सरकार के खिलाफ सवाल पूछने पर महिला पत्रकार की पिटाई के 'सच' से उठा पर्दा

सच्चाई सामने आने पर कुछ सोशल साइट्स ने हटाईं मामले से जुड़ी पोस्ट

Last Modified:
Wednesday, 12 June, 2019
Nitika Journalist

सोशल मीडिया पर दिखाई देने वाली हर खबर सच नहीं होती, यह एक बार फिर साबित हो गया है। फेसबुक सहित कई सोशल साइट्स पर एक जख्मी महिला की तस्वीर वायरल हो रही है, जिसे मुंबई की वरिष्ठ पत्रकार नितिका राव बताया जा रहा है। फोटो में नजर आ रही महिला नितिका ही हैं, लेकिन उनके बारे में जो बातें कहीं गई हैं, उनका सच्चाई से कोई लेना-देना नहीं।

वायरल पोस्ट में कहा गया है कि नितिका एयरफोर्स के गायब एयरक्राफ्ट के विषय में सरकार से सवाल पूछने की गलती कर बैठीं, जिसके चलते उन पर प्राणघातक हमला हुआ जबकि हकीकत कुछ और ही है। बूमलाइव डॉट कॉम (www.boomlive.in) ने जब इस बारे में नितिका राव से बात की तो पूरा मामला ही पलट गया। नितिका ने सोशल मीडिया पर किये जा रहे दावों को सिरे से खारिज कर दिया।

नितिका ने बताया कि उन पर हमला सरकार से सवाल पूछने के चलते नहीं, बल्कि एक बिल्डर के खिलाफ आवाज उठाने की वजह से हुआ। दरअसल, नितिका ठाणे जिले के कल्याण में किसानों के हक के लिए लड़ाई लड़ रही हैं, जिस वजह से एक स्थानीय बिल्डर उनसे नाराज था और हमला उसी नाराजगी का परिणाम है।

बूम से बातचीत में नितिका राव ने कहा कि उन पर हुए हमले का सरकार से सवाल पूछने से कोई रिश्ता नहीं है। वह एक सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में किसानों के अधिकारों के लिए लड़ रही हैं, बतौर पत्रकार नहीं। इसलिए जो कुछ हुआ, उसके लिए बिल्डर जिम्मेदार है, कोई और नहीं।

9 जून से सोशल मीडिया पर घायल नितिका की तस्वीरें वायरल हो रही हैं। कहा जा रहा है कि सरकार से सवाल पूछने के चलते राइट विंग कार्यकर्ताओं ने उनके साथ मारपीट की। कई लोगों ने तो इसके लिए भाजपा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से दोषियों पर कार्रवाई करने की मांग तक कर डाली। इतना ही नहीं पंजाब एवं चंडीगढ़ पत्रकार संघ द्वारा भी नितिका से संबंधित फेसबुक पोस्ट की निंदा की गई। अब जब हकीकत सामने है, तो सभी खामोश हैं।

कुछ सोशल साइट्स से नितिका से जुड़ी पोस्ट भी हटा दी गई है। नितिका राव फ्रीलांस पत्रकार हैं और किसानों के अधिकारों के लिए भी काम करती हैं। इस खबर से एक बार फिर यह सीख मिलती है कि सोशल मीडिया पर वायरल होने वालीं ख़बरों पर आंख मूंदकर विश्वास नहीं करना चाहिए।

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मंत्रीजी के झूठ में ट्विटर ने नहीं दिया साथ, अब हो रही आलोचना

सोशल मीडिया के युग में नेताओं के लिए लोगों को बरगलाना अब इतना आसान नहीं रह गया है

by नीरज नैयर
Published - Monday, 24 June, 2019
Last Modified:
Monday, 24 June, 2019
Twitter

सियासत में वादाखिलाफी बहुत बड़ा जुर्म नहीं समझी जाती। नेता अक्सर वादे करते हैं और भूल जाते हैं, लेकिन सोशल मीडिया के युग में नेताओं के लिए भूलना अब इतना आसान नहीं रह गया है। राजस्थान के चिकित्सा मंत्री रघु शर्मा को भी यह समझ आ गया होगा।

दअअसल, मंत्रीजी ने हेल्थ ऑफिसर्स की भर्ती को लेकर अपने ट्विटर अकाउंट पर पहले कुछ कहा और फिर सार्वजनिक रूप से उससे मुकर गए, मगर मंत्रीजी यह भूल गए कि उनके इस ‘झूठ’ में ट्विटर उनका साथ नहीं देगा। जब ट्विटर खंगाला गया तो सामने आया कि जिसकी जानकारी होने से रघु शर्मा इनकार कर रहे हैं, उसी का जिक्र वह ट्विटर पर कर चुके हैं। अब ऐसे में मंत्रीजी की आलोचना तो स्वभाविक है। इस सच्चाई को सामने लाने का काम किया है राजस्थान पत्रिका ने। ‘पत्रिका’ के जयपुर संस्करण के फ्रंट पेज पर ‘हेल्थ मिशन: चिकित्सा मंत्री बोल रहे हैं झूठ, ट्विटर से सच उजागर’ शीर्षक तले प्रमुखता से इस खबर को पब्लिश किया गया है।

अखबार ने अपनी खबर में इस बात का जिक्र किया है कि चिकित्सा मंत्री ने 17 जून को ट्विटर पर बताया था कि हेल्थ ऑफिसर्स के 2500 पदों पर भर्ती की जानी है, लेकिन जब 21 जून को उनसे इस बारे में बात की गई तो उन्होंने जानकारी न होने का बहाना बनाया। यह बहाना बनाते वक़्त मंत्रीजी को शायद अहसास भी नहीं होगा कि सोशल मीडिया पर उनके सच-झूठ की कुंडली को खंगाला जा सकता है। राजस्थान पत्रिका के पत्रकार ने जैसे ही रघु शर्मा का ताजा बयान सुना, उन्होंने मंत्रीजी के पुराने ट्वीट तलाशने शुरू किये और यह सामने आ गया कि इसी विषय पर 17 जून को उन्होंने भर्ती की बात कही थी। इसके बाद एक पैकेज तैयार किया गया और फ्रंट पेज पर टॉप बॉक्स के रूप में चस्पा कर दिया गया।

अखबार से जुड़े चक्रेश महोबिया ने अपने ट्विटर अकाउंट पर इस न्यूज की क्लिपिंग पोस्ट की है। साथ ही उन्होंने मंत्री महोदय पर कटाक्ष भी किया है। चक्रेश ने लिखा है, ‘मंत्री साहेब! ऐसे ही नहीं कहा गया है-सत्यमेव जयते। ऐसे ही तो आपने ट्विटर-ट्विटर नहीं खेला होगा। किस सेहत की चिंता है आजकल सरकार को’! गौरतलब है कि चिकित्सा मंत्री रघु शर्मा उन नेताओं में शुमार हैं, जो सोशल मीडिया पर ज्यादा सक्रिय रहते हैं। रघु शर्मा हर छोटी-बड़ी बात को ट्वीट के रूप में अपने फॉलोअर्स के साथ साझा करना नहीं भूलते। अब उनका एक ट्वीट ही उनकी फजीहत का कारण बन गया है।

मंत्रीजी के झूठ के बारे में 'राजस्थान पत्रिका' में पब्लिश न्यूज को आप यहां देख सकते हैं-

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अंजना ओम कश्यप को लिखा डॉक्टर्स का ये खत हो रहा है वायरल

बिहार के मुजफ्फरपुर के हास्पिटल के आईसीयू में अंजना ओम कश्यप ने जिस तरह से रिपोर्टिंग की है

Last Modified:
Thursday, 20 June, 2019
anjana

बिहार के मुजफ्फरपुर के हास्पिटल के आईसीयू में अंजना ओम कश्यप ने जिस तरह से रिपोर्टिंग की है, उसे लेकर सोशल मीडिया पर लगातार बात हो रही है। कुछ उन्हें सही बता रहे है, तो कई ने उनकी रिपोर्टिंग स्टाइल को कठघरे में खड़ा किया है। 
ऐसे में अब मेडिकल फेटरनिटी द्वारा लिखित एक पत्र भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। फेसबुक पर बेहद सक्रिय डॉक्टर सुभाष शल्या ने ये पत्र शेयर किया है, जिसके बाद से लगातार लोग इस पर कमेंट कर रहे हैं। हम इस पत्र की सत्यता को प्रमाणित नहीं कर रहे हैं, बस इसमे उठे मुद्दों से आपको अवगत करा रहे हैं। 
आप ये पत्र नीचे पढ़ सकते हैं...
To
Anjana Om Kashyap
Aaj tak

Dt. 18.06.2019
Mrs. Kashyap 
You entered ICU with your shoes, camera, camera person, Mike, and all equipments did you care enough to change your clothes in protocol to ICU. 

Above it you shouted on doctor on duty for whom every life is precious. You must have came to Patna in flight , traveling to muzzafarpur via ac van but that doctor works day and night there with minimum standards. Did you care to ask questions to minister, MLA, MPs of that area.

No you won't ever bcz you all are filling your banks with their money. But that doctor reached at that point via merit and for him a life is life. We doc never ever kill patient intentionally. 
Do you know how much effort we put in to reach here? Cracking PMT among 15 lakhs candidate we qualify, reaching college we study day and night writing this letter i am sitting in library with my medicine book.

Then qualify pg entrance in which for 1.5 lakh 5000 gets qualified and you dare to ask our morality? Where are your morals when you journalist lick the foots of politicians?

We stand doing duty for continuously 24-36 hours on regular basis with a bare minimum salary of 50-60 k and you raisw questions about our character? 

You must thank your luck that on that day a doc like me wasn't on duty otherwise i would have made sure to throw you out of my ICU.

We are the backbone of medicine without facilities we treat we diagnose we bring people out of death so next time while questioning my morality look inside yours first. And if have problem ask govt to spend 10% of GDP on health, but no you can't do that bcz your media houses run bcz of government. 

If you want to debate come in open field we will have and make sure that day you leave aside the shield of journalism 

We were we are we will remain to be brightest brain bcz we know how to defeat death.
Singing off
On behalf of medical fraternity.
 

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आलोचनाओं से घिरीं अंजना ओम कश्यप ने यूं दिया जवाब

बिहार फ़िलहाल पत्रकारों के लिए एक्सक्लूसिव कवरेज करने और सिस्टम पर गुस्सा निकालने की वजह बना हुआ है

by नीरज नैयर
Published - Wednesday, 19 June, 2019
Last Modified:
Wednesday, 19 June, 2019
Anjana

बिहार फ़िलहाल पत्रकारों के लिए एक्सक्लूसिव कवरेज करने और सिस्टम पर गुस्सा निकालने की वजह बना हुआ है। तमाम टीवी चैनलों के पत्रकार मुजफ्फरपुर के श्रीकृष्ण सिंह मेडिकल कालेज अस्पताल का चक्कर लगाकर आ रहे हैं, जहाँ बच्चों का इलाज चल रहा है। 

आजतक की स्टार एंकर अंजना ओम कश्यप भी मंगलवार को अस्पताल पहुंची थीं। यहां उन्होंने न केवल पीड़ित परिवारों का दर्द दिखाया, बल्कि राज्य सरकार और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े किये। अपनी स्टोरी को मार्मिक रूप देने के लिए अंजना बोलते-बोलते इमोशनल भी हुईं, कई दफा उनका गला भी भर आया। यहां तक सबकुछ ठीक था, लेकिन इसके बाद जो हुआ, उसे लेकर सोशल मीडिया पर उन्हें जमकर निशाना बनाया जा रहा है। 

गौर करने वाली बात यह है कि निशाना बनाने वालों में कोई और नहीं बल्कि अंजना की बिरादरी के लोग यानी पत्रकार ही हैं। दरअसल, अंजना ने अपने सवाल-जवाब के लिए काफी देर तक ऑन ड्यूटी डॉक्टर को रोके रखा, उनसे बेहद तल्ख़ सवाल किये। वो शायद यह भूल गईं कि डॉक्टर के पास हर सवाल के जवाब नहीं हो सकते। फिर भी अंजना को अपने सवालों के जवाब मिले, मगर उनका गुस्सा कम नहीं हुआ। जैसे ही डॉक्टर स्ट्रेचर पर ले जाए जा रहे एक मरीज की ओर मुड़े उन्होंने अफसरी अंदाज़ में कहा ‘अब जाकर क्या करियेगा, अभी-अभी मुख्यमंत्री यहां से गए हैं, तब ये हाल है। अगर मैं माइक ऑन नहीं करती साहब, तो आप एक घंटे तक मरीज को मुड़कर नहीं देखते’। अंजना के इस अंदाज़ पर डॉक्टर भी खफा हो गए, उन्होंने भी गुस्से में कहा ‘क्या बात कर रहीं हैं आप, मैं राउंड पर था। क्या मैं यहां बैठा हूं’? इसके बाद भी अंजना अपने सवाल दागती रहीं। यही बात लोगों खासकर अन्य पत्रकारों को पसंद नहीं आ रही है।

वरिष्ठ पत्रकार सागरिका घोष ने अंजना ओम कश्यप के बारे में ट्वीट किया है ‘यह महिला लगातार पत्रकारिता को एक गलत नाम देती आ रही है। इन्हें आम नागरिकों को धमकाने और नेताओं की खुशामद करने के लिए पहचाना जाता है। बेहद निंदनीय’। 

इसी तरह, एनडीटीवी की पत्रकार कादम्बनी शर्मा ने लिखा है ‘ICU में जाकर नौटंकी एंकरिंग करने से,डॉक्टरों पर चिल्लाने से अगर बच्चे ठीक हो जाते तो यही दवाई लिखी जाती। ऐसी रिपोर्टिंग ग़लत और घटिया है’। वहीं, रोहणी सिंह ने डॉक्टर के साथ अंजना के दुर्व्यवहार के लिए आजतक से माफ़ी मांगने को कहा है। उन्होंने ट्वीट किया ‘मुझे लगता है कि @IndiaToday को अपनी स्टार रिपोर्टर द्वारा अस्पताल के डॉक्टरों के साथ किये गए बर्ताब के लिए माफी मांगनी चाहिए। पत्रकारों को इस तरह की आक्रामकता उन क्रिकेट प्रेमी नेताओं के लिए बचाकर रखनी चाहिए, जो अस्पताल की बुनियादी सुविधाओं के लिए जिम्मेदार हैं। क्या डॉक्टर और नर्स अपनी पूरी कोशिश नहीं कर रहे हैं’।

 अंजना पर निशाना साधने वालों में वरिष्ठ पत्रकार कंचन गुप्ता भी शामिल रहे। हालांकि, उन्होंने सीधे तौर पर अंजना का नाम नहीं लिया, लेकिन निशाने पर वही थीं। उन्होंने ट्वीट किया ‘उन डॉक्टरों को परेशान करना जो कई रातों से सोये भी नहीं हैं, न तो मीडिया की स्वतंत्रता के तहत आता है और न ही ये मीडिया का अधिकार है। इंडिया टुडे ग्रुप के पत्रकार को आईसीयू में घुसकर डॉक्टर के मुंह पर माइक लगाकर उन बातों के बारे में स्पष्टीकरण मांगते देखना जिसके उसका कोई नाता नहीं, बेहद दुखदाई है।’ 

इसी तरह लेखक और पूर्व पत्रकार Shubhrastha ने भी अंजना को खरी-खोटी सुनाई हैं। उन्होंने लिखा है ‘तुम्हें शर्म आनी चाहिए अंजना। जिस तरह तुमने अस्पताल के डॉक्टर और नर्सों के साथ व्यवहार किया वह देखकर मुझे बहुत गुस्सा आया। यह पत्रकारिता के मुंह पर तमाचे की तरह है।’ 

डॉक्टर कफील खान ने भी अंजना के अंदाज़ पर ऊँगली उठाई है। उन्होंने लिखा है ‘यह @aajtak @anjanaomkashyap रिपोर्टिंग है। इस तरह का मीडिया डॉक्टर के खिलाफ हिंसा को बढ़ावा देता है। क्या बुनियादी सुविधाएं प्रदान करना भी अब डॉक्टर की जिम्मेदारी है? डॉक्टर मरीज का अनुपात देखें? 100 मरीजों के भर्ती होने पर 1 डॉक्टर क्या कर सकता है’?

अपने ऊपर हो रहे लगातार हमलों का अंजना ने भी अब जवाब दिया है। हालांकि, उन्होंने यह स्पष्ट कर दिया है कि उन्हें आलोचनाओं की कोई परवाह नहीं और जो उन्होंने किया वह बार-बार करती रहेंगी। अंजना ने ट्वीट करके कहा है कि ‘अस्पताल में अप्रबंधन और बेरुखी का सच सामने लाना ज़रूरी था,है,रहेगा। ICU में आए बच्चों को अटेंडे करना ज़रूरी था,है,रहेगा। प्रोपोगेंडा वाले आज 108बच्चों की मौत भूल गए। डॉक्टर के लिए मगरमच्छी सहानुभूति दिखाने वालों, हेकलिंग का प्रपोगैंडा बंद करिए,फिर याद दिला दूँ-अब तक 108 बच्चों की मौत हो चुकी है।’ अब यहाँ कौन सही है और कौन नहीं यह बहस का मुद्दा हो सकता है, लेकिन इतना ज़रूर है कि अंजना को अफसरों की तरह पेश नहीं आना चाहिए था। पत्रकार सवाल कर सकता है, यह उसका अधिकार है, लेकिन सवाल पूछने की भी मर्यादा होती है। 

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टीवी पत्रकारों के ICU भ्रमण पर बरखा दत्त ने किया ये ट्वीट, मिला लोगों का समर्थन

क्या पत्रकारों की फौज अस्पताल का काम बढ़ा नहीं रही है? 

by नीरज नैयर
Published - Wednesday, 19 June, 2019
Last Modified:
Wednesday, 19 June, 2019
barkha

बिहार इस वक़्त चर्चा के केंद्र में है। राज्य के मुजफ्फरपुर में एक्यूट इंसेफलाइटिस सिंड्रोम (एईएस) यानी चमकी बुखार से अब तक 100 से ज्यादा बच्चों की जान जा चुकी है। लिहाजा मुजफ्फरपुर का वह श्रीकृष्ण सिंह मेडिकल कालेज अस्पताल मीडिया सेंटर बन गया है, जहां बीमार बच्चों का इलाज चल रहा है। हर पत्रकार कुछ एक्सक्लूसिव दिखाने की चाह में मरीजों से लेकर डॉक्टरों तक से सवाल-जवाब कर रहा है, यह सोचे बगैर कि इससे अस्पताल का कामकाज ही प्रभावित होगा। टीवी चैनलों के पत्रकार, कैमरामैन के साथ अस्पताल के हर कोने को स्कैन कर रहे हैं। मीडिया के इस अति उतावलेपन से अस्पताल प्रशासन नाराज़ है, लेकिन मीडिया को रोकने की हिम्मत कौन कर सकता है। इसमें कोई दोराय नहीं है कि श्रीकृष्ण सिंह मेडिकल कालेज अस्पताल में अव्यवस्थाओं का अंबार है और शायद यही वजह है कि बीमार बच्चे ठीक होने के बजाये दम तोड़ रहे हैं, लेकिन क्या पहले से हैरान-परेशान परिवार और डॉक्टरों के मुंह पर माइक लगाकर उन्हें सवाल-जवाब में उलझाना जायज है? क्या पत्रकारों की फौज अस्पताल का काम बढ़ा नहीं रही है? 

 इस मसले पर बाकी पत्रकारों की राय भले ही कुछ भी हो, लेकिन बरखा दत्त का मानना है कि अस्पताल में इस तरह मीडिया के जमावड़े से हालात सुधरने के बजाये बिगड़ेंगे। पत्रकारों के इस रुख पर बरखा ने ट्वीट के माध्यम से नाराज़गी जताई है। उन्होंने लिखा है ‘अस्पताल, उपचार क्षेत्र और यहां तक की आईसीयू में आई पत्रकारों की बाढ़ वास्तव में असहज करने वाली है। बच्चे मर रहे हैं और पत्रकार आक्रामकता के साथ खुद को दूसरे से बेहतर साबित करने में लगे हैं। ये पत्रकार पहले से ही काम के बोझ तले दबे डॉक्टरों की परेशानियाँ ही बढ़ा रहे हैं। स्टोरी बताने का एक बेहतर तरीका भी होता है’। 

बरखा के इस ट्वीट को सोशल मीडिया यूजर्स का अच्छा समर्थन मिल रहा है। अधिकांश का मानना है कि ऐसे वक़्त में डॉक्टरों को उनका काम करने देना चाहिए। तनुप्रिया नामक एक यूजर ने लिखा है ‘मैं बरखा से सहमत हूं, इस समय चूहा दौड़ यानी प्रतिस्पर्धा की ज़रूरत नहीं है। एक्सक्लूसिव न्यूज़ के नाम पर अस्पताल में सर्कस करने से अच्छा है कि केवल ज़िम्मेदार लोगों से सवाल पूछे जाएं।’

 गौरतलब है कि पिछले हफ्ते से टीवी9 भारतवर्ष के कंसल्टिंग एडिटर अजीत अंजुम वहां डेरा डाले हुए है और लगातार स्थानीय प्रशासन की लापरवाही पर सवाल उठा रहे हैं। मंगलवार को आजतक की स्टार रिपोर्टर अंजना ओम कश्यप भी मुजफ्फरपुर के श्रीकृष्ण सिंह मेडिकल कालेज अस्पताल पहुंची थीं और उन्होंने जनरल वार्ड के बीचों-बीच खड़े होकर राज्य सरकार को खूब खरी-खोटी सुनाई थी। उन्होंने दाखिल बच्चों और उनके परिजनों को बार-बार कैमरे पर दिखाया, इतना ही नहीं उन्होंने अस्पताल के वरिष्ठ डॉक्टर से भी तीखे सवाल किये। यह सिलसिला कई मिनटों तक चला, फिर चैनल पर ब्रेक हो गया और ब्रेक पर जाने से पहले अंजना डॉक्टर से यह कहना नहीं भूलीं कि आप कहीं जाइएगा नहीं, अभी आपसे और कई सवाल पूछने हैं। यानी जब तक ब्रेक ख़त्म नहीं हो गया, डॉक्टर बाकी सभी काम छोड़कर अंजना के सवालों के जवाब देने के लिए वहीं खड़े रहे। मीडिया के इसी रुख पर बरखा दत्ता और सोशल मीडिया यूजर्स नाराज़गी जता रहे हैं।
 

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न्यूज एंकर चित्रा त्रिपाठी ने सवाल क्या पूछा, पूरी पार्टी ही पीछे पड़ गई

चित्रा को सोशल मीडिया पर लगातार निशाना बनाया जा रहा है

Last Modified:
Tuesday, 18 June, 2019
Chitra Tripathi

बिहार में 100 से ज्यादा बच्चों की मौत ने पूरे देश को हिला रखा है। सोशल मीडिया पर भी इसे लेकर चर्चा है और राज्य सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाये जा रहे हैं। हालांकि, इतने संवेदनशील मामले में भी राजनीति जोरो पर है जिसका खामियाजा उन पत्रकारों को भी उठाना पड़ रहा है, जो सिर्फ बदहाल व्यवस्था के लिए ज़िम्मेदारों को कठघरे में खड़ा कर रहे हैं। इनमें चित्रा त्रिपाठी भी शामिल हैं। 

चित्रा को सोशल मीडिया पर लगातार निशाना बनाया जा रहा है। निशाना बनाने वाले इस बात से खफा हैं कि चित्रा केवल राज्य सरकार पर सवाल उठा रहीं हैं केंद्र सरकार पर नहीं। इस ट्रोलिंग की शुरुआत तब हुई जब चित्रा ने बच्चों की मौत पर दुःख व्यक्त करते हुए कुछ ट्वीट किये। उन्होंने लिखा कि ‘बिहार में ना सत्ता पक्ष-ना विपक्ष है। चुनाव में 39 सीटें पाकर #सत्ता नशे में है @RJDforIndia को एक भी नहीं मिली तो पार्टी गर्मी की छुट्टी मना रही है @ichiragpaswan की पार्टी का कहना है बीमारी लाइलाज है सच-गरीबों को वोट मानने वाले नेता संवेदनहीनता की पराकाष्ठा पार कर चुके हैं।’ 

चित्रा के इस ट्वीट पर राजद नेता अलोक कुमार मेहता ने प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए लिखा ‘@chitraaum जी, विपक्ष गर्मी छुट्टी नहीं मना रहा है बल्कि इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना पर कार्रवाई कर रहा है, जरूरत है तो आप पत्रकार बिरादरी से कि आप ऐसे मामलों पर हमारा साथ दे!! मुजफ्फरपुर बालिका गृह की घटना पर मीडिया के रुख को देख लें’? 

इसके बाद राजद के आधिकारिक ट्विटर हैंडल से भी ट्वीट किया गया, जिसमें कहा गया कि तीन दिन पहले @RJDforIndia ने प्रदेश अध्यक्ष के नेतृत्व में एक शिष्टमंडल मुज़फ़्फ़रपुर भेजा था। शिष्टमंडल अपनी रिपोर्ट पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को सौंपेगा। आगे के कार्यक्रम भी तय है। राजद आरोप-प्रत्यारोप से बच पीड़ित परिजनों की संवेदना का ख़्याल रख सकारात्मक राजनीति कर रहा है’। इन जवाबी ट्वीट के बाद चित्रा ने एक ऐसा सवाल पूछा जो राजद समर्थकों को भीतर तक चुभ गया। उन्होंने पूछा कि पूर्व डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव कहां हैं?
    
तेजस्वी यादव का नाम उछलते ही रमेश यादव नामक राजद समर्थक ने चित्रा त्रिपाठी पर हमले शुरू कर दिए। उसने अपने पहले ट्वीट में लिखा ‘बेशर्म दलाल मीडिया 2 सौ ज्यादा बच्चे मरे है सवाल @narendramodi से पूछना चाहिये, पांच साल आपका आयुष्मान योजना गया कहां, सवाल सरकार से पूछना चाहिये तो दलाली मीडिया विपक्ष से पूछ रहा है? @chitraaum @ModiLeDubega।’ 

जिसका चित्रा ने माकूल जवाब दिया। उन्होंने कहा ‘यादव जी,एक तो मुझे टैग करते समय भाषा की मर्यादा रखें। दूसरा किससे सवाल करना है और किससे नहीं ये मुझे तय करने दें। मेरे ट्वीट पढ़े, ऐसा नहीं है कि सवाल सिर्फ RJD से था। बेशर्म और दलाल आपके घर में बोली जाने वाली भाषा होगी। अपनी मां बहन से कहियेगा ऐसे,मुझसे नहीं।’ 

चित्रा इतने पर ही शांत नहीं हुईं, उन्होंने अपने दूसरे ट्वीट में लिखा ‘और हां,@yadavtejashwi के साथ फोटो लगायें हैं तो थोड़ा उनसे सीख लीजिये कि बोलते समय क्या ध्यान रखते हैं। नेता के साथ फोटो खींचा कर चापलूसी नहीं करते, थोड़ा उसकी अच्छाइयों को सीखते भी हैं।’


हालांकि, बात यहीं ख़त्म नहीं हुई। इस बार गुरप्रीत वालिया नामक यूजर ने रमेश यादव के एजेंडे को आगे बढ़ाते हुए लिखा ‘वाह @yadavtejashwi कहा है ये तो पूछ लिया मोदी जी कहां है? अब तक आए क्यू नही? कब आएंगे? एक भी ट्वीट किया क्या अब तक? ये ना पूछा गया तुमसे, मीडिया के हाल देखो, बुरे दिनों में भी विपक्ष से अधिक सवाल करते है सत्ता की बजाए।’ 

जिसके जवाब में चित्रा ने गुरप्रीत की फोटो को आधार बनाते हुए कटाक्ष किया। उन्होंने कहा ‘शीशे के सामने खड़े होकर सेल्फी खिंचने से फुर्सत मिल जाये तो मेरे ट्वीट पढ़ लेना।’ गुरप्रीत के बाद राजद के राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉक्टर नवल किशोर ने चित्रा त्रिपाठी पर हमला बोला। उनके अल्फाज थे ‘चाटुकारिता की हर सीमा इसी जन्म में लाँघने की कसम खा ली है क्या??? कुछ हिम्मत उधार ले लीजिए सता से सवाल पूछने के लिए। पत्रकारी जीवन ऐसे ही बर्बाद न कीजिए’। जिस पर चित्रा का जवाब रहा ‘डॉ नवल किशोर, अच्छा लगा ट्वीट पढ़कर। मुझे नहीं पता आप किस चीज के लिये डॉक्टर लगाते हैं,लेकिन मरीजों का इलाज करने वाले हैं तो जाकर मासूमों को बचाइये मुजफ्फरपुर में। ट्विटर पर आपकी गाली मैं खा लूंगी, इससे भी घटिया बोलेंगे सुन लूंगी,लेकिन पहले बच्चों को बचाइये मुजफ्फरपुर जाइये।’


चित्रा त्रिपाठी ने भी शायद यह नहीं सोचा होगा कि उन्हें एक के बाद एक इस तरह नेताओं और समर्थकों के हमले झेलने होंगे। राजद नेता शैलेश कुमार ने भी चित्रा को टैग करते हुए ट्वीट किया ‘आप भूल गयी कि बिहार में सबसे ज़्यादा विधायक एनडीए गठबंधन के है। 99% लोकसभा सांसद NDA गठबंधन के है। क्या आपने @SushilModi PM @narendramodi से सवाल पूछा? हिम्मत नहीं है क्योंकि नौकरी चली जाएगी? पक्षकार पत्रकार विपक्ष को लोकतंत्र ना सिखाए’। 

इसके बाद उन्होंने दूसरे ट्वीट में लिखा ‘PM @narendramodi, स्वास्थ्य मंत्री @drharshvardhan, @AmitShahOffice को टैग करने में डर लग रहा है ना? मोदी जी ने अभी तक संवेदना भी प्रकट नहीं की है। अपना पुश्तैनी ज्ञान ज़रा उधर भी बाँट दिजीए। डरिए ना, लोकतंत्र है। सत्ता से सवाल करिए।’ जिसके जवाब में चित्रा ने कहा ‘आज तो पूरी @RJDforIndia आ गई है मुझे कोसने के लिये। ये एक जुटता बच्चों की जान बचाने के लिये दिखाईये साहब। काहे के नेता हैं आप? 2014 में MP थे? और इतनी निर्लज्जता? जनता जितायेगी तभी! 80 विधायक तो आपके भी हैं ना? उनको किसने चुना था? इसी जनता ने। अगले साल फिर चुनाव है ध्यान रखियेगा। बहुत ज्यादा डरी हुई हूं। घर से निकल भी नहीं पा रही। बोलना तो छोड़ दीजिये, कैसे MP रहे हैं आप भई, हैरान हूं।’

हालांकि, हमले और जवाबी हमले का सिलसिला यहीं ख़त्म नहीं हुआ। राजद समर्थक और नेता चित्रा को निशाना बनाते रहे और वह बखूबी उसका सामना करती रहीं।

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टीम इंडिया को जीत की बधाई देना मंत्रीजी को पड़ा भारी

बिहार के साथ-साथ देश भर में 100 मासूमों की मौत की चर्चा है, लेकिन चूँकि यह मामला बिहार का है

Last Modified:
Monday, 17 June, 2019

 

बिहार के साथ-साथ देश भर में 100 मासूमों की मौत की चर्चा है, लेकिन चूँकि यह मामला बिहार का है इसलिए स्थानीय प्रशासन और सरकार से संवेदनशील होने की अपेक्षा ज्यादा की जाती है। यही वजह है कि जब राज्य सरकार के स्वास्थ्य मंत्री ने वर्ल्ड कप में पाकिस्तान को मात देने के लिए भारतीय टीम की तारीफ की, तो लोगों को यह पसंद नहीं आया। ऐसा नहीं है कि स्वास्थ्य मंत्री को निशाना बनाने वालों को टीम इंडिया की जीत से ख़ुशी नहीं पहुंची, लेकिन उनकी नज़र में मंत्रीजी को जीत का जश्न मनाने से पहले बदहाल स्वास्थ्य सेवाओं पर ध्यान देने की ज़रूरत है। गौरतलब है कि बिहार के मुजफ्फरपुर में एक्यूट इंसेफलाइटिस सिंड्रोम (एईएस) के चलते 100 से ज्यादा बच्चों की मौत हो गई है।

16 जून को भारत बनाम पाकिस्तान मैच पर हर किसी की निगाहें टिकी हुई थीं। लोग सारे काम भूलकर टीवी से चिपके रहे। जैसे ही मैच के परिणाम की घोषणा हुई देशभर में जश्न मनने लगा। सोशल मीडिया पर भी बधाई संदेशों की बाढ़ आ गई। इस बाढ़ में बिहार के स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडे का ट्वीट भी शामिल था, जिसके बाद उनकी आलोचना होने लगी। दरअसल, भारत की जीत पर अपनी ख़ुशी बयां करते हुए स्वास्थ्य मंत्री ने लिखा, ‘पाकिस्तान को धूल चटाने पर टीम इंडिया के सभी सदस्यों को हार्दिक बधाई व आगामी मुक़ाबलों के लिए शुभकामनाएं!’ मंत्रीजी के इस ट्वीट पर आजतक के पत्रकार आशुतोष मिश्रा ने अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा ‘100 से ज्यादा बच्चों की मौत की बधाई किसे? इतना ध्यान अस्पतालों पर क्यों नहीं? इसके बाद जो जैसे स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडे को निशाने बनाने की होड़ लग गई। एक के बाद एक यूजर्स अपनी नाराज़गी जताने लगे।

पत्रकार स्वाति चतुर्वेदी ने लिखा ‘जानकर ख़ुशी हुई कि आप रोमांचित हुए, लेकिन आप उस एक्यूट इंसेफलाइटिस सिंड्रोम से निपटने के लिए क्या कर रहे हैं, जिसके चलते 100 बच्चों की मौत हो गई।’ इसके साथ ही स्वाति ने मुख्यमंत्री नितीश कुमार को टैग करते हुए लिखा कि आपके स्वास्थ्य मंत्री क्रिकेट के बारे में ट्वीट करने में व्यस्त हैं।
  
 इसी तरह एक अन्य यूजर ने लिखा ‘ये बिहार के निर्लज्ज स्वास्थय मंत्री हैं। जितनी दिलचस्पी ये मैच में दिखा रहे हैं अगर उतनी दिलचस्पी उस काम में दिखाते जिसके लिए जनता ने इन्हें चुना है, तो मुज्जफरपुर से कुछ अच्छी ख़बरें आ रही होती। वहीं आशुतोष महंत नामक यूजर ने ट्वीट किया ‘150 बच्चे मर गए हैं और आप यहां बधाई दे रहे हैं, आप बिहार के स्वास्थ्य मंत्री है या मौत के सौदागर।’

 

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फेसबुक दे रही है पैसे कमाने का सुनहरा मौका, करना होगा सिर्फ ये काम

सिर्फ 18 साल या उससे अधिक की उम्र वाले ही उठा सकेंगे इस स्कीम का लाभ

Last Modified:
Thursday, 13 June, 2019
Facebook

सोशल मीडिया क्षेत्र की दिग्गज कंपनी ‘फेसबुक’ अपने यूजर्स के लिए नया रिसर्च ऐप लेकर आई है। 'स्टडी बाई फेसबुक' (Study By Facebook) नाम के इस ऐप की घोषणा फेसबुक ने मंगलवार को की है। यह ऐप यूजर्स के फोन पर नजर रखेगा कि वह किस ऐप पर कितना समय बिता रहा है। जो यूजर्स इस ऐप को डाउनलोड कर अपने फोन को ट्रैक करने की अनुमति देंगे, उन्हें फेसबुक की ओर से पैसे दिए जाएंगे। फेसबुक का यह भी कहना है कि इस ऐप को वही यूजर्स डाउनलोड कर सकेंगे, जिनकी उम्र 18 साल या उससे ज्यादा होगी। यानी नाबालिग इस ऐप को डाउनलोड नहीं कर सकेंगे।

फेसबुक की ओर से कहा गया है कि शुरुआती दौर में यह ऐप सिर्फ अमेरिका और भारत में उपलब्ध होगा और सोशल मीडिया पर इस ऐप को प्रमोट किया जाएगा। इस ऐप को डाउनलोड करने के लिए साइनअप करना होगा। जांच के बाद फेसबुक यूजर्स को इस ऐप को डाउनलोड करने के लिए इनवाइट करेगा। इसके साथ ही फेसबुक ने यह भी स्पष्ट किया है कि यूजर्स के डाटा की सेफ्टी का पूरा ध्यान रखा जाएगा और इसके लिए सभी जरूरी कदम उठाए जाएंगे। इस प्रोग्राम के तहत यूजर्स का कम से कम डाटा लिया जाएगा और ऐप के कंटेंट से किसी प्रकार का डेटा नहीं लिया जाएगा।

दरअसल कंपनी का मानना है कि मार्केट रिसर्च में यह ऐप काफी काम आता है, क्योंकि इससे यूजर्स की पसंद का पता लगाया जा सकता है और इसके बाद कंपनी को उसी की पसंद की चीजें डिलीवर करने में आसानी रहती है। हालांकि कंपनी की ओर से अभी यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि अपनी जानकारी शेयर करने पर यूजर्स को कितने पैसे दिए जाएगे। हालांकि, पिछली बार जब फेसबुक ने इसी तरह का प्रोग्राम शुरू किया था तो यूजर्स को 20 डॉलर प्रति माह दिए गए थे।

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जानें, क्यों क्रिकेट वर्ल्ड कप नहीं दिखा पाएंगी कई वेबसाइट्स, रेडियो और इंटरनेट चैनल्स

चार सितंबर तक दिल्ली हाई कोर्ट में दाखिल करना होगा अपना जवाब

Last Modified:
Tuesday, 11 June, 2019
Websites

दिल्ली हाई कोर्ट ने एक बड़ा निर्णय लेते हुए 60 वेबसाइट्स और कुछ रेडियो स्टेशनों को क्रिकेट विश्व कप 2019 की लाइव स्ट्रीमिंग करने से रोक दिया है। चैनल-2 ग्रुप कॉरपोरेशन की याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने सोमवार को अंतरिम आदेश के तहत यह रोक लगाई है। ऐसे में कोर्ट के इस फैसले से स्ट्रीमिंग के जरिये फ्री में मैच देखने और सुनने वाले क्रिकेट प्रशंसकों को झटका लग सकता है। चैनल-2 ग्रुप कॉरपोरेशन की ओर से दायर याचिका में दावा किया गया है कि 30 मई से 14 जुलाई तक हो रहे विश्व कप के ऑडियो कवरेज के अधिकार उसके पास हैं।

इस याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति जेआर मिढ़ा की बेंच ने इन 60 वेबसाइट्स, 14 रेडियो चैनल्स और लगभग 30 इंटरनेट और दूरसंचार सेवा प्रदाताओं और केंद्र को नोटिस जारी कर चार सितंबर तक अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। हाई कोर्ट ने कुछ दिन पहले अपने अंतरिम आदेश में गूगल जैसे सर्च इंजनों, एयरटेल और वोडाफोन जैसे इंटरनेट और दूरसंचार सेवा प्रदाताओं को नियमों का उल्लंघन करने वाली वेबसाइट्स के लिंक हटाने या बंद करने का निर्देश दिया था, जहां क्रिकेट विश्व कप का ऑडियो कवरेज अनधिकृत रूप से उपलब्ध है।

बेंच का यह भी कहना था, ‘तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए याचिकाकर्ता के हित में एकपक्षीय आदेश जारी करना जरूरी है। याचिकाकर्ता ने विश्व कप 2019 के आयोजक आईसीसी बिजनेस कॉरपोरेशन के साथ ऑडियो अधिकार समझौता किया था।‘ चैनल-2 समूह के वकील जयंत मेहता और सुभालक्ष्मी सेन ने हाई कोर्ट में दायर याचिका में कहा था कि ये प्लेटफॉर्म चैनल-2 से अधिकृत नहीं हैं और न ही चैनल ने इन्हें क्रिकेट वर्ल्ड कप के ऑडियो और रेडियो प्रसारण का लाइसेंस दिया है। इसके साथ ही उनका यह भी कहना था कि चैनल-2 ग्रुप के पास इस तरह के ऑडियो और रेडियो प्रसारण का अधिकार है।

वकील की दलील को सही मानते हुए कोर्ट ने अपने आदेश में कहा, 'बचाव पक्ष, उनके साझेदार, उनके अधिकारी, कर्मचारी, एजेंट्स और प्रतिनिधित्व, फ्रेंचाइजी और सभी को आईसीसी विश्व कप-2019 की ऑडियो और रेडियो कवरेज से रोका जाता है।' हालांकि, ऐसी वेबसाइट्स और रेडियो स्टेशनों को थोड़ी राहत देते हुए अदालत का यह भी कहना था, 'इस अंतरिम आदेश में शामिल कोई भी बचाव पक्ष 15 मिनट के अंतर के साथ स्कोर बता सकता है।‘ उल्लेखनीय है कि क्रिकेट वर्ल्ड कप 30 मई से इंग्लैंड में चल रहा है और 14 जुलाई तक चलेगा।

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जानें, खबरों के बाजार में किस तरह दोनों हाथों से पैसे बटोर रहा है Google

न्यूयॉर्क टाइम्स में छपी रिपोर्ट पर गूगल ने नहीं दी है कोई प्रतिक्रिया

Last Modified:
Monday, 10 June, 2019
Google

मीडिया और पत्रकारों के लिए समय कुछ खास अच्छा नहीं चल रहा है। कई छोटे-बड़े अखबार बंद हो चुके हैं और सैकड़ों मीडियाकर्मियों की नौकरी जा चुकी है। लेकिन खबरों के इस बाजार में गूगल दोनों हाथों से पैसे बंटोर रहा है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले साल यानी 2018 में गूगल ने ‘सर्च’ और ‘गूगल न्यूज’ से जितनी कमाई की, वह पूरी अमेरिकी न्यूज मीडिया की कमाई के लगभग बराबर है।

न्यूयॉर्क टाइम्स में ‘न्यूज मीडिया एलायन्स’ (एमएनए) के आंकड़ों के आधार पर प्रकाशित रिपोर्ट बताती है कि 2018 में गूगल को 4.7 अरब डॉलर की आय हुई, जबकि यूएस न्यूज इंडस्ट्री ने डिजिटल एडवर्टाइजिंग से 5.1 अरब डॉलर कमाए। एनएमए अमेरिका के 2,000 से भी ज्यादा अखबारों का प्रतिनिधित्व करने वाली संस्था है।

एनएमए के अध्यक्ष एवं मुख्य कार्यकारी डेविड शेवर्न का कहना है कि जिन पत्रकारों ने यह कंटेट (न्यूज) तैयार किया, उन्हें 4.7 अरब डॉलर का कुछ हिस्सा मिलना चाहिए। उनका यह भी कहना है कि इस अनुमान में गूगल की उस आय का मूल्य नहीं जोड़ा गया है, जो उसे किसी उपभोक्ता के लेख को पसंद या क्लिक करने से हर बार जुटाई जाने वाली निजी जानकारी से होती है। यदि इसे भी शामिल किया जाए तो कमाई का आंकड़ा काफी आगे पहुंच जाएगा। वहीं, गूगल ने इस रिपोर्ट पर कोई प्रतिक्रिया व्यक्त नहीं की है।

आज के समय में गूगल के ट्रेंडिंग प्रश्नों पर लगभग 40 प्रतिशत क्लिक्स खबरों के लिए होते हैं, जिन्हें कंपनी खुद तैयार नहीं करती। यानी एक तरह से देखा जाए तो गूगल पत्रकारों या मीडिया प्रतिष्ठानों के काम से अपनी जेब भर रहा है। गूगल और फेसबुक समाचार के वितरण को नियंत्रित करते हैं और बाहरी ट्रैफिक का 80 प्रतिशत इन दो कंपनियों के माध्यम से विभिन्न समाचार वेबसाइटों तक पहुंचाया जाता है।

न्यूयॉर्क मैगजीन के अनुसार, अमेरिका में 2004 से लेकर अब तक कई स्थानीय अखबार बंद हो चुके हैं और 2008 से 2017 तक न्यूज रूम के रोजगार में 23 प्रतिशत की गिरावट आई है। इसी तरह भारत में भी मीडिया के हाल अच्छे नहीं हैं। कुछ संस्थान बंद हो गए हैं तो कुछ अपने स्टाफ में लगातार कमी कर रहे हैं।

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सोशल मीडिया में बयानबाजी करने पर तीन कांग्रेसी मुश्किल में

अपना पक्ष रखने के लिए तीनों को दिया गया 15 दिन का समय

Last Modified:
Saturday, 01 June, 2019
Congress

सोशल मीडिया पर बयानबाजी करने के लिए कांग्रेस के तीन पदाधिकारियों को निलंबित कर दिया है। उन पर हिमाचल कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं के खिलाफ सोशल मीडिया पर टिप्पणी करने का आरोप है। जिन पदाधिकारियों को निलंबित किया गया है, उनमें नादौन से विवेक कटोच, पांवटा से अजगर अली और ऊना से अजय जगोता के नाम शामिल हैं।

बताया जाता है कि निलंबित किए गए तीनों पदाधिकारियों को अपना पक्ष रखने के लिए अब 15 दिन का समय दिया गया है। 15 दिन के भीतर इन तीनों पदाधिकारियों का जवाब मिलने के बाद इस दिशा में आगे की कार्रवाई की जाएगी।

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