इंडिया मोबाइल कांग्रेस 2026 का आगाज : 6G और AI पर रहेगा खास फोकस

नई दिल्ली के यशोभूमि में India Mobile Congress 2026 शुरू हो गया है। चार दिवसीय आयोजन में 6G, AI, 5G, सैटेलाइट कम्युनिकेशन, साइबर सुरक्षा और नई टेक्नोलॉजी पर चर्चा होगी।

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Wednesday, 07 October, 2026
indianmobilecongress2026


देश का बड़ा टेलिकम्युनिकेशंस और टेक इवेंट इंडिया मोबाइल कांग्रेस (India Mobile Congress) 2026 आज यानी 7 अक्टूबर से नई दिल्ली के यशोभूमि में शुरू हो गया है। चार दिन चलने वाला यह आयोजन 10 अक्टूबर तक चलेगा।

इस साल इसका 10वां एडिशन आयोजित किया जा रहा है। कार्यक्रम का मुख्य विषय ‘स्केल विदाउट बाउंड्रीज’ (Scale Without Boundaries) है, जिसका फोकस तकनीक को बिना सीमाओं के बड़े स्तर तक पहुंचाने पर है। इसका आयोजन दूरसंचार विभाग और सेल्युलर ऑपरेटर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (Cellular Operators Association of India) की ओर से किया जा रहा है।

इस बार इंडिया मोबाइल कांग्रेस में 6जी (6G), आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), 5जी (5G), सैटेलाइट कम्युनिकेशन (Satellite Communication) और साइबर सुरक्षा (Cyber Security) जैसी टेक्नोलॉजी पर खास चर्चा होगी। इसके अलावा सेमीकंडक्टर, क्वांटम कम्युनिकेशंस, रोबोटिक्स और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी नई टेक्नोलॉजी भी शोकेस की जाएगी।

आयोजन में यह दिखाने की कोशिश होगी कि आने वाले वर्षों में मोबाइल और इंटरनेट की दुनिया किस दिशा में आगे बढ़ सकती है। 6जी को इस बार खास महत्व दिया गया है। यहां भारत की 6जी तैयारी, ग्लोबल स्टैंडर्ड्स और भविष्य में इस्तेमाल होने वाली नई कम्युनिकेशन टेक्नोलॉजी पर चर्चा होगी।

6जी के साथ ऐसे नेटवर्क पर भी ध्यान दिया जाएगा, जो एआई की मदद से खुद काम करने और जरूरत के हिसाब से नेटवर्क की क्षमता बदलने में सक्षम होंगे। भारत इस आयोजन के जरिए नेक्स्ट जेनरेशन कम्युनिकेशन टेक्नोलॉजी में अपनी भूमिका मजबूत करने की कोशिश कर रहा है।

सैटेलाइट कम्युनिकेशन भी आयोजन का एक बड़ा मुद्दा रहेगा। खास तौर पर ऐसी तकनीक पर चर्चा होगी, जिससे ट्रेडिशनल मोबाइल नेटवर्क की पहुंच से बाहर के इलाकों में भी संपर्क उपलब्ध कराया जा सके। सीधे मोबाइल डिवाइसेज को सैटेलाइट्स से जोड़ने वाली तकनीक आने वाले समय में दूरदराज के क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण हो सकती है।

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ChatGPT की पकड़ मजबूत : 1 अरब से ज्यादा मासिक मोबाइल यूजर्स

एंड्रीसेन होरोविट्ज़ की रिपोर्ट में ChatGPT के 1 अरब से ज्यादा मासिक मोबाइल यूजर्स, क्लाउड की वेब ग्रोथ और अमेरिका में AI इस्तेमाल के आंकड़े सामने आए हैं।

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Wednesday, 07 October, 2026
chatgpt

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (Artificial Intelligence) बाजार में चैटजीपीटी (ChatGPT) की पकड़ लगातार मजबूत बनी हुई है। एंड्रीसेन होरोविट्ज़ (Andreessen Horowitz) की नई रैंकिंग रिपोर्ट के मुताबिक, चैटजीपीटी के मासिक सक्रिय मोबाइल यूजर्स की संख्या 1 अरब से ज्यादा हो गई है। वहीं क्लाउड (Claude) करीब 1 अरब मासिक विजिट के साथ वेब पर तीसरे स्थान पर पहुंच गया है।

रिपोर्ट में जेमिनी (Gemini) और क्लाउड के पेड सब्सक्राइबर्स की संख्या लगभग बराबर बताई गई है। जेमिनी के भुगतान करने वाले यूजर्स की संख्या में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। हालांकि अमेरिका में एआई (AI) को अपनाने वाले लोगों की संख्या तेजी से बढ़ रही है, लेकिन रोजाना इसका इस्तेमाल करने वालों की संख्या अभी कम है।

रिपोर्ट के अनुसार, करीब आधे अमेरिकी उपभोक्ता एआई का इस्तेमाल करते हैं, जबकि सिर्फ 25 प्रतिशत लोग रोजाना इसका उपयोग करते हैं। अगस्त तक केवल 4.5 प्रतिशत अमेरिकी उपभोक्ताओं के पास चैटजीपीटी, जेमिनी या क्लाउड का पेड व्यक्तिगत सब्सक्रिप्शन था। इससे साफ है कि एआई का इस्तेमाल बढ़ने के बावजूद भुगतान करने वाले यूजर्स अभी सीमित हैं।

जुलाई और अगस्त के दौरान क्लाउड के रोजाना औसत सेशन में कमी आई। इसके साथ ही नए पेड सब्सक्राइबर्स की रफ्तार भी कमजोर हुई। दूसरी ओर, नए एआई मॉडल और चैटजीपीटी वर्क (ChatGPT Work) जैसे उत्पादों की शुरुआत के बाद चैटजीपीटी की रफ्तार बढ़ी। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि अमेरिका के ज्यादातर राज्यों में चैटजीपीटी सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया जाने वाला प्लेटफॉर्म बना हुआ है।

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गूगल क्लाउड इंडिया में नेतृत्व बदलाव : अमित कुमार संभालेंगे अंतरिम जिम्मेदारी

गूगल क्लाउड इंडिया में नेतृत्व बदलाव हुआ है। शशिकुमार श्रीधरन के कंपनी से अलग होने के बाद अमित कुमार अंतरिम लीडर की जिम्मेदारी संभालेंगे और भारत में ग्रोथ पर फोकस करेंगे।

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Wednesday, 07 October, 2026
amitkumar

अमित कुमार (Amit Kumar) गूगल क्लाउड इंडिया (Google Cloud India) के अंतरिम लीडर (Interim Leader) की जिम्मेदारी संभालेंगे। यह बदलाव शशिकुमार श्रीधरन (Shashikumar Sridharan) के गूगल (Google) से अलग होकर बाहरी अवसर की ओर बढ़ने के बाद हुआ है। गूगल क्लाउड के एशिया पैसिफिक प्रेसिडेंट अरन बाजवा (Aran Bajwa) ने लिंक्डइन (LinkedIn) पोस्ट के जरिए नेतृत्व बदलाव की जानकारी दी।

अरन बाजवा ने गूगल क्लाउड में शशिकुमार श्रीधरन के योगदान की सराहना की। उन्होंने बताया कि श्रीधरन ने अपने कार्यकाल के दौरान कई लीडरशिप भूमिकाएं निभाईं। उन्होंने शुरुआत में एपीएसी सीओओ (APAC COO) के रूप में काम किया और बाद में गूगल क्लाउड इंडिया के मैनेजिंग डायरेक्टर (Managing Director) की जिम्मेदारी संभाली।

बाजवा ने अपनी पोस्ट में कहा कि भारत में गूगल क्लाउड की ग्रोथ का मोमेंटम लगातार मजबूत बना हुआ है और बाजार में बिजनेस तथा एआई (AI) से जुड़ी ग्रोथ तेजी से बढ़ रही है। उन्होंने श्रीधरन को उनकी साझेदारी और योगदान के लिए धन्यवाद दिया और उनके अगले प्रोफेशनल अध्याय के लिए शुभकामनाएं दीं।

बाजवा ने कहा कि अमित कुमार के अंतरिम लीडर के रूप में जिम्मेदारी संभालने के साथ कंपनी का फोकस भारत में मौजूदा ग्रोथ को और मजबूत करने पर रहेगा। उन्होंने कहा कि भारत में ग्राहकों और पार्टनर्स के लिए आगे का अवसर पहले से कहीं बड़ा है।

गूगल क्लाउड इंडिया में यह बदलाव ऐसे समय हुआ है, जब कंपनी भारतीय बाजार में बिजनेस और एआई ग्रोथ को आगे बढ़ाने पर जोर दे रही है। आने वाले चरण में कंपनी की टीम भारत में ग्राहकों और पार्टनर्स के लिए नए अवसरों पर ध्यान केंद्रित करेगी।

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डेविड रॉबिन्सन का ओपनएआई से इस्तीफा : एआई सेफ्टी पर उठाए सवाल

ओपनएआई के लंबे समय तक सेफ्टी लीडर रहे डेविड रॉबिन्सन ने इस्तीफा देकर एआई डेवलपमेंट और सेफ्टी तरीकों पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने मजबूत सेफ्टी सिस्टम की जरूरत बताई है।

Last Modified:
Tuesday, 06 October, 2026
openai

ओपनएआई (OpenAI) में लंबे समय तक सेफ्टी लीडर रहे डेविड रॉबिन्सन (David Robinson) ने इस्तीफा दे दिया है। कंपनी छोड़ने के बाद उन्होंने ओपनएआई की वर्क कल्चर (Work Culture) और एआई को आगे बढ़ाने के तरीके पर सवाल उठाए हैं। रॉबिन्सन ने कहा कि एआई इंडस्ट्री जिस तेजी से आगे बढ़ रही है, उसके साथ सेफ्टी पर भी उतना ही ध्यान देना जरूरी है। उनके मुताबिक, मौजूदा तरीके से एआई को डेवलप करना अब सही नहीं है।

अपने एक लेख में रॉबिन्सन ने बताया कि एआई कंपनियां अक्सर पहले सिस्टम को डेवलप और डिप्लॉय करती हैं और समस्या सामने आने के बाद सेफ्टी सिस्टम को बेहतर करती हैं। ओपनएआई इस तरीके को इटरेटिव डिप्लॉयमेंट (Iterative Deployment) कहता है। रॉबिन्सन के मुताबिक, एआई के लिए यह तरीका बड़ा रिस्क बन सकता है।

उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे एआई मॉडल ज्यादा पावरफुल होंगे, किसी गलती का असर भी बड़ा हो सकता है। अगर कोई बड़ी गलती हो गई तो हर बार उसे बाद में ठीक करने का मौका नहीं मिलेगा। इसलिए एआई कंपनियों को पहले से ज्यादा मजबूत सेफ्टी सिस्टम बनाने होंगे। रॉबिन्सन ने एआई एजेंट (AI Agents) से जुड़ी कुछ घटनाओं का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि एक घटना में ओपनएआई से गलती से एआई एजेंट्स का एक स्वॉर्म रिलीज हो गया था।

उन्होंने एक अन्य मामले का जिक्र करते हुए बताया कि ट्रेनिंग के दौरान एक एआई मॉडल ने इंटरनेट एक्सेस से जुड़ी पाबंदियों को पार कर लिया। सिस्टम ने इसकी जानकारी दी, लेकिन उसे अपने आप बंद नहीं किया जा सका, जबकि ऐसा होना चाहिए था। रॉबिन्सन के मुताबिक, इस तरह की गलतियां सिर्फ एक कंपनी तक सीमित नहीं हैं। एआई इंडस्ट्री में तेजी से काम करने की वजह से ऐसी घटनाएं हो रही हैं।

हालांकि, रॉबिन्सन ने एआई को पूरी तरह खराब नहीं बताया। उनके मुताबिक, एआई लोगों के लिए काफी उपयोगी और फायदेमंद हो सकता है। लेकिन इसकी कैपिसिटी बढ़ने के साथ सेफ्टी भी उसी हिसाब से मजबूत होनी चाहिए।

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साइबर सुरक्षा से लेकर कोडिंग तक मदद करेगा गूगल का 'Gemini 4 Argon'

गूगल ने नया आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस मॉडल जेमिनी 4 आर्गन पेश किया है। फिलहाल इसकी पहुंच चुनिंदा साइबर सिक्योरिटी विशेषज्ञों और साझेदारों तक सीमित है, सार्वजनिक लॉन्च की तारीख घोषित नहीं हुई है।

Last Modified:
Thursday, 01 October, 2026
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गूगल (Google) ने नया आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) मॉडल जेमिनी 4 आर्गन (Gemini 4 Argon) पेश किया है। हालांकि, कंपनी ने इसकी शुरुआती पहुंच आम यूजर्स के लिए नहीं रखी है। फिलहाल इसे चुनिंदा साइबर सिक्योरिटी विशेषज्ञों और साझेदारों को दिया जा रहा है।

गूगल का कहना है कि जेमिनी 4 आर्गन को मुश्किल कामों के लिए तैयार किया गया है, लेकिन इसकी क्षमता का गलत इस्तेमाल साइबर हमलों में हो सकता है। इसी वजह से मॉडल को चरणबद्ध तरीके से जारी किया जा रहा है।

जेमिनी 4 आर्गन सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग, वित्तीय और कानूनी कामों के साथ साइबर सुरक्षा में भी मदद कर सकता है। गूगल के मुताबिक, यह सॉफ्टवेयर में मौजूद कमियों को पहचानने और उन्हें ठीक करने में सहायता कर सकता है। कंपनी का दावा है कि कोडिंग और साइबर सुरक्षा जांच में इसका प्रदर्शन ओपनएआई (OpenAI) और एंथ्रोपिक (Anthropic) के प्रमुख मॉडलों के बराबर रहा है।

साइबर सुरक्षा में इसकी क्षमता का एक उदाहरण जांच के दौरान सामने आया। गूगल के अनुसार, आर्गन ने अस्पतालों में इस्तेमाल होने वाले एक सॉफ्टवेयर सिस्टम की ऐसी कमी पहचानी, जिससे संवेदनशील व्यक्तिगत जानकारी सामने आने का खतरा था। कंपनी का कहना है कि दूसरे एआई मॉडल इस कमी को पहचान नहीं पाए थे।

गूगल ने आर्गन में सुरक्षा उपाय भी लगाए हैं, जो साइबर हमलों या रासायनिक, जैविक और परमाणु हथियारों से जुड़े खतरनाक अनुरोधों को रोकते हैं।

फिलहाल गूगल ने आर्गन को चुनिंदा साइबर सुरक्षा साझेदारों तक सीमित रखा है और आम यूजर्स के लिए इसकी उपलब्धता की तारीख नहीं बताई है। कंपनी अमेरिका सरकार की स्वैच्छिक प्रक्रिया में भी शामिल है, जिसमें रिलीज से पहले सरकार को उन्नत एआई मॉडलों की शुरुआती पहुंच दी जाती है।

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ने टेक कंपनियों संग साइन किया एआई सेफ्टी समझौता

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने टेक कंपनियों के साथ एआई सुरक्षा समझौते पर चर्चा की। कंपनियों ने आंतरिक जांच, निगरानी, बाहरी ऑडिट और बोर्ड स्तर की समीक्षा पर सहमति जताई।

Samachar4media Bureau by
Published - Wednesday, 30 September, 2026
Last Modified:
Wednesday, 30 September, 2026
trump

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने मंगलवार को व्हाइट हाउस (White House) में बड़ी टेक कंपनियों के सीईओ (CEO) के साथ बैठक की। बैठक में एआई (AI) की सुरक्षा और निगरानी को लेकर गूगल (Google), एंथ्रोपिक (Anthropic), मेटा (Meta), ओपनएआई (OpenAI), एक्सएआई (xAI) और एनवीडिया (Nvidia) समेत कंपनियों ने एक स्वैच्छिक सुरक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए।

समझौते के तहत कंपनियों ने अपने एआई सिस्टम की सुरक्षा को लेकर कई स्तरों पर निगरानी रखने पर सहमति जताई है। इसमें कंपनियों की ओर से अपने एआई मॉडल की जांच, अलग टीम के जरिए निगरानी, बाहरी विशेषज्ञों या स्वतंत्र संस्थाओं से ऑडिट और बोर्ड की स्वतंत्र समिति की ओर से रिपोर्ट की समीक्षा शामिल है।

बैठक के दौरान ट्रंप ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (Artificial Intelligence) के लिए ‘सुपर इंटेलिजेंस’ यानी एसआई (Super Intelligence - SI) नाम के इस्तेमाल पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि ‘आर्टिफिशियल’ शब्द तकनीक को बनावटी बताता है। इससे पहले 22 सितंबर को संयुक्त राष्ट्र महासभा में भी ट्रंप ने एआई के लिए ‘सुपर इंटेलिजेंस’ शब्द का इस्तेमाल करने की बात कही थी।

ट्रंप ने एआई की दौड़ को अमेरिका और चीन के बीच प्रतिस्पर्धा से भी जोड़ा और अमेरिका के आगे होने की बात कही। बैठक में टेक कंपनियों के एआई विकास और सुरक्षा के साथ डेटा सेंटर (Data Center) से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा हुई।

ट्रंप ने टेक कंपनियों से कहा कि जिन शहरों और कस्बों में डेटा सेंटर बनाए जाएंगे, वहां की स्थानीय कम्युनिटी (Local Community) के साथ मिलकर काम किया जाए। उन्होंने कहा कि कंपनियों को स्थानीय लोगों के लिए स्कूलों, शिक्षकों और दूसरी जरूरतों में मदद करने पर भी ध्यान देना चाहिए।

ट्रंप ने एआई कंपनियों के लिए सेल्फ-रेगुलेशन (Self-Regulation) पर भी जोर दिया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह समझौता फिलहाल स्वैच्छिक है और इसमें कंपनियों की ओर से अपने सिस्टम की सुरक्षा के लिए आंतरिक नियंत्रण और स्वतंत्र ऑडिट जैसी व्यवस्थाएं शामिल हैं।

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एआई एजेंट्स के गलत व्यवहार पर रोक लगाएंगे एनवीडिया के नए ओपन-सोर्स टूल

एनवीडिया ने दो ओपन-सोर्स सॉफ्टवेयर सिक्योरिटी टूल लॉन्च किए हैं, जो एआई एजेंट्स की रियल-टाइम एक्सेस को नियंत्रित करेंगे और नियम तोड़ने पर उन्हें बंद कर सकेंगे।

Last Modified:
Tuesday, 29 September, 2026
nvidia

सेमीकंडक्टर कंपनी एनवीडिया (Nvidia) ने दो ओपन-सोर्स सॉफ्टवेयर सिक्योरिटी टूल (Open-Source Software Security Tools) लॉन्च किए हैं। ये टूल कंपनी के हार्डवेयर (Hardware) पर चलेंगे और यह नियंत्रित करने के लिए बनाए गए हैं कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई (Artificial Intelligence) एजेंट रियल-टाइम में किन चीजों का एक्सेस (Access) ले सकते हैं।

अगर एआई एजेंट तय नियमों को तोड़ते हैं, तो ये टूल उन्हें बंद भी कर सकते हैं। कंपनी ने यह कदम ऑटोनॉमस एजेंट (Autonomous Agent) के गलत व्यवहार से जुड़ी कई घटनाओं के बाद उठाया है।

एनवीडिया के एंटरप्राइज एआई के वाइस प्रेसिडेंट जस्टिन बोइटानो (Justin Boitano) ने कहा कि अगर अत्याधुनिक एआई लैब्स ने अपने एआई मॉडल को टेस्ट करने के लिए इस टेक्नोलॉजी का पहले ही इस्तेमाल किया होता, तो हगिंग फेस (Hugging Face) पर हुआ हमला रोका जा सकता था।

कंपनी को उम्मीद है कि उसका ओपन एजेंट सेफ्टी प्लेटफॉर्म (Open Agent Safety Platform) एआई डेवलपमेंट (AI Development) की रफ्तार को धीमा किए बिना भविष्य में होने वाली ऐसी सेंधमारी को रोकने में मदद करेगा। इसे तकनीक की सुरक्षा की दिशा में एक अहम कदम बताया जा रहा है।

एनवीडिया के मुख्य कार्यकारी अधिकारी जेंसेन हुआंग (Jensen Huang) ने नए एआई नियमों की जरूरत को ज्यादा अहमियत नहीं दी है, लेकिन सुरक्षा की कड़ी जांच पर जोर दिया है। वह सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं को इंजीनियरिंग चैलेंज (Engineering Challenge) मानते हैं, न कि ऐसी समस्या जिसके लिए ज्यादा नियमों या वैश्विक तालमेल की जरूरत हो।

हुआंग ने कुछ एआई डेवलपर्स के उन दावों को भी खारिज किया है, जिनमें कहा गया था कि उनकी टेक्नोलॉजी से इंसानों का अस्तित्व खत्म हो सकता है।

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सरकार 20,000 करोड़ रुपये तक का AI फंड बनाने पर कर रही विचार

भारत सरकार AI को बढ़ावा देने के लिए 15,000 से 20,000 करोड़ रुपये का नया फंड बनाने पर विचार कर रही है। इससे AI कंपनियों और कंप्यूटिंग ढांचे को मदद मिल सकती है।

Last Modified:
Saturday, 26 September, 2026
aifund

भारत सरकार देश में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (Artificial Intelligence) यानी एआई (AI) को बढ़ावा देने के लिए 15,000 से 20,000 करोड़ रुपये का नया फंड बनाने पर विचार कर रही है। द इकोनॉमिक टाइम्स (The Economic Times) की रिपोर्ट के मुताबिक, इस फंड का मकसद एआई कंपनियों को फंडिंग देने के साथ बड़े एआई मॉडल तैयार करने के लिए जरूरी कंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर (Computing Infrastructure) विकसित करना है।

प्रस्तावित नेशनल फ्रंटियर एआई एंड कंप्यूट फंड (National Frontier AI and Compute Fund) के तहत एआई कंपनियों और टेक्नोलॉजी इंफ्रास्ट्रक्चर को लंबी अवधि के लिए फंड उपलब्ध कराने की योजना पर चर्चा हो रही है।

प्रस्तावित फंड से दो प्रमुख क्षेत्रों को मदद मिलने की उम्मीद है। पहला, बड़े एआई मॉडल तैयार करने वाले भारतीय स्टार्टअप्स और कंपनियों को लंबे समय के लिए फंडिंग उपलब्ध कराना। दूसरा, एआई मॉडल बनाने और चलाने के लिए जरूरी जीपीयू क्लस्टर्स (GPU Clusters) और डाटा सेंटर (Data Centre) तैयार करने में मदद करना। इससे उन कंपनियों को फायदा मिल सकता है, जिन्हें शुरुआती दौर में बड़े निवेश की जरूरत होती है।

इस फंड में सरकार के साथ निजी निवेशकों को जोड़ने की योजना पर भी चर्चा हो रही है। एक प्रस्ताव के तहत सरकार और निजी निवेशक 50-50 हिस्सेदारी के साथ फंड में पैसा लगा सकते हैं। हालांकि, फंड का कुल आकार, निवेश का तरीका और सरकार की भूमिका अभी तय नहीं हुई है। वित्तीय संस्थानों को भी इसमें शामिल करने पर विचार किया जा रहा है।

यह प्रस्तावित फंड इंडिया एआई मिशन (India AI Mission) से अलग होगा, लेकिन उसे मजबूत करने में मदद कर सकता है। इंडिया एआई मिशन के लिए सरकार ने 10,372 करोड़ रुपये का खर्च मंजूर किया है। इसके तहत कंपनियों को कम कीमत पर कंप्यूटिंग सुविधा उपलब्ध कराने और देश में एआई क्षमता बढ़ाने पर काम किया जा रहा है।

नया फंड खास तौर पर बड़े एआई मॉडल बनाने वाली कंपनियों और बड़े कंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए लंबी अवधि की फंडिंग उपलब्ध कराने पर ध्यान देगा।

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Google Gemini का नया फीचर : सामान से लेकर टेबल बुकिंग तक AI करेगा कॉल

गूगल ने जेमिनी में ‘कॉल फॉर मी’ फीचर शुरू किया है। इसके जरिए एआई यूजर की तरफ से बिजनेस को फोन कर सामान, बुकिंग और अपॉइंटमेंट से जुड़े काम कर सकेगा।

Last Modified:
Friday, 25 September, 2026
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गूगल (Google) ने जेमिनी (Gemini) के लिए ‘कॉल फॉर मी’ (Call for Me) नाम का नया फीचर शुरू किया है। इसकी मदद से जेमिनी यूजर की तरफ से किसी बिजनेस (Business) को फोन कर सकेगा। शुरुआत में यह सुविधा अमेरिका में रहने वाले पिक्सल 11 (Pixel 11) यूजर्स के लिए उपलब्ध होगी, जो जेमिनी की पेड मेंबरशिप (Paid Membership) लेते हैं। इसके लिए एंड्रॉयड (Android) के गूगल फोन ऐप (Google Phone App) का बीटा वर्जन (Beta Version) भी जरूरी होगा।

गूगल फिलहाल इस फीचर को प्रयोग के तौर पर सीमित स्तर पर उपलब्ध करा रहा है। ‘कॉल फॉर मी’ की मदद से जेमिनी किसी दुकान पर फोन करके सामान उपलब्ध है या नहीं, इसकी जानकारी ले सकता है। इसके अलावा रेस्टोरेंट में टेबल बुक करने, अपॉइंटमेंट की तारीख बदलने या किसी सामान को कुछ समय के लिए रखने जैसे काम भी किए जा सकेंगे।

फोन कॉल के दौरान एआई अपना परिचय देगा, मेन्यू के विकल्प चुनेगा और जरूरत पड़ने पर होल्ड पर भी इंतजार करेगा। गूगल के मुताबिक, जरूरत पड़ने पर जेमिनी यूजर की मंजूर की गई निजी जानकारी भी फोन पर साझा कर सकेगा। इससे बिजनेस के साथ बातचीत के दौरान ज्यादा काम पूरा किया जा सकेगा।

कॉल शुरू होने के बाद यूजर बातचीत को लाइव ट्रांसक्रिप्ट (Live Transcript) के जरिए देख सकेंगे और जरूरत पड़ने पर कॉल को नियंत्रित भी कर सकेंगे। खास बात यह है कि फोन करने के लिए जेमिनी यूजर के अपने मोबाइल नंबर (Mobile Number) का इस्तेमाल करेगा।

गूगल का नया फीचर कंपनी की पहले से मौजूद एआई कॉलिंग (AI Calling) तकनीक पर आधारित है। इससे पहले कंपनी ‘कॉल फॉर मी’, ‘होल्ड फॉर मी’ (Hold for Me) और दूसरे फीचर भी दे चुकी है, जो फोन कॉल में मदद करते हैं।

कंपनी के मुताबिक, वास्तविक फोन बातचीत कई बार आसान नहीं होती और अलग-अलग स्थितियां सामने आ सकती हैं। इसी वजह से ‘कॉल फॉर मी’ को अभी छोटे स्तर पर शुरू किया गया है। बड़े स्तर पर उपलब्ध कराने से पहले फीचर में सुधार किया जाएगा।

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X पर आया नया X Number फीचर : बिना फोन नंबर शेयर किए करें चैट और कॉल

एलॉन मस्क के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर X Number फीचर आया है। इसके जरिए यूजर्स बिना फोन नंबर शेयर किए चैट, कॉल और वीडियो कॉल कर सकते हैं।

Last Modified:
Thursday, 24 September, 2026
xnumber

एलॉन मस्क (Elon Musk) के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर नया एक्स नंबर (X Number) फीचर आया है। इसकी मदद से यूजर्स बिना अपना फोन नंबर शेयर किए किसी से चैट (Chat), कॉल (Call) या वीडियो कॉल (Video Call) कर सकते हैं। खास बात यह है कि इसके लिए दोनों लोगों का एक-दूसरे को फॉलो करना भी जरूरी नहीं है।

कई बार लोग प्राइवेसी (Privacy) की वजह से किसी के साथ फोन नंबर शेयर नहीं करना चाहते। वहीं, कुछ मामलों में सामने वाले व्यक्ति को फॉलो किए बिना बातचीत करना चाहते हैं। ऐसे में एक्स नंबर फीचर उपयोगी हो सकता है।

एक्स नंबर कोई फोन नंबर नहीं है, बल्कि एक प्राइवेट कोड (Private Code) है। यूजर इस कोड को उस व्यक्ति के साथ शेयर कर सकता है, जिससे वह एक्स पर बात करना चाहता है। कोड शेयर करने के बाद दोनों लोग प्लेटफॉर्म पर चैट कर सकते हैं।

यह सुविधा केवल चैट तक सीमित नहीं है। यूजर्स एक्स पर कॉल और वीडियो कॉल भी कर सकते हैं। हालांकि, कॉल और वीडियो कॉल का विकल्प एक्स की प्राइवेसी सेटिंग्स (Privacy Settings) पर निर्भर करता है।

एक्स नंबर फीचर में प्राइवेसी को लेकर एक और सुविधा दी गई है। अगर यूजर अपने एक्स नंबर को रिफ्रेश करके नया कोड बनाता है, तो पुराना कोड काम करना बंद कर देता है। इसके बाद पुराने कोड के जरिए कोई व्यक्ति दोबारा संपर्क नहीं कर पाएगा।

इस तरह एक्स नंबर यूजर्स को अपना फोन नंबर निजी रखते हुए प्लेटफॉर्म पर चैट और कॉल करने की सुविधा देता है। यह एक प्राइवेट कोड है, जिसे यूजर अपनी जरूरत के मुताबिक शेयर और रिफ्रेश कर सकता है।

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गूगल बदलेगा सीएसएएम रिपोर्टिंग सिस्टम : भारतीय एजेंसियों को मिलेगी सीधी जानकारी

गूगल भारत से जुड़े बाल यौन शोषण सामग्री मामलों की रिपोर्टिंग व्यवस्था बदलने पर विचार कर रहा है। प्रस्ताव के तहत संबंधित जानकारी सीधे भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र को दी जाएगी।

Last Modified:
Tuesday, 22 September, 2026
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गूगल (Google) भारत से जुड़े चाइल्ड सेक्सुअल एब्यूज मटेरियल (Child Sexual Abuse Material) यानी सीएसएएम (CSAM) मामलों की रिपोर्टिंग व्यवस्था में बदलाव करने की तैयारी में है। रॉयटर्स (Reuters) की रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनी ऐसी व्यवस्था पर काम कर रही है जिसमें इन मामलों की जानकारी पहले अमेरिका स्थित मध्यस्थ के पास भेजने के बजाय सीधे भारतीय अधिकारियों को दी जा सके।

यह कदम मेटा (Meta) की ओर से पिछले सप्ताह उठाए गए इसी तरह के कदम के बाद सामने आया है। रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय सरकारी अधिकारियों ने बड़ी टेक्नोलॉजी कंपनियों से बच्चों से जुड़े मामलों में रिपोर्टिंग चेन (Reporting Chain) को छोटा करने की मांग की थी। दो भारतीय सरकारी सूत्रों ने मौजूदा व्यवस्था को लेकर चिंता जताई थी कि इससे स्थानीय कानून प्रवर्तन एजेंसियों की कार्रवाई में काफी देरी हो सकती है।

गूगल ने कहा है कि वह प्रस्तावित व्यवस्था को लेकर भारत सरकार के साथ चर्चा कर रहा है। कंपनी के प्रवक्ता ने कहा कि गूगल सीएसएएम का पता लगाने, उसे रोकने, हटाने और रिपोर्ट करने के लिए बड़े स्तर पर निवेश करता है। कंपनी के मुताबिक, प्रस्तावित व्यवस्था सरकार के साथ चल रही बातचीत का हिस्सा है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, गूगल ने सीएसएएम से जुड़े मामलों में संबंधित जानकारी इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (Indian Cyber Crime Coordination Centre) यानी आई4सी (I4C) के साथ साझा करने की व्यवस्था शुरू करने का प्रस्ताव दिया है। इससे भारतीय अधिकारियों को ऐसे मामलों में ज्यादा सीधा रिपोर्टिंग चैनल मिल सकेगा।

कई वर्षों से गूगल और मेटा संदिग्ध सीएसएएम मामलों के लिए इंटरनेशनल रिपोर्टिंग प्रोसेस (International Reporting Process) का इस्तेमाल करते रहे हैं। इसके तहत संदिग्ध सामग्री की जानकारी अमेरिका स्थित नेशनल सेंटर फॉर मिसिंग एंड एक्सप्लॉइटेड चिल्ड्रन (National Center for Missing & Exploited Children) यानी एनसीएमईसी (NCMEC) को भेजी जाती है।

एनसीएमईसी साइबरटिपलाइन (CyberTipline) संचालित करता है और संबंधित देशों की कानून प्रवर्तन एजेंसियों तक रिपोर्ट पहुंचाता है। भारतीय अधिकारियों का कहना है कि इस अतिरिक्त चरण में महत्वपूर्ण समय लग सकता है, खासकर उन मामलों में जहां किसी बच्चे को तत्काल खतरा हो और स्थानीय पुलिस को तेजी से कार्रवाई करने की जरूरत हो।

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