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राष्ट्रपति पर सुप्रीम कोर्ट सख्त : अवधेश कुमार ने कही ये बड़ी बात
कोर्ट ने उल्लेख किया कि सरकारिया आयोग ने इस विषय की ओर संकेत किया था और सिफारिश की थी कि अनुच्छेद 201 के अंतर्गत संदर्भों के शीघ्र निस्तारण के लिए निश्चित समयसीमा हो।
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।। 10 months ago
राज्य विधानसभाओं के विधेयकों पर राज्यपालों को कार्रवाई के लिए समयसीमा तय करते हुए, सुप्रीम कोर्ट ने पहली बार निर्देश दिया कि राष्ट्रपति को ऐसे विधेयकों पर, राज्यपालों से प्राप्त होने की तारीख से तीन महीने के भीतर फैसला लेना होगा। इस मसले पर वरिष्ठ पत्रकार अवधेश कुमार ने अपने सोशल मीडिया हैंडल पर एक पोस्ट की और अपनी राय व्यक्त की।
उन्होंने एक्स हैंडल पर लिखा, जो सुप्रीम कोर्ट स्वयं वर्षों तक मामले लटकाए रखता है और फैसला नहीं देता है वह राज्यपाल तो छोड़िए राष्ट्रपति को आदेश दे रहा है कि आप विधेयकों पर 3 महीने में फैसला कर दीजिए। दो माननीय न्यायाधीशों जेबी पार्डीवाला और आर महादेवन ने ऐसा करते हुए संसदीय लोकतंत्र में निहित लक्ष्मण रेखा को लांघा है, अपने अधिकारों का अतिक्रमण किया है।
अगर सुप्रीम कोर्ट विधेयकों को मंजूरी देने लगे तो फिर राज्यपाल और राष्ट्रपति की आवश्यकता ही नहीं रहेगी। सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों को यदि उच्चतम न्यायालय की सर्वोच्चता का भान कराना है तो राष्ट्रपति के भी सर्वोच्चता गरिमा का ध्यान रखना चाहिए। यह उन विधेयकों में ऐसा क्या है जिसके लिए राज्यपाल ने राष्ट्रपति तक के पास भेजा?
आपको बता दें, सुप्रीम कोर्ट ने, तमिलनाडु के राज्यपाल आर. एन. रवि द्वारा 10 विधेयकों को राष्ट्रपति के विचारार्थ सुरक्षित रखने की कार्रवाई को अवैध और त्रुटिपूर्ण ठहराया है। जबकि वे विधेयक पहले ही राज्य विधानसभा द्वारा पुनर्विचारित किए जा चुके थे।
जो सुप्रीम कोर्ट स्वयं वर्षों तक मामले लटकाए रखता है और फैसला नहीं देता है वह राज्यपाल तो छोड़िए राष्ट्रपति को आदेश दे रहा है कि आप विधेयकों पर 3 महीने में फैसला कर दीजिए। दो माननीय न्यायाधीशों जेबी पार्डीवाला और आर महादेवन ने ऐसा करते हुए संसदीय लोकतंत्र में निहित लक्ष्मण रेखा…
— Awadhesh Kumar (@Awadheshkum) April 13, 2025
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