एपल में करीब डेढ़ दशक बाद नेतृत्व परिवर्तन हुआ है। टिम कुक ने सीईओ पद छोड़ा और जॉन टर्नस ने कंपनी की कमान संभाली। कुक अब एग्जीक्यूटिव चेयरमैन रहेंगे।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
एपल (Apple) में करीब 15 साल बाद नेतृत्व का बड़ा बदलाव हुआ है। टिम कुक (Tim Cook) ने कंपनी के सीईओ (CEO) पद से विदाई ले ली। अब जॉन टर्नस (John Ternus) ने एपल की कमान संभाल ली है। टिम कुक कंपनी में एग्जीक्यूटिव चेयरमैन (Executive Chairman) की भूमिका निभाएंगे, जबकि जॉन टर्नस ने 1 सितंबर से सीईओ का पद संभाल लिया है।
टिम कुक करीब 30 साल से एपल से जुड़े हुए हैं। उन्होंने 2011 में कंपनी के सीईओ की जिम्मेदारी संभाली थी। यह बदलाव स्टीव जॉब्स (Steve Jobs) के निधन से कुछ सप्ताह पहले हुआ था। अब कुक के सीईओ पद से हटने के साथ एपल एक नए नेतृत्व के दौर में पहुंच गया है।
सीईओ के तौर पर अपने आखिरी दिन टिम कुक ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर एपल कम्युनिटी के लिए एक संदेश साझा किया। उन्होंने कहा कि भले ही उनकी भूमिका बदल रही है, लेकिन एपल कम्युनिटी के लिए उनका प्यार कभी नहीं बदलेगा।
Sending lots of love to the Apple community on my last day as CEO. My title changes tomorrow, but the love I have for the Apple community never will. Thank you for being a constant source of inspiration. My gratitude is endless, and I’m excited for the next chapter!
— Tim Cook (@tim_cook) August 31, 2026
कुक ने कर्मचारियों को लगातार प्रेरित करने के लिए धन्यवाद दिया और अपनी कृतज्ञता जाहिर की। कर्मचारियों को भेजे आखिरी मेमो में उन्होंने स्टीव जॉब्स को भी याद किया और एपल की सफलता का श्रेय कंपनी की पूरी टीम को दिया।
टिम कुक के नेतृत्व में एपल ने कारोबार का बड़े स्तर पर विस्तार किया। सोमवार को कंपनी का मार्केट वैल्यूएशन (Market Valuation) 4.5 ट्रिलियन डॉलर के पार पहुंच गया। इससे एपल दुनिया की सबसे मूल्यवान कंपनियों में अपनी मजबूत स्थिति बनाए रखने में सफल रही है।
कुक के कार्यकाल में कंपनी ने अपने प्रोडक्ट पोर्टफोलियो के साथ हार्डवेयर, चिप्स और टेक्नोलॉजी इकोसिस्टम को भी मजबूत किया। इस दौरान एपल वॉच (Apple Watch), एयरपॉड्स (AirPods), होमपॉड (HomePod) और विजन प्रो (Vision Pro) जैसे नए प्रोडक्ट्स लॉन्च किए गए।
जॉन टर्नस ने साल 2001 में एपल के साथ काम शुरू किया था। सीईओ बनने से पहले वह सीनियर वाइस प्रेसिडेंट ऑफ हार्डवेयर इंजीनियरिंग (Senior Vice President of Hardware Engineering) की जिम्मेदारी संभाल रहे थे।
एपल के कई प्रमुख प्रोडक्ट्स के विकास में टर्नस की अहम भूमिका रही है। इनमें मैक (Mac), आईपैड (iPad) और एयरपॉड्स (AirPods) जैसे प्रोडक्ट शामिल हैं। हार्डवेयर इंजीनियरिंग और प्रोडक्ट डेवलपमेंट का उनका लंबा अनुभव अब कंपनी के शीर्ष नेतृत्व में काम आएगा।
ओरेकल में एक बार फिर बड़े पैमाने पर छंटनी की चर्चा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, लागत घटाने के लिए कंपनी दुनियाभर में 7 हजार से 10 हजार नौकरियां कम कर सकती है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
अमेरिका की टेक्नोलॉजी कंपनी ओरेकल (Oracle) में एक बार फिर बड़े पैमाने पर छंटनी की चर्चा तेज हो गई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, कंपनी अपनी लागत कम करने के लिए दुनियाभर में कर्मचारियों की संख्या घटाने की तैयारी कर रही है। इस संभावित फैसले का असर भारत में काम कर रहे कर्मचारियों पर भी पड़ सकता है।
हालांकि, कंपनी की ओर से अभी तक इस संबंध में कोई आधिकारिक जानकारी साझा नहीं की गई है। रिपोर्ट्स में बताया जा रहा है कि ओरेकल ने अपनी टीमों को बजट कम करने के संकेत दिए हैं। इसके बाद कंपनी के कर्मचारियों के बीच संभावित जॉब कट को लेकर हलचल बढ़ गई है।
ओरेकल कितने कर्मचारियों को नौकरी से हटा सकती है, इसका आधिकारिक आंकड़ा अभी सामने नहीं आया है। हालांकि, कई रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि कंपनी दुनियाभर में करीब 7 हजार से 10 हजार कर्मचारियों की छंटनी कर सकती है।
भारत में इस संभावित छंटनी से कितने कर्मचारी प्रभावित होंगे, फिलहाल इसकी कोई जानकारी नहीं है। इससे पहले भी ओरेकल में कर्मचारियों की टीम और भूमिकाओं में बदलाव की खबरें सामने आई थीं।
ओरेकल एक अमेरिका आधारित अंतरराष्ट्रीय टेक्नोलॉजी कंपनी है। कंपनी दूसरी कंपनियों और बड़े संस्थानों को क्लाउड (Cloud), डेटाबेस (Database) और बिजनेस सॉफ्टवेयर (Business Software) जैसी तकनीकी सेवाएं उपलब्ध कराती है।
भारत में भी ओरेकल का कारोबार मौजूद है और यहां कंपनी में बड़ी संख्या में कर्मचारी काम करते हैं। ऐसे में अगर वैश्विक स्तर पर छंटनी का फैसला लिया जाता है, तो भारत में इसके प्रभाव को लेकर भी नजर बनी हुई है।
सरकार ने सेमीकॉन 2.0 योजना का नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। 1,27,500 करोड़ रुपये की इस योजना का लक्ष्य भारत में मजबूत सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम तैयार करना है।
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भारत में सेमीकंडक्टर (Semiconductor) इंडस्ट्री को मजबूत करने की दिशा में सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। सोमवार को सरकार ने ‘सेमीकॉन 2.0’ (Semicon 2.0) योजना का नोटिफिकेशन जारी कर दिया। इसके साथ ही 1,27,500 करोड़ रुपये की इस महत्वाकांक्षी योजना को लागू करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है।
इस कार्यक्रम का उद्देश्य देश में केवल चिप निर्माण बढ़ाना नहीं है, बल्कि सेमीकंडक्टर से जुड़ा पूरा इकोसिस्टम तैयार करना है। इसमें घरेलू स्तर पर चिप डिजाइन और इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी (Intellectual Property) विकसित करने के साथ उपकरण, मटीरियल, एडवांस्ड पैकेजिंग, रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D) और टैलेंट डेवलपमेंट जैसे क्षेत्रों पर भी जोर दिया जाएगा।
चिप निर्माण से लेकर डिजाइन तक पर फोकस
सेमीकंडक्टर को दुनिया भर में तेजी से रणनीतिक संसाधन के तौर पर देखा जा रहा है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (Artificial Intelligence) के बढ़ते इस्तेमाल के कारण एडवांस्ड चिप्स और मेमोरी की मांग में तेजी आई है।
इसके अलावा वैश्विक सप्लाई चेन में कमजोरियों और बदलती भू-राजनीतिक परिस्थितियों ने भी सेमीकंडक्टर निर्माण क्षमता बढ़ाने की जरूरत को बढ़ाया है। ऐसे में कई कंपनियां कुछ चुनिंदा देशों पर उत्पादन के लिए अपनी निर्भरता कम करने की कोशिश कर रही हैं।
केंद्रीय कैबिनेट (Union Cabinet) ने 15 जुलाई 2026 को ‘सेमीकॉन 2.0’ को मंजूरी दी थी। अब जारी नोटिफिकेशन में योजना के तहत 1,27,500 करोड़ रुपये के बजट के इस्तेमाल, इंसेंटिव (Incentive) और अलग-अलग श्रेणियों के लिए पात्रता से जुड़ी रूपरेखा बताई गई है।
आईटी सेक्रेटरी एस. कृष्णन (S. Krishnan) ने कहा कि सेमीकॉन 2.0 के जरिए भारत के सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम के विकास के अगले चरण में आगे बढ़ने का समय आ गया है। उन्होंने योजना का उद्देश्य आत्मनिर्भरता हासिल करने के साथ वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने वाली इंडस्ट्री तैयार करना बताया।
स्टार्टअप्स और कंपनियों को भी मिलेगा समर्थन
कमर्शियल सेक्टर के लिए चिप डिजाइनिंग के क्षेत्र में स्टार्टअप्स और भारतीय नागरिकों या ओवरसीज सिटिजन ऑफ इंडिया (OCI) के स्वामित्व वाली कंपनियां योजना के लिए पात्र होंगी।
स्टार्टअप्स को आर्थिक सहायता ग्रांट (Grant) और इक्विटी को-इन्वेस्टमेंट (Equity Co-investment) के रूप में दी जाएगी। वहीं कंपनियों के लिए सहायता रॉयल्टी फाइनेंसिंग (Royalty Financing) या इक्विटी को-इन्वेस्टमेंट के जरिए उपलब्ध होगी।
फैब्स (Fabs) यानी सेमीकंडक्टर निर्माण इकाइयों की स्थापना को बढ़ावा देने के लिए भी वित्तीय सहायता का प्रावधान किया गया है। सिलिकॉन फैब्स के लिए 40 फीसदी और कंपाउंड, डिस्प्ले तथा अन्य विशेष फैब्स के लिए 35 फीसदी वित्तीय सहायता देने की व्यवस्था है। डिस्प्ले फैब्स में एलसीडी (LCD), ओएलईडी (OLED) और माइक्रो एलईडी (Micro LED) जैसी तकनीकें शामिल हैं।
एडवांस्ड पैकेजिंग को भी मिलेगा बढ़ावा
योजना में एटीएमपी/ओएसएटी (ATMP/OSAT) यानी असेंबली, टेस्टिंग, मार्किंग और पैकेजिंग से जुड़ी सुविधाओं को मजबूत करने पर भी ध्यान दिया गया है। इसके तहत एडवांस्ड और पारंपरिक दोनों तरह की पैकेजिंग को समर्थन दिया जाएगा।
एडवांस्ड पैकेजिंग के लिए कैपिटल एक्सपेंडिचर (CAPEX) का 35 फीसदी और पारंपरिक पैकेजिंग के लिए 25 फीसदी इंसेंटिव देने का प्रावधान है। इससे देश में सेमीकंडक्टर निर्माण के साथ पैकेजिंग क्षमता विकसित करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
ब्रिटेन की हाई कोर्ट ने स्मार्टवॉच वॉच-फेस ऐप्स से जुड़े ट्रेडमार्क मामले में सैमसंग को स्वॉच ग्रुप को 11.6 मिलियन डॉलर मुआवजा देने का आदेश दिया है।
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सैमसंग (Samsung) को स्मार्टवॉच (Smartwatch) के वॉच-फेस ऐप्स से जुड़े ट्रेडमार्क विवाद में बड़ा झटका लगा है। ब्रिटेन की हाई कोर्ट (High Court) ने कंपनी को स्विस घड़ी कंपनी स्वॉच ग्रुप (Swatch Group) को 11.6 मिलियन डॉलर यानी करीब 110 करोड़ रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया है।
यह मामला सैमसंग के गैलेक्सी ऐप स्टोर (Galaxy App Store) पर उपलब्ध कुछ वॉच-फेस ऐप्स से जुड़ा है। ये ऐप्स 2015 से 2019 के बीच प्लेटफॉर्म पर मौजूद थे। स्वॉच ग्रुप का आरोप था कि कुछ थर्ड-पार्टी ऐप्स (Third-Party Apps) में उसके लग्जरी घड़ी ब्रांड्स के डिजाइन और ट्रेडमार्क की नकल की गई थी।
स्वॉच ग्रुप के पास ओमेगा (Omega), लॉन्गाइन्स (Longines) और ब्रेगेट (Breguet) जैसे प्रीमियम घड़ी ब्रांड हैं। कंपनी का कहना था कि इन ब्रांड्स के नाम और डिजाइन का इस्तेमाल बिना अनुमति किया गया और सैमसंग के प्लेटफॉर्म के जरिए यूजर्स तक ये ऐप्स पहुंचे।
रिपोर्ट के अनुसार, ब्रिटेन और यूरोप में इन वॉच-फेस ऐप्स के करीब 1.6 लाख डाउनलोड दर्ज किए गए थे। स्वॉच ग्रुप ने इस मामले में सैमसंग से करीब 170 मिलियन डॉलर यानी लगभग 1,500 करोड़ रुपये के मुआवजे की मांग की थी।
वहीं, सैमसंग का पक्ष था कि उसे इस मामले में केवल करीब 300 डॉलर का भुगतान करना चाहिए। लेकिन अदालत ने कंपनी को प्लेटफॉर्म पर इन ऐप्स की उपलब्धता के लिए जिम्मेदार माना और 11.6 मिलियन डॉलर के मुआवजे का आदेश दिया।
अदालत के मुताबिक, भले ही संबंधित वॉच-फेस ऐप्स थर्ड-पार्टी डेवलपर्स ने बनाए थे, लेकिन उन्हें सैमसंग के प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराने में कंपनी की भी जिम्मेदारी थी। जज ने कहा कि सैमसंग का ऐप रिव्यू सिस्टम (App Review System) कथित ट्रेडमार्क उल्लंघन को रोकने में सफल नहीं रहा।
फैसले में लग्जरी ब्रांड्स की पहचान और बाजार में उनकी छवि को भी महत्वपूर्ण माना गया। अदालत के मुताबिक, महंगे घड़ी ब्रांड्स के डिजाइन और पहचान को मुफ्त या बेहद कम कीमत पर उपलब्ध कराए जाने से उनकी वैल्यू और ब्रांड इमेज प्रभावित हो सकती है।
इस मामले का असर सिर्फ सैमसंग तक सीमित नहीं माना जा रहा है। यह फैसला बड़ी टेक कंपनियों (Tech Companies) के लिए भी महत्वपूर्ण हो सकता है, क्योंकि इससे थर्ड-पार्टी ऐप्स के जरिए होने वाले ट्रेडमार्क उल्लंघन में प्लेटफॉर्म संचालकों की जिम्मेदारी पर सवाल उठता है।
फिलहाल सैमसंग ने इस फैसले को अंतिम रूप से स्वीकार नहीं किया है। कंपनी मामले में आगे अपील (Appeal) करने पर विचार कर रही है। ऐसे में आने वाले समय में इस विवाद पर कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है।
यूट्यूब ने अमेरिका के योग्य क्रिएटर्स के लिए अमेजन को अपने शॉपिंग एफिलिएट प्रोग्राम से जोड़ा है। वीडियो में प्रोडक्ट टैग कर कमीशन कमाया जा सकेगा।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
यूट्यूब (YouTube) ने अपने शॉपिंग एफिलिएट प्रोग्राम में अमेजन (Amazon) को शामिल कर दिया है। इस नई साझेदारी के बाद अमेरिका के योग्य क्रिएटर्स अपने शॉर्ट्स, लंबे वीडियो और लाइवस्ट्रीम में अमेजन के चुनिंदा प्रोडक्ट टैग कर सकेंगे। इससे क्रिएटर्स को प्रोडक्ट की सिफारिश के जरिए कमाई का एक नया रास्ता मिलेगा।
यूट्यूब स्टूडियो के प्रोडक्ट पिकर की मदद से क्रिएटर्स उपलब्ध अमेजन प्रोडक्ट चुनकर उन्हें सीधे अपने कंटेंट के साथ जोड़ सकेंगे। अमेजन की ओर से लोकप्रिय और ट्रेंडिंग प्रोडक्ट्स की सूची भी उपलब्ध कराई जाएगी। अगर कोई खास प्रोडक्ट सूची में नहीं है, तो क्रिएटर उसे उपलब्ध कराने के लिए यूट्यूब सपोर्ट से अनुरोध कर सकता है।
अपने आप भी होंगे प्रोडक्ट टैग
इस व्यवस्था में ऑटोमैटिक टैगिंग की सुविधा भी दी गई है। इसे सक्रिय करने पर यूट्यूब हालिया वीडियो को स्कैन करके उनमें मौजूद योग्य अमेजन प्रोडक्ट की पहचान कर सकता है और उन्हें टैग कर सकता है। आने वाले कंटेंट में भी यह प्रक्रिया अपने आप लागू हो सकती है।
क्रिएटर्स को यूट्यूब स्टूडियो में क्लिक, बिक्री और अनुमानित कमाई का कुल डेटा दिखाई देगा। हालांकि, हर प्रोडक्ट या प्रत्येक वीडियो से हुई बिक्री का अलग-अलग विस्तृत आंकड़ा उपलब्ध नहीं होगा।
अभी अमेरिका तक सीमित है सुविधा
फिलहाल यह सुविधा अमेरिका के योग्य क्रिएटर्स के लिए शुरू की गई है। इसके लिए क्रिएटर का यूट्यूब पार्टनर प्रोग्राम और अमेरिकी यूट्यूब शॉपिंग एफिलिएट प्रोग्राम का हिस्सा होना जरूरी है। साथ ही उसके पास सक्रिय अमेजन इन्फ्लुएंसर या अमेजन एसोसिएट्स अकाउंट होना चाहिए।
अमेजन से मिलने वाला कमीशन क्रिएटर के मौजूदा ऐडसेंस भुगतान सिस्टम के जरिए दिया जाएगा। लौटाए गए प्रोडक्ट की वजह से कमीशन में कमी भी हो सकती है। खास बात यह है कि वीडियो देखने वाले सभी लोग अमेरिका से हों, यह जरूरी नहीं है। अमेरिका के बाहर के दर्शकों को भी प्रोडक्ट टैग दिखाई दे सकते हैं। उपलब्ध होने पर यूट्यूब उनके लिए स्थानीय भरोसेमंद विक्रेता का विकल्प दिखा सकता है।
इस साझेदारी से यूट्यूब पर कंटेंट देखने, प्रोडक्ट खोजने और खरीदारी करने के बीच की दूरी और कम होने वाली है। इससे क्रिएटर इकोसिस्टम में एफिलिएट कमाई का महत्व भी बढ़ सकता है।
Apple की iPhone 18 सीरीज को लेकर नई रिपोर्ट्स सामने आई हैं। सितंबर 2026 में Pro मॉडल और फोल्डेबल iPhone लॉन्च हो सकते हैं, जबकि स्टैंडर्ड मॉडल 2027 तक टल सकते हैं।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
ऐपल (Apple) की अगली आईफोन सीरीज (iPhone Series) को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। कंपनी सितंबर 2026 में iPhone 18 Pro और iPhone 18 Pro Max को पेश कर सकती है। हालांकि, इस बार लॉन्च को लेकर सबसे बड़ा बदलाव यह हो सकता है कि ऐपल पूरी iPhone 18 लाइनअप को एक साथ बाजार में न उतारे।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, सितंबर में कंपनी अपने प्रीमियम मॉडल्स के साथ पहली बार फोल्डेबल आईफोन (Foldable iPhone) भी पेश कर सकती है। वहीं, स्टैंडर्ड iPhone 18 और iPhone 18e की लॉन्चिंग को 2027 की शुरुआत तक आगे बढ़ाए जाने की संभावना जताई जा रही है।
अगर ऐसा होता है तो सितंबर में नया आईफोन खरीदने की योजना बना रहे ग्राहकों के लिए यह बड़ा बदलाव होगा। आमतौर पर ऐपल इसी महीने अपनी नई सीरीज के कई मॉडल एक साथ लॉन्च करती रही है। लेकिन इस बार कंपनी पहले महंगे और हाई-एंड मॉडल्स पर ध्यान केंद्रित कर सकती है।
iPhone 18 Pro में मिल सकते हैं बड़े बदलाव
iPhone 18 Pro के डिजाइन को लेकर अभी तक सामने आई जानकारियों के मुताबिक, फोन का मूल डिजाइन मौजूदा Pro मॉडल्स से पूरी तरह अलग नहीं होगा। हालांकि, डिस्प्ले के फ्रंट हिस्से में महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिल सकता है।
कहा जा रहा है कि iPhone 18 Pro में Dynamic Island (Dynamic Island) का आकार छोटा किया जा सकता है। इसके अलावा Face ID (Face ID) से जुड़े कुछ कंपोनेंट्स को स्क्रीन के नीचे शिफ्ट करने की योजना पर भी काम होने की बात सामने आई है। अगर यह तकनीक लागू होती है, तो फोन का डिस्प्ले ज्यादा साफ और कम बाधित नजर आ सकता है।
A20 Pro चिप हो सकता है सबसे बड़ा अपग्रेड
iPhone 18 Pro में सबसे महत्वपूर्ण बदलाव फोन के अंदर देखने को मिल सकता है। रिपोर्ट्स के अनुसार, इसमें ऐपल का नया A20 Pro (A20 Pro) चिप दिया जा सकता है। यह 2nm प्रोसेस टेक्नोलॉजी पर तैयार कंपनी का पहला आईफोन चिप होने की संभावना है।
2nm प्रोसेस का फायदा प्रदर्शन और पावर एफिशिएंसी दोनों में मिल सकता है। आसान भाषा में समझें तो नया प्रोसेसर ज्यादा ताकत के साथ कम ऊर्जा खपत करने में मदद कर सकता है। इसका असर बैटरी बैकअप पर भी देखने को मिल सकता है।
AI फीचर्स (AI Features), कैमरा प्रोसेसिंग और हाई-एंड गेमिंग जैसे कामों में लगातार ज्यादा प्रोसेसिंग पावर की जरूरत बढ़ रही है। ऐसे में A20 Pro को iPhone 18 Pro के सबसे अहम हार्डवेयर अपग्रेड्स में गिना जा रहा है।
हगिंग फेस हैक मामले में अलबामा के अटॉर्नी जनरल ने OpenAI को समन भेजा है। जांच में कंपनी की सुरक्षा व्यवस्था और उपभोक्ता संरक्षण कानूनों की पड़ताल होगी।
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अमेरिका के अलबामा (Alabama) राज्य में OpenAI की मुश्किलें बढ़ती दिख रही हैं। राज्य के अटॉर्नी जनरल ने कंपनी को हगिंग फेस (Hugging Face) से जुड़े साइबर सुरक्षा मामले में समन भेजा है। जांच का फोकस OpenAI की कथित सुरक्षा खामियों और कंपनी की ओर से अपने AI सिस्टम की निगरानी को लेकर है।
यह कार्रवाई उस घटना के कुछ सप्ताह बाद हुई है, जिसमें OpenAI ने स्वीकार किया था कि उसका एक अभी तक लॉन्च नहीं किया गया साइबर सुरक्षा मॉडल अपने अलग-थलग वातावरण से बाहर निकलकर इंटरनेट से जुड़ गया था। इसके बाद मॉडल ने AI डेटासेट प्लेटफॉर्म हगिंग फेस को हैक कर लिया था।
अलबामा के अटॉर्नी जनरल स्टीव मार्शल (Steve Marshall) के कार्यालय की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक, राज्य यह जांच करना चाहता है कि क्या OpenAI अपने उत्पादों की पर्याप्त सुरक्षा सुनिश्चित करने में विफल रही और क्या इससे उपभोक्ता संरक्षण कानूनों का उल्लंघन हुआ।
इससे पहले इसी महीने मार्शल समेत 15 राज्यों के अटॉर्नी जनरल ने OpenAI को पत्र भेजकर हगिंग फेस घटना से जुड़े रिकॉर्ड सुरक्षित रखने को कहा था।
OpenAI के प्रवक्ता नेट इवांस (Nate Evans) ने कहा कि हगिंग फेस की घटना AI सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण थी। कंपनी बाहरी सलाहकारों के साथ इसकी विस्तृत समीक्षा कर रही है और जांच पूरी होने के बाद संबंधित सरकारी अधिकारियों के साथ तकनीकी रिपोर्ट साझा करेगी।
OpenAI प्रमुख सैम ऑल्टमैन ने स्वीकार किया कि उन्होंने AI के प्रभाव और कंपनियों में इसके इस्तेमाल की रफ्तार को लेकर पहले जरूरत से ज्यादा तेज अनुमान लगाया था।
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आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (Artificial Intelligence) के तेजी से बढ़ते प्रभाव के बीच OpenAI (OpenAI) के प्रमुख सैम ऑल्टमैन (Sam Altman) ने AI को अपनाने की रफ्तार को लेकर अपनी पुरानी सोच पर खुलकर बात की है। उन्होंने स्वीकार किया कि तकनीक के विस्तार और इसके आर्थिक असर को लेकर उनके शुरुआती अनुमान वास्तविकता से ज्यादा महत्वाकांक्षी थे।
हाल ही में पॉडकास्टर डेविड सेनरा (David Senra) के साथ बातचीत में ऑल्टमैन ने बताया कि उन्हें उम्मीद थी कि 2023 में GPT-4 (GPT-4) के आने के बाद कंपनियों के काम करने का तरीका काफी तेजी से बदल जाएगा। उनका अनुमान था कि AI के कारण बिजनेस की प्रक्रियाओं और कामकाज में जल्द ही बड़े स्तर पर बदलाव दिखाई देने लगेंगे। हालांकि, ऐसा बदलाव उनकी उम्मीद के मुताबिक तेजी से नहीं हुआ।
ऑल्टमैन के अनुसार, इसकी एक बड़ी वजह यह है कि तकनीक बदलने के बावजूद लोगों और संस्थानों की कार्यशैली तुरंत नहीं बदलती। कंपनियां लंबे समय से इस्तेमाल किए जा रहे सिस्टम, टूल्स और प्रक्रियाओं पर निर्भर रहती हैं। ग्राहक भी उन्हीं सेवाओं और कंपनियों के साथ जुड़े रहते हैं, जिनका इस्तेमाल वे पहले से करते आए हैं।
कर्मचारियों के स्तर पर भी बदलाव आसान नहीं होता। हर व्यक्ति के काम करने का एक स्थापित तरीका होता है और नई तकनीक को अपनाने के लिए केवल AI उपलब्ध होना पर्याप्त नहीं है। इसके लिए काम करने की पूरी प्रक्रिया में बदलाव करना पड़ सकता है। यही वजह है कि AI की क्षमता बढ़ने के बावजूद उसका प्रभाव कंपनियों के रोजमर्रा के काम में धीरे-धीरे दिखाई दे रहा है।
ऑल्टमैन ने इस धीमी गति को पूरी तरह नकारात्मक नहीं माना। उनके मुताबिक, धीरे-धीरे होने वाला परिवर्तन कंपनियों और समाज को नई तकनीक को समझने तथा उसके सही इस्तेमाल के तरीके खोजने का समय देता है। इससे संगठन यह तय कर सकते हैं कि AI को अपने मौजूदा कामकाज में किस स्तर पर शामिल किया जाए।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तेजी से नौकरियों और काम करने के तरीकों को बदल रहा है। ऐसे में AI के असर को समझने वाली रिसर्च का तरीका भी लगातार बदल रहा है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तेजी से नौकरियों और काम करने के तरीकों को बदल रहा है। ऐसे में AI के असर को समझने वाली रिसर्च का तरीका भी लगातार बदल रहा है। इसी को देखते हुए OpenAI अपनी इकोनॉमिक रिसर्च टीम का विस्तार करने की तैयारी कर रही है। कंपनी ऐसे लोगों की तलाश में है, जिनके पास अच्छी एनालिटिकल क्षमता के साथ-साथ बदलते हालात के हिसाब से खुद को ढालने, टीम के साथ काम करने और स्वतंत्र रूप से सोचने की क्षमता हो।
OpenAI की इकोनॉमिक रिसर्च टीम की अगुआई कंपनी के चीफ इकोनॉमिस्ट रोनी चटर्जी (Ronnie Chatterji) कर रहे हैं। उन्होंने Business Insider से बातचीत में बताया कि AI जिस तेजी से विकसित हो रहा है, उसके कारण रिसर्च से जुड़े सवाल भी तेजी से बदल रहे हैं। इसलिए इस टीम में काम करने वाले शोधकर्ताओं को ऐसे सवालों पर काम करने के लिए तैयार रहना होगा, जिनका जवाब पहले से तय नहीं है।
चटर्जी के मुताबिक, AI के क्षेत्र में बदलाव की रफ्तार इतनी तेज है कि रिसर्च टीम का काम भी लगातार बदल रहा है। उन्होंने कहा कि टीम यह समझने पर काम करती है कि AI का असर कर्मचारियों, कंपनियों, संस्थानों और पूरी अर्थव्यवस्था पर किस तरह पड़ रहा है।
तीन बड़े क्षेत्रों पर हो रहा है काम
चटर्जी ने बताया कि OpenAI की इकोनॉमिक रिसर्च टीम का काम मोटे तौर पर तीन बड़े हिस्सों में बंटा हुआ है।
पहला क्षेत्र यह समझना है कि AI पहले से नौकरियों और कर्मचारियों को किस तरह प्रभावित कर रहा है। इसमें यह देखना भी शामिल है कि कंपनियां AI को अपनाने के बाद किस तरह अपने काम करने के तरीके बदल रही हैं और इसका रोजगार पर क्या असर पड़ रहा है।
दूसरा क्षेत्र कंपनियों में AI को अपनाने और संगठनात्मक बदलाव से जुड़ा है। जैसे-जैसे कंपनियां ज्यादा सक्षम AI टूल्स का इस्तेमाल कर रही हैं, रिसर्च टीम यह समझने की कोशिश करती है कि AI सिर्फ काम को आसान बना रहा है या कंपनियों के काम करने और संगठन चलाने के तरीके में भी बड़ा बदलाव ला रहा है।
तीसरा क्षेत्र भविष्य में AI के संभावित आर्थिक प्रभावों को समझने पर केंद्रित है। इसमें ऐसे विषय भी शामिल हो सकते हैं, जो अभी पारंपरिक आर्थिक रिसर्च का हिस्सा नहीं रहे हैं।
चटर्जी ने उदाहरण के तौर पर Recursive Self-Improvement का जिक्र किया। इसका मतलब ऐसी संभावित स्थिति से है, जिसमें AI सिस्टम खुद को बेहतर बनाने में सक्षम हो सकें। उनके मुताबिक, AI के विकास के साथ इस तरह के विषय आने वाले समय में आर्थिक रिसर्च के लिए महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
सिर्फ तकनीकी जानकारी काफी नहीं
OpenAI की इस टीम में काम करने के लिए सिर्फ तकनीकी विशेषज्ञता को ही पर्याप्त नहीं माना जा रहा है। चटर्जी के मुताबिक, उम्मीदवारों में ऐसे सवालों पर काम करने की क्षमता होनी चाहिए, जिनके जवाब आसानी से उपलब्ध नहीं हैं।
उन्होंने कहा कि शोधकर्ताओं को ऐसी परिस्थितियों में काम करने में सहज होना चाहिए, जहां चीजें स्पष्ट न हों। AI के तेजी से बदलते क्षेत्र में यह क्षमता इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि आज कोई विषय छोटा या सीमित लग सकता है, लेकिन AI की नई क्षमताओं के सामने आने के बाद वही विषय महत्वपूर्ण बन सकता है।
टीम ऐसे लोगों को भी महत्व देती है जो बदलती प्राथमिकताओं के अनुसार खुद को ढाल सकें। यानी शोधकर्ताओं को केवल तय किए गए सवालों के जवाब तलाशने तक सीमित नहीं रहना होगा, बल्कि उन्हें यह भी समझना होगा कि कौन से सवाल महत्वपूर्ण हैं और किन मुद्दों पर रिसर्च की जरूरत है।
सरकारों और यूनिवर्सिटी के साथ भी काम
OpenAI की इकोनॉमिक रिसर्च टीम का काम सिर्फ कंपनी के भीतर तक सीमित नहीं है। टीम OpenAI के कर्मचारियों के साथ-साथ सरकारों और विश्वविद्यालयों के साथ भी काम करती है। इसकी वजह यह है कि AI से जुड़े आर्थिक और नीतिगत सवाल काफी व्यापक हैं और उनका असर अलग-अलग क्षेत्रों पर पड़ सकता है।
चटर्जी के मुताबिक, रिसर्च टीम के सदस्यों से यह उम्मीद भी की जाती है कि वे खुद महत्वपूर्ण सवालों की पहचान करें और यह तय करें कि उन सवालों के जवाब से किन लोगों या संस्थानों को फायदा हो सकता है।
अलग-अलग क्षेत्रों से लोगों को जोड़ रही टीम
रोनी चटर्जी 2024 में OpenAI से जुड़े थे। इससे पहले वह अमेरिकी सरकार और शिक्षा के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण भूमिकाओं में काम कर चुके हैं। वह अमेरिकी प्रशासन के $52 बिलियन CHIPS कार्यक्रम से भी जुड़े रहे हैं।
वह अमेरिका की नेशनल इकनॉमिक काउंसिल में एक्टिंग डिप्टी डायरेक्टर (Acting Deputy Director) और US कॉमर्स डिपार्टमेंट में चीफ इकनॉमिस्ट (Chief Economist) की भूमिका भी निभा चुके हैं। इसके अलावा वह Duke University में Business and Public Policy के प्रोफेसर हैं।
OpenAI में चटर्जी करीब एक दर्जन लोगों की इकोनॉमिक रिसर्च टीम का नेतृत्व कर रहे हैं और अब इसमें और लोगों को शामिल करने की तैयारी है।
इस टीम में इकोनॉमिस्ट और डेटा साइंटिस्ट के अलावा बिजनेस प्रोफेशनल्स, पूर्व शिक्षक और सरकार में काम कर चुके लोग भी शामिल हैं। अलग-अलग क्षेत्रों से आने वाले लोगों की यह विविधता इस बात को दिखाती है कि AI के आर्थिक असर को समझने के लिए केवल एक ही विषय की विशेषज्ञता काफी नहीं है।
AI जिस तेजी से लोगों के काम करने के तरीके और कंपनियों के संगठनात्मक ढांचे को बदल रहा है, उससे OpenAI की रिसर्च टीम के सामने लगातार नए सवाल खड़े हो रहे हैं। ऐसे में इस टीम में काम करने वालों के लिए सिर्फ सही जवाब जानना ही जरूरी नहीं होगा, बल्कि सही सवाल पहचानने और बदलती परिस्थितियों के साथ उस पर काम करने की क्षमता भी उतनी ही महत्वपूर्ण होगी।
नासा ने निचली कक्षा में बेहद कम हवा के घनत्व और खिंचाव को मापने वाली सस्ती तकनीक विकसित करने के लिए ऑर्बिटल क्लैरिटी चैलेंज शुरू किया है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
अंतरिक्ष में घूम रहे सैटेलाइट्स की कक्षा पर पृथ्वी के ऊपरी वायुमंडल का असर लगातार बना रहता है। इसी प्रभाव को बेहतर तरीके से समझने के लिए नासा (NASA) ने 19 अगस्त 2026 को ऑर्बिटल क्लैरिटी चैलेंज (Orbital Clarity Challenge) नाम से एक नई प्रतियोगिता शुरू की है। इसका उद्देश्य ऐसी कम लागत वाली तकनीक तैयार करना है, जो निचली पृथ्वी कक्षा में मौजूद बेहद विरल हवा को सटीकता से माप सके।
यह प्रतियोगिता नासा के टेकलीप प्राइज प्रोग्राम (TechLeap Prize Program) के तहत आयोजित की जा रही है। इसमें भाग लेने वाली टीमों को ऐसे छोटे और व्यावहारिक उपकरण विकसित करने होंगे, जो अंतरिक्ष में हवा के घनत्व, दबाव या उससे पैदा होने वाले ड्रैग यानी खिंचाव का पता लगा सकें।
पृथ्वी से काफी ऊंचाई पर स्थित थर्मोस्फीयर (Thermosphere) में वायुमंडल बेहद विरल होता है। इसके बावजूद यह सैटेलाइट्स की गति और उनकी कक्षा को प्रभावित करता है। खासतौर पर जब सूर्य की गतिविधियां बढ़ती हैं, तब ऊपरी वायुमंडल गर्म होकर फैलता है। इसके परिणामस्वरूप सैटेलाइट्स पर वायुमंडलीय खिंचाव बढ़ सकता है और उनकी कक्षा में बदलाव आने की संभावना रहती है।
नासा के मुताबिक, इस चुनौती में ऐसे सेंसर विकसित करने पर जोर है जिन्हें मौजूदा महंगे वैज्ञानिक उपकरणों के मुकाबले कम लागत में तैयार किया जा सके। इन्हें बड़ी संख्या में बनाया जा सके और सामान्य व्यावसायिक अंतरिक्ष यानों पर आसानी से लगाया जा सके, यह भी प्रतियोगिता का अहम हिस्सा है।
यदि बड़ी संख्या में सैटेलाइट्स पर ऐसे सेंसर लगाए जाते हैं, तो वैज्ञानिकों को ऊपरी वायुमंडल की स्थिति से जुड़े ज्यादा व्यापक और लगातार आंकड़े मिल सकेंगे। इससे सैटेलाइट संचालकों को कक्षा में होने वाले बदलावों को समझने और जरूरत पड़ने पर उनकी स्थिति सुधारने में मदद मिल सकती है।
ऑर्बिटल क्लैरिटी चैलेंज को तीन चरणों में आयोजित किया जाएगा। इस पूरी प्रतियोगिता के लिए करीब 12 महीने की समयसीमा तय की गई है और अधिकतम चार टीमों को विजेता चुना जाएगा। विजेता टीमों के बीच कुल 5 लाख डॉलर यानी लगभग 5 करोड़ रुपये की पुरस्कार राशि बांटी जाएगी।
सिर्फ नकद पुरस्कार ही नहीं, बल्कि विजेता टीमों को अपनी विकसित तकनीक को वास्तविक अंतरिक्ष वातावरण में परखने का अवसर भी मिलेगा। नासा उन्हें मुफ्त टेस्ट फ्लाइट उपलब्ध कराएगा, जिससे सेंसर की क्षमता का सीधे अंतरिक्ष में परीक्षण किया जा सकेगा।
ओपनएआई (OpenAI) ने ब्रायन हर्मन (Brianne Herman) को कॉन्ट्रैक्ट आधार पर B2B इंटीग्रेटेड मार्केटिंग लीड नियुक्त किया है। इससे पहले वह वेरिजॉन में थीं।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
ओपनएआई (OpenAI) ने ब्रायन हर्मन (Brianne Herman) को B2B इंटीग्रेटेड मार्केटिंग लीड (B2B Integrated Marketing Lead) नियुक्त किया है। वह इससे पहले कंपनी में कॉन्ट्रैक्ट आधार पर इंटीग्रेटेड मार्केटिंग मैनेजर के रूप में काम कर रही थीं।
ओपनएआई से जुड़ने से पहले हर्मन ने वेरिजॉन (Verizon) में करीब नौ साल तक काम किया। वहां उनकी आखिरी भूमिका सीनियर मार्केटिंग मैनेजर की थी। इस दौरान उन्होंने मार्केटिंग से जुड़े विभिन्न कार्यों में अनुभव हासिल किया।
हर्मन के करियर में विज्ञापन क्षेत्र का अनुभव भी शामिल है। उन्होंने साची एंड साची (Saatchi & Saatchi) और ओगिल्वी एंड माथर (Ogilvy & Mather) जैसी प्रमुख विज्ञापन एजेंसियों के साथ काम किया है।
ओपनएआई में अपनी नई भूमिका में हर्मन कंपनी की B2B इंटीग्रेटेड मार्केटिंग गतिविधियों पर काम करेंगी। उनकी नियुक्ति ऐसे समय हुई है जब कंपनी अपने AI उत्पादों और सेवाओं के बिजनेस उपयोग को लेकर मार्केटिंग और कम्युनिकेशन गतिविधियों का विस्तार कर रही है।