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YouTube की नई AI पॉलिसी: क्रिएटर्स के लिए खतरा या मौका?

यदि आप यूट्यूब पर काम करते हैं या शुरुआत करने की सोच रहे हैं, तो AI का इस्तेमाल करें, लेकिन मददगार टूल की तरह, न कि मुख्य निर्माता की तरह।

Vikas Saxena 7 months ago

विकास सक्सेना, डिप्टी न्यूज एडिटर, समाचार4मीडिया ।।

यूट्यूब (YouTube) ने हाल ही में AI‑जनरेटेड कंटेंट को लेकर अपनी पॉलिसीज में बदलाव की घोषणा की है। जैसे-जैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का दखल वीडियो कंटेंट की स्क्रिप्ट, आवाज और विजुअल क्रिएशन में बढ़ रहा है, वैसे-वैसे यह सवाल भी गहराता जा रहा है कि जो कंटेंट हम देख रहे हैं वह असली है या AI से बना हुआ। इसी बढ़ती चिंता को देखते हुए YouTube ने तय किया कि अब प्लेटफॉर्म पर पारदर्शिता और ऑथेंटिसिटी को प्राथमिकता दी जाएगी।

AI कंटेंट पर क्या कहती है नई पॉलिसी

YouTube की नई पॉलिसी के अनुसार, यदि कोई वीडियो AI की मदद से बना है, चाहे वो AI से जनरेट की गई आवाज हो, चेहरा हो या स्क्रिप्ट, तो उसे स्पष्ट रूप से डिस्क्लोज करना जरूरी है। यानी यदि आप किसी का चेहरा या आवाज AI से बनाकर दिखा रहे हैं, तो आपको बताना पड़ेगा कि यह असली नहीं है। यदि आप ऐसा नहीं करते, तो YouTube उस वीडियो को डिमॉनेटाइज (कमाई बंद) कर सकता है, या फिर प्लेटफॉर्म से हटा भी सकता है।

AI से कंटेंट बनाना, आसान लेकिन जोखिम भरा

AI टूल्स ने वीडियो बनाना बेहद आसान बना दिया है। अब एक ही इंसान स्क्रिप्ट लिख सकता है, वॉइसओवर कर सकता है और वीडियो एडिटिंग भी AI से करा सकता है। लेकिन ऐसी क्रिएशन में असलीपन यानी ऑथेंटिसिटी की कमी हो जाती है। दर्शकों को भी लगने लगा है कि ये वीडियो रोबोट जैसे हैं, जिनमें न तो भाव होता है और न ही ह्यूमन टच।

क्रिएटर्स की बढ़ीं मुश्किलें

इस पालिसी के लागू होते ही सोशल मीडिया पर कई यूट्यूब क्रिएटर्स ने चिंता जताई है। कई छोटे चैनलों की कमाई अचानक बंद कर दी गई क्योंकि उनका कंटेंट "AI जनित" पाया गया। जिन क्रिएटर्स ने AI से स्क्रिप्ट बनवाई, आवाज डब करवाई या विजुअल्स जनरेट किए, उन्हें अब स्पष्टीकरण देना पड़ रहा है कि उन्होंने कहां और कैसे AI का उपयोग किया।

AI का दायरा और खतरे

आजकल कई यूट्यूब वीडियो ऐसे हैं जिनमें आवाज, आइडिया, विजुअल और यहां तक कि पूरी स्क्रिप्ट भी AI जनरेटेड होती है। इससे वीडियो बनाने में समय और पैसा दोनों की बचत होती है। लेकिन इससे एक समस्या भी खड़ी हो गई है और वह कंटेंट की विश्वसनीयता। कई बार लोग असली चेहरों और आवाजों को AI से बदलकर भ्रम फैलाते हैं, जिससे गलत सूचना (misinformation) का खतरा बढ़ता है।

जानिए, क्या है Google और YouTube की मंशा

YouTube इस बदलाव को एक सुरक्षा कवच की तरह देख रहा है। उसका कहना है कि वह क्रिएटर्स को पूरी छूट देता है कि वे AI का टूल की तरह इस्तेमाल करें- यानी रिसर्च, स्क्रिप्ट ड्राफ्टिंग या एडिटिंग में। लेकिन यदि आप AI को कंटेंट का मुख्य स्त्रोत बना देंगे, तो आपको बताना पड़ेगा। प्लेटफॉर्म की कोशिश है कि दर्शकों को साफ-साफ पता हो कि वह जो देख रहे हैं वह इंसानी दिमाग की रचना है या मशीन से निकला आउटपुट।

फायदा: टैलेंटेड क्रिएटर्स को बढ़ावा

इस पॉलिसी का एक सकारात्मक पहलू भी है। YouTube का कहना है कि जो क्रिएटर्स ओरिजिनल और ऑथेंटिक कंटेंट बनाएंगे, उन्हें ज्यादा प्रमोशन मिलेगा, ज्यादा व्यूज मिलेंगे और ज्यादा कमाई भी होगी। यानी जिनमें असली टैलेंट है और जो AI का इस्तेमाल सिर्फ सहायक टूल की तरह करते हैं, उनके लिए YouTube एक बेहतर प्लेटफॉर्म बनेगा।

क्या करें क्रिएटर्स?

AI का उपयोग गलत नहीं है, लेकिन पूरी तरह उस पर निर्भर रहना अब नुकसानदायक साबित हो सकता है। YouTube की पॉलिसी का मकसद क्रिएटर्स को डराना नहीं है, बल्कि दर्शकों को ईमानदार और पारदर्शी जानकारी देना है। जो लोग सच्चे दिल से क्रिएटिव कंटेंट बना रहे हैं, उनके लिए यह पॉलिसी एक मौका है, क्योंकि अब भीड़ में उनकी पहचान और निखरेगी।

यदि आप यूट्यूब पर काम करते हैं या शुरुआत करने की सोच रहे हैं, तो AI का इस्तेमाल करें, लेकिन मददगार टूल की तरह, न कि मुख्य निर्माता की तरह। और सबसे जरूरी बात यह कि जो भी AI का उपयोग करें, उसे ट्रांसपेरेंट रखें। यही आज की डिजिटल क्रिएटिव दुनिया का असली मंत्र है।


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