होम / टीवी / TV रेटिंग एजेंसीज के लिए खुले दरवाजे, सरकार ने हटाई बाधाएं

TV रेटिंग एजेंसीज के लिए खुले दरवाजे, सरकार ने हटाई बाधाएं

भारत में टेलीविजन व्युअरशिप मापन तकनीक को नया आकार देने की दिशा में सूचना-प्रसारण मंत्रालय (MIB) ने बड़ी पहल करते हुए टीवी रेटिंग एजेंसीज के लिए पात्रता मानदंडों में ढील देने का प्रस्ताव रखा है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो ।। 7 months ago

भारत में टेलीविजन व्युअरशिप मापन तकनीक को नया आकार देने की दिशा में सूचना-प्रसारण मंत्रालय (MIB) ने बड़ी पहल करते हुए टीवी रेटिंग एजेंसीज के लिए पात्रता मानदंडों में ढील देने का प्रस्ताव रखा है। 2 जुलाई 2025 को जारी मसौदे में मंत्रालय ने 2014 की नीति में अहम बदलाव किए हैं, जिनमें दो प्रमुख धाराएं (क्लॉज 1.5 और 1.7) को हटाना शामिल है। ये धाराएं अब तक रेटिंग एजेंसीज और ब्रॉडकास्टर्स, ऐडवर्टाइजर्स या ऐड एजेंसीज के बीच क्रॉस-होल्डिंग पर रोक लगाती थीं।

इस बदलाव को लेकर माना जा रहा है कि यह कदम नीतिगत ढांचे को आधुनिक बनाने, प्रवेश की बाधाएं कम करने और संभवतः OTT प्लेटफॉर्म, बिग टेक कंपनियों व मीडिया फंड्स जैसे नए खिलाड़ियों को इस क्षेत्र में आने का अवसर देने के लिए उठाया गया है।

कुछ ने बताया प्रगतिशील कदम, तो कुछ ने जताई निष्पक्षता पर चिंता

एक अग्रणी ब्रॉडकास्ट नेटवर्क के सीनियर एग्जिक्यूटिव ने इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा, “MIB द्वारा एंट्री नॉर्म्स में ढील देना सकारात्मक कदम है। इससे नए एजेंसीज के आने का रास्ता खुलेगा और रेटिंग्स को लेकर नए नजरिए और समेकित KPI सामने आ सकते हैं।”

TAM के सीईओ एलवी कृष्णन ने कहा, “यह निस्संदेह एक प्रगतिशील और स्वागत योग्य फैसला है। खासकर मल्टी-स्क्रीन व्युअरशिप के संदर्भ में यह बदलाव नई सोच और समग्र मापन तकनीक के लिए रास्ता खोलता है, जो डिजिटल को भी शामिल करेगा।”

हालांकि, सभी लोग इस फैसले से संतुष्ट नहीं हैं। एक मीडिया विश्लेषक ने चेतावनी दी, “क्रॉस-होल्डिंग प्रतिबंध हटाना महत्वपूर्ण सुरक्षा उपायों को कमजोर करता है। यदि इंडस्ट्री के सबसे बड़े खिलाड़ी खुद को ही रेट करें, तो ऑडियंस मापन का उद्देश्य ही खत्म हो जाता है। यह वैसा ही है जैसे कोई स्कूल टीचर खुद के ट्यूशन की परीक्षा ले।”

कानूनी विशेषज्ञ और केबल ऑपरेटर्स की मिलीजुली राय

सिंघानिया एंड एसोसिएट्स के पार्टनर रोहित जैन का मानना है कि सरकार का इरादा संतुलन बनाए रखने का है। उन्होंने कहा, “क्लॉज 1.5 और 1.7 को हटाने से जहां नए स्टेकहोल्डर्स को मौका मिलता है, वहीं क्लॉज 1.4 का विस्तार कर कॉन्फ्लिक्ट ऑफ इंटरेस्ट को रोकने की कोशिश की गई है। यह देखना जरूरी होगा कि किसी नए एंट्री से पूर्वाग्रह पैदा होता है या नहीं।”

एक प्रमुख केबल टीवी ऑपरेटर ने चिंता जताई कि बोर्ड लेवल या ओनरशिप से जुड़ी पाबंदियां हटने से रेटिंग एजेंसीज की निष्पक्षता प्रभावित हो सकती है। उन्होंने कहा, “OTT प्लेटफॉर्म्स के लिए बेहतर पैनल प्रतिनिधित्व जरूरी है, जिसमें अब तक BARC पीछे रहा है।”

एक अन्य मीडिया एजेंसी हेड ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, “कागजों पर यह कदम खुला और लोकतांत्रिक दिखता है, लेकिन असल में इससे उन्हीं बड़ी कंपनियों को फायदा होगा जो ज्यादा कंट्रोल चाहती हैं और खुद की एजेंसी शुरू करना चाहती हैं।”

ऐडवर्टाइजर्स के लिए अवसर और चिंता दोनों

एक FMCG ब्रांड के मीडिया प्लानर ने कहा, “यह बदलाव प्रतिस्पर्धा बढ़ा सकता है, नए इनोवेशन ला सकता है और शायद मूल्य निर्धारण को भी प्रभावित करे। यह डिजिटल और ब्रॉडकास्ट के मिलते हुए परिदृश्य में ज्यादा लचीली रेटिंग प्रणाली की ओर ले जा सकता है।”

हालांकि, कुछ ऐडवर्टाइजर्स ने स्टैंडर्ड्स में गिरावट की आशंका भी जताई। उनके अनुसार, “कमजोर पात्रता मानदंडों के कारण मापन की विश्वसनीयता प्रभावित हो सकती है। ऐसे क्षेत्र में जहां अरबों रुपये खर्च होते हैं, विश्वसनीयता से समझौता नहीं किया जा सकता।”

आगे क्या?

कुल मिलाकर, यह फैसला मापन तकनीक को अधिक लोकतांत्रिक बना सकता है, लेकिन इसके साथ पारदर्शिता, मानकीकरण और कड़े रेगुलेटरी फ्रेमवर्क की जरूरत और भी अधिक बढ़ गई है। कुछ मीडिया बायर्स ने यह चिंता भी जताई कि एक से ज्यादा रेटिंग एजेंसीज से "कंपीटिंग करंसी" का संकट पैदा हो सकता है, जिससे ब्रांड्स और ब्रॉडकास्टर्स दोनों भ्रमित होंगे।

सरकार ने इन मसौदा संशोधनों पर 30 दिनों के भीतर पब्लिक फीडबैक मांगा है। अंतिम आदेश जारी होने के बाद यह तय होगा कि भारत में टेलीविजन और डिजिटल दर्शकों की मापने की प्रणाली कैसे बदलेगी, खासकर ऐसे समय में जब क्रॉस-स्क्रीन मापन और एकीकृत मीट्रिक्स पहले से कहीं अधिक जरूरी हो चुके हैं।


टैग्स
सम्बंधित खबरें

फिल्म सर्टिफिकेशन की ‘प्रायोरिटी स्कीम’ बंद करने की तैयारी, सरकार ने मांगे सुझाव

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने फिल्म सर्टिफिकेशन से जुड़ी ‘प्रायोरिटी स्कीम’ को खत्म करने का प्रस्ताव रखा है।

6 hours ago

Zee ने बढ़ाया कंटेंट नेटवर्क, 350+ चैनल और वर्टिकल-ऑडियो फॉर्मेट पर जोर

देश की बड़ी मीडिया कंपनी जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड (Z) ने अपने सिंडिकेशन बिजनेस को और मजबूत कर लिया है।

5 days ago

इंडिया AI इम्पैक्ट समिट में AI एंकर Sutra की एंट्री, इंडिया टुडे ग्रुप की नई पहल

इंडिया टुडे ग्रुप ने इंडिया AI इम्पैक्ट समिट 2026 के दौरान अपना नया AI आधारित न्यूज एंकर Sutra पेश किया।

6 days ago

सोनी पिक्चर्स नेटवर्क: पुनर्गठन के तहत 100 से ज्यादा एंप्लॉयीज की छंटनी

सूत्रों का कहना है कि छंटनी लगभग सभी विभागों में हुई है, लेकिन नेटवर्क के डिजिटल प्लेटफॉर्म SonyLIV को इससे बाहर रखा गया है।

1 week ago

Zee Media के खिलाफ सिंगापुर में आर्बिट्रेशन कार्यवाही शुरू

जी मीडिया कॉरपोरेशन लिमिटेड के खिलाफ एक कानूनी मामला सिंगापुर में शुरू हुआ है।

1 week ago


बड़ी खबरें

'डीडी न्यूज' में नौकरी का मौका, सीनियर कॉरेस्पोंडेंट के लिए मोटी सैलरी ऑफर

भारत के लोक सेवा प्रसारक प्रसार भारती ने 'डीडी न्यूज' के लिए बड़ी भर्ती का ऐलान किया है।

6 hours ago

फिल्म सर्टिफिकेशन की ‘प्रायोरिटी स्कीम’ बंद करने की तैयारी, सरकार ने मांगे सुझाव

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने फिल्म सर्टिफिकेशन से जुड़ी ‘प्रायोरिटी स्कीम’ को खत्म करने का प्रस्ताव रखा है।

6 hours ago

ESOP के जरिए एम्प्लॉयीज को मिला फायदा, बालाजी टेलीफिल्म्स ने बढ़ाई पेड-अप कैपिटल

टीवी और एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री की जानी-मानी कंपनी बालाजी टेलीफिल्म्स (Balaji Telefilms Limited) ने अपने एम्प्लॉयीज को ESOP योजना के तहत 25,000 इक्विटी शेयर जारी किए हैं।

6 hours ago

SAIL बनी DD न्यूज के ‘डिकोड विद सुधीर चौधरी’ की स्पॉन्सर कंपनी

देश की बड़ी सरकारी स्टील कंपनी Steel Authority of India Limited (SAIL) अब डीडी न्यूज के चर्चित प्राइम टाइम शो ‘डिकोड विद सुधीर चौधरी’ की स्पॉन्सर कंपनी बन गई है

6 hours ago

निकुंज डालमिया ने लॉन्च किया नया बिजनेस प्लेटफॉर्म ‘The Broadview’

ET Now और ET Now Swadesh के एडिटर-इन-चीफ रह चुके निकुंज डालमिया अब अपना नया वेंचर ‘The Broadview’ लेकर आए हैं।

18 hours ago