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रामदेव को दंडित करे पर बेवजह गर्जन-तर्जन न करे सुप्रीम कोर्ट: राजीव सचान
न्यायमूर्ति हिमा कोहली और न्यायमूर्ति ए अमानुल्लाह की पीठ ने मामले में केंद्र की प्रतिक्रिया पर भी असंतोष व्यक्त किया।
समाचार4मीडिया ब्यूरो 1 year ago
सुप्रीम कोर्ट ने भ्रामक विज्ञापन मामले में योग गुरु रामदेव और पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड के प्रबंध निदेशक (एमडी) आचार्य बालकृष्ण द्वारा बिना शर्त माफी मांगने के लिए दायर किए गए हलफनामों को स्वीकार करने से साफ इनकार कर दिया। इस दौरान कोर्ट ने कहा कि उन्होंने माफीनामा तब भेजा है, जब उनकी गलती पकड़ ली गई है।
इस मामले पर वरिष्ठ पत्रकार राजीव सचान ने अपने सोशल मीडिया हैंडल 'एक्स' पर एक पोस्ट की और अपनी राय व्यक्त की। उन्होंने लिखा, 'यदि रामदेव सुप्रीम कोर्ट को गुमराह करने और उसे हल्के में लेने के दोषी हैं तो वह उन्हें दंडित करे, लेकिन बेवजह गर्जन- तर्जन न करे।
इसके साथ ही यह भी याद रखे कि सुप्रीम कोर्ट पर 'कीचड़ उछालने' और उसकी 'गरिमा को चोट पहुंचाने' के दोषी पाए जाने के बाद भी जब प्रशांत भूषण ने माफी मांगने से इंकार कर दिया था तो वह उन्हें उनकी 'गंभीर गलती' के लिए सबक सिखाने के नाम पर उन पर महज 1 रुपया का जुर्माना लगा पाया था, जिसे चुकाने के लिए 15 दिन की मोहलत भी दी गई थी।'
आपको बता दें कि न्यायमूर्ति हिमा कोहली और न्यायमूर्ति ए अमानुल्लाह की पीठ ने मामले में केंद्र की प्रतिक्रिया पर भी असंतोष व्यक्त किया। इसके अलावा, शीर्ष अदालत ने कंपनी के संस्थापकों के साथ 'हाथ मिलाने' के लिए राज्य सरकार के अधिकारियों को भी फटकार लगाई।
यदि रामदेव सुप्रीम कोर्ट को गुमराह करने और उसे हल्के में लेने के दोषी हैं तो वह उन्हें दंडित करे, लेकिन बेवजह गर्जन- तर्जन न करे। इसके साथ ही यह भी याद रखे कि सुप्रीम कोर्ट पर "कीचड़ उछालने" और उसकी "गरिमा को चोट पहुंचाने " के दोषी पाए जाने के बाद भी जब प्रशांत भूषण ने माफी… https://t.co/rORwFBzjf3
— Rajeev Sachan (@RajeevKSachan) April 10, 2024
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