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बाबा रामदेव को सुप्रीम कोर्ट की फटकार, राजीव सचान ने पूछा ये बड़ा सवाल
दरअसल सुप्रीम कोर्ट ने नवंबर 2023 में ही पतंजलि को आदेश दिया था कि वह भ्रामक दावे करने वाले विज्ञापनों को वापस ले। यदि ऐसा नहीं किया गया तो फिर हम ऐक्शन लेंगे।
समाचार4मीडिया ब्यूरो 1 year ago
सुप्रीम कोर्ट ने भ्रामक विज्ञापन मामले में पतंजलि को गंभीर नतीजे भुगतने के लिए तैयार रहने को कहा। साथ ही फाउंडर बाबा रामदेव और बालकृष्ण के एफिडेविट पर रवैये को लेकर भी नाराजगी जताई। कोर्ट ने रामदेव और बालकृष्ण को कोर्ट के आदेश को हल्के में ना लेने की चेतावनी दी। दोनों को एफिडेविट भरने के लिए आखिरी मौका दिया है। मामले में 10 अप्रैल को सुनवाई होगी।
इस मुद्दे पर वरिष्ठ पत्रकार राजीव सचान ने अपने सोशल मीडिया हैंडल 'एक्स' से एक पोस्ट की और अपनी राय व्यक्त की। उन्होंने लिखा, रामदेव के प्रति सुप्रीम कोर्ट की नाराजगी उचित ही है, लेकिन अपने उत्पाद को लेकर बढ़- चढ़ कर और जनता को भरमाने वाले विज्ञापन वही नहीं दे रहे थे।
यह काम न जाने कितनी कंपनियां कर रही हैं। क्या कोला,जूस, सौंदर्य सामग्री, हेयर ऑयल, टूथपेस्ट, डियोड्रेंट आदि के विज्ञापन जैसा दावा करते हैं, वैसा सच में होता है? क्या खांसी, जुकाम, जोड़ों का दर्द, थकान आदि मिनटों में छू मंतर करने वाले उत्पादों के विज्ञापन भ्रामक नहीं? क्या इलायची के नाम पर पान मसाले बेचना सही है? क्या शर्तिया इलाज के विज्ञापन सुप्रीम कोर्ट ने नहीं देखे हैं?
आपको बता दे, दरअसल सुप्रीम कोर्ट ने नवंबर 2023 में ही पतंजलि को आदेश दिया था कि वह भ्रामक दावे करने वाले विज्ञापनों को वापस ले। यदि ऐसा नहीं किया गया तो फिर हम ऐक्शन लेंगे। ऐसी स्थिति में पतंजलि के हर गलत विज्ञापन पर 1 करोड़ रुपये का फाइन लगाया जाएगा।
रामदेव के प्रति सुप्रीम कोर्ट की नाराजगी उचित ही है, लेकिन अपने उत्पाद को लेकर बढ़- चढ़ कर और जनता को भरमाने वाले विज्ञापन वही नहीं दे रहे थे। यह काम न जाने कितनी कंपनियां कर रही हैं।
— Rajeev Sachan (@RajeevKSachan) April 2, 2024
- क्या कोला,जूस, सौंदर्य सामग्री, हेयर ऑयल, टूथपेस्ट, डियोड्रेंट आदि के विज्ञापन जैसा दावा करते…
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