चिंतन जोशी बने अमागी में हेड ऑफ रेवेन्यू ऑपरेशंस-ऐड्स बिजनेस

अमागी ने चिंतन जोशी को हेड ऑफ रेवेन्यू ऑपरेशंस-ऐड्स बिजनेस नियुक्त किया है। इससे पहले वह इनमोबी एक्सचेंज में सीनियर मैनेजर-रेवेन्यू ऑपरेशंस थे और करीब पांच वर्षों तक इनमोबी से जुड़े रहे।

Last Modified:
Friday, 23 October, 2026
amagi


अमागी (Amagi) ने चिंतन जोशी (Chintan Joshi) को हेड ऑफ रेवेन्यू ऑपरेशंस-ऐड्स बिजनेस के पद पर नियुक्त किया है। जोशी ने लिंक्डइन (LinkedIn) पर पोस्ट साझा कर अपनी नई जिम्मेदारी की जानकारी दी।

जोशी ने अपनी पोस्ट में लिखा, “मुझे यह बताते हुए खुशी हो रही है कि मैंने अमागी में हेड ऑफ रेवेन्यू ऑपरेशंस-ऐड्स बिजनेस के तौर पर नई जिम्मेदारी संभाली है।”

अमागी से पहले जोशी इनमोबी (InMobi) से जुड़े हुए थे। यहां वह इनमोबी एक्सचेंज में सीनियर मैनेजर-रेवेन्यू ऑपरेशंस के पद पर काम कर रहे थे। वह करीब पांच वर्षों तक इनमोबी से जुड़े रहे।

अपने करियर में जोशी इंफोसिस (Infosys) और यस प्रॉपर्टी (Yes Property) के साथ भी काम कर चुके हैं।

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रेनी किशोर बनीं डब्ल्यूपीपी मीडिया में सीनियर वाइस प्रेसिडेंट

रेनी किशोर तिलकनगर इंडस्ट्रीज के अल्कोहलिक बेवरेज पोर्टफोलियो, मीडिया रणनीति और ब्रांड समाधान का नेतृत्व करेंगी।

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Friday, 23 October, 2026
wpp media

रेनी किशोर (Reni Kishore) ने डब्ल्यूपीपी मीडिया (WPP Media) में सीनियर वाइस प्रेसिडेंट-क्लाइंट सॉल्यूशंस के रूप में नई जिम्मेदारी संभाली है। वह मई से इस भूमिका में काम कर रही हैं और हाल ही में लिंक्डइन (LinkedIn) पर अपनी नई जिम्मेदारी की जानकारी साझा की।

नई भूमिका में रेनी भारत में तिलकनगर इंडस्ट्रीज (Tilaknagar Industries) के अल्कोहलिक बेवरेज पोर्टफोलियो का नेतृत्व करेंगी। इसमें इंपीरियल ब्लू (Imperial Blue), सेवन आइलैंड्स व्हिस्की (Seven Islands Whiskey) और मैंशन हाउस (Mansion House) जैसे ब्रांड शामिल हैं। उनकी जिम्मेदारियों में मीडिया रणनीति, ब्रांड समाधान, प्रचार साझेदारियां और रणनीतिक कारोबार विकास शामिल होगा।

इससे पहले रेनी डब्ल्यूपीपी मीडिया में सहायक उपाध्यक्ष-रणनीति एवं साझेदारी के रूप में काम कर रही थीं। इससे पहले उन्होंने एसेंसमी़डियाकॉम इंडिया (EssenceMediacom India) में तीन वर्षों से अधिक समय तक काम किया।

रेनी को बी2सी और बी2बी मार्केटिंग में 15 वर्षों का अनुभव है। उन्हें डिजिटल रणनीति, ब्रांड निर्माण, कंटेंट मार्केटिंग, मार्केटिंग कम्युनिकेशन और पार्टनर मैनेजमेंट में विशेषज्ञता हासिल है। उन्होंने भारत के अलावा एशिया-प्रशांत और अमेरिका के बाजारों में भी काम किया है।

अपने करियर में रेनी मीडिया कॉम (MediaCom), ग्रुपएम (GroupM), रेकिट बेनकाइजर (Reckitt Benckiser), इंटरग्लोब टेक्नोलॉजीज (InterGlobe Technologies) और वीडोपिया (Vdopia) जैसी कंपनियों के साथ भी काम कर चुकी हैं।

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मैरिको के लिए डिजिटल प्लानिंग संभालेंगे आशीष वानखड़े

आशीष वानखड़े पीएचडी में ग्रुप हेड-डिजिटल प्लानिंग के रूप में शामिल हुए हैं। वह मैरिको के लिए डिजिटल प्लानिंग संभालेंगे। इससे पहले वह डब्ल्यूपीपी मीडिया और अन्य मीडिया एजेंसियों से जुड़े थे।

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Friday, 23 October, 2026
marico

आशीष वानखड़े (Ashish Wankhade) पीएचडी (PHD) में ग्रुप हेड-डिजिटल प्लानिंग के रूप में शामिल हुए हैं। उन्हें मैरिको (Marico) के लिए डिजिटल प्लानिंग की जिम्मेदारी दी गई है।

पीएचडी में शामिल होने से पहले वह डब्ल्यूपीपी मीडिया (WPP Media) में मीडिया प्लानिंग मैनेजर के तौर पर एक साल से कुछ अधिक समय तक काम कर चुके हैं।

वानखड़े ग्रुपएम नेक्सस (GroupM Nexus) और मैडिसन वर्ल्ड (Madison World) के साथ भी काम कर चुके हैं।

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इंडिया टुडे ग्रुप को बाय बोलकर अविनाश सिंह ने जॉइन किया NDTV

अविनाश सिंह इंडिया टुडे ग्रुप (India Today Group) में मैनेजर–मार्केटिंग (ऑनलाइन रेपुटेशन मैनेजमेंट एवं रेपुटेशन स्ट्रैटेजी) के पद पर कार्यरत थे।

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Friday, 23 October, 2026
Avinash Singh

मीडिया प्रोफेशनल अविनाश सिंह अब मीडिया नेटवर्क NDTV से जुड़ गए हैं। अविनाश सिंह को स्ट्रैटेजिक कम्युनिकेशंस, ऑनलाइन रेपुटेशन मैनेजमेंट और डिजिटल नैरेटिव बिल्डिंग में करीब एक दशक का अनुभव है।

NDTV से जुड़ने से पहले वह इंडिया टुडे ग्रुप (India Today Group) में मैनेजर–मार्केटिंग (ऑनलाइन रेपुटेशन मैनेजमेंट एवं रेपुटेशन स्ट्रैटेजी) के पद पर कार्यरत थे। यहां अपने तीन साल से अधिक के सफर में उन्होंने आजतक (AajTak), इंडिया टुडे (India Today) और नेटवर्क के अन्य ब्रैंड्स की रेपुटेशन और इमेज बिल्डिंग से जुड़ी पहलों में अहम भूमिका निभाई।

उनकी जिम्मेदारियों में डिजिटल प्लेटफॉर्म पर गलत सूचनाओं का मुकाबला करने, लोगों की प्रतिक्रिया को समझने और संवेदनशील न्यूज घटनाक्रमों के दौरान ब्रैंड की छवि को संभालने के लिए स्ट्रैटेजी तैयार करना शामिल था।

समाचार4मीडिया से बातचीत में अविनाश सिंह ने बताया कि इंडिया टुडे ग्रुप में उन्होंने ऐसे कैंपेन तैयार करने में भी योगदान दिया, जिनके जरिए लोगों के बीच कम्युनिकेशंस को बढ़ावा मिला और ब्रैंड्स की विजिबिलिटी, प्रासंगिकता तथा ऑडियंस एंगेजमेंट को मजबूत करने में मदद मिली।

इंडिया टुडे ग्रुप से पहले अविनाश सिंह ने नेशन विद नमो (Nation with NaMo) में डिजिटल स्ट्रैटेजी और नैरेटिव ऑपरेशंस के कैंपेन मैनेजर के रूप में काम किया। जनवरी 2019 से मई 2023 तक इस भूमिका में रहते हुए उन्होंने विभिन्न क्षेत्रों में जनधारणा को प्रभावित करने के लिए डिजिटल पीआर और नैरेटिव स्ट्रैटेजी पर काम किया। उन्होंने ऑडियंस के व्यवहार और क्षेत्रीय जरूरतों के अनुरूप डेटा आधारित कम्युनिकेशन स्ट्रैटेजी तैयार करने तथा बड़े स्तर पर कंटेंट प्रसार के लिए नेटवर्क विकसित करने में भी भूमिका निभाई।

इससे पहले वह इंडियन चैंबर ऑफ फूड एंड एग्रीकल्चर (Indian Chamber of Food and Agriculture) में असिस्टेंट मैनेजर–मार्केटिंग कम्युनिकेशंस और अरुकस मीडिया प्राइवेट लिमिटेड (Arrucus Media Private Limited) में मार्केटिंग एग्जिक्यूटिव के रूप में काम कर चुके हैं।

अविनाश सिंह ने गुरु जम्भेश्वर विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन एवं मीडिया स्टडीज में मास्टर डिग्री हासिल की है। इसके अलावा, उन्होंने एनबीए ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस से मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा भी किया है।

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सिनेमाघरों के बाद JioHotstar पर दर्शकों को अलग से खरीदनी होगी ‘रामायण: पार्ट वन’ फिल्म

JioHotstar और Prime Focus Studios ने फिल्म ‘रामायण: पार्ट वन’ को भारत में पे-पर-व्यू मॉडल के तहत उपलब्ध कराने के लिए साझेदारी की है।

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Friday, 23 October, 2026
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नितेश तिवारी के निर्देशन में बन रही फिल्म ‘रामायण: पार्ट वन’ अब सिनेमाघरों के बाद डिजिटल मंच पर भी दर्शकों तक पहुंचेगी। JioHotstar और Prime Focus Studios ने इस फिल्म को भारत में पे-पर-व्यू मॉडल के तहत उपलब्ध कराने के लिए साझेदारी की है। इसके तहत दर्शक सिनेमाघरों में फिल्म की विशेष रिलीज के बाद JioHotstar पर इसे अलग से पैसे देकर देख सकेंगे।

फिल्म की दुनियाभर के सिनेमाघरों में रिलीज 5 नवंबर 2026 को दिवाली के मौके पर तय की गई है। इसे हिंदी, तमिल, तेलुगु, कन्नड़, मलयालम और अंग्रेजी भाषाओं में रिलीज किया जाएगा। फिल्म को IMAX 3D में भी दिखाया जाएगा।

सब्सक्रिप्शन से अलग होगी फिल्म देखने की सुविधा

JioHotstar पर फिल्म पे-पर-व्यू मॉडल के तहत उपलब्ध होगी। यानी दर्शकों को इसे देखने के लिए अपने सामान्य सब्सक्रिप्शन के अलावा अलग से भुगतान करना होगा। यह सुविधा सामान्य ओटीटी रिलीज से अलग है, जहां कई फिल्में सब्सक्रिप्शन के साथ ही देखी जा सकती हैं।

हालांकि, अभी यह नहीं बताया गया है कि फिल्म को डिजिटल मंच पर देखने के लिए कितनी कीमत चुकानी होगी। इसकी डिजिटल रिलीज की तारीख और सिनेमाघरों में विशेष प्रदर्शन की अवधि का भी खुलासा नहीं किया गया है। कंपनी ने फिलहाल इतना बताया है कि सिनेमाघरों में विशेष प्रदर्शन के बाद फिल्म भारत में JioHotstar पर अलग से खरीदकर देखी जा सकेगी।

बड़े पर्दे के बाद घरों तक पहुंचेगी ‘रामायण’

JioStar की चेयरपर्सन नीता एम. अंबानी ने कहा कि रामायण भारतीय संस्कृति की ऐसी विरासत है, जिसने कई पीढ़ियों को प्रभावित किया है। उनके मुताबिक, तकनीक की मदद से इस कहानी और इसके मूल्यों को अधिक लोगों तक पहुंचाया जा सकता है। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह साझेदारी देशभर के परिवारों और नई पीढ़ी को कर्तव्य, प्रेम, साहस और अच्छाई जैसे मूल्यों से जुड़ने का मौका देगी।

फिल्म के निर्माता नमित मल्होत्रा ने कहा कि ‘रामायण’ को बड़े पर्दे पर, खासकर IMAX 3D में देखना फिल्म की परिकल्पना का अहम हिस्सा है। हालांकि, देश में सिनेमाघरों की पहुंच हर दर्शक तक नहीं है। ऐसे में JioHotstar के जरिए फिल्म को सिनेमाघरों के प्रदर्शन के बाद भारतीय घरों तक पहुंचाने का रास्ता मिलेगा।

रणबीर कपूर राम, यश रावण की भूमिका में

‘रामायण’ को दो हिस्सों में बनने वाली लाइव-एक्शन फिल्म के रूप में तैयार किया जा रहा है। इसका निर्माण Prime Focus Studios ने आठ बार ऑस्कर जीत चुके प्रोडक्शन और विजुअल इफेक्ट्स स्टूडियो DNEG तथा यश की Monster Mind Creations के साथ मिलकर किया है।

फिल्म का निर्देशन नितेश तिवारी ने किया है, जबकि इसकी पटकथा श्रीधर राघवन ने वाल्मीकि की रामायण पर आधारित होकर तैयार की है। फिल्म में रणबीर कपूर भगवान राम, साई पल्लवी सीता, यश रावण, सनी देओल हनुमान और रवि दुबे लक्ष्मण की भूमिका में नजर आएंगे।

फिल्म के अन्य कलाकारों में अरुण गोविल, लारा दत्ता, रकुल प्रीत सिंह, विवेक ओबेरॉय, कुणाल कपूर और काजल अग्रवाल भी शामिल हैं। इसके संगीत से ऑस्कर विजेता संगीतकार हंस जिमर और ए. आर. रहमान जुड़े हैं। फिल्म के प्रोडक्शन डिजाइन की जिम्मेदारी रवि बंसल और रैमसे एवरी ने संभाली है, जबकि एक्शन दृश्यों पर टेरी नोटरी और गाइ नॉरिस ने काम किया है।

डिजिटल मंचों पर कमाई का नया तरीका

JioHotstar और Prime Focus Studios की यह साझेदारी बड़े बजट की फिल्मों को सिनेमाघरों के बाद डिजिटल मंच पर अलग से खरीदकर देखने का विकल्प उपलब्ध कराने की दिशा में एक कदम है। इससे उन दर्शकों तक भी फिल्म पहुंच सकती है, जिनके लिए सिनेमाघर में इसे देखना आसान नहीं है। साथ ही, फिल्म की शुरुआती सिनेमाघर रिलीज को भी प्राथमिकता दी जाएगी।

फिलहाल फिल्म की डिजिटल रिलीज की तारीख, पे-पर-व्यू की कीमत और सिनेमाघरों में विशेष प्रदर्शन की अवधि से जुड़ी जानकारी सामने नहीं आई है। यह भी स्पष्ट नहीं किया गया है कि भारत के बाहर के दर्शकों के लिए इसी तरह की व्यवस्था होगी या नहीं।

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SEBI की निवेशकों को चेतावनी, वॉट्सऐप ग्रुप में शेयर टिप्स देने वालों से रहें सावधान

भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने निवेशकों को केवल आमंत्रण के जरिए जुड़ने वाले वॉट्सऐप ग्रुप्स में शेयर खरीदने-बेचने की सलाह देने वालों से सावधान रहने को कहा है।

Last Modified:
Friday, 23 October, 2026
SEBI515

भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने निवेशकों को केवल आमंत्रण के जरिए जुड़ने वाले वॉट्सऐप ग्रुप्स में शेयर खरीदने-बेचने की सलाह देने वालों से सावधान रहने को कहा है। बाजार नियामक के मुताबिक, कुछ अपंजीकृत लोग खुद को शेयर बाजार का विशेषज्ञ बताकर ऐसे ग्रुप्स के जरिए निवेशकों को शेयरों से जुड़ी टिप्स और ट्रेडिंग कॉल दे रहे हैं। इनका मकसद निवेशकों को गुमराह कर अपने जाल में फंसाना हो सकता है।

SEBI ने 22 अक्टूबर 2026 को जारी प्रेस विज्ञप्ति में बताया कि ऐसे ग्रुप्स के संचालक अक्सर विदेशी वॉट्सऐप नंबरों का इस्तेमाल करते हैं। वे निवेशकों को मुफ्त निवेश शिक्षा देने के नाम पर शेयर खरीदने और बेचने की अनधिकृत सलाह देते हैं।

फर्जी मुनाफे के दावों से निवेशकों को फंसाने की कोशिश

SEBI के अनुसार, इन ग्रुप्स में कुछ सदस्य संचालकों के साथ मिलकर काम करते हैं। वे शेयरों में मुनाफा कमाने के झूठे दावे करते हैं और कथित विशेषज्ञ की तारीफ करते हैं, ताकि दूसरे लोगों को लगे कि उसकी सलाह भरोसेमंद है। इस तरीके को ‘एस्ट्रोटर्फिंग’ (Astroturfing) कहा जाता है। इसके जरिए निवेशकों के सामने समर्थन और सफलता की झूठी तस्वीर पेश की जाती है, जिससे वे बिना जांच-पड़ताल के निवेश से जुड़े फैसले ले सकते हैं।

ग्रुप बंद होने पर नए वॉट्सऐप ग्रुप में जुड़ने का न्योता

SEBI ने बताया कि जब ऐसे किसी फर्जी ग्रुप पर नियामक या दूसरी संबंधित एजेंसियों की कार्रवाई होती है और उसे बंद कर दिया जाता है, तो उसके सदस्यों को अक्सर किसी नए नंबर से दूसरे ग्रुप में जुड़ने का संदेश भेजा जाता है।

इन संदेशों में दावा किया जाता है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के सुरक्षा उपायों के कारण पुराना ग्रुप बंद हो गया है और नया ग्रुप रोजाना बेहतर शेयरों की जानकारी और ट्रेडिंग से जुड़ी सलाह देगा। SEBI ने ऐसे संदेशों को खतरे का संकेत बताते हुए निवेशकों को सतर्क रहने की सलाह दी है।

निवेशकों को SEBI की सलाह

SEBI ने निवेशकों से कहा है कि वे अनजान लोगों या खुद को शेयर बाजार का विशेषज्ञ बताने वालों के ऐसे वॉट्सऐप ग्रुप्स से दूर रहें। खासकर विदेशी नंबरों से चलाए जा रहे ग्रुप्स में दी जाने वाली शेयरों की सलाह पर भरोसा न करें।

नियामक ने यह भी कहा है कि ग्रुप में दूसरे सदस्यों की ओर से किए गए मुनाफे के दावों, तारीफों और ट्रेडिंग से जुड़े संदेशों से प्रभावित न हों। ऐसे संदेश जानबूझकर डाले जा सकते हैं, ताकि निवेशकों को ग्रुप की सलाह सही लगे।

अगर किसी ग्रुप के बंद या प्रतिबंधित होने का संदेश मिले और उसके बाद किसी नए ग्रुप में जुड़ने के लिए कहा जाए, तो इसे खतरे का संकेत मानते हुए ऐसे ग्रुप से बाहर निकल जाना चाहिए।

अनजान ट्रेडिंग ऐप पर न खोलें खाता, न भेजें पैसे

SEBI ने निवेशकों को ऐसे वॉट्सऐप ग्रुप्स में सुझाए गए ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म या ऐप पर खाता खोलने और पैसे ट्रांसफर करने से भी मना किया है। निवेशकों को अपनी शेयर होल्डिंग या ट्रेडिंग खाते से जुड़ी जानकारी भी ऐसे लोगों के साथ साझा नहीं करनी चाहिए।

नियामक ने सलाह दी है कि निवेशक केवल SEBI में पंजीकृत मध्यस्थों के साथ ही काम करें और उनके आधिकारिक ट्रेडिंग ऐप का इस्तेमाल करें।

निवेशक किसी संस्था के पंजीकरण की स्थिति SEBI की आधिकारिक वेबसाइट पर यहां जांच सकते हैं। वहीं, SEBI में पंजीकृत मध्यस्थों के ट्रेडिंग ऐप की जानकारी के लिए निवेशक सहायता पोर्टल पर जा सकते हैं।

SEBI ने इस प्रेस विज्ञप्ति के जरिए निवेशकों को फर्जी वॉट्सऐप ग्रुप्स में शेयर टिप्स और ट्रेडिंग कॉल के आधार पर फैसले लेने से बचने और शेयर बाजार में निवेश करते समय सतर्क रहने की अपील की है। 

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Amagi Media Labs को डेटा लीक की धमकी, कंपनी ने शुरू की साइबर सुरक्षा जांच

मीडिया टेक्नोलॉजी कंपनी Amagi Media Labs ने अपने कुछ सिस्टम से जुड़े संचालन और नेटवर्क कॉन्फिगरेशन डेटा हासिल करने का दावा करने वाले एक व्यक्ति की धमकी के बाद जांच शुरू कर दी है।

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Friday, 23 October, 2026
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मीडिया टेक्नोलॉजी कंपनी Amagi Media Labs ने अपने कुछ सिस्टम से जुड़े संचालन और नेटवर्क कॉन्फिगरेशन डेटा हासिल करने का दावा करने वाले एक व्यक्ति की धमकी के बाद जांच शुरू कर दी है। कंपनी के मुताबिक, धमकी देने वाले ने डेटा सार्वजनिक करने की बात कही है और इसके बदले पैसे की मांग की है।

कंपनी ने 22 अक्टूबर को शेयर बाजारों को दी जानकारी में बताया कि उसे जबरन वसूली की कोशिश के बारे में पता चला है। फिलहाल वह धमकी देने वाले के दावे और उसके साझा किए गए डेटा के सैंपल्स की जांच कर रही है।

साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों की मदद से जांच

Amagi Media Labs ने बताया कि मामले की जांच के लिए बाहरी साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों और कानूनी सलाहकारों की मदद ली जा रही है। जांच का मकसद यह पता लगाना है कि कंपनी के कौन-से सिस्टम और किस तरह का डेटा इस मामले से जुड़ा हो सकता है। साथ ही, यह भी पता लगाया जा रहा है कि क्या इससे किसी ग्राहक पर असर पड़ा है। कंपनी ने संबंधित अधिकारियों को भी इसकी जानकारी दे दी है।

सेवाओं पर असर नहीं, वित्तीय नुकसान की आशंका नहीं

कंपनी के अनुसार, अब तक की जांच में उसकी सेवाओं में किसी तरह की रुकावट सामने नहीं आई है। साथ ही, ग्राहकों के कामकाज पर असर पड़ने का भी कोई सबूत नहीं मिला है।

Amagi Media Labs ने एहतियात के तौर पर सुरक्षा के अतिरिक्त उपाय किए हैं। कंपनी ने यह भी कहा कि फिलहाल उसे इस मामले से किसी बड़े वित्तीय असर की आशंका नहीं है। जांच में कोई महत्वपूर्ण जानकारी सामने आने पर कंपनी शेयर बाजारों को इसकी जानकारी देगी। 

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बिबाबसु कुमार बने अडानी नवभारत डेवलपर्स के उपाध्यक्ष और संचार प्रमुख

बिबाबसु कुमार को अडानी नवभारत डेवलपर्स में उपाध्यक्ष और मीडिया एवं कॉरपोरेट संचार प्रमुख बनाया गया है। वह दो वर्षों से अधिक समय से कंपनी से जुड़े हैं और नई जिम्मेदारी संभालेंगे।

Last Modified:
Thursday, 22 October, 2026
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बिबाबसु कुमार को अडानी नवभारत डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड (Adani Navbharat Developers Private Limited) में उपाध्यक्ष और मीडिया एवं कॉरपोरेट संचार प्रमुख बनाया गया है। वह दो वर्षों से अधिक समय से कंपनी से जुड़े हुए हैं।

इससे पहले कुमार कंपनी में महाप्रबंधक और मीडिया एवं कॉरपोरेट संचार प्रमुख की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। पदोन्नति के बाद वह संगठन के मीडिया और कॉरपोरेट संचार से जुड़े काम का नेतृत्व जारी रखेंगे।

नई जिम्मेदारी की जानकारी साझा करते हुए कुमार ने कहा, “मुझे यह बताते हुए खुशी हो रही है कि मैंने अडानी नवभारत डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड में उपाध्यक्ष और मीडिया एवं कॉरपोरेट संचार प्रमुख के रूप में नई जिम्मेदारी संभाली है।”

अडानी नवभारत डेवलपर्स से जुड़ने से पहले कुमार ने मीडिया और कॉरपोरेट संचार के क्षेत्र में काम किया है। उनका अनुभव मीडिया संबंधों और रणनीतिक संचार से जुड़े काम पर केंद्रित रहा है।

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जन्मदिन विशेष: अमित शाह ने कैसे बदला चुनावी प्रचार और राजनीतिक मार्केटिंग का अंदाज?

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह आज अपना 62वां जन्मदिन मना रहे हैं। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के प्रमुख रणनीतिकार के रूप में उनकी पहचान लंबे समय से चर्चा में रही है।

Last Modified:
Thursday, 22 October, 2026
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केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह आज अपना 62वां जन्मदिन मना रहे हैं। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के प्रमुख रणनीतिकार के रूप में उनकी पहचान लंबे समय से चर्चा में रही है। राजनीतिक विश्लेषक उन्हें अक्सर भाजपा के आधुनिक दौर का ‘चाणक्य’ कहते हैं। हालांकि, विज्ञापन और संचार जगत के नजरिए से उनकी चुनावी रणनीति का एक अहम पहलू यह भी है कि उन्होंने भारत में राजनीतिक प्रचार के तरीके को किस तरह बदला। उनकी रणनीति में बड़े स्तर पर प्रचार करने के साथ-साथ अलग-अलग क्षेत्रों और मतदाता समूहों तक सीधे पहुंचने पर भी जोर रहा है।

अमित शाह की चुनावी रणनीति ने राजनीतिक प्रचार में आंकड़ों, सोशल मीडिया, जमीनी नेटवर्क और मतदाताओं से सीधे संपर्क की भूमिका को प्रमुख बनाया। इस मॉडल में केवल रैलियों, पोस्टरों और टीवी विज्ञापनों के जरिए संदेश पहुंचाना ही काफी नहीं था, बल्कि बूथ स्तर तक कार्यकर्ताओं का नेटवर्क तैयार करना और स्थानीय जरूरतों के हिसाब से प्रचार करना भी महत्वपूर्ण रहा।

प्रधानमंत्री के प्रमुख रणनीतिकार

भाजपा के संगठनात्मक विस्तार में अमित शाह की भूमिका को पार्टी के प्रमुख नेताओं ने भी सराहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले साल राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) की संसदीय दल की बैठक में शाह के लंबे कार्यकाल और उनके योगदान की प्रशंसा की थी। अमित शाह ने 30 मई 2019 को प्रधानमंत्री मोदी के दूसरे कार्यकाल के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री का पद संभाला था।

राजनीतिक स्तर पर भाजपा के विस्तार के पीछे संगठन को मजबूत करने और अलग-अलग क्षेत्रों में पार्टी की पहुंच बढ़ाने की रणनीति को अहम माना जाता है। इस रणनीति में राष्ट्रीय स्तर के संदेश को स्थानीय मुद्दों और मतदाताओं की जरूरतों के साथ जोड़ने पर जोर दिया गया।

विज्ञापन जगत की भाषा में देखें तो यह तरीका किसी बड़े ब्रांड की मार्केटिंग रणनीति से मिलता-जुलता है। किसी ब्रांड को अलग-अलग बाजारों में अपनी पहचान बनाने के लिए स्थानीय लोगों की पसंद और जरूरतों को समझना पड़ता है। इसी तरह चुनावी प्रचार में भी अलग-अलग राज्यों और क्षेत्रों के हिसाब से संदेश तैयार करना अहम होता है।

बूथ स्तर तक पहुंच और माइक्रो-टारगेटिंग

अमित शाह की चुनावी रणनीति का एक प्रमुख पहलू बूथ स्तर पर संगठन को मजबूत करना रहा है। 2014 और 2019 के लोकसभा चुनावों में, खासकर उत्तर प्रदेश जैसे महत्वपूर्ण राज्य में, भाजपा ने जमीनी कार्यकर्ताओं और सोशल मीडिया नेटवर्क के जरिए मतदाताओं तक पहुंच बनाने पर जोर दिया।

इस रणनीति का मकसद केवल बड़े मंचों से भाषण देना नहीं था, बल्कि मतदान केंद्रों के स्तर तक पार्टी का संदेश पहुंचाना था। बूथ स्तर पर कार्यकर्ताओं की जिम्मेदारी तय करने से पार्टी को स्थानीय मुद्दों पर संवाद करने और मतदाताओं से लगातार संपर्क बनाए रखने में मदद मिली।

सोशल मीडिया और व्हाट्सऐप जैसे माध्यमों ने इस संपर्क को और आसान बनाया। इनके जरिए पार्टी समर्थकों और कार्यकर्ताओं तक संदेश पहुंचाना संभव हुआ। हालांकि, अलग-अलग बूथों पर तैनात लोगों और डिजिटल नेटवर्क से जुड़े आंकड़ों को स्वतंत्र रूप से सत्यापित किए बिना निश्चित संख्या के रूप में पेश करना उचित नहीं होगा।

मार्केटिंग के नजरिए से इस तरह की रणनीति को माइक्रो-टारगेटिंग से जोड़कर देखा जा सकता है। इसमें एक ही संदेश सभी लोगों तक समान तरीके से पहुंचाने के बजाय अलग-अलग समूहों की जरूरतों, रुचियों और स्थानीय परिस्थितियों को ध्यान में रखकर संवाद किया जाता है।

नए राज्यों में पार्टी का विस्तार

किसी ब्रांड की तरह राजनीतिक दलों के लिए भी नए क्षेत्रों में अपनी पहुंच बनाना बड़ी चुनौती होती है। अमित शाह के नेतृत्व में भाजपा ने पूर्वोत्तर भारत में अपना संगठन मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया। त्रिपुरा में 2018 के विधानसभा चुनाव में भाजपा की जीत इसका एक प्रमुख उदाहरण बनी। इससे पहले राज्य में लंबे समय तक वामपंथी दलों का दबदबा रहा था।

पूर्वोत्तर में पार्टी के विस्तार के दौरान स्थानीय मुद्दों और क्षेत्रीय आकांक्षाओं को ध्यान में रखते हुए प्रचार किया गया। साथ ही, पार्टी की राष्ट्रीय पहचान को भी बनाए रखा गया।

राजनीतिक मार्केटिंग के लिहाज से यह रणनीति बताती है कि किसी एक संदेश को हर क्षेत्र में एक ही रूप में लागू करना हमेशा कारगर नहीं होता। स्थानीय भाषा, मुद्दों और मतदाताओं की प्राथमिकताओं के अनुसार प्रचार में बदलाव करना जरूरी हो सकता है।

शेयर बाजार से सहकारी बैंक तक का सफर

अमित शाह की प्रबंधन क्षमता का एक पहलू उनके राजनीतिक जीवन से पहले के अनुभवों से भी जुड़ा है। राजनीति में राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाने से पहले वह शेयर ब्रोकर के रूप में काम कर चुके हैं। इस काम में बाजार के उतार-चढ़ाव, आंकड़ों और जोखिम का आकलन करना महत्वपूर्ण होता है।

इसके अलावा, वह अहमदाबाद जिला सहकारी बैंक (ADCB) के सबसे कम उम्र के अध्यक्षों में शामिल रहे। उनके कार्यकाल के दौरान बैंक की वित्तीय स्थिति में सुधार की बात कही जाती है। बैंक के कामकाज में बदलाव और उसे लाभ की स्थिति में लाने का अनुभव उनके प्रबंधन संबंधी सफर का हिस्सा रहा है।

हालांकि, बैंक के प्रदर्शन में सुधार के पीछे की पूरी प्रक्रिया और उसके वित्तीय आंकड़ों का आकलन करने के लिए संबंधित रिकॉर्ड देखना जरूरी है। इस अनुभव को सीधे चुनावी रणनीति की सफलता का कारण मानने के बजाय उनके पेशेवर और संगठनात्मक सफर के एक हिस्से के रूप में देखना अधिक उचित होगा।

संगठन में पेशेवर प्रबंधन पर जोर

भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में अमित शाह के कार्यकाल में पार्टी संगठन को अधिक व्यवस्थित बनाने पर जोर दिया गया। पार्टी के अलग-अलग कामों के लिए विशेष विभाग बनाना, नेताओं के दौरों की निगरानी और कार्यालयों में तकनीक के इस्तेमाल जैसे कदम संगठनात्मक प्रबंधन का हिस्सा रहे।

चुनावी प्रचार में पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों की भागीदारी भी महत्वपूर्ण रही। सोशल मीडिया के जरिए समर्थक संदेशों को साझा कर सकते हैं और अपने स्तर पर प्रचार में हिस्सा ले सकते हैं। इस तरह प्रचार केवल पार्टी के आधिकारिक विज्ञापनों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि समर्थकों के नेटवर्क के जरिए भी आगे बढ़ता है।

हालांकि, आम लोगों या समर्थकों की ओर से साझा की गई सामग्री को हमेशा अधिक भरोसेमंद मानना सही नहीं है। उसकी विश्वसनीयता इस बात पर निर्भर करती है कि उसमें दी गई जानकारी कितनी सही है और उसे किस संदर्भ में साझा किया जा रहा है।

राजनीतिक प्रचार और विज्ञापन जगत के लिए क्या मायने?

अमित शाह की चुनावी रणनीति को राजनीतिक संचार और मार्केटिंग के अध्ययन के एक उदाहरण के रूप में देखा जा सकता है। इससे तीन प्रमुख बातें सामने आती हैं- जमीनी स्तर पर मजबूत नेटवर्क, डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल और स्थानीय जरूरतों के अनुसार संदेश तैयार करना।

इन तरीकों का असर केवल राजनीतिक प्रचार तक सीमित नहीं है। विज्ञापन और संचार जगत में भी कंपनियां अपने ग्राहकों को बेहतर समझने, अलग-अलग समूहों तक पहुंचने और डिजिटल माध्यमों के जरिए संवाद बढ़ाने की कोशिश करती हैं। हालांकि, राजनीतिक प्रचार और किसी उत्पाद की मार्केटिंग के उद्देश्य अलग होते हैं, इसलिए दोनों की तुलना सीमित दायरे में ही की जानी चाहिए।

अमित शाह की रणनीति का महत्व इस बात में है कि चुनावी प्रचार में संगठन, आंकड़ों और तकनीक के इस्तेमाल को एक साथ जोड़ने पर जोर दिया गया। इससे भारतीय चुनावों में बूथ स्तर के नेटवर्क और डिजिटल प्रचार की भूमिका पर चर्चा और तेज हुई।

कुल मिलाकर, अमित शाह का चुनावी मॉडल भारतीय राजनीति में संगठनात्मक तैयारी, स्थानीय संपर्क और डिजिटल माध्यमों के इस्तेमाल का एक महत्वपूर्ण उदाहरण है। उनकी राजनीति से सहमति या असहमति से अलग, विज्ञापन और संचार जगत के लिए यह समझना उपयोगी है कि बड़े स्तर के संदेश को स्थानीय स्तर तक पहुंचाने में संगठन और तकनीक किस तरह भूमिका निभा सकते हैं। 

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सिटी में हेमानी भट्ट बनीं वाइस प्रेसिडेंट-चैनल मार्केटिंग

हेमानी भट्ट ने सिटी में वाइस प्रेसिडेंट – चैनल मार्केटिंग की जिम्मेदारी संभाली है। इससे पहले वह पीडब्ल्यूसी इंडिया में एडवाइजरी सीनियर एसोसिएट और जेपीमॉर्गन चेस में एसोसिएट थीं।

Last Modified:
Thursday, 22 October, 2026
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हेमानी भट्ट ने सिटी (Citi) में वाइस प्रेसिडेंट – चैनल मार्केटिंग के रूप में नई जिम्मेदारी संभाली है। नई भूमिका में वह कंपनी की चैनल मार्केटिंग से जुड़ी जिम्मेदारियां संभालेंगी। हेमानी हाल ही में पीडब्ल्यूसी इंडिया (PwC India) में एडवाइजरी में सीनियर एसोसिएट के पद पर कार्यरत थीं। वह फरवरी 2026 में पीडब्ल्यूसी इंडिया से जुड़ी थीं।

इससे पहले हेमानी ने अगस्त 2023 से जुलाई 2025 तक जेपीमॉर्गन चेस एंड कंपनी (JPMorgan Chase & Co.) में एसोसिएट के रूप में काम किया। यहां उनकी भूमिका में मार्केटिंग रणनीति और विश्लेषण से जुड़े कार्य शामिल थे।

इससे पहले उन्होंने आईप्रॉस्पेक्ट (iProspect) में दो वर्षों से अधिक समय तक काम किया। यहां उन्होंने अप्रैल 2022 से अगस्त 2023 तक एसोसिएट मैनेजर और मई 2021 से सीनियर एग्जीक्यूटिव के रूप में जिम्मेदारियां संभालीं।

आईप्रॉस्पेक्ट में अपने कार्यकाल के दौरान हेमानी ने रणनीतिक सोच और बिजनेस-टू-बिजनेस यानी बी2बी (B2B) मार्केटिंग से जुड़ा अनुभव हासिल किया, जिससे मार्केटिंग के क्षेत्र में उनकी विशेषज्ञता और मजबूत हुई। सिटी में नई भूमिका के साथ हेमानी वित्तीय सेवाओं, एडवाइजरी और मार्केटिंग रणनीति से जुड़े अपने अनुभव का इस्तेमाल चैनल मार्केटिंग को आगे बढ़ाने में करेंगी।

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सोनी को ₹47.39 लाख बकाया चुकाएगा Multicity Digital Consortium, TDSAT ने दिया आदेश

TDSAT ने Multicity Digital Consortium को Sony Pictures Networks India के 47.39 लाख रुपये के बकाया सब्सक्रिप्शन शुल्क का भुगतान करने का आदेश दिया है।

Last Modified:
Thursday, 22 October, 2026
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इमरान फजल, असिसटेंट एडिटर, एक्सचेंज4मीडिया ।।

दूरसंचार विवाद निपटान और अपीलीय न्यायाधिकरण (TDSAT) ने मल्टी-सिस्टम ऑपरेटर (MSO) Multicity Digital Consortium Pvt Ltd को Sony Pictures Networks India को 47.39 लाख रुपये के बकाया टीवी चैनल सब्सक्रिप्शन शुल्क का भुगतान करने का आदेश दिया है। न्यायाधिकरण ने इस रकम पर याचिका दाखिल करने की तारीख से वास्तविक भुगतान होने तक 9% सालाना की दर से साधारण ब्याज देने का भी निर्देश दिया है।

न्यायमूर्ति राम कृष्ण गौतम की अध्यक्षता वाले न्यायाधिकरण ने कंपनी को आदेश की तारीख से दो महीने के भीतर यह रकम जमा करने को कहा है। न्यायाधिकरण ने मामले में याचिका को खर्च सहित मंजूर कर लिया।

यह विवाद Sony के टीवी चैनलों के प्रसारण से जुड़े सब्सक्रिप्शन शुल्क का भुगतान नहीं किए जाने को लेकर था। Culver Max Entertainment Pvt Ltd, जो अब Sony Pictures Networks India के नाम से जानी जाती है, ने तमिलनाडु और कर्नाटक में अपने टीवी चैनलों के वितरण के लिए Multicity Digital Consortium के साथ समझौता किया था।

न्यायाधिकरण ने कहा कि ब्रॉडकास्टर ने सब्सक्रिप्शन समझौते, बिलों, खातों के विवरण और सुनवाई के दौरान पेश किए गए सबूतों के जरिए अपना दावा साबित किया है।

18% ब्याज की मांग, 9% देने का आदेश

Sony की ओर से पहले 47.39 लाख रुपये के बकाया के साथ 18% सालाना ब्याज की मांग की गई थी। हालांकि, न्यायाधिकरण ने पिछले मामलों में अपनाई गई दर और मौजूदा वित्तीय परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए 9% सालाना साधारण ब्याज देने का आदेश दिया।

न्यायाधिकरण के मुताबिक, Multicity Digital Consortium को कुल 47,39,820 रुपये जमा करने होंगे। इसमें तमिलनाडु के लिए करीब 41.72 लाख रुपये और कर्नाटक के लिए करीब 5.68 लाख रुपये का बकाया शामिल था।

कैसे शुरू हुआ विवाद?

फैसले के अनुसार, Sony Pictures Networks India और Multicity Digital Consortium के बीच 25 फरवरी, 2019 को सब्सक्रिप्शन समझौता हुआ था। इसके तहत MSO को तमिलनाडु के डिजिटल एड्रेसेबल सिस्टम (DAS) क्षेत्रों में Sony के टीवी चैनलों का प्रसारण करने की अनुमति दी गई थी।

बाद में इस समझौते को आगे बढ़ाया गया। जून 2020 में Multicity Digital Consortium के अनुरोध पर कर्नाटक को भी इसके अधिकृत क्षेत्र में शामिल कर लिया गया।

समझौते के तहत Sony लगातार अपने चैनलों के सिग्नल उपलब्ध करा रहा था और हर महीने सब्सक्रिप्शन शुल्क के बिल जारी कर रहा था। इन बिलों का भुगतान मिलने के 15 दिनों के भीतर किया जाना था।

Sony का आरोप था कि Multicity Digital Consortium को बिल मिलने के बावजूद उसने बकाया रकम का भुगतान नहीं किया। कई बार भुगतान के लिए कहने के बाद ब्रॉडकास्टर ने 26 फरवरी, 2021 को संबंधित प्रसारण नियमों के तहत सिग्नल बंद करने का नोटिस जारी किया। 

इसके बावजूद भुगतान नहीं होने पर 3 अप्रैल, 2021 को MSO के लिए चैनलों के सिग्नल बंद कर दिए गए। इसके बाद 6 मई, 2021 को एक और मांग नोटिस जारी किया गया।

बकाया रकम नहीं मिलने पर Sony ने TDSAT का रुख किया। उसने बकाया शुल्क और ब्याज की वसूली के साथ सिग्नल बंद होने के बाद अपने चैनलों के किसी भी अनधिकृत प्रसारण के खिलाफ राहत देने की मांग भी की।

दूसरे केबल ऑपरेटरों को लेकर उठाए सवाल

Multicity Digital Consortium ने Sony के दावे का विरोध करते हुए आरोप लगाया कि ब्रॉडकास्टर ने अलग-अलग वितरकों के साथ कारोबार में समान शर्तें नहीं रखीं। MSO का कहना था कि लागू नियमों के तहत सभी वितरकों को समान अवसर मिलना चाहिए।

उसने आरोप लगाया कि Sony ने Siti Cable Networks और GTPL जैसे बड़े प्रतिस्पर्धी MSO के साथ तय शुल्क पर समझौते किए थे। इससे इन कंपनियों को स्थानीय केबल ऑपरेटरों को कम दरों पर सेवाएं देने का मौका मिला।

Multicity Digital Consortium के मुताबिक, इसके कारण कई स्थानीय केबल ऑपरेटरों ने उसका नेटवर्क छोड़कर दूसरे वितरकों की सेवाएं लेनी शुरू कर दीं। MSO ने दावा किया कि इससे उसे करीब 24 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। इसमें लगभग 3 करोड़ रुपये स्थानीय केबल ऑपरेटरों से बकाया सब्सक्रिप्शन शुल्क और 21 करोड़ रुपये ऐसे सेट-टॉप बॉक्स के शामिल थे, जिन्हें कथित तौर पर वापस नहीं किया गया।

MSO ने दलील दी कि इन परिस्थितियों ने उसके कारोबार को नुकसान पहुंचाया और भुगतान वसूलने की क्षमता को प्रभावित किया। उसने दूसरे MSO के साथ हुए समझौतों, मासिक ग्राहक रिपोर्ट और खातों के विवरण भी मांगे, ताकि अपने आरोपों को साबित कर सके।

हालांकि, न्यायाधिकरण ने कहा कि Multicity Digital Consortium अपने आरोपों के समर्थन में पर्याप्त दस्तावेजी या मौखिक सबूत पेश नहीं कर सका। उसने संबंधित गवाहों को नहीं बुलाया और न ही जरूरी दस्तावेज हासिल करने या ब्रॉडकास्टर के गवाह से इन आरोपों पर जिरह करने के लिए उचित कदम उठाए।

न्यायाधिकरण ने स्पष्ट किया कि केवल लिखित जवाब में आरोप लगा देने से वे साबित नहीं हो जाते। उसने यह भी कहा कि स्थानीय केबल ऑपरेटरों से बकाया वसूलने और सेट-टॉप बॉक्स वापस लेने के मामले अलग हैं। MSO इन मामलों में संबंधित ऑपरेटरों के खिलाफ उचित कानूनी कार्रवाई कर सकता है, लेकिन इनका Sony के बकाया सब्सक्रिप्शन शुल्क से सीधा संबंध नहीं है।

SonyLIV को लेकर दी गई दलील भी खारिज

Multicity Digital Consortium ने यह भी दलील दी कि SonyLIV पर Sony के चैनलों और कार्यक्रमों की उपलब्धता से केबल टीवी सेवाओं के साथ प्रतिस्पर्धा प्रभावित हुई। उसके मुताबिक, दर्शक कई उपकरणों पर ओटीटी मंच के जरिए सामग्री देख सकते हैं, जिससे उसके केबल नेटवर्क को नुकसान हुआ।

इसके अलावा, MSO ने आरोप लगाया कि ब्रॉडकास्टर जरूरी अनुमतियों के बिना सीधे ग्राहकों तक लाइव टीवी चैनल पहुंचा रहा था। उसने केबल टेलीविजन नेटवर्क (विनियमन) अधिनियम, 1995 और सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के दिशा-निर्देशों के कथित उल्लंघन का मुद्दा भी उठाया।

इसके जवाब में Sony ने कहा कि ओटीटी सेवाएं और केबल वितरकों के जरिए टीवी सिग्नल का प्रसारण अलग-अलग गतिविधियां हैं। उसने यह भी दलील दी कि लागू नियमों का पालन करते हुए ब्रॉडकास्टर अपने कार्यक्रम सीधे ग्राहकों तक पहुंचा सकता है।

न्यायाधिकरण ने पाया कि Multicity Digital Consortium कथित नियामकीय उल्लंघनों को साबित करने के लिए जरूरी नियमों और सहायक सबूतों को रिकॉर्ड पर नहीं रख सका। न्यायाधिकरण ने कहा कि इन आरोपों को साबित करने की जिम्मेदारी MSO की थी और वह ऐसा करने में नाकाम रहा।

फैसले में यह भी गौर किया गया कि समझौता जारी रहने के दौरान MSO ने कथित मूल्य अंतर या ओटीटी वितरण को लेकर कोई शिकायत करने का सबूत पेश नहीं किया। इसके उलट, उसने जून 2020 में अपने अधिकृत क्षेत्र में कर्नाटक को शामिल करने का अनुरोध किया था।

समझौते और बकाया रकम को माना सही

न्यायाधिकरण के सामने एक अहम सवाल यह भी था कि शुरुआती एक साल की अवधि के बाद सब्सक्रिप्शन समझौता जारी रहा था या नहीं। Multicity Digital Consortium ने समझौते की अवधि बढ़ाए जाने पर सवाल उठाए थे।

हालांकि, न्यायाधिकरण ने दोनों पक्षों के बीच हुए ईमेल संवाद की जांच की। इसमें पाया गया कि Sony ने लगातार एक-एक महीने के लिए समझौते की अवधि बढ़ाए जाने की जानकारी दी थी। इसके अलावा, कर्नाटक को अधिकृत क्षेत्र में शामिल करने के अनुरोध को भी समझौते के जारी रहने का आधार माना गया।

न्यायाधिकरण ने कहा कि समझौता जारी था और Sony को तमिलनाडु तथा कर्नाटक के लिए बिल जारी करने का अधिकार था।

सुनवाई के दौरान MSO के वकील ने सब्सक्रिप्शन शुल्क का भुगतान किए जाने की दलील भी दी। हालांकि, कंपनी ने इस दावे के समर्थन में खातों का विवरण या भुगतान का कोई प्रमाण पेश नहीं किया।

दूसरी ओर, Sony ने समझौते, बिलों, खातों के विवरण, सिग्नल बंद करने के नोटिस और अपने वितरण बिक्री प्रबंधक की गवाही के जरिए बकाया रकम का दावा साबित किया।

इसी आधार पर न्यायाधिकरण ने Multicity Digital Consortium को अपने निदेशकों के माध्यम से 47,39,820 रुपये जमा करने का निर्देश दिया। इस रकम पर याचिका दाखिल करने की तारीख से वास्तविक भुगतान होने तक 9% सालाना साधारण ब्याज भी देना होगा। आदेश का पालन नहीं होने पर रकम की वसूली के लिए कानूनी प्रक्रिया अपनाई जा सकती है।

इस फैसले से साफ होता है कि ब्रॉडकास्टर और वितरण कंपनियों के बीच सब्सक्रिप्शन शुल्क के विवाद में दस्तावेजी सबूत अहम भूमिका निभाते हैं। व्यावसायिक शर्तों में भेदभाव या नियमों के उल्लंघन जैसे आरोपों के आधार पर भुगतान रोकने के लिए उन्हें उचित सबूतों के साथ साबित करना जरूरी है।

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