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नकारात्मकता के शोर में 'अच्छी खबरें' आज की सबसे बड़ी जरूरत: नवज्योत रंधावा
नकारात्मक खबरों और चिंता बढ़ाने वाले न्यूज साइकिल के इस दौर में, Good News Today (GNT) की एडिटर नवज्योत रंधावा एक अलग रास्ता अपना रही हैं।
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।। 9 months ago
नकारात्मक खबरों और चिंता बढ़ाने वाले न्यूज साइकिल के इस दौर में, Good News Today (GNT) की एडिटर नवज्योत रंधावा एक अलग रास्ता अपना रही हैं। एक ऐसा रास्ता जो पॉजिटिविटी, मकसद और इंसानी जज्बे से जुड़ी कहानियों से होकर गुजरता है।
e4m DoGood Summit and Awards में बोलते हुए नवज्योत ने बताया कि GNT की पत्रकारिता बाकी चैनलों से क्यों अलग है और कैसे वो इस सोच को बदल रहे हैं कि "क्या वाकई कोई खबर बनने लायक है?"
उन्होंने कहा, “Good News Today की शुरुआत इसी सोच से हुई थी कि हर किसी को थोड़ी पॉजिटिविटी की जरूरत होती है। चारों ओर इतनी निराशा और अंधेरा है, लेकिन हम चाहते हैं कि लोग उन कहानियों को भी देखें जो उम्मीद देती हैं, बदलाव लाती हैं और इंसानियत के अच्छे चेहरे को सामने लाती हैं।”
जहां ज्यादातर न्यूज चैनल अपराध, टकराव और विवाद से शुरू होते हैं, वहीं GNT उन कहानियों को चुनता है जो हौसला बढ़ाएं, चाहे वो सामाजिक बदलाव की बातें हों, जमीन से जुड़ी इनोवेशन हों या फिर किसी की रोजमर्रा की भलाई से जुड़ी कोई पहल।
GNT की सोच बिल्कुल साफ है। नवज्योत ने जोर देकर कहा, “अच्छी खबर का मतलब ये नहीं कि वो हल्की खबर है,” । “हम मानते हैं कि अच्छी खबर भी असरदार हो सकती है, ऐसी कहानियां जो वाकई किसी के जीवन को छूती हों और समाज में फर्क लाती हों।”
इसका मतलब आसान और स्वाभाविक भाषा में कुछ इस तरह होगा, बिना भाव बदले और बिना अनुवाद जैसे लगे:
Good News Today की जो ‘people-first’ यानी इंसान और समाज को सबसे पहले रखने वाली सोच है, वो उनकी खबरों में साफ दिखाई देती है। छोटे शहरों के जलवायु योद्धाओं की कहानियों से लेकर समावेशी नीतियों और अनसुने नायकों की सराहना तक, GNT की कोशिश होती है कि भारत के हर कोने, खासकर टियर-2 और टियर-3 शहरों में जो अच्छाई है, उसे सामने लाया जाए।
नवज्योत रंधावा मानती हैं कि सिर्फ अच्छी खबरें दिखाने वाले चैनल को चलाना आसान नहीं होता। उन्होंने ईमानदारी से कहा, “TRP की दौड़ में फंस जाना बहुत आसान है, लेकिन हमने तय किया है कि सनसनी नहीं फैलाएंगे। हमारी जिम्मेदारी अपने दर्शकों और हमारी कहानियों के समाज पर पड़ने वाले असर के प्रति है।”
उन्होंने ये भी बताया कि GNT यह तय करने के लिए डेटा और दर्शकों की प्रतिक्रिया का सहारा लेता है कि कौन सी खबर दिखानी है। “हम हर बार खुद से पूछते हैं- क्या ये कहानी किसी के काम आ रही है? क्या इससे किसी को थोड़ा भी फायदा हो रहा है?”
आज जब ज्यादातर ब्रांड किसी सामाजिक मकसद से जुड़ना चाहते हैं और सिर्फ उत्पाद बेचने के बजाय कोई मतलब वाली बात करना चाहते हैं, रंधावा मानती हैं कि GNT उनके लिए बिल्कुल सही मंच है। उन्होंने कहा, “आज के ब्रांड्स कुछ सार्थक करना चाहते हैं, और GNT उन्हें वो मौका देता है। हमने देखा है कि ऐसे ब्रांड्स के साथ हमारा बहुत अच्छा तालमेल बना है, जो शिक्षा, स्वास्थ्य या पर्यावरण जैसे क्षेत्रों में अच्छा काम कर रहे हैं।”
डिजिटल दौर में पत्रकारिता जैसे-जैसे बदल रही है, रंधावा को उम्मीद है कि अच्छी पत्रकारिता की जरूरत हमेशा बनी रहेगी। “सख्त और तीखी पत्रकारिता की जगह हमेशा रहेगी, लेकिन उतनी ही जरूरत उस पत्रकारिता की भी है जो उम्मीद जगाए,”
उन्होंने कहा। “GNT में हम यही संतुलन बनाने की कोशिश कर रहे हैं कि खबरें दें, हौसला बढ़ाएं और लोगों को जोड़ें।”
जब मीडिया पर अक्सर डर फैलाने या गुस्सा भड़काने का आरोप लगता है, तब नवज्योत और उनकी टीम एक ऐसा रास्ता दिखा रही हैं जो भरोसे पर टिका है, इंसानियत को आगे रखता है और ‘अच्छा करने’ की हिम्मत दिखाता है।
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