फोटो संभालने, एडिट करने और उन्हें व्यवस्थित करने का तरीका अब और आसान होने वाला है। गूगल ने Google Photos को Gemini Spark के साथ जोड़ने की शुरुआत की है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
फोटो संभालने, एडिट करने और उन्हें व्यवस्थित करने का तरीका अब और आसान होने वाला है। गूगल ने Google Photos को Gemini Spark के साथ जोड़ने की शुरुआत की है। इसके जरिए यूजर्स सिर्फ एक प्रॉम्प्ट देकर अपनी फोटो लाइब्रेरी से जुड़े कई काम एक साथ कर सकेंगे।
अब फोटो खोजने, उन्हें एडिट करने, Album बनाने और शेयर करने के लिए अलग-अलग टूल्स में जाने की जरूरत नहीं होगी। Gemini Spark एक ही Task में कई Steps पूरे कर सकेगा।
एक प्रॉम्प्ट में पूरे होंगे कई काम
मान लीजिए आप हाल ही की छुट्टी की यात्रा की तस्वीरों में से सबसे अच्छी 15 फोटो चुनना चाहते हैं। इसके लिए Gemini Spark को कहा जा सकता है कि वह ट्रिप की सबसे अच्छी 15 तस्वीरें खोजे, समुद्र किनारे वाली चुनिंदा फोटो को बेहतर करे, उनका एक Shared Album बनाए और उस Album के Link के साथ Email का Draft भी तैयार कर दे। यानी कई अलग-अलग काम एक ही प्रॉम्प्ट के जरिए किए जा सकेंगे।
Gemini Spark ऐसे कामों को किसी तय समय पर या किसी खास इवेंट के बाद करने के लिए शेड्यूल भी कर सकता है।
फोटो और वीडियो ढूंढना होगा आसान
यह सुविधा सिर्फ सामान्य Photo Search तक सीमित नहीं है। Gemini Spark फोटो और वीडियो को Subject, Location, Date या Event के आधार पर खोज सकता है। इसके अलावा यह एक जैसी या Duplicate फोटो को पहचानने और उन्हें Filter करने में भी मदद कर सकता है। इससे फोटो लाइब्रेरी में मौजूद अनावश्यक तस्वीरों को छांटना आसान हो जाएगा।
फोटो एडिट होगी, लेकिन Original सुरक्षित रहेगा
Gemini Spark फोटो की क्वॉलिटी बेहतर करने, Quick Fixes लगाने और Collage या Stylised Images बनाने में भी मदद कर सकेगा। खास बात यह है कि एडिट करते समय ओरिजनल फोटो में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा। एडिट की गई तस्वीर Google Photos में नई कॉपी के तौर पर सेव होगी। इससे यूजर के पास मूल फोटो भी सुरक्षित रहेगी।
Private और Shared Album भी बना सकेगा Gemini
यूजर्स Gemini से अपनी पसंद की तस्वीरों के आधार पर Private या Shared Album बनाने के लिए भी कह सकेंगे। अगर कोई नया Album बनाया जाता है तो वह डिफॉल्ट रूप से Private रहेगा। उसे शेयर करने से पहले Gemini यूजर से Permission मांगेगा।
Gmail, Google Docs और Messages से भी जुड़ेंगे फोटो वाले काम
Google ने इस Integration को दूसरे Apps के साथ भी जोड़ा है। यूजर्स Shared Album के Links को Gmail, Google Docs और Google Messages जैसी सेवाओं में भेज या जोड़ सकेंगे। इसका मतलब है कि फोटो से जुड़े कई काम सिर्फ Google Photos तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि दूसरे Google Apps के साथ भी किए जा सकेंगे।
फोटो में लिखे टेक्स्ट का भी होगा इस्तेमाल
Gemini Spark फोटो के अंदर मौजूद टेक्स्ट को भी पहचान सकता है। उदाहरण के लिए अगर किसी यूजर ने Receipt या किसी डॉक्यूमेंट की फोटो सेव कर रखी है तो Gemini उसमें मौजूद टेक्स्ट निकालकर उसकी Summary तैयार कर सकता है।
जरूरत पड़ने पर इस जानकारी को नए तरीके से Format करके Google Document में भी इस्तेमाल किया जा सकता है या किसी दूसरे काम का हिस्सा बनाया जा सकता है।
हर महीने अपने आप बन सकते हैं Highlight Albums
Google ने इसमें ऑटोमेशन की सुविधा भी जोड़ी है। यूजर्स कुछ ऐसे काम तय कर सकते हैं जो बार-बार अपने आप किए जाएं। उदाहरण के लिए हर महीने की खास तस्वीरों का Highlight Album तैयार करना या Receipts की तस्वीरों को अलग-अलग व्यवस्थित करना। ऐसे नियमित काम Gemini अपने आप संभाल सकता है।
हालांकि हर काम पूरी तरह अपने आप नहीं होगा। कुछ कामों के लिए Gemini यूजर से परमिशन लेगा। खास तौर पर Shared Album बनाने या ई-मेल भेजने जैसे कामों से पहले यूजर की मंजूरी जरूरी होगी।
अभी सीमित यूजर्स को मिल रही सुविधा
फिलहाल Google Photos और Gemini Spark का यह इंटीग्रेशन सभी यूजर्स के लिए उपलब्ध नहीं है। Google इसे धीरे-धीरे रोल आउट कर रहा है, इसलिए कई यूजर्स को अभी यह सुविधा दिखाई नहीं दे सकती। यह फीचर फिलहाल 18 साल या उससे ज्यादा उम्र के US यूजर्स के लिए उपलब्ध है और अमेरिका के कुछ क्षेत्रों में भी इसकी उपलब्धता सीमित है। अभी इसे English Language में Gemini Mobile App और Web पर इस्तेमाल किया जा सकता है।
जिन यूजर्स को यह सुविधा मिल गई है, वे Gemini खोलकर Spark पर Switch कर सकते हैं और अपनी फोटो या वीडियो से जुड़ा काम प्रॉम्प्ट के जरिए बता सकते हैं। मौजूदा Skills का इस्तेमाल करने के लिए Slash (/) डालकर संबंधित Option भी चुना जा सकता है।
Photo Library अब बनेगी AI-Powered Workspace
Google Photos को Gemini के साथ जोड़ने के बाद Photo Library सिर्फ तस्वीरें रखने की जगह नहीं रह जाएगी। अब फोटो ढूंढने, उन्हें बेहतर करने, व्यवस्थित करने और शेयर करने जैसे कई काम एक ही प्रॉम्प्ट से किए जा सकेंगे। यानी आने वाले समय में फोटो लाइब्रेरी किसी डिजिटल स्टोररूम की तरह नहीं, बल्कि एक AI-Powered Workspace की तरह काम कर सकती है, जहां कई काम यूजर के सिर्फ एक निर्देश पर पूरे हो जाएंगे।
एंथ्रोपिक ने अपने आईपीओ की टाइमलाइन आगे बढ़ा दी है। रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनी अक्टूबर के मध्य से पहले डील की मार्केटिंग शुरू नहीं करेगी और सितंबर अंत में प्रॉस्पेक्टस आ सकता है।
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एंथ्रोपिक (Anthropic) अपने बहुप्रतीक्षित आईपीओ (IPO) की तैयारी में थोड़ा और समय ले रही है। रॉयटर्स (Reuters) की रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनी अक्टूबर के मध्य से पहले आईपीओ डील की मार्केटिंग शुरू नहीं करेगी। इससे पहले उम्मीद थी कि कंपनी अगले हफ्ते ही अपना पब्लिक प्रॉस्पेक्टस (Public Prospectus) जारी कर सकती है।
रिपोर्ट के अनुसार, अब यह प्रॉस्पेक्टस सितंबर के आखिर में आ सकता है। हालांकि, कंपनी की तैयारी के हिसाब से टाइमलाइन में फिर बदलाव भी हो सकता है।
एंथ्रोपिक का आईपीओ नवंबर में होने वाले अमेरिकी मिडटर्म चुनाव (US Midterm Elections) से कुछ दिन पहले आ सकता है। निवेशकों की इस पर खास नजर है। कुछ अनुमान के मुताबिक, कंपनी करीब 2 ट्रिलियन डॉलर के मूल्यांकन (Valuation) की मांग कर सकती है। अगर ऐसा होता है तो यह अब तक के सबसे बड़े आईपीओ में शामिल होगा और एआई कंपनियों में निवेशकों की दिलचस्पी की बड़ी परीक्षा भी होगी।
कंपनी फिलहाल 15 अरब डॉलर की रिवॉल्विंग क्रेडिट फैसिलिटी (Revolving Credit Facility) को पूरा करने पर भी काम कर रही है। इसके बाद आईपीओ प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की तैयारी होगी। यह सुविधा पूरी होने के बाद इस फाइनेंसिंग से जुड़े बैंकों के विश्लेषकों समेत अन्य विश्लेषक कंपनी के अधिकारियों से मुलाकात कर सकते हैं।
एंथ्रोपिक का संभावित आईपीओ ऐसे समय में आ सकता है, जब ओपनएआई (OpenAI) समेत कुछ दूसरी एआई कंपनियां भी बाजार में लिस्टिंग की तैयारी कर सकती हैं। इससे एआई सेक्टर पर निवेशकों का फोकस और बढ़ने की उम्मीद है।
सोनी ने ग्रैंड थेफ्ट ऑटो 6 से प्रेरित दो लिमिटेड एडिशन ड्यूलसेंस वायरलेस कंट्रोलर पेश किए हैं, जिनकी बिक्री 19 नवंबर से शुरू होगी और भारत में प्री-ऑर्डर 10 सितंबर से शुरू होंगे।
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सोनी (Sony) ने ग्रैंड थेफ्ट ऑटो 6 (Grand Theft Auto VI) के प्रशंसकों के लिए दो खास लिमिटेड एडिशन ड्यूलसेंस वायरलेस कंट्रोलर पेश किए हैं। ब्लैक और व्हाइट रंग में आने वाले ये कंट्रोलर गेम की काल्पनिक दुनिया वाइस सिटी (Vice City) की चमकदार और रंगीन शैली से प्रेरित हैं। दोनों की बिक्री 19 नवंबर से शुरू होगी, जिस दिन गेम के भी लॉन्च होने की उम्मीद है।
इन कंट्रोलर के डिजाइन में वाइस सिटी के माहौल को खास तौर पर उभारा गया है। इनमें ऐसी चमकदार फिनिश दी गई है, जो रोशनी के साथ अपना रंग बदलती नजर आती है। इसका उद्देश्य गेम में दिखाई देने वाले सूर्यास्त के रंगों और नीयॉन रोशनी से भरी रात का अहसास देना है। कंट्रोलर की बॉडी में हथेली के आकार के पेड़ भी बनाए गए हैं, जबकि टचपैड पर ग्रैंड थेफ्ट ऑटो 6 की ब्रांडिंग दी गई है।
दोनों कंट्रोलर में ड्यूलसेंस की प्रमुख सुविधाएं मौजूद रहेंगी। इनमें हैप्टिक फीडबैक और अडैप्टिव ट्रिगर शामिल हैं। सोनी के मुताबिक, ग्रैंड थेफ्ट ऑटो 6 खेलते समय ये सुविधाएं गेमप्ले के अनुसार प्रतिक्रिया देंगी। खिलाड़ियों को अलग-अलग गतिविधियों के दौरान ट्रिगर में बदलता प्रतिरोध और हैप्टिक प्रभाव महसूस होगा।
अमेरिका में दोनों कंट्रोलर की कीमत 84.99 डॉलर, यूरोप में 84.99 यूरो और ब्रिटेन में 74.99 पाउंड रखी गई है। जापान में इनकी कीमत कर समेत 12,480 येन होगी। प्री-ऑर्डर 10 सितंबर को स्थानीय समयानुसार सुबह 10 बजे से चुनिंदा बाजारों में शुरू होंगे। भारत में प्री-ऑर्डर उसी दिन शाम 7:30 बजे भारतीय समयानुसार शुरू होंगे।
गूगल ने जेमिनी 3.8 फ्लैश और 3.8 फ्लैश साइबर मॉडल लॉन्च किए हैं। नए मॉडल कोडिंग, रीजनिंग और साइबर सुरक्षा से जुड़े कामों में बेहतर प्रदर्शन का दावा करते हैं।
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गूगल (Google) ने अपने जेमिनी एआई मॉडल की नई सीरीज में जेमिनी 3.8 फ्लैश (Gemini 3.8 Flash) और जेमिनी 3.8 फ्लैश साइबर (Gemini 3.8 Flash Cyber) लॉन्च किए हैं। कंपनी के मुताबिक, नए मॉडल पिछले संस्करणों की तुलना में रीजनिंग, कोडिंग और साइबर सुरक्षा से जुड़े कामों में बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं। इन्हें तेज गति और कम लागत को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है।
गूगल का कहना है कि जेमिनी 3.8 फ्लैश उसका अब तक का सबसे सक्षम फ्लैश मॉडल है। इसे कई तरह के जटिल और लंबे कामों को संभालने के लिए तैयार किया गया है।
जेमिनी 3.8 फ्लैश को खास तौर पर कोडिंग और जटिल सवालों को हल करने के लिए विकसित किया गया है। यह लंबे और कई चरणों वाले कामों को संभाल सकता है। जरूरत के अनुसार मॉडल ज्यादा रीजनिंग कर सकता है और जवाब को बेहतर बनाने के लिए उपलब्ध टूल्स का इस्तेमाल भी कर सकता है।
गूगल के अनुसार, यह मॉडल सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग, वित्तीय विश्लेषण और कानूनी रीजनिंग जैसे कामों में पिछले मॉडल के मुकाबले बेहतर प्रदर्शन करता है। जेमिनी 3.8 फ्लैश साइबर को विशेष रूप से साइबर सुरक्षा से जुड़े कामों के लिए तैयार किया गया है। यह सॉफ्टवेयर में मौजूद कमजोरियों की पहचान करने और उन्हें ठीक करने के लिए सुरक्षा पैच तैयार करने में मदद कर सकता है।
कंपनी के मुताबिक, यह अलग-अलग प्रोग्रामिंग भाषाओं में लिखे कोड में सुरक्षा खामियों को पहचानने में सक्षम है। इसका मुख्य उद्देश्य साइबर हमले करना नहीं, बल्कि डेवलपर्स और सुरक्षा टीमों को सॉफ्टवेयर की सुरक्षा मजबूत करने में मदद करना है।
जेमिनी 3.8 फ्लैश को अब उन डेवलपर्स के लिए उपलब्ध कराया गया है, जो एआई ऐप, स्वायत्त एजेंट और कोडिंग टूल विकसित करना चाहते हैं। वहीं, जेमिनी 3.8 फ्लैश साइबर की उपलब्धता फिलहाल कुछ चुनिंदा संगठनों तक सीमित है। इसे गूगल के फेयरविंड कार्यक्रम (Fairwind Program) के जरिए उपलब्ध कराया जा रहा है।
न्यूयॉर्क सिटी के सार्वजनिक प्राथमिक और मिडिल स्कूलों में छात्रों के लिए 40 एजुकेशन एआई टूल्स के इस्तेमाल पर एक साल की रोक लगाई गई है, जबकि शिक्षकों को कुछ कामों में अनुमति होगी।
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आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई (AI) के बढ़ते इस्तेमाल के बीच अमेरिका के न्यूयॉर्क सिटी (New York City) के अधिकारियों ने स्कूलों में इसके उपयोग को लेकर सख्त फैसला लिया है। शहर के सार्वजनिक प्राथमिक और मिडिल स्कूलों में छात्रों द्वारा करीब 40 एजुकेशन एआई टूल्स के इस्तेमाल पर एक साल के लिए रोक लगा दी गई है।
यह फैसला अमेरिका में स्कूलों के भीतर एआई के इस्तेमाल को लेकर अब तक उठाए गए सबसे सख्त कदमों में से एक माना जा रहा है। इसका असर कक्षा 8 तक के छात्रों पर पड़ेगा। हालांकि, हाई स्कूल के छात्रों को कुछ परिस्थितियों में एआई का इस्तेमाल करने की अनुमति दी जा सकती है।
न्यूयॉर्क सिटी के मेयर जोहरान ममदानी (Zohran Mamdani) ने बुधवार को इस फैसले की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि बच्चों को सीखने और आगे बढ़ने के लिए शिक्षकों के साथ जुड़ाव की जरूरत है। छात्रों को अपने साथियों के साथ मिलकर कौशल सीखने और शिक्षकों से नई चीजें समझने का अवसर मिलना चाहिए।
सिटी प्रशासन के अनुसार, शिक्षकों को अपनी योजना बनाने और शेड्यूल तैयार करने जैसे कामों के लिए एआई के इस्तेमाल की अनुमति रहेगी। वहीं छात्रों के लिए कक्षा में इस्तेमाल किए जा रहे 40 एजुकेशन एआई टूल्स पर फिलहाल रोक लागू होगी।
इस फैसले पर एआई क्षेत्र की प्रमुख कंपनियों गूगल (Google), एंथ्रोपिक (Anthropic) और माइक्रोसॉफ्ट (Microsoft) की ओर से तत्काल कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। न्यूयॉर्क के इस कदम के बाद लॉस एंजिल्स (Los Angeles) समेत अमेरिका के कई अन्य शहरों में भी स्कूलों में एआई के इस्तेमाल से जुड़े मौजूदा नियमों की समीक्षा की जा रही है।
यूट्यूब टीवी ने ईएसपीएन अनलिमिटेड को अपने प्लेटफॉर्म से जोड़ा है। सब्सक्राइबर्स को लाइव स्पोर्ट्स, स्टूडियो शो, डॉक्यूमेंट्री और कई नए फीचर्स एक ही ऐप पर मिलेंगे।
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यूट्यूब टीवी (YouTube TV) ने अपने प्लेटफॉर्म पर ईएसपीएन अनलिमिटेड (ESPN Unlimited) का कंटेंट जोड़ दिया है। इस इंटीग्रेशन के बाद सब्सक्राइबर्स को यूट्यूब टीवी ऐप के भीतर ही लाइव स्पोर्ट्स, स्टूडियो प्रोग्रामिंग और डॉक्यूमेंट्री की ज्यादा रेंज देखने को मिलेगी।
1 सितंबर को घोषित किया गया यह इंटीग्रेशन उन यूजर्स के लिए उपलब्ध है, जिन्होंने यूट्यूब टीवी का मुख्य प्लान या ऐसा कोई अन्य प्लान लिया है, जिसमें स्पोर्ट्स की सुविधा शामिल है।
इसके बाद दर्शक यूएस ओपन (US Open) टेनिस टूर्नामेंट, एनसीएए कॉलेज फुटबॉल (NCAA College Football), पीजीए टूर (PGA Tour) गोल्फ, डब्ल्यूडब्ल्यूई प्रीमियम लाइव इवेंट्स (WWE Premium Live Events), ला लिगा (LALIGA) और आउट-ऑफ-मार्केट एनएचएल (NHL) गेम्स जैसे मुकाबले देख सकेंगे।
ईएसपीएन अनलिमिटेड के जरिए दर्शकों को सिर्फ लाइव स्पोर्ट्स ही नहीं, बल्कि स्टूडियो प्रोग्रामिंग भी मिलेगी। इसमें द रिच आइजन शो (The Rich Eisen Show), ईएसपीएन ओरिजिनल्स एंड फिल्म्स (ESPN Originals and Films) और ईएसपीएन की 30 फॉर 30 डॉक्यूमेंट्री लाइब्रेरी (ESPN's 30 for 30 documentary library) शामिल है।
यूट्यूब टीवी के अनलिमिटेड डीवीआर (Unlimited DVR), की प्लेज (Key Plays), स्कोर और स्टैटिस्टिक्स तथा मल्टीव्यू (Multiview) जैसे फीचर्स भी ईएसपीएन अनलिमिटेड के कंटेंट के साथ काम करेंगे।
यूट्यूब टीवी ने अपने फैंटेसी व्यू (Fantasy View) फीचर को ईएसपीएन फैंटेसी फुटबॉल (ESPN Fantasy Football) तक भी बढ़ाया है। ईएसपीएन फैंटेसी फुटबॉल अकाउंट वाले यूजर्स इसे यूट्यूब टीवी की सेटिंग्स के जरिए लिंक कर सकेंगे। इसके बाद वे लाइव एनएफएल (NFL) गेम देखते समय अपनी फैंटेसी टीम को भी ट्रैक कर पाएंगे।
एपल में करीब डेढ़ दशक बाद नेतृत्व परिवर्तन हुआ है। टिम कुक ने सीईओ पद छोड़ा और जॉन टर्नस ने कंपनी की कमान संभाली। कुक अब एग्जीक्यूटिव चेयरमैन रहेंगे।
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एपल (Apple) में करीब 15 साल बाद नेतृत्व का बड़ा बदलाव हुआ है। टिम कुक (Tim Cook) ने कंपनी के सीईओ (CEO) पद से विदाई ले ली। अब जॉन टर्नस (John Ternus) ने एपल की कमान संभाल ली है। टिम कुक कंपनी में एग्जीक्यूटिव चेयरमैन (Executive Chairman) की भूमिका निभाएंगे, जबकि जॉन टर्नस ने 1 सितंबर से सीईओ का पद संभाल लिया है।
टिम कुक करीब 30 साल से एपल से जुड़े हुए हैं। उन्होंने 2011 में कंपनी के सीईओ की जिम्मेदारी संभाली थी। यह बदलाव स्टीव जॉब्स (Steve Jobs) के निधन से कुछ सप्ताह पहले हुआ था। अब कुक के सीईओ पद से हटने के साथ एपल एक नए नेतृत्व के दौर में पहुंच गया है।
सीईओ के तौर पर अपने आखिरी दिन टिम कुक ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर एपल कम्युनिटी के लिए एक संदेश साझा किया। उन्होंने कहा कि भले ही उनकी भूमिका बदल रही है, लेकिन एपल कम्युनिटी के लिए उनका प्यार कभी नहीं बदलेगा।
Sending lots of love to the Apple community on my last day as CEO. My title changes tomorrow, but the love I have for the Apple community never will. Thank you for being a constant source of inspiration. My gratitude is endless, and I’m excited for the next chapter!
— Tim Cook (@tim_cook) August 31, 2026
कुक ने कर्मचारियों को लगातार प्रेरित करने के लिए धन्यवाद दिया और अपनी कृतज्ञता जाहिर की। कर्मचारियों को भेजे आखिरी मेमो में उन्होंने स्टीव जॉब्स को भी याद किया और एपल की सफलता का श्रेय कंपनी की पूरी टीम को दिया।
टिम कुक के नेतृत्व में एपल ने कारोबार का बड़े स्तर पर विस्तार किया। सोमवार को कंपनी का मार्केट वैल्यूएशन (Market Valuation) 4.5 ट्रिलियन डॉलर के पार पहुंच गया। इससे एपल दुनिया की सबसे मूल्यवान कंपनियों में अपनी मजबूत स्थिति बनाए रखने में सफल रही है।
कुक के कार्यकाल में कंपनी ने अपने प्रोडक्ट पोर्टफोलियो के साथ हार्डवेयर, चिप्स और टेक्नोलॉजी इकोसिस्टम को भी मजबूत किया। इस दौरान एपल वॉच (Apple Watch), एयरपॉड्स (AirPods), होमपॉड (HomePod) और विजन प्रो (Vision Pro) जैसे नए प्रोडक्ट्स लॉन्च किए गए।
जॉन टर्नस ने साल 2001 में एपल के साथ काम शुरू किया था। सीईओ बनने से पहले वह सीनियर वाइस प्रेसिडेंट ऑफ हार्डवेयर इंजीनियरिंग (Senior Vice President of Hardware Engineering) की जिम्मेदारी संभाल रहे थे।
एपल के कई प्रमुख प्रोडक्ट्स के विकास में टर्नस की अहम भूमिका रही है। इनमें मैक (Mac), आईपैड (iPad) और एयरपॉड्स (AirPods) जैसे प्रोडक्ट शामिल हैं। हार्डवेयर इंजीनियरिंग और प्रोडक्ट डेवलपमेंट का उनका लंबा अनुभव अब कंपनी के शीर्ष नेतृत्व में काम आएगा।
ओरेकल में एक बार फिर बड़े पैमाने पर छंटनी की चर्चा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, लागत घटाने के लिए कंपनी दुनियाभर में 7 हजार से 10 हजार नौकरियां कम कर सकती है।
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अमेरिका की टेक्नोलॉजी कंपनी ओरेकल (Oracle) में एक बार फिर बड़े पैमाने पर छंटनी की चर्चा तेज हो गई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, कंपनी अपनी लागत कम करने के लिए दुनियाभर में कर्मचारियों की संख्या घटाने की तैयारी कर रही है। इस संभावित फैसले का असर भारत में काम कर रहे कर्मचारियों पर भी पड़ सकता है।
हालांकि, कंपनी की ओर से अभी तक इस संबंध में कोई आधिकारिक जानकारी साझा नहीं की गई है। रिपोर्ट्स में बताया जा रहा है कि ओरेकल ने अपनी टीमों को बजट कम करने के संकेत दिए हैं। इसके बाद कंपनी के कर्मचारियों के बीच संभावित जॉब कट को लेकर हलचल बढ़ गई है।
ओरेकल कितने कर्मचारियों को नौकरी से हटा सकती है, इसका आधिकारिक आंकड़ा अभी सामने नहीं आया है। हालांकि, कई रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि कंपनी दुनियाभर में करीब 7 हजार से 10 हजार कर्मचारियों की छंटनी कर सकती है।
भारत में इस संभावित छंटनी से कितने कर्मचारी प्रभावित होंगे, फिलहाल इसकी कोई जानकारी नहीं है। इससे पहले भी ओरेकल में कर्मचारियों की टीम और भूमिकाओं में बदलाव की खबरें सामने आई थीं।
ओरेकल एक अमेरिका आधारित अंतरराष्ट्रीय टेक्नोलॉजी कंपनी है। कंपनी दूसरी कंपनियों और बड़े संस्थानों को क्लाउड (Cloud), डेटाबेस (Database) और बिजनेस सॉफ्टवेयर (Business Software) जैसी तकनीकी सेवाएं उपलब्ध कराती है।
भारत में भी ओरेकल का कारोबार मौजूद है और यहां कंपनी में बड़ी संख्या में कर्मचारी काम करते हैं। ऐसे में अगर वैश्विक स्तर पर छंटनी का फैसला लिया जाता है, तो भारत में इसके प्रभाव को लेकर भी नजर बनी हुई है।
सरकार ने सेमीकॉन 2.0 योजना का नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। 1,27,500 करोड़ रुपये की इस योजना का लक्ष्य भारत में मजबूत सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम तैयार करना है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
भारत में सेमीकंडक्टर (Semiconductor) इंडस्ट्री को मजबूत करने की दिशा में सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। सोमवार को सरकार ने ‘सेमीकॉन 2.0’ (Semicon 2.0) योजना का नोटिफिकेशन जारी कर दिया। इसके साथ ही 1,27,500 करोड़ रुपये की इस महत्वाकांक्षी योजना को लागू करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है।
इस कार्यक्रम का उद्देश्य देश में केवल चिप निर्माण बढ़ाना नहीं है, बल्कि सेमीकंडक्टर से जुड़ा पूरा इकोसिस्टम तैयार करना है। इसमें घरेलू स्तर पर चिप डिजाइन और इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी (Intellectual Property) विकसित करने के साथ उपकरण, मटीरियल, एडवांस्ड पैकेजिंग, रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D) और टैलेंट डेवलपमेंट जैसे क्षेत्रों पर भी जोर दिया जाएगा।
चिप निर्माण से लेकर डिजाइन तक पर फोकस
सेमीकंडक्टर को दुनिया भर में तेजी से रणनीतिक संसाधन के तौर पर देखा जा रहा है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (Artificial Intelligence) के बढ़ते इस्तेमाल के कारण एडवांस्ड चिप्स और मेमोरी की मांग में तेजी आई है।
इसके अलावा वैश्विक सप्लाई चेन में कमजोरियों और बदलती भू-राजनीतिक परिस्थितियों ने भी सेमीकंडक्टर निर्माण क्षमता बढ़ाने की जरूरत को बढ़ाया है। ऐसे में कई कंपनियां कुछ चुनिंदा देशों पर उत्पादन के लिए अपनी निर्भरता कम करने की कोशिश कर रही हैं।
केंद्रीय कैबिनेट (Union Cabinet) ने 15 जुलाई 2026 को ‘सेमीकॉन 2.0’ को मंजूरी दी थी। अब जारी नोटिफिकेशन में योजना के तहत 1,27,500 करोड़ रुपये के बजट के इस्तेमाल, इंसेंटिव (Incentive) और अलग-अलग श्रेणियों के लिए पात्रता से जुड़ी रूपरेखा बताई गई है।
आईटी सेक्रेटरी एस. कृष्णन (S. Krishnan) ने कहा कि सेमीकॉन 2.0 के जरिए भारत के सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम के विकास के अगले चरण में आगे बढ़ने का समय आ गया है। उन्होंने योजना का उद्देश्य आत्मनिर्भरता हासिल करने के साथ वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने वाली इंडस्ट्री तैयार करना बताया।
स्टार्टअप्स और कंपनियों को भी मिलेगा समर्थन
कमर्शियल सेक्टर के लिए चिप डिजाइनिंग के क्षेत्र में स्टार्टअप्स और भारतीय नागरिकों या ओवरसीज सिटिजन ऑफ इंडिया (OCI) के स्वामित्व वाली कंपनियां योजना के लिए पात्र होंगी।
स्टार्टअप्स को आर्थिक सहायता ग्रांट (Grant) और इक्विटी को-इन्वेस्टमेंट (Equity Co-investment) के रूप में दी जाएगी। वहीं कंपनियों के लिए सहायता रॉयल्टी फाइनेंसिंग (Royalty Financing) या इक्विटी को-इन्वेस्टमेंट के जरिए उपलब्ध होगी।
फैब्स (Fabs) यानी सेमीकंडक्टर निर्माण इकाइयों की स्थापना को बढ़ावा देने के लिए भी वित्तीय सहायता का प्रावधान किया गया है। सिलिकॉन फैब्स के लिए 40 फीसदी और कंपाउंड, डिस्प्ले तथा अन्य विशेष फैब्स के लिए 35 फीसदी वित्तीय सहायता देने की व्यवस्था है। डिस्प्ले फैब्स में एलसीडी (LCD), ओएलईडी (OLED) और माइक्रो एलईडी (Micro LED) जैसी तकनीकें शामिल हैं।
एडवांस्ड पैकेजिंग को भी मिलेगा बढ़ावा
योजना में एटीएमपी/ओएसएटी (ATMP/OSAT) यानी असेंबली, टेस्टिंग, मार्किंग और पैकेजिंग से जुड़ी सुविधाओं को मजबूत करने पर भी ध्यान दिया गया है। इसके तहत एडवांस्ड और पारंपरिक दोनों तरह की पैकेजिंग को समर्थन दिया जाएगा।
एडवांस्ड पैकेजिंग के लिए कैपिटल एक्सपेंडिचर (CAPEX) का 35 फीसदी और पारंपरिक पैकेजिंग के लिए 25 फीसदी इंसेंटिव देने का प्रावधान है। इससे देश में सेमीकंडक्टर निर्माण के साथ पैकेजिंग क्षमता विकसित करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
ब्रिटेन की हाई कोर्ट ने स्मार्टवॉच वॉच-फेस ऐप्स से जुड़े ट्रेडमार्क मामले में सैमसंग को स्वॉच ग्रुप को 11.6 मिलियन डॉलर मुआवजा देने का आदेश दिया है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
सैमसंग (Samsung) को स्मार्टवॉच (Smartwatch) के वॉच-फेस ऐप्स से जुड़े ट्रेडमार्क विवाद में बड़ा झटका लगा है। ब्रिटेन की हाई कोर्ट (High Court) ने कंपनी को स्विस घड़ी कंपनी स्वॉच ग्रुप (Swatch Group) को 11.6 मिलियन डॉलर यानी करीब 110 करोड़ रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया है।
यह मामला सैमसंग के गैलेक्सी ऐप स्टोर (Galaxy App Store) पर उपलब्ध कुछ वॉच-फेस ऐप्स से जुड़ा है। ये ऐप्स 2015 से 2019 के बीच प्लेटफॉर्म पर मौजूद थे। स्वॉच ग्रुप का आरोप था कि कुछ थर्ड-पार्टी ऐप्स (Third-Party Apps) में उसके लग्जरी घड़ी ब्रांड्स के डिजाइन और ट्रेडमार्क की नकल की गई थी।
स्वॉच ग्रुप के पास ओमेगा (Omega), लॉन्गाइन्स (Longines) और ब्रेगेट (Breguet) जैसे प्रीमियम घड़ी ब्रांड हैं। कंपनी का कहना था कि इन ब्रांड्स के नाम और डिजाइन का इस्तेमाल बिना अनुमति किया गया और सैमसंग के प्लेटफॉर्म के जरिए यूजर्स तक ये ऐप्स पहुंचे।
रिपोर्ट के अनुसार, ब्रिटेन और यूरोप में इन वॉच-फेस ऐप्स के करीब 1.6 लाख डाउनलोड दर्ज किए गए थे। स्वॉच ग्रुप ने इस मामले में सैमसंग से करीब 170 मिलियन डॉलर यानी लगभग 1,500 करोड़ रुपये के मुआवजे की मांग की थी।
वहीं, सैमसंग का पक्ष था कि उसे इस मामले में केवल करीब 300 डॉलर का भुगतान करना चाहिए। लेकिन अदालत ने कंपनी को प्लेटफॉर्म पर इन ऐप्स की उपलब्धता के लिए जिम्मेदार माना और 11.6 मिलियन डॉलर के मुआवजे का आदेश दिया।
अदालत के मुताबिक, भले ही संबंधित वॉच-फेस ऐप्स थर्ड-पार्टी डेवलपर्स ने बनाए थे, लेकिन उन्हें सैमसंग के प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराने में कंपनी की भी जिम्मेदारी थी। जज ने कहा कि सैमसंग का ऐप रिव्यू सिस्टम (App Review System) कथित ट्रेडमार्क उल्लंघन को रोकने में सफल नहीं रहा।
फैसले में लग्जरी ब्रांड्स की पहचान और बाजार में उनकी छवि को भी महत्वपूर्ण माना गया। अदालत के मुताबिक, महंगे घड़ी ब्रांड्स के डिजाइन और पहचान को मुफ्त या बेहद कम कीमत पर उपलब्ध कराए जाने से उनकी वैल्यू और ब्रांड इमेज प्रभावित हो सकती है।
इस मामले का असर सिर्फ सैमसंग तक सीमित नहीं माना जा रहा है। यह फैसला बड़ी टेक कंपनियों (Tech Companies) के लिए भी महत्वपूर्ण हो सकता है, क्योंकि इससे थर्ड-पार्टी ऐप्स के जरिए होने वाले ट्रेडमार्क उल्लंघन में प्लेटफॉर्म संचालकों की जिम्मेदारी पर सवाल उठता है।
फिलहाल सैमसंग ने इस फैसले को अंतिम रूप से स्वीकार नहीं किया है। कंपनी मामले में आगे अपील (Appeal) करने पर विचार कर रही है। ऐसे में आने वाले समय में इस विवाद पर कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है।
यूट्यूब ने अमेरिका के योग्य क्रिएटर्स के लिए अमेजन को अपने शॉपिंग एफिलिएट प्रोग्राम से जोड़ा है। वीडियो में प्रोडक्ट टैग कर कमीशन कमाया जा सकेगा।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
यूट्यूब (YouTube) ने अपने शॉपिंग एफिलिएट प्रोग्राम में अमेजन (Amazon) को शामिल कर दिया है। इस नई साझेदारी के बाद अमेरिका के योग्य क्रिएटर्स अपने शॉर्ट्स, लंबे वीडियो और लाइवस्ट्रीम में अमेजन के चुनिंदा प्रोडक्ट टैग कर सकेंगे। इससे क्रिएटर्स को प्रोडक्ट की सिफारिश के जरिए कमाई का एक नया रास्ता मिलेगा।
यूट्यूब स्टूडियो के प्रोडक्ट पिकर की मदद से क्रिएटर्स उपलब्ध अमेजन प्रोडक्ट चुनकर उन्हें सीधे अपने कंटेंट के साथ जोड़ सकेंगे। अमेजन की ओर से लोकप्रिय और ट्रेंडिंग प्रोडक्ट्स की सूची भी उपलब्ध कराई जाएगी। अगर कोई खास प्रोडक्ट सूची में नहीं है, तो क्रिएटर उसे उपलब्ध कराने के लिए यूट्यूब सपोर्ट से अनुरोध कर सकता है।
अपने आप भी होंगे प्रोडक्ट टैग
इस व्यवस्था में ऑटोमैटिक टैगिंग की सुविधा भी दी गई है। इसे सक्रिय करने पर यूट्यूब हालिया वीडियो को स्कैन करके उनमें मौजूद योग्य अमेजन प्रोडक्ट की पहचान कर सकता है और उन्हें टैग कर सकता है। आने वाले कंटेंट में भी यह प्रक्रिया अपने आप लागू हो सकती है।
क्रिएटर्स को यूट्यूब स्टूडियो में क्लिक, बिक्री और अनुमानित कमाई का कुल डेटा दिखाई देगा। हालांकि, हर प्रोडक्ट या प्रत्येक वीडियो से हुई बिक्री का अलग-अलग विस्तृत आंकड़ा उपलब्ध नहीं होगा।
अभी अमेरिका तक सीमित है सुविधा
फिलहाल यह सुविधा अमेरिका के योग्य क्रिएटर्स के लिए शुरू की गई है। इसके लिए क्रिएटर का यूट्यूब पार्टनर प्रोग्राम और अमेरिकी यूट्यूब शॉपिंग एफिलिएट प्रोग्राम का हिस्सा होना जरूरी है। साथ ही उसके पास सक्रिय अमेजन इन्फ्लुएंसर या अमेजन एसोसिएट्स अकाउंट होना चाहिए।
अमेजन से मिलने वाला कमीशन क्रिएटर के मौजूदा ऐडसेंस भुगतान सिस्टम के जरिए दिया जाएगा। लौटाए गए प्रोडक्ट की वजह से कमीशन में कमी भी हो सकती है। खास बात यह है कि वीडियो देखने वाले सभी लोग अमेरिका से हों, यह जरूरी नहीं है। अमेरिका के बाहर के दर्शकों को भी प्रोडक्ट टैग दिखाई दे सकते हैं। उपलब्ध होने पर यूट्यूब उनके लिए स्थानीय भरोसेमंद विक्रेता का विकल्प दिखा सकता है।
इस साझेदारी से यूट्यूब पर कंटेंट देखने, प्रोडक्ट खोजने और खरीदारी करने के बीच की दूरी और कम होने वाली है। इससे क्रिएटर इकोसिस्टम में एफिलिएट कमाई का महत्व भी बढ़ सकता है।