जेमिनी 4 आर्गन में क्या है खास? गूगल के नए एआई मॉडल की पूरी जानकारी

गूगल ने जेमिनी 4 आर्गन एआई मॉडल पेश किया है, जो कोडिंग, साइबर सुरक्षा, वित्तीय सेवाओं, कानूनी काम, वैज्ञानिक शोध और रोबोटिक्स जैसे क्षेत्रों में मदद करेगा।

Last Modified:
Wednesday, 14 October, 2026
Google Gemini


गूगल (Google) ने अपना नया आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (Artificial Intelligence) मॉडल जेमिनी 4 आर्गन (Gemini 4 Argon) पेश किया है। इसे ऐसे कामों के लिए तैयार किया गया है, जिनमें गहराई से विश्लेषण और कई चरणों में फैसले लेने की जरूरत होती है।

इसका इस्तेमाल कोडिंग, साइबर सुरक्षा, वित्तीय सेवाओं, कानूनी कामकाज, वैज्ञानिक अनुसंधान और रोबोट बनाने जैसे क्षेत्रों में किया जा सकेगा। गूगल के मुताबिक, मॉडल दुनियाभर के डेवलपर्स और कारोबारी ग्राहकों के लिए जारी कर दिया गया है।

जेमिनी 4 आर्गन बड़े सॉफ्टवेयर कोड में बदलाव करने, कमियां पहचानने और ऐप की कार्यक्षमता बेहतर बनाने में मदद कर सकता है। गूगल के अनुसार, इसकी मदद से वैज्ञानिक शोध, इंजीनियरिंग और रोबोटिक्स से जुड़े मुश्किल काम भी किए जा सकते हैं। 3 आयामी वातावरण में समस्याओं को समझने और हल करने वाले परीक्षण में मॉडल ने 87 प्रतिशत अंक हासिल किए। कंपनी का दावा है कि यह लंबे और कई चरणों वाले कामों को बेहतर तरीके से संभाल सकता है।

गूगल ने बताया कि उसकी आंतरिक इंजीनियरिंग टीमों में जेमिनी 4 आर्गन के इस्तेमाल से अपने आप कोड जमा करने की प्रक्रिया 35 प्रतिशत बढ़ी। वहीं, कोड में बदलाव वापस लेने की घटनाएं करीब एक-तिहाई कम हुईं। इसके इस्तेमाल के उदाहरणों में वैज्ञानिक गणना से जुड़े सॉफ्टवेयर को बेहतर बनाना और मुश्किल इंजीनियरिंग समस्याओं का विश्लेषण करना शामिल है। शोधकर्ताओं ने एंजाइम विकसित करने में भी मॉडल की मदद ली।

जेमिनी 4 आर्गन की शुरुआती कीमत प्रति 10 लाख इनपुट टोकन के लिए 2 डॉलर और आउटपुट टोकन के लिए 10 डॉलर रखी गई है। 1 दिसंबर से ये दरें बढ़कर क्रमशः 4 और 20 डॉलर हो जाएंगी।

मॉडल जेमिनी एपीआई (Gemini API) और गूगल एआई स्टूडियो (Google AI Studio) के जरिए उपलब्ध है। पात्र यूजर्स इसे जेमिनी ऐप (Gemini App), सर्च के एआई मोड और गूगल एंटीग्रेविटी (Google Antigravity) में भी इस्तेमाल कर सकेंगे। मॉडल में असुरक्षित गतिविधियों को रोकने के लिए सुरक्षा उपाय भी शामिल हैं।

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गूगल का नया फीचर : एंड्रॉयड यूजर्स एआई से बना सकेंगे ऐप

गूगल ने एंड्रॉयड यूजर्स के लिए एआई से अपनी जरूरत के मुताबिक ऐप बनाने की सुविधा शुरू की है। इन्हें प्ले स्टोर पर सार्वजनिक किए बिना सीधे इस्तेमाल किया जा सकेगा भी।

Last Modified:
Wednesday, 14 October, 2026
google

गूगल (Google) ने एंड्रॉयड (Android) यूजर्स के लिए नया फीचर पेश किया है, जिसके जरिए लोग आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से अपनी जरूरत के मुताबिक ऐप बना सकेंगे। खास बात यह है कि इन ऐप्स को गूगल प्ले स्टोर (Google Play Store) पर सार्वजनिक रूप से जारी करना जरूरी नहीं होगा।

यूजर्स अपने गूगल अकाउंट के जरिए बनाए गए ऐप्स को सीधे इस्तेमाल कर सकेंगे। ये ऐप प्ले स्टोर पर सर्च करने पर दिखाई नहीं देंगे और शुरुआत में सिर्फ इन्हें बनाने वाला व्यक्ति ही एक्सेस कर सकेगा।

गूगल के मुताबिक, यूजर्स एआई स्टूडियो (AI Studio) की मदद से अपनी जरूरत के अनुसार ऐप तैयार कर पाएंगे। इसके लिए कोडिंग की गहरी जानकारी जरूरी नहीं होगी। एआई की मदद से कम कोडिंग के साथ ऐप तैयार करने की इस प्रक्रिया को वाइब कोडिंग (Vibe Coding) कहा जाता है। हालांकि, इन ऐप्स को गूगल प्ले की नीतियों और नियमों का पालन करना होगा।

शुरुआत में यह सुविधा अमेरिका में 18 साल या उससे अधिक उम्र के यूजर्स के लिए उपलब्ध होगी। गूगल जल्द ही बनाए गए ऐप्स को दोस्तों और परिवार के साथ शेयर करने का विकल्प भी देने वाला है। इससे यूजर्स किसी खास समूह के लिए अपनी जरूरत के अनुसार ऐप बनाकर चुनिंदा लोगों के साथ शेयर कर सकेंगे। उदाहरण के तौर पर परिवार या बच्चों के किसी खेल समूह के लिए अलग ऐप तैयार किया जा सकता है।

अगर कोई ऐप लोगों के बीच लोकप्रिय होता है, तो उसे बाद में गूगल प्ले स्टोर पर सभी यूजर्स के लिए उपलब्ध कराया जा सकेगा। इसके लिए ऐप को जरूरी सुरक्षा जांच से गुजरना होगा।

इसके अलावा, गूगल प्ले स्टोर में गेम खोजने और अलग-अलग ऐप्स की तुलना करने के लिए भी नए फीचर जोड़े जा रहे हैं। गेम फाइंडर (Game Finder) यूजर्स की पसंद के आधार पर गेम सुझाएगा। वहीं, आस्क प्ले (Ask Play) फीचर एक जैसे ऐप्स के बीच अंतर समझने में मदद करेगा।

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मेटा ने पेश किए दो नए AI मॉडल : चैटजीपीटी और क्लाउड को चुनौती देने का दावा

मेटा ने वंडर और वंडर फुल नाम के दो नए एआई मॉडल पेश किए हैं। कंपनी का दावा है कि ये चैटजीपीटी और क्लाउड जैसे प्रमुख मॉडलों को चुनौती दे सकते हैं।

Last Modified:
Tuesday, 13 October, 2026
meta

टेक कंपनी मेटा (Meta) ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के क्षेत्र में दो नए मॉडल वंडर (Wonder) और वंडर फुल (Wonder Full) पेश किए हैं। कंपनी का दावा है कि इनकी क्षमता ओपनएआई (OpenAI) के चैटजीपीटी (ChatGPT) और एंथ्रोपिक (Anthropic) के क्लाउड (Claude) जैसे प्रमुख एआई मॉडल को चुनौती देने की है।

मेटा के प्रमुख मार्क जुकरबर्ग (Mark Zuckerberg) ने नए मॉडल को कंपनी की एआई तकनीक के विकास में महत्वपूर्ण कदम बताया है। इन्हें जल्द ही म्यूज (Muse) नाम के पर्सनल असिस्टेंट ऐप पर उपलब्ध कराया जाएगा। शुरुआती चरण में इन मॉडलों का इस्तेमाल केवल भुगतान करने वाले ग्राहक कर सकेंगे।

मेटा का कहना है कि वंडर सीरीज के नए मॉडल पुराने स्पार्क (Spark) मॉडल की तुलना में ज्यादा सक्षम हैं। कंपनी ने एक स्वतंत्र संस्था के टेस्ट रिजल्ट का हवाला देते हुए कहा कि कुछ प्रमुख एआई मॉडलों की तुलना में नए मॉडल ने बेहतर प्रदर्शन किया है। मेटा के मुख्य एआई अधिकारी एलेक्जेंडर वांग (Alexander Wang) ने भी इन्हें कंपनी का अब तक का सबसे सक्षम मॉडल बताया है।

हालांकि, कंपनी की ओर से पेश किए गए टेस्ट रिजल्ट यह साबित नहीं करते कि नए मॉडल हर तरह के काम में दूसरे एआई मॉडल से बेहतर हैं। इसलिए इनके प्रदर्शन से जुड़े दावों को अलग-अलग इस्तेमाल के आधार पर देखना होगा।

एआई को लेकर मेटा की रणनीति में बड़े निवेश की भी अहम भूमिका है। कंपनी ने जून 2025 में स्केल एआई (Scale AI) में 14 अरब डॉलर का निवेश किया था और इसके सह-संस्थापक एलेक्जेंडर वांग को अपनी टीम में शामिल किया था। इसके बाद जुलाई में मेटा ने बताया था कि 2026 में एआई से जुड़े निवेश पर उसका खर्च 145 अरब डॉलर यानी करीब 14,000 अरब रुपये तक पहुंच सकता है।

मेटा ने अगस्त में म्यूज कोड (Muse Code) और सितंबर में म्यूज ऐप पेश किया था। अब नए एआई मॉडल को भी इसी पर्सनल असिस्टेंट से जोड़ने की तैयारी है।

हालांकि, एआई के तेजी से विकास के साथ इसकी सुरक्षा को लेकर चिंताएं भी बढ़ रही हैं। मेटा का कहना है कि नए मॉडल विकसित करने के साथ सुरक्षा पहलुओं पर भी ध्यान दिया जा रहा है। मार्क जुकरबर्ग के मुताबिक, सुरक्षा जांच के कारण म्यूज की शुरुआत में कई महीनों की देरी हुई।

सितंबर में जुकरबर्ग ने अन्य टेक कंपनियों के प्रमुखों के साथ एडवांस्ड एआई मॉडल के लिए सुरक्षा उपायों से जुड़े एक समझौते पर भी हस्ताक्षर किए थे। एंथ्रोपिक समेत कुछ कंपनियों ने जरूरत पड़ने पर एआई डेवलपमेंट की रफ्तार धीमी रखने की बात कही है।

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सत्य नडेला ने AI सुरक्षा पर दी चेतावनी: मॉडल में ‘इमरजेंसी ब्रेक’ की जरूरत

माइक्रोसॉफ्ट प्रमुख सत्य नडेला ने AI सुरक्षा को लेकर कंपनियों को चेताया, शक्तिशाली मॉडल में संभावित खतरे मानकर इमरजेंसी ब्रेक और नियंत्रण व्यवस्था जरूरी बताई।

Last Modified:
Monday, 12 October, 2026
satyanadela

माइक्रोसॉफ्ट (Microsoft) के प्रमुख और मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) सत्य नडेला (Satya Nadella) ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की सुरक्षा को लेकर कंपनियों को सतर्क रहने की सलाह दी है। उन्होंने कहा कि शक्तिशाली एआई मॉडल को संभावित अंदरूनी खतरे के तौर पर देखा जाना चाहिए और शुरुआत से ही उनके नियंत्रण की व्यवस्था होनी चाहिए।

नडेला ने एक्स (X) पर पोस्ट कर कहा कि कंपनियों को यह मानकर चलना चाहिए कि कोई मॉडल खतरे में पड़ सकता है। ऐसे में उसे शुरू से ही काबू में रखने के लिए ‘इमरजेंसी ब्रेक’ जैसी व्यवस्था जरूरी है।

उन्होंने कहा कि किसी अधिकृत व्यक्ति के पास हमेशा यह सुविधा होनी चाहिए कि वह काम के बीच में ही मॉडल को रोक सके या उसे बंद कर सके। नडेला ने एडवांस्ड एआई का इस्तेमाल करने वालों को केवल मॉडल बनाने वाली कंपनियों पर निर्भर नहीं रहने की सलाह भी दी।

नडेला ने सुपर इंटेलिजेंस को ‘ब्लैक बॉक्स’ की तरह नहीं देखने की बात कही। उनका यह बयान ऐसे समय आया है, जब एंथ्रोपिक (Anthropic) और ओपनएआई (OpenAI) ने हाल में एआई मॉडल के अनचाहे तरीके से काम करने की कई घटनाओं का खुलासा किया है।

इन घटनाओं में क्लाउड (Claude) निर्माता के मॉडल द्वारा हत्या के मामले में पुलिस को गलत जानकारी देना और थर्ड-पार्टी वेबसाइट्स के हैक होने जैसी बातें शामिल हैं। इन घटनाओं के बाद एआई से जुड़े सुरक्षा जोखिमों को लेकर चिंता बढ़ी है और ‘एआई किल स्विच’ पर चर्चा तेज हुई है।

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निखिल सोनी की एचसीएल ग्रुप में नई भूमिका : संभालेंगे ब्रांड एंड मार्केटिंग

निखिल सोनी को एचसीएल ग्रुप में हेड ऑफ ब्रांड एंड मार्केटिंग नियुक्त किया गया है। नई भूमिका में वह ब्रांड, स्पोर्ट्स, कल्चर, लर्निंग और एनवायरनमेंट से जुड़े काम संभालेंगे।

Last Modified:
Friday, 09 October, 2026
nikhil

निखिल सोनी (Nikhil Soni) को एचसीएल ग्रुप (HCL Group) में हेड ऑफ ब्रांड एंड मार्केटिंग (Head of Brand & Marketing) नियुक्त किया गया है। उन्होंने लिंक्डइन (LinkedIn) पोस्ट के जरिए अपनी नई और विस्तारित जिम्मेदारी की जानकारी साझा की।

निखिल ने अपनी पोस्ट में कहा कि वह अब एचसीएल ग्रुप में हेड ऑफ ब्रांड एंड मार्केटिंग की भूमिका संभाल रहे हैं। नई जिम्मेदारी के तहत वह ग्रुप के ब्रांड-बिल्डिंग पोर्टफोलियो (Brand-Building Portfolio) से जुड़े व्यापक कामकाज का नेतृत्व करेंगे।

एचसीएल ग्रुप में अपने सफर को याद करते हुए उन्होंने बताया कि पिछले वर्षों में उन्होंने ब्रांड, ग्रोथ, डिजिटल, कंटेंट, एक्सपीरियंस और मार्केटिंग (Brand, Growth, Digital, Content, Experience and Marketing) से जुड़े प्लेटफॉर्म्स पर काम किया है।

नई भूमिका में उनकी जिम्मेदारियां ब्रांड, स्पोर्ट्स, कल्चर, लर्निंग और एनवायरनमेंट (Brand, Sports, Culture, Learning and Environment) तक विस्तारित होंगी। इन सभी क्षेत्रों को अब व्यापक ब्रांड-बिल्डिंग जिम्मेदारी के तहत लाया जाएगा।

निखिल सोनी पिछले 11 वर्षों से अधिक समय से एचसीएल ग्रुप से जुड़े हुए हैं। इस पदोन्नति से पहले वह एजीएम – मार्केटिंग (ब्रांड, ग्रोथ एंड प्रोडक्ट जीटीएम) (AGM – Marketing, Brand, Growth & Product GTM) के पद पर कार्यरत थे।

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ChatGPT की पकड़ मजबूत : 1 अरब से ज्यादा मासिक मोबाइल यूजर्स

एंड्रीसेन होरोविट्ज़ की रिपोर्ट में ChatGPT के 1 अरब से ज्यादा मासिक मोबाइल यूजर्स, क्लाउड की वेब ग्रोथ और अमेरिका में AI इस्तेमाल के आंकड़े सामने आए हैं।

Last Modified:
Wednesday, 07 October, 2026
chatgpt

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (Artificial Intelligence) बाजार में चैटजीपीटी (ChatGPT) की पकड़ लगातार मजबूत बनी हुई है। एंड्रीसेन होरोविट्ज़ (Andreessen Horowitz) की नई रैंकिंग रिपोर्ट के मुताबिक, चैटजीपीटी के मासिक सक्रिय मोबाइल यूजर्स की संख्या 1 अरब से ज्यादा हो गई है। वहीं क्लाउड (Claude) करीब 1 अरब मासिक विजिट के साथ वेब पर तीसरे स्थान पर पहुंच गया है।

रिपोर्ट में जेमिनी (Gemini) और क्लाउड के पेड सब्सक्राइबर्स की संख्या लगभग बराबर बताई गई है। जेमिनी के भुगतान करने वाले यूजर्स की संख्या में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। हालांकि अमेरिका में एआई (AI) को अपनाने वाले लोगों की संख्या तेजी से बढ़ रही है, लेकिन रोजाना इसका इस्तेमाल करने वालों की संख्या अभी कम है।

रिपोर्ट के अनुसार, करीब आधे अमेरिकी उपभोक्ता एआई का इस्तेमाल करते हैं, जबकि सिर्फ 25 प्रतिशत लोग रोजाना इसका उपयोग करते हैं। अगस्त तक केवल 4.5 प्रतिशत अमेरिकी उपभोक्ताओं के पास चैटजीपीटी, जेमिनी या क्लाउड का पेड व्यक्तिगत सब्सक्रिप्शन था। इससे साफ है कि एआई का इस्तेमाल बढ़ने के बावजूद भुगतान करने वाले यूजर्स अभी सीमित हैं।

जुलाई और अगस्त के दौरान क्लाउड के रोजाना औसत सेशन में कमी आई। इसके साथ ही नए पेड सब्सक्राइबर्स की रफ्तार भी कमजोर हुई। दूसरी ओर, नए एआई मॉडल और चैटजीपीटी वर्क (ChatGPT Work) जैसे उत्पादों की शुरुआत के बाद चैटजीपीटी की रफ्तार बढ़ी। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि अमेरिका के ज्यादातर राज्यों में चैटजीपीटी सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया जाने वाला प्लेटफॉर्म बना हुआ है।

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इंडिया मोबाइल कांग्रेस 2026 का आगाज : 6G और AI पर रहेगा खास फोकस

नई दिल्ली के यशोभूमि में India Mobile Congress 2026 शुरू हो गया है। चार दिवसीय आयोजन में 6G, AI, 5G, सैटेलाइट कम्युनिकेशन, साइबर सुरक्षा और नई टेक्नोलॉजी पर चर्चा होगी।

Last Modified:
Wednesday, 07 October, 2026
indianmobilecongress2026

देश का बड़ा टेलिकम्युनिकेशंस और टेक इवेंट इंडिया मोबाइल कांग्रेस (India Mobile Congress) 2026 आज यानी 7 अक्टूबर से नई दिल्ली के यशोभूमि में शुरू हो गया है। चार दिन चलने वाला यह आयोजन 10 अक्टूबर तक चलेगा।

इस साल इसका 10वां एडिशन आयोजित किया जा रहा है। कार्यक्रम का मुख्य विषय ‘स्केल विदाउट बाउंड्रीज’ (Scale Without Boundaries) है, जिसका फोकस तकनीक को बिना सीमाओं के बड़े स्तर तक पहुंचाने पर है। इसका आयोजन दूरसंचार विभाग और सेल्युलर ऑपरेटर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (Cellular Operators Association of India) की ओर से किया जा रहा है।

इस बार इंडिया मोबाइल कांग्रेस में 6जी (6G), आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), 5जी (5G), सैटेलाइट कम्युनिकेशन (Satellite Communication) और साइबर सुरक्षा (Cyber Security) जैसी टेक्नोलॉजी पर खास चर्चा होगी। इसके अलावा सेमीकंडक्टर, क्वांटम कम्युनिकेशंस, रोबोटिक्स और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी नई टेक्नोलॉजी भी शोकेस की जाएगी।

आयोजन में यह दिखाने की कोशिश होगी कि आने वाले वर्षों में मोबाइल और इंटरनेट की दुनिया किस दिशा में आगे बढ़ सकती है। 6जी को इस बार खास महत्व दिया गया है। यहां भारत की 6जी तैयारी, ग्लोबल स्टैंडर्ड्स और भविष्य में इस्तेमाल होने वाली नई कम्युनिकेशन टेक्नोलॉजी पर चर्चा होगी।

6जी के साथ ऐसे नेटवर्क पर भी ध्यान दिया जाएगा, जो एआई की मदद से खुद काम करने और जरूरत के हिसाब से नेटवर्क की क्षमता बदलने में सक्षम होंगे। भारत इस आयोजन के जरिए नेक्स्ट जेनरेशन कम्युनिकेशन टेक्नोलॉजी में अपनी भूमिका मजबूत करने की कोशिश कर रहा है।

सैटेलाइट कम्युनिकेशन भी आयोजन का एक बड़ा मुद्दा रहेगा। खास तौर पर ऐसी तकनीक पर चर्चा होगी, जिससे ट्रेडिशनल मोबाइल नेटवर्क की पहुंच से बाहर के इलाकों में भी संपर्क उपलब्ध कराया जा सके। सीधे मोबाइल डिवाइसेज को सैटेलाइट्स से जोड़ने वाली तकनीक आने वाले समय में दूरदराज के क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण हो सकती है।

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गूगल क्लाउड इंडिया में नेतृत्व बदलाव : अमित कुमार संभालेंगे अंतरिम जिम्मेदारी

गूगल क्लाउड इंडिया में नेतृत्व बदलाव हुआ है। शशिकुमार श्रीधरन के कंपनी से अलग होने के बाद अमित कुमार अंतरिम लीडर की जिम्मेदारी संभालेंगे और भारत में ग्रोथ पर फोकस करेंगे।

Last Modified:
Wednesday, 07 October, 2026
amitkumar

अमित कुमार (Amit Kumar) गूगल क्लाउड इंडिया (Google Cloud India) के अंतरिम लीडर (Interim Leader) की जिम्मेदारी संभालेंगे। यह बदलाव शशिकुमार श्रीधरन (Shashikumar Sridharan) के गूगल (Google) से अलग होकर बाहरी अवसर की ओर बढ़ने के बाद हुआ है। गूगल क्लाउड के एशिया पैसिफिक प्रेसिडेंट अरन बाजवा (Aran Bajwa) ने लिंक्डइन (LinkedIn) पोस्ट के जरिए नेतृत्व बदलाव की जानकारी दी।

अरन बाजवा ने गूगल क्लाउड में शशिकुमार श्रीधरन के योगदान की सराहना की। उन्होंने बताया कि श्रीधरन ने अपने कार्यकाल के दौरान कई लीडरशिप भूमिकाएं निभाईं। उन्होंने शुरुआत में एपीएसी सीओओ (APAC COO) के रूप में काम किया और बाद में गूगल क्लाउड इंडिया के मैनेजिंग डायरेक्टर (Managing Director) की जिम्मेदारी संभाली।

बाजवा ने अपनी पोस्ट में कहा कि भारत में गूगल क्लाउड की ग्रोथ का मोमेंटम लगातार मजबूत बना हुआ है और बाजार में बिजनेस तथा एआई (AI) से जुड़ी ग्रोथ तेजी से बढ़ रही है। उन्होंने श्रीधरन को उनकी साझेदारी और योगदान के लिए धन्यवाद दिया और उनके अगले प्रोफेशनल अध्याय के लिए शुभकामनाएं दीं।

बाजवा ने कहा कि अमित कुमार के अंतरिम लीडर के रूप में जिम्मेदारी संभालने के साथ कंपनी का फोकस भारत में मौजूदा ग्रोथ को और मजबूत करने पर रहेगा। उन्होंने कहा कि भारत में ग्राहकों और पार्टनर्स के लिए आगे का अवसर पहले से कहीं बड़ा है।

गूगल क्लाउड इंडिया में यह बदलाव ऐसे समय हुआ है, जब कंपनी भारतीय बाजार में बिजनेस और एआई ग्रोथ को आगे बढ़ाने पर जोर दे रही है। आने वाले चरण में कंपनी की टीम भारत में ग्राहकों और पार्टनर्स के लिए नए अवसरों पर ध्यान केंद्रित करेगी।

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डेविड रॉबिन्सन का ओपनएआई से इस्तीफा : एआई सेफ्टी पर उठाए सवाल

ओपनएआई के लंबे समय तक सेफ्टी लीडर रहे डेविड रॉबिन्सन ने इस्तीफा देकर एआई डेवलपमेंट और सेफ्टी तरीकों पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने मजबूत सेफ्टी सिस्टम की जरूरत बताई है।

Last Modified:
Tuesday, 06 October, 2026
openai

ओपनएआई (OpenAI) में लंबे समय तक सेफ्टी लीडर रहे डेविड रॉबिन्सन (David Robinson) ने इस्तीफा दे दिया है। कंपनी छोड़ने के बाद उन्होंने ओपनएआई की वर्क कल्चर (Work Culture) और एआई को आगे बढ़ाने के तरीके पर सवाल उठाए हैं। रॉबिन्सन ने कहा कि एआई इंडस्ट्री जिस तेजी से आगे बढ़ रही है, उसके साथ सेफ्टी पर भी उतना ही ध्यान देना जरूरी है। उनके मुताबिक, मौजूदा तरीके से एआई को डेवलप करना अब सही नहीं है।

अपने एक लेख में रॉबिन्सन ने बताया कि एआई कंपनियां अक्सर पहले सिस्टम को डेवलप और डिप्लॉय करती हैं और समस्या सामने आने के बाद सेफ्टी सिस्टम को बेहतर करती हैं। ओपनएआई इस तरीके को इटरेटिव डिप्लॉयमेंट (Iterative Deployment) कहता है। रॉबिन्सन के मुताबिक, एआई के लिए यह तरीका बड़ा रिस्क बन सकता है।

उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे एआई मॉडल ज्यादा पावरफुल होंगे, किसी गलती का असर भी बड़ा हो सकता है। अगर कोई बड़ी गलती हो गई तो हर बार उसे बाद में ठीक करने का मौका नहीं मिलेगा। इसलिए एआई कंपनियों को पहले से ज्यादा मजबूत सेफ्टी सिस्टम बनाने होंगे। रॉबिन्सन ने एआई एजेंट (AI Agents) से जुड़ी कुछ घटनाओं का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि एक घटना में ओपनएआई से गलती से एआई एजेंट्स का एक स्वॉर्म रिलीज हो गया था।

उन्होंने एक अन्य मामले का जिक्र करते हुए बताया कि ट्रेनिंग के दौरान एक एआई मॉडल ने इंटरनेट एक्सेस से जुड़ी पाबंदियों को पार कर लिया। सिस्टम ने इसकी जानकारी दी, लेकिन उसे अपने आप बंद नहीं किया जा सका, जबकि ऐसा होना चाहिए था। रॉबिन्सन के मुताबिक, इस तरह की गलतियां सिर्फ एक कंपनी तक सीमित नहीं हैं। एआई इंडस्ट्री में तेजी से काम करने की वजह से ऐसी घटनाएं हो रही हैं।

हालांकि, रॉबिन्सन ने एआई को पूरी तरह खराब नहीं बताया। उनके मुताबिक, एआई लोगों के लिए काफी उपयोगी और फायदेमंद हो सकता है। लेकिन इसकी कैपिसिटी बढ़ने के साथ सेफ्टी भी उसी हिसाब से मजबूत होनी चाहिए।

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साइबर सुरक्षा से लेकर कोडिंग तक मदद करेगा गूगल का 'Gemini 4 Argon'

गूगल ने नया आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस मॉडल जेमिनी 4 आर्गन पेश किया है। फिलहाल इसकी पहुंच चुनिंदा साइबर सिक्योरिटी विशेषज्ञों और साझेदारों तक सीमित है, सार्वजनिक लॉन्च की तारीख घोषित नहीं हुई है।

Last Modified:
Thursday, 01 October, 2026
gogolegemini

गूगल (Google) ने नया आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) मॉडल जेमिनी 4 आर्गन (Gemini 4 Argon) पेश किया है। हालांकि, कंपनी ने इसकी शुरुआती पहुंच आम यूजर्स के लिए नहीं रखी है। फिलहाल इसे चुनिंदा साइबर सिक्योरिटी विशेषज्ञों और साझेदारों को दिया जा रहा है।

गूगल का कहना है कि जेमिनी 4 आर्गन को मुश्किल कामों के लिए तैयार किया गया है, लेकिन इसकी क्षमता का गलत इस्तेमाल साइबर हमलों में हो सकता है। इसी वजह से मॉडल को चरणबद्ध तरीके से जारी किया जा रहा है।

जेमिनी 4 आर्गन सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग, वित्तीय और कानूनी कामों के साथ साइबर सुरक्षा में भी मदद कर सकता है। गूगल के मुताबिक, यह सॉफ्टवेयर में मौजूद कमियों को पहचानने और उन्हें ठीक करने में सहायता कर सकता है। कंपनी का दावा है कि कोडिंग और साइबर सुरक्षा जांच में इसका प्रदर्शन ओपनएआई (OpenAI) और एंथ्रोपिक (Anthropic) के प्रमुख मॉडलों के बराबर रहा है।

साइबर सुरक्षा में इसकी क्षमता का एक उदाहरण जांच के दौरान सामने आया। गूगल के अनुसार, आर्गन ने अस्पतालों में इस्तेमाल होने वाले एक सॉफ्टवेयर सिस्टम की ऐसी कमी पहचानी, जिससे संवेदनशील व्यक्तिगत जानकारी सामने आने का खतरा था। कंपनी का कहना है कि दूसरे एआई मॉडल इस कमी को पहचान नहीं पाए थे।

गूगल ने आर्गन में सुरक्षा उपाय भी लगाए हैं, जो साइबर हमलों या रासायनिक, जैविक और परमाणु हथियारों से जुड़े खतरनाक अनुरोधों को रोकते हैं।

फिलहाल गूगल ने आर्गन को चुनिंदा साइबर सुरक्षा साझेदारों तक सीमित रखा है और आम यूजर्स के लिए इसकी उपलब्धता की तारीख नहीं बताई है। कंपनी अमेरिका सरकार की स्वैच्छिक प्रक्रिया में भी शामिल है, जिसमें रिलीज से पहले सरकार को उन्नत एआई मॉडलों की शुरुआती पहुंच दी जाती है।

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ने टेक कंपनियों संग साइन किया एआई सेफ्टी समझौता

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने टेक कंपनियों के साथ एआई सुरक्षा समझौते पर चर्चा की। कंपनियों ने आंतरिक जांच, निगरानी, बाहरी ऑडिट और बोर्ड स्तर की समीक्षा पर सहमति जताई।

Samachar4media Bureau by
Published - Wednesday, 30 September, 2026
Last Modified:
Wednesday, 30 September, 2026
trump

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने मंगलवार को व्हाइट हाउस (White House) में बड़ी टेक कंपनियों के सीईओ (CEO) के साथ बैठक की। बैठक में एआई (AI) की सुरक्षा और निगरानी को लेकर गूगल (Google), एंथ्रोपिक (Anthropic), मेटा (Meta), ओपनएआई (OpenAI), एक्सएआई (xAI) और एनवीडिया (Nvidia) समेत कंपनियों ने एक स्वैच्छिक सुरक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए।

समझौते के तहत कंपनियों ने अपने एआई सिस्टम की सुरक्षा को लेकर कई स्तरों पर निगरानी रखने पर सहमति जताई है। इसमें कंपनियों की ओर से अपने एआई मॉडल की जांच, अलग टीम के जरिए निगरानी, बाहरी विशेषज्ञों या स्वतंत्र संस्थाओं से ऑडिट और बोर्ड की स्वतंत्र समिति की ओर से रिपोर्ट की समीक्षा शामिल है।

बैठक के दौरान ट्रंप ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (Artificial Intelligence) के लिए ‘सुपर इंटेलिजेंस’ यानी एसआई (Super Intelligence - SI) नाम के इस्तेमाल पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि ‘आर्टिफिशियल’ शब्द तकनीक को बनावटी बताता है। इससे पहले 22 सितंबर को संयुक्त राष्ट्र महासभा में भी ट्रंप ने एआई के लिए ‘सुपर इंटेलिजेंस’ शब्द का इस्तेमाल करने की बात कही थी।

ट्रंप ने एआई की दौड़ को अमेरिका और चीन के बीच प्रतिस्पर्धा से भी जोड़ा और अमेरिका के आगे होने की बात कही। बैठक में टेक कंपनियों के एआई विकास और सुरक्षा के साथ डेटा सेंटर (Data Center) से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा हुई।

ट्रंप ने टेक कंपनियों से कहा कि जिन शहरों और कस्बों में डेटा सेंटर बनाए जाएंगे, वहां की स्थानीय कम्युनिटी (Local Community) के साथ मिलकर काम किया जाए। उन्होंने कहा कि कंपनियों को स्थानीय लोगों के लिए स्कूलों, शिक्षकों और दूसरी जरूरतों में मदद करने पर भी ध्यान देना चाहिए।

ट्रंप ने एआई कंपनियों के लिए सेल्फ-रेगुलेशन (Self-Regulation) पर भी जोर दिया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह समझौता फिलहाल स्वैच्छिक है और इसमें कंपनियों की ओर से अपने सिस्टम की सुरक्षा के लिए आंतरिक नियंत्रण और स्वतंत्र ऑडिट जैसी व्यवस्थाएं शामिल हैं।

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