मेटा के नए फीनिक्स हेडसेट की लीक तस्वीरें सामने आई हैं। चश्मे जैसे पतले डिजाइन वाले इस डिवाइस में कई सेंसर, प्रिस्क्रिप्शन लेंस और बाहरी कंप्यूटिंग डिवाइस मिलने की उम्मीद है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
टेक कंपनी मेटा (Meta) एक नए हेडसेट पर काम कर रही है, जिसे फिलहाल फीनिक्स (Phoenix) नाम से जाना जा रहा है। इस डिवाइस की कुछ लीक तस्वीरें ऑनलाइन सामने आई हैं। बताया जा रहा है कि ये तस्वीरें होराइजन ओएस (Horizon OS) के एक फर्मवेयर पैकेज से मिली हैं।
लीक तस्वीरों में फीनिक्स का डिजाइन सामान्य वीआर हेडसेट (VR Headset) से काफी अलग दिखाई दे रहा है। यह बड़े हेडसेट की जगह चश्मे जैसा पतला नजर आता है। इसमें अलग नोज पैड (Nose Pad) के साथ हेडसेट के किनारों और नीचे कई सेंसर भी दिखाई दे रहे हैं।
फीनिक्स में प्रिस्क्रिप्शन लेंस (Prescription Lenses) लगाने की सुविधा भी मिलने की उम्मीद है। तस्वीरों में इन लेंसों को हेडसेट के अपने लेंस के सामने लगाए जाने की व्यवस्था दिखाई गई है। इससे चश्मा पहनने वाले यूजर्स के लिए डिवाइस का इस्तेमाल आसान हो सकता है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस हेडसेट के साथ एक बाहरी कंप्यूटिंग डिवाइस (Computing Device) दिया जा सकता है, जो केबल के जरिए हेडसेट से जुड़ा होगा। लीक तस्वीरों में यह केबल बाईं तरफ के आर्म से निकलती दिखाई देती है। डिवाइस के सेटअप के लिए क्यूआर कोड (QR Code) का इस्तेमाल भी किया जा सकता है।
हालांकि, फीनिक्स का डिजाइन चश्मे जैसा होने के बावजूद यह पारदर्शी स्मार्ट ग्लास (Smart Glass) की तरह काम नहीं करेगा। इसमें कैमरों की मदद से आसपास का दृश्य रिकॉर्ड करके उसे हेडसेट की स्क्रीन पर दिखाने की व्यवस्था हो सकती है।
रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि मेटा काफी समय से इस डिवाइस पर काम कर रही है। इसे हल्का और प्रीमियम मिक्स्ड-रियलिटी (Mixed Reality) डिवाइस बताया जा रहा है। इसमें आंखों और हाथों से कंट्रोल करने वाली सुविधाएं मिलने की उम्मीद है।
ओरेकल ने वित्त वर्ष 2026 के रिस्ट्रक्चरिंग प्रोग्राम की अनुमानित लागत करीब 700 मिलियन डॉलर बढ़ाकर 2.8 अरब डॉलर कर दी है। कंपनी एआई और क्लाउड कारोबार विस्तार पर जोर दे रही है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
ओरेकल (Oracle) ने वित्त वर्ष 2026 के अपने रिस्ट्रक्चरिंग प्रोग्राम (Restructuring Programme) की अनुमानित लागत करीब 700 मिलियन डॉलर बढ़ा दी है। इसके बाद इस प्रोग्राम पर कुल खर्च का अनुमान लगभग 2.8 अरब डॉलर हो गया है। कंपनी यह कदम खर्चों को नियंत्रित करने के साथ अपने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (Artificial Intelligence) कारोबार के विस्तार के बीच उठा रही है।
कंपनी ने शुक्रवार को रेगुलेटरी फाइलिंग (Regulatory Filing) में अतिरिक्त खर्च की जानकारी दी। यह खुलासा ओरेकल की अगस्त तिमाही खत्म होने के बाद किया गया। रिस्ट्रक्चरिंग प्रोग्राम में कर्मचारियों को दिए जाने वाले सेवरेंस, कॉन्ट्रैक्ट खत्म करने और कुछ गतिविधियों से बाहर निकलने से जुड़े अन्य खर्च शामिल हैं। कंपनी ने कहा कि इन उपायों का एक हिस्सा उसके कुछ कामकाज में एआई के बढ़ते इस्तेमाल से जुड़ा है।
यह बढ़ा हुआ खर्च ऐसे समय आया है जब ओरेकल एआई और क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर (Cloud Infrastructure) में तेजी से निवेश कर रही है। वहीं, इस विस्तार की लागत को लेकर निवेशकों की चिंता भी बनी हुई है।
शुक्रवार को कंपनी के शेयरों में शुरुआत में 7.8 फीसदी तक की तेजी आई। इसका प्रमुख कारण कंपनी का रेवेन्यू बैकलॉग (Revenue Backlog) 26 अरब डॉलर बढ़ना रहा। हालांकि, बाद में शेयरों की बढ़त खत्म हो गई और कारोबार के अंत में इनमें करीब 2 फीसदी की गिरावट रही।
ओरेकल का कुल बैकलॉग अब 664 अरब डॉलर पहुंच गया है। कंपनी के मुताबिक, इसमें से करीब आधी रकम अगले 36 महीनों में रेवेन्यू के रूप में सामने आने की उम्मीद है। कंपनी ने बताया कि उसके नए कॉन्ट्रैक्टेड बिजनेस के बड़े हिस्से के लिए पूरे इंफ्रास्ट्रक्चर निर्माण का खर्च उसे खुद नहीं उठाना पड़ेगा। इसके लिए ओरेकल कस्टमर प्रीपेमेंट (Customer Prepayments) का इस्तेमाल कर रही है और कुछ मामलों में ग्राहकों की अपनी चिप सप्लाई पर भी निर्भर है।
कंपनी ने 5.40 अरब डॉलर का नेगेटिव फ्री कैश फ्लो (Negative Free Cash Flow) दर्ज किया। हालांकि, यह आंकड़ा विश्लेषकों के 9.56 अरब डॉलर के औसत अनुमानित कैश बर्न से बेहतर रहा। यह अनुमान एलएसईजी (LSEG) के डेटा पर आधारित था।
ऐपल ने भारत में आईफोन 18 प्रो, आईफोन 18 प्रो मैक्स और फोल्डेबल आईफोन डुओ की कीमतों का ऐलान कर दिया है। नई सीरीज की शुरुआती कीमतें पिछले मॉडल से ज्यादा हैं।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
ऐपल (Apple) ने भारत में आईफोन 18 प्रो सीरीज (iPhone 18 Pro Series) और अपने पहले फोल्डेबल आईफोन डुओ (iPhone Duo) की कीमतों का ऐलान कर दिया है। इस बार कंपनी ने अपने प्रीमियम मॉडल्स (Premium Models) की कीमत पिछले साल के मुकाबले काफी ज्यादा रखी है।
भारत में आईफोन 18 प्रो (iPhone 18 Pro) की शुरुआती कीमत 1.64 लाख रुपये और आईफोन 18 प्रो मैक्स (iPhone 18 Pro Max) की शुरुआती कीमत 1.79 लाख रुपये है। वहीं, फोल्डेबल आईफोन डुओ की कीमत 2.99 लाख रुपये से शुरू होती है।
आईफोन 18 प्रो को चार स्टोरेज वेरिएंट (Storage Variants) में पेश किया गया है। इसके 256GB मॉडल की कीमत 1.64 लाख रुपये, 512GB मॉडल की 1.89 लाख रुपये, 1TB मॉडल की 2.39 लाख रुपये और 2TB मॉडल की कीमत 3.14 लाख रुपये है। तुलना करें तो पिछले साल आईफोन 17 प्रो की शुरुआती कीमत 1.34 लाख रुपये थी।
आईफोन 18 प्रो मैक्स भी 256GB, 512GB, 1TB और 2TB स्टोरेज विकल्पों में उपलब्ध होगा। इनके लिए क्रमशः 1.79 लाख, 2.04 लाख, 2.54 लाख और 3.29 लाख रुपये खर्च करने होंगे। पिछले साल आईफोन 17 प्रो मैक्स की शुरुआती कीमत 1.49 लाख रुपये थी।
वहीं, ऐपल का पहला फोल्डेबल मॉडल आईफोन डुओ इस सीरीज का सबसे महंगा डिवाइस (Device) है। इसके 256GB मॉडल की कीमत 2.99 लाख रुपये, 512GB मॉडल की 3.24 लाख रुपये, 1TB मॉडल की 3.74 लाख रुपये और 2TB मॉडल की कीमत 4.49 लाख रुपये रखी गई है।
ऐपल ने आईफोन 18 प्रो और आईफोन 18 प्रो मैक्स को भारत समेत 65 से ज्यादा देशों में शुरुआती बिक्री के लिए उपलब्ध कराया है। भारत में इनकी बिक्री 18 सितंबर से शुरू होगी, जबकि प्री-ऑर्डर (Pre-Order) 12 सितंबर को शाम 5:30 बजे से शुरू होंगे।
अमेरिका में पुराने आईफोन को बदलने पर 175 से 885 डॉलर तक का ट्रेड-इन क्रेडिट (Trade-in Credit) मिल रहा है। चुनिंदा कैरियर ऑफर (Carrier Offers) के तहत 1,200 डॉलर तक का क्रेडिट भी दिया जा रहा है। हालांकि, भारत में मिलने वाले ऑफर्स अलग हो सकते हैं।
एडटेक कंपनी Physics Wallah Limited ने निवेशकों और एनालिस्ट्स के साथ होने वाली आगामी बैठकों का शेड्यूल जारी किया है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
एडटेक कंपनी Physics Wallah Limited ने निवेशकों और एनालिस्ट्स के साथ होने वाली आगामी बैठकों का शेड्यूल जारी किया है। कंपनी ने बताया कि वह 11 सितंबर और 22 सितंबर 2026 को मुंबई में एनालिस्ट्स और निवेशकों के साथ आमने-सामने बैठकें करेगी। कंपनी ने यह जानकारी SEBI के Listing Obligations and Disclosure Requirements (LODR) Regulations, 2015 के Regulation 30 के तहत दी है।
कंपनी के मुताबिक, दोनों तारीखों पर वन-टू-वन और ग्रुप मीटिंग्स आयोजित की जाएंगी। इन सभी बैठकों का आयोजन मुंबई में फिजिकल यानी आमने-सामने किया जाएगा।
11 और 22 सितंबर को होंगी बैठकें
Physics Wallah की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, 11 सितंबर 2026 को वन-टू-वन और ग्रुप मीटिंग्स होंगी। इसके बाद 22 सितंबर 2026 को भी इसी तरह की बैठकें आयोजित की जाएंगी। इन बैठकों का मकसद कंपनी के कारोबार और उससे जुड़े पहलुओं को लेकर निवेशकों और एनालिस्ट्स के साथ बातचीत करना है।
कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया है कि बैठक का शेड्यूल जरूरत के मुताबिक बदला जा सकता है। इसमें एनालिस्ट्स, निवेशकों या कंपनी से जुड़ी किसी भी परिस्थिति के कारण बदलाव संभव है।
शेयर बाजार से जुड़ी संवेदनशील जानकारी नहीं होगी साझा
Physics Wallah ने अपने डिस्क्लोजर में एक अहम बात साफ की है। कंपनी ने कहा है कि इन बैठकों के दौरान कोई भी अप्रकाशित मूल्य-संवेदनशील जानकारी (Unpublished Price Sensitive Information यानी UPSI) साझा नहीं की जाएगी। बैठकों में चर्चा केवल कंपनी के सामान्य कारोबारी आउटलुक और ऐसी जानकारियों तक सीमित रहेगी, जो पहले से ही सार्वजनिक रूप से उपलब्ध हैं।
इसका मतलब है कि निवेशकों और एनालिस्ट्स के साथ होने वाली बातचीत में कंपनी ऐसी कोई नई या गोपनीय जानकारी साझा नहीं करेगी, जिसका शेयर की कीमत पर असर पड़ सकता हो और जो अभी सार्वजनिक न हुई हो। यह डिस्क्लोजर 8 सितंबर 2026 को Physics Wallah के Group General Counsel, Company Secretary & Compliance Officer Ajinkya Jain की ओर से जारी किया गया है।
भारत अमेरिका की अगुवाई वाली अंतरराष्ट्रीय 6G पहल में शामिल हो गया है, जहां 26 सरकारें नेटवर्क सुरक्षा, तकनीकी तालमेल, बुनियादी ढांचे और एआई के इस्तेमाल पर सहयोग करेंगी।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
भारत अब अमेरिका की अगुवाई वाली एक अंतरराष्ट्रीय 6G पहल का हिस्सा बन गया है। इसका मकसद अगली पीढ़ी के नेटवर्क को सुरक्षित बनाने और अलग-अलग देशों की तकनीक के बीच बेहतर तालमेल तैयार करना है। अमेरिकी वाणिज्य विभाग (US Department of Commerce) ने भारत के इस समूह में शामिल होने की घोषणा की है।
भारत के जुड़ने के बाद इस पहल में शामिल सरकारों की संख्या बढ़कर 26 हो गई है। इससे 6G की तैयारी को लेकर भारत की अंतरराष्ट्रीय भूमिका मजबूत होने की उम्मीद है। समूह में शामिल देश नेटवर्क सुरक्षा, आपसी तालमेल और मजबूत डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर (Digital Infrastructure) जैसे मुद्दों पर मिलकर काम करेंगे।
इस पहल में 6G नेटवर्क के विकास और संचालन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (Artificial Intelligence) की भूमिका पर भी चर्चा होगी। इससे भारत को भविष्य के वैश्विक 6G मानकों और तकनीकी दिशा तय करने वाली बातचीत में अपनी प्राथमिकताएं रखने का मौका मिलेगा।
भारत घरेलू स्तर पर भी 6G तकनीक पर काम कर रहा है। भारत 6G मिशन (India 6G Mission) और भारत 6G अलायंस (Bharat 6G Alliance) के जरिए नई तकनीक विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। भारत 6G अलायंस ने 2030 तक देश में 6G तकनीक शुरू करने का लक्ष्य रखा है।
भारत की योजना 6G से जुड़े पेटेंट, उत्पाद और किफायती टेलीकॉम समाधान (Telecom Solutions) विकसित कर वैश्विक बाजार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने की भी है।
एपल के 9 सितंबर लॉन्च इवेंट से पहले हुवावे और शाओमी ने अपने नए फ्लैगशिप फोल्डेबल फोन पेश किए हैं, जिससे प्रीमियम स्मार्टफोन मार्केट में मुकाबला और बढ़ गया है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
हुवावे (Huawei) और शाओमी (Xiaomi) ने एपल (Apple) के 9 सितंबर लॉन्च इवेंट (Launch Event) से कुछ दिन पहले अपने नए फ्लैगशिप फोल्डेबल स्मार्टफोन (Foldable Smartphones) लॉन्च किए हैं। दोनों कंपनियों के नए फोन ऐसे समय में आए हैं, जब एपल के भी पहली बार फोल्डेबल आईफोन (Foldable iPhone) पेश करने की उम्मीद की जा रही है।
हुवावे ने सोमवार को मेट एक्सटी2 (Mate XT2) लॉन्च किया, जो कंपनी के ट्राई-फोल्ड स्मार्टफोन (Tri-Fold Smartphone) का नया वर्जन है। वहीं, शाओमी ने एक अलग इवेंट में शाओमी 18 फोल्ड (Xiaomi 18 Fold) पेश किया।
शाओमी ने अपने लॉन्च के दौरान एपल को सीधे निशाने पर लिया। कंपनी के सीईओ ली जुन (Lei Jun) ने शाओमी 18 फोल्ड की तुलना एपल के आईफोन से की। उन्होंने बताया कि 219 ग्राम वाला यह फोन आईफोन प्रो मैक्स (iPhone Pro Max) से हल्का है।
शाओमी ने यह भी दावा किया कि उसका इन-हाउस एक्सरिंग ओ3 एआई प्रोसेसर (XRing O3 AI Processor) रिस्पॉन्सिवनेस (Responsiveness) के मामले में एपल के ए19 प्रो (A19 Pro) से बेहतर है।
इन दोनों लॉन्च की टाइमिंग भी काफी खास है। एपल के 9 सितंबर के इवेंट में पहली बार फोल्डेबल आईफोन आने की चर्चा है। ऐसे में हुवावे और शाओमी ने अपने प्रीमियम डिवाइस (Premium Devices) पहले ही बाजार में उतारकर फोल्डेबल सेगमेंट में अपनी मौजूदगी दिखा दी है। चीन के प्रीमियम स्मार्टफोन मार्केट (Premium Smartphone Market) में भी इससे मुकाबला और तेज होने की उम्मीद है।
अमेरिका में AI इन्वेस्टमेंट बढ़ने से टेक प्रोफेशनल्स के साथ इंफ्रास्ट्रक्चर वर्कर्स की डिमांड भी बढ़ रही है। रिपोर्ट के मुताबिक, 2026 तक AI से करीब तीन लाख अतिरिक्त नौकरियां बन सकती हैं।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (Artificial Intelligence) यानी AI को लेकर अब तक माना जाता रहा है कि ऑटोमेशन (Automation) से बड़ी संख्या में नौकरियां खत्म हो सकती हैं। लेकिन अमेरिका के जॉब मार्केट (Job Market) की ताजा तस्वीर कुछ अलग कहानी बता रही है। AI में बढ़ते इन्वेस्टमेंट (Investment) से टेक प्रोफेशनल्स के साथ-साथ AI इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े कामों में भी रोजगार के मौके बढ़ रहे हैं।
बीबीवीए रिसर्च (BBVA Research) के हेड ऑफ इकोनॉमिक एनालिसिस (Head of Economic Analysis) और यूनिवर्सिटी ऑफ वेलेंसिया (University of Valencia) के प्रोफेसर राफेल डोमेनेक (Rafael Domenech) के मुताबिक, AI से जुड़े जॉब्स में तेजी आई है। उनका कहना है कि फिलहाल ‘जॉब्स एपोकैलिप्स’ (Jobs Apocalypse) का खतरा टलता दिख रहा है और AI जॉब्स बूम (AI Jobs Boom) नजर आ रहा है।
AI के बढ़ते इस्तेमाल का सबसे ज्यादा असर सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट (Software Development), मैथ्स, डेटा साइंस (Data Science), इंफॉर्मेशन सिक्योरिटी (Information Security) और इंजीनियरिंग जैसे क्षेत्रों में दिख रहा है। 2024 के बाद इन क्षेत्रों में जॉब्स बढ़ी हैं और 2025-26 में भी यह रफ्तार तेज हुई है।
लेकिन AI से सिर्फ व्हाइट-कॉलर (White Collar) जॉब्स ही नहीं बढ़ रही हैं। AI सिस्टम के लिए बड़े डेटा सेंटर (Data Center), पावर सिस्टम, कूलिंग और नेटवर्क इंफ्रास्ट्रक्चर की जरूरत होती है। इनके निर्माण और संचालन से जुड़े ब्लू-कॉलर (Blue Collar) वर्कर्स की डिमांड भी बढ़ रही है।
इलेक्ट्रिकल कॉन्ट्रैक्टर, एचवीएसी (HVAC) और प्लंबिंग वर्कर्स, यूटिलिटी सिस्टम कंस्ट्रक्शन और कमर्शियल कंस्ट्रक्शन से जुड़े लोगों को इसका फायदा मिल रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, AI इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी अतिरिक्त नौकरियों की संख्या 2026 तक करीब 3 लाख पहुंच सकती है।
हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि हर नौकरी AI से सुरक्षित है। रूटीन और रिपीटेटिव काम (Repetitive Work) वाले रोल्स पर दबाव बना हुआ है। एडमिनिस्ट्रेटिव, बैक-ऑफिस और कुछ कस्टमर-सर्विस जॉब्स की डिमांड आगे कम हो सकती है।
ऐसे में जॉब मार्केट में स्किल्स (Skills) की डिमांड भी तेजी से बदल रही है। AI के साथ काम करने, डेटा समझने, टेक्निकल नॉलेज और नए टूल्स इस्तेमाल करने की क्षमता आगे ज्यादा जरूरी हो सकती है। कर्मचारियों के लिए रिस्किलिंग (Reskilling) और अपस्किलिंग (Upskilling) इसलिए अहम हो जाएगी।
फोटो संभालने, एडिट करने और उन्हें व्यवस्थित करने का तरीका अब और आसान होने वाला है। गूगल ने Google Photos को Gemini Spark के साथ जोड़ने की शुरुआत की है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
फोटो संभालने, एडिट करने और उन्हें व्यवस्थित करने का तरीका अब और आसान होने वाला है। गूगल ने Google Photos को Gemini Spark के साथ जोड़ने की शुरुआत की है। इसके जरिए यूजर्स सिर्फ एक प्रॉम्प्ट देकर अपनी फोटो लाइब्रेरी से जुड़े कई काम एक साथ कर सकेंगे।
अब फोटो खोजने, उन्हें एडिट करने, Album बनाने और शेयर करने के लिए अलग-अलग टूल्स में जाने की जरूरत नहीं होगी। Gemini Spark एक ही Task में कई Steps पूरे कर सकेगा।
एक प्रॉम्प्ट में पूरे होंगे कई काम
मान लीजिए आप हाल ही की छुट्टी की यात्रा की तस्वीरों में से सबसे अच्छी 15 फोटो चुनना चाहते हैं। इसके लिए Gemini Spark को कहा जा सकता है कि वह ट्रिप की सबसे अच्छी 15 तस्वीरें खोजे, समुद्र किनारे वाली चुनिंदा फोटो को बेहतर करे, उनका एक Shared Album बनाए और उस Album के Link के साथ Email का Draft भी तैयार कर दे। यानी कई अलग-अलग काम एक ही प्रॉम्प्ट के जरिए किए जा सकेंगे।
Gemini Spark ऐसे कामों को किसी तय समय पर या किसी खास इवेंट के बाद करने के लिए शेड्यूल भी कर सकता है।
फोटो और वीडियो ढूंढना होगा आसान
यह सुविधा सिर्फ सामान्य Photo Search तक सीमित नहीं है। Gemini Spark फोटो और वीडियो को Subject, Location, Date या Event के आधार पर खोज सकता है। इसके अलावा यह एक जैसी या Duplicate फोटो को पहचानने और उन्हें Filter करने में भी मदद कर सकता है। इससे फोटो लाइब्रेरी में मौजूद अनावश्यक तस्वीरों को छांटना आसान हो जाएगा।
फोटो एडिट होगी, लेकिन Original सुरक्षित रहेगा
Gemini Spark फोटो की क्वॉलिटी बेहतर करने, Quick Fixes लगाने और Collage या Stylised Images बनाने में भी मदद कर सकेगा। खास बात यह है कि एडिट करते समय ओरिजनल फोटो में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा। एडिट की गई तस्वीर Google Photos में नई कॉपी के तौर पर सेव होगी। इससे यूजर के पास मूल फोटो भी सुरक्षित रहेगी।
Private और Shared Album भी बना सकेगा Gemini
यूजर्स Gemini से अपनी पसंद की तस्वीरों के आधार पर Private या Shared Album बनाने के लिए भी कह सकेंगे। अगर कोई नया Album बनाया जाता है तो वह डिफॉल्ट रूप से Private रहेगा। उसे शेयर करने से पहले Gemini यूजर से Permission मांगेगा।
Gmail, Google Docs और Messages से भी जुड़ेंगे फोटो वाले काम
Google ने इस Integration को दूसरे Apps के साथ भी जोड़ा है। यूजर्स Shared Album के Links को Gmail, Google Docs और Google Messages जैसी सेवाओं में भेज या जोड़ सकेंगे। इसका मतलब है कि फोटो से जुड़े कई काम सिर्फ Google Photos तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि दूसरे Google Apps के साथ भी किए जा सकेंगे।
फोटो में लिखे टेक्स्ट का भी होगा इस्तेमाल
Gemini Spark फोटो के अंदर मौजूद टेक्स्ट को भी पहचान सकता है। उदाहरण के लिए अगर किसी यूजर ने Receipt या किसी डॉक्यूमेंट की फोटो सेव कर रखी है तो Gemini उसमें मौजूद टेक्स्ट निकालकर उसकी Summary तैयार कर सकता है।
जरूरत पड़ने पर इस जानकारी को नए तरीके से Format करके Google Document में भी इस्तेमाल किया जा सकता है या किसी दूसरे काम का हिस्सा बनाया जा सकता है।
हर महीने अपने आप बन सकते हैं Highlight Albums
Google ने इसमें ऑटोमेशन की सुविधा भी जोड़ी है। यूजर्स कुछ ऐसे काम तय कर सकते हैं जो बार-बार अपने आप किए जाएं। उदाहरण के लिए हर महीने की खास तस्वीरों का Highlight Album तैयार करना या Receipts की तस्वीरों को अलग-अलग व्यवस्थित करना। ऐसे नियमित काम Gemini अपने आप संभाल सकता है।
हालांकि हर काम पूरी तरह अपने आप नहीं होगा। कुछ कामों के लिए Gemini यूजर से परमिशन लेगा। खास तौर पर Shared Album बनाने या ई-मेल भेजने जैसे कामों से पहले यूजर की मंजूरी जरूरी होगी।
अभी सीमित यूजर्स को मिल रही सुविधा
फिलहाल Google Photos और Gemini Spark का यह इंटीग्रेशन सभी यूजर्स के लिए उपलब्ध नहीं है। Google इसे धीरे-धीरे रोल आउट कर रहा है, इसलिए कई यूजर्स को अभी यह सुविधा दिखाई नहीं दे सकती। यह फीचर फिलहाल 18 साल या उससे ज्यादा उम्र के US यूजर्स के लिए उपलब्ध है और अमेरिका के कुछ क्षेत्रों में भी इसकी उपलब्धता सीमित है। अभी इसे English Language में Gemini Mobile App और Web पर इस्तेमाल किया जा सकता है।
जिन यूजर्स को यह सुविधा मिल गई है, वे Gemini खोलकर Spark पर Switch कर सकते हैं और अपनी फोटो या वीडियो से जुड़ा काम प्रॉम्प्ट के जरिए बता सकते हैं। मौजूदा Skills का इस्तेमाल करने के लिए Slash (/) डालकर संबंधित Option भी चुना जा सकता है।
Photo Library अब बनेगी AI-Powered Workspace
Google Photos को Gemini के साथ जोड़ने के बाद Photo Library सिर्फ तस्वीरें रखने की जगह नहीं रह जाएगी। अब फोटो ढूंढने, उन्हें बेहतर करने, व्यवस्थित करने और शेयर करने जैसे कई काम एक ही प्रॉम्प्ट से किए जा सकेंगे। यानी आने वाले समय में फोटो लाइब्रेरी किसी डिजिटल स्टोररूम की तरह नहीं, बल्कि एक AI-Powered Workspace की तरह काम कर सकती है, जहां कई काम यूजर के सिर्फ एक निर्देश पर पूरे हो जाएंगे।
एंथ्रोपिक ने अपने आईपीओ की टाइमलाइन आगे बढ़ा दी है। रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनी अक्टूबर के मध्य से पहले डील की मार्केटिंग शुरू नहीं करेगी और सितंबर अंत में प्रॉस्पेक्टस आ सकता है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
एंथ्रोपिक (Anthropic) अपने बहुप्रतीक्षित आईपीओ (IPO) की तैयारी में थोड़ा और समय ले रही है। रॉयटर्स (Reuters) की रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनी अक्टूबर के मध्य से पहले आईपीओ डील की मार्केटिंग शुरू नहीं करेगी। इससे पहले उम्मीद थी कि कंपनी अगले हफ्ते ही अपना पब्लिक प्रॉस्पेक्टस (Public Prospectus) जारी कर सकती है।
रिपोर्ट के अनुसार, अब यह प्रॉस्पेक्टस सितंबर के आखिर में आ सकता है। हालांकि, कंपनी की तैयारी के हिसाब से टाइमलाइन में फिर बदलाव भी हो सकता है।
एंथ्रोपिक का आईपीओ नवंबर में होने वाले अमेरिकी मिडटर्म चुनाव (US Midterm Elections) से कुछ दिन पहले आ सकता है। निवेशकों की इस पर खास नजर है। कुछ अनुमान के मुताबिक, कंपनी करीब 2 ट्रिलियन डॉलर के मूल्यांकन (Valuation) की मांग कर सकती है। अगर ऐसा होता है तो यह अब तक के सबसे बड़े आईपीओ में शामिल होगा और एआई कंपनियों में निवेशकों की दिलचस्पी की बड़ी परीक्षा भी होगी।
कंपनी फिलहाल 15 अरब डॉलर की रिवॉल्विंग क्रेडिट फैसिलिटी (Revolving Credit Facility) को पूरा करने पर भी काम कर रही है। इसके बाद आईपीओ प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की तैयारी होगी। यह सुविधा पूरी होने के बाद इस फाइनेंसिंग से जुड़े बैंकों के विश्लेषकों समेत अन्य विश्लेषक कंपनी के अधिकारियों से मुलाकात कर सकते हैं।
एंथ्रोपिक का संभावित आईपीओ ऐसे समय में आ सकता है, जब ओपनएआई (OpenAI) समेत कुछ दूसरी एआई कंपनियां भी बाजार में लिस्टिंग की तैयारी कर सकती हैं। इससे एआई सेक्टर पर निवेशकों का फोकस और बढ़ने की उम्मीद है।
सोनी ने ग्रैंड थेफ्ट ऑटो 6 से प्रेरित दो लिमिटेड एडिशन ड्यूलसेंस वायरलेस कंट्रोलर पेश किए हैं, जिनकी बिक्री 19 नवंबर से शुरू होगी और भारत में प्री-ऑर्डर 10 सितंबर से शुरू होंगे।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
सोनी (Sony) ने ग्रैंड थेफ्ट ऑटो 6 (Grand Theft Auto VI) के प्रशंसकों के लिए दो खास लिमिटेड एडिशन ड्यूलसेंस वायरलेस कंट्रोलर पेश किए हैं। ब्लैक और व्हाइट रंग में आने वाले ये कंट्रोलर गेम की काल्पनिक दुनिया वाइस सिटी (Vice City) की चमकदार और रंगीन शैली से प्रेरित हैं। दोनों की बिक्री 19 नवंबर से शुरू होगी, जिस दिन गेम के भी लॉन्च होने की उम्मीद है।
इन कंट्रोलर के डिजाइन में वाइस सिटी के माहौल को खास तौर पर उभारा गया है। इनमें ऐसी चमकदार फिनिश दी गई है, जो रोशनी के साथ अपना रंग बदलती नजर आती है। इसका उद्देश्य गेम में दिखाई देने वाले सूर्यास्त के रंगों और नीयॉन रोशनी से भरी रात का अहसास देना है। कंट्रोलर की बॉडी में हथेली के आकार के पेड़ भी बनाए गए हैं, जबकि टचपैड पर ग्रैंड थेफ्ट ऑटो 6 की ब्रांडिंग दी गई है।
दोनों कंट्रोलर में ड्यूलसेंस की प्रमुख सुविधाएं मौजूद रहेंगी। इनमें हैप्टिक फीडबैक और अडैप्टिव ट्रिगर शामिल हैं। सोनी के मुताबिक, ग्रैंड थेफ्ट ऑटो 6 खेलते समय ये सुविधाएं गेमप्ले के अनुसार प्रतिक्रिया देंगी। खिलाड़ियों को अलग-अलग गतिविधियों के दौरान ट्रिगर में बदलता प्रतिरोध और हैप्टिक प्रभाव महसूस होगा।
अमेरिका में दोनों कंट्रोलर की कीमत 84.99 डॉलर, यूरोप में 84.99 यूरो और ब्रिटेन में 74.99 पाउंड रखी गई है। जापान में इनकी कीमत कर समेत 12,480 येन होगी। प्री-ऑर्डर 10 सितंबर को स्थानीय समयानुसार सुबह 10 बजे से चुनिंदा बाजारों में शुरू होंगे। भारत में प्री-ऑर्डर उसी दिन शाम 7:30 बजे भारतीय समयानुसार शुरू होंगे।
गूगल ने जेमिनी 3.8 फ्लैश और 3.8 फ्लैश साइबर मॉडल लॉन्च किए हैं। नए मॉडल कोडिंग, रीजनिंग और साइबर सुरक्षा से जुड़े कामों में बेहतर प्रदर्शन का दावा करते हैं।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
गूगल (Google) ने अपने जेमिनी एआई मॉडल की नई सीरीज में जेमिनी 3.8 फ्लैश (Gemini 3.8 Flash) और जेमिनी 3.8 फ्लैश साइबर (Gemini 3.8 Flash Cyber) लॉन्च किए हैं। कंपनी के मुताबिक, नए मॉडल पिछले संस्करणों की तुलना में रीजनिंग, कोडिंग और साइबर सुरक्षा से जुड़े कामों में बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं। इन्हें तेज गति और कम लागत को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है।
गूगल का कहना है कि जेमिनी 3.8 फ्लैश उसका अब तक का सबसे सक्षम फ्लैश मॉडल है। इसे कई तरह के जटिल और लंबे कामों को संभालने के लिए तैयार किया गया है।
जेमिनी 3.8 फ्लैश को खास तौर पर कोडिंग और जटिल सवालों को हल करने के लिए विकसित किया गया है। यह लंबे और कई चरणों वाले कामों को संभाल सकता है। जरूरत के अनुसार मॉडल ज्यादा रीजनिंग कर सकता है और जवाब को बेहतर बनाने के लिए उपलब्ध टूल्स का इस्तेमाल भी कर सकता है।
गूगल के अनुसार, यह मॉडल सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग, वित्तीय विश्लेषण और कानूनी रीजनिंग जैसे कामों में पिछले मॉडल के मुकाबले बेहतर प्रदर्शन करता है। जेमिनी 3.8 फ्लैश साइबर को विशेष रूप से साइबर सुरक्षा से जुड़े कामों के लिए तैयार किया गया है। यह सॉफ्टवेयर में मौजूद कमजोरियों की पहचान करने और उन्हें ठीक करने के लिए सुरक्षा पैच तैयार करने में मदद कर सकता है।
कंपनी के मुताबिक, यह अलग-अलग प्रोग्रामिंग भाषाओं में लिखे कोड में सुरक्षा खामियों को पहचानने में सक्षम है। इसका मुख्य उद्देश्य साइबर हमले करना नहीं, बल्कि डेवलपर्स और सुरक्षा टीमों को सॉफ्टवेयर की सुरक्षा मजबूत करने में मदद करना है।
जेमिनी 3.8 फ्लैश को अब उन डेवलपर्स के लिए उपलब्ध कराया गया है, जो एआई ऐप, स्वायत्त एजेंट और कोडिंग टूल विकसित करना चाहते हैं। वहीं, जेमिनी 3.8 फ्लैश साइबर की उपलब्धता फिलहाल कुछ चुनिंदा संगठनों तक सीमित है। इसे गूगल के फेयरविंड कार्यक्रम (Fairwind Program) के जरिए उपलब्ध कराया जा रहा है।