अजब दौर है। भारतीय पत्रकारिता का अंधकार युग। कब तक चलेगा? कोई नहीं जानता। विचार और निरपेक्ष-निर्भीक विश्लेषण की क्षमता खोते जाने का नतीजा क्या होगा।

राजेश बादल 5 years ago


लगातार दो दिन। दिल दहलाने वालीं वीभत्स और जघन्य तस्वीरें अखबारों के पन्नों पर छपीं। एक घटना राजस्थान की थी।

राजेश बादल 5 years ago


वरिष्ठ पत्रकार राजेश बादल ने उठाया सवाल, एक ही संस्थान में एक समाचार प्रसारण के कितने पैमाने हो सकते हैं?

राजेश बादल 6 years ago


अनुच्छेद 370 की विदाई कोई आसान काम नहीं था। कमोबेश हर दल इसके पक्ष में था, लेकिन सत्ता में रहते हुए उसे हटाने का साहस कोई नहीं कर पाया

राजेश बादल 6 years ago


इस माहौल में कुछ अखबारों, चैनलों और उनके एंकर्स-पत्रकारों ने जो भूमिका निभाई है, उनका तहे दिल से शुक्रिया और सलाम! चैनल की नीति के खिलाफ जाकर सच के साथ खड़ा होना कोई आसान नहीं है

राजेश बादल 6 years ago


अच्छी पत्रकारिता करने के लिए किसी तरह की प्रतिद्वंद्विता नहीं होती

राजेश बादल 6 years ago