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मिलिंद खांडेकर से जानें, क्या भारत में बदल जाएगा ऑनलाइन शॉपिंग का भविष्य?

मिलिंद खांडेकर 'टीवी टुडे नेटवर्क' के 'तक चैनल्स' के मैनेजिंग एडिटर है और हर रविवार सोशल मीडिया पर उनका साप्ताहिक न्यूज़लेटर 'हिसाब किताब' प्रकाशित होता है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो 2 years ago

वरिष्ठ पत्रकार मिलिंद खांडेकर 'टीवी टुडे नेटवर्क' के 'तक चैनल्स' के मैनेजिंग एडिटर है और हर रविवार सोशल मीडिया पर उनका साप्ताहिक न्यूजलेटर 'हिसाब किताब' प्रकाशित होता है। इस सप्ताह  मिलिंद खांडेकर ने ONDC यानी कि Open Network for Digital Commerce को लेकर अपनी बात कही है। उन्होंने लिखा, ONDC की बड़ी चर्चा है। चर्चा में होने का कारण है Zomato या Swiggy से सस्ता खाना मिलना, Uber या Ola को किराए में टक्कर देने की तैयारी करना। ये ऑनलाइन शॉपिंग में UPI की तरह क्रांति करना चाहता है।

ONDC का फुल फॉर्म है Open Network for Digital Commerce. ONDC नॉट फ़ॉर प्रॉफिट कंपनी है। SBI, HDFC जैसे कई बैंक इसके शेयर होल्डर हैं और इस कंपनी के पीछे भारत सरकार है। इंफोसिस के चेयरमैन नंदन नीलकेणी इस प्रोजेक्ट पर काम कर रहे हैं। उन्होंने ही आधार कार्ड को बनाया। इसकी बुनियाद पर आज सरकार की सारी स्कीम चलती है। ऑनलाइन लेनदेन और सर्विस में मदद मिलती है। लोगों की पहचान आसान हो गई है, आधार के साथ साथ मोबाइल फोन ने चीजें आसान कर दी।

ऑनलाइन पेमेंट इसमें अगली कड़ी थी। सरकार ऑनलाइन शॉपिंग में वैसी ही क्रांति करना चाहती है जैसे UPI यानी Unified Payment Interface से हुई है।  UPI से पहले तक आप Paytm से पैसे उस व्यक्ति को ही भेज सकते थे जिसके पास Paytm हो। अब आप UPI के जरिए Paytm से Phone Pe या किसी और अकाउंट में पैसे भेज सकते हैं। UPI को भारत सरकार ने नेशनल पेमेंट कॉरपोरेशन के जरिए खड़ा किया है। इससे ऑनलाइन पेमेंट को बढ़ावा मिला। ONDC चाहता है कि अगर आपका Amazon का अकाउंट है और आप Flipkart पर कोई सामान खरीदना चाहते हैं, तो कोई बाधा नहीं आना चाहिए।

अलग-अलग App डाउनलोड करने या अकाउंट बनाने की झंझट नहीं हो। इससे ऑनलाइन शॉपिंग आसान होगी। आसान होगी तो ऑनलाइन शॉपिंग कारोबार बढ़ेगा। भारत में इंटरनेट यूजर्स तो 84 करोड़ हैं, लेकिन ऑनलाइन लेनदेन 16 से 19 करोड़ लोग करते हैं यानी 100 लोगों के पास इंटरनेट है तो 20-25 लोग ही ऑनलाइन लेन देन करते हैं, जबकि चीन में यही आंकड़ा 80-85 है यानी भारत में स्कोप बहुत है।

ONDC ये काम कर पाएं इसके लिए जरूरी है कि Amazon, Uber, Zomoto या Swiggy जैसी कंपनियां इस प्लेटफॉर्म पर आए। सवाल है कि ये कंपनियां अपना जमा जमाया धंधा छोड़ कर यहां क्यों आएगी? ये प्लेटफॉर्म ऑनलाइन मॉल की तरह है। Zomoto तय करता है कि इस मॉल में कौन खाना बेचेगा? उसे इस मॉल के मालिक यानी Zomoto को किराए के तौर पर कमीशन देना पड़ता है। ग्राहक को भी वही खाना मिलता है जो यहां मौजूद है। इस मॉल के सामने वाले मॉल Swiggy से खरीदने के लिए वहां जाना पड़ेगा। अब ये मॉल ONDC पर चला जाएगा तो इनका मुनाफा कम हो जाएगा। ये कंपनियां वहां तभी जा सकती है जब ONDC बहुत बड़ा हो जाएगा।

ONDC ने इसका तोड़ निकाला है अपने प्लेटफॉर्म पर नए नए App लॉन्च कर जैसे Namma Yatri , ये बेंगलुरु में रिक्शा के लिए है। इसमें Uber या Ola की तरह बिचौलिया नहीं हैं। रिक्शा वाला सवारी से सीधे बात कर रहा है। Phone Pe ने Pin Code लॉन्च किया है, ये किराने का सामान या खाना डिलीवरी करता है।  Paytm पर भी आप ONDC के जरिए खाना ऑर्डर कर सकते हैं। यहां ग्राहक और रेस्टोरेंट का सीधा संपर्क है, रेस्टोरेन्ट को किसी को कमीशन नहीं देना है, इसलिए वो सस्ता बेच सकता है। डिलीवरी का काम थर्ड पार्टी करती है, यहां खाना या सामान सस्ते होने की वजह ये भी है कि ONDC अपनी जेब से डिस्काउंट दे रहा है।

ये लंबे समय तक चल नहीं सकता है क्योंकि ये डिस्काउंट वो अपने शेयर होल्डर के पैसे से दे रहा है। अभी यह कह पाना मुश्किल है कि ONDC बड़ी-बड़ी कंपनियों को कितनी टक्कर दे सकेगी या UPI जैसी क्रांति ला देगी, इतना जरूर कहा जा सकता है इंटरनेट पर शॉपिंग का चलन बढ़ने में मदद मिलेगी। ONDC का लक्ष्य है पांच साल में 90 करोड़ लोगों को ऑनलाइन शॉपिंग के दायरे में लाना और ऐसा हुआ तो इंडिया सचमुच डिजिटल हो जाएगा।

(यह लेखक के निजी विचार हैं। लेखक 'टीवी टुडे ग्रुप' में कार्यरत हैं। यह लेख मिलिंद खांडेकर के ट्विटर प्रोफाइल से लिया गया है। आप इस ट्वीट को यहां देख सकते हैं और लेखक को फॉलो कर सकते हैं )

 


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