डॉ. हरीश भल्ला और भी बहुत कुछ थे, बहुत कुछ करते थे, काफ़ी कुछ करना चाहते थे। सब कुछ दूसरों के लिए। अपने लिए न तो किसी सम्मान की मांग की और न किसी पुरस्कार के लिए संघर्ष किया।
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।। 1 year ago
1984 में हुए सिख दंगों के दौरान की गई उनकी आक्रामक रिपोर्टिंग से आलोक तोमर की एक ऐसी छवि बनी जो आज तक लोग याद रखते हैं।
समाचार4मीडिया ब्यूरो 2 years ago