलों की कुल संख्या में इसका बहुत ज्यादा असर नहीं पड़ा। 2020-21 में 36, 2021-22 में 34, 2022-23 में 29, 2023-24 में 23, 2024-25 में 19 और 2025-26 में 29 नए चैनलों को अनुमति दी गई। इस तरह छह साल में कुल 170 नए चैनलों को अनुमति मिली।
170 नई अनुमतियों और कुल चैनलों की संख्या में सिर्फ एक चैनल की बढ़ोतरी के बीच का अंतर इस बात की ओर इशारा करता है कि इस दौरान चैनल बेस में काफी बदलाव हुआ। दोनों तालिकाओं के आंकड़ों की गणितीय तुलना के आधार पर 2020-21 में करीब 40, 2021-22 में 50, 2022-23 में 22, 2023-24 में 16, 2024-25 में 23 और 2025-26 में 18 चैनलों के बाहर होने का अंतर बनता है।
हालांकि, मंत्रालय की पुस्तिका में चैनलों के बंद होने, लाइसेंस वापस करने या रद्द होने के आंकड़े अलग से नहीं दिए गए हैं। इसलिए ये संख्या सीधे तौर पर बंद हुए चैनलों की संख्या नहीं मानी जानी चाहिए। ये सिर्फ नए अनुमतियों और कुल चैनल संख्या में हुए बदलाव के बीच का गणितीय अंतर है।
इसके अलावा, किसी साल किसी चैनल को अनुमति मिलने का यह मतलब भी जरूरी नहीं है कि उसी साल वह चैनल वास्तव में चलना शुरू हो गया हो और सरकारी चैनल संख्या में शामिल हो गया हो।
फिर भी सालाना आंकड़ों से अनुमति और कुल चैनलों की संख्या में बदलाव के बीच एक मोटा संबंध दिखाई देता है। उदाहरण के लिए, 2024-25 में नए चैनलों की सबसे कम 19 अनुमतियां दी गईं और उसी साल कुल चैनलों की संख्या चार कम हुई। इसके बाद 2025-26 में नई अनुमतियां बढ़कर 29 हुईं और चैनलों की कुल संख्या में 11 का इजाफा हुआ।
कुल चैनलों में करीब 45% न्यूज और करेंट अफेयर्स चैनल
2025-26 में भारत के कुल 919 निजी सैटेलाइट चैनलों में से 418 चैनल न्यूज और करेंट अफेयर्स से जुड़े थे। वहीं 501 चैनल नॉन-न्यूज कैटेगरी में थे। भारतीय चैनलों की संख्या 882 थी। इनमें 406 न्यूज चैनल और 476 नॉन-न्यूज चैनल शामिल थे। वहीं, विदेशी चैनलों की संख्या 37 थी। इनमें 12 न्यूज और करेंट अफेयर्स चैनल और 25 नॉन-न्यूज चैनल शामिल थे।
मंत्रालय की पुस्तिका के मुताबिक, आज तक को भारत का पहला निजी सैटेलाइट चैनल माना गया है। इसे 4 दिसंबर 2000 को अनुमति मिली थी। सरकार ने 2005 में चैनलों के अपलिंकिंग और डाउनलिंकिंग के लिए दिशानिर्देश जारी किए थे। 2011 में इनमें बदलाव किया गया और इसके बाद 9 नवंबर 2022 को फिर संशोधित दिशानिर्देश जारी किए गए। हालांकि, पुस्तिका में इन नियामकीय बदलावों और निजी सैटेलाइट चैनलों की संख्या में हुए उतार-चढ़ाव के बीच कोई सीधा संबंध स्थापित नहीं किया गया है।
चैनल परमिशन से होने वाली कमाई में भी उतार-चढ़ाव
चैनलों को अनुमति देने से सरकार को मिलने वाली कमाई में भी इस दौरान उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। पुस्तिका के अनुसार, इस कमाई में टेलीपोर्ट की सालाना अनुमति फीस, अस्थायी अपलिंकिंग फीस और अनुमति मिलने के बाद किए गए बदलावों से जुड़ी फीस शामिल है।
2019-20 में यह कमाई 85 करोड़ रुपये थी। 2023-24 में घटकर 75.56 करोड़ रुपये रह गई। इसके बाद 2024-25 में इसमें तेज बढ़ोतरी हुई और यह 105.39 करोड़ रुपये पहुंच गई। 2016-17 से शुरू होने वाली इस आंकड़ा श्रृंखला में यह सबसे ज्यादा रकम थी। 2025-26 में यह कमाई 86.81 करोड़ रुपये रही। हालांकि, मंत्रालय की पुस्तिका में साफ किया गया है कि यह आंकड़ा सिर्फ तीन तिमाहियों का है।
खास बात यह है कि 2024-25 में चैनल परमिशन से कमाई बढ़कर 105.39 करोड़ रुपये हुई, जबकि इसी साल नए चैनलों की अनुमतियां घटकर 19 रह गई थीं और निजी सैटेलाइट चैनलों की कुल संख्या भी चार कम हुई थी।
टेलीविजन डिस्ट्रीब्यूशन से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, चैनलों की संख्या में गिरावट उन हिस्सों में कारोबार के सिमटने और कुछ चैनलों के बाहर होने को दिखाती है, जहां कमाई करना मुश्किल हो गया है। दर्शक तेजी से डिजिटल प्लेटफॉर्म की ओर जा रहे हैं और कंटेंट देखने का तरीका अलग-अलग प्लेटफॉर्म में बंट गया है। ऐसे में छोटे और खास दर्शक वर्ग वाले चैनलों के लिए डिस्ट्रीब्यूशन और विज्ञापन की लागत निकालना मुश्किल होता जा रहा है।
डिजिटल के बढ़ने के बीच टीवी की कमाई में गिरावट
निजी सैटेलाइट चैनलों की यह स्थिति मीडिया बाजार में हो रहे बड़े बदलाव के बीच सामने आई है।
पुस्तिका में दिए गए क्षेत्र के अनुमानों के मुताबिक, जो EY-FICCI की रिपोर्ट्स पर आधारित हैं, टेलीविजन से होने वाली कमाई 2019 में 788 अरब रुपये थी, जो 2025 में घटकर 617 अरब रुपये रह गई। यानी इस अवधि में इसमें करीब 22% की गिरावट आई।
टेलीविजन से होने वाली कमाई 2023 में 711 अरब रुपये, 2024 में 679 अरब रुपये और 2025 में 617 अरब रुपये रही। ये आंकड़े कैलेंडर वर्ष के आधार पर हैं और इनमें टैक्स शामिल हैं। इसलिए इनकी सीधे तुलना वित्त वर्ष के आधार पर दिए गए चैनलों की संख्या से नहीं की जा सकती।
दूसरी ओर, 2025 में डिजिटल मीडिया से होने वाली कमाई 1,110 अरब रुपये तक पहुंच गई। इस तरह आंकड़े बताते हैं कि एक तरफ निजी सैटेलाइट टीवी चैनलों की संख्या लगभग स्थिर बनी हुई है और टेलीविजन बाजार की कुल कमाई में गिरावट आई है, वहीं दूसरी तरफ डिजिटल मीडिया लगातार बढ़ रहा है।
डीटीएच ऑपरेटरों की संख्या भी घटी
टेलीविजन के डिस्ट्रीब्यूशन के क्षेत्र में भी बदलाव देखने को मिला है। मंत्रालय की लाइसेंस फीस वाली तालिका के अनुसार, 2025-26 में चार डीटीएच ऑपरेटर थे। वहीं 2017-18 तक इनकी संख्या छह थी।
सरकारी प्रसारक के फ्री-टू-एयर सैटेलाइट टीवी प्लेटफॉर्म डीडी फ्री डिश पर 31 मार्च 2026 तक खाली स्लॉट में से 108 स्लॉट पर निजी चैनल मौजूद थे। इसके अलावा छह स्लॉट खाली बताए गए हैं। कुल मिलाकर ये आंकड़े दिखाते हैं कि सैटेलाइट टीवी चैनलों के लिए सरकार की ओर से नई अनुमतियां अभी भी जारी हैं, लेकिन इन अनुमतियों की तुलना में वास्तव में चल रहे चैनलों की संख्या में बढ़ोतरी काफी कम है।यानी टीवी चैनल शुरू करने के लिए अनुमति मिलना और उस चैनल को लंबे समय तक कारोबार के तौर पर सफलतापूर्वक चलाना, दोनों अब अलग-अलग चुनौतियां बन चुकी हैं।
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने सभी निजी सैटेलाइट टीवी चैनलों को संसद की कार्यवाही और संसद टीवी की ओर से तैयार या उपलब्ध कराए गए कार्यक्रमों व सामग्री के इस्तेमाल को लेकर एक सलाह जारी की है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने सभी निजी सैटेलाइट टीवी चैनलों को संसद की कार्यवाही और संसद टीवी की ओर से तैयार या उपलब्ध कराए गए कार्यक्रमों व सामग्री के इस्तेमाल को लेकर एक सलाह जारी की है। मंत्रालय ने चैनलों से कहा है कि ऐसी सामग्री प्रसारित करते समय उसके स्रोत के तौर पर ‘Courtesy: Sansad TV’ कैप्शन प्रमुखता से दिखाया जाए।
मंत्रालय ने 7 अक्टूबर को जारी सलाह में कहा कि संसद टीवी राज्यसभा और लोकसभा की कार्यवाही का लाइव और प्राथमिक टेलीविजन कवरेज उपलब्ध कराता है। इसके अलावा संसद और समसामयिक मामलों से जुड़े कई तरह के कार्यक्रम, चर्चाएं, साक्षात्कार, डॉक्यूमेंट्री और दूसरी सामग्री भी तैयार करता है।
सलाह के मुताबिक, संसद टीवी की कार्यवाही और उसके कार्यक्रमों का इस्तेमाल, दोबारा प्रसारण, कुछ हिस्सों का उपयोग और दूसरी सामग्री में शामिल किया जाना विभिन्न निजी सैटेलाइट टीवी चैनलों की ओर से बड़े स्तर पर किया जाता है। हालांकि, मंत्रालय के अनुसार, यह देखा गया है कि चैनल ऐसी फुटेज या सामग्री का इस्तेमाल या साझा करते समय उसके स्रोत का उल्लेख लगातार नहीं करते हैं।
इसी को देखते हुए मंत्रालय ने सभी निजी सैटेलाइट टीवी चैनलों को सलाह दी है कि जब भी वे संसद के किसी भी सदन की कार्यवाही या संसद टीवी की ओर से तैयार या उपलब्ध कराई गई किसी भी सामग्री को प्रसारित, दोबारा इस्तेमाल, साझा या अपनी सामग्री में शामिल करें, तो स्क्रीन पर ‘Courtesy: Sansad TV’ कैप्शन प्रमुखता से दिखाएं।
मंत्रालय ने कहा कि इस तरह एक समान तरीके से स्रोत का उल्लेख करने से टेलीविजन प्लेटफॉर्म्स पर इस्तेमाल की जा रही संसद की फुटेज और कार्यक्रमों के स्रोत को लेकर ज्यादा स्पष्टता आएगी। यह सलाह सक्षम प्राधिकारी की मंजूरी के बाद जारी की गई है।
यह पत्र टीवी चैनलों के 2021 के केबल टेलीविजन (संशोधन) नियमों के तहत पंजीकृत स्व-नियामक निकायों, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से जुड़े संगठनों और निकायों, ब्रॉडकास्ट सेवा पोर्टल तथा सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की वेबसाइट को भी भेजा गया है।
इसकी एक प्रति सूचना के लिए संसद टेलीविजन के संयुक्त सचिव (प्रशासन एवं कार्यक्रम) को भी भेजी गई है।
जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड (ZEEL) ने बताया है कि उसे कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय (MCA) की ओर से एक नोटिस मिला है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड (ZEEL) ने बताया है कि उसे कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय (MCA) की ओर से एक नोटिस मिला है। कंपनी के मुताबिक, यह नोटिस 5 अक्टूबर 2026 को मिला है और इसमें कंपनी से कुछ जानकारियां मांगी गई हैं।
कंपनी ने 6 अक्टूबर को शेयर बाजारों को दी जानकारी में बताया कि यह नोटिस कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 210(1)(a) और (c) के तहत जारी किया गया है। यह कार्रवाई कंपनी के खिलाफ पहले से चल रही कंपनी अधिनियम की धारा 206(5) के तहत निरीक्षण की प्रक्रिया के आगे की कड़ी है।
MCA ने मांगी कंपनी से जानकारी
ZEEL ने बताया कि MCA के ऑफिस ऑफ द रीजनल डायरेक्टर, वेस्टर्न रीजन-II की ओर से यह नोटिस जारी किया गया है। इसमें कंपनी से कुछ जानकारियां उपलब्ध कराने को कहा गया है।
कंपनी के अनुसार, वह मांगी गई जरूरी जानकारी पहले ही उपलब्ध करा चुकी है। इसके अलावा MCA की ओर से आगे जो भी जानकारी या स्पष्टीकरण मांगा जाएगा, कंपनी उसे भी उपलब्ध कराएगी।
क्या है मामले में कंपनी का पक्ष?
कंपनी ने शेयर बाजारों को दी सूचना में कहा है कि यह मामला फिलहाल जानकारी मांगे जाने से संबंधित है। कंपनी द्वारा दिए गए खुलासे में किसी खास उल्लंघन या गलती का आरोप अलग से नहीं बताया गया है। रेग्युलेशन 30 के तहत दिए गए विवरण में 'Details of the violation(s)/contravention(s) committed or alleged to be committed' के सामने 'Calling for information' लिखा गया है।
वित्तीय असर नहीं बताया गया
ZEEL ने यह भी स्पष्ट किया है कि इस कार्रवाई का कंपनी की वित्तीय स्थिति, कामकाज या अन्य गतिविधियों पर कोई ऐसा प्रभाव नहीं है जिसे फिलहाल रुपये में मापा जा सके। कंपनी ने इस कॉलम में 'Not Applicable' लिखा है।
यह नोटिस मिनिस्ट्री ऑफ कॉरपोरेट अफेयर्स के ऑफिस ऑफ द रीजनल डायरेक्टर, वेस्टर्न रीजन-II, मुंबई की ओर से जारी किया गया है। कंपनी ने कहा है कि वह मामले में मांगी गई जानकारी और स्पष्टीकरण उपलब्ध कराती रहेगी।
प्रसार भारती ने डीडी फ्री डिश (DD Free Dish) और सार्वजनिक प्रसारक के दूसरे प्लेटफॉर्म पर स्लॉट की ई-नीलामी कराने के लिए एक एजेंसी नियुक्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
प्रसार भारती ने डीडी फ्री डिश (DD Free Dish) और सार्वजनिक प्रसारक के दूसरे प्लेटफॉर्म पर स्लॉट की ई-नीलामी कराने के लिए एक एजेंसी नियुक्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसके लिए प्रसार भारती ने बोलियां आमंत्रित की हैं। यह कदम डीडी फ्री डिश पर चैनल क्षमता के अगले चरण के आवंटन की तैयारियों का संकेत देता है।
दूरदर्शन की ओर से 1 अक्टूबर को जारी नोटिस के मुताबिक, प्रसार भारती इस काम के लिए भारतीय एजेंसी की तलाश कर रहा है। टेंडर की अनुमानित कीमत 32 लाख रुपये, टैक्स समेत रखी गई है। बोलियां 22 अक्टूबर को दोपहर 1 बजे खोली जाएंगी। वहीं, अर्नेस्ट मनी डिपॉजिट (ईएमडी) यानी बोली के साथ जमा की जाने वाली सुरक्षा राशि 64,000 रुपये तय की गई है।
DD Free Dish के साथ दूसरे प्लेटफॉर्म भी शामिल
चुनी गई एजेंसी की जिम्मेदारी सिर्फ डीडी फ्री डिश तक सीमित नहीं होगी। एजेंसी को डीडी फ्री डिश के साथ-साथ प्रसार भारती के दूसरे प्लेटफॉर्म पर स्लॉट की ई-नीलामी भी करानी होगी। टेंडर को लेकर इच्छुक बोलीदाताओं के सवालों और स्पष्टीकरण के लिए 8 अक्टूबर को दोपहर 3 बजे प्री-बिड मीटिंग रखी गई है। यह बैठक नई दिल्ली स्थित दूरदर्शन भवन में होगी।
अगली नीलामी में कितने स्लॉट होंगे, जानकारी नहीं
डीडी फ्री डिश भारत में टीवी प्रसारकों के लिए एक अहम वितरण प्लेटफॉर्म बना हुआ है। यह प्लेटफॉर्म बिना पारंपरिक सब्सक्रिप्शन फीस के बड़ी संख्या में दर्शकों तक पहुंच उपलब्ध कराता है।
हालांकि, इस टेंडर दस्तावेज में यह नहीं बताया गया है कि प्रस्तावित अनुबंध के तहत कितने स्लॉट की नीलामी की जाएगी। साथ ही, अगली नीलामी का पूरा चक्र कब और कैसे होगा, इसकी जानकारी भी इसमें नहीं दी गई है।
तकनीकी और वित्तीय बोली देनी होगी
एजेंसी का चयन दो-बोली प्रणाली के जरिए होगा। इसमें तकनीकी बोली और वित्तीय बोली शामिल होगी। दोनों बोलियां डिजिटल तरीके से प्रसार भारती के ई-प्रोक्योरमेंट पोर्टल के जरिए जमा करनी होंगी। जो बोलीदाता तकनीकी योग्यता की शर्तें पूरी करेंगे, केवल उन्हीं की वित्तीय बोलियां खोली जाएंगी।
ई-टेंडरिंग पोर्टल पर पंजीकरण जरूरी
प्रसार भारती ने बोलीदाताओं के लिए ई-टेंडरिंग पोर्टल पर पंजीकरण और क्लास-III डिजिटल सिग्नेचर सर्टिफिकेट होना जरूरी किया है।
पोर्टल पर सालाना पंजीकरण शुल्क 450 रुपये और जीएसटी है। वहीं, 10 लाख से 50 लाख रुपये के बीच कीमत वाले टेंडर के लिए टेंडर प्रोसेसिंग फीस 925 रुपये और जीएसटी है। जीएसटी मिलाकर यह रकम 1,091.50 रुपये होती है।
सफल एजेंसी को देनी होगी परफॉर्मेंस सिक्योरिटी
टेंडर जीतने वाली एजेंसी को अनुबंध की कीमत के 3 फीसदी के बराबर परफॉर्मेंस सिक्योरिटी डिपॉजिट जमा करना होगा। यह राशि अनुबंध दिए जाने के 30 दिनों के भीतर जमा करनी होगी।
यह टेंडर केवल भारतीय बोलीदाताओं के लिए रखा गया है। प्रसार भारती ने बताया है कि इस पर ग्लोबल टेंडर से जुड़ी सामान्य वित्तीय नियमों (GFR) की लागू व्यवस्थाओं के मुताबिक शर्तें लागू होंगी। साथ ही, सरकार की मेक इन इंडिया खरीद नीति भी इस टेंडर पर लागू होगी।
गलत जानकारी देने पर कार्रवाई संभव
प्रसार भारती ने अपने पास किसी भी या सभी आवेदनों को बिना कारण बताए स्वीकार या खारिज करने का अधिकार रखा है। वह किसी भी चरण में टेंडर प्रक्रिया को रद्द भी कर सकता है।
प्रसार भारती बोलीदाताओं की ओर से जमा किए गए दस्तावेज और उनकी योग्यता की जांच अनुबंध दिए जाने से पहले या बाद में भी कर सकता है।