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जाति जनगणना कराने का फैसला सोची समझी रणनीति: अखिलेश शर्मा
जाति जनगणना कराने का फैसला केंद्र सरकार द्वारा जल्दबाजी में लिया गया फैसला नहीं है। सूत्रों के अनुसार सरकार ये फैसला कई फैक्टर्स को ध्यान में रखते हुए लिया है।
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।। 9 months ago
केंद्र सरकार ने जाति जनगणना कराने का फैसला किया है। इससे आरक्षण के मामले में कुछ बदलाव हो सकते हैं, क्योंकि कोर्ट ने कहा है कि रिजर्वेशन को सही ठहराने के लिए सरकार को आंकड़े पेश करने होंगे। इस बीच वरिष्ठ पत्रकार अखिलेश शर्मा का मानना है कि जाति जनगणना कराने का फैसला मोदी सरकार की सोची समझी रणनीति का परिणाम है।
उन्होंने एक्स पर लिखा, जाति जनगणना कराने का फैसला केंद्र सरकार द्वारा जल्दबाजी में लिया गया फैसला नहीं बल्कि एक सोची समझी रणनीति का हिस्सा है। सूत्रों के अनुसार सरकार ये फैसला कई फैक्टर्स को ध्यान में रखते हुए लिया है। आला सरकारी सूत्रों से एनडीटीवी को मिली जानकारी के अनुसार 2029 में महिला आरक्षण लागू करना, बिहार विधान सभा चुनाव में संदेश देना, मुस्लिम समुदाय में पिछड़ों की पहचान करना और विपक्ष के हाथ से मुद्दा छीनना भी सरकार का मकसद है।
बताया जा रहा है कि सरकार ने ये फैसला परिसीमन को ध्यान में रख कर भी किया है। सरकार जाति जनगणना के फैसले से पहलगाम आतंकी हमले से ध्यान हटाना कोशिश नहीं कर रही है। आपको बता दें, 1992 में इंदिरा साहनी केस में सुप्रीम कोर्ट के नौ जजों की बेंच ने अपने फैसले में कहा था कि आरक्षण 50% से ज्यादा नहीं होना चाहिए। तब से, कई राज्यों और केंद्र सरकार ने ऐसे कानून बनाए जिनमें आरक्षण 50% से ज्यादा था।
जाति जनगणना कराने का फैसला केंद्र सरकार द्वारा जल्दबाजी में लिया गया फैसला नहीं बल्कि एक सोची समझी रणनीति का हिस्सा है. सूत्रों को अनुसार सरकार ये फैसला कई फैक्टर्स को ध्यान में रखते हुए लिया है. आला सरकारी सूत्रों से एनडीटीवी को मिली जानकारी के अनुसार 2029 में महिला आरक्षण लागू…
— Akhilesh Sharma (@akhileshsharma1) May 2, 2025
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