जानें, क्यों वरिष्ठ पत्रकार ने जम्मू-कश्मीर पर सरकार से कहा-दोबारा सोचिए

कहा, यह पदावनति फायदे से ज्यादा नुकसान करेगी। कर रही है। नागरिक इससे बहुत आहत हैं और बने रहेंगे।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by समाचार4मीडिया ब्यूरो
Published - Wednesday, 07 August, 2019
Last Modified:
Wednesday, 07 August, 2019
Jammu-Kashmir

देश के बड़े पत्रकारों में शुमार राहुल देव नियमित तौर पर अहम विषयों पर टीवी और सोशल मीडिया पर अपनी राय रखते हैं।  कश्मीर में अनुच्छेद 370 की समाप्ति और जम्मू-कश्मीर व लद्दाख को यूनियन टेरिटरी बनाने के मोदी सरकार के फैसले के दो दिन बाद उन्होंने काफी सोच समझकर सरकार से निवेदन किया है कि वे इस अहम विषय पर एक बार दोबारा जरूर सोचें।

बुधवार को अपने एक ट्वीट के जरिए राहुल देव ने कहा कि जम्मू-कश्मीर को पूर्ण प्रदेश से केन्द्र शासित प्रदेश बनाने के निर्णय पर पुनर्विचार करना चाहिए। यह पदावनति फायदे से ज्यादा नुकसान करेगी। कर रही है। नागरिक इससे बहुत आहत हैं और बने रहेंगे।

इससे पहले मंगलवार को राहुल देव ने कांग्रेस को आड़े हाथ लेते हुए एक तीखा ट्वीट भी किया था, जिसे आप नीचे देख सकते हैं-

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मैगसायसाय अवार्ड विजेता का इंटरव्यू लेना पत्रकार को पड़ा 'भारी'

मैगसायसाय पुरस्कार विजेता संदीप पांडेय की प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान हुए इस वाकये को पत्रकार ने अपने फेसबुक पेज पर बयां किया है

Last Modified:
Monday, 19 August, 2019
Shah Alam

कश्मीर पर प्रेस कॉन्फ्रेंस करने अयोध्या पहुंचे मैगसायसाय पुरस्कार विजेता संदीप पांडेय को पुलिस ने हिरासत में लिया है। कुछ दिनों पहले ही उन्हें घर पर भी नजरबंद रखा गया था। यही नहीं, संदीप का इंटरव्यू करने पहुंचे पत्रकार शाह आलम को भी पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है।

अयोद्य़ा निवासी और प्रेस क्लब के सदस्य शाह आलम ने इस बात की जानकारी अपने फेसबुक पेज के जरिए दी है। उन्होंने फेसबुक पर लिखा, ‘संदीप पाण्डेय के इंटरव्यू के दौरान उन्हें पुलिस ने पकड़ लिया।’

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पाकिस्तान के पत्रकार की ये खरी-खरी जरूर एक बार सुनिए

कश्मीर की अनुच्छेद 370 से आजादी के बाद से पाकिस्तान बौखला गया है। कभी वो भारत से रिश्ते तोड़ने की बात करता है तो कभी गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी देता है

नीरज नैयर by नीरज नैयर
Published - Monday, 19 August, 2019
Last Modified:
Monday, 19 August, 2019
Journalist

कल्पना कीजिये कि आप किसी के सामने शेखी बघार रहे हैं, अपनी पीठ थपथपा रहे हैं, अपने साहस और पराक्रम की कहानियां गढ़ रहे हैं और आपका कोई अपना ही आपकी असलियत बयां कर दे? पाकिस्तान भी फिलहाल ऐसी ही स्थिति से गुजर रहा है।

फर्क बस इतना है कि इस वाकये के बाद आप शायद मुंह नीचे कर, शर्मिंदगी का भाव लेकर वहां से चले जाएं, लेकिन पाकिस्तान अब भी बेशर्मों सा खड़ा है। वैसे इसे बेशर्मी के सटीक उदाहरण के तौर पर भी देखा जा सकता है। कश्मीर की अनुच्छेद 370 से आजादी के बाद से पाकिस्तान बौखला गया है। कभी वो भारत से रिश्ते तोड़ने की बात करता है तो कभी गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी देता है।

हालांकि, वह खुद भी जानता है कि इससे कुछ होने वाला नहीं है। लेकिन फिर भी उसके नेता और मीडिया का एक वर्ग शेखी बघार रहा है। पाकिस्तान की नई-नवेली टीवी एंकर भी हमें डराने में लगी हैं। ये बात अलग है कि उनकी एंकरिंग देखकर डर से ज्यादा हंसी आती है और शायद अकेले में वह खुद भी हंसती होंगी।

इस शेखी बघार गैंग के बीच एक शख्स ऐसा भी है जो पाकिस्तान को उसी स्थिति में पहुंचा रहा है, जहां आप होते यदि आप कल्पना करते। उस शख्स का नाम है वरिष्ठ पत्रकार और पॉलिटिकल एनालिस्ट हसन निसार। वैसे, निसार पहले भी पाक को शर्मिंदगी वाली स्थिति में धकेल चुके हैं, लेकिन पाक तो बेशर्म ठहरा, बाज कहां आता है।

इन दिनों निसार का एक विडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें वह ‘कश्मीर पर अड़ी’ पाकिस्तानी हुकूमत को आईना दिखा रहे हैं। गायक अदनान सामी ने इस विडियो को अपने ट्विटर हैंडल पर शेयर किया है, जिसे देखने और अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करने वालों की तादाद लगातार बढ़ रही है।

दरअसल, एक टीवी शो में पाकिस्तानी एंकर ने हसन निसार से पूछा था...तो क्या कश्मीर छोड़ दें? इसका निसार ने जो जवाब दिया, उसने शेखी बघार रहे पाक नेताओं को मुंह छिपाने पर मजबूर कर दिया, लेकिन केवल चंद सेकंड के लिए, क्योंकि पाकिस्तान तो बेशर्म ठहरा।

उन्होंने कहा, ‘बेहद दिलचस्प बात है। ईस्ट पाकिस्तान आपके पास था, कश्मीर तो लेना है। किस से लेना है, कैसे लेना है, बस हवा में तलवारें चला रहे हो और जो था हम उसे नहीं संभाल सके। बांग्लादेश भी आपसे बेहतर है, उनकी करेंसी डॉलर के मुकाबले रुपए से बेहतर है, आबादी उन्होंने कंट्रोल कर ली। आपसे जान छुड़ाकर वो आपसे ज्यादा बेहतर हैं, आप वो नहीं संभाल सके, किस मुंह से बात करते हो? कश्मीर लेना है, क्या करना है लेकर? आपसे कराची नहीं संभाला जा रहा, आपसे बलूचिस्तान नहीं संभल रहा, होश करें ये लोग। जो है उसे तो संभाल लो।’

इस दौरान एंकर साहिबा ने कश्मीर पर अपनी पाकिस्तानी इच्छा प्रकट करने का कई बार प्रयास किया, लेकिन सफल नहीं हो सकीं। आप भी पूरा विडियो यहां देख सकते हैं:

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और डूब गई पत्रकारिता

वरिष्ठ पत्रकार विनोद कापड़ी ने एक विडियो शेयर करते हुए ऐसा लिखा है। ये विडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by समाचार4मीडिया ब्यूरो
Published - Wednesday, 14 August, 2019
Last Modified:
Wednesday, 14 August, 2019
journalism1

न्यूज चैनल के रिपोर्टर लगातार रिपोर्टिंग को लेकर नए नए तरीके के प्रयोग करते रहते हैं। ऐसा ही एक प्रयोग बैंगलुरु के कन्नड़ न्यूज चैनल BTVNEWS की एक महिला रिपोर्टर ने किया है। बाढ़ की कवरेज के दौरान रिपोर्टर किस तरह डूबते हुए दिखाया गया है ये पत्रकारिता की अतिशयोक्ति है। वरिष्ठ पत्रकार विनोद कापड़ी ने ये विडियो शेयर करते हुए लिखा है-और डूब गई पत्रकारिता। ये विडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

देखें विडियो-

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अपनी तारीफ सुनने के बाद मणिशंकर अय्यर का ऐसा 'रिएक्शन' हुआ वायरल

ईटीवी भारत के संपादक राकेश त्रिपाठी ने कांग्रेसी नेता मणिशंकर अय्यर का एक इंटरव्यू लिया है, जिसका एक हिस्सा सोशल मीडिया पर वायरल हो या है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by समाचार4मीडिया ब्यूरो
Published - Wednesday, 14 August, 2019
Last Modified:
Wednesday, 14 August, 2019
manishankar aiyar

कांग्रेसी नेता मणिशंकर अय्यर एक बार फिर निशाने पर आ गए हैं। हालिया मामला ईटीवी भारत के साथ उनके एक इंटरव्यू का है। इस इंटरव्यू में जब पत्रकार राकेश त्रिपाठी ने उनसे एक सवाल किया, तो मणिशंकर अय्यर उखड़ गए। इसके बाद जब पत्रकार ने उनकी तारीफ करते हुए उन्हें मनीषी बताया तो उसके बाद उन्होंने जिस तरह की प्रतिक्रिया दी, वे अजीब-ओ-गरीब थी। उनकी ये प्रतिक्रिया सोशल मीडिया पर वायरल हो गई है। मीडिया जानकार प्रसून शुक्ला समेत कई पत्रकारोें ने ये विडियो सोशल मीडिया पर शेयर करते हुए मणिशंकर अय्यर पर निशान साधा है। 

देखें वो विडियो जो वायरल हुआ है...

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पत्रकार प्रशांत कनौजिया फिर कर बैठे 'आपत्तिजनक' ट्वीट, क्राइम ब्रांच तक पहुंचा मामला

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ आपत्तिजनक पोस्ट के मामले में पूर्व में हो चुकी है गिरफ्तारी, सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद छूटे थे जेल से

पंकज शर्मा by पंकज शर्मा
Published - Monday, 12 August, 2019
Last Modified:
Monday, 12 August, 2019
Prashant-Kanojia

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ आपत्तिजनक पोस्ट करके सुर्खियों में आए पत्रकार प्रशांत कनौजिया एक बार फिर नए विवाद में फंस गये हैं। इस बार प्रशांत कनौजिया ने सोशल मीडिया पर एक विवादित फोटो शेयर किया है। इस फोटो में उन्होंने कश्मीर मामले पर भारतीय सेनाध्यक्ष जनरल बिपिन रावत की तुलना जनरल डायर से की है। अपने ट्वीट में उन्होंने एक तरफ जनरल बिपिन रावत तो दूसरी ओर जनरल डायर की फोटो लगाई है। प्रशांत के इस कदम की काफी आलोचना हो रही है।

इस मामले में वाराणसी के अधिवक्ता सौरभ तिवारी की शिकायत पर संज्ञान लेते हुए एसएसपी आनंद कुलकर्णी ने जांच क्राइम ब्रांच को सौंपी है। वहीं प्रशांत के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता आलोक श्रीवास्तव ने दिल्ली पुलिस कमिश्नर को पत्र लिख कर अपनी शिकायत दर्ज कराई है।

हालांकि, अपने इस ट्वीट को लेकर विवाद बढ़ने के बाद प्रशांत कनौजिया ने अपने ट्विटर अकाउंट से यह ट्वीट हटा दिया है। प्रशांत कनौजिया के ट्विटर अकाउंट से किए गए इस ट्वीट का स्क्रीन शॉट आप यहां देख सकते हैं।

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अब कंटेंट के लिए लाखों का भुगतान कर सकती है फेसबुक, पढ़ें ये रिपोर्ट

सोशल मीडिया क्षेत्र की दिग्गज कंपनी ‘फेसबुक’ समेत कई बड़ी कंपनियों पर पब्लिशर्स का कंटेंट मुफ्त में इस्तेमाल करने के आरोप लगते रहते हैं

समाचार4मीडिया ब्यूरो by समाचार4मीडिया ब्यूरो
Published - Saturday, 10 August, 2019
Last Modified:
Saturday, 10 August, 2019
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सोशल मीडिया क्षेत्र की दिग्गज कंपनी ‘फेसबुक’ समेत कई बड़ी कंपनियों पर पब्लिशर्स का कंटेंट मुफ्त में इस्तेमाल करने के आरोप लगते रहते हैं। अब खबर है कि ऐसे कंटेंट को अपनी साइट पर पब्लिश करने के लिए न्यूज पब्लिशर्स को फेसबुक लाखों डॉलर्स का भुगतान करने की पेशकश कर रही है।

अंग्रेजी अखबार ‘द वॉल स्ट्रीट जर्नल’ ( The Wall Street Journal) की एक खबर के मुताबिक, स्टोरी, हेडलाइंस और इसी तरह के अन्य मैटीरियल को पब्लिश करने की अनुमति देने के लिए फेसबुक सालाना तीन मिलियन डॉलर तक का भुगतान कर सकती है। इस मामले से जुड़े सूत्रों की मानें तो फेसबुक ने स्टोरीज का लाइसेंस हासिल करने के लिए न्यूज संस्थानों से भुगतान की बात की थी।

हालांकि इन खबरों पर फेसबुक ने किसी भी तरह की प्रतिक्रिया देने से इनकार कर दिया है, लेकिन यह बताया है कि कंपनी अपनी सर्विस के लिए ‘न्यूज टैब’ (news tab) की लॉन्चिंग पर काम कर रही है। इसी साल अप्रैल में फेसबुक के सीईओ मार्क जुकरबर्ग ने अपनी सेवाओं में 'न्यूज सेक्शन' पर बात की शुरुआत की थी।

जर्नल में यह नहीं बताया है कि फेसबुक की ओर से तीन मिलियन डॉलर के भुगतान की पेशकश किसी खास पब्लिशर के लिए अथवा सभी समाचार संस्थानों के लिए की गई थी। इस रिपोर्ट में ‘द वॉशिंगटन पोस्ट’ (The Washington Post) अखबार का भी जिक्र था, जिससे फेसबुक ने संपर्क किया था। हालांकि, अखबार ने इस बारे में कुछ भी कहने से इनकार कर दिया है।

इस बारे में ‘द वॉल स्ट्रीट जर्नल’ अखबार में छपी रिपोर्ट को आप यहां क्लिक कर देख सकते हैं।

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राहुल को लेकर सुखबीर बादल के मुंह से निकल गया कुछ ऐसा, लगने लगे ठहाके

1984 के सिख दंगों पर संसद में अपनी बात रख रहे थे शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर बादल

समाचार4मीडिया ब्यूरो by समाचार4मीडिया ब्यूरो
Published - Thursday, 08 August, 2019
Last Modified:
Thursday, 08 August, 2019
Rahul Gandhi

लोकसभा चुनाव से पहले जब राहुल गांधी से पूछा जाता था कि ‘क्या आप प्रधानमंत्री बनना चाहते हैं? तो वह अपनी मुस्कराहट से अपनी इच्छा बयां कर दिया करते थे, लेकिन चुनाव परिणामों ने उनकी हंसी छीन ली। हालांकि, पीएम की कुर्सी पर बैठने की उनकी हसरत कायम है और हो भी क्यों न आखिर वह देश की दूसरी सबसे बड़ी पार्टी के नेता हैं।

इस हसरत की एक झलक चंद रोज पहले संसद में उस वक्त देखने को मिली, जब शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल एक बड़ी गलती कर बैठे। बादल ने जैसे ही भूलवश प्राइम मिनिस्टर राहुल गांधी कहा, गहन सोच-विचार में बैठे राहुल की निगाहें सीधी उन पर जाकर टिक गईं। इस बीच उनकी वह मुस्कराहट भी देखने को मिली, जिसे चुनाव में मिली हार ने बादलों की तरह ढक लिया था। अब चूंकि गलती बड़ी थी और राहुल का नाम एक ऐसी घटना से जोड़ा जा रहा था जो वह शायद कभी देखना नहीं चाहेंगे, लिहाजा वह तुरंत ही गंभीर हो गए। ये बात अलग है कि उनकी इस गंभीरता का सदन में ठहाके लगा रहे सदस्यों पर कोई असर नहीं पड़ा।

दरअसल, हुआ यूं कि सुखबीर बादल सदन में 1984 के सिख दंगों पर बोल रहे थे। वो कहना चाहते थे कि सिखों के नरसंहार का आदेश उस वक़्त प्रधानमंत्री रहे राजीव गांधी ने दिया था, लेकिन उनके मुंह से राजीव की जगह राहुल निकल गया। यानी राहुल गांधी ने सिखों के नरसंहार का आदेश दिया था। बादल के आसपास बैठे उनके साथियों को भी शुरुआत में गलती का आभास नहीं हुआ, क्योंकि उनके चेहरे पहले की माफिक गंभीर थे। कांग्रेसी खेमे की तरफ से किसी ने इस गलती पर बादल का ध्यान आकर्षित किया। कहा गया...‘राहुल नहीं राजीव गांधी’। इसके बाद तो सदन में हंसी गूंजने लगी। इसकी दो वजह रहीं, पहली बादल का भूलवश राहुल गांधी को प्रधानमंत्री बना देना और दूसरी कांग्रेस द्वारा जाने-अनजाने में खुद यह मान लेना कि सिखों के नरसंहार का आदेश राजीव गांधी ने ही दिया था।

सदन में बैठे अमित शाह भी बादल की इस भूल पर अपनी हंसी नहीं छिपा सके। वैसे इसमें सुखबीर सिंह बादल को भी पूरी तरह दोषी नहीं ठहरा सकते, क्योंकि चुनावी फीवर को उतरने में भी वक्त लगता है। लोकसभा चुनाव के परिणामों को इतना भी समय नहीं हुआ है कि उस दौर में सुनाई देने वाले नारों की गूंज दिलोदिमाग से पूरी तरह मिट जाए। कांग्रेसी चुनाव पूर्व राहुल को भावी प्रधानमंत्री कहते नहीं थकते थे, इसके अलावा पीएम के सवाल पर राहुल की मुस्कान भी टीवी पर छाई हुई थी। इस मेमोरी के जहन से गायब होने से पहले ही बादल 1984 में पहुंच गए और गलती कर बैठे।

केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर बादल ने ट्वीट के साथ यह विडियो अपने ट्विटर हैंडल पर शेयर किया है, जो काफी वायरल हो रहा है। इस विडियो को आप यहां देख सकते हैं-

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महिला पत्रकार का सवाल-ये राष्ट्र क्या चीज है?

महिला पत्रकार का ट्वीट सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद लोगों ने इसे हिंदू-मुस्लिम एंगल से जोड़ते हुए जवाब दिए हैं

समाचार4मीडिया ब्यूरो by समाचार4मीडिया ब्यूरो
Published - Thursday, 08 August, 2019
Last Modified:
Thursday, 08 August, 2019
Female Journalist

एक जमाने में एनडीटीवी इंडिया का चेहरा रह चुकीं और वर्तमान में ‘द वायर’ से जुड़ीं महिला पत्रकार आरफा खानम शेरवानी का एक ट्वीट सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है। बुधवार शाम को आरफा ने एक ट्वीट के जरिए राष्ट्र क्या होता है, इस सवाल को पूछा है।

आरफा ने अपने ट्वीट में कहा है, ‘आखिर ये राष्ट्र क्या चीज है? ये कहां दिखता है,कहां मिलता है? कोई शाख पर बैठी चिड़िया है या खेत में उगती मूली है? राष्ट्र एक जमीन का टुकड़ा है या उस जमीन पर रहने वाले लोग? आप राष्ट्र हैं, मैं भी राष्ट्र हूं, ये राष्ट्रहित क्या है,ये किसका हित है? हम सबका हित ही राष्ट्रहित है।

उनके इस सवाल को लोगों ने हिंदू-मुस्लिम एंगल से जोड़ते हुए जवाब दिए हैं। मुकेश गुर्जर ने कहा कि सिर्फ राष्ट्र नहीं मोहतरमा, मां है और मां का दर्जा बहुत ऊंचा होता है, इसलिए कहते हैं, ‘भारतमाता की जय’। मदरसे वालों को समझ नहीं आएगा।

वहीं, एक अन्य यूजर ने ट्वीट किया कि एक मुस्लिम कभी राष्ट्र की परिभाषा समझ ही नहीं सकता, क्योंकि इस्लाम खुद में एक निकाय है और हर मुसलमान पूरे विश्व में इस्लाम का राज स्थापित करने यानी खिलाफत राज का सपना लेकर जीता है और मरता है। इसलिए आप आराम से सो जाइए। राष्ट्र क्या है? यह आप को कुछ समझ में नहीं आएगा

राष्ट्र को लेकर आरफा खानम की ओर से किए गए ट्वीट और उन्हें मिले जवाब को आप यहां देख सकते हैं-

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कांग्रेस राज में 370 पर इस महिला पत्रकार के सुर मोदी राज में आकर कैसे बदल गए!

गुजरात दंगों पर उनकी किताब Gujarat Files: Anatomy of a Cover Up मोदी विरोध का प्रतीक बन चुकी है

Last Modified:
Tuesday, 06 August, 2019
Female Journalist

सोशल मीडिया किसी को नहीं बख्शता। आपने जो लिखा है, कहा है, वो लौट फिरकर आपको डराने आ जाता है। मोदी विरोध के लिए मशहूर एक महिला पत्रकार के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। कश्मीर में धारा 370 हटाने पर जब उन्होंने मोदी सरकार का पुरजोर विरोध किया  तो लोगों ने इसी मामले पर उनकी एक पुरानी ट्वीट निकालकर याद दिलाया कि वे कांग्रेस राज में क्या कहती थीं।

ये महिला पत्रकार हैं राणा अयूब। गुजरात दंगों पर उनकी किताब Gujarat Files: Anatomy of a Cover Up, मोदी विरोध का प्रतीक बन चुकी है। ऐसे में जब उन्होंने धारा 370 हटाने का विरोध किया तो लोगों को कुछ भी अजीब नहीं लगा कि ये तो स्वभाविक था। उन्होंने ट्वीट किया-

इसके बाद भी उन्होंने कई ट्वीट कश्मीर को लेकर किए। लेकिन ट्विटर पर तमाम मोदी फैन भी हैं, वो जुट गए राणा अयूब की टाइम लाइन को खंगालने में और ढूंढ ही लाए एक ट्वीट जो 2014 की है, लेकिन मोदी राज से पहले की। ये ट्वीट धारा 370 को लेकर राणा अयूब ने 10 अप्रैल 2014 को की थी।

दिलचस्प बात ये है कि इसमें उन्होंने कुछ अलग ही लाइन ली थी, राणा ने ट्वीट किया था, ‘Would be a great idea to revoke Artcile 370, can get big business houses to invest & make it the 2nd best development model in the Country’। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या मोदी और शाह ने उनके मन की बात पूरी कर दी, इसलिए वो नाराज हैं? अगर कांग्रेस यही करती तो वो शायद उसका समर्थन करती? कम से कम उनकी 2014 की ट्वीट से तो यही लगता है। जो भी हो मोदी फैंन्स को राणा अयूब का मजाक उड़ाने का एक मौका जरूर मिल गया है।

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योगेंद्र यादव के इस ट्वीट पर बोलीं मधु किश्वर, ‘काश तुम्हारा गला मैंने ही दबा दिया होता’

कश्मीर में धारा 370 समाप्त करने के केंद्र की मोदी सरकार के फैसले के बाद चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है

Last Modified:
Tuesday, 06 August, 2019
Yogendra-Madhu

कश्मीर में धारा 370 समाप्त करने के केंद्र की मोदी सरकार के फैसले के बाद चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। वर्तमान हालातों को लेकर नेताओं के अलग-अलग बयान आने शुरू हो गए हैं। वहीं, इस फैसले को लेकर मोदी सरकार कुछ लोगों के निशाने पर आ गई है। इनमें स्वराज इंडिया के संयोजक योगेंद्र यादव भी शामिल हैं।

योगेँद्र यादव ने अपने ट्विटर अकाउंट पर एक ट्वीट कर अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल का जिक्र किया है। उन्होंने कश्मीर नीति पर वाजपेयीजी के तीन सूत्रों का उल्लेख करते हुए कहा है कि इन तीनों को नजरअंदाज करने वाला आज का फैसला अंततः अलगाववादियों और पाक समर्थित आतंकवादियों के हाथ मजबूत करेगा। इसके साथ ही उन्होंने कहा है, ’इतिहास गवाह है कि गले लगाने की बजाय गला दबाने की नीति का खामियाजा आने वाली पीढ़ियां देती हैं।‘

योगेंद्र यादव के इस ट्वीट पर जानी-मानी लेखिका और सोशल एक्टिविस्ट मधु किश्‍वर ने भी एक ट्वीट कर योगेंद्र यादव को करारा जवाब दिया है। उन्होंने तो यहां तक कह दिया है, ‘काश, तुम्हारा गला मैंने ही दबा दिया होता, जब मैं तुम्हारी कलीग थी। उन्होंने योगेंद्र यादव को बिकाऊ इंसान कहते हुए काफी लानत-मलानत भी की है।’

मधु किश्वर द्वारा योगेंद्र यादव को दिए गए जवाब को आप यहां पढ़ सकते हैं।

 

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