PVR INOX ने Rs 200 करोड़ के कथित किकबैक पर दी सफाई, कहा- बाहरी जांच में नहीं मिला कोई सबूत

PVR INOX ने कंपनी में Rs 200 करोड़ के कथित किकबैक को लेकर सामने आई खबरों पर सफाई दी है। कंपनी ने कहा है कि इस मामले में बाहरी विशेषज्ञों से कराई गई प्रारंभिक जांच में किकबैक का कोई सबूत नहीं मिला।

Vikas Saxena by
Published - Tuesday, 08 September, 2026
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Tuesday, 08 September, 2026
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PVR INOX ने कंपनी में Rs 200 करोड़ के कथित किकबैक को लेकर सामने आई खबरों पर सफाई दी है। कंपनी ने कहा है कि इस मामले में बाहरी विशेषज्ञों से कराई गई प्रारंभिक जांच में किकबैक का कोई सबूत नहीं मिला।

बता दें कि किकबैक का मतलब किसी कारोबारी सौदे या काम को दिलाने के बदले छिपकर कमीशन या पैसा लेना-देना होता है।

कंपनी की यह सफाई नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) और बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) की ओर से पूछे गए सवालों के जवाब में आई है। दरअसल, 7 सितंबर को एक रिपोर्ट में PVR INOX के शेयरों में करीब 8 फीसदी की गिरावट और कंपनी में कथित Rs 200 करोड़ के किकबैक को लेकर आंतरिक जांच की बात कही गई थी।

अप्रैल में मिली थीं गुमनाम शिकायतें

PVR INOX के मुताबिक, यह मामला अप्रैल 2026 की शुरुआत में सामने आया। उस समय कंपनी के दो प्रमोटर्स को कुछ कर्मचारियों द्वारा कथित अनियमितता किए जाने को लेकर गुमनाम संदेश मिले थे। कंपनी ने कहा कि इन संदेशों में प्रमोद अरोड़ा का सीधे तौर पर नाम नहीं लिया गया था। इनमें कुछ संक्षिप्त नाम और शुरुआती अक्षरों का इस्तेमाल किया गया था। शिकायतों में कथित किकबैक से जुड़े डेवलपर्स के नाम, तारीख या किसी खास घटना जैसी ठोस जानकारी भी नहीं दी गई थी। इसके बावजूद प्रमोटर्स ने कंपनी की आंतरिक नीतियों के तहत इन शिकायतों को आगे विचार के लिए कंपनी के पास भेज दिया।

बाहरी विशेषज्ञों से कराई गई प्रारंभिक जांच

PVR INOX ने कहा कि शिकायतें गुमनाम थीं और उनमें सत्यापन योग्य जानकारी भी नहीं थी। इसके बावजूद बेहतर कॉरपोरेट गवर्नेंस को ध्यान में रखते हुए कंपनी ने बाहरी विशेषज्ञों से मामले की प्रारंभिक जांच कराई।

कंपनी के मुताबिक, इस प्रारंभिक आकलन में किसी तरह के किकबैक यानी छिपे हुए कमीशन या भुगतान का कोई सबूत नहीं मिला। इस तरह कंपनी ने Rs 200 करोड़ के कथित किकबैक से जुड़ी खबरों पर अपना पक्ष साफ करते हुए कहा है कि बाहरी विशेषज्ञों की प्रारंभिक जांच में इन आरोपों की पुष्टि नहीं हुई।

प्रमोद अरोड़ा के इस्तीफे पर भी सफाई 

इस पूरे मामले में प्रमोद अरोड़ा का कंपनी से जाना भी चर्चा में रहा। PVR INOX ने बताया कि प्रमोद अरोड़ा ने 4 मई 2026 को व्यक्तिगत कारणों का हवाला देते हुए इस्तीफा दिया था। कंपनी ने उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया था, लेकिन साथ ही कंपनी के प्रति उनकी जारी जिम्मेदारियों को बरकरार रखा गया और अपने अधिकारों व कानूनी उपायों को सुरक्षित रखा गया।

PVR INOX ने खास तौर पर स्पष्ट किया कि प्रमोद अरोड़ा को कंपनी छोड़ने के लिए नहीं कहा गया था। कंपनी ने 25 मई को स्टॉक एक्सचेंजों को उनके इस्तीफे की जानकारी भी दी थी।

शिकायत और इस्तीफे के समय को लेकर बनी अटकलें

Arora का इस्तीफा उस समय हुआ जब कंपनी को गुमनाम शिकायतें मिल चुकी थीं और मामले का प्रारंभिक आकलन चल रहा था। इसी वजह से दोनों घटनाओं को लेकर अटकलें लगाई गईं। हालांकि, PVR INOX ने दोनों घटनाओं के बीच किसी तरह का सीधा संबंध होने की बात नहीं कही है। कंपनी ने दोहराया है कि प्रारंभिक बाहरी जांच में किकबैक के आरोपों के समर्थन में कोई सबूत नहीं मिला।

कॉरपोरेट गवर्नेंस पर कंपनी का जोर

PVR INOX ने कहा कि यह पूरा मामला कंपनी के कॉरपोरेट गवर्नेंस, नैतिक कारोबारी व्यवहार और संगठन में जवाबदेही को लेकर उसकी प्रतिबद्धता को दिखाता है। कंपनी के मुताबिक, उसके कारोबार और हितधारकों के साथ संबंधों को लेकर नीतियां, प्रक्रियाएं और आंतरिक नियंत्रण व्यवस्था मौजूद हैं। कंपनी ने कहा कि वह लागू कानूनों और अपने गवर्नेंस मानकों के अनुरूप कारोबार करने के लिए प्रतिबद्ध है। PVR INOX ने अपनी ओर से ईमानदारी, पारदर्शिता और जवाबदेही पर भी जोर दिया है।

निवेशकों के लिए क्या मायने रखता है?

PVR INOX की सफाई के बाद Rs 200 करोड़ के कथित किकबैक का मामला एक अलग तस्वीर पेश करता है। कंपनी ने यह जरूर माना है कि गुमनाम शिकायतों के बाद बाहरी विशेषज्ञों से प्रारंभिक जांच कराई गई थी, लेकिन उसका कहना है कि इस जांच में किकबैक के आरोपों को साबित करने वाला कोई सबूत नहीं मिला। 

फिलहाल कंपनी का आधिकारिक रुख यही है कि प्रारंभिक बाहरी आकलन में Rs 200 करोड़ के कथित किकबैक की पुष्टि नहीं हुई है।

 

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गुरसिमरन कौर मेहर ने ब्लूमबर्ग न्यूज जॉइन किया, बनीं ब्रेकिंग न्यूज एडिटर

गुरसिमरन कौर मेहर इससे पहले रॉयटर्स में सीनियर कॉरेस्पोंडेंट के तौर पर कार्यरत थीं। उन्होंने लिंक्डइन पोस्ट के जरिए ब्लूमबर्ग न्यूज में नई भूमिका की जानकारी दी।

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Published - Tuesday, 08 September, 2026
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Tuesday, 08 September, 2026
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गुरसिमरन कौर मेहर ने ब्लूमबर्ग न्यूज (Bloomberg News) के साथ अपनी नई पारी शुरू की है। उन्होंने कंपनी में ब्रेकिंग न्यूज एडिटर के तौर पर जॉइन किया है। इसकी जानकारी उन्होंने लिंक्डइन पर एक पोस्ट के जरिए साझा की।

गुरसिमरन ने अपनी पोस्ट में लिखा कि वह ब्लूमबर्ग न्यूज में ब्रेकिंग न्यूज एडिटर के तौर पर जुड़कर बेहद उत्साहित हैं और आगे की नई जिम्मेदारियों को लेकर उत्सुक हैं।

ब्लूमबर्ग न्यूज से जुड़ने से पहले गुरसिमरन कौर मेहर करीब साढ़े तीन साल तक रॉयटर्स (Reuters) के साथ रहीं। नवंबर 2025 से अगस्त 2026 तक उन्होंने रॉयटर्स में सीनियर कॉरेस्पोंडेंट की जिम्मेदारी संभाली। इससे पहले अगस्त 2023 से अक्टूबर 2025 तक वह कॉरेस्पोंडेंट और फरवरी 2023 से जुलाई 2023 तक ट्रेनी कॉरेस्पोंडेंट- ग्लोबल न्यूज मॉनिटरिंग के तौर पर काम कर चुकी हैं।

वह दक्षिण एशिया को कवर करने वाली ब्रेकिंग न्यूज रिपोर्टर रही हैं। न्यूज राइटिंग, ब्रेकिंग न्यूज और एडिटिंग में भी उनका अनुभव है।

गुरसिमरन कौर मेहर ने सेंट जोसेफ्स यूनिवर्सिटी, बेंगलुरु से जर्नलिज्म, इंटरनेशनल रिलेशंस, पब्लिक पॉलिसी एंड पीस स्टडीज में बैचलर ऑफ आर्ट्स की डिग्री हासिल की है। 

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प्रिंट से आगे बढ़ते प्रकाशक, बदल रहा है न्यूज कारोबार का पूरा मॉडल

कई दशकों तक अखबार ही मीडिया कंपनियों का सबसे बड़ा कारोबार रहा। डिजिटल प्लेटफॉर्म, इवेंट्स और दूसरी ब्रैंडेड प्रॉपर्टीज भी अखबार के कारोबार को मजबूत करने के लिए बनाई जाती थीं।

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Tuesday, 08 September, 2026
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कंचन श्रीवास्तव, सीनियर एडिटर, एक्सचेंज4मीडिया ।।

कई दशकों तक अखबार ही मीडिया कंपनियों का सबसे बड़ा कारोबार रहा। डिजिटल प्लेटफॉर्म, इवेंट्स और दूसरी ब्रैंडेड प्रॉपर्टीज भी अखबार के कारोबार को मजबूत करने के लिए बनाई जाती थीं। लेकिन अब यह तस्वीर तेजी से बदल रही है। भारत के बड़े अखबार समूह अब सिर्फ प्रिंट कंपनियां नहीं रह गए हैं, बल्कि धीरे-धीरे डाइवर्सिफाइड मीडिया बिजनेस बन रहे हैं।

मीडिया इंडस्ट्री के जानकारों के मुताबिक, बड़े प्रकाशक अब अपनी पुरानी ताकतों- विश्वसनीय ब्रैंड, विज्ञापनदाताओं के साथ मजबूत रिश्ते, क्षेत्रीय पहुंच, उपभोक्ताओं की बड़ी कम्युनिटी और ऑनलाइन-ऑफलाइन दर्शकों को एक साथ जोड़ने की क्षमता, का इस्तेमाल नए कारोबार खड़े करने में कर रहे हैं।

इंडस्ट्री लीडर्स का कहना है कि कई प्रकाशक अब अपनी कुल कमाई का 25-30% हिस्सा प्रिंट के बाहर के कारोबार से हासिल कर रहे हैं। इससे मुख्य अखबार कारोबार को भी लंबे समय तक टिकाऊ बनाए रखने में मदद मिल रही है।

इवेंट्स और डिजिटल से तेजी से बढ़ रही कमाई

मीडिया रिसर्च यूजर्स काउंसिल इंडिया (MRUCI) के चेयरमैन और मैडिसन वर्ल्ड के पार्टनर एवं डायरेक्टर विक्रम सखूजा के मुताबिक, पिछले 4-5 वर्षों में अखबारों के स्पॉन्सरशिप आधारित इवेंट्स, डिजिटल विज्ञापन और आउटडोर विज्ञापन (OOH) कारोबार में तेजी से बढ़ोतरी हुई है।

आज ज्यादातर अखबार, खासकर क्षेत्रीय प्रकाशक, हर साल कई इवेंट्स और अवॉर्ड कार्यक्रम आयोजित करते हैं। इनसे उन्हें स्पॉन्सरशिप और रजिस्ट्रेशन के जरिए करोड़ों रुपये की कमाई होती है। कुछ फिल्म और महिला पत्रिकाओं के लिए तो एक ही इवेंट से होने वाली कमाई उनके पूरे साल के विज्ञापन और सब्सक्रिप्शन राजस्व के बराबर या उससे भी ज्यादा हो सकती है।

प्रिंट मजबूत है, इसलिए नए कारोबार का मौका

The Hindu Group के चीफ डिजिटल बिजनेस ऑफिसर प्रदीप गैरोला का कहना है कि भारतीय समाचार प्रकाशकों के लिए मौजूदा स्थिति एक तरह से फायदेमंद है। यहां अखबार का कारोबार अभी भी मजबूत है, इसलिए प्रकाशक नए राजस्व स्रोत तैयार कर सकते हैं। उनके मुताबिक, भारत में प्रकाशकों के पास कमजोर होते कारोबार को बचाने के लिए मजबूरी में डाइवर्सिफिकेशन करने के बजाय मजबूत स्थिति से नए कारोबार खड़े करने का मौका है।

प्रदीप गैरोला का मानना है कि अगर यह स्थिति आगे भी बनी रहती है तो भारत के प्रकाशक अमेरिका और यूरोप के न्यूज इंडस्ट्री में देखने को मिली भारी छंटनी और अस्तित्व से जुड़े दबाव से कुछ हद तक बच सकते हैं। मौजूदा स्थिरता का इस्तेमाल एक ज्यादा विविध और मजबूत न्यूज बिजनेस तैयार करने में किया जा सकता है।

CRISIL का अनुमान, गैर-प्रिंट कारोबार की हिस्सेदारी 25% तक

इस बदलाव का पैमाना CRISIL की एक हालिया स्टडी से भी समझा जा सकता है। भारत के पांच बड़े और व्यापक रूप से प्रसारित दैनिक अखबारों पर आधारित इस अध्ययन के मुताबिक, गैर-प्रिंट कारोबार की हिस्सेदारी FY19 में करीब 13% थी, जो बढ़कर लगभग 25% होने का अनुमान है।

CRISIL को उम्मीद है कि FY25 से FY27 के बीच गैर-प्रिंट राजस्व सालाना 10-12% की दर से बढ़ सकता है, जबकि पारंपरिक प्रिंट कारोबार की वृद्धि दर करीब 2-3% रहने का अनुमान है।

इस बदलाव का मतलब सिर्फ इतना नहीं है कि प्रकाशक प्रिंट से होने वाली कमाई की जगह कोई दूसरा कारोबार खड़ा कर रहे हैं। वे उन संपत्तियों से कमाई कर रहे हैं, जिन्हें अखबारों ने दशकों में तैयार किया है। इनमें भरोसेमंद ब्रैंड, विज्ञापनदाताओं के साथ रिश्ते, क्षेत्रीय पहुंच, फिजिकल इंफ्रास्ट्रक्चर और बड़ी उपभोक्ता कम्युनिटी शामिल हैं।

प्रिंट का सीधा विकल्प नहीं बन पाया डिजिटल

प्रकाशकों के लिए चुनौती यह भी है कि डिजिटल कारोबार अभी तक प्रिंट के लिए एक सीधा और पूरी तरह समान विकल्प नहीं बन पाया है। ऐसे में प्रिंट में धीरे-धीरे आ रही गिरावट का जवाब किसी एक नए माध्यम में तलाशने के बजाय कई अलग-अलग कारोबारों के पोर्टफोलियो में खोजा जा रहा है।

भारत के पास अभी कारोबार में विविधता लाने का है मौका

भारत का प्रकाशन बाजार अभी भी पश्चिमी देशों से काफी अलग है। CRISIL के मुताबिक, भारतीय अखबार कंपनियों की करीब 75% कमाई अभी भी प्रिंट सर्कुलेशन और विज्ञापन से आती है।  इसके मुकाबले The New York Times में प्रिंट सर्कुलेशन और विज्ञापन की हिस्सेदारी करीब 23.8% है। WAN-IFRA की एक स्टडी के अनुसार, Financial Times में यह करीब 10-15%, The Economist Group में 15-20% और Wall Street Journal/Dow Jones में 10-15% है। इसका मतलब है कि भारतीय प्रकाशकों के पास अपने पश्चिमी समकक्षों की तुलना में डाइवर्सिफिकेशन के लिए ज्यादा समय है, क्योंकि उनका मुख्य प्रिंट कारोबार अभी भी अपेक्षाकृत मजबूत है।

हालांकि, दबाव के संकेत दिखाई देने लगे हैं। बड़ी अखबार कंपनियों का सर्कुलेशन बेस 2019 में करीब 1.5 करोड़ से घटकर 2025 में लगभग 1 करोड़ रह गया। वहीं पिछले सात वर्षों में प्रिंट से जुड़े राजस्व में सालाना आधार पर करीब 1-2% की औसत गिरावट का अनुमान है।

दुनियाभर में भी बदल रहा है मीडिया का कारोबार

दुनिया के दूसरे हिस्सों में भी तस्वीर कुछ ऐसी ही है। WAN-IFRA की World Press Trends Outlook रिपोर्ट में 66 देशों के 170 से ज्यादा वरिष्ठ मीडिया अधिकारियों को शामिल किया गया। रिपोर्ट के मुताबिक, अब प्रकाशकों के कुल राजस्व में प्रिंट सर्कुलेशन और विज्ञापन की हिस्सेदारी 43.6% रह गई है, जो पांच साल पहले 56.2% थी। वहीं डिजिटल सर्कुलेशन और विज्ञापन की हिस्सेदारी करीब 31% है। इवेंट्स, B2B सेवाओं और ई-कॉमर्स जैसी दूसरी गतिविधियां मिलकर करीब 25.4% राजस्व दे रही हैं।

WAN-IFRA के डायरेक्टर ऑफ इनसाइट्स डीन रोपर के मुताबिक, लगातार बदलते माहौल के बीच प्रकाशक नए तरीके अपना रहे हैं और अपने कारोबार को उसके हिसाब से ढाल रहे हैं।

अब सिर्फ विज्ञापन की जगह पूरा समाधान बेच रहे हैं मीडिया हाउस

डाइवर्सिफिकेशन का असर प्रकाशकों और विज्ञापनदाताओं के रिश्ते पर भी पड़ा है। Kioas Marketing के सीईओ सजल गुप्ता के मुताबिक, प्रिंट आज भी विश्वसनीयता, बड़े पैमाने पर पहुंच और प्रभावशाली कम्युनिकेशन देता है। लेकिन विज्ञापनदाता अब डिजिटल, OOH और एक्सपीरियेंशियल प्रॉपर्टीज के जरिए इस प्रभाव को आगे बढ़ाना चाहते हैं।

यानी मीडिया कंपनियों की पेशकश अब सिर्फ एक अखबार में विज्ञापन देने तक सीमित नहीं है। अब एक इंटीग्रेटेड पैकेज तैयार किया जा रहा है—ब्रैंड की पहचान और विश्वसनीयता के लिए प्रिंट, टारगेटिंग और एंगेजमेंट के लिए डिजिटल, फिजिकल विजिबिलिटी और बार-बार पहुंच के लिए OOH और सीधे उपभोक्ताओं से जुड़ने के लिए इवेंट्स।

बड़े अखबार समूहों के लिए यह मॉडल इसलिए भी फायदेमंद है क्योंकि उनके पास पहले से विज्ञापनदाताओं के साथ रिश्ते, स्थानीय मौजूदगी, फिजिकल एसेट्स और मजबूत ब्रैंड मौजूद हैं।

OOH और इवेंट्स भी बन रहे हैं बड़ा कारोबार

Pitch Madison Advertising Report 2026 के मुताबिक, भारत का OOH बाजार 2025 में 4% बढ़कर 4,835 करोड़ रुपये हो गया, जो 2024 में 4,650 करोड़ रुपये था। ऐसे में प्रकाशकों के लिए OOH और इवेंट्स सिर्फ नए राजस्व स्रोत नहीं हैं, बल्कि मौजूदा विज्ञापन संबंधों का विस्तार भी हैं।

PDlab.me के फाउंडर संदीप अमर के मुताबिक, ब्रैंड अब केवल अखबार में विज्ञापन देने के बजाय इवेंट्स, प्रिंट, OOH और न्यूज ब्रैंड की विश्वसनीयता को जोड़ने वाले इंटीग्रेटेड पैकेज को ज्यादा पसंद कर रहे हैं। ऐसे पैकेज के जरिए ब्रैंड्स को पारंपरिक मीडिया विजिबिलिटी के साथ सेलिब्रिटीज, नीति निर्माताओं, स्टेकहोल्डर्स और ऑडियंस तक पहुंच मिल सकती है।

इसी वजह से मीडिया कंपनियां अब बुक पब्लिशिंग, एजुकेशन, ट्रेनिंग, कंटेंट सिंडिकेशन, IT सॉल्यूशंस और एफिलिएट मार्केटिंग जैसे क्षेत्रों में भी उतर रही हैं। इनमें से हर कारोबार भले ही अलग-अलग छोटा हो, लेकिन मिलकर ये किसी एक राजस्व स्रोत पर निर्भरता कम करते हैं।

डाइवर्सिफिकेशन से मिल रहा है समय, लेकिन संकट से पूरी सुरक्षा नहीं

हालांकि, नए कारोबार बढ़ने का मतलब यह नहीं है कि उनसे प्रिंट जितना ही मुनाफा भी मिलेगा। CRISIL के मुताबिक, गैर-प्रिंट कारोबार का मार्जिन इस वित्त वर्ष में करीब 12-13% रहने का अनुमान है। OOH और इवेंट्स में पारंपरिक प्रिंट कारोबार की तुलना में वैरिएबल कॉस्ट ज्यादा होती है और प्रतिस्पर्धा भी अधिक है।

इसलिए प्रकाशकों का लक्ष्य जरूरी नहीं है कि प्रिंट से होने वाली हर एक रुपये की कमाई की जगह उतने ही मुनाफे वाला दूसरा रुपया खड़ा किया जाए। असली उद्देश्य पर्याप्त वैकल्पिक राजस्व स्रोत तैयार करना है, ताकि आने वाले समय में प्रिंट कारोबार के कमजोर होने का असर पूरी कंपनी पर न पड़े।

असली चुनौती अब मुनाफे के साथ ग्रोथ की है

आखिरकार असली सवाल यह होगा कि ये नए कारोबार कितनी तेजी और कितने मुनाफे के साथ बढ़ते हैं। अगर प्रिंट की हिस्सेदारी आने वाले वर्षों में अमेरिका और दुनिया के दूसरे हिस्सों की तरह कम होती है, तो क्या भारतीय मीडिया कंपनियां अपने नए कारोबार के दम पर खुद को बड़ा और मजबूत बनाए रख पाएंगी?

यही भारतीय अखबार समूहों के लिए अगले कुछ वर्षों की सबसे बड़ी चुनौती होगी। फिलहाल तस्वीर यह है कि अखबार अब अकेला कारोबार नहीं रह गया है। उसके आसपास तैयार की गई पूरी मीडिया इकोसिस्टम अब कमाई का नया आधार बन रही है।

 

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PVR INOX ने किया ₹300 करोड़ के शेयर बायबैक का ऐलान, 20.69 लाख शेयर खरीदने की तैयारी

मल्टीप्लेक्स कंपनी PVR INOX Limited ने अपने शेयर बायबैक की तारीख और दूसरी जरूरी जानकारी जारी कर दी है। कंपनी करीब ₹300 करोड़ की अधिकतम रकम में अपने 20,68,965 इक्विटी शेयर वापस खरीदेगी।

Vikas Saxena by
Published - Tuesday, 08 September, 2026
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Tuesday, 08 September, 2026
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मल्टीप्लेक्स कंपनी PVR INOX Limited अपने शेयरधारकों से अधिकतम 20,68,965 इक्विटी शेयर वापस खरीदने जा रही है। कंपनी ने इसके लिए ₹1,450 प्रति शेयर का भाव तय किया है और बायबैक पर अधिकतम ₹300 करोड़ खर्च किए जाएंगे। यह बायबैक टेंडर ऑफर के जरिए किया जाएगा।

कंपनी के मुताबिक, बायबैक के तहत खरीदे जाने वाले 20,68,965 शेयर उसके 31 मार्च 2026 तक के कुल पेड-अप इक्विटी शेयर कैपिटल का 2.11% हैं। वहीं, ₹300 करोड़ का कुल बायबैक आकार कंपनी के पेड-अप इक्विटी शेयर कैपिटल और फ्री रिजर्व के मुकाबले ऑडिटेड स्टैंडअलोन आधार पर 4.09% और कंसोलिडेटेड आधार पर 4.07% है। ये दोनों आंकड़े अलग-अलग आधार पर बायबैक के आकार को दर्शाते हैं।

10 सितंबर से शुरू होगा बायबैक

PVR INOX का बायबैक 10 सितंबर 2026 को खुलेगा और 17 सितंबर 2026 को बंद होगा। शेयरधारक इसी अवधि के दौरान अपने पात्र शेयर बायबैक में टेंडर कर सकेंगे। हालांकि, 14 सितंबर 2026 को टेंडरिंग नहीं होगी, क्योंकि उस दिन SEBI द्वारा घोषित अवकाश है।

बायबैक के लिए पात्र शेयरधारकों की पहचान 4 सितंबर 2026 की रिकॉर्ड डेट के आधार पर की गई है। यानी इस तारीख को कंपनी के शेयर रखने वाले पात्र शेयरधारक बायबैक में हिस्सा ले सकते हैं, बशर्ते वे लागू नियमों के तहत पात्र हों।

छोटे शेयरधारकों के लिए अलग कोटा

कंपनी ने छोटे शेयरधारकों के लिए बायबैक में अलग श्रेणी रखी है। अनुमानित रूप से छोटे शेयरधारकों को हर 157 शेयर पर 9 शेयर टेंडर करने का अधिकार होगा।

वहीं, सामान्य श्रेणी के अन्य पात्र शेयरधारकों के लिए अनुमानित अनुपात हर 1,108 शेयर पर 21 शेयर है। कंपनी ने साफ किया है कि ये अनुपात अनुमानित हैं और राउंडिंग के कारण वास्तविक पात्रता में मामूली अंतर हो सकता है। वास्तविक बायबैक एंटाइटलमेंट छोटे शेयरधारकों के लिए 5.7330888703% और सामान्य श्रेणी के लिए 1.8953355370% है।

बायबैक क्यों कर रही है कंपनी?

PVR INOX ने बायबैक की वजह भी बताई है। कंपनी के मुताबिक, उसने मध्यम अवधि की अपनी रणनीतिक और कारोबारी जरूरतों को ध्यान में रखते हुए यह फैसला लिया है। साथ ही, कंपनी अपने सरप्लस फंड का एक हिस्सा शेयरधारकों को वापस करना चाहती है।

कंपनी का मानना है कि बायबैक से उसके प्रति शेयर आय (EPS) और रिटर्न ऑन इक्विटी (ROE) में सुधार होने की उम्मीद है। बोर्ड ने 31 अगस्त 2026 की बैठक में उपलब्ध फ्री रिजर्व और नकदी की स्थिति को ध्यान में रखते हुए बायबैक के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी।

फंड कहां से आएगा?

कंपनी के बोर्ड के प्रस्ताव के मुताबिक, बायबैक को फ्री रिजर्व, सिक्योरिटीज प्रीमियम अकाउंट और कानून के तहत अनुमत अन्य स्रोतों से फंड किया जा सकता है। इसलिए इसे सीधे तौर पर केवल किसी एक स्रोत से फंड होने वाला बायबैक बताना सही नहीं होगा।

शेयरधारकों को कब मिलेगा पैसा?

बायबैक में स्वीकार किए गए शेयरों के लिए भुगतान की अंतिम तारीख 24 सितंबर 2026 है। इसी तारीख तक पात्र शेयरधारकों को भुगतान और स्वीकार न किए गए शेयरों की वापसी की प्रक्रिया पूरी की जानी है।

इसके बाद बायबैक के तहत खरीदे गए शेयरों को खत्म करने यानी बायबैक किए गए शेयरों को रद्द करने की अंतिम तारीख 6 अक्टूबर 2026 तय की गई है।

किसने संभाली जिम्मेदारी?

बायबैक के लिए DAM Capital Advisors Limited को मैनेजर और KFin Technologies Limited को रजिस्ट्रार नियुक्त किया गया है। पात्र शेयरधारक अपने बायबैक एंटाइटलमेंट की जानकारी रजिस्ट्रार की ओर से बताई गई प्रक्रिया के जरिए भी देख सकते हैं।

PVR INOX का यह बायबैक कंपनी के मौजूदा पात्र शेयरधारकों के लिए है और इसमें शेयरों की खरीद ₹1,450 प्रति शेयर के तय भाव पर टेंडर ऑफर के जरिए की जाएगी। हालांकि, प्रत्येक शेयरधारक के कितने शेयर वास्तव में स्वीकार होंगे, यह संबंधित श्रेणी और बायबैक प्रक्रिया के तहत तय होगा।

 

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Prime Focus की FY26 BRSR रिपोर्ट दाखिल, ESG व पर्यावरण को लेकर सामने आई कंपनी की रणनीति

प्राइम फोकस लिमिटेड (Prime Focus Limited) ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए अपनी Business Responsibility and Sustainability Report (BRSR) स्टॉक एक्सचेंजों के पास दाखिल कर दी है।

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Published - Tuesday, 08 September, 2026
Last Modified:
Tuesday, 08 September, 2026
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प्राइम फोकस लिमिटेड (Prime Focus Limited) ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए अपनी Business Responsibility and Sustainability Report (BRSR) स्टॉक एक्सचेंजों के पास दाखिल कर दी है। कंपनी ने यह रिपोर्ट 7 सितंबर 2026 को NSE और BSE को सौंपी। यह रिपोर्ट कंपनी की FY 2025-26 की वार्षिक रिपोर्ट का भी हिस्सा है।

रिपोर्ट के मुताबिक, Prime Focus की रिपोर्टिंग अवधि 1 अप्रैल 2025 से 31 मार्च 2026 तक की है। कंपनी के शेयर NSE पर PFOCUS और BSE पर 532748 कोड के साथ सूचीबद्ध हैं। 31 मार्च 2026 तक कंपनी की चुकता पूंजी करीब 77.60 करोड़ रुपये थी।

विजुअल इफेक्ट्स, एनीमेशन और पोस्ट-प्रोडक्शन भी कारोबार का हिस्सा

कंपनी ने अपनी मुख्य कारोबारी गतिविधि को सूचना और संचार क्षेत्र के तहत रखा है। इसमें विजुअल इफेक्ट्स, स्टीरियो 3D कन्वर्जन, एनीमेशन, प्रोडक्शन और पोस्ट-प्रोडक्शन सेवाएं, उपकरण किराये पर देना, डिजिटल इंटरमीडिएट, पिक्चर पोस्ट, शूटिंग फ्लोर और साउंड स्टेज जैसी सेवाएं शामिल हैं। इसके अलावा कंपनी Media ERP Suite और Cloud आधारित मीडिया सेवाएं भी देती है। प्रॉपर्टी और अन्य परिसंपत्तियों को लीज या किराये पर देना भी उसके कारोबार का हिस्सा है।

कंपनी के कुल कारोबार में रियल एस्टेट गतिविधियों की हिस्सेदारी 69.38%, अन्य बिजनेस सपोर्ट सर्विसेज की हिस्सेदारी 30.58% और मोशन पिक्चर गतिविधियों की हिस्सेदारी 0.04% रही।

12 ऑफिस और 14 कर्मचारी

BRSR के अनुसार, 31 मार्च 2026 तक Prime Focus के भारत में 12 ऑफिस थे। रिपोर्टिंग के दायरे में कंपनी का अंतरराष्ट्रीय कारोबार शामिल नहीं है, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय गतिविधियां उसकी सहायक कंपनियों के जरिए संचालित होती हैं।

कंपनी के पास कुल 14 स्थायी कर्मचारी थे, जिनमें 13 पुरुष और एक महिला शामिल हैं। वहीं कंपनी ने BRSR के तहत परिभाषित किसी कर्मचारी को 'वर्कर' श्रेणी में नहीं बताया है।

कंपनी के बोर्ड में 8 निदेशक हैं, जिनमें 2 महिलाएं हैं। यानी बोर्ड में महिलाओं की हिस्सेदारी 25% है। वहीं प्रमुख प्रबंधकीय कर्मचारियों में महिलाओं की हिस्सेदारी 33.33% है।

सभी कर्मचारियों को स्वास्थ्य और दुर्घटना बीमा

कंपनी के सभी 14 स्थायी कर्मचारियों को स्वास्थ्य बीमा और व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा का लाभ मिला हुआ है। महिला कर्मचारी के लिए मातृत्व लाभ भी उपलब्ध है, जबकि 13 कर्मचारियों को पितृत्व लाभ के तहत कवर किया गया है।

कंपनी ने बताया कि वित्त वर्ष 2025-26 में सभी 14 कर्मचारियों को स्वास्थ्य एवं सुरक्षा और कौशल विकास से जुड़ी ट्रेनिंग दी गई। यानी इन दोनों क्षेत्रों में कवरेज 100% रहा।

सस्टेनेबिलिटी पर कंपनी का फोकस

Prime Focus ने अपनी सस्टेनेबिलिटी रणनीति में कार्बन फुटप्रिंट कम करने, कचरे के प्रबंधन, प्रदूषण और ग्लोबल वार्मिंग को कम करने तथा पानी, ऊर्जा और संसाधनों के संरक्षण को प्रमुख लक्ष्य बताया है।

कंपनी का कहना है कि वह अपने पोस्ट-प्रोडक्शन केंद्रों और स्टूडियो ऑफिस में ऊर्जा बचाने की दिशा में लगातार काम कर रही है। साथ ही AI, डिजिटाइजेशन सर्विसेज और डेटा सेंटर जैसी सेवाओं के जरिए ग्राहकों को भी सस्टेनेबिलिटी में योगदान देने का अवसर देने की बात कही गई है।

ऊर्जा खपत बढ़ी

BRSR के आंकड़ों के अनुसार, FY 2025-26 में कंपनी की कुल ऊर्जा खपत 46.27 लाख KWH रही, जबकि FY 2024-25 में यह करीब 40.58 लाख KWH थी। वित्त वर्ष 2025-26 में गैर-नवीकरणीय स्रोतों से ऊर्जा खपत करीब 33.07 लाख KWH रही, जबकि नवीकरणीय स्रोतों से बताई गई खपत करीब 13.20 लाख KWH रही।

पानी की खपत और कार्बन उत्सर्जन पर भी रिपोर्ट

कंपनी ने FY 2025-26 में कुल 26,520 किलोलीटर पानी निकालने की जानकारी दी है। इसमें 8,546 किलोलीटर सतही जल और 17,974 किलोलीटर थर्ड पार्टी वाटर शामिल था। पिछले वित्त वर्ष में कुल पानी निकासी 26,180 किलोलीटर थी।

ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन के मामले में कंपनी ने FY 2025-26 के लिए Scope 2 emissions करीब 23.14 लाख किलोग्राम CO2 equivalent बताए हैं, जबकि FY 2024-25 में यह करीब 20.29 लाख किलोग्राम था। कंपनी ने स्पष्ट किया है कि Scope 1 से जुड़ा डेटा उसके पास उपलब्ध नहीं है, क्योंकि संबंधित खर्च DNEG India Media Services Limited के जरिए किया जाता है।

कंपनी ने यह भी बताया कि फिलहाल ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन कम करने से जुड़ी कोई विशेष परियोजना नहीं है।

ई-वेस्ट के निपटारे के लिए अधिकृत एजेंसियों के साथ काम

कंपनी के अनुसार, उसके कार्यालयों में पैदा होने वाले इलेक्ट्रॉनिक कचरे को अधिकृत ई-वेस्ट विक्रेताओं के जरिए रिसाइकिल किया जाता है। वहीं कागज के कचरे को मंजूरशुदा रिसाइक्लिंग संस्थाओं को भेजा जाता है। कंपनी ने बायोडिग्रेडेबल कचरे के प्रबंधन से जुड़ी पहलों में भी भागीदारी की बात कही है।

साइबर सुरक्षा को अहम जोखिम माना

Prime Focus ने साइबर सुरक्षा को अपने कारोबार से जुड़े प्रमुख जोखिमों में शामिल किया है। कंपनी के मुताबिक मीडिया और ब्रॉडकास्टिंग कंपनियों के लिए तैयार किया गया कंटेंट एक महत्वपूर्ण संपत्ति है और साइबर हमलों का निशाना बन सकता है।

कंपनी ने कहा कि वह नेटवर्क को नियमित रूप से अपडेट और बैकअप करती है। साथ ही कर्मचारियों को फिशिंग कैंपेन के जरिए साइबर जोखिमों के बारे में जागरूक किया जाता है और किसी घटना की स्थिति में तेजी से प्रतिक्रिया देने के लिए एक योजना भी तैयार की गई है।

सभी 9 NGRBC सिद्धांतों को नीतियों में शामिल किया

BRSR में कंपनी ने बताया है कि उसकी नीतियां National Guidelines on Responsible Business Conduct (NGRBC) के सभी नौ सिद्धांतों को कवर करती हैं और इन नीतियों को बोर्ड की मंजूरी मिली हुई है। इन नीतियों को वैल्यू चेन पार्टनर्स तक भी लागू किया गया है।

कंपनी की सस्टेनेबिलिटी से जुड़ी पहलों की निगरानी CSR Committee करती है, जबकि BRSR नीति के क्रियान्वयन और निगरानी की जिम्मेदारी Whole-time Director Naresh Mahendranath Malhotra को दी गई है।

वित्त वर्ष में कोई शिकायत दर्ज नहीं

रिपोर्ट के मुताबिक FY 2025-26 में समुदाय, निवेशकों, शेयरधारकों, कर्मचारियों, ग्राहकों और वैल्यू चेन पार्टनर्स की ओर से कंपनी के जिम्मेदार कारोबारी आचरण से जुड़े कोई शिकायत दर्ज नहीं हुई और कोई शिकायत लंबित भी नहीं थी।

वहीं, कंपनी ने कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न, भेदभाव, बाल श्रम, जबरन श्रम और वेतन से जुड़े मामलों में भी कोई शिकायत दर्ज नहीं होने की जानकारी दी है। FY 2025-26 में POSH के तहत भी कोई शिकायत नहीं आई।

 

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अमर उजाला के मैनेजिंग डायरेक्टर तन्मय माहेश्वरी बने INS के डिप्टी प्रेजिडेंट

तन्मय माहेश्वरी INS में पहले भी कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल चुके हैं। इससे पहले वह 2025-26 के कार्यकाल में INS के वाइस प्रेजिडेंट की जिम्मेदारी संभाल रहे थे।

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Published - Monday, 07 September, 2026
Last Modified:
Monday, 07 September, 2026
Tanmay Maheshwari

अमर उजाला लिमिटेड के मैनेजिंग डायरेक्टर तन्मय माहेश्वरी को इंडियन न्यूजपेपर सोसाइटी (INS) का डिप्टी प्रेजिडेंट चुना गया है। इससे पहले वह 2025-26 के कार्यकाल में INS के वाइस प्रेजिडेंट की जिम्मेदारी संभाल रहे थे।

माहेश्वरी INS में पहले भी कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल चुके हैं। 2025-26 में वाइस प्रेजिडेंट बनने से पहले वह कई कार्यकाल तक सोसाइटी के ऑनरेरी ट्रेजरर रहे हैं।

तन्मय माहेश्वरी वर्ष 2022 से अमर उजाला लिमिटेड के मैनेजिंग डायरेक्टर हैं। वह प्रिंट और डिजिटल, दोनों प्लेटफॉर्म पर मीडिया ग्रुप के विकास और बदलाव से जुड़े रहे हैं।

मीडिया इंडस्ट्री से जुड़े अन्य संगठनों में भी उनकी भूमिका रही है। वह वर्तमान में इंटरनेशनल न्यूज मीडिया एसोसिएशन (INMA) के साउथ एशिया डिवीजन बोर्ड में भी शामिल हैं।

तन्मय माहेश्वरी का डिप्टी प्रेजिडेंट के पद पर चयन ऐसे समय में हुआ है, जब न्यूजपेपर इंडस्ट्री में पाठकों की बदलती आदतों, डिजिटल बदलाव, ऑडियंस मेजरमेंट, विज्ञापन से जुड़े बदलाव और बढ़ती इनपुट लागत जैसी कई चुनौतियां बनी हुई हैं।

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BAG Convergence से अलग हुए तनवीर आजम

समाचार4मीडिया से बातचीत में तनवीर आजम ने बताया कि उन्होंने कुछ समय पहले इस संस्थान को बाय बोल दिया है। वह जल्द ही नई पारी की शुरुआत करेंगे और फिर इस बारे में अपडेट देंगे।

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Published - Monday, 07 September, 2026
Last Modified:
Monday, 07 September, 2026
Tanweer Azam

सीनियर मीडिया प्रोफेशनल तनवीर आजम ने BAG Convergence को अलविदा कह दिया है। उन्होंने इस संस्थान में पिछले साल दिसंबर में जॉइन किया था और चीफ कंटेंट ऑफिसर (CCO) व इवेंट्स हेड के पद पर अपनी जिम्मेदारी निभा रहे थे।

अपनी इस भूमिका में वे न्यूज24 (News24) और E24 समेत संगठन के सभी न्यूज और एंटरटेनमेंट ब्रैंड्स और डिजिटल-फर्स्ट प्लेटफॉर्म्स पर काम कर रहे थे। समाचार4मीडिया से बातचीत में तनवीर आजम ने बताया कि उन्होंने कुछ समय पहले इस संस्थान को बाय बोल दिया है। वह जल्द ही नई पारी की शुरुआत करेंगे और फिर इस बारे में अपडेट देंगे।

 तनवीर ने 2006 में अपने करियर की शुरुआत की थी और उन्हें पत्रकारिता, डिजिटल कंटेंट लीडरशिप और ब्रैंड डेवलपमेंट में 20 साल का अनुभव है। वे Zee Media, India.com, DNA और Microsoft जैसी बड़ी कंपनियों के साथ काम कर चुके हैं। इन संस्थानों में उन्होंने डिजिटल ग्रोथ, कंटेंट इनोवेशन और ऑडियंस एंगेजमेंट बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई। उनकी एडिटोरियल विशेषज्ञता इंफोटेनमेंट, लाइफस्टाइल, टेक, एंटरटेनमेंट और फीचर स्टोरीटेलिंग तक फैली हुई है, जिसमें SEO, डेटा-ड्रिवन स्ट्रैटेजी और यूजर-सेंट्रिक कंटेंट पर खास ध्यान शामिल है।

Zee Media और India.com में तनवीर ने इंफोटेनमेंट और एंटरटेनमेंट वर्टिकल्स को मजबूत बनाया और ऐसी टीमों का नेतृत्व किया, जिनके कंटेंट ने लगातार उच्च ट्रैफिक और बेहतर इम्पैक्ट हासिल किया। DNA में उन्होंने अंग्रेजी और हिंदी- दोनों प्लेटफॉर्म्स को संभाला और तेज-तर्रार डिजिटल न्यूज माहौल के हिसाब से कंटेंट डेप्थ और स्पीड का संतुलन बनाए रखा। माइक्रोसॉफ्ट में उनके अनुभव ने उन्हें कंटेंट थिंकिंग में प्रॉडक्ट और टेक्नोलॉजी का बेहतर नजरिया दिया, जिससे वे प्लेटफॉर्म बिहेवियर, एनालिटिक्स और UX को एडिटोरियल और ब्रैंड स्ट्रैटेजी में जोड़ सके।

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लोकमत मीडिया ग्रुप के करण दर्डा बनेंगे INS के नए प्रेजिडेंट

फिलहाल वह INS में डिप्टी प्रेजिडेंट के पद पर हैं। वह सन्मार्ग के विवेक गुप्ता की जगह लेंगे, जिन्होंने 2025-26 के दौरान INS के प्रेजिडेंट के तौर पर जिम्मेदारी संभाली।

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Published - Monday, 07 September, 2026
Last Modified:
Monday, 07 September, 2026
Karan Darda

लोकमत मीडिया ग्रुप के एग्जिक्यूटिव डायरेक्टर और एडिटोरियल डायरेक्टर करण राजेंद्र दर्डा 2026-27 के कार्यकाल के लिए इंडियन न्यूजपेपर सोसाइटी (INS) के प्रेजिडेंट बनेंगे। वह सन्मार्ग के विवेक गुप्ता की जगह लेंगे, जिन्होंने 2025-26 के दौरान INS के प्रेजिडेंट के तौर पर जिम्मेदारी संभाली।

करण दर्डा की नियुक्ति INS की 87वीं वार्षिक आम बैठक (Annual General Meeting) के बाद औपचारिक रूप से होने की उम्मीद है। फिलहाल वह INS में डिप्टी प्रेजिडेंट के पद पर हैं। इससे पहले 2024-25 के दौरान वह सोसाइटी के वाइस प्रेजिडेंट रह चुके हैं। इस तरह INS के नेतृत्व में उनकी जिम्मेदारी लगातार आगे बढ़ी है।

लोकमत में करण दर्डा ऑपरेशंस, सर्कुलेशन, एडिटोरियल स्ट्रैटेजी और मार्केटिंग से जुड़ी पहलों की अवधारणा तैयार करने में सक्रिय रूप से शामिल रहे हैं। वह प्रिंट रीडरशिप, ऑडियंस मेजरमेंट और अखबारों के प्रति विज्ञापनदाताओं का भरोसा मजबूत करने जैसे मुद्दों पर भी अपनी बात रखते रहे हैं।

करण दर्डा 2026-27 के लिए ऑडिट ब्यूरो ऑफ सर्कुलेशंस (ABC) की काउंसिल ऑफ मैनेजमेंट का भी हिस्सा हैं। प्रमुख इंडस्ट्री संस्थानों में उनकी यह भूमिका प्रिंट मीडिया से जुड़े अहम मुद्दों में उनकी सक्रिय भागीदारी को दर्शाती है।

INS के अध्यक्ष के तौर पर उनका कार्यकाल ऐसे समय में शुरू होगा, जब अखबार इंडस्ट्री बदलती पाठक आदतों, डिजिटल बदलाव, बढ़ती इनपुट लागत और अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर ऑडियंस की विश्वसनीय माप व्यवस्था जैसी चुनौतियों से गुजर रहा है।

बता दें कि इंडियन न्यूजपेपर सोसाइटी देशभर के अखबारों, मैगजीन और पीरियॉडिकल्स का प्रतिनिधित्व करती है और अपने सदस्य प्रकाशनों के कारोबारी हितों को बढ़ावा देने तथा उनकी सुरक्षा के लिए काम करती है। प्रेजिडेंट के तौर पर करण दर्डा प्रकाशकों, विज्ञदाताओं, सरकारी संस्थाओं और अन्य संबंधित पक्षों के साथ प्रिंट मीडिया से जुड़े मुद्दों पर INS की भागीदारी का नेतृत्व करेंगे।

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इंडियन न्यूजपेपर सोसाइटी के प्रेजिडेंट के तौर पर विवेक गुप्ता का कार्यकाल पूरा

2025-26 के उनके कार्यकाल के दौरान सरकारी विज्ञापन दरों में 26% बढ़ोतरी, ‘Ink Doesn’t Lie’ अभियान और AI-कॉपीराइट व न्यूजप्रिंट जैसे मुद्दों पर INS ने की पैरवी

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Published - Monday, 07 September, 2026
Last Modified:
Monday, 07 September, 2026
Vivek Gupta

‘सन्मार्ग ग्रुप’ के चेयरमैन एवं मैनेजिंग डायरेक्टर विवेक गुप्ता ने इंडियन न्यूजपेपर सोसाइटी (INS) के प्रेजिडेंट के तौर पर अपना कार्यकाल पूरा कर लिया है। उनके 2025-26 के कार्यकाल में प्रिंट मीडिया से जुड़े कई अहम मुद्दों पर नीति स्तर पर पैरवी, इंडस्ट्री के साथ संवाद और पाठकों व विज्ञापनदाताओं के बीच प्रिंट की विश्वसनीयता को मजबूत करने की दिशा में कई पहल हुईं।

विवेक गुप्ता को सोसाइटी की 86वीं वार्षिक आम बैठक में 2025-26 के लिए प्रेजिडेंट चुना गया था। उन्होंने ‘मातृभूमि’ के एमवी श्रेयम्स कुमार का स्थान लिया था। गुप्ता ने INS की 87वीं वार्षिक आम बैठक में अपने कार्यकाल का समापन संबोधन दिया।

सरकारी विज्ञापन दरों में 26% की बढ़ोतरी: विवेक गुप्ता के अपने कार्यकाल के दौरान प्रिंट मीडिया के लिए सरकारी विज्ञापन दरों में 26% की बढ़ोतरी प्रमुख नीतिगत घटनाक्रमों में रही। यह फैसला 9वीं रेट स्ट्रक्चर कमेटी की सिफारिशों के आधार पर लिया गया। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने नवंबर 2025 में विज्ञापन दरों में संशोधन की घोषणा की थी। INS और अन्य समाचार पत्र संगठनों की करीब चार साल की लगातार मांग और सरकार के साथ बातचीत के बाद यह फैसला आया।

इसके तहत एक लाख प्रतियों के सर्कुलेशन वाले दैनिक समाचार पत्रों के लिए ब्लैक एंड व्हाइट विज्ञापन की दर 47.40 रुपये से बढ़ाकर 59.68 रुपये प्रति वर्ग सेंटीमीटर कर दी गई। इसके साथ ही कलर विज्ञापनों और प्राथमिकता वाली जगहों के लिए प्रीमियम दरों को भी मंजूरी दी गई।

विवेक गुप्ता ने इस फैसले को प्रकाशकों के सामने मौजूद आर्थिक दबावों की स्वीकारोक्ति बताया। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि बढ़ी हुई दरों के साथ सरकारी विज्ञापन का पर्याप्त आवंटन भी जरूरी है। गुप्ता ने कहा, ‘बढ़ी हुई दरों के साथ पर्याप्त विज्ञापन आवंटन भी होना चाहिए। प्रिंट के लिए सरकार का विज्ञापन बजट संशोधित दरों और प्रिंट की पहुंच के निरंतर महत्व को पर्याप्त रूप से दर्शाने वाला होना चाहिए।’

‘Ink Doesn’t Lie’ अभियान की शुरुआत: विवेक गुप्ता के अध्यक्षीय कार्यकाल की एक अन्य प्रमुख पहल INS का देशव्यापी ‘Ink Doesn’t Lie’ अभियान रहा। जुलाई 2026 में INS के सदस्य प्रकाशनों के बीच शुरू किए गए इस अभियान का उद्देश्य ऐसे समय में प्रिंट मीडिया की विश्वसनीयता को सामने लाना था, जब गलत सूचनाओं, हेरफेर किए गए कंटेंट और AI से तैयार सामग्री के कारण पाठकों के लिए तथ्य और मनगढ़ंत जानकारी के बीच अंतर करना मुश्किल होता जा रहा है। अभियान के तहत 27 जुलाई 2026 को INS के सदस्य प्रकाशनों में साझा विज्ञापन प्रकाशित किया गया था।

गुप्ता के मुताबिक, यह अभियान केवल प्रिंट मीडिया को बढ़ावा देने की कोशिश नहीं था, बल्कि पाठकों, विज्ञापनदाताओं और नीति-निर्माताओं को उस संपादकीय जिम्मेदारी की याद दिलाने का प्रयास था, जो प्रकाशित शब्दों के पीछे होती है। उन्होंने कहा, ‘गलत सूचनाओं और कृत्रिम तरीके से तैयार सामग्री के दौर में छपा हुआ शब्द जवाबदेही का प्रतीक है। ‘Ink Doesn’t Lie’ यानी स्याही झूठ नहीं बोलती, क्योंकि छपे हुए शब्द के पीछे जिम्मेदारी और जवाबदेही होती है।’ यह अभियान INS की सालभर चलने वाली उस व्यापक पहल का हिस्सा था, जिसके जरिए प्रिंट मीडिया की प्रभावशीलता, विश्वसनीयता, ब्रांड सुरक्षा और विज्ञापन के मंच के तौर पर उसकी उपयोगिता को सामने लाने की कोशिश की गई।

AI और कॉपीराइट पर भी उठाई आवाज: गुप्ता के कार्यकाल के दौरान जनरेटिव AI और कॉपीराइट को लेकर भी महत्वपूर्ण नीतिगत बहस हुई। सोसाइटी की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, INS ने फरवरी 2026 में डिपार्टमेंट फॉर प्रमोशन ऑफ इंडस्ट्री एंड इंटरनल ट्रेड (DPIIT) को जनरेटिव AI और कॉपीराइट पर उसके वर्किंग पेपर के जवाब में विस्तृत सुझाव दिए।

सोसाइटी ने ऐसे कानूनी ढांचे की वकालत की, जिसमें तकनीकी नवाचार को बढ़ावा देने के साथ प्रकाशकों और मूल कंटेंट तैयार करने वालों के बौद्धिक संपदा अधिकारों की भी सुरक्षा हो। दिसंबर 2025 में INS ने कॉपीराइट उल्लंघन और मजबूत एंटी-पायरेसी व्यवस्था को लेकर सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय को भी सुझाव दिए थे।

गुप्ता ने माना कि AI का इस्तेमाल अनुवाद, ट्रांसक्रिप्शन, डेटा विश्लेषण और प्रकाशन से जुड़े कामकाज को बेहतर बनाने में किया जा सकता है, लेकिन उनका कहना था कि तकनीक रिपोर्टिंग, संपादकीय निर्णय और जवाबदेही की जगह नहीं ले सकती।

न्यूजप्रिंट पर 5% कस्टम ड्यूटी हटाने की मांग: न्यूजप्रिंट की लागत भी INS के एजेंडे में एक प्रमुख मुद्दा बनी रही। सोसाइटी ने आयातित न्यूजप्रिंट पर 5% कस्टम ड्यूटी हटाने की अपनी मांग जारी रखी। इसके साथ ही घरेलू उत्पादन की सीमाओं, गुणवत्ता से जुड़ी कमियों और विशेष ग्रेड के न्यूजप्रिंट की सीमित उपलब्धता को लेकर भी चिंता जताई।

गुप्ता ने कहा कि प्रिंट मीडिया के लिए न्यूजप्रिंट सिर्फ कोई सामान्य औद्योगिक कच्चा माल नहीं है, बल्कि यह सबसे जरूरी इनपुट में से एक है। उन्होंने सरकार से एक बार फिर इस ड्यूटी को हटाने की अपील की। उन्होंने कहा, ‘प्रिंट मीडिया उद्योग के लिए न्यूजप्रिंट सिर्फ कोई दूसरा औद्योगिक कच्चा माल नहीं है। यह सबसे जरूरी इनपुट में से एक है।’

टेक कंपनियों के रेवेन्यू हिस्से पर चिंता: डिजिटल मोर्चे पर गुप्ता ने समाचार संगठनों द्वारा तैयार किए गए कंटेंट से वैश्विक टेक्नोलॉजी प्लेटफॉर्म्स द्वारा हासिल किए जाने वाले रेवेन्यू के हिस्से को लेकर चिंता जताई।

गूगल के खिलाफ INS की भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) में शिकायत गुप्ता के अध्यक्ष बनने से पहले की है, लेकिन उनके कार्यकाल के दौरान सोसाइटी ने इस मामले की जांच पर नजर बनाए रखी। INS की 2025-26 की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, इस जांच के नतीजे का इंतजार है। गुप्ता ने कहा, ‘टेक्नोलॉजी कंपनियां सूचनाओं को एक जगह इकट्ठा कर उनका वितरण कर सकती हैं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म सूचनाओं को ज्यादा लोगों तक पहुंचा सकते हैं। लेकिन पत्रकारिता प्रकाशनों द्वारा तैयार की जाती है।’ उन्होंने पाठकों से अपील की कि वे समाचार सीधे प्रकाशकों की वेबसाइटों और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के जरिए पढ़ें।

इंडस्ट्री के साथ संवाद पर भी रहा जोर: गुप्ता के अध्यक्षीय कार्यकाल में INS ने कोलकाता, दिल्ली, मुंबई और पुणे में प्रकाशनों तथा विज्ञापन एजेंसियों के साथ इंटरैक्टिव सेशन आयोजित किए। वित्तीय वर्ष के दौरान INS की एग्जीक्यूटिव कमेटी की सात बैठकें हुईं, जबकि एडवरटाइजिंग कमेटी की छह बैठकें आयोजित की गईं। 31 मार्च 2026 तक INS की सदस्यता 801 प्रकाशनों की थी।

अपने समापन संबोधन में गुप्ता ने जुलाई-दिसंबर 2025 के ABC आंकड़ों का भी उल्लेख किया। इन आंकड़ों के मुताबिक INS के सदस्य प्रकाशनों का सर्कुलेशन करीब 2.91 करोड़ प्रतियां रहा, जिसमें समान आधार पर करीब 2% की वृद्धि दर्ज की गई। उन्होंने इन आंकड़ों के जरिए बदलते मीडिया उपभोग के दौर में प्रिंट मीडिया की मजबूती को रेखांकित किया।

‘हम आज भी प्रासंगिक हैं’: अपना कार्यकाल पूरा करते हुए विवेक गुप्ता ने प्रकाशकों से अपनी ताकत को कम करके न आंकने की अपील की। उन्होंने कहा कि इंडस्ट्री ने आर्थिक दबाव और कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना किया है, लेकिन इसके बावजूद प्रिंट मीडिया आज भी प्रासंगिक है।

गुप्ता ने कहा, ‘हमने आर्थिक दबाव और कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना किया है। और फिर भी हम आज यहां हैं। इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि हम आज भी प्रासंगिक हैं।’ उन्होंने आगे कहा, ‘भारतीय प्रिंट मीडिया का भविष्य हमारे पीछे नहीं है, बल्कि अभी हमारे आगे है। आइए, हम सब मिलकर उस भविष्य की ओर बढ़ें और एकजुट रहें।’

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‘BAG Convergence’ में इस बड़े पद से अलग हुए अरुण कुमार चौबे

समाचार4मीडिया से बातचीत में अरुण कुमार चौबे ने अपने इस्तीफे की पुष्टि करते हुए बताया कि उन्होंने निजी कारणों से यह फैसला लिया।

Samachar4media Bureau by
Published - Monday, 07 September, 2026
Last Modified:
Monday, 07 September, 2026
Arun Kumar Chaubey BAG

सीनियर मीडिया प्रोफेशनल अरुण कुमार चौबे ने ‘BAG Convergence’ (न्यूज24 डिजिटल) में अपनी पारी को विराम दे दिया है। उन्होंने पिछले साल इस संस्थान में एडिटर (Synergy and Brand Solutions) के पद पर जॉइन किया था। अपनी इस भूमिका में अरुण कुमार चौबे समूह के डिजिटल और टीवी चैनलों के बीच बेहतर सिनर्जी स्थापित करने, कंटेंट को मल्टीप्लेटफॉर्म्स पर मजबूत करने और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर ब्रैंडेड कंटेंट को प्रभावी ढंग से प्रबंधित करने में अहम भूमिका निभा रहे थे।

समाचार4मीडिया से बातचीत में अरुण कुमार चौबे ने अपने इस्तीफे की पुष्टि करते हुए बताया कि उन्होंने कुछ दिनों पहले निजी कारणों से यह फैसला लिया। अरुण कुमार चौबे का कहना था कि उनकी कुछ संस्थानों से बातचीत चल रही है, वह जल्द ही नई पारी शुरू करेंगे और तब उसके बारे में बताएंगे।

अरुण कुमार चौबे को प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम करने का 25 वर्षों से अधिक का अनुभव है। उन्होंने मीडिया में अपने करियर की शुरुआत लखनऊ में ‘द पायनियर’ के साथ बतौर ट्रेनी जर्नलिस्ट की थी और बाद में हिन्दुस्तान टाइम्स (रांची एडिशन) से जुड़ गए। डिजिटल मीडिया की दुनिया में उनका सफर वर्ष 2004 में zeenews.com के साथ शुरू हुआ। इसके बाद उन्होंने दैनिक जागरण, इंडिया टुडे ग्रुप, और डेक्कन क्रॉनिकल होल्डिंग्स के बिजनेस वर्टिकल फाइनेंशियल क्रॉनिकल जैसे कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम किया।

वर्ष 2017 में अरुण कुमार चौबे ने एक बार फिर ‘जी मीडिया’ समूह को जॉइन किया और zeebiz.com में बतौर एसोसिएट एडिटर अपनी नई पारी की शुरुआत की। इसके बाद उन्होंने zeenews.com, mylord.in (एक लीगल वेबसाइट) और india.com जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर विभिन्न भूमिकाओं में कार्य किया।

अरुण कुमार चौबे ने India.com के यूट्यूब पेज के लिए Pol.Punch और Foodshaala जैसे नए आईपी (इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी) कॉन्सेप्ट भी विकसित किए। यहां अपनी पारी को विराम देने से पहले वह Digital 2C यूनिट के प्रमुख थे, जहां उन्होंने जी मीडिया के राष्ट्रीय और क्षेत्रीय टीवी चैनलों तथा समूह की वेबसाइटों के बीच तालमेल (synergy) को और मजबूत किया।

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अमृतराज ब्रदर्स: दुनिया के मंच पर भारत का नाम रोशन करने वाला परिवार

यह कहानी 1960 के दशक से शुरू होती है। मद्रास, जिसे आज चेन्नई के नाम से जाना जाता है, के एक मध्यमवर्गीय रोमन कैथोलिक परिवार के तीन भाइयों ने टेनिस खेलना शुरू किया।

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Published - Monday, 07 September, 2026
Last Modified:
Monday, 07 September, 2026
Amritraj Brothers

भुवन लाल ।।

नई दिल्ली में 23 जून 2026 की शाम राष्ट्रपति भवन का गणतंत्र मंडप एक खास समारोह का गवाह बना। यहां आयोजित अलंकरण समारोह में देश की राजनीतिक और न्यायिक हस्तियों के साथ वरिष्ठ अधिकारी, रक्षा क्षेत्र के लोग और कई जानी-मानी हस्तियां मौजूद थीं। इसी दौरान जब भारत के महान टेनिस खिलाड़ियों में शुमार विजय अमृतराज का नाम पुकारा गया तो वह हाथ जोड़कर लाल कालीन से होते हुए मंच की ओर बढ़े। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें देश के तीसरे सबसे बड़े नागरिक सम्मान पद्म भूषण से सम्मानित किया। समारोह में मौजूद लोगों ने तालियों के साथ भारत के इस महान टेनिस खिलाड़ी का स्वागत किया।

विजय अमृतराज की उपलब्धियों पर काफी कुछ लिखा जा चुका है, लेकिन उनकी कहानी आज भी लोगों को प्रेरित करती है। यह कहानी एक ऐसे युवा की है, जिसने उस दौर में दुनिया के बड़े-बड़े टेनिस खिलाड़ियों के सामने खड़े होने का सपना देखा, जब भारत में टेनिस के लिए न तो बहुत ज्यादा सुविधाएं थीं और न ही कोई मजबूत व्यवस्था। उनके पास था तो सिर्फ हुनर, आगे बढ़ने की भूख और यह भरोसा कि वह दुनिया के सबसे बड़े टेनिस मंच पर अपनी जगह बना सकते हैं।

मां ने गैराज से चल रहे कारोबार से जुटाए टेनिस के पैसे

यह कहानी 1960 के दशक से शुरू होती है। मद्रास, जिसे आज चेन्नई के नाम से जाना जाता है, के एक मध्यमवर्गीय रोमन कैथोलिक परिवार के तीन भाइयों ने टेनिस खेलना शुरू किया। उनकी मां मैगी अमृतराज ने गैराज से चलने वाले पैकेजिंग कारोबार से टेनिस की ट्रेनिंग का खर्च उठाया। 

उनके पिता रॉबर्ट रेलवे में काम करते थे। तीनों भाइयों (आनंद, विजय और अशोक अमृतराज) ने आगे चलकर भारत को प्रोफेशनल टेनिस की दुनिया में एक नई पहचान दिलाई। उनके दादा की इच्छा थी कि परिवार का कम से कम एक बेटा विंबलडन खेले। लेकिन उनकी यह इच्छा एक नहीं, बल्कि तीनों भाइयों ने पूरी कर दी। 

तीनों भाई एक ही विंबलडन टूर्नामेंट में खेलने वाले भारत के पहले भाई-बहन नहीं, बल्कि तीन सगे भाइयों का ऐसा परिवार बने, जिन्होंने एक ही संस्करण में हिस्सा लिया और सेंटर कोर्ट पर भी साथ उतरे। तीनों ने जूनियर स्तर पर भी भारत का नाम रोशन किया। सबसे बड़े भाई आनंद ने 1965 से 1967 तक भारत का जूनियर खिताब अपने नाम रखा। इसके बाद विजय ने 1968 से 1970 तक यह परंपरा आगे बढ़ाई। सबसे छोटे भाई अशोक भी भारत के शीर्ष जूनियर चैंपियन बने।

बीमारी से जूझने वाला बच्चा बना दुनिया का स्टार

विजय का बचपन भी आसान नहीं था। एक समय वह बीमार रहने वाले बच्चे थे और उनकी मां अस्पताल में उनके बिस्तर के पास बैठकर उनकी पढ़ाई की चीजें लिखती थीं। लेकिन यही बच्चा आगे चलकर अंतरराष्ट्रीय टेनिस के बड़े-बड़े खिलाड़ियों को हराने लगा।

जुलाई 1973 में महज 21 साल की उम्र में विजय ने अमेरिका के ब्रेटन वुड्स में वोल्वो इंटरनेशनल खिताब जीतकर टेनिस की दुनिया को चौंका दिया। यह जीत इस बात का बड़ा संकेत थी कि भारत अब विश्व टेनिस के नक्शे पर अपनी जगह बना चुका है। इसके बाद विजय ने अपने दौर के कई दिग्गज खिलाड़ियों को हराया। इनमें ब्योर्न बोर्ग, जिमी कॉनर्स, जॉन मैकेनरो, इवान लेंडल, रॉड लेवर और स्टैन स्मिथ जैसे नाम शामिल थे। उनकी सफलता इतनी चर्चा में रही कि एक पत्रकार ने टेनिस के महान खिलाड़ियों के लिए ABC of Tennis शब्द का इस्तेमाल किया- Amritraj, Borg और Connors। 

विजय ने विंबलडन और यूएस ओपन दोनों में कई बार क्वार्टर फाइनल तक पहुंचकर यह साबित किया कि वह दुनिया के शीर्ष खिलाड़ियों के बीच अपनी जगह बना चुके हैं।

23 साल तक चला शानदार प्रोफेशनल करियर

विजय अमृतराज का प्रोफेशनल करियर 1970 में शुरू हुआ और 1993 में खत्म हुआ। इस दौरान उन्होंने 16 सिंगल्स खिताब जीते। उनका करियर का सर्वोच्च एटीपी सिंगल्स रैंकिंग विश्व नंबर 18 रहा, जो उन्होंने 1980 में हासिल की। वह तीन बार राष्ट्रीय सिंगल्स चैंपियन रहे और दो दशक से ज्यादा समय तक भारत का प्रतिनिधित्व किया। उन्होंने भारत को 1974 और 1987 में डेविस कप फाइनल तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई।

1988 के सियोल ओलंपिक में उन्हें ओलंपिक टॉर्च बियरर के रूप में भी चुना गया। करीब 6 फीट 4 इंच लंबे विजय जब कोर्ट पर उतरते थे तो उनके साथ सिर्फ उनकी अपनी महत्वाकांक्षा नहीं होती थी, बल्कि भारत और विदेशों में बसे लाखों भारतीयों का गर्व भी जुड़ा होता था।

विजय ने एक बार बताया था कि मैच खत्म होने के बाद भारतीय मूल के लोग उन्हें नोट देकर धन्यवाद करते थे। इनमें डॉक्टर और इंजीनियर जैसे प्रोफेशनल भी शामिल थे। जब विजय ने उनसे पूछा कि वे उन्हें धन्यवाद क्यों दे रहे हैं, तो उनका जवाब था कि विजय को खेलते देखने के बाद उनके विदेशी नियोक्ताओं को अपनी कंपनी में एक भारतीय के होने पर गर्व महसूस होता था।

टेनिस के बाद फिल्मों में भी बनाई पहचान

1980 के दशक में विजय ने टेनिस कोर्ट से आगे बढ़कर फिल्मों की दुनिया में भी कदम रखा। उन्होंने जेम्स बॉन्ड की फिल्म Octopussy में MI6 एजेंट की भूमिका निभाई। फिल्म में वह जेम्स बॉन्ड के साथ नजर आए। इसके बाद वह हॉलीवुड से भी जुड़े रहे। आज भी उनकी आवाज दुनिया भर में होने वाली टेनिस कमेंट्री में सुनाई देती है।

आनंद अमृतराज के साथ बनी शानदार जोड़ी

विजय के बड़े भाई आनंद अमृतराज भी अपने आप में एक शानदार टेनिस खिलाड़ी रहे। उन्होंने सिंगल्स में विश्व रैंकिंग में 74वां स्थान हासिल किया। लेकिन उनकी सबसे खास पहचान विजय के साथ बनी डबल्स जोड़ी थी। दोनों भाइयों ने मिलकर आठ डबल्स खिताब जीते और 1976 में विंबलडन के सेमीफाइनल तक पहुंचे।

दोनों भाइयों ने दुनिया के कई दिग्गज खिलाड़ियों का सामना किया और कभी पीछे नहीं हटे। उनकी जोड़ी मेहनत, आत्मविश्वास और मजबूत प्रतिस्पर्धी भावना का उदाहरण बन गई।

1974 में डेविस कप फाइनल से हटना पड़ा

1974 में भारत के पास पहली बार डेविस कप जीतने का बड़ा मौका था। आनंद और विजय अमृतराज के कंधों पर भारत को दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ जीत दिलाने की जिम्मेदारी थी। लेकिन उस समय दक्षिण अफ्रीका में रंगभेद यानी अपार्थाइड की आधिकारिक नीति लागू थी। जोहान्सबर्ग के एलिस पार्क में होने वाले मुकाबले के दौरान दक्षिण अफ्रीका ने भारतीय दर्शकों के लिए अलग व्यवस्था की मांग की।

भारत सरकार नस्लभेदी अपार्थाइड व्यवस्था के खिलाफ थी। ऐसे में भारत ने डेविस कप फाइनल का बहिष्कार करने का फैसला किया। यह फैसला खिलाड़ियों के लिए बेहद मुश्किल था, क्योंकि उनके सामने पहली बार भारत को डेविस कप जिताने का मौका था। इसके बावजूद इस सिद्धांत आधारित फैसले की दुनिया भर में सराहना हुई। बाद में आनंद अमृतराज ने भारतीय डेविस कप टीम के गैर-खिलाड़ी कप्तान के रूप में भी जिम्मेदारी संभाली।

अशोक अमृतराज ने हॉलीवुड में बनाया बड़ा नाम

तीनों भाइयों में सबसे छोटे अशोक अमृतराज ने टेनिस के बाद एक अलग क्षेत्र चुना। 1974 में वह विंबलडन जूनियर फाइनल तक पहुंचे और प्रोफेशनल स्तर पर चार जीत भी दर्ज कीं। लेकिन इसके बाद उन्होंने मनोरंजन की दुनिया में कदम रखा।

अशोक ने हॉलीवुड में Hyde Park Entertainment की स्थापना की। इस कंपनी ने दुनिया के लिए फिल्मों और मनोरंजन परियोजनाओं के विकास, वित्तपोषण और निर्माण का काम किया। उनकी फिल्मों में हॉलीवुड के कई बड़े और ऑस्कर विजेता कलाकार नजर आए। इनमें एंजेलिना जोली, एंटोनियो बैंडेरास, ब्रूस विलिस, केट ब्लैंचेट, डस्टिन हॉफमैन, जेनिफर एनिस्टन, इदरीस एल्बा, रिचर्ड गेयर, रॉबर्ट डी नीरो, सुसान सारंडन और सिल्वेस्टर स्टेलोन जैसे नाम शामिल हैं। 

उनकी चर्चित फिल्मों में Ghost Rider: Spirit of Vengeance में निकोलस केज, Walking Tall में ड्वेन जॉनसन, Premonition में सैंड्रा बुलॉक और स्टीव मार्टिन व क्वीन लतीफा की Bringing Down the House शामिल हैं।इसके अलावा Shopgirl, जिसमें स्टीव मार्टिन और क्लेयर डेन्स थे, और 99 Homes, जिसमें एंड्रयू गारफील्ड और लॉरा डर्न नजर आए, को भी आलोचकों की सराहना मिली। 100 से ज्यादा फिल्मों के बाद अशोक अमृतराज को हॉलीवुड में सबसे सफल भारतीयों में गिना जाता है। उनकी फिल्मों ने कुल मिलाकर 2 अरब डॉलर से ज्यादा का कारोबार किया है। उन्हें इंटरनेशनल एमी से भी सम्मानित किया जा चुका है और गोल्डन ग्लोब्स व कान्स में भी उनकी फिल्मों को पहचान मिली। फ्रांस के राष्ट्रपति ने उन्हें प्रतिष्ठित Chevalier सम्मान से भी नवाजा।

विजय को विंबलडन और इंटरनेशनल टेनिस हॉल ऑफ फेम में मिली जगह

टेनिस से जुड़ाव विजय का आज भी कायम है। वह ऑल इंग्लैंड लॉन टेनिस क्लब, विंबलडन की मानद सदस्यता के लिए सर्वसम्मति से चुने जाने वाले एकमात्र एशियाई हैं। 2024 में वह International Tennis Hall of Fame में Contributor श्रेणी में शामिल होने वाले पहले एशियाई पुरुष बने। यह सम्मान खिलाड़ी, कमेंटेटर, प्रशासक और टेनिस के समर्थक के तौर पर उनके पूरे योगदान की पहचान है। करीब चार दशक से दक्षिणी कैलिफोर्निया में रहने के बावजूद विजय ने अपना भारतीय पासपोर्ट बरकरार रखा है।

तीन भाइयों ने दुनिया में बनाई भारत की पहचान

अमृतराज भाइयों की कहानी सिर्फ खेल और मनोरंजन की सफलता की कहानी नहीं है। तीनों भाइयों ने अलग-अलग क्षेत्रों में भारत का नाम दुनिया तक पहुंचाया। विजय और आनंद ने टेनिस कोर्ट पर भारत का प्रतिनिधित्व किया, जबकि अशोक ने हॉलीवुड में अपनी पहचान बनाई। इसके साथ ही तीनों भाई उस देश से जुड़े रहे, जहां उनका जन्म हुआ था और अब परोपकार के जरिए समाज को वापस देने की कोशिश भी कर रहे हैं।

विजय अपनी सफलता का बड़ा श्रेय अपनी मां मार्गरेट (मैगी) अमृतराज को देते हैं। उन्होंने ही बच्चों को मुश्किल परिस्थितियों से घबराने के बजाय उनका सामना करना सिखाया। अपनी आत्मकथा में विजय ने अपनी मां को याद करते हुए लिखा कि आखिर किस तरह एक महिला में यह भरोसा था कि वह अपने तीन बेटों को ऑल इंग्लैंड क्लब यानी विंबलडन के मैदान तक पहुंचा सकती है।

मद्रास के छोटे से घर से सेंटर कोर्ट और हॉलीवुड तक का सफर

अमृतराज भाइयों की कहानी यह बताती है कि सफलता के लिए हमेशा बड़े संसाधनों या मजबूत पृष्ठभूमि की जरूरत नहीं होती। एक मध्यमवर्गीय भारतीय परिवार, एक मां का विश्वास, परिवार का साथ और खुद पर भरोसा भी बड़ी से बड़ी मंजिल तक पहुंचा सकता है।

मद्रास के एक साधारण घर से शुरू हुई यह कहानी विंबलडन के सेंटर कोर्ट से होती हुई हॉलीवुड तक पहुंची। विजय, आनंद और अशोक अमृतराज ने सिर्फ अपने लिए नाम नहीं बनाया, बल्कि दुनिया के सामने भारतीय प्रतिभा की एक अलग तस्वीर पेश की।

इन तीनों भाइयों की जिंदगी से सबसे बड़ी सीख शायद प्रसिद्धि नहीं, बल्कि आत्मविश्वास, परिवार के मूल्यों, मेहनत और विनम्रता की है। यही वे चीजें हैं, जिन्होंने तीन साधारण भारतीय भाइयों को दुनिया में एक पहचान दी।

(भुवन लाल एक फिल्म निर्माता, उपन्यासकार, लेखक, बॉयोग्राफर और रचनात्मक क्षेत्र में काम करने वाले उद्यमी हैं।)

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