गूगल जल्द ही जेमिनी एआई में विज्ञापन जोड़ सकता है, जिससे यूजर्स को स्पॉन्सर्ड कंटेंट और पर्सनलाइज्ड सुझाव मिलेंगे। यह कदम एआई इंडस्ट्री के बिजनेस मॉडल और यूजर अनुभव दोनों को बदल सकता है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
गूगल अपने एआई चैटबॉट जेमिनी को नए बिजनेस मॉडल की ओर ले जाने की तैयारी कर रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार, कंपनी जल्द ही इसमें विज्ञापन और स्पॉन्सर्ड कंटेंट जोड़ सकती है। अब तक एआई चैटिंग को एक साफ और बिना विज्ञापन वाले अनुभव के रूप में देखा जाता था, लेकिन आने वाले समय में यूजर्स को बातचीत के बीच कमर्शियल सुझाव भी दिखाई दे सकते हैं।
बताया जा रहा है कि जेमिनी में सर्च हिस्ट्री और यूजर क्वेरी के आधार पर पर्सनलाइज्ड विज्ञापन दिखाए जा सकते हैं। इसका मतलब है कि यूजर्स को एआई जवाबों के साथ-साथ स्पॉन्सर्ड सजेशन और शॉपिंग रिकमेंडेशन भी मिल सकती हैं। गूगल पहले ही अपने एआई आधारित सर्च फीचर्स में विज्ञापन दिखाकर अच्छा रेवेन्यू कमा रहा है, और अब वही मॉडल जेमिनी में लागू करने की योजना है।
अगर यह बदलाव होता है, तो यह एआई इंडस्ट्री में एक नया ट्रेंड शुरू कर सकता है। इससे ओपनएआई के ChatGPT को सीधी चुनौती मिल सकती है। हालांकि कंपनियां दावा कर रही हैं कि विज्ञापन से एआई जवाबों की गुणवत्ता प्रभावित नहीं होगी, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि इससे यूजर एक्सपीरियंस में बदलाव आ सकता है। कुल मिलाकर, एआई अब तेजी से एक बिजनेस प्लेटफॉर्म बन रहा है, जहां कंपनियां विज्ञापन, सब्सक्रिप्शन और प्रीमियम फीचर्स के जरिए कमाई के नए रास्ते तलाश रही हैं।
केंद्रीय आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव के मुताबिक भारत 2028 तक अपना स्मार्टफोन ब्रांड बाजार में उतार सकता है। भारतीय कंपनियों ने निर्माण क्षमता मजबूत की है, जिससे अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
केंद्रीय आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव (Ashwini Vaishnaw) ने कहा है कि भारत 2028 तक अपना स्मार्टफोन ब्रांड बाजार में उतार सकता है। भारतीय कंपनी का यह फोन वैश्विक बाजार में ऐपल (Apple) और सैमसंग (Samsung) जैसी बड़ी कंपनियों को चुनौती देने की दिशा में अहम कदम हो सकता है।
दिल्ली में आयोजित एनडीटीवी वर्ल्ड समिट (NDTV World Summit) में वैष्णव ने बताया कि भारत में डिजाइन और निर्माण किए गए मोबाइल फोन तैयार करने की दिशा में काम चल रहा है। इसका उद्देश्य देश में मोबाइल तकनीक के साथ इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण की क्षमता को मजबूत करना है।
करीब तीन साल पहले भारतीय डिजाइनरों के सामने मोबाइल फोन का मदरबोर्ड यानी पीसीबी तैयार करने की चुनौती रखी गई थी। इसके बाद दो भारतीय कंपनियां इस काम के लिए आगे आईं और उन्होंने अपने डिजाइन तैयार किए।
इनमें से एक कंपनी के डिजाइन को अमेरिका की एक बड़ी दूरसंचार कंपनी ने मंजूरी दी। इसके बाद भारतीय डिजाइन पर आधारित फोन अमेरिकी बाजार में ग्राहकों तक भी पहुंचा।
वैष्णव के मुताबिक, भारतीय कंपनी ने पांचवीं पीढ़ी की संचार तकनीक वाला मोबाइल फोन तैयार किया है। इसे अमेरिकी दूरसंचार कंपनी के लिए बनाया गया और यह फोन ग्राहकों तक पहुंच चुका है। उन्होंने कहा कि भारत ने यह तकनीकी क्षमता करीब साढ़े तीन साल में विकसित की है। अब इसी क्षमता का इस्तेमाल भारतीय ब्रांड, डिजाइन और बौद्धिक संपदा को देश में विकसित करने के लिए किया जाएगा।
अश्विनी वैष्णव ने इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में भारत की बढ़ती क्षमता का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि देश अब मोबाइल फोन के अलावा ड्रोन, मिसाइल, ट्रेन और कई आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बनाने में सक्षम हो रहा है।
लुइस डेविला गूगल में सस्टेनेबिलिटी से जुड़े रणनीतिक संचार की जिम्मेदारी संभालेंगे। इससे पहले वह श्नाइडर इलेक्ट्रिक में सीनियर डायरेक्टर और अमेजन में सस्टेनेबिलिटी कम्युनिकेशंस प्रमुख रह चुके हैं।
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लुइस डेविला (Luis Davila) गूगल (Google) से जुड़ गए हैं, जहां वह सस्टेनेबिलिटी से जुड़े रणनीतिक संचार की जिम्मेदारी संभालेंगे। डेविला के पास कॉरपोरेट कम्युनिकेशन, जलवायु अभियानों और विभिन्न हितधारकों के साथ संवाद का लंबा अनुभव है।
गूगल से पहले डेविला श्नाइडर इलेक्ट्रिक (Schneider Electric) में सीनियर डायरेक्टर-कॉरपोरेट कम्युनिकेशंस के पद पर थे। यहां वह उत्तरी अमेरिका में कंपनी के बाहरी कॉरपोरेट संचार का नेतृत्व कर रहे थे।
उनकी जिम्मेदारियों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डेटा सेंटर से जुड़े कंपनी के दृष्टिकोण को तैयार करना, वरिष्ठ अधिकारियों की विशेषज्ञ छवि मजबूत करना, मीडिया संबंध संभालना और संकट के समय संचार की जिम्मेदारी शामिल थी। उन्होंने सितंबर 2022 से अक्टूबर 2026 तक इस पद पर काम किया। 2024 में चार महीने तक उन्होंने अंतरिम वाइस प्रेसिडेंट ऑफ कम्युनिकेशंस की जिम्मेदारी भी संभाली।
इससे पहले डेविला मई 2020 से सितंबर 2022 तक अमेजन (Amazon) में हेड ऑफ सस्टेनेबिलिटी कम्युनिकेशंस रहे। उन्होंने कंपनी के पर्यावरण और जलवायु लक्ष्यों को आगे बढ़ाने के लिए संचार रणनीतियां तैयार कीं। इसमें 2040 तक कार्बन उत्सर्जन को शून्य तक लाने की क्लाइमेट प्लेज प्रतिबद्धता भी शामिल थी। उनके काम में क्लाइमेट प्लेज फंड, नए साझेदारों और अमेजन के नवीकरणीय ऊर्जा निवेश से जुड़ी घोषणाओं का संचार भी शामिल रहा।
इससे पहले वह सनरन (Sunrun) में डायरेक्टर-कैंपेन्स एंड एडवोकेसी के पद पर थे। यहां उन्होंने रूफटॉप सोलर और ऊर्जा भंडारण को भविष्य की ऊर्जा व्यवस्था के अहम हिस्से के तौर पर पेश करने वाले संचार अभियानों का नेतृत्व किया।
डेविला संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन रूपरेखा सम्मेलन (UNFCCC) में भी करीब नौ साल तक कम्युनिकेशंस एंड पार्टनरशिप्स लीडर के रूप में काम कर चुके हैं। अपने करियर के दौरान उन्होंने पेरिस समझौते, द क्लाइमेट प्लेज और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस व डेटा सेंटर से जुड़ी पहलों जैसे बड़े सार्वजनिक मुद्दों पर संचार रणनीतियों पर काम किया है।
मेटा अपने म्यूज़ एआई सहायक से शॉपिंग लेनदेन शुल्क, सब्सक्रिप्शन और कारोबारों के लिए पेड सेवाओं के जरिए कमाई की तैयारी कर रही है। कंपनी मुफ्त सेवा के साथ उन्नत सुविधाएं देगी।
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मेटा (Meta) अपने एआई सहायक को सिर्फ सवालों के जवाब देने तक सीमित नहीं रखना चाहती। कंपनी इसके जरिए सीधे खरीदारी के सौदे कराने और कमाई करने की तैयारी में है। मेटा अपने म्यूज़ (Muse) पर्सनल एआई एजेंट से शॉपिंग लेनदेन शुल्क, सब्सक्रिप्शन और कारोबारों के लिए पेड सेवाओं के जरिए कमाई करने की योजना बना रही है।
मेटा के मुख्य कार्यकारी अधिकारी मार्क जुकरबर्ग ने कंपनी की 2026 की तीसरी तिमाही के नतीजों पर हुई चर्चा के दौरान कहा कि कंपनी किसी नए उत्पाद से आमतौर पर जिस समय के बाद कमाई शुरू करने पर विचार करती है, उससे पहले ही म्यूज़ के मुद्रीकरण पर काम शुरू करना चाहती है।
इसकी दो प्रमुख वजहें हैं। पहली, म्यूज़ कंपनी के लिए बड़ा कारोबारी अवसर बन सकता है। दूसरी, अधिक सक्षम एआई सिस्टम चलाने के लिए बड़ी मात्रा में कंप्यूटिंग संसाधनों की जरूरत होती है।
कंपनी की प्रस्तावित योजना में ज्यादातर यूजर्स के लिए मुफ्त मुख्य सेवा जारी रखना शामिल है, जबकि ज्यादा उन्नत एआई सुविधाओं के लिए भुगतान करना होगा। कारोबारों को भी तब शुल्क देना पड़ सकता है, जब म्यूज़ उनके लिए खरीदारी या अन्य व्यावसायिक लेनदेन पूरा कराने में मदद करेगा। इससे कंपनी को सब्सक्रिप्शन और विज्ञापन के अलावा सीधे लेनदेन से भी कमाई का रास्ता मिलेगा।
शॉपिंग को म्यूज़ के लिए कमाई के सबसे संभावित स्रोतों में से एक माना जा रहा है। जुकरबर्ग ने बताया कि लॉन्च के करीब छह सप्ताह के भीतर अमेरिका और कनाडा में 1 करोड़ से अधिक लोगों ने म्यूज़ पर्सनल एजेंट स्थापित कर लिए थे। इनमें से करीब 25 प्रतिशत लोग किसी भी दिन अपने एजेंट का इस्तेमाल कर रहे थे।
मेटा का लक्ष्य म्यूज़ को ऐसा एआई सहायक बनाने का है, जो जानकारी देने के साथ यूजर्स की खरीदारी और अन्य कामों को पूरा कराने में भी सक्रिय भूमिका निभाए। इसके जरिए कंपनी एआई के बढ़ते इस्तेमाल को सीधे कारोबार और राजस्व से जोड़ने की दिशा में आगे बढ़ रही है।
मेटा पर न्यू मैक्सिको की अदालत ने डेटा प्राइवेसी मामले में 25 अरब डॉलर का जुर्माना लगाया है। जूरी ने यूजर्स को निजी डेटा को लेकर गुमराह करने का फैसला सुनाया।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक (Facebook), इंस्टाग्राम (Instagram) और ह्वाट्सऐप (WhatsApp) की मूल कंपनी मेटा (Meta) पर न्यू मैक्सिको की अदालत ने डेटा प्राइवेसी मामले में 25 अरब डॉलर यानी करीब 2.36 लाख करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है। जूरी ने माना कि कंपनी ने यूजर्स को उनके निजी डेटा की सुरक्षा और उसके इस्तेमाल को लेकर गुमराह किया। मेटा ने फैसले के खिलाफ अपील करने का संकेत दिया है।
यह मामला ब्रिटिश राजनीतिक सलाहकार कंपनी कैम्ब्रिज एनालिटिका (Cambridge Analytica) से जुड़े पुराने डेटा विवाद से संबंधित है। आरोप था कि थर्ड-पार्टी ऐप के जरिए करीब 8.7 करोड़ फेसबुक यूजर्स का निजी डेटा उनकी अनुमति के बिना हासिल किया गया। बाद में इस जानकारी का इस्तेमाल राजनीतिक प्रोफाइलिंग और लक्षित विज्ञापनों के लिए किया गया।
न्यू मैक्सिको प्रशासन ने 2021 में मेटा के खिलाफ मुकदमा दायर किया था। राज्य का आरोप था कि कंपनी ने यूजर्स को यह स्पष्ट जानकारी नहीं दी कि उनके डेटा तक किन लोगों की पहुंच हो सकती है। कंपनी पर हानिकारक सामग्री, नफरत फैलाने वाली सामग्री और गलत सूचनाओं से निपटने के तरीकों को लेकर भी यूजर्स को गुमराह करने के आरोप लगाए गए थे।
सितंबर 2026 में जूरी ने मेटा और उसके नेतृत्व की ओर से दिए गए 29 बयानों की समीक्षा की। इनमें से 26 बयानों को भ्रामक माना गया। जूरी के निष्कर्ष के अनुसार, इन बयानों के आधार पर न्यू मैक्सिको के उपभोक्ता संरक्षण कानून के 4.3 करोड़ से ज्यादा उल्लंघन हुए।
राज्य के कानून के तहत प्रत्येक उल्लंघन पर अधिकतम 5,000 डॉलर का जुर्माना लगाया जा सकता था। इस हिसाब से संभावित जुर्माने की राशि 219 अरब डॉलर से अधिक पहुंच सकती थी। हालांकि, जज फ्रांसिस मैथ्यू ने अंतिम जुर्माना घटाकर 25 अरब डॉलर तय किया। इस रकम को राज्य की शिक्षा व्यवस्था पर खर्च किया जाएगा।
मेटा ने म्यूज स्पार्क ओपन AI मॉडल लॉन्च किया है। कंपनी के मुताबिक, यह कोडिंग, सॉफ्टवेयर और तकनीकी कामों में मदद करेगा और चीन के AI मॉडल्स को टक्कर देगा।
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मार्क जुकरबर्ग की कंपनी मेटा (Meta) ने म्यूज स्पार्क ओपन (Muse Spark Open) नाम का नया आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस मॉडल लॉन्च किया है। कंपनी का दावा है कि यह मॉडल चीन की बड़ी तकनीकी कंपनियों के एआई मॉडल्स को टक्कर दे सकता है और कुछ मामलों में उनसे बेहतर प्रदर्शन भी कर सकता है।
मेटा के एआई प्रमुख एलेक्जेंडर वांग (Alexandr Wang) ने इसे अमेरिका का अब तक का सबसे सक्षम ओपन-वेट मॉडल बताया है। म्यूज स्पार्क ओपन एक ओपन-वेट मॉडल है। इसका मतलब है कि डेवलपर्स इसके वेट डाउनलोड करके अपनी जरूरत के मुताबिक बदलाव कर सकते हैं। मेटा के मुताबिक, यह मॉडल कोडिंग, सॉफ्टवेयर बनाने और मुश्किल तकनीकी कामों में मदद कर सकता है। इसे लंबे समय तक चलने वाले कामों और कई चरणों में सोचकर जवाब देने के लिए भी तैयार किया गया है। कंपनी ने इसमें सुरक्षा के लिए खास उपाय शामिल करने की बात कही है।
मेटा ने बताया कि म्यूज स्पार्क ओपन को ऐपल (Apple) के मैक स्टूडियो कंप्यूटर पर चलाने के लिए भी तैयार किया गया है। कंपनी के मुताबिक, एम5 अल्ट्रा चिप वाले कंप्यूटर पर यह मॉडल काम कर सकता है। हालांकि, इसे चलाने के लिए काफी कंप्यूटिंग क्षमता की जरूरत होगी। मेटा ने कहा कि यूजर दो मैक स्टूडियो कंप्यूटरों को मिलाकर इस मॉडल को चला सकते हैं।
मार्क जुकरबर्ग और ऐपल के सीईओ जॉन टर्नस (John Ternus) ने भी इस साझेदारी की तारीफ की। मेटा का नया मॉडल ऐसे समय आया है, जब कंपनी एआई के क्षेत्र में अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश कर रही है। इससे पहले उसने वंडर और वंडर फुल नाम के दो नए एआई मॉडल पेश किए थे। कंपनी का दावा है कि ये मॉडल चैटजीपीटी (ChatGPT) और क्लॉड (Claude) के एडवांस्ड वर्जन को टक्कर दे सकते हैं।
मेटा अब ओपनएआई (OpenAI) और एंथ्रोपिक (Anthropic) जैसी कंपनियों से मुकाबले के लिए अपने एआई मॉडल विकसित कर रही है।
गूगल ने एंड्रॉयड यूजर्स के लिए एआई से अपनी जरूरत के मुताबिक ऐप बनाने की सुविधा शुरू की है। इन्हें प्ले स्टोर पर सार्वजनिक किए बिना सीधे इस्तेमाल किया जा सकेगा भी।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
गूगल (Google) ने एंड्रॉयड (Android) यूजर्स के लिए नया फीचर पेश किया है, जिसके जरिए लोग आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से अपनी जरूरत के मुताबिक ऐप बना सकेंगे। खास बात यह है कि इन ऐप्स को गूगल प्ले स्टोर (Google Play Store) पर सार्वजनिक रूप से जारी करना जरूरी नहीं होगा।
यूजर्स अपने गूगल अकाउंट के जरिए बनाए गए ऐप्स को सीधे इस्तेमाल कर सकेंगे। ये ऐप प्ले स्टोर पर सर्च करने पर दिखाई नहीं देंगे और शुरुआत में सिर्फ इन्हें बनाने वाला व्यक्ति ही एक्सेस कर सकेगा।
गूगल के मुताबिक, यूजर्स एआई स्टूडियो (AI Studio) की मदद से अपनी जरूरत के अनुसार ऐप तैयार कर पाएंगे। इसके लिए कोडिंग की गहरी जानकारी जरूरी नहीं होगी। एआई की मदद से कम कोडिंग के साथ ऐप तैयार करने की इस प्रक्रिया को वाइब कोडिंग (Vibe Coding) कहा जाता है। हालांकि, इन ऐप्स को गूगल प्ले की नीतियों और नियमों का पालन करना होगा।
शुरुआत में यह सुविधा अमेरिका में 18 साल या उससे अधिक उम्र के यूजर्स के लिए उपलब्ध होगी। गूगल जल्द ही बनाए गए ऐप्स को दोस्तों और परिवार के साथ शेयर करने का विकल्प भी देने वाला है। इससे यूजर्स किसी खास समूह के लिए अपनी जरूरत के अनुसार ऐप बनाकर चुनिंदा लोगों के साथ शेयर कर सकेंगे। उदाहरण के तौर पर परिवार या बच्चों के किसी खेल समूह के लिए अलग ऐप तैयार किया जा सकता है।
अगर कोई ऐप लोगों के बीच लोकप्रिय होता है, तो उसे बाद में गूगल प्ले स्टोर पर सभी यूजर्स के लिए उपलब्ध कराया जा सकेगा। इसके लिए ऐप को जरूरी सुरक्षा जांच से गुजरना होगा।
इसके अलावा, गूगल प्ले स्टोर में गेम खोजने और अलग-अलग ऐप्स की तुलना करने के लिए भी नए फीचर जोड़े जा रहे हैं। गेम फाइंडर (Game Finder) यूजर्स की पसंद के आधार पर गेम सुझाएगा। वहीं, आस्क प्ले (Ask Play) फीचर एक जैसे ऐप्स के बीच अंतर समझने में मदद करेगा।
गूगल ने जेमिनी 4 आर्गन एआई मॉडल पेश किया है, जो कोडिंग, साइबर सुरक्षा, वित्तीय सेवाओं, कानूनी काम, वैज्ञानिक शोध और रोबोटिक्स जैसे क्षेत्रों में मदद करेगा।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
गूगल (Google) ने अपना नया आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (Artificial Intelligence) मॉडल जेमिनी 4 आर्गन (Gemini 4 Argon) पेश किया है। इसे ऐसे कामों के लिए तैयार किया गया है, जिनमें गहराई से विश्लेषण और कई चरणों में फैसले लेने की जरूरत होती है।
इसका इस्तेमाल कोडिंग, साइबर सुरक्षा, वित्तीय सेवाओं, कानूनी कामकाज, वैज्ञानिक अनुसंधान और रोबोट बनाने जैसे क्षेत्रों में किया जा सकेगा। गूगल के मुताबिक, मॉडल दुनियाभर के डेवलपर्स और कारोबारी ग्राहकों के लिए जारी कर दिया गया है।
जेमिनी 4 आर्गन बड़े सॉफ्टवेयर कोड में बदलाव करने, कमियां पहचानने और ऐप की कार्यक्षमता बेहतर बनाने में मदद कर सकता है। गूगल के अनुसार, इसकी मदद से वैज्ञानिक शोध, इंजीनियरिंग और रोबोटिक्स से जुड़े मुश्किल काम भी किए जा सकते हैं। 3 आयामी वातावरण में समस्याओं को समझने और हल करने वाले परीक्षण में मॉडल ने 87 प्रतिशत अंक हासिल किए। कंपनी का दावा है कि यह लंबे और कई चरणों वाले कामों को बेहतर तरीके से संभाल सकता है।
गूगल ने बताया कि उसकी आंतरिक इंजीनियरिंग टीमों में जेमिनी 4 आर्गन के इस्तेमाल से अपने आप कोड जमा करने की प्रक्रिया 35 प्रतिशत बढ़ी। वहीं, कोड में बदलाव वापस लेने की घटनाएं करीब एक-तिहाई कम हुईं। इसके इस्तेमाल के उदाहरणों में वैज्ञानिक गणना से जुड़े सॉफ्टवेयर को बेहतर बनाना और मुश्किल इंजीनियरिंग समस्याओं का विश्लेषण करना शामिल है। शोधकर्ताओं ने एंजाइम विकसित करने में भी मॉडल की मदद ली।
जेमिनी 4 आर्गन की शुरुआती कीमत प्रति 10 लाख इनपुट टोकन के लिए 2 डॉलर और आउटपुट टोकन के लिए 10 डॉलर रखी गई है। 1 दिसंबर से ये दरें बढ़कर क्रमशः 4 और 20 डॉलर हो जाएंगी।
मॉडल जेमिनी एपीआई (Gemini API) और गूगल एआई स्टूडियो (Google AI Studio) के जरिए उपलब्ध है। पात्र यूजर्स इसे जेमिनी ऐप (Gemini App), सर्च के एआई मोड और गूगल एंटीग्रेविटी (Google Antigravity) में भी इस्तेमाल कर सकेंगे। मॉडल में असुरक्षित गतिविधियों को रोकने के लिए सुरक्षा उपाय भी शामिल हैं।
मेटा ने वंडर और वंडर फुल नाम के दो नए एआई मॉडल पेश किए हैं। कंपनी का दावा है कि ये चैटजीपीटी और क्लाउड जैसे प्रमुख मॉडलों को चुनौती दे सकते हैं।
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टेक कंपनी मेटा (Meta) ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के क्षेत्र में दो नए मॉडल वंडर (Wonder) और वंडर फुल (Wonder Full) पेश किए हैं। कंपनी का दावा है कि इनकी क्षमता ओपनएआई (OpenAI) के चैटजीपीटी (ChatGPT) और एंथ्रोपिक (Anthropic) के क्लाउड (Claude) जैसे प्रमुख एआई मॉडल को चुनौती देने की है।
मेटा के प्रमुख मार्क जुकरबर्ग (Mark Zuckerberg) ने नए मॉडल को कंपनी की एआई तकनीक के विकास में महत्वपूर्ण कदम बताया है। इन्हें जल्द ही म्यूज (Muse) नाम के पर्सनल असिस्टेंट ऐप पर उपलब्ध कराया जाएगा। शुरुआती चरण में इन मॉडलों का इस्तेमाल केवल भुगतान करने वाले ग्राहक कर सकेंगे।
मेटा का कहना है कि वंडर सीरीज के नए मॉडल पुराने स्पार्क (Spark) मॉडल की तुलना में ज्यादा सक्षम हैं। कंपनी ने एक स्वतंत्र संस्था के टेस्ट रिजल्ट का हवाला देते हुए कहा कि कुछ प्रमुख एआई मॉडलों की तुलना में नए मॉडल ने बेहतर प्रदर्शन किया है। मेटा के मुख्य एआई अधिकारी एलेक्जेंडर वांग (Alexander Wang) ने भी इन्हें कंपनी का अब तक का सबसे सक्षम मॉडल बताया है।
हालांकि, कंपनी की ओर से पेश किए गए टेस्ट रिजल्ट यह साबित नहीं करते कि नए मॉडल हर तरह के काम में दूसरे एआई मॉडल से बेहतर हैं। इसलिए इनके प्रदर्शन से जुड़े दावों को अलग-अलग इस्तेमाल के आधार पर देखना होगा।
एआई को लेकर मेटा की रणनीति में बड़े निवेश की भी अहम भूमिका है। कंपनी ने जून 2025 में स्केल एआई (Scale AI) में 14 अरब डॉलर का निवेश किया था और इसके सह-संस्थापक एलेक्जेंडर वांग को अपनी टीम में शामिल किया था। इसके बाद जुलाई में मेटा ने बताया था कि 2026 में एआई से जुड़े निवेश पर उसका खर्च 145 अरब डॉलर यानी करीब 14,000 अरब रुपये तक पहुंच सकता है।
मेटा ने अगस्त में म्यूज कोड (Muse Code) और सितंबर में म्यूज ऐप पेश किया था। अब नए एआई मॉडल को भी इसी पर्सनल असिस्टेंट से जोड़ने की तैयारी है।
हालांकि, एआई के तेजी से विकास के साथ इसकी सुरक्षा को लेकर चिंताएं भी बढ़ रही हैं। मेटा का कहना है कि नए मॉडल विकसित करने के साथ सुरक्षा पहलुओं पर भी ध्यान दिया जा रहा है। मार्क जुकरबर्ग के मुताबिक, सुरक्षा जांच के कारण म्यूज की शुरुआत में कई महीनों की देरी हुई।
सितंबर में जुकरबर्ग ने अन्य टेक कंपनियों के प्रमुखों के साथ एडवांस्ड एआई मॉडल के लिए सुरक्षा उपायों से जुड़े एक समझौते पर भी हस्ताक्षर किए थे। एंथ्रोपिक समेत कुछ कंपनियों ने जरूरत पड़ने पर एआई डेवलपमेंट की रफ्तार धीमी रखने की बात कही है।
माइक्रोसॉफ्ट प्रमुख सत्य नडेला ने AI सुरक्षा को लेकर कंपनियों को चेताया, शक्तिशाली मॉडल में संभावित खतरे मानकर इमरजेंसी ब्रेक और नियंत्रण व्यवस्था जरूरी बताई।
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माइक्रोसॉफ्ट (Microsoft) के प्रमुख और मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) सत्य नडेला (Satya Nadella) ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की सुरक्षा को लेकर कंपनियों को सतर्क रहने की सलाह दी है। उन्होंने कहा कि शक्तिशाली एआई मॉडल को संभावित अंदरूनी खतरे के तौर पर देखा जाना चाहिए और शुरुआत से ही उनके नियंत्रण की व्यवस्था होनी चाहिए।
नडेला ने एक्स (X) पर पोस्ट कर कहा कि कंपनियों को यह मानकर चलना चाहिए कि कोई मॉडल खतरे में पड़ सकता है। ऐसे में उसे शुरू से ही काबू में रखने के लिए ‘इमरजेंसी ब्रेक’ जैसी व्यवस्था जरूरी है।
उन्होंने कहा कि किसी अधिकृत व्यक्ति के पास हमेशा यह सुविधा होनी चाहिए कि वह काम के बीच में ही मॉडल को रोक सके या उसे बंद कर सके। नडेला ने एडवांस्ड एआई का इस्तेमाल करने वालों को केवल मॉडल बनाने वाली कंपनियों पर निर्भर नहीं रहने की सलाह भी दी।
नडेला ने सुपर इंटेलिजेंस को ‘ब्लैक बॉक्स’ की तरह नहीं देखने की बात कही। उनका यह बयान ऐसे समय आया है, जब एंथ्रोपिक (Anthropic) और ओपनएआई (OpenAI) ने हाल में एआई मॉडल के अनचाहे तरीके से काम करने की कई घटनाओं का खुलासा किया है।
इन घटनाओं में क्लाउड (Claude) निर्माता के मॉडल द्वारा हत्या के मामले में पुलिस को गलत जानकारी देना और थर्ड-पार्टी वेबसाइट्स के हैक होने जैसी बातें शामिल हैं। इन घटनाओं के बाद एआई से जुड़े सुरक्षा जोखिमों को लेकर चिंता बढ़ी है और ‘एआई किल स्विच’ पर चर्चा तेज हुई है।
निखिल सोनी को एचसीएल ग्रुप में हेड ऑफ ब्रांड एंड मार्केटिंग नियुक्त किया गया है। नई भूमिका में वह ब्रांड, स्पोर्ट्स, कल्चर, लर्निंग और एनवायरनमेंट से जुड़े काम संभालेंगे।
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निखिल सोनी (Nikhil Soni) को एचसीएल ग्रुप (HCL Group) में हेड ऑफ ब्रांड एंड मार्केटिंग (Head of Brand & Marketing) नियुक्त किया गया है। उन्होंने लिंक्डइन (LinkedIn) पोस्ट के जरिए अपनी नई और विस्तारित जिम्मेदारी की जानकारी साझा की।
निखिल ने अपनी पोस्ट में कहा कि वह अब एचसीएल ग्रुप में हेड ऑफ ब्रांड एंड मार्केटिंग की भूमिका संभाल रहे हैं। नई जिम्मेदारी के तहत वह ग्रुप के ब्रांड-बिल्डिंग पोर्टफोलियो (Brand-Building Portfolio) से जुड़े व्यापक कामकाज का नेतृत्व करेंगे।
एचसीएल ग्रुप में अपने सफर को याद करते हुए उन्होंने बताया कि पिछले वर्षों में उन्होंने ब्रांड, ग्रोथ, डिजिटल, कंटेंट, एक्सपीरियंस और मार्केटिंग (Brand, Growth, Digital, Content, Experience and Marketing) से जुड़े प्लेटफॉर्म्स पर काम किया है।
नई भूमिका में उनकी जिम्मेदारियां ब्रांड, स्पोर्ट्स, कल्चर, लर्निंग और एनवायरनमेंट (Brand, Sports, Culture, Learning and Environment) तक विस्तारित होंगी। इन सभी क्षेत्रों को अब व्यापक ब्रांड-बिल्डिंग जिम्मेदारी के तहत लाया जाएगा।
निखिल सोनी पिछले 11 वर्षों से अधिक समय से एचसीएल ग्रुप से जुड़े हुए हैं। इस पदोन्नति से पहले वह एजीएम – मार्केटिंग (ब्रांड, ग्रोथ एंड प्रोडक्ट जीटीएम) (AGM – Marketing, Brand, Growth & Product GTM) के पद पर कार्यरत थे।