भारत के पे-डीटीएच सेक्टर में गिरावट, ग्राहकों की संख्या हुई कम

यह आंकड़ा दूरदर्शन द्वारा प्रदान की जाने वाली मुफ्त डीटीएच सेवा डीडी फ्री डिश का उपयोग करने वाले सब्सक्राइबर्स को छोड़कर है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Saturday, 04 January, 2025
Last Modified:
Saturday, 04 January, 2025
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भारत के पे-डीटीएच सेक्टर ने अपने एक्टिव सब्सक्राइबर बेस (सक्रिय ग्राहकों की संख्या) में गिरावट दर्ज की है, जो जून 2024 में 62.17 मिलियन से घटकर सितंबर 2024 में 59.91 मिलियन रह गया है। यह जानकारी भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) द्वारा जारी हालिया रिपोर्ट में दी गई।

यह आंकड़ा दूरदर्शन द्वारा प्रदान की जाने वाली मुफ्त डीटीएच सेवा डीडी फ्री डिश का उपयोग करने वाले सब्सक्राइबर्स को छोड़कर है। यह बदलाव भारत में टेलीविजन उपभोग के बदलते रुझानों को दर्शाता है।

TRAI की टेलीकॉम सर्विसेज परफॉर्मेंस इंडिकेटर रिपोर्ट में कहा गया, “पे डीटीएच का कुल एक्टिव सब्सक्राइबर बेस लगभग 59.91 मिलियन है। इसमें डीडी फ्री डिश के सब्सक्राइबर्स शामिल नहीं हैं। कुल एक्टिव सब्सक्राइबर बेस जून 2024 के 62.17 मिलियन से घटकर सितंबर 2024 में 59.91 मिलियन हो गया है।''

रिपोर्ट के अनुसार, सितंबर 2023 में समाप्त तिमाही में कुल पे डीटीएच सब्सक्राइबर बेस 64.18 मिलियन था। इसके बाद से इसमें हर तिमाही गिरावट देखी गई है। हालांकि, मार्च 2024 से जून 2024 के बीच यह आंकड़ा दो लाख सब्सक्राइबर्स की मामूली बढ़त के साथ बढ़ा था।

वर्तमान में देश में चार प्रमुख पे डीटीएच प्रोवाइडर्स हैं- डिश टीवी, टाटा प्ले, भारती टेलीमीडिया और सन डायरेक्ट। डीडी फ्री डिश प्रसार भारती की निःशुल्क डीटीएच सेवा है। TRAI के अनुसार, बाजार में टाटा प्ले की हिस्सेदारी 31.99%, भारती टेलीमीडिया की 29.38%, डिश टीवी की 19.53% और सन डायरेक्ट की 19.10% है।

रिपोर्ट के अनुसार, कुल मिलाकर 912 निजी सैटेलाइट टीवी चैनल्स को सूचना-प्रसारण मंत्रालय (MIB) द्वारा केवल अपलिंकिंग/केवल डाउनलिंकिंग/दोनों के लिए अनुमति दी गई है।

रिपोर्ट में कहा गया, “3 मार्च 2017 के टैरिफ आदेश के तहत प्रसारकों द्वारा की गई रिपोर्टिंग के अनुसार, भारत में डाउनलिंकिंग के लिए उपलब्ध 902 स्वीकृत सैटेलाइट टीवी चैनलों में से 30 सितंबर 2024 तक 362 पे टीवी चैनल हैं। इनमें 258 एसडी सैटेलाइट पे टीवी चैनल और 104 एचडी सैटेलाइट पे टीवी चैनल शामिल हैं। वहीं, 540 फ्री-टू-एयर (एफटीए) चैनल हैं।”

362 सैटेलाइट पे टीवी चैनलों में से 205 चैनल शीर्ष पांच प्रसारकों के हैं – स्टार इंडिया (64 चैनल), जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड (49), वायाकॉम 18 मीडिया प्राइवेट लिमिटेड (39), सन टीवी नेटवर्क लिमिटेड (31) और कल्वर मैक्स एंटरटेनमेंट प्राइवेट लिमिटेड (22)।

इसके अलावा, यह भी बताया गया कि डिजिटल एड्रेसेबल सिस्टम (DAS) के माध्यम से केबल टीवी सेवाएं प्रदान करने के लिए सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय द्वारा स्थायी पंजीकरण (10 साल) प्राप्त मल्टी-सिस्टम ऑपरेटर्स (MSOs) की संख्या जून 2024 में 880 से घटकर सितंबर 2024 में 845 हो गई।

एमएसओ में, सितंबर 2024 तक GTPL हैथवे ने 89.74 लाख सब्सक्राइबर्स के साथ शीर्ष स्थान प्राप्त किया, इसके बाद हैथवे डिजिटल के 51.74 लाख और सिटी नेटवर्क्स के 48.10 लाख सब्सक्राइबर बेस रहे। 

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BARC रेटिंग्स पर रोक, टीवी इंडस्ट्री में अनिश्चितता; विज्ञापन व प्रोग्रामिंग पर पड़ेगा असर

इस फैसले के बाद अब सिर्फ न्यूज चैनल ही नहीं, बल्कि जनरल एंटरटेनमेंट, स्पोर्ट्स, मूवी, रीजनल और इन्फोटेनमेंट समेत सभी टीवी चैनलों की साप्ताहिक TRP रेटिंग्स पर रोक लग गई है।

Samachar4media Bureau by
Published - Thursday, 02 July, 2026
Last Modified:
Thursday, 02 July, 2026
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देश की टेलीविजन इंडस्ट्री पिछले एक दशक की सबसे बड़ी ऑडियंस मेजरमेंट चुनौती का सामना कर रही है। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (MIB) ने ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल (BARC) को निर्देश दिया है कि वह टीवी रेटिंग्स पॉलिसी-2026 के तहत नया लाइसेंस मिलने तक सभी टीवी चैनलों की रेटिंग जारी करना बंद कर दे।

इस फैसले के बाद अब सिर्फ न्यूज चैनल ही नहीं, बल्कि जनरल एंटरटेनमेंट, स्पोर्ट्स, मूवी, रीजनल और इन्फोटेनमेंट समेत सभी टीवी चैनलों की साप्ताहिक TRP रेटिंग्स पर रोक लग गई है। यानी फिलहाल टीवी इंडस्ट्री के पास दर्शकों की संख्या मापने का कोई साझा और आधिकारिक पैमाना नहीं रहेगा।

इससे पहले 'एक्सचेंज4मीडिया' ने सबसे पहले खबर दी थी कि MIB ने BARC को तब तक सभी रेटिंग्स जारी करने से रोक दिया है, जब तक उसका लाइसेंस नए नियमों के तहत रिन्यू नहीं हो जाता और वह पूरी तरह नए नियमों का पालन नहीं करता।

हालांकि मंत्रालय का कहना है कि BARC नया लाइसेंस मिलने के बाद ही रेटिंग्स दोबारा जारी कर सकेगा। लेकिन ब्रॉडकास्टिंग, विज्ञापन और मीडिया एजेंसियों से जुड़े एक्सपर्ट्स का मानना है कि इसका सीधा असर विज्ञापन सौदों, मीडिया प्लानिंग, प्रोग्रामिंग रणनीति और निवेशकों के साथ होने वाले संवाद पर पड़ेगा।

इससे पहले भी दो बार पूरे टीवी इंडस्ट्री की रेटिंग्स रोकी जा चुकी हैं। पहली बार 2015 में, जब TAM से BARC की प्रणाली लागू की जा रही थी। दूसरी बार 2019 में, जब TRAI के न्यू टैरिफ ऑर्डर (NTO) के लागू होने के बाद दर्शकों के देखने के पैटर्न में बड़े बदलाव आए थे।

टीवी इंडस्ट्री की 'करेंसी' पर लगा ब्रेक

TRP रेटिंग्स को टीवी इंडस्ट्री की सबसे अहम "करेंसी" माना जाता है। इन्हीं के आधार पर विज्ञापन दरें तय होती हैं, स्पॉन्सरशिप डील होती हैं, नए कार्यक्रमों में निवेश होता है और चैनलों के बीच प्रतिस्पर्धा का आकलन किया जाता है।

अब जब हर हफ्ते आने वाली रेटिंग्स बंद हो गई हैं, तो चैनलों के पास अपनी लोकप्रियता साबित करने का स्वतंत्र पैमाना नहीं रहेगा। वहीं विज्ञापनदाता और मीडिया एजेंसियां भी यह तय नहीं कर पाएंगी कि किस चैनल पर कितना विज्ञापन खर्च करना है।

एक बड़े टीवी नेटवर्क के वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, "सबसे बड़ा नुकसान फैसले लेने की प्रक्रिया को होगा। टीवी विज्ञापन पूरी तरह मापे जा सकने वाले नतीजों पर आधारित होता है। जब वही मापदंड नहीं रहेगा, तो हर चैनल अपने-अपने आंकड़े पेश करेगा और बातचीत अधिक व्यक्तिपरक हो जाएगी।"

एक बड़ी मीडिया एजेंसी के अधिकारी ने इस स्थिति की तुलना शेयर बाजार से करते हुए कहा, "यह ऐसा है जैसे स्टॉक एक्सचेंज में शेयरों की कीमत तय करने वाली पूरी व्यवस्था ही बंद कर दी जाए।"

FIFA World Cup के दौरान बढ़ी चुनौती

BARC रेटिंग्स पर रोक ऐसे समय लगी है, जब इस साल का सबसे बड़ा खेल आयोजन 2026 FIFA World Cup भी होने वाला है। भारत में इसके मीडिया अधिकार Zee Entertainment के पास हैं।

हालांकि वर्ल्ड कप जैसे बड़े टूर्नामेंट में विज्ञापनदाता आमतौर पर TRP से ज्यादा इवेंट की लोकप्रियता को देखते हैं, लेकिन अभियान खत्म होने के बाद उसके असर को मापना, विज्ञापन की कीमत तय करना और दर्शकों तक पहुंच साबित करना अब पहले की तुलना में ज्यादा मुश्किल हो सकता है।

Zee ने 2034 तक होने वाले 39 FIFA टूर्नामेंट्स के प्रसारण अधिकार हासिल किए हैं। ऐसे में कंपनी को अब BARC डेटा की जगह डिजिटल एनालिटिक्स, रीच के अनुमान और विज्ञापनदाताओं के लिए तैयार किए गए विशेष आंकड़ों का सहारा लेना पड़ सकता है।

विज्ञापनदाता तलाशेंगे नए पैमाने

मीडिया एक्सपर्ट्स का मानना है कि TRP नहीं मिलने तक कंपनियां अब अपने कैंपेन के नतीजों, बिक्री के आंकड़ों, डिजिटल डेटा और ब्रॉडकास्टर्स द्वारा उपलब्ध कराए गए एनालिटिक्स पर ज्यादा भरोसा करेंगी।

एक बड़ी उपभोक्ता वस्तु कंपनी के वरिष्ठ मार्केटिंग अधिकारी ने कहा, "ब्रांड टीवी पर विज्ञापन देना बंद नहीं करेंगे, लेकिन हर हफ्ते TRP देखकर बजट बदलने की जो रणनीति होती थी, वह अब संभव नहीं होगी।"

एजेंसियों का कहना है कि पहले से तय वार्षिक और तिमाही विज्ञापन योजनाएं तुरंत प्रभावित नहीं होंगी, लेकिन नए कैंपेन, स्पॉन्सरशिप और चैनल-वार बजट तय करने की प्रक्रिया धीमी पड़ सकती है, खासकर अगर यह रोक लंबी चली।

चैनलों की रणनीति पर भी असर

TRP रेटिंग्स बंद होने का असर चैनलों की रणनीति पर भी पड़ेगा। जिन चैनलों की रेटिंग हाल के महीनों में बेहतर हुई थी, वे अब अपनी बढ़त विज्ञापनदाताओं को नहीं दिखा पाएंगे। वहीं कमजोर प्रदर्शन करने वाले चैनलों पर भी फिलहाल सार्वजनिक दबाव कम रहेगा।

टीवी वितरण क्षेत्र के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, "फिलहाल ऐसी स्थिति बन गई है जिसमें न कोई आधिकारिक तौर पर जीत रहा है और न हार रहा है। लेकिन जिन चैनलों ने रैंकिंग सुधारने में बड़ा निवेश किया था, उन्हें सबसे ज्यादा नुकसान होगा क्योंकि वे उसका फायदा नहीं उठा पाएंगे।"

प्रोग्रामिंग टीमों के लिए भी यह चुनौती होगी, क्योंकि नए शो लॉन्च करना, कार्यक्रमों का समय बदलना, रियलिटी शो का फॉर्मेट तय करना और स्पोर्ट्स कंटेंट की रणनीति बनाना काफी हद तक साप्ताहिक TRP पर निर्भर करता है। अब उन्हें सोशल मीडिया, डिजिटल डेटा और उपभोक्ता सर्वे जैसे अन्य स्रोतों पर निर्भर रहना पड़ेगा।

केबल और DTH कंपनियों पर भी असर

इसका असर केबल और DTH कंपनियों पर भी पड़ सकता है। चैनलों की पैकेजिंग, उनकी पोजिशनिंग और कैरिज फीस से जुड़े कई फैसले TRP के आधार पर लिए जाते हैं। ऐसे में डेटा की जगह व्यक्तिगत संबंधों और आपसी बातचीत की भूमिका बढ़ सकती है, जो लंबे समय तक टिकाऊ व्यवस्था नहीं मानी जाती।

पहले भी लग चुकी है TRP पर रोक

पूरे टीवी इंडस्ट्री की रेटिंग्स बंद होने की घटनाएं बेहद कम रही हैं। पहली बार अप्रैल 2015 में TAM से BARC की नई व्यवस्था लागू होने के दौरान सभी रेटिंग्स अस्थायी रूप से रोक दी गई थीं।

दूसरी बार 2019 में TRAI के न्यू टैरिफ ऑर्डर लागू होने के बाद चैनलों की पैकेजिंग और दर्शकों की आदतों में बड़े बदलाव के कारण BARC ने कुछ समय के लिए रेटिंग्स जारी करना बंद कर दिया था।

इसके बाद 2020 में कथित TRP हेरफेर विवाद के दौरान न्यूज चैनलों की रेटिंग्स लगभग 17 महीने तक बंद रहीं और 2022 में नई पद्धति के साथ दोबारा शुरू हुईं।

इस बार मामला अलग क्यों है?

इस बार की रोक पहले से अलग है। पहले रेटिंग्स तकनीकी बदलाव या बाजार में आए बदलावों की वजह से रोकी गई थीं, लेकिन इस बार कारण नया नियामकीय ढांचा है। नई टीवी रेटिंग्स पॉलिसी-2026 के तहत सभी रेटिंग एजेंसियों को नया पंजीकरण लेना अनिवार्य किया गया है। जब तक BARC को नया लाइसेंस नहीं मिलता, वह रेटिंग्स जारी नहीं कर सकती।

सबसे बड़ा सवाल- रेटिंग्स कब लौटेंगी?

मीडिया इंडस्ट्री से जुड़े एक्सपर्ट्स का कहना है कि सबसे बड़ी जरूरत अब स्पष्ट समय-सीमा की है। एक सीनियर पॉलिसी एक्सपर्ट ने कहा, "अगर यह रुकावट कुछ समय की है तो इंडस्ट्री इसे संभाल सकता है। लेकिन सबसे बड़ी चिंता अनिश्चितता है। त्योहारी सीजन की विज्ञापन योजनाएं जल्द बननी हैं और सभी जानना चाहते हैं कि रेटिंग्स कब दोबारा शुरू होंगी।"

एक अन्य प्रसारण अधिकारी का कहना है कि यह पूरा घटनाक्रम भारत में केवल एक ऑडियंस मेजरमेंट सिस्टम पर निर्भरता को भी उजागर करता है। उनका मानना है कि यदि यह रोक लंबी चली तो देश में एक से अधिक ऑडियंस मेजरमेंट सिस्टम या वैकल्पिक डेटा स्रोत विकसित करने की बहस और तेज होगी।

फिलहाल स्थिति यह है कि टीवी चैनल, विज्ञापनदाता और मीडिया एजेंसियां इंडस्ट्री के सबसे अहम पैमाने के बिना काम करने को मजबूर हैं। जब तक BARC को नए नियमों के तहत लाइसेंस नहीं मिल जाता, तब तक भारत का टीवी इंडस्ट्री ऐसे दौर से गुजरेगा जहां अरबों रुपये के विज्ञापन सौदे तो होंगे, लेकिन उन्हें परखने के लिए साप्ताहिक TRP रिपोर्ट उपलब्ध नहीं होगी।

 

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जी एंटरटेनमेंट ने FDI निवेश की खबरों का किया खंडन, कहा- रिपोर्ट का आधार नहीं पता

जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड (ZEEL) ने कंपनी में 418 करोड़ रुपये के प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) की खबरों को लेकर स्पष्टीकरण जारी किया है।

Vikas Saxena by
Published - Thursday, 02 July, 2026
Last Modified:
Thursday, 02 July, 2026
ZeeEntertainment

जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड (ZEEL) ने कंपनी में 418 करोड़ रुपये के प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) की खबरों को लेकर स्पष्टीकरण जारी किया है। कंपनी ने कहा है कि मीडिया में प्रकाशित खबर का आधार उसे नहीं पता और संबंधित अवधि में OFI Global China Fund LLC की ओर से कंपनी में कोई निवेश नहीं किया गया है।

कंपनी ने यह स्पष्टीकरण BSE और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) की ओर से मांगे गए जवाब के बाद जारी किया। दोनों एक्सचेंजों ने The Economic Times में प्रकाशित "Zee Entertainment shares jump 6% after Rs 418 crore FDI approval" शीर्षक वाली खबर पर कंपनी से स्थिति स्पष्ट करने को कहा था।

जी एंटरटेनमेंट ने अपने जवाब में कहा कि उसे यह जानकारी नहीं है कि इकोनॉमिक टाइम्स में प्रकाशित खबर किस आधार पर तैयार की गई है। कंपनी ने साफ किया कि खबर में जिस अवधि का जिक्र किया गया है, उस दौरान OFI Global China Fund LLC ने कंपनी में कोई निवेश नहीं किया।

कंपनी ने यह भी कहा कि वह SEBI के लिस्टिंग नियमों का हमेशा पालन करती रही है और आगे भी नियामकीय प्रावधानों के अनुसार सभी जरूरी जानकारियां समय-समय पर सार्वजनिक करती रहेगी।

इस स्पष्टीकरण के साथ जी एंटरटेनमेंट ने निवेशकों और शेयर बाजार को यह संदेश दिया है कि कंपनी से जुड़ी किसी भी महत्वपूर्ण जानकारी के लिए केवल आधिकारिक खुलासों पर ही भरोसा किया जाना चाहिए।

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MIB का बड़ा फैसला, लाइसेंस रिन्यू होने तक जारी नहीं होंगी BARC की टीवी रेटिंग्स

इस पूरे घटनाक्रम पर ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल (BARC) की ओर से किसी तरह की आधिकारिक टिप्पणी नहीं की गई है।

Samachar4media Bureau by
Published - Wednesday, 01 July, 2026
Last Modified:
Wednesday, 01 July, 2026
Barc Mib

देश की टेलीविजन ऑडियंस मेजरमेंट प्रणाली को बड़ा झटका लगा है। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (MIB) ने ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल (BARC) को निर्देश दिया है कि नई टेलीविजन रेटिंग्स पॉलिसी-2026 के तहत लाइसेंस का नवीनीकरण और सभी जरूरी अनुपालनों (Compliance) की प्रक्रिया पूरी होने तक किसी भी श्रेणी की टीवी रेटिंग (TRP) जारी नहीं की जाए।

मामले से जुड़े सूत्रों के अनुसार, मंत्रालय के इस निर्देश के बाद BARC की रेटिंग्स से जुड़ी पूरी प्रक्रिया फिलहाल प्रभावी रूप से ठप हो गई है। इसका मतलब है कि अब केवल न्यूज चैनलों ही नहीं, बल्कि नॉन-न्यूज सहित किसी भी टीवी जॉनर की ऑडियंस रेटिंग जारी नहीं होगी, जब तक कि मंत्रालय नए नियामकीय ढांचे के तहत BARC के लाइसेंस का नवीनीकरण नहीं कर देता।

इससे पहले भी न्यूज चैनलों की रेटिंग्स पर रोक लगी हुई थी। अब मंत्रालय के ताजा निर्देश के बाद यह रोक सभी टीवी श्रेणियों तक बढ़ा दी गई है। ऐसे में प्रसारकों (Broadcasters), विज्ञापनदाताओं और मीडिया एजेंसियों के बीच बनी अनिश्चितता और गहरा गई है।

दरअसल, टेलीविजन रेटिंग्स पॉलिसी-2026 के प्रावधानों के अनुसार, मौजूदा रेटिंग एजेंसियों को नए नियमों का पूरी तरह पालन करना अनिवार्य है। पॉलिसी के क्लॉज 14.2 में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि कोई भी रेटिंग एजेंसी तब तक रेटिंग तैयार या प्रकाशित नहीं कर सकती, जब तक वह नए ढांचे के सभी प्रावधानों का अनुपालन नहीं कर लेती।

गौरतलब है कि सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने हाल ही में टेलीविजन रेटिंग्स पॉलिसी-2026 लागू कर वर्ष 2014 की नीति को प्रतिस्थापित किया था। नई नीति के तहत ऑडियंस मेजरमेंट प्रणाली में पारदर्शिता, जवाबदेही और बेहतर प्रशासनिक व्यवस्था सुनिश्चित करने के उद्देश्य से कई कड़े प्रावधान किए गए हैं। इनमें बोर्ड के गठन से जुड़े नए मानदंड, विस्तृत ऑडिट व्यवस्था, सुरक्षा मंजूरी, अधिक संख्या में पीपल मीटर लगाने की अनिवार्यता और नए अनुपालन तंत्र शामिल हैं।

नई नीति लागू होने के बाद BARC ने अपने लाइसेंस के नवीनीकरण के लिए आवेदन किया था। इससे पहले मंत्रालय ने मौजूदा रेटिंग एजेंसियों को नए नियमों के अनुरूप होने के लिए निर्धारित 30 दिनों की समयसीमा बढ़ाकर 60 दिन कर दी थी। यह फैसला BARC, इंडियन ब्रॉडकास्टिंग एंड डिजिटल फाउंडेशन (IBDF) और सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव के बीच हुई चर्चाओं के बाद लिया गया था, जिसमें प्रसारकों ने मूल समयसीमा के भीतर नए नियम लागू करने में व्यावहारिक कठिनाइयों की ओर ध्यान दिलाया था।

इंडस्ट्री से जुड़े अधिकारियों के अनुसार, BARC का मौजूदा पंजीकरण समाप्त हो चुका है और अब उसका नवीनीकरण नई नीति के तहत मंत्रालय की मंजूरी पर निर्भर है।

इंडस्ट्री की ओर से मिले सुझावों के बाद मंत्रालय ने नई नीति के कुछ प्रावधानों में राहत भी दी थी। इसके तहत बोर्ड में स्वतंत्र निदेशकों (Independent Directors) की अनिवार्य हिस्सेदारी 50 प्रतिशत से घटाकर 33 प्रतिशत कर दी गई। वहीं, 80 हजार पीपल मीटर लगाने की समयसीमा बढ़ाई गई और एस्टैब्लिशमेंट सर्वे को हर वर्ष कराने की जगह तीन वर्ष में एक बार करने का प्रावधान किया गया।

हालांकि इन राहतों के बावजूद मंत्रालय ने स्पष्ट कर दिया है कि BARC की लाइसेंस नवीनीकरण प्रक्रिया पूरी होने और नए नियामकीय ढांचे के अनुरूप पूर्ण अनुपालन सुनिश्चित होने तक किसी भी प्रकार की टीवी रेटिंग जारी नहीं की जा सकती।

इस फैसले का सीधा असर उन प्रसारकों पर पड़ेगा जो हर सप्ताह आने वाली ऑडियंस रेटिंग्स के आधार पर अपने चैनलों के प्रदर्शन का आकलन करते हैं, विज्ञापन दरें तय करते हैं और कार्यक्रमों की स्ट्रैटेजी बनाते हैं। इसके अलावा मीडिया खरीदार (Media Buyers) और विज्ञापनदाता भी अपने विज्ञापन अभियानों की योजना, मूल्यांकन और टीवी निवेश संबंधी फैसलों के लिए BARC के आंकड़ों का व्यापक उपयोग करते हैं।

नई नीति के तहत रेटिंग एजेंसियों को अब अधिक सख्त प्रशासनिक मानकों के अनुसार काम करना होगा। उन्हें नियमित आंतरिक और बाहरी ऑडिट कराने, अपनी कार्यप्रणाली और स्वामित्व ढांचे में अधिक पारदर्शिता रखने, शिकायत निवारण से जुड़े आंकड़े सार्वजनिक करने और मंत्रालय द्वारा समय-समय पर किए जाने वाले निरीक्षणों का पालन करना होगा।

नीति में यह भी प्रावधान किया गया है कि नियमों के उल्लंघन की स्थिति में सरकार चरणबद्ध कार्रवाई कर सकती है। इसमें रेटिंग्स पर अस्थायी रोक लगाने से लेकर बार-बार नियमों का उल्लंघन होने पर पंजीकरण रद्द करने तक की व्यवस्था शामिल है। उधर, इस पूरे घटनाक्रम पर BARC की ओर से कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की गई है।

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जी एंटरटेनमेंट 3,143 करोड़ रुपये जुटाएगी, बोर्ड ने वारंट जारी करने को दी मंजूरी

जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड (ZEEL) के बोर्ड ने कंपनी में पूंजी बढ़ाने के लिए बड़ा फैसला लिया है।

Samachar4media Bureau by
Published - Wednesday, 01 July, 2026
Last Modified:
Wednesday, 01 July, 2026
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जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड (ZEEL) के बोर्ड ने कंपनी में पूंजी बढ़ाने के लिए बड़ा फैसला लिया है। बोर्ड ने प्रमोटर ग्रुप की कंपनी Sunbright Mauritius Investments Ltd को 3,143.52 करोड़ रुपये तक के फुली कन्वर्टिबल वारंट (Fully Convertible Warrants) जारी करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इसके साथ ही बोर्ड ने कर्मचारियों के लिए ESOP 2026 (एम्प्लॉयी स्टॉक ऑप्शन प्लान) शुरू करने को भी हरी झंडी दी है।

हालांकि, इन दोनों प्रस्तावों को लागू करने से पहले शेयरधारकों और संबंधित नियामकीय संस्थाओं की मंजूरी लेना जरूरी होगा।

कंपनी के मुताबिक, 24.95 करोड़ तक फुली कन्वर्टिबल वारंट जारी किए जाएंगे। प्रत्येक वारंट की कीमत 126 रुपये तय की गई है। हर वारंट को आवंटन की तारीख से 18 महीने के भीतर 1 रुपये फेस वैल्यू वाले एक इक्विटी शेयर में बदला जा सकेगा।

कंपनी ने बताया कि वारंट लेने वाली प्रमोटर ग्रुप कंपनी Sunbright Mauritius Investments Ltd को आवेदन के समय प्रति वारंट 31.50 रुपये (25%) का भुगतान करना होगा। बाकी 94.50 रुपये (75%) वारंट को शेयर में बदलते समय देने होंगे। यदि 18 महीने के भीतर वारंट को शेयर में नहीं बदला गया, तो वह स्वतः समाप्त हो जाएगा और पहले से जमा राशि जब्त कर ली जाएगी।

ZEEL के अनुसार, वारंट के शेयरों में बदलने के बाद Sunbright Mauritius Investments Ltd की हिस्सेदारी कंपनी की पूरी डाइल्यूटेड शेयर पूंजी का करीब 20% तक हो सकती है। फिलहाल इस कंपनी के पास ZEEL का कोई शेयर नहीं है।

कंपनी ने यह भी बताया कि 126 रुपये प्रति वारंट का इश्यू प्राइस SEBI के नियमों के तहत तय कीमत से करीब 11.86% अधिक है। वहीं, 1 जुलाई 2026 को नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) पर ZEEL के शेयर के बंद भाव की तुलना में यह कीमत करीब 16.33% प्रीमियम पर तय की गई है। कंपनी के अनुसार, यह मूल्यांकन पंजीकृत वैल्यूअर की रिपोर्ट और SEBI के नियमों के अनुरूप तय किया गया है।

बोर्ड ने इसके अलावा ESOP 2026 को भी मंजूरी दी है। इस योजना के तहत कंपनी कर्मचारियों को 3.74 करोड़ तक स्टॉक ऑप्शन दे सकेगी। प्रत्येक स्टॉक ऑप्शन को 1 रुपये फेस वैल्यू वाले एक इक्विटी शेयर में बदला जा सकेगा और इसकी एक्सरसाइज प्राइस 126 रुपये प्रति शेयर रखी गई है। योजना से जुड़ी अन्य शर्तें, जैसे वेस्टिंग पीरियड और एक्सरसाइज की समय-सीमा, शेयरधारकों की मंजूरी मांगते समय साझा की जाएंगी।

इन दोनों प्रस्तावों पर मंजूरी लेने के लिए कंपनी जल्द ही शेयरधारकों की बैठक भी बुलाएगी। ZEEL ने स्पष्ट किया है कि कन्वर्टिबल वारंट जारी करने और ESOP 2026 लागू करने के लिए शेयरधारकों के साथ-साथ आवश्यक नियामकीय और सरकारी मंजूरियां भी प्राप्त करनी होंगी।

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क्या फिर जारी होंगी टीवी न्यूज रेटिंग्स? BARC के अगले कदम पर सबकी नजर

मीडिया इंडस्ट्री से जुड़े अधिकारियों का मानना है कि ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल (BARC) ब्लैकआउट पीरियड समाप्त होने के बाद गुरुवार को टीवी न्यूज व्यूअरशिप डेटा जारी कर सकता है।

Samachar4media Bureau by
Published - Wednesday, 01 July, 2026
Last Modified:
Wednesday, 01 July, 2026
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टेलीविजन न्यूज चैनलों की रेटिंग्स (TRP) इस सप्ताह दोबारा जारी होने की संभावना जताई जा रही है। मीडिया इंडस्ट्री से जुड़े अधिकारियों का मानना है कि ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल (BARC) ब्लैकआउट पीरियड समाप्त होने के बाद गुरुवार को टीवी न्यूज व्यूअरशिप डेटा जारी कर सकता है।

सूत्रों के अनुसार, जारी होने वाली रेटिंग्स में 28 जून को समाप्त हुई अवधि का व्यूअरशिप डेटा शामिल हो सकता है। गौरतलब है कि सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (MIB) के निर्देश पर एक जून से टीवी न्यूज की साप्ताहिक टीआरपी रेटिंग्स का प्रकाशन अस्थायी रूप से रोक दिया गया था, ताकि ऑडियंस मापन प्रणाली में प्रस्तावित बदलावों को लागू किया जा सके।

हालांकि, यदि इस सप्ताह रेटिंग्स दोबारा जारी होती हैं तो BARC को केरल हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश का पालन करना होगा। अदालत ने टीवी रेटिंग्स से लैंडिंग पेज व्यूअरशिप डेटा को बाहर करने से जुड़े एक महत्वपूर्ण प्रावधान के अमल पर फिलहाल रोक लगा रखी है। ऐसे में कानूनी स्थिति स्पष्ट होने तक BARC की मौजूदा व्यवस्था के तहत ही रेटिंग्स जारी करने की संभावना है।

दरअसल, लैंडिंग पेज व्यूअरशिप लंबे समय से टीवी इंडस्ट्री में विवाद का विषय बनी हुई है। यह वह व्यूअरशिप होती है, जब किसी वितरण प्लेटफॉर्म पर कोई चैनल स्वत: डिफॉल्ट चैनल के रूप में खुलता है। कुछ न्यूज ब्रॉडकास्टर्स इसे रेटिंग्स से बाहर करने के पक्ष में हैं, जबकि अन्य का कहना है कि इस तरह का बदलाव व्यापक इंडस्ट्री परामर्श और वैज्ञानिक आधार पर ही किया जाना चाहिए। इस पूरे मामले पर BARC की ओर से किसी तरह की प्रतिक्रिया नहीं मिली है।

BARC ने शुल्क संबंधी निर्देश वापस लेने का भी किया अनुरोध: मामले से परिचित लोगों के मुताबिक, BARC ने सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय से उस निर्देश को वापस लेने का भी अनुरोध किया है, जिसके तहत ब्लैकआउट पीरियड के दौरान न्यूज ब्रॉडकास्टर्स से सब्सक्रिप्शन या रेटिंग्स से संबंधित कोई शुल्क नहीं लेने को कहा गया था।

BARC का कहना है कि रेटिंग्स का अस्थायी रूप से प्रकाशित न होना, ऑडियंस मापन प्रणाली के संचालन और रखरखाव पर आने वाले खर्च को समाप्त नहीं करता। इसलिए इस अवधि के दौरान शुल्क नहीं लेने का निर्देश वापस लिया जाना चाहिए। इस मुद्दे पर मंत्रालय और BARC के बीच अलग से चर्चा होने की संभावना है।

इंडस्ट्री की नजर BARC के अगले कदम पर: ब्लैकआउट पीरियड समाप्त होने के बाद अब पूरे मीडिया इंडस्ट्री की नजर इस बात पर है कि क्या BARC इस सप्ताह फिर से टीवी न्यूज टीआरपी रेटिंग्स जारी करेगा। न्यूज ब्रॉडकास्टर्स, विज्ञापनदाता और मीडिया एजेंसियां BARC के आंकड़ों का उपयोग विज्ञापन स्ट्रैटेजी, इन्वेंट्री की कीमत तय करने और प्रतिस्पर्धी आकलन के लिए करती हैं।

हालांकि, ऑडियंस मापन प्रणाली में प्रस्तावित बदलाव और लैंडिंग पेज व्यूअरशिप को लेकर जारी कानूनी एवं नियामकीय प्रक्रिया के बीच यह देखना अहम होगा कि BARC इस सप्ताह रेटिंग्स जारी करता है या नहीं और यदि करता है तो किस कार्यप्रणाली के तहत उन्हें प्रकाशित किया जाएगा।

(मूल रूप से अंग्रेजी में प्रकाशित इस खबर को आप यहां क्लिक कर पढ़ सकते हैं।) 

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हर दिन अगले 10 साल के लिए काम कर रहा है GTC Network: रबिन्द्र नारायण

GTC Network के प्रेजिडेंट रबिन्द्र नारायण का मानना है कि आने वाले समय में मीडिया इंडस्ट्री में सफलता सिर्फ बड़े बजट से नहीं मिलेगी, बल्कि मजबूत विचार, भरोसे, अच्छी स्टोरीटेलिंग और संस्कृति से तय होगी।

Samachar4media Bureau by
Published - Monday, 29 June, 2026
Last Modified:
Monday, 29 June, 2026
RabindraNarayan874

GTC Network के संस्थापक, मैनेजिंग डायरेक्टर और प्रेजिडेंट रबिन्द्र नारायण का मानना है कि आने वाले समय में मीडिया इंडस्ट्री में सफलता सिर्फ बड़े बजट से नहीं मिलेगी, बल्कि मजबूत विचार (Ideas), भरोसे (Trust), अच्छी स्टोरीटेलिंग और संस्कृति (Culture) से तय होगी।

रबिन्द्र नारायण ने लिंक्डइन पर एक पोस्ट के जरिए कंपनी के भविष्य के विजन को साझा किया। उन्होंने कहा कि GTC Network अगले कुछ महीनों के लिए नहीं, बल्कि आने वाले पूरे दशक को ध्यान में रखकर काम कर रहा है।

उन्होंने अपनी पोस्ट में लिखा कि मीडिया का भविष्य उन कंपनियों का नहीं होगा जिनके पास सबसे बड़ा बजट है, बल्कि उन कंपनियों का होगा जिनके पास सबसे मजबूत और अलग सोच होगी।

रवींद्र नारायण के मुताबिक, तकनीक हर साल बदलती रहती है और मीडिया प्लेटफॉर्म भी समय-समय पर बदलते रहते हैं। लेकिन भरोसा, अच्छी कहानियां सुनाने की कला (Storytelling) और संस्कृति जैसे मूल्य कभी पुराने नहीं पड़ते। यही चीजें किसी मीडिया ब्रांड को लंबे समय तक मजबूत बनाए रखती हैं।

उन्होंने कहा कि GTC Network में हर दिन ऐसा काम किया जा रहा है जो सिर्फ अगले तिमाही (Quarter) के नतीजों के लिए नहीं, बल्कि अगले 10 वर्षों को ध्यान में रखकर हो। उनका कहना है कि कंपनी का लक्ष्य लंबी अवधि में मजबूत और टिकाऊ विकास करना है।

रवींद्र नारायण ने अपनी पोस्ट में यह भी कहा कि कंपनी की विरासत (Legacy) उसे मजबूत आधार देती है, जबकि इनोवेशन (Innovation) उसे आगे बढ़ने की ताकत देता है। उन्होंने कहा कि GTC Network का यह सफर अभी शुरू ही हुआ है और आने वाले वर्षों में कंपनी नए विचारों और नवाचार के दम पर आगे बढ़ने पर फोकस करेगी।

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MIB के प्रतिबंध के बावजूद BARC ने जारी की Chardikla की रेटिंग, शिकायत दर्ज

टेलीविजन रेटिंग जारी करने वाली संस्था BARC (Broadcast Audience Research Council) एक बार फिर विवादों में आ गई है।

Samachar4media Bureau by
Published - Monday, 29 June, 2026
Last Modified:
Monday, 29 June, 2026
BARC9854

इमरान फजल, असिसटेंट एडिटर, एक्सचेंज4मीडिया ।।

टेलीविजन रेटिंग जारी करने वाली संस्था BARC (Broadcast Audience Research Council) एक बार फिर विवादों में आ गई है। BARC ने हाल ही में Chardikla चैनल की टीवी रेटिंग (TV Ratings) जारी की है, जबकि सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (MIB) का निर्देश अभी भी लागू है कि अगले आदेश तक न्यूज चैनलों की रेटिंग प्रकाशित नहीं की जाए।

इंडस्ट्री से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, इस मामले को लेकर MIB और BARC दोनों के पास औपचारिक शिकायत दर्ज कराई गई है। शिकायत में कहा गया है कि Chardikla को न्यूज कैटेगरी में लाइसेंस मिला हुआ है, फिर भी उसकी व्युअरशिप रेटिंग जारी करना मंत्रालय के निर्देशों के खिलाफ हो सकता है। साथ ही यह मामला फिलहाल केरल हाई कोर्ट में भी विचाराधीन (Sub Judice) है।

शिकायत में क्या कहा गया?

शिकायतकर्ता का कहना है कि BARC की ताजा रेटिंग रिपोर्ट में Chardikla की ऑडियंस रेटिंग प्रकाशित की गई, जबकि मंत्रालय ने साफ निर्देश दिया था कि न्यूज चैनलों की रेटिंग अगले आदेश तक जारी नहीं की जाए।

शिकायत में मंत्रालय से इस मामले में तुरंत हस्तक्षेप करने की मांग की गई है। साथ ही BARC से प्रकाशित रेटिंग वापस लेने और यह स्पष्ट करने को कहा गया है कि आखिर किस आधार पर यह डेटा जारी किया गया।

पूरा विवाद क्या है?

यह विवाद केंद्र सरकार की Television Ratings Policy, 2026 से जुड़ा हुआ है। इस नई नीति में टीवी रेटिंग की गणना के तरीके में बदलाव किया गया है। खास तौर पर Landing Page Viewership को रेटिंग से बाहर रखने का फैसला लिया गया है।

इस फैसले को लेकर All India Digital Cable Federation (AIDCF) और DEN Networks ने केरल हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। मई में हाई कोर्ट ने इस नीति के एक अहम प्रावधान पर अंतरिम रोक (Stay) लगा दी थी और फिलहाल यथास्थिति (Status Quo) बनाए रखने का आदेश दिया था।

इसी बीच मंत्रालय ने BARC को निर्देश दिया था कि जब तक मामला अदालत में विचाराधीन है, तब तक न्यूज चैनलों की रेटिंग प्रकाशित न की जाए, ताकि किसी तरह की कानूनी या नियामकीय जटिलता पैदा न हो।

इंडस्ट्री में क्यों उठ रहे हैं सवाल?

मीडिया इंडस्ट्री के कई अधिकारियों का कहना है कि अगर मंत्रालय के निर्देश के बावजूद किसी न्यूज चैनल की रेटिंग जारी की जाती है, तो इससे सरकारी आदेशों के पालन और नियामकीय प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो सकते हैं।

शिकायत में यह भी कहा गया है कि अगर कुछ न्यूज चैनलों की रेटिंग जारी होती है और बाकी की नहीं, तो इससे ऑडियंस मापन प्रणाली (Audience Measurement System) की निष्पक्षता पर असर पड़ सकता है। इससे न्यूज ब्रॉडकास्टर्स, विज्ञापनदाताओं और डिस्ट्रीब्यूशन प्लेटफॉर्म्स के बीच भ्रम की स्थिति भी पैदा हो सकती है।

लाइसेंस और कंटेंट को लेकर भी बहस

इस विवाद ने एक और मुद्दे को सामने ला दिया है। कुछ ऐसे चैनल हैं जिन्हें MIB ने 'न्यूज व करंट अफेयर्स' कैटेगरी में लाइसेंस दिया है, लेकिन वे न्यूज के साथ-साथ एंटरटेनमेंट (Entertainment), स्पोर्ट्स (Sports) और अन्य तरह के कार्यक्रम भी दिखाते हैं।

हालांकि उनकी प्रोग्रामिंग मिश्रित होती है, लेकिन लाइसेंस के आधार पर उन्हें अब भी न्यूज चैनल माना जाता है। ऐसे चैनलों की रेटिंग BARC लगातार न्यूज कैटेगरी में प्रकाशित करता रहा है। इंडस्ट्री का कहना है कि इससे मंत्रालय के निर्देशों को समान रूप से लागू किए जाने पर भी सवाल उठ रहे हैं।

BARC की ओर से नहीं आया जवाब

इस पूरे मामले पर प्रतिक्रिया लेने के लिए BARC से संपर्क किया गया, लेकिन खबर लिखे जाने तक संस्था की ओर से कोई आधिकारिक जवाब नहीं दिया गया।

फिलहाल यह मामला मंत्रालय और केरल हाई कोर्ट दोनों के स्तर पर महत्वपूर्ण बना हुआ है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि मंत्रालय इस शिकायत पर क्या कदम उठाता है और BARC इस विवाद पर क्या सफाई देता है।

 

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BAG Films ने प्रमोटर ग्रुप को 1.02 करोड़ नए शेयर किए आवंटित, हिस्सेदारी बढ़कर 51.74% हुई

BAG Films and Media Limited ने प्रमोटर ग्रुप की कंपनी Skyline Tele Media Services Limited (STMSL) को 1.02 करोड़ (1,02,00,000) नए इक्विटी शेयर आवंटित किए हैं।

Vikas Saxena by
Published - Monday, 29 June, 2026
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Monday, 29 June, 2026
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BAG Films and Media Limited ने प्रमोटर ग्रुप की कंपनी Skyline Tele Media Services Limited (STMSL) को 1.02 करोड़ (1,02,00,000) नए इक्विटी शेयर आवंटित किए हैं। यह शेयर पहले जारी किए गए पूरी तरह परिवर्तनीय (Fully Convertible) वारंट्स के इक्विटी शेयरों में बदलने के बाद दिए गए हैं।

कंपनी ने शेयर बाजार को दी जानकारी में बताया कि 27 जून 2026 को हुई सिक्योरिटीज कमेटी की बैठक में इस आवंटन को मंजूरी दी गई। ये शेयर 8.25 रुपये प्रति शेयर (2 रुपये फेस वैल्यू और 6.25 रुपये प्रीमियम) के इश्यू प्राइस पर जारी किए गए हैं।

इससे पहले, मार्च 2026 में कंपनी ने STMSL को 2 करोड़ कन्वर्टिबल वारंट्स प्रेफरेंशियल आधार पर जारी किए थे। इनमें से 98 लाख वारंट्स पहले ही इक्विटी शेयरों में बदले जा चुके थे। अब बचे हुए 1.02 करोड़ वारंट्स भी इक्विटी शेयरों में बदल दिए गए हैं। इसके लिए STMSL ने 75% शेष राशि के रूप में 6.31 करोड़ रुपये का भुगतान किया है।

यह पूरा आवंटन कंपनी के शेयरधारकों द्वारा 11 फरवरी 2026 को आयोजित असाधारण आम बैठक (EGM) में पारित विशेष प्रस्ताव और SEBI ICDR Regulations के तहत किया गया है।

इस आवंटन के बाद कंपनी की जारी, सब्सक्राइब्ड और पेड-अप शेयर पूंजी बढ़कर 21,79,18,090 इक्विटी शेयर हो गई है, जो पहले 20,77,18,090 शेयर थी। वहीं, प्रमोटर और प्रमोटर ग्रुप की हिस्सेदारी 49.37% से बढ़कर 51.74% हो गई है। कंपनी ने कहा कि नए आवंटित शेयर मौजूदा इक्विटी शेयरों के समान अधिकार (Pari Passu) रखेंगे, जिनमें डिविडेंड और वोटिंग राइट्स भी शामिल हैं।

   

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फीफा वर्ल्ड कप 2026 से 'जी' को बड़ी बढ़त: 20% पर पहुंचा नेटवर्क शेयर

'जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज' (Zee Entertainment Enterprises Ltd) ने दावा किया है कि फीफा वर्ल्ड कप 2026 (FIFA World Cup 2026) के दौरान उसका नेटवर्क शेयर आठ वर्षों के उच्चतम स्तर 20% पर पहुंच गया।

Samachar4media Bureau by
Published - Friday, 26 June, 2026
Last Modified:
Friday, 26 June, 2026
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'जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड' (Zee Entertainment Enterprises Ltd), जिसे 'जी' (Z) ब्रांड के नाम से जाना जाता है, ने दावा किया है कि वर्ष 2026 के सप्ताह 24 (Week 24) में उसका नेटवर्क शेयर 20 प्रतिशत तक पहुंच गया, जो पिछले लगभग आठ वर्षों का सबसे ऊंचा स्तर है।

कंपनी के अनुसार, यह प्रदर्शन 15+ इंडिया अर्बन (15+ India Urban) बाजार में दर्ज किया गया। इसमें उसके मनोरंजन चैनलों के साथ हाल ही में लॉन्च किए गए 'यूनाइट8 स्पोर्ट्स' (Unite8 Sports) चैनलों का महत्वपूर्ण योगदान रहा।

'जी' (Z) ने बताया कि 1 जून 2026 से उसके स्पोर्ट्स पोर्टफोलियो ने लीनियर प्लेटफॉर्म्स, 'जी5' (ZEE5) और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर 30 करोड़ (300 Million) से अधिक यूनिक दर्शकों तक पहुंच बनाई है।

कंपनी इस समय 'यूनाइट8 स्पोर्ट्स' (Unite8 Sports) पर फीफा वर्ल्ड कप 2026 (FIFA World Cup 2026) का प्रसारण कर रही है। उसके मुताबिक, टूर्नामेंट के दौरान स्पोर्ट्स चैनलों से 6 करोड़ (60 Million) नए दर्शक जुड़े हैं।

कंपनी का दावा है कि 'यूनाइट8 स्पोर्ट्स' (Unite8 Sports) अब देश का दूसरा सबसे बड़ा लीनियर स्पोर्ट्स नेटवर्क बन गया है। वहीं 'यूनाइट8 स्पोर्ट्स 2' (Unite8 Sports 2) ने भारत के अंग्रेजी स्पोर्ट्स चैनलों में शीर्ष स्थान हासिल कर लिया है। कंपनी ने इसका श्रेय लाइव मैचों, विभिन्न भाषाओं में कमेंट्री, विशेषज्ञ विश्लेषण और फुटबॉल आधारित प्रोग्रामिंग को दिया है।

'जी' (Z) के अनुसार, फीफा वर्ल्ड कप 2022 (FIFA World Cup 2022) की समान अवधि की तुलना में इस बार उसके लीनियर पोर्टफोलियो की लाइव रीच 17 प्रतिशत अधिक रही।

'जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड' (Zee Entertainment Enterprises Ltd) में 'यूनाइट8 स्पोर्ट्स' (Unite8 Sports) के चीफ बिजनेस ऑफिसर (Chief Business Officer) भावेश जनावलेकर (Bavesh Janavlekar) ने कहा कि फीफा वर्ल्ड कप 2026 (FIFA World Cup 2026) को सभी प्लेटफॉर्म्स पर मिले शानदार दर्शक समर्थन ने कंपनी के स्पोर्ट्स कारोबार को नई मजबूती दी है।

उन्होंने कहा कि कंपनी टूर्नामेंट के महत्वपूर्ण चरणों के दौरान दर्शकों को जोड़े रखने के लिए नए कार्यक्रमों और इनोवेटिव कंटेंट पर लगातार काम कर रही है। कंपनी ने यह भी कहा कि 'यूनाइट8 स्पोर्ट्स' (Unite8 Sports) और 'जी5' (ZEE5) पर दर्शकों की संख्या लगातार बढ़ रही है।

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ZEE मीडिया ला रहा 'सच' का तीसरा सीजन, डॉ. सुभाष चंद्रा बनेंगे 'सारथी'

28 जून से शुरू होने वाला यह कार्यक्रम हर रविवार रात 10 बजे प्रसारित होगा। इस शो में डॉ. सुभाष चंद्रा देश के विभिन्न वर्गों से संवाद करेंगे।

Samachar4media Bureau by
Published - Thursday, 25 June, 2026
Last Modified:
Thursday, 25 June, 2026
Dr Subhash Chandra Show

‘जी’ समूह के संस्थापक और पूर्व राज्यसभा सांसद डॉ. सुभाष चंद्रा अपने संवाद कार्यक्रम ‘सच: द सुभाष चंद्रा शो’ (SACH: The Subhash Chandra Show) के तीसरे सीजन के साथ दर्शकों के बीच फिर लौट रहे हैं। 28 जून से शुरू होने वाला यह कार्यक्रम हर रविवार रात 10 बजे प्रसारित होगा।

इसका प्रसारण Zee News के साथ-साथ Zee Media नेटवर्क के अन्य चैनलों पर किया जाएगा, जबकि Z5 पर इसकी स्ट्रीमिंग भी उपलब्ध रहेगी। शो में डॉ. सुभाष चंद्रा देश के विभिन्न वर्गों से संवाद करेंगे। इसमें युवाओं की नई सोच के साथ-साथ रिटायरमेंट के बाद लोगों के जीवन से जुड़े सवालों और चुनौतियों पर भी चर्चा की जाएगी।

‘सच’ की शुरुआत कॉलेज परिसरों में युवाओं के साथ संवाद के मंच के रूप में हुई थी। नए सीजन में कार्यक्रम का दायरा बढ़ाते हुए इसे छोटे शहरों, कस्बों और ग्रामीण क्षेत्रों तक ले जाने की योजना है। शो के माध्यम से आकांक्षाओं, चुनौतियों, नेतृत्व, व्यक्तिगत विकास और राष्ट्र निर्माण जैसे विषयों पर चर्चा की जाएगी।

'जी मीडिया' के अनुसार, तीसरे सीजन में पहली बार ग्रामीण भारत और उभरते भारत की आवाजों को प्रमुखता दी जाएगी। गांवों और छोटे शहरों से निकलने वाली सफलता की कहानियां, स्थानीय नवाचार और सामाजिक बदलाव से जुड़े उदाहरण कार्यक्रम का हिस्सा होंगे।

कार्यक्रम में उद्यमिता, शिक्षा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), नेतृत्व, अध्यात्म, संचार कौशल, कृषि, सामुदायिक विकास, नैतिकता और भविष्य के करियर जैसे विषयों पर चर्चा की जाएगी। इसके माध्यम से युवाओं, छात्रों, उद्यमियों और भावी नेतृत्वकर्ताओं को बदलती दुनिया में अपने लक्ष्य, आत्मविश्वास और दिशा से जुड़े मुद्दों पर व्यावहारिक मार्गदर्शन देने का प्रयास किया जाएगा।

इस सीजन में सारथी नामक एक नया मंच भी जोड़ा गया है, जिसके माध्यम से लोग डॉ. सुभाष चंद्रा के विचारों, अनुभवों और जीवन-दर्शन से जुड़ सकेंगे। इसके जरिए इच्छुक व्यक्ति उनके अनुभवों से उपजे ज्ञान और मार्गदर्शन का लाभ प्राप्त कर सकेंगे।

शो के बारे में डॉ. सुभाष चंद्रा ने कहा, ‘सच’ सीजन-3 अब आपके शहरों और आपके बड़े सपनों तक विस्तार ले रहा है। इस सफर में मेरा उद्देश्य आपका ‘सारथी’ बनना है। यदि आपके पास अपने सपनों को उड़ान देने वाला कोई इनोवेटिव विचार है, या जीवन और व्यवसाय के किसी भी मोड़ पर आप खुद को फंसा हुआ पाते हैं, तो मैं इस यात्रा में आपके साथ हूं।’ 

सोशल मीडिया पर इस शो का प्रोमो भी जारी किया गया है, जिसे आप यहां देख सकते हैं।

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